Adult kahani छोटी सी भूल की बड़ी सज़ा
07-25-2018, 10:57 AM,
#11
Lightbulb  RE: Adult kahani छोटी सी भूल की बड़ी सज़ा
उसके बाद मेने रामा को तैयार होने के लिए कहा….जब उसने पूछा कि कहाँ जाना है तो, मेने उसे बताया कि तुम्हारे लिए नये कपड़े खरीदने है..जेठ जी मुझे 50000 रुपये देकर गये थे….मेरी बात सुन कर सोनिया भी ज़िद्द करने लगी साथ जाने के लिए……

फिर हम चारो ऑटो पकड़ कर मार्केट पहुच गये….वहाँ पर ढेर सारी शॉपिंग की, आज रामा और सोनिया के चेहरे पर ख़ुसी देखते ही बनती थी. मेने कई बार गौर क्या कि, अमित दोनो की बहुत मदद कर रहा था…..और वो इतने कम समय में ही दोनो से बहुत घुल मिल गया था…..कॉन सी ड्रेस अच्छी है…कॉन सा सूट रामा पर जचे गा….वागेहरा-2 यहा तक कि कपड़ो का भाव तोल भी अमित ने किया……..में उसे बार-2 देख रही थी…..और मन में यही सोच रही थी कि, काश मेरा भी अमित जैसा बेटा होता….

तो वो अपनी बहनो की इसी तरह मदद करता….सुख दुख में उनका साथ देता…हमने रामा की शॉपिंग के साथ-2 सोनिया के लिए भी कुछ ड्रेस खरीद ली. उसके बाद हम चारो ने बाहर होटेल में ही खाना खाया…..रात के 8 बज चुके थे……और और फिर हम घर वापिस आ गये…..

भले ही में रामा की शादी में कोई ताम झाम नही कर रही थी. पर फिर भी शादी के कुछ रीतिरिवाज करने के लिए अमित मदद को हर समय तैयार रहता. आख़िर वो दिन भी आ गया…..जिसका मुझे बेसबरी इंतजार था….जिसका हर माँ बाप को होता है, कि उनकी बेटी-2 शादी करके खुशी-2 अपनी ससुराल जाए….हम तैयार होकर सीधा मंदिर में पहुच गये….वहाँ पर मेरे जेठ जेठानी और उनके बच्चे और उनके जीजा और बेहन, और उनका बेटा जिससे रामा की शादी होनी थी….वो सब पहले से माजूद थे………और उनके साथ कुछ और लोग भी थे….

मंदिर के पीछे एक हाल था.बहुत ज़्यादा बड़ा तो नही….पर ठीक ठाक था. अमित ने हम सबसे वहाँ चलने के लिए कहा…..जैसे ही हम वहाँ पहुचे तो, मुझे यकीन ही नही हुआ….सामने मेरे बेटी का मंडप सज़ा हुआ था. एक तरफ टेबल पर खाने पीछे का समान था……..मेने अमित की तरफ हैरान होते देखा. तो उसने मुस्कुराते हुए सर हिला दिया…..रामा को और उसके होने वाले पति को मंडप में बैठा दिया गया……पंडित ने अपने मंतर पढ़ने शुरू कर दिए…. कुछ वेटर भी थे…जो सब को खाने वाली डिशस परोस रहे थे…..

में जब थोड़ा फ्री हुई तो, में अमित के पास गयी…..और अपनी नम आँखों से उससे पूछा………”:ये सब तुमने कब किया अमित” उस पर अमित ने मुस्करा कर कहा…

अमित: आंटी जी आप तो जानती ही हो…मेरा इस दुनिया में कोई नही है……और में ऐसा मोका कैसे छोड़ देता…अब मेरा कोई है तो नही जिसकी शादी में कोई मदद करता….सो बस दिल किया और मेने अपनी तरफ से ये छोटी से कॉसिश करदी.

मेने अमित के बारे में जैसे सोचा था, सब उसके उलट हो रहा था…..अब में उस पर और भरोसा करने लगी थी..उसने सब अरेंज्मेंट बहुत अच्छे से किया था……शादी हो चुकी थी……..बेटी को भरे दिल से विदा करने के बाद हम लोग घर वापिस आ गये…..

पर आज घर में कुछ कमी लग रही थी…रामा के घर में ना होने से पूरा घर सुना-2 लग रहा था. अमित अपने रूम में चला गया. हम वहाँ से खाना साथ लेकर आए थे…इसीलिए खाना बनाने की ज़रूरत नही थी..मेने खाना लगाया और प्लेट में खाना लेकर अमित के रूम की तरफ जाने लगी. पर अभी उसके रूम की तरफ बढ़ ही रही थी कि, में रुक गयी. और फिर से वापिस आकर सोनिया और रामा के रूम में चली गयी..जिसमे अब सिर्फ़ सोनिया को ही रहना था. मेने वहाँ खाने की प्लेट रखी, और फिर अमित के रूम की तरफ चली गयी.
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07-25-2018, 10:58 AM,
#12
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अमित के रूम का डोर खुला था, और वो बेड पर लेटा हुआ था. पर फिर भी मेने डोर पर नॉक किया, तो उसने लेटे-2 गर्दन घुमा कर देखा. इससे पहले कि वो कुछ बोलता….मेने उससे कहा.”अमित चलो चल कर खाना खा लो.” में उसका जवाब सुने बिना वापिस आ गयी…..कल तक जिसे मेने अपने घर में मजबूरी में रखा था. आज में उसको खुद अपनी बेटी के रूम में बुला रही थी…थोड़ी देर बाद अमित रूम में आ गया..सोनिया बेड पर बैठ कर खाना खा रही थी…..

में: आओ बेटा बैठो.

अमित हम दोनो के सामने आकर बैठ गया…….और अपनी प्लेट उठ कर खाना खाने लगा…..घर में सन्नाटा छाया हुआ था…जैसे इस घर में कोई रहता ही ना हो.खाना खाते-2 अचानक अमित उठा और टीवी ऑन कर दिया……टीवी पर कोई सीरियल चल रहा था……जिसे देखते ही, सोनिया उछल पढ़ी…

सोनिया: ये ये रहने दो बहुत अच्छा सीरियल है…….

अमित ने मुस्कुरा कर फिर से खाना शुरू कर दिया……..अब भले ही घर में कोई ना बोल रहा था. पर टीवी की आवाज़ से घर का मोहल बदल सा गया था. खाना खा कर अमित ने कुछ देर तक टीवी देखा और फिर अपने रूम में चला गया. दिन भर की थकान के कारण जल्द ही हम सब नींद आ गयी….

अगले दिन जब सुबे में उठ कर फ्रेश हुई, तो मेने देखा अमित अभी भी अपने रूम में सो रहा था…..उसके रूम का डोर खुला हुआ था…..मेने एक बार उसकी तरफ देखा, और फिर उसके रूम में जाकर उसको आवाज़ लगाने लगी….वो जल्दी ही उठ कर बैठ गया….और मेरी तरफ देखने लगा….

में: अमित तुम्हें आज काम पर नही जाना क्या ?

अमित: नही आंटी आज मुझे वो वो कहीं और जाना है.

में: कहाँ जाना है….

अमित: वो वो आज मुझे नीता आंटी ने बुलाया है, उनके घर पर ?

अमित ने ये कह कर सर नीचे झुका लिया..उसकी ये बात सुनते ही, मेरे दिल को नजाने क्या हुआ, में गुस्से से बाहर आ गयी….इन चन्द ही दिनो में अमित हमारे घर का हिस्सा बन गया था…..और में उसे ऐसे अपनी लाइफ को बर्बाद करते हुए नही देखना चाहती थी……मेरी नाराज़गी शायद अमित भी समझ चुका था…

में बाहर बरामदे में बैठ कर अपना काम कर रही थी……थोड़ी देर बाद अमित अपने रूम से निकल कर बाथरूम में चला गया…..मेने सोनिया को अमित का नाश्ता लगाने को कहा……सोनिया किचन में चली गयी….थोड़ी देर बाद अमित नहा कर बाथरूम से बाहर आया, और अपने रूम में जाकर कपड़े पहनने लगा…मुझे नज़ाने क्यों अमित का ऐसे नीता से मिलने जाना अच्छा नही लग रहा था…..
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07-25-2018, 10:58 AM,
#13
Lightbulb  RE: Adult kahani छोटी सी भूल की बड़ी सज़ा
में उठ कर अमित के रूम में चली गयी…..अमित कपड़े पहन चुका था….”कब जाना है तुम्हे” मेने अमित से रूखे अंदाज़ में पूछा… और अमित ने मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखा और बोला, दोपहर को जाउन्गा…इतने में सोनिया रूम के बाहर अमित के लिए नाश्ता लेकर खड़ी हो गयी…मेने जाकर सोनिया से नाश्ते की प्लेट ली, और अमित के रूम में बेड पर रख दी……और फिर में बाहर आकर अपना काम करने लगी…….

अमित नाश्ते के बाद ऊपेर छत पर चला गया…..क्योंकि सर्दियों का मौसम था इसलिए बाहर धूप में बैठना सब को अच्छा लगता था…..सोनिया अपने रूम में कुछ काम कर रही थी….नज़ाने क्यों मेरे मन में बार-2 यही आ रहा था कि, मुझे उसे ऐसे करने से रोकना चाहिए……फिर मन में आता में कॉन होती हूँ, उसकी जिंदगी में दखल देने वाली…….

पर नज़ाने क्यों में अपने मन के हाथों मजबूर होकर, ऊपेर छत पर चली गयी…..वहाँ अमित चटाई बिछा कर नीचे लेटा हुआ था..में उसके पास जाकर बैठ गयी….

में: अमित एक बात कहूँ ?

अमित: मेरी तरफ देखते हुए) हां आंटी जी कहो ना क्या बात है ?

में: देखो अमित वैसे तो मुझे तुम्हारी निजी जिंदगी में दखल देने का हक़ मुझे नही है………पर फिर मुझे लगता है, कि तुम्हारे और जो नीता के बीच में है, वो सही नही है…..अभी तुम्हारी उम्र ही क्या है…..वो तुम्हारा इस्तेमाल कर रही है…..एक दिन तुम अपनी जिंदगी उसके चक्कर में खराब कर लोगे…….

मेने एक ही साँस में मेरे दिल में जो आया वो बोल दिया……मेरी बात सुन कर अमित खामोश हो गया. फिर थोड़ी देर बाद उसने चुप्पी तोड़ते हुए बोला….

अमित: आंटी जी में अब आपको कैसे बटाऊ…….आप तो जानती है कि में अनाथ हूँ….और मेरा इस दुनियाँ में कोई नही है…जो मुझे अच्छा बुरा समझा सकता. पर नीता आंटी से मेरा सिर्फ़ वही रिश्ता नही है…..उन्होने मेरा हर मुस्किल वक़्त में साथ दिया है…में आप को बता नही सकता कि, किस कदर उन्होने ने मेरे हर कदम पर मदद की है, आज अगर में खुद कमा कर खा रहा हूँ, तो ये सिर्फ़ उनकी बदोलत है……उन्होने ने ही मुझे मेरे पैरो पर खड़ा किया है….

में अमित के बात सुन कर चुप हो गयी…..पर फिर भी मेरा मन उसकी बातों को मानने के लिए तैयार नही था……

में: ठीक है पर मुझे नही लगता ये सब ठीक है……

और फिर में नीचे चली आई…….अमित दोपहर को घर से चला गया……रामा तो पहले सी ही अपनी ससुराल में थी, और अमित के जाने के बाद घर और सुना सा लग रहा था…..रात हुई, और फिर सुबह, फिर रात हुई….पर अमित अभी तक वापिस नही आया था.मुझे उसकी थोड़ी चिंता होने लगी थी…..पर मेरे पास ना तो नीता का कोई फोन नंबर था, और ना ही अमित का……

में रात को सो रही थी कि, बाहर डोर बेल बजी……में आँखें मलते हुए बेड से उठी, और दीवार पर लगी घड़ी की तरफ देखा…रात के 12 बज रहे थे…में अपने रूम से बाहर आई, और गेट के पास जाकर पूछा कि कॉन है….तभी बाहर से अमित के लड़खड़ाती हुई आवाज़ आई…..

अमित: में हूँ में हम अमित आंटी जी….
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07-25-2018, 10:58 AM,
#14
Lightbulb  RE: Adult kahani छोटी सी भूल की बड़ी सज़ा
मेने गेट खोला तो देखा, अमित सर झुकाए खड़ा था…..बाहर कोहरा छाया हुआ था, और ठंड बहुत ज़्यादा थी….

में: अमित तुम इस वक़्त टाइम तो देखो……..

अमित बिना कुछ बोले और मेरी तरफ देखे बिना अंदर चला गया…..जब वो मेरे पास से गुज़रा तो मुझे एक अजीब सी स्मेल आई……मैं गेट लॉक कर वापिस मूडी तो देखा, अमित अपने रूम में जा चुका था…..गेट बंद करने के बाद में वापिस आई, और रूम के बाहर से ही अमित को देखा, अमित बेड पर बैठा हुआ था…उसने अपने सर को नीचे झुका रखा था, और मूह में कुछ बुदबुदाये जा रहा था…..मुझे लगा कि कुछ तो ग़लत हुआ है…..

में अमित के रूम में चली गयी…..जैसे ही में अमित के पास पहुचि, तो मुझे फिर से अजीब सी स्मेल आई……और फिर मुझे समझते देर ना लगी कि, अमित ने ड्रिंक कर रखी थी……”क्या हुआ अमित. कुछ हुआ है क्या”

अमित: (नीचे फर्श की ओर देखते हुए) आंटी जी में बहुत अपसेट हूँ, और रात बहुत हो चुकी है, सुबह बात करते है…….

में: हां ठीक है खाना तो खाया है ना…..

अमित ने हां में सर हिला दिया…मेने भी उससे ज़्यादा सवाल पूछना ठीक नही समझा. और अपने रूम में आ गयी….में बेड पर लेटी सोचने लगी कि, ये अमित को क्या हो गया…कही कुछ ग़लत तो नही हुआ उसके साथ. ड्रिंक भी करके आया है. बस यही सब सवाल मेरे जॅहन में था.

रोशन दान से अभी लाइट अंदर आ रही थी.जो अमित के रूम की थी….नज़ाने वो कब तक जागता रहा…पर में अपने रूम में लेटी रही…नज़ाने कैसे-2 ख़याल मेरे दिमाग़ में आ रहे थे…कहीं नीता के ससुराल वालो या उसके पति को उन दोनो के रिश्ते के बारे में तो नही पता चल गया…..में यही सब सोचते-2 सो गयी…….अगली सुबह जब उठी, तो देखा सोनिया मुझसे पहले ही उठ कर घर के सॉफ सफाई कर चुकी थी…….और नाश्ता बना रही थी…….में किचन में गयी और बोली” क्या बात है आज सुबह सुबह ही घर के सफाई कर ली, मुझे उठाया भी नही…….”

सोनिया: ओह्ह माँ तुम भी ना कुछ याद नही रहता…….आज रामा दीदी और जीजा जी आने वाले है…..

में: ओह्ह हां में तो भूल ही गयी…..जल्दी से नाश्ता तैयार करो…में बाज़ार से कुछ खाने पीने का समान ले आती हूँ…..

में फिर से अपने रूम में गयी, और पैसे लेकर बाज़ार के तरफ जाने लगी, तो मेने देखा अमित का रूम खुला था……पर अमित अंदर नही था……..में थोड़ा जल्दी में थी, इसीलिए सीधा बाज़ार चली गयी…..बाज़ार से कोल्ड्रींक्स और कुछ और खाने का समान लेकर में घर आ गयी….अंदर आते वक़्त भी मेने अमित के रूम में झाँका तो वो वहाँ नही था…..में किचन में गयी..और साथ लाया समान सेल्फ़ पर रख कर सोनिया से पूछा…..

में: सोनिया अमित कहाँ है…..तुमने देखा है उसे……..

सोनिया: हां ऊपेर है छत पर…

में: अच्छा रामा और तुम्हारे जीजा जी कब आने वाले है……

सोनिया: वो तो दोपहर तक आएँगे क्यों क्या हुआ.

में: कुछ नही….अच्छा अमित को चाइ दी……..

सोनिया: हां दी थी……वो कप लेकर ऊपेर ही चला गया था…….

में: अच्छा ठीक है में कप लेकर आती हूँ….

उसके बाद में ऊपेर आ गयी……
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07-25-2018, 10:58 AM,
#15
Lightbulb  RE: Adult kahani छोटी सी भूल की बड़ी सज़ा
उसके बाद में ऊपेर आ गयी……मेने देखा अमित चारपाई पर बैठा हुआ था…. वो किसी बात को लेकर बहुत परेशान था…….मेरे कदमो की आहट सुन कर एक बार उसने मेरी तरफ देखा और फिर सर झुका लिया……में उसके पास जाकर बैठ गयी.

में: क्या हुआ बहुत उदास लग रहे हो ?

अमित: कुछ नही ऐसे ही……

में: अमित तुम कल रात को दारू पीकर आए थे ना ?

अमित: (थोड़ा सा चोन्कते हुए) हूँ हां वो सॉरी आंटी….

में: क्या कुछ तो बात है . जो तुम इतने परेशान हो ?

अमित: नही ऐसी कोई बात नही……

में: देखो अमित भले ही तुम मुझे कुछ ना बताओ….पर तुम मेरे बेटे जैसे हो उसकी उमेर के ही हो बताओ ना क्या हुआ…..

मेरे इस तरह सवाल करने पर अमित ने मेरी तरफ देखा, उसकी आँखें नम हो चुकी थी……..में उसकी आँखों में आँसू की नमी अच्छी से देख पा रही थी…फिर वो एक दम से रोने लगा….

मेने उसे कंधे से पकड़ कर दिलासा देना शुरू कर दिया” क्या हुआ ऐसे क्यों रो रहे बच्चो की तरह…”

अमित: आंटी अब में उस औरत के पास कभी नही जाउन्गा, (अमित ने रोते हुए कहा)

में: क्यों क्या हुआ कुछ कहा उसने……(इस दौरान कब उसका सर मेरी छाती पर आ गया मुझे पता ही नही चला…….में उसे चुप करते हुए उसके सर पर हाथ फेर रही थी…..मुझे इसका अहसास तब हुआ जब उसकी आँखों से आँसू निकल कर मेरी चुचियों के दरमियाँ कमीज़ के गले से नीचे गये…. मेरा पूरा बदन काँप गया…..पर चाह कर भी उसे अपने से दूर ना कर पाई.)

अमित: (चुप होकर सीधे बैठते हुए) कल जब में उसके पास गया था, तब वो मुझसे कहने लगी कि, में उसके घर ही आ जाउ……जब मेने पूछा कि तुम घर वालो को क्या कहोगी तो उसने कहा कि, कहूँगी तुम्हे घर के कामो के लिए नौकर रखा है….जब मेने उसे इस बात के लिए मना किया और कहा कि, में अब अपने पैरों पर खड़ा हो गया हूँ 2 साल बाद 18 का होने के बाद मुझे पापा की सरकारी नौकरी भी मिल जाएगी….में ये नौकरा वाला काम नही करना…….तो वो मुझ पर बरस पड़ी..बहुत झगड़ा किया……और मुझे थप्पड़ भी मार दिया.

में: अच्छा अब रोना बंद करो…..मेने कहा था ना कि वो तुम्हारी जिंदगी खराब कर देगी……..अच्छा किया जो उसे जवाब दे दिया…..अच्छा अब रोते नही तुम तो इतने बहादुर हो……..

मेरे काफ़ी समझाने के बाद उसने रोना बंद कर दिया……और फिर वो मेरे साथ नीचे आ गया……..हम तीनो ने साथ मिल कर नाश्ता किया..और फिर रामा और उसके पति की मेहमाननवाज़ी की तैयारी करने लगी……

दोपहर तक हम सब तैयार कर चुके थे……अमित ने रात को ड्यूटी पर भी जाना था…इसीलिए वो खाना खा कर अपने रूम में जाकर सो गया…….दोपहर को रामा और उसका पति विशाल दोनो घर पर आ गये……मेने बेटी को गले से लगा लिया….बेटी को देखते ही मेरी आँखें नम हो गयी…..

चाइ नाश्ते के बाद रामा ने मुझसे पूछा…..माँ अमित भैया कहाँ पर है….

में: अपने रूम में सो रहा है, उसकी रात की ड्यूटी है…..

उसके बाद मेने और सोनिया ने रामा से ढेर सारी बातें की, उसके ससुराल के बारे में पूछा….उसके चेहरे की ख़ुसी ही बता रही थी कि, वो कितनी खुस है. उसने मुझे बताया कि उनका घर बहुत बड़ा है..घर में उनके अलावा उसके सास ससुर ही है, और काम करने के लिए नौकरानी भी रखी हुई है…….

अपनी बेटी की बातें सुन कर मेरा दिल खुशियों से भर गया….मेने कभो सपने में भी नही सोचा था कि, मेरी बेटी की शादी इतने बड़े घर में होगी. और वो इतनी खुस रहेगी……..रात को अमित खाना खा कर काम के लिए चला गया….अब रामा घर पर थी तो, सोनिया के बारें ख़तम होने का नाम ही नही ले रही थी.. वो तो ऐसे बातें कर रही थी……जैसे अपनी बेहन से बरसो बाद मिली हो…
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07-25-2018, 10:58 AM,
#16
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विशाल भी दिल का बहुत अच्छा था…….सोनिया के हर मज़ाक और बात का मुस्करा कर जवाब देता….हम रात के 1 बजे तक यूँ ही बातें करते रहे……उसके बाद जब तक नींद ने अपना पूरा असर नही दिखाई तब तक बैठे रहे….लेटते ही नींद आ गयी…..कब सुबह हुई पता ही नही चला…..सुबह नाश्ते के वक़्त अमित भी आ गया…..फिर मेने उसे भी अपने साथ नाश्ते के लिए कहा…….थोड़ी झिझक के साथ वो भी मान गया…….

नाश्ते के बाद विशाल ने कहा “मम्मी अब हमें चलना चाहये”

मेने कहा एक दो दिन रुक जाते तो” 

विशाल: नही मम्मी जी काम बहुत है. ……ऊपेर से पापा अकेले है काम संभाल नही पाएँगे…….अगली बार लंबी छुट्टी लेकर आएँगे……पर पहले आप को और सोनिया को हमारे घर आना होगा”

थोड़ी देर और हँसी मज़ाल चलता रहा…….फिर रामा और विशाल अपने घर के लिए चले गये……..

दिन इससे तरह कट रहे थे……सब कुछ नॉर्मल चल रहा था…..अब में अमित पर पूरा यकीन करने लगी थी……और उसने भी कभी मुझे शिकायत मोका नही दिया था………जब उसकी नाइट ड्यूटी होती, तो में कभी बाज़ार कुछ खरीदने के लिए जाती तो सोनिया और अमित दोनो घर पर अकेले होते….पर अक्सर अमित सो रहा होता क्योंकि रात भर जाग कर काम करता था……… मेरे विश्वास भी उस पर बढ़ता जा रहा था…..हर दुख सुख में उसने मेरी बहुत मदद की थी. वो मुझे बहुत ही नेक दिल बच्चा लगता था. वो तो उसे नीता ने अपने चुंगल में फँसा लिया……….नही तो वो ऐसी हरकत भी ना करता…

एक दिन में किसी काम से बाज़ार गये हुई थी, लौटने में बहुत देर हो चुकी थी….जब मेने घर के बाहर पहुँच कर डोरबेल बजाई तो, काफ़ी देर तक गेट नही खुला……..मेने फिर से डोर बेल बजाई पर गेट नही खुला…..जब में तीसरी बार डोर बेल बजाने वाली थी…….तब जाकर गेट खुला……..गेट अमित ने खोला था….

वो मेरे से नज़रे नही मिला रहा था…..गेट खोलने के बाद वो अपने रूम में चला गया……मेने गेट बंद किया, और अपने रूम की तरफ जाने लगी…..जब में उसके रूम के सामने से गुज़री तो, उसके रूम का डोर बंद था…..मेने सोनिया के रूम में देखा तो, सोनिया सो रही थी………मुझे कुछ अजीब सा लगा…..पर मेने ज़्यादा ध्यान नही दिया…… 

मेने अपने रूम में आ गयी……और बेड पर लेट गयी…..लेटते ही थके होने के कारण मुझे नींद आ गयी….शाम को जब उठी, तो चाइ बना कर किचन से सोनिया और अमित को आवाज़ दी……में चाइ लेकर बरामदे में आ गयी….सोनिया तो उठ कर बाहर आ गयी……..पर अमित शायद अभी तक सो रहा था…….ये सोच कर में उसके रूम के तरफ गयी……….पर अमित रूम में नही था…में जैसे ही पलट कर वापिस जाने लगी तो, मेरा ध्यान बेड के नीचे पड़े ब्लॅक कलर के कपड़े पर गया…..वो क्या चीज़ थी…..जैसे ही मुझे इसका अहसास हुआ……..

मेरे हाथ पैर काँपने लगे……”नही ये नही हो सकता…ये मेरी आँखों का धोका भी हो सकता है” पर फिर भी मन नही माना…..और मेरे काँपते हुए पैर उस बेड की तरफ बढ़ने लगी…..बेड के पास जाकर में नीचे झुकी और उस कपड़े को अपने हाथों में उठा लाया…..मेरे दिल के धड़कने मानो जैसे बंद हो गयी हो…..मुझे यकीन नही हो रहा था…..वो एक ब्लॅक कलर की पैंटी थी..

जिसे पहचानने में मुझे एक पल ना लगा……”ये ये तो सोनिया की पैंटी है” मेरी तो जैसे साँसे ही थम गयी हो….सब कुछ मानो थम सा गया हो…ये ये यहाँ पर कैसे……दोपहर को भी अमित ने बहुत देर बाद डोर खोला था….कही अमित और सोनिया कुछ नही नही ये नही हो सकता…….अमित मेरे साथ ऐसा नही कर सकता…मेने उसे अपने बेटे जैसा माना है……
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07-25-2018, 10:59 AM,
#17
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में बहुत परेशान हो गयी थी…..मुझे समझ में नही आ रहा था कि, में क्या करूँ….लाखो सवाल मेरे जहन में घूम रहे थी….तभी बाहर से सोनिया की आवाज़ आई”माँ कहाँ रह गयी” में एक दम से हड़बड़ा गयी…..और जल्दी से पैंटी को अपनी सलवार के जबरन में फँसा कर बाहर आई और सीधा अपने रूम में चली गयी, और उसे वहाँ पर रख दिया….और बाहर आ गयी….बाहर आकर में नीचे बैठ गयी…..मुझे ऐसा लग रहा था, जैसे मेरी दुनिया ही लुट गयी हो… तभी अमित बाथरूम से बाहर आया, और पास बैठ कर चाइ पीने लगा……

मुझे परेशान देखार कर अमित ने मुझ से पूछा कि क्या हुआ आप इतनी पेरेशान क्यों लग रही हो……….उस पर मेने कहा नही कोई बात नही है…….पर मेरे मन में हज़ारो सवाल चल रहे थे…….कि आख़िर हो क्या रहा है…….मुझे पता करना ही होगा….रात को अमित खाना खा कर ड्यूटी पर चला गया……

अब मेरे दिमाग़ ने भी काम करना बंद कर दिया था….कहीं मेरी बेटी ग़लत रास्ते पर तो नही चल रही…….मेने मन में ठान लिया था कि, अब चाहे जो भी हो जाए…..में सोनिया से बात करके रहूंगी……खाना खाने के बाद मेने सारा काम ख़तम किया, और सोनिया के रूम में गयी…….

मुझे अपने रूम में देख कर सोनिया ने पूछा क्या हुआ माँ, तो मेने उसकी पैंटी दिखाते हुए गुस्से से पूछा ये क्या है…..

जैसे ही सोनिया ने वो अपनी पैंटी मेरे हाथ में देखी, उसके चेहरे का रंग उड़ गया….पर फिर अपनी घबराहट को छुपाते हुए बोली…..”ये ये तो मेरी पैंटी है माँ आप भी ना” 

में: (गुस्से से) वो तो मुझे भी दिख रहा है……पर ये अमित के रूम में कैसे पहुची ?

सोनिया: (मेरी ये बात सुन कर और घबरा गयी, और रुवासि से होकर बोली) वो वो जब मेने ऊपर छत से कपड़े उतारे थे,और अमित के कपड़े देने उसके रूम में गयी थी…शायद उसी के बीच में चली गयी होगी….

भले ही सोनिया कुछ और ही कह रही थी……पर उसकी घबराहट से सॉफ जाहिर हो रहा था कि वो मुझ से झूट बोल रही है….में अब गुस्से से पागल हुई जा रही थी ……मे तेज़ी से सोनिया की तरफ गयी……और उसके गाल पर जोरदार थप्पड़ मार दिया…..थप्पड़ पड़ते ही वो गाल पर हाथ रख कर सुबकने लगी……..

में: सच सच बता…..क्या चल रहा है तुम दोनो के बीच में…….

सोनिया: (अब ज़ोर-2 से रोने लगी थी) सच माँ कुछ नही है…..

में: (और गुस्से से चिल्लाते हुए) बताती है कि नही कि और लगाऊ……..

सोनिया: (सुबक्ते हुए) वो माँ में में अमित से प्यार करती हूँ……

उसकी ये बात सुन कर तो जैसे मेरे बदन में आग ही लग गयी हो…….मेने एक के बाद एक 4-5 थप्पड़ उसके गालो पर झाड़ दिए……..

में: तुम जानती भी हो प्यार किसी कहते है……..ये सब गंदी हरकते करके तुम इसे प्यार का नाम दे रही हो…..तूने हमारी इज़्ज़त मिट्टी में मिला दी….
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07-25-2018, 10:59 AM,
#18
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सोनिया सुबक्ते हुए मेरे पास आई, और मुझसे सॉरी कहने लगी…..”पर में उस पर और बरस पड़ी और बोली, तुझे तो बाद में देखूँगी…पहले कल उसकी खबर लेती हूँ”

में ये कह कर अपने रूम में आ गयी…….अगली सुबह डोर बेल बजी……मेरा गुस्सा पहले ही सातवें आसमान पर था….में गेट पर गयी, और गेट खोला. बाहर अमित खड़ा मेरी तरफ देख कर मुस्करा रहा था….जी तो चाह रहा था कि इस हरामजादे का यही मूह तोड़ दूं……पर में नही चाहती थी कि हंमरे घर की इज़्ज़त बाहर गली मुहल्ले में उछले…….

अमित सीधा अंदर चला गया,और अपने रूम में जाने लगा….मेने जल्दी से गेट लॉक किया, और उसकी तरफ पलटी….

में: (गुस्से से चिल्लाते हुए) वही रुक जा हरामजादे…….

मेरी आवाज़ सुन कर अमित मेरी तरफ पलटा, और हैरत से मेरी तरफ देखने लगा.

में: हां तुझे ही कह रही हूँ…..रंडी की औलाद…….

अमित: क्या हुआ आंटी आप मुझसे ऐसे क्यों बात कर रही है………

में गुस्से से उसकी तरफ बढ़ी, और उसको उसके बलों से पकड़ कर खेंचते हुए 4-5 झापड़ उसके मूह पर दे मारे……पर इस अचानक हमले से वो लड़खड़ा कर पीछे गिर गया…..पर गुस्सा अभी भी शांत नही हुआ था….में फिर उसकी तरफ लपकी…..पर उसने मुझे पीछे धक्का दे दिया…..

में: हरामज़ादे हमारी इज़्ज़त को उछालता है….में तुझे जिंदा नही छोड़ूँगी…….

में उसकी तरफ फिर लपकी, और उल्टे हाथ पैर चलाने लगी…….अमित भी बचने के लिए हाथ पैर चलाने लगा….सोनिया जो अब तक अंदर खड़ी तमाशा देख रही थी भागते हुए बाहर आ गयी.और मुझे पकड़ने लगी……..

सोनिया: माँ क्या कर रही हो….पूरा मोहल्ला इकट्ठा हो जाएगा……

में: सोनिया में कहती हूँ छोड़ मुझे…….में आज इसे जिंदा नही छोड़ूँगी…….

अमित: अबे क्या नौटंकी लगा रखी है……..मेने तेरी लड़की के साथ कोई ज़बरदस्ती नही की, अगर मेरी ग़लती है तो तेरी भी लड़की की उतनी ही ग़लती है…….

में: तू अभी के अभी निकल यहाँ से…..में तेरी शकल भी नही देखना चाहती. आज के बाद इधर नज़र उठाई तो तेरी आँखें निकाल दूँगी……

अमित: जा रहा हूँ जा रहा हूँ….मुझे भी कोई शॉंक नही है यहाँ रहने का….वो तो सोनिया से प्यार करता हूँ इसीलिए चुप हूँ…….

में: चुप कर हरामी गंदी हरकते करके उसे प्यार का नाम देता है..दफ़ा हो जा यहाँ से……

अमित अपने रूम का डोर पटके हुए अंदर गया, और अपने कपड़े और समान बॅग में डालने लगा…..में बाहर बरामदे में चारपाई पर बैठ गयी…. अमित अपना समान बॅग में डाल कर चला गया……कुछ दिन घर का महॉल ऐसे ही रहा. अमित के जाने के बाद सोनिया उदास रहने लगी थी…..मुझे डर था कि बच्पने में वो कोई ग़लत कदम ना उठा दे…..

धीरे-2 घर का माहॉल ठीक होने लगा……फिर हमारे दो रूम रेंट पर चढ़ गये…..दोनो ही रूम एक फॅमिली ने रेंट पर लिए थे….उनके बच्चे अभी बहुत छोटे थे……इसीलिए एक दिन मेने अपने जेठ और जेठानी के घर जाने का प्लान बनाया. में सुबह किरायेदार की बीवी को ये बोल कर चली गयी कि, में किसी काम से जा रही हूँ…..वो सोनिया का ध्यान रखे………
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07-25-2018, 10:59 AM,
#19
Lightbulb  RE: Adult kahani छोटी सी भूल की बड़ी सज़ा
जब में अपनी जेठानी के घर पहुचि, तो वो मुझे देख कर बहुत खुश हुई, संजना ने मुझे अंदर बुलाया और खातिरदारी की, उसके बाद में हमने थोड़ा इधर उधर की बातें की……

संजना: और दीदी बताए कैसे आना हुआ……

में: दरअसल में इसलिए आई थी कि, में चाहती हूँ कि तुम सोनिया के लिए भी कोई अच्छा सा रिस्ता ढूँढ दो…..उसकी शादी भी जल्द से जल्द करवानी है मुझे…..

संजना: क्या हुआ दीदी कोई बात है क्या ?

में: नही ऐसे ही, दरअसल मेरी तबीयत भी आज कल ठीक नही रहती……सोचती हूँ कि आँखें बंद करने से पहले सोनिया भी अपने घर चली जाए…..

संजना: क्या हुआ रेखा आग लगे दुश्मनो को……अभी तो आप जवान हो….फिर ऐसी बात क्यों कर रही है……

में: संजना प्लीज़ सोनिया के लिए अच्छा सा रिस्ता ढूँढ लो…….रामा को अपने सौसराल में खुश देखती हूँ तो दिल का बोझ हल्का हो जाता है…..

संजना: में समझती हूँ दीदी…..इनको आने दो आज रात को ही बात करती हूँ…

में: ठीक है और सूनाओ बच्चे कैसे है…….

संजना: ठीक है रेखा…….स्कूल गये है…….

दोफर को खाने के बाद में घर वापिस आ गयी…..जब में घर वापिस आई तो, सोनिया घर पर नही थी……जब मेने किरायेदार से पूछा तो बोली, वो उसकी सहेली आई थी, उसके साथ मार्केट गयी है…….मुझे पता नही क्यों चिंता होने लगी थी……उस वाक़ए को 3 महीने गुजर गये थे……..उसके बाद से ना तो मेने अमित की शकल देखी थी, और ना ही नाम सुना था……थोड़ी देर बाद सोनिया भी आ गयी……दिन गुज़रते गये…..अप्रैल का महीना था……शाम के 4 बजे की बात है…..उस घटना को लगभग 6 महीने हो चुके थे…..में अपने घर में बैठी हुई सिलाई का काम कर रही थी……10 दिन पहले जो फॅमिली हमारे घर रहने आई थी.वो भी कमरा खाली कर जा चुके थे……..

कई जगह सोनिया के रिश्ते की बात चली, पर बात नही बन पे……उस दिन में बैठी कपड़े सिल रही थी….सोनिया अपनी सहेली के घर में थी पड़ोस में तभी बाहर डोर बेल बजी…….मेने सोचा कि, सोनिया आ गयी है…मेने जैसे ही बाहर जाकर गेट खोला तो, मेरे पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक गयी…..सामने अमित खड़ा था….उसको देखते ही मेरी रगो में खून का दौरा तेज हो गया …

में: तू तू क्या लेने आया है इधर……

अमित कुछ नही बोला, और मेरी तरफ एक पॅकेट बढ़ा दिया……”क्या है ये” मेने गुस्से से उससे कहा…..”देखो लो…..तुम्हारे लिए बहुत ज़रूरी समान है इसमे” मेने उसके हाथ से वो पॅकेट नही लिया…..उसने एक बार मेरी तरफ देखा, फिर उसने वो पॅकेट गेट के अंदर नीचे फेंक दिया……फिर वो मुड़कर वापिस चला गया…..मुझे समझ में नही आया वो यहाँ क्या करने आया है….मेने गेट बंद किया, और पॅकेट को उठा कर खोला…….

जैसे ही मेने पॅकेट खोला, तो उसमे से एक डीवीडी डिस्क निकल कर बाहर आ गयी….और उसमे एक स्लिप भी थी जिस पर लिखा हुआ था ये डीवीडी देखने के बाद तुम्हे मेरी ज़रूरत पड़ेगी…..और उसके नीचे उसका मोबाइल नंबर लिखा हुआ था……

मेने गेट लॉक किया, और अंदर आ गयी…..नज़ाने क्यों मेरा दिल बहुत घबरा रहा था….सोनिया भी भी पड़ोस के घर में थी….मेने वो डीवीडी ली, और उसे डीवीडी प्लेयर में लगया….थोड़ी देर बाद उसमे कुछ शुरू हुआ…..कॅमरा कुछ घूम सा रहा था……फिर किसी का हाथ कॅमरा के सामने आया, और कॅमरा एक जगह सेट हो गया……ये किसी रूम का नज़ारा था……

पर मुझे समझ में नही आ रहा था कि कहाँ का सीन था. थोड़ी देर बाद अमित उसमे दिखाई दिया…वो बेड पर बैठा हुआ था……और वो किसी से बात कर रहा था. जो शायद कॅमरा के दूसरी तरफ था…..फिर वो सॅख्स सामने आया………जिसे देखते ही मेरी रूह तक काँप गयी…..वो सोनिया थी…..सोनिया अमित के पास आकर बेड पर बैठ गयी…..में बड़ी हैरानी से ये सब देख रही थी….क्योंकि जिस रूम में वो क्लिप बनी थी वो हमारा नही था…….

फिर अमित ने सोनिया को पकड़ कर अपनी तरफ खेंचा, और उसके होंटो पर होन्ट लगा दिए…..ये देखते ही मेरे पैरो की ज़मीन खिसक गयी…….सोनिया कब उससे मिलने गयी……..मुझे याद भी नही था कि, कब वो इतनी देर तक घर से बाहर रही…मेरा दिल जोरों से धड़क रहा था……सोनिया भी अपने बाहें अमित के गले में डाले हुए, उसका पूरा साथ दे रही थी……
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07-25-2018, 10:59 AM,
#20
Lightbulb  RE: Adult kahani छोटी सी भूल की बड़ी सज़ा
मेरे आँखें टीवी पर इस कदर गढ़ गई थी कि, में अमित की हर हरक़त को देखने की कॉसिश कर रही थी………और मेरा दिल बैठा जा रहा था…..अमित ने अपने हाथों को उसकी कमर से ऊपेर लेजाते हुए, सोनिया की चुचियों पर ले गया. जिसके कारण सोनिया उससे और चिपक गयी……..वो सोनिया के होंटो को चूस्ते हुए उसकी चुचियों को दबा रहा था…….और बार -2 उसको अपनी तरफ खेंच रहा था….

फिर उसने सोनिया की कमीज़ को दोनो तरफ से पकड़ कर ऊपेर उठाना शुरू कर दिया…..और मुझे ये देख कर बहुत हैरानी हुई, ये सब करते हुए, सोनिया भी उसका पूरा साथ दे रही थी….अगले ही पल उसने सोनिया की कमीज़ को उसके बदन से अलग कर नीचे फेंक दिया……..सोनिया की कमीज़ को नीचे फर्श पर देख कर मुझे ऐसा लगा कि हमारी इज़्ज़त नीचे फर्श पर पड़ी धूल चाट रही है….

फिर उसने उसकी चुचियों को ब्रा के ऊपेर से पकड़ कर मसलना शुरू क्या..सोनिया उसकी बाहों में छटपटाने लगी……..फिर अमित ने एक हाथ नीचे लेजाते हुए, उसकी सलवार का नाडा खोल दिया……सोनिया बेशर्मो की तरह उसकी गोद में बैठी हुई थी…..जब अमित ने उसकी सलवार को नीचे सरकाना शुरू किया…उसने बड़ी बेशर्मी से अपनी गान्ड को ऊपेर उठा लिया……..और अमित ने खेंचते हुए उसकी सलवार उसके पैरों से निकाल कर नीचे फेंक दी……

कॅमरा का फोकस सीधा उन पर था……मेरी अपनी बेटी उस हरामी की गोद में अधनंगी बैठी हुई थी…फिर अमित ने पीछे से उसकी टाँगों को घुटनो से मोड़ कर फेला दिया……..और एक हाथ आगे लेजा कर उसकी पैंटी को एक साइड में कर दिया…..मेरी तो आँखें फटी की फटी रह गयी….पैंटी को साइड करके, उसने सोनिया की चूत की फांकों को अपने हाथ की उंगलियों से खोला…उसका गुलाबी छेद में सॉफ-2 देख पा रही थी……..तभी टीवी पर ब्लॅक स्क्रीन आ गयी….

डीवीडी ख़तम हो चुकी थी……मैं सच में बहुत घबरा गयी थी…मुझे समझ में नही आ रहा था कि में क्या करूँ…….तभी फोन की रिंग बजी……मेने जल्दी से प्लेयर में से डीवीडी निकली, और अपने साथ लेकर अपने रूम में आ गयी….

मेने काँपते हुए हाथों से फोन उठाया, और बड़ी ही मुस्किल से हेलो कहा..उधर से अमित की आवाज़ थी…..

अमित: क्यों आंटी जी कैसे लगी फिल्म……

में: अपनी बकवास बंद कर, अगर तू मेरे सामने होता ना…तेरा मूह तोड़ देती में…..

अमित:ओह इतना गुस्सा इतना गुस्सा ठीक नही है आपकी सेहत के लिए…..ये तो सिर्फ़ टेलर था…..अभी तो पूरी फिल्म बाकी है……तो बोलो कब आ रही हो ?

में: क्या ?

अमित: पूरी फिल्म देखने जो मेरे पास है …….

में: हरामज़ादे में तुम्हारी रिपोर्ट पोलीस में कर्दुन्गि, 

अमित: ना ना ना भूल कर भी ऐसी ग़लती मत करना…..नही तो मुझ से बुरा कोई ना होगा……..पूरे बाज़ार में तुम्हारी बेटी की सेक्स की मूवी बना कर बेच दूँगा….और पता है नाम क्या रखूँगा…..सोनिया चुदि अपने यार के लंड से…हा हा हा” 

उसकी वो कमीनी हँसी ने मुझे अंदर तक झींझोड कर रख दिया……”में तेरी बातों में नही आने वाली कमीने जब पोलीस के हटते चढ़े गा ना तब पता चलेगा. ऐसी जगह लेजा कर मारूँगी कि तुझे पानी पूछने वाला कोई ना होगा.” में गुस्से में जो मन में आ रहा था बोले जा रही थी..

अमित: ओह्ह अच्छा रस्सी जल गयी पर बल नही गया….देखते है कि तुम क्या कर सकती हो…..मेरे तो आगे पीछे कोई रोने वाला भी नही…..में तो मर जाउन्गा. पर तुझे और तेरी बेटी को कहीं का नही छोड़ूँगा…….अब तू देख में क्या करता हूँ

ये कह कर उसने फोन रख दिया…….में वही बैठ कर फुट फुट कर रोने लगी…और उस मनहूस घड़ी को याद कर कोसने लगी…..जब मेने उसे अपने यहाँ रहने के लिए रूम दिया था……में काफ़ी देर तक वही बैठी रोती रही….और पता नही कब मेरी आँख लग गयी…..में तब उठी जब सोनिया ने बाहर आकर डोर बेल बजाई…..मेने उठ कर बाहर गयी, और गेट खोला……मेरी आँखें रोने से लाल हो चुकी थी……

जिसका पता सोनिया को चल गया……..” क्या हुआ माँ आप रो रही थी” मेने अपने आप को संभालते हुए कहा…”नही बस वो रामा की याद आ रही थी…..में ये बात सोनिया को नही बताना चाहती थे…..में चुप चाप अपने रूम में आ गयी….मुझे यही डर सता रहा था कि, गुस्से में अमित कुछ उल्टा सीधा ना कर दे…..में तो किसी को मूह दिखाने के लायक नही रहूंगी……

रात को सोनिया ने खाना बनाया……..पर मेरा मन खाने को नही था..इसीलिए में तबीयत ठीक ना होने का बहाना बना कर अपने रूम में आ गयी… में दिल बुरी तरह घबरा रहा था…..मुझे कुछ समझ में नही आ रहा था कि, में इस मुसबीत से कैसे छुटकारा पाऊ….अब मेरे सामने मुझे कोई रास्ता नही आ रहा था….में काफ़ी देर तक बस यही सोचती रही…मेने घड़ी की तरफ देखा रात के 10 बज रहे थे…..अब मुझे इस मुसीबत से निपटना ही था…

में बेड से खड़ी हुई, और उस पॅकेट में जो स्लिप थी उसे निकाला, और अपने काँपते हुए हाथों से उस पर लिखा मोबाइल नंबर डायल किया….थोड़ी देर रिंग बजने के बाद उधर से अमित की आवाज़ आई……

अमित: हेलो क्या हुआ नींद नही आ रही क्या ? सच सच बताना मेरे ही बारे में सोच रही थी ना?

में: अपनी बकवास बंद करो. और बताओ कि तुम क्या चाहते हो….आख़िर हमने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है…..आख़िर तुम हमारे साथ ये सब क्यों कर रहे हो ?
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