Chudai Kahani मेरी कमसिन जवानी की आग - Printable Version

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Chudai Kahani मेरी कमसिन जवानी की आग - - 09-05-2019

लेखक:-वंध्या/सीड

दोस्तो मैं आपका अपना सीड फिर एक नई कहानी लेकर आया हु यह कहानी लेखिका वंध्याजी की कहानियों का संकलन है जो मैंने एक कहानी में पिरोकर आपके समक्ष प्रस्तुत किया है जो आपको जरूर पसंद आयेगा कहानी को मेरे द्वारा विस्तारित किया गया है जो आपको बहुत पसंद आयेगा
……आपका अपना ……सीड


मेरा नाम संध्या है, मैं सतना जिले के रामपुर के पास एक कस्बे की रहने वाली हूं, हम तीन बहनें और एक भाई है, मुझसे बड़ी दो बहनें हैं दोनों की शादी हो चुकी है. मैं सबसे छोटी हूं, दसवीं कक्षा की छात्रा हूं, सब कहते हैं मैं बिल्कुल हिरोइन अमृता राव जैसी दिखती हूं, मैं अपनी सच्ची बात आज लिखने की बड़ी मुश्किल से हिम्मत जुटा पाई हूं. इसमें लिखी एक एक शब्द एक एक बात सच है.
मैं बहुत स्लिम लड़की हूं, मेरे साइज में मेरी कमर 26″ मेरे ब्रेस्ट 32″ और हिप्स 36″ के हैं. पर मेरे पापा मुंबई में जहाज में काम करते हैं.हम गरीब घर से हैं, ज्यादा पैसा नहीं है मेरे मम्मी पापा के पास, मेरे पापा एक साल के लिए मुंबई चले जाते हैं.

मेरी बड़ी बहन मेरी दीदी के यहां से निमंत्रण आया कि वहां भागवत की कथा है, मुझे दीदी ने बुलवाया, मम्मी से दीदी बोली- संध्या को भेज दो सात आठ दिन के लिए, मेरे काम में हेल्प करायेगी. मम्मी भाई को बोली- जा इसे दीदी के पास पहुंचा दे!और मेरा भाई मुझे दीदी के यहां पहुंचा के चला आया.
दीदी के हसबैंड यानी मेरे जीजा जी चार भाई हैं और दीदी के घर वाले सबसे बड़े हैं भाईयों में… तो उनसे जो तीन छोटे भाई हैं मैं उनको भी जीजा कहती हूं. जो दीदी के हसबैंड हैं उनसे दूसरे नंबर के हैं उनका नाम सतीश है, वो अक्सर मुझसे मजाक करते और मुझे घूरते रहते थे, उनकी नियत मेरे प्रति अच्छी नहीं थी.
दीदी के यहां सब बोरवेल में नहाते थे और शौच के लिए बाहर जाना पड़ता था.एक दिन मैं नहा के आयी, व्हाइट कलर की मैक्सी पहन कर नहाई थी, अंदर ब्लैक कलर की ब्रा और पैंटी थी पानी में भीगने के कारण सब दिख रहा था.
मैं जैसे ही आंगन में नहा कर आई, सतीश जीजा सामने आ गये और उस समय अगल बगल कोई नहीं था तो मुझे बोले- संध्या जी, तुम्हारा सब कुछ दिख रहा है, मेरी नियत मत खराब करो नहीं तो अच्छा नहीं होगा. ऐसे दिखा देती हो तो फिर कंट्रोल नहीं होता है.मैं भी उनसे खूब मजाक कर लेती थी तो मैं बोली- जीजा जी मत देखा करो जब हिम्मत नहीं है तो!
और उन्हें चिढ़ाते हुए बोली- मर्द वो होता है जो बोलता नहीं, करके दिखा देता है. जो बादल गरजते हैं बरसते नहीं जीजा जी.तब वो बोले- संध्या, तुम मेरी साली लगती हो, मतलब आधी घरवाली हो, मेरा हक बनता है तुम पर… फिर भी तुमने मेरी मर्दानगी पर सवाल खड़े कर दिए, अब तो तुम्हें बताऊंगा कि मैं कैसा मर्द हूं.मैं बोली- क्या कर लोगे?जीजा पास आये और बोले- संध्या, मेरी सेक्सी साली पकड़ के लगता है अभी यहीं आंगन में तुम्हें चोद दूं, मेरा लन्ड तुम्हारी बुर में घुसेगा तो सारी गर्मी उतर जाएगी तुम्हारी संध्या… चीखने लगोगी इतना बड़ा मस्त लंड है मेरा, लड़कियां तरसती हैं मुझसे चुदवाने के लिए.
मैं बोली- कोई नहीं तरसता… अपने मुंह से अपनी तारीफ मत करो जीजा, मुझे भी नहीं जानते हो कि मैं कौन हूं? मुझे संध्या कहते हैं, ऐसा कोई मर्द नहीं जो मेरी चीख निकाल दे समझे सतीश जीजा, फ्री में सब कर लोगे क्या मुझसे, सड़क में पड़ा फ्री का माल समझ लिया क्या मुझे आपने जीजा? भला छूकर दिखाओ?
सतीश बोले- वाह संध्या, तुम शहर की हो और तुम्हें शहर का पानी लग गया, शहर की लड़कियां तो सही हैं पैसे के बिना या कुछ लिए नहीं देती.तब मैं बोली- जानते सब हो, जीजा समझदार हो, और समझदार के लिए इशारा काफी होता है.
तब सतीश जीजा बोले- अब साफ साफ संध्या अपना रेट बोलो और मुझे तुम्हें आज ही चोदना है.
मैं बोली- पागल हो गये क्या जीजा? मैं वैसी लड़की नहीं कि पैसे में बिक जाऊं, मैं अनमोल हूं कोई खरीद नहीं सकता, हां प्यार से कोई कुछ भी दे दे चलता है.तब जीजा बोले- चलो फिर सतना कल… जैसी ड्रेस चाहिए दिलवा दूंगा.मैं यह बात सुनकर खुश हो गई और बोली- मजाक तो नहीं कर रहे हो? सच नहीं हो तो मत बोलना.जीजा बोले- पक्का वादा, ड्रेस दिलवाऊंगा!
मैं बोली- कल मैं अपने घर जा रही हूं, आप कल की जगह परसों आओ, मैं मम्मी को बता दूंगी कि सतीश जीजा मुझे ड्रेस दिला रहे हैं. आप आकर कह देना कि मैं संध्या को ड्रेस दिलवाने ले जा रहा हूं फिर घर पहुंचा दूंगा.
सतीश जीजा बोले- अब आप के लिए कल का पूरा कार्यक्रम रद्द करना पड़ेगा, चलो ठीक है परसों तैयार रहना अपनी मनपसंद ड्रेस के लिए… मैं सुबह नौ से दस के बीच आ जाऊंगा.मैं सच में खुश हो गई कि परसों मुझे मेरे पसंद की ड्रेस मिलेगी.
मैं दूसरे दिन अपने घर मम्मी के पास पहुंच गयी और अब सुबह का इंतजार करने लगी, सवेरा हुआ, जल्दी सेतैयार हो गई, मम्मी को पहले ही बता चुकी थी कि सतीश जीजा मुझे सतना ड्रेस दिलाने ले जाने को बोले हैं.मम्मी ने पूछा- तूने तो नहीं बोला?मैं बोली- नहीं मम्मी, वो खुद ही दिला रहे हैं.मम्मी ने बोला- ठीक है, चली जाना, पर उन्हें ज्यादा परेशान मत करना!मैं बोली- ठीक है मम्मी!
मैं इंतजार कर रही थी कि तभी सतीश जीजा जी बाइक लेकर आये ठीक नौ बजे… मैं तैयार खड़ी थी, मैं आसमानी कलर की फ्राक वन पीस पहनी थी, पिंक कलर की लिपस्टिक लगाई थी, जीजा जी मुझे देखने लगे.मैं बोली- जल्दी चलो जीजा!मम्मी बोली- पानी चाय तो पी लेने दे.तब जीजा जी बोले- लौट के आके सब करेंगे आंटी, अभी जाने दो!मम्मी बोली- ठीक है, जाओ! और ये संध्या अगर ज्यादा परेशान करे तो बताना या आप ही डांट देना.
जीजा बोले- अरे इतनी अच्छी साली है, मैं थोड़ी न डांटूंगा.और हम दोनों चल दिए. मैं बाइक पर दोनों पैर एक तरफ करके बैठ गई तो जीजा बोले- टांगों को इधर उधर करके बैठो!तब मैं बोली- अभी यहां से चलो, फ्रांक पहनी हुई है!
जीजा चल दिए, थोड़ी देर में सतना पहुंचे तो जीजा बोले- अभी साढ़े नौ बजे हैं, इतनी सुबह दुकान नहीं खुलती, ग्यारह बजे तक दुकान खुलेगी. तब तक मेरा किराये का कमरा है कृष्ण नगर में वहीं दो घंटे थोड़ा रूकेंगे, नश्ता करेंगे फिर चल के तुमको बढ़िया ड्रेस दिलवाऊंगा.मैं बोली- ठीक है!
काफी हाउस से जीजा ने नाश्ता पैक कराया और कोल्डड्रिंक लिए और चल दिए, रूम पहुंच गए. जीजा ने कमरे का ताला खोला, सिर्फ एक ही कमरा था, उसमें चारपाई रखी थी, उसमें बिस्तर लगा हुआ था.जीजा जी बोले- आराम से बैठ जाओ संध्या बिस्तर में, यही गरीबखाना है जहां रहकर मैं ड्यूटी करता हूं.मैं बोली- अच्छा तो है जरूरत के हिसाब से अकेले रहने के लिए!और मैं बिस्तर में बैठ गई.
तभी जीजा ने अंदर से रूम को लॉक कर दिया.मैं बोली- जीजा, तुमने दरवाजा क्यों बंद कर दिया अंदर से?तो जीजा बोले- अपन अभी नाश्ता कर लें, वैसे भी मैं जब कमरे में आता हूं तो बंद ही कर लेता हूं.मैं कुछ नहीं बोली.
तभी जीजा ने एक प्लेट में इडली निकाली और गलास में कोल्ड ड्रिंक और सामने रखे, मैं बोली- मुझे खाने की इच्छा नहीं!तो जीजा अपने हाथ से लेकर मेरे मुंह में डालने लगे और बोले- मेरी खूबसूरत साली संध्या, तुम यह मेरे हाथ से खाओ!मैं खाने लगी.
तभी जीजा प्लेट रखकर मेरे को बोले- थोड़ा मुंह में होंठ के नीचे यहां पर कुछ लग गया है.मैं बोली- मैं पौंछ लूंगी!लेकिन जीजा ने अपने हाथों से मेरे होठों को अपनी उंगलियों से छुआ और बोला- कितने कोमल होंठ हैं तुम्हारे साली जी!मैं शरमा गई कुछ नहीं बोली.
तभी जीजा ने रुमाल निकाला तो मैंने सोचा कि कुछ पौंछ रहे हैं. कि तभी वो सीधे मेरे होठों को अपने होठों से चूमने लगे.मैं बोली- यह क्या कर रहे हैं जीजा? यह मुझे पसंद नहीं, प्लीज यह मत करिए, मुझे छूना नहीं मैं आप से कितनी छोटी हूं.तभी जीजा बोले- परसों अपनी बात हो गई थी, संध्या तुमसे क्या बात हुई थी? तब तुम बोली थी कि फ्री में कुछ नहीं होगा तब मैं बोला था कि कितना लोगी तो तुमने कहा था कि मैं पैसे नहीं लेती, तो मैं पूछा क्या पसंद है चलो मैं तुम्हें अच्छी सी ड्रेस दिला दूंगा और आज मैं अपना वादा पूरा करने तुम्हें ले आया, अब तुम अपना वादा पूरा करो संध्या!मैं बोली- नहीं जीजा, वह मजाक था, मैं तो ऐसे ही मजाक में सब कह रही थी.तो जीजा बोले- मजाक था तो तुम सतना यहां ड्रेस के लिए क्यों चली आई? यह उसी मजाक में ही तो यह बात हुई थी.
तब मैं कोई जवाब नहीं दे पाई. लेकिन असल में तो मैं जानती थी कि मैं अपनी मर्जी से यहा जीजा के साथ अपनी बुर चुदवाने ही आई हूँ. मैंने सोचा कि अब मैं इस जीजा को पूरा तड़पाऊँगी अपनी बुर चुदाई करवाने से पहले! खूब मजा लूंगी, फिर बुर चुदाई की मजा लूंगी. खूब नखरे करूंगी, रोऊंगी, गिदागिदाऊँगी, पूरा विरोध करूंगी फिर आखिर में मैं अपनी बुर चोदने दूंगी.
जीजा मेरे बगल से बैठ गए चारपाई में और मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया, मैं छुड़ाने लगी, तो जीजा बोले- मैं बोला था ना कि चैलेंज मत करो संध्या डार्लिंग, तुम मेरी साली हो और साली आधी घरवाली होती है, मान जाओ तुम इतनी सेक्सी तो हो फिर क्यूं नाटक करती हो.मैं उनके हाथ जोड़ने लगी, बोली- छोड़ दो मुझे, जाने दो, मुझे आपसे ड्रेस नहीं चाहिए जीजा, प्लीज मुझे जाने दो, नहीं तो मैं चिल्लाऊंगी, सबको बता दूंगी, दीदी को भी बता दूंगी, मुझे जाने दो.
जीजा बोले- नाटक मत करो संध्या, तुम अब छोटी नहीं हो, मैंने तुम्हें देखा है तुम्हारे हुस्न और जिस्म को अच्छी तरह से सब देखा है, मैं चोरी से तुम्हारे पीछे पीछे ही लगा रहता था, जब तुम लैट्रिन के लिए लोटा लेकर बाहर जाती थी, मैं पीछे-पीछे आता था और झाड़ी के पीछे छुपकर लेट्रिन करते हुए तुम्हारी नंगी गांड, बहुत टाइट थी और बहुत बड़ी है अच्छे से देखा, छुप कर लेट्रिन कर जब तुम कपड़े पूरे उतार कर नंगी हो कर फिर सही वाले कपड़े पहनती थी तब जिस पीछे वाले कमरे में बदलती थी वहीं तख्त के नीचे मैं दौड़कर पहले से घुस जाता था और जब तुम कपड़े उतारने लगती, तब मैं तुम्हें नंगी देखकर वहीं मुट्ठ मारता रहा हूं, कई बार तो लगा था कि तुमसे लिपट जाऊं और तुम्हें जमके चोद दूं. तुमने दो तीन बार नंगी होकर अपनी बुर फैलाकर उसे अपनी उंगली से साफ कर रही थी, क्या मस्त बुर थी तुम्हारी संध्या, उस समय तो कैसे सम्हाला अपने आप को मैंने… मैं ही जानता हूं. जब तुम नहाने जाती थी तब मैं रोज देखता था कि कैसे अपने जिस्म को रगड़ रगड़ कर साफ किया करती रही हो, भीगे होंठ, भीगे गाल, भीगा सीना उठा हुआ, भीगा चिकना पेट और उसमें कयामत सी दिखने वाली नाभि तुम्हारी संध्या, पानी में तुम्हारा पूरा बदन वाह माई गॉड, पागलपन था संध्या! तुम क्या जानो संध्या कि तुम कितनी मस्त माल हो गई हो, इसलिए झूठ बोलना बंद करो कि तुम कोई छोटी लड़की हो. आज तुम्हें मैं बहुत मजा दूंगा, तुम जन्नत में पहुंच जाओगी.
मैं बोली- कितने गन्दे हो, छी मुझे लेट्रिन करते देखा… थू!


दोस्तो और एक कहानी चालू की है प्लीज बताये की यह भी इस फोरम पर किसी और नाम से है या नही तो आगे कहानी पोस्ट करता हु यह एक कहानी नही अलग अलग कहानियों का संकलन है जो मैंने एक सूत्र में पिरोया है पर मेरे किसी और मित्र ने भी यह प्रयास किया हो सकता है
तो मेरे लिये प्लीज् बताने की कृपा करें प्लीज् मुझे यह बताये की मैं आगे कहनिया पोस्ट करू या सिर्फ कहनिया पढनेके काम करु.... सीड

साली की चुदाई की कहानी जारी रहेगी.



RE: Chudai Kahani मेरी कमसिन जवानी की आग - - 09-05-2019

मैं बोली- कितने गन्दे हो, छी मुझे लेट्रिन करते देखा… थू!मैं उनके हाथ जोड़ने लगी, बोली- जीजा प्लीज मैं चिल्ला दूंगी!और मैं रोने का नाटक करने लगी, बोलने लगी- हाथ मत लगाओ मुझे जीजा, मुझे जाने दो. मैं ड्रेस नहीं लूंगी!और जैसे ही मैं चारपाई से उतरने लगी, जीजा ने मुझे पीछे से पकड़ लिया और मुझे बिस्तर में फिर से पटक दिया.
अब वे बोले- मजाक मत करो संध्या मेरी जान!और मेरे होठों के चुम्मा लेने लगे. मैं हाथ पैर दोनों झटक रही थी.
पर जीजा को कुछ समझ नहीं आया, उन्होंने तुरंत मेरी वन पीस फ्राक को ऊपर किये तो वह मेरे पेट तक आ गई, अब कमर के नीचे मैं नंगी हो गई सिर्फ पैंटी रह गई, मेरी नंगी जांघों और टांगें देखकर जीजा बोले- क्या मजाक कर रही हो संध्या… कितनी मस्त माल हो, तुम्हारी यह प्यारी मस्त पैंटी के ऊपर से फूली चूत सब बता रही है कि तुम्हारी चूत को अब लंड चाहिए.जीजा मेरी पैंटी के ऊपर जहां फूली हुई चूत थी, वहीं पे हाथ रखकर बोले- कितनी तो गर्म है तुम्हारी चूत… फिर भी चिल्ला रही हो.
मैंने जोर से धक्का मारा और जीजा के हाथ में दांत से चबा कर काटने लगी और उनसे खुद को छुड़ा लिया. बिस्तर से नीचे उठी, एक चाकू पड़ा था सब्जी वाला उसे ले लिया, और बोली- अगर अब अगर छोड़ोगे नहीं तो मैं मार दूंगी तुझे गन्दे जीजा, मुझे जाने दो, मुझे तेरे ड्रेस नहीं चाहिए.मैं पूरी नौटंकी कर रही थी और मजा ले रही थी.

मैं जैसे ही दरवाजा की खिटकिली अंदर से खोलने लगी, जीजा ने फिर से पकड़ लिया पीछे से और मेरे हाथ से चाकू छीनकर ऊपर रैक में फेंक दिया, और मुझे फिर से उठाकर बिस्तर में पटक दिया.जीजा बोले- संध्या मान जाओ प्लीज!और मेरे ऊपर चढ़ गए इस बार… मैं फिर से उनसे छुड़ाने लगी लेकिन इस बार जीजा मेरे बिल्कुल पेट के ऊपर दोनों टांगें इधर उधर करके ऐसे चढ़ गये कि मैं कुछ भी कर के नहीं उठ सकती थी न ही छुड़ा सकती थी.
अब जीजा एक हाथ से मेरी फ्रॉक को ऊपर करके मेरे सीने तक कर दिया, तो पैर से लेकर सीने तक पूरी नंगी हो गई बीच में सिर्फ पैंटी बची बदन में!जीजा एक दम ललचाई आंखों से मुझे देखकर बोले- संध्या, क्या मस्त चिकनी माल हो! मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा है कि मैं तुम्हारे ऊपर चढ़ा हूं, दुनिया की सबसे सेक्सी लड़की को चोदूंगा.यह कहते हुए जीजा ने मेरी पैंटी के अंदर हाथ डाल दिया.
वो मेरे ऊपर टांगें इधर उधर करके बैठे थे, इस वजह से मैं उनके हाथ अपने हाथ से पकड़ नहीं सकती थी.
और जीजा ने पैंटी के अंदर से हाथ ले जाकर मेरी चूत में हाथ रख दिया और बोले- बहुत गीली हो रही है तुम्हारी चूत संध्या… और तुम बोलती हो कि मैं अभी छोटी हूं. तुम बहुत झूठी हो संध्या! मुंह से मना कर रही हो पर तुम्हारी चूत कुछ और बोल रही है. तुम यहां बैठे बैठे गीली हो गई मतलब तुम्हारे मन में तन में अंदर चुदवाने का ख्याल चल रहा है.
यह बात जीजा ने बिल्कुल सच बोली, मेरे मन में अंदर से कुछ अकुलाहट सी और अलग फीलिंग हो रही थी, मैं अंदर ही अंदर सोच रही थी कि काश जीजा मुझे जबरदस्ती चोद दें, मैं मना भी करूं तो ना माने!पर मैं फिर भी जीजा से बोली- नहीं, ऐसा कुछ नहीं है, जीजा मुझे छोड़ दो!
तब जीजा बोले- नहीं सेक्सी संध्या, तुम बहुत चुदासी हो!और उन्होंने मेरी चूत में उंगली डाल कर उसका चिपचिपा चूत रस निकाल कर मुझे दिखाया और बोला- देखो, यह तुम्हारी चूत का रस है, यह लड़की जब चुदासी होती है तभी चिपचिपाहट वाला रस निकलता है.मैं अब क्या बोलूं मुझे समझ नहीं आया.
तभी मेरी छाती के ऊपर हुई फ्राक को गले तक कर दिया, उसी समय मैं हाथ जीजा के पकड़ने लगी पर तब तक वह मेरी ब्रा के ऊपर से मेरे दूध दबाने लगे और मेरे मुंह में अपने होठों को रगड़ने लगे. मैं चेहरा इधर-उधर झटक रही थी कि वह अपने होठों से मुझे चूम ना पायें, पर जीजा एकदम से पकड़ के मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए, उनके बहुत गर्म होंठ मेरे होंठों को चूमने लगे और उनकी गर्म सांसें मेरी नाक में समाने लगी.
और उधर नीचे अपने एक हाथ को मेरी पेंटी के नीचे फिर से घुसा कर मेरी चूत में जैसे उंगली डाली मुझसे रहा नहीं गया. मुझे बिल्कुल पता नहीं कैसे क्या होने लगा, मैं एक बार फिर से बोली- जीजा मुझे छोड़ दो, मैं कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं रहूंगी, प्लीज मुझे जाने दो मत करो कुछ भी!
पर जीजा कहां मानने वाले… वो अपनी उंगली को मेरी चूत में अंदर बाहर करने लगे, मुझे अब ना जाने कैसी अजीब सी सुरसुराहट और कम्पकपी पूरे बदन में होने लगी, जीजा की यह हरकत मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रही थी, वह अपनी उंगली जोर जोर से अंदर बाहर चूत में करने लगे मैं कांपने लगी.



RE: Chudai Kahani मेरी कमसिन जवानी की आग - - 09-05-2019

और तभी जीजा का एक हाथ जो खाली था, उससे बूब्स को दबा रहे थे, मेरे दोनों बूब्स ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगे, मैं अब कुछ बोल ही नहीं पा रही थी, मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था और मैं बिल्कुल मचलने लगी.जीजा बोले- क्या मस्त माल हो संध्या… तुम अभी तक कितने लन्ड ले चुकी हो?मैं बोली- यह क्या बोल रहे हो जीजा, आज तक मुझे किसी ने छुआ भी नहीं है, आप भी मत करो. मुझे बहुत डर लग रहा है, ना जाने मुझे क्या होने लगा है, मैं छोटी हूं, मुझे कुछ नहीं पता.
तभी जीजा जोर से मेरे होठों को चूमने लगे और बोले- संध्या, तुम बहुत बड़ी वाली हो, झूठ बहुत बोलती है. मैं अभी तुम्हारे चूत में उंगली कर रहा हूं वह शट-शट अंदर बाहर जा रही है, तुम चुप ही रहो भले ही ना बताओ!मैं थोड़ी सी अकड़ कर बोली- अपने मन से कुछ भी मत बोलो जीजा, आज तक मुझे किसी ने छुआ भी नहीं, करना तो दूर की बात है.हालांकि मैंने यह झूठ बोला, कमलेश सर पहले मर्द हैं जिसने मेरे बदन को छुआ और मेरे चूत को चाट चुके थे पर उन्होंने भी मुझे चोदा नहीं था.
तभी जीजा मेरे होठों को फिर से कस के चूम लिया अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था, जीजा मेरे मुंह को खुलवाने लगे और जैसे ही मैंने अपना मुंह खोला, मेरे जीभ को अपने होठों से पकड़कर चूसने लगे और चाटने लगे.मैं अब बिल्कुल मचलने सी लगी, जाने कैसे मेरे हाथ जीजा के पीठ में चले गए और मैं हांफने लगी, तभी जीजा बोले- संध्या तुम बहुत मस्त माल हो, तुम मेरी रखैल बनना.
मेरी हालत अब ये हो गई कि मैं अब कुछ नहीं करने की स्थिति में पहुंच गई थी.
तभी जीजा बिस्तर से उठे और अपने कपड़े उतारने लगे, मैं उठकर बैठने लगी तो जीजा बोले- संध्या, अब नाटक किया तो उठा कर पटक दूंगा, तुम्हारा मन है बहुत चुदवाने का है फिर ऐसा क्यों कर रही हो.मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था क्योंकि आज के पहले सिर्फ कमलेश सर ने मुझे छुआ, वह भी मेरे ही घर में मुझे छुआ था, तो मैं कुछ समझ नहीं पा रही थी, पर जीजा ऐसा बोले तो मैं बिस्तर में ही रह गई.
अब जीजा मेरी सामने अपनी शर्ट पैंट उतार के पहले अंडरवियर बनियान में आए, मैं उनको देख ही रही थी, मेरे सामने अपना बनियान उतारा उनकी नंगी छाती देखी और फिर जैसे ही अपनी अंडरवियर नीचे खिसकाने लगे, कमर से नीचे करते ही जीजा का लन्ड बहुत लंबा और मोटा मेरे सामने तना हुआ खड़ा था.
अपनी अंडरवियर उतार फेंक कर जीजा पूरे नंगे हो गए, उनके लन्ड के पास बहुत सारे बाल थे, नंगे होकर जीजा मेरे बिस्तर पर चढ़ आए, मेरा सीना जोर जोर से धक धक करने लगा, मेरी सांसें बहुत तेज़ हो गई अब मुझे बहुत घबराहट होने लगी.
बिस्तर में आकर मेरे सीने में हाथ रखकर मुझे बोला- सीधी हो जाओ संध्या!मैं वैसी ही लेटी रही तो जीजा ने खुद पकड़ कर मुझे सीधा लिटा दिया और मेरी फ्रॉक को खींच कर ऊपर किया और गर्दन से उतार बाहर कर दी, अब मैं जीजा के सामने ब्रा और पैंटी में लेटी थी.जीजा बोले- ओहहह गाड… संध्या तुम तो कयामत हो, क्या मस्त लौंडिया हो क्या माल हो! मैंने आज तक तुमसे मस्त माल नहीं देखा, इतनी हिरोइन फिल्मों में देखी, इतनी लड़कियां देखी, कोई भी लड़की तुम्हारे आस पास भी नहीं! संध्या तुम बहुत मस्त माल हो, क्या गजब की चिकनी टांगें हैं तुम्हारी, क्या मस्त सेक्सी गहरी नाभि है, और क्या कड़क बूब्स लग रहे हैं, मुर्दे के सामने ऐसे चली जाओ संध्या तो वो भी खड़ा हो जाए, कितने मस्त मस्त प्यारे लाल सुर्ख होंठ हैं, और उसमें प्यारी सी तुम्हारी सेक्सी नाक है, आंखों का तो कहना ही क्या… है लगता है बिल्कुल चुदवाने का इशारा कर रही हैं.
जीजा की यह बातें मेरे को अंदर से अच्छी लगी.
इतने में जीजा मेरी पेंटी को धीरे से पकड़कर उतारने लगे, मैं बोली- जीजा मत करिए… हाथ जोड़ती हूं मुझे छोड़ दो, बहुत डर लग रहा है कभी नहीं करवाया.पर जीजा कहां मानने वाले… उन्होंने पैंटी को उतार फेंका अब मेरे बदन पर सिर्फ ब्रा बची थी, जीजा ब्रा के ऊपर से ही दोनों बूब्स अपने दोनों हाथों से पकड़ कर जोर से दबाने लगे.मैं चीख उठी, जैसे चीखी जीजा ने मेरे होठों को चूम लिया और बोले- इस तड़प और दर्द में बहुत मजा होता है संध्या!
फिर जीजा ने मेरी ब्रा के हुक पर हाथ रखकर ब्रा को खींच दिया, हुक टूट गई, ब्रा अलग हो गयी, मैं बोली- मेरा ब्रा तोड़ ड़ी!तभी जीजा बोले- तुझे आज 4-5 ब्रा खरीदवा दूंगा, चिंता मत कर!
अब मैं जीजा के सामने बिस्तर में पूरी नंगी लेटी थी, जीजा भी पूरे नंगे थे, इस तरह पहली बार आज कोई मर्द मेरे ऊपर मुझे पूरी नंगी करके और मेरे ऊपर पूरा नंगा होकर लेट गया.

जीजा मेरे ऊपर चढ़ गये, फिर मुझसे चिपक गए, मेरा अब हाल बहुत बुरा था, मैं कुछ सोच नहीं पा रही थी कि यह सब क्या है?जीजा का शरीर बहुत गर्म होकर तप रहा था, उनका सीना मेरे सीने से चिपक गया, मेरे होंठ पर अपने होंठ रख दिए, नीचे उनका लन्ड मेरी चूत में रगड़ खा रहा था.
जीजा बोले- संध्या, तुम्हारा जिस्म तो आग की भट्टी की तरह बहुत गर्म है, तुम प्यासी हो, बहुत चुदासी हो!मैं यह बात समझ नहीं पा रही थी.
तभी जीजा उल्टे हो गए, उन्होंने अपने पैर मेरे मुंह तरफ कर दिए और अपना मुंह मेरे पैरों तरफ…मैं बोली- जीजा छोड़ दो, जाने दो!मेरे मुंह से सिर्फ यही सब निकल रहे थे, जीजा को इन बातों से कोई मतलब नहीं था कि मैं क्या बोल रही हूं, मेरी क्या हालत है?
उल्टा लेटने के कारण उनकी कमर मेरे मुंह की तरफ हो गई और जीजा ने अपना मुंह मेरे पैरों तरफ करके मेरी टांगों को फैलाया और सीधे अपना मुंह मेरे चूत में रख दिया और अपने होठों से जैसे मेरी चूत को चूमा मैं उछल पड़ी और मेरे मुंह से उंहहह निकल गया!

मेरी पहली चुदाई की स्टोरी जारी रहेगी.



RE: Chudai Kahani मेरी कमसिन जवानी की आग - - 09-05-2019

मेरी बहन का दीवाना देवर मुझे अपने कमरे में लाकर नंगी कर चुका था मेरी चूत चुदाई के लिए… मुझे मजा आ रहा था लेकिन मैं दिखावे के लिए उसका विरोध कर रही थी. मुझे पता लग चुका था कि आज मुझे मेरी चुत की पहली चुदाई का मजा मिल जाने वाला है.अब आगे:
जीजा अब अपनी जीभ से मेरी चूत चाटने लगे. जैसे ही जीजा की जीभ मेरी चूत की रेखा पर चलती जा रही थी वैसे वैसे मुझे कुछ अजीब सा होता जा रहा था. उनका लन्ड मेरे चेहरे के पास टकराने लगा, तभी जीजा मेरी टांगों को और चौड़ा करके बोले- संध्या, क्या मस्त चिकनी सुर्ख लाल चूत है तुम्हारी! ओह माय गॉड!और जमकर अपने होठों से जीभ से चूमने और चाटने लगे.
मेरे मुंह से अपने आप लगातार सिसकारियां निकलने लगी, जीजा ने अब अपनी एक उंगली भी मेरी चूत में घुसा दी और उसे अंदर बाहर करने लगे. जैसे ही उंगली अंदर घुसती, मैं उछल पड़ती, जीजा बोले- क्या हुआ मेरी सेक्सी साली संध्या?मैं बोली- मत करो जीजा, मुझे पता नहीं क्या हो रहा है, मुझे बहुत घबराहट हो रही है.

तभी जीजा उंगली और तेजी से चलाने लगे और अब मेरी चूत के अंदर से रस निकलने लगा, उस चूत रस को जीजा जीभ से चाटते भी जा रहे थे, बोले- क्या मस्त सुगंध है तुम्हारी चूत की! बहुत प्यारी महक है!और अपनी नाक मेरी चूत में रगड़ने लगे, फिर मेरी टांगों को फैलाकर मेरी चूत में पूरी जीभ को घुसा दिया, मैं जोर सी सी उम्म्ह… अहह… हय… याह… सी उहह ओहह करने लगी.
अब जीजा बोले- संध्या, मेरे लन्ड को मुंह में ले लो!मैं बोली- नहीं, मुझे यह सब नहीं करना, मुझे नहीं पसंद है.
तभी जीजा अपनी पूरी जीभ अंदर मेरी चूत में जोर से डाल कर बहुत तेजी से जीभ चलाने लगे, अब मैंने ना चाहते हुए भी जीजा का लन्ड हाथ में पकड़ लिया और जैसे ही जीजा ने चूत को दोनों हाथों से अपने रगड़ने लगे और जीभ को बहुत अंदर तक चूत में डाला, मुझे कुछ समझ नहीं आया किस कारण किस जोश में, किस नशे में मैंने जीजा का लौड़ा अपने आप मुंह में घुसा लिया. मुझे कुछ समझ नहीं आया और मैं जीजा का लन्ड अपने मुंह में अंदर बाहर करने लगी.जीजा के लन्ड में अजीब सी गंध थी पर मुझे कुछ होश नहीं था.
तभी जीजा बोले- बहुत मस्त लौड़ा चूसती है संध्या, लगता है तू बहुत लोगों का लन्ड चूस चुकी है और बहुत बड़ी रंडी है फिर भी झूठ बोलती है कि आज तक किसी ने नहीं किया.मैं सुन रही थी परन्तु पहली बार जाने क्यूं अब यह बात मुझे बुरी भी नहीं लगी, जबकि मैंने मन ही मन सोचा कि आज तक मैं सिर्फ कमलेश सर का ही लन्ड चूसा है और जीजा झूठ बोल रहे हैं. मेरे अब तक के जीवन में आज जीजा का दूसरा लन्ड है जिसे चूस रही हूं.
तभी जीजा बोले- संध्या, अब तुम चुदासी हो और चुदवाने के लिए बहुत तड़प रही हो!और मुझे बोले- तुम बहुत पागल हो रही हो, चलो तुम्हारी आज चूत की प्यास, तेरी चूत की खुजली मिटा देता हूं. संध्या बहुत मजा आएगा तुझे!
जीजा उठ गए सीधे होकर मेरी टांगों की तरफ आकर बैठ गए, अपना लन्ड पकड़ के मेरी चूत को फैलाकर मेरी कमर ऊपर उठाया और एक तकिया मेरी कमर के नीचे रखा, जीजा बोले- संध्या, क्या पतली कमर और मस्त प्यारी सी टाइट चूत है तुम्हारी, संध्या तुम भले ही कितना चुदाई करवाती रही हो, पर लगता है जैसे बिल्कुल फ्रेश माल हो.
मैं बोली- आज तक किसी ने नहीं छुआ मुझे, आज तक ना कुछ किया, आज आप भी मत करो, मैं डर रही हूं जीजा, मान जाओ, मत घुसाओ! कहीं कुछ हो गया तो बहुत डर लग रहा है.पर जीजा एक ना माने और अपना लन्ड पकड़ कर मेरी टांगों को फैलाया और अपने कंधे में मेरी टांगें चढ़ा ली और बोले- संध्या, क्या मस्त चिकनी चूत है तेरी!फिर सीधे अपने लन्ड को मेरी चूत में रख दिया, आज मेरी लाइफ में पहली बार लन्ड ने चूत को छुआ और किसी मर्द का लौड़ा चूत में जाने को घुसने को तैयार है.
जीजा ने मुझे अपनी तरफ खींचा तो उनका लन्ड मेरी चूत में फिट हो गया और थोड़ा सा ही घुसा तो मुझे दर्द होने लगा, मैं चिल्ला उठी.तो जीजा बोले- आराम से… चिल्लाना नहीं, रोना नहीं!जीजा का लौड़ा बहुत मोटा था इसलिए मेरी चूत में अब भी पूरा का पूरा फिट नहीं हो रहा था, मेरी चूत बहुत छोटी और टाइट थी, जीजा का लन्ड बहुत मोटा था परंतु मेरी चूत बह रही थी तो उसमें बहुत चिकनाहट थी. जीजा बोले- बहुत चिकनी चूत है तेरी संध्या, रस बहुत बह रहा है इसलिए दिक्कत नहीं आएगी, शुरु में थोड़ा दर्द होगा सह लेना!



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मैं कुछ ना बोली, सच बोलूं तो अंदर से मन कर रहा था कि कमीना जीजा जोर से अपना लन्ड मेरी चूत में डाल दे, चाहे जो भी हो, बस जो मुझे हो रहा है वह मेरा शांत करे.जीजा ने अपना लन्ड थोड़ा सा मेरी चूत में दबाया, मुझे बहुत दर्द का एहसास हुआ और गले में मेरे प्राण आके अटक गये, मैं जीजा को हाथ से धक्का देने लगी, जीजा ने मेरे दोनों हाथ पकड़ लिए और एक जैसे ही धक्का लगाया, उनका लन्ड मेरी चूत का दरवाजा फाड़ता हुआ अन्दर चूत में घुसा, लगा ‘मर गई… फट गयी मेरी चूत… जैसे कोई चाकू मार दिया हो.’
मेरी चूत में असहनीय दर्द हुआ, मैं जोर से चिल्ला उठी, जीजा ने फिर से मेरी चूत में लन्ड का धक्का लगाया और चूत में मेरी और अंदर डालना चाहा, मुझे बहुत दर्द हो रहा था और जीजा लन्ड मेरी चूत में घुसाने में लगे थे, दर्द के कारण मुझे गुस्सा आया, मैं बहुत जोर से गाली देने लगी- जीजा कुत्ते मार डाला!बहुत जोर से चिल्लाई. इतना दर्द हुआ कि मुझे कुछ होश नहीं रहा, मैं पूरी ताकत से चिल्लाने लगी, रोने लगी.
तभी जीजा बोले- साली कुतिया रंडी, चिल्ला मत मोहल्ले को इकट्ठा करेगी क्या? पूरा मोहल्ला आ जाएगा फिर मुझे कोई कुछ नहीं बोलेगा समझी, सब तेरी चूत को ही चोदेंगे ये समझ ले तू! संध्या चुप रह 2 मिनट, बस घुसने ही वाला है, थोड़ा दर्द होता है, उसके बाद तो जन्नत का मज़ा है.मैं बोली- छोड़ कुत्ते कमीने, मत कर साले, घटिया जीजा, मादरचोद छोड़!जो गालियां आती थी, सब दे डाली और रो भी बहुत रही थी पर जीजा को कोई भी फर्क नहीं पड़ रहा था, वो फिर से अपना लन्ड घुसाने में लग गए.
बस एक इंच ही अंदर मेरी चूत में और घुसा लन्ड कि इतने में खिड़की से खट खट की आवाज आई. एक खिड़की किसी ने खींच कर खोल भी दी और हम दोनों को उसी चुदाई की हालत में देख कर बहुत जोर से जीजा को गाली देकर वो चिल्लाया, बोला- दरवाजा खोल गांडू शुक्ला!जीजा फटाक से डर के उठे, बोले- मकान मालिक है, साली चिल्लाकर गड़बड़ कर दी!और उठ खड़े हुए, जल्दी से सिर्फ अंडरवियर पहना.
तभी मकान मालिक बोला- खोल कमीने दरवाजा 1 मिनट में, नहीं साले बंद करा दूंगा.जीजा ने 1 मिनट में जल्दी से दरवाजा खोला, मकान मालिक अंदर आ गए, मैं जल्दी से बिस्तर वाला चादर ही बस अपने नंगे बदन में लपेट पाई थी, तभी मकान मालिक जीजा को गाली देते हुए तीन चार थप्पड़ मारे, बोले- यह रंडी छिनाल कहां से लाया है मेरे घर में, किराया से रहने के बहाने रंडीबाजी करता है छिनालों को लाता है. यहां साले रंडी चोदता है?
बहुत गाली बकी जीजा को और मुझे बोले- जब रंडीबाजी करनी है छिनाल तो चुदवा जैसे चुदवाना है, चिल्ला कर पूरे शहर को क्यों बुला रही है?जीजा के मकान मालिक मेरी तरफ घूरते कर देखे और जीजा को कॉलर पकड़ के पीछे एक लात मारे और बोले- हट जा साले, मेरे घर में गलती से भी दिख मत जाना, नहीं जेल में बंद करा दूंगा. यह कह कर भगा दिया, जीजा डर के मारे भाग गए.
अब रूम में मैं बची और मकान मालिक… वो मुझे बोले- रूक रंडी, तेरी भी अब खैर नहीं, और दरवाजा अंदर से बंद कर दिया.मुझे डर के मारे ऐसा लग रहा था कि मेरे प्राण निकल जाएंगे बिल्कुल अब कांपने लगी थी और मुझे रोना आने लगा.
तभी मकान मालिक बिस्तर पर बैठ गए मैं भी चादर ओढ़े बैठी थी, मुझसे पूछा- अपना नाम बता?मैं डर के मारे चुप रही, वो फिर जोर से चिल्लाया- साली रंडी नाम बता?मैं बोली- संध्या नाम है मेरा!फिर पूछा- कितने पैसे में आई है और तू कहां की है?मैं बोली- आप मुझे गलत समझ रहे हैं, मैं वैसी लड़की नहीं हूं!
वह थोड़ा हंसे और बोले- साली सब रंडियां ऐसे ही बोलती हैं, देख तू तो चेहरे से, आंखों से, बातों से सबसे पूरी छिनाल वेश्या लग रही है. मुझे पहचान है, मेरे बाल सफेद हो गए, मुझे नहीं दिखता तू एक नंबर की रंडी है. अपना नहीं चल अपने मां बाप के बारे में बता कहां से है और पूरा पता बता अपने बाप का मोबाइल नंबर बता, और मां बाप से बात करा तभी मैं तुम्हें यहां से जाने दूंगा.
मैंने अपना एड्रेस बता दिया, अपने गांव का नाम मेरे पापा, मम्मी का नाम है अपनी एडयुकेशन सब बता दिया, और यह बताया कि जो आपके किरायेदार हैं और अभी मेरे साथ रहे हैं वो मेरे जीजा के सगे भाई हैं.मकान मालिक बोले- सुन, मुझे राजेश वर्मा कहते हैं, बहुत फेमस हूं, उड़ती चिड़िया के पंख पहचान लेता हूं. पचास साल का ऐसे ही नहीं हो गया. फिर भी तूने पैसे तो चुदवाने के लिए ही होंगे?मैं बोली- मम्मी कसम, सच बता रही हूं, मैंने रूपये नहीं लिया है मैं वैसी लड़की नहीं हूं. जीजा सिर्फ ड्रेस दिलाने का बोल कर ले आए थे, मैं मना भी कर रही थी पर नहीं माने और मेरे साथ करने लगे.
मकान मालिक राजेश बोले- तू संध्या घर से अकेले आई है, ड्रेस लेने आई है जीजा के साथ, इतना सेक्सी मेकअप करके, लिपस्टिक बिल्कुल छिनाल जैसे लगाई है, तू तो घर से सोच कर तय कर के चुदाई करवाने आई है, और मुझे अपनी बातों से बेवकूफ बनाती है, क्या तू नहीं जानती यह जितने जीजा होते हैं सब साली को चोदते हैं, और सालियां भी जीजा से चूत की खुजली मिटवाती हैं, यह कोई नई बात नहीं है न इसमें कोई बुराई है. सबसे बुरी बात यह है कि तू जानती है कि तू यहां होश में रहकर जानबूझकर चुदवाने आई है और अब सती सावित्री बन रही है, और मुझे अपनी बातों से बेवकूफ बना रही है.

मेरी पहली बार की चूत चुदाई की स्टोरी जारी रहेगी.



RE: Chudai Kahani मेरी कमसिन जवानी की आग - - 09-05-2019

अब मैं मन ही मन सोचने लगी कि इनको कैसे मेरे अंदर मन की बात पता हो गई?यह बात बिल्कुल सच है कि जब जीजा मुझे ड्रेस दिलाने के लिए घर आ रहे थे, जीजा के साथ आने के लिए मैं जब तैयार होने के लिए नहाने गई तो मेरा ध्यान गया कि नीचे मेरे में कुछ बाल हैं चूत में. मैंने पापा के रेजर ब्लेड से अपनी नीचे चूत के बाल साफ किए. और तब अपने आप मन में आ गया जो कमलेश सर ने कहा था कि ‘जब भी मौका मिले किसी भी मर्द के साथ… तो चुदाई करवा लेना, बहुत बहुत मजा आएगा तुझे संध्या!’मुझे एक दम से सतीश जीजा का ख्याल आया और उनकी बातों का कि जो सतीश जीजा अपने घर में मुझसे बोले थे कि ‘संध्या लगता है यही तुम्हें चोद दूं और तुम्हारी चीख निकाल दूं, मेरा बहुत बड़ा लन्ड है लड़कियां तरसती हैं मुझसे चुदवाने को…’यही यही बात मेरे दिमाग में मन में चलने लगी और मैं एकदम से गर्म हो गई, सिर्फ सोच सोच कर दो बार मेरी पैंटी गीली हो गई, आज लाइफ में पहली बार मेरी पैंटी गीली हो रही थी, मैं दो पैंटी बदल चुकी थी एक घंटे के अंदर! ऐसा क्यों हो रहा यह भी नहीं मुझे मालूम, आज सब यह इस तरह का मेरा पहला एक्सपीरियंस है.मैं फिर सोचने लगी कि आज मुझे सतीश जीजा चोदेंगे और मैं इस लिए सिंगल पीस की घुटनों तक की फ्रॉक पहन ली, कि जीजा जहां चाहे फ्राक ऊपर करके मुझे चोद दे, मैं बिल्कुल आज मन में तय कर चुकी थी कि जीजा मुझे चोदेंगे और मैं उनसे उनका लोड़ा घुसवाऊंगी.
पर यह बात मकान मालिक शुक्ला को कैसे पता चल गई मैंने तो कुछ बताया नहीं पर जो मकान मालिक बोले बिल्कुल सच था, अब मैं सोच में पड़ गई की मकान मालिक को मेरे मन के अंदर की बात कैसे पता चली?
तभी वह मुझसे बोले- संध्या, दिखने में जो तुम्हारा लुक है वह बहुत सेक्सी है, बहुत हॉट है, कोई भी तुम्हें चोदना चाहेगा.वो मुझे घूरने लगे और फिर बोले- लगता है वह सतीश तुम्हें प्यासी और तड़पता छोड़ गया, चलो मैं आज तुम्हारा काम कर देता हूं और मैं तुम्हें ड्रेस भी दिला दूंगा.
मैं बिल्कुल डर गई कि यह कैसी बात कर रहे हैं? इनकी उम्र 50 साल के ऊपर है और ऐसी बातें कर रहे हैं.मैं बिल्कुल रोने सी लगी तभी मकान मालिक मुझे ऊपर से नीचे तक घूरने लगे एकटक देखने लगे और मुझसे लिपट गए. तभी उन्होंने मेरे बदन पर जो चादर ढकी थी उसे हटा दिया, मैं उनके सामने बिल्कुल नंगी हो गई, वो बोले- तू तो बहुत जबरदस्त माल है संध्या, आज मुझसे चुदवा लो, वादा है अपने जीजा को भूल जाएगी.और मेरे होठों को चूमने लगे और मेरे दूध दबाने लगे.
जैसे ही बूब्स को अपने मुंह में भरने लगे मैं उन्हें मना करने लगी. तब उन्होंने मुझे छोड़ दिया लेकिन मकान मालिक मुझे गाली देने लगे, बोले- संध्या, तू इतनी बड़ी छिनाल होकर चिल्ला रही है चल आज तेरे घर चलता हूं और तुझे बताता हूं! तीन दिन के अंदर या तो तू अपने घर में खुद बता देना कि मैं यह सब करती हूं, रंडी बनकर चुदवाती हूं, नहीं मैं तेरे घर आकर तेरे मां बाप से खुद बताऊंगा. चल आज तो तू निकल जा!

मैंने फटाफट कपड़े पहने और डरते हुए वहां से निकल आई.
मुझे घर आते हुए बहुत डर लग रहा था कि अब मेरे घर में यह बात पता चल जाएगी, मैं घर कैसे तो घबराते हुए पहुंची. अपनी यह सारी बात तो नहीं पर मैंने इस डर से कि अगर मकान मालिक घर में बता दिया तो पता तो चल ही जाएगा, इसलिए मैंने खुद अपनी दीदी को यह बताया- दीदी मुझे आपके देवर सतीश ड्रेस दिलाने के बहाने सतना ले गए मैं उनके साथ चली गई तो वह किराए के अपने कमरे में ले गए और फिर मुझसे जबरदस्ती करने लगे और मुझे बोले मैं तुमसे प्यार करता हूं और आज मुझे तुम्हारे साथ सोना है, मैं उनसे लड़ पड़ी छीना झपटी की और रोने लगी चिल्ला दी तब जाकर उनसे कैसे तो बचकर आई हूं.
मैंने दीदी से बहुत सारा झूठ बोल दिया अपने को बचाने के लिए, जबकि सच यह है कि मैं जो बातचीत हुई थी उसके अनुसार मैं अपनी मर्जी से जीजा के साथ गयी थी और मेरा खुद का भी मन था सेक्स करने का.
अब मेरी दीदी ने अपने ससुराल में हंगामा कर दिया. दीदी ने अपने पति से यह सब बात बताई और बोली- तुम्हारा भाई राक्षस है, मेरी बहन के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की, संध्या बेचारी अभी बहुत छोटी और भोली मासूम है.बहुत हंगामा हुआ और सतीश जीजा को सब ने बहुत गालियां दी और बहुत बेइज्जत घर में किया.



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फिर मेरी दीदी मुझसे बोली- यह बात मम्मी पापा को वहां नहीं पता होना चाहिए कैसे भी! संध्या तुम घर में कोई जिक्र नहीं करना, मैंने यहां उसको बहुत बेइज्जती गाली और सब कर्म करवा दी.मैं बोली- ठीक है दीदी!इस तरह से मैंने अपने घर में मम्मी पापा से भाई से सब बात छुपा रखी थी.
अभी इस बात के चार पांच दिन ही हुए थे कि एक दिन दोपहर में मेरे घर के दरवाजे के सामने एक मोटरसाइकिल खड़ी हुई और दरवाजा किसी ने खटखटाया.इत्तेफाक से गेट खोलने मैं आई, तो देखा सतीश जीजा का मकान मालिक मेरे दरवाजे के सामने है, मैं उन्हें देख कर डर गई और बहुत ही घबरा गई, मुझे कुछ समझ नहीं आया, मैं उनके सामने हाथ जोड़ कर बोली- आप क्यों आए हैं?तो वे बोले- तुम्हारे पापा मम्मी से बात करनी है, चलो मुझे उनसे मिलना है.
मैं उनके हाथ जोड़ने लगी, मैं बोली- प्लीज धीरे से बोलिए आप और यहां से चले जाइए. मैं मुंह दिखाने लायक नहीं बचूंगी, मुझे घर से निकाल देंगे, आप मम्मी पापा से कुछ मत बताइए. प्लीज हाथ जोड़ती हूं.मकान मालिक बोले- ठीक है वापिस चला जाऊंगा, कुछ नहीं बताऊंगा लेकिन एक शर्त पर… तुम मेरे से मिलने आओगी. मुझे खुश करोगी, तुम्हें इतना अच्छे से करूंगा कि तुम जन्नत में रहोगी… वादा, तुम बेवजह डर रही हो, उस दिन सतीश से घुसवा ही रही थी और किसी से करवाओगी ही तो मुझमें भी कांटे नहीं लगे, सबसे बेस्ट करूंगा, फाइनल बोलो आओगी या नहीं या फिर तुम्हारे मम्मी-पापा से मैं मिलकर जाऊं?
मैंने डर के मारे बिना कुछ सोचे समझे कह दिया- ठीक है अंकल, मैं मिलने आऊंगी. पर प्लीज अभी जल्दी चले जाइए, मुझे डर लग रहा है, मैं पक्का 3 दिन के अंदर आपसे मिलने आऊंगी.और जाते जाते मकान मालिक बोले- अगर 3 दिन में तुम नहीं आई संध्या तो अब मैं तीसरे दिन तुम्हारे घर में सब तुम्हारे कारनामे तेरे मम्मी पापा से बताऊंगा.वे चले गए, मैंने राहत की सांस ली और फिर मैंने रात में सतीश जीजा को फोन लगाया, बोली- जीजा वह आपका मकान मालिक मेरे घर आया था और मेरे घर में आकर बोला कि मेरे पापा मम्मी को सब बताना है, मैं बहुत डरी हुई हूं प्लीज जीजा मुझे बचाओ!
सतीश जीजा बोले- तुमने तो मुझे को मेरे घर में मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ा, मैं तुम्हारा चेहरा भी नहीं देखना चाहता और दोबारा मुझे फोन भी मत लगाना. तुमने सब झूठ बोला कि मैं तुम से जबरदस्ती कर रहा था, जबकि तुम ड्रेस के बदले मुझसे चुदवाने को तैयार हुई थी, पर तुम ऐसा क्यों किया, मैं अब कभी जिंदगी में अपने घर में सर उठा कर नहीं रह सकता.
मैं बहुत शर्मिंदा हुई और बोली- सॉरी जीजा, मैं डर गई थी कि वह मकान मालिक ने मुझे धमकी दी थी कि सब बता देगा, तो मैंने डर के मारे दीदी को कह दिया कि तुम मेरे साथ जबरदस्ती कर रहे थे. मुझे माफ कर दो सॉरी, और प्लीज कैसे भी मकान मालिक को अपने रोको.
जीजा बोले- वह बहुत हरामी और गंदा मकान मालिक है, वह नहीं मानेगा, कैसे भी तुम्हें उससे मिलना ही पड़ेगा, वह किसी सूरत में नहीं मानने वाला.तो मैं बोली- वह क्या मेरे घर आ जाएगा?तो जीजा बोले- हां पक्का आ जायेगा, वैसे तुम क्या बोली हो मकान मालिक से?मैं बोली- मैंने बोला कि मैं 3 दिन के अंदर मिलने आऊंगी, पक्का वादा, अभी चले जाओ.तो जीजा बोले- तुम चली ही जाना, नहीं वह तीसरे दिन आ जाएगा.
मैं बहुत डर गई और मैं सतीश जीजा को बोली- प्लीज मेरे साथ चलना, प्लीज जीजा आप मेरे साथ रहना, वरना मैं अपने आपको नहीं छोडूंगी और भाग जाऊंगी.तो जीजा बोले- मेरा मन तो नहीं करता पर तुम कहती हो तो चलो तुम्हारे साथ चलूंगा.और जीजा कैसे भी तो तैयार हुए.
तीसरे दिन मैं बोली- मैं आपको सतना बस स्टैंड में मिलूंगी, आप आ जाना और अपने मकान मालिक के पास ले चलना.
तीसरे दिन मेरे मन में फिर से वही सब ख्याल आने लगा कि आज मुझे चोदेंगे मकान मालिक, सिर्फ उन्हीं का सोच कर मेरे अंदर कुछ खलबली सी और गुदगुदी सी भी हो रही थी, वो जो बोलकर गये थे, वही सब सोच-सोचकर मैं बिल्कुल अंदर से ना जाने क्यूं उत्तेजित हो रही थी, मेरी पैंटी गीली हो गई.
मैंने बहुत अच्छे से मेकअप किया, आज मैंने रेड कलर की स्कर्ट और ऊपर व्हाइट टॉप पहना नीचे मैंने ब्रा नहीं पहनी, सिर्फ पैंटी पहनी और जल्दी सुबेरे 9:00 बजे मम्मी से झूठ बोलकर बहाना बनाकर मैं सतना गई.तभी वहां मुझे बस स्टैंड के पास काफी हाउस के सामने थोड़ी देर में सतीश जीजा अपनी बाइक लिए खड़े मिले, मैं उनके साथ बैठ गई.जीजा बोले- आज संध्या… तुम बहुत हॉट लग रही हो एक नंबर की, तुम पूरा मन बना कर आज मेरे मकान मालिक से चुदवाने आई हो! क्या मस्त सेक्सी ड्रेस पहना है, मुझे नहीं दोगी क्या?मैं कुछ नहीं बोली.
फिर कुछ पल बाद मैं बोली- जीजा, आप वहां कमरे में मेरे साथ रहना!तो वह बोले- वह बहुत हरामी पागल है, तुम्हारा दिमाग तो ठीक है, मकान मालिक तुम्हें चोदेगा, तुम्हारे तुम्हारे साथ सोएगा और मैं वहां खड़ा देखूंगा? क्या पागल नजर आता हूं तुम्हें, मैं नहीं रहूंगा.मैं बोली- प्लीज जीजा, तुम नहीं रहोगे तो मैं फिर लौट के घर नहीं जाऊंगी.तो जीजा बोले- चलो देखता हूं!अब मकान मालिक के घर पहुंच गए.



मेरी पहली बार की चूत चुदाई की स्टोरी जारी रहेगी.



RE: Chudai Kahani मेरी कमसिन जवानी की आग - - 09-05-2019

मैंने बहुत अच्छे से मेकअप किया, आज मैंने रेड कलर की स्कर्ट और ऊपर व्हाइट टॉप पहना नीचे मैंने ब्रा नहीं पहनी, सिर्फ पैंटी पहनी और जल्दी सवेरे 9:00 बजे मम्मी से झूठ बोलकर बहाना बनाकर मैं सतना गई, सतीश जीजा अपनी बाइक लिए खड़े मिले, हम मकान मालिक के घर पहुंच गए.
ऊपर जैसे जाकर नाक किया मकान मालिक निकला, मुझे देख कर ऊपर से नीचे तक घूरने लगा और बोला- वाह संध्या, क्या मस्त हो, सच में बहुत मस्त माल हो!और गेट खोला.मैं बोली- अंदर तब आऊंगी जब यह सतीश जीजा भी अंदर रहेंगे. वरना मैं यहीं से वापिस चली जाऊंगी, मैं अंदर नहीं आऊंगी.तो वो बोले- कोई बात नहीं, जब तुम्हें प्रॉब्लम नहीं तो सतीश आ जा, तू भी अंदर रहना कोई दिक्कत नहीं.
और सतीश जीजा और मैं अंदर चले गए.
अंदर जाते ही मकान मालिक ने रूम बंद कर दिया अंदर से, और अपने कमरे पर ले गया जहां डबल बेड लगा हुआ था.मैंने देखा कि बहुत अच्छा बेडरूम था, मकान मालिक बोला- सतीश ड्रिंक करेगा?तो सतीश जीजा बोले- नहीं आप कर लो!
उसने एक दारू का बोतल निकाली और मेरे सामने आधी ग्लास से ज्यादा भर के पी ली.मैं डर रही थी, घबरा रही थी, मैं कुछ नहीं बोली, वो मेरे पास ग्लास लेकर आए, बोले- संध्या तू भी पिएगी, आज पी ले तुझे बहुत मजा आएगा!मैं बोली- नहीं, मैं नहीं पीती, ना कभी पियूंगी!तो उसने तुरंत जल्दी जल्दी दो ग्लास दारु पी और सीधे आकर मुझे अपनी बाहों में भर लिया, मेरे सामने खड़े होकर मेरे होठों पर अपने होंठ रख दिए. बहुत गर्म थे उनके होंठ… मेरा दिल जोर से धड़क उठा.

जैसे ही मेरे चूमने लगे, उनके मुंह से हल्की हल्की दारू की महक आ रही थी, मैं बोली- महक आती है आपके मुंह से वाइन की!तो बोले- अभी बहुत मजा आएगा तुझे!और फिर उन्होंने मेरे स्कर्ट को ऊपर किया और नीचे बैठ गए, मकान मालिक बोले- बहुत मस्त माल है तू संध्या, तुझे कैसे छोड़ता, तू आ गई वरना मैं तेरे घर आ ही जाता.मैं कुछ नहीं बोली.
तभी मेरे पेंटी के ऊपर से ही जहां मेरी चूत थी, वहां चूम लिया और बोले- क्या मस्त खुशबू है तेरी चूत की, बहुत गजब की आइटम है तू!और पेंटी के ऊपर से ही जहां मेरी चूत है उस फूली हुई जगह पर अपनी नाक रगड़ने लगे.मुझे गुदगुदी सी होने लगी और अजीब सी सुरसुराहट चूत में महसूस हुई.
वहीं सामने सतीश जीजा खड़े सब देख रहे थे.
मकान मालिक ने खड़े होकर मुझे गले से लगा लिया, बोले- संध्या, तुम्हारे होंठ बहुत रसीले हैं, जी करता है कि इन्हें चूसता रहूं!और यह कहते हुए मेरे होठों को चूसने लगे. साथ में मेरा टॉप ऊपर करके मेरी नाभि में अपनी उंगली चलाने लगे, उनके छूने का तरीका कुछ इस तरह का था कि मैं थोड़ी ही देर में अलग सा महसूस करने लगी और मेरे बदन में टूटन होने लगी, पर मैं फिर भी मकान मालिक को बोली- प्लीज मैं आपसे बहुत छोटी हूं, आपने कहा था तो मैं आ गई लेकिन अब मुझे जाने दीजिए, मुझे मत कुछ करिए, बहुत डर लग रहा है.
तो उन्होंने कहा- उस दिन जब सतीश लन्ड घुसा रहा था तब तो तुम टांगें ऊपर करके बहुत उछल रही थी, पर अब क्या हुआ?मैं बोली- एक बात कहूं, मैं आज यह आपसे नहीं करवाना चाहती, मुझे जाने दो!और मैंने हाथ जोड़ लिये.
तब मकान मालिक बोले- संध्या, एक काम कर, मुझे सिर्फ पंद्रह मिनट दे दे, 15 मिनट बाद तुम यहां से चली जाना! ठीक है?पता नहीं क्यों… मैं खुश भी हुई, और सच बोलूं तो अंदर से मन में लगा कि लगता है अब यह नहीं चोदेंगे मुझे!पर मैं खुश होकर बोली- थैंक यू अंकल!
मकान मालिक बोले- लेकिन इन 15 मिनट में कुछ भी जो मैं करूं वो करने से तू मुझे रोकेगी नहीं!मैं बोली- फिर क्या मतलब? आप 15 मिनट के अंदर ही अंदर डाल कर सब कर लेंगे!मकान मालिक बोले- मैं तुम्हारे अंदर नहीं डालूंगा, बाकी सब सब कुछ करूंगा, डालने के अलावा. पन्द्रह मिनट तक तुम कोई ड्रामा नहीं करोगी.मैंने सोचा थोड़ा… फिर बोली- ठीक है, उसके बाद तो मुझे जाने दोगे?मकान मालिक बोले- बिल्कुल चली जाना!मैंने कहा- ठीक है तो फिर!
अब मकान मालिक मेरे सामने आए और सीधे मेरी स्कर्ट को पकड़ा ऊपर उठाया फिर ना जाने क्या उनके दिमाग में आया सीधे खींच कर नीचे उतार दिया, मैं उनके सामने ऊपर टॉप में जो मेरी नाभि के नीचे तक थी, नीचे सिर्फ पैंटी में मुझे खुद शर्म आने लगी.इस बार मकान मालिक बिल्कुल सामने खड़े हो गए और बोले- संध्या, तुम पूरी कयामत हो. तुम्हारे जैसी मैंने परफेक्ट फिगर की लड़की आज तक नहीं देखी. तुम यह देखो!



RE: Chudai Kahani मेरी कमसिन जवानी की आग - - 09-05-2019

और उन्होंने कहते हुए मेरे पैंटी के ऊपर चूत के ऊपर जहां फूली हुई जगह थी, वहां पर हाथ रख दिया और बोले- यहां तो आग लगी हुई है, तुम्हारी पैंटी भी बहुत गर्म है.और उन्होंने मेरी चूत को पेंटी के ऊपर से ही दबा दिया, बोले- यह बहुत फूली है, पता है फूली चूत बहुत सेक्सी और चुदासी लड़की की रहती है.
मैं यह सब नहीं जानती थी, मैं खड़ी थी, उसने बैठकर मेरी पैंटी के ऊपर से फूली हुई जगह पर अपनी नाक रख दिया और बोले- बहुत सुगंधित महक आ रही है तुम्हारी चूत से!और मेरी जांघों को खड़े खड़े ही चूमने लगे. मेरी चूत के ऊपर फूली जगह पर पेंटी के ऊपर से ही बहुत चूम रहे थे.
इसके बाद टॉप को थोड़ा ऊपर करके मेरी कमर से लिपट गये और मेरी नाभि पर अपनी जीभ से चाटने लगे और नाभि को करीब 3-4 मिनट तक चूमते रहे. उधर मेरे फूली हुई जगह को पैंटी के ऊपर से चूत को दबाते जा रहे थे.मुझे थोड़ा थोड़ा कुछ होने लगा.
यह सब सतीश जीजा देख रहे थे और फिर सतीश जीजा बोले- अंकल, मुझे भी ड्रिंक करना है. मैं आपकी दारू पी सकता हूं क्या?अंकल बोले- हां बिल्कुल सतीश, तुम ले लो, सामने रखी है!सतीश जीजा गए और उन्होंने पूरा ग्लास दारू का भरा और पीने लगे.
मैं उनको देख रही थी, उनका पेंट का जिप जहां होता है, वह बहुत उठा हुआ था, मैं समझ गई कि जीजा भी अब एक्साइटेड हो गए लगता है.
तभी मकान मालिक ने नाभि चूमने के बाद मेरे टॉप के अंदर से हाथ मेरे सीने में पहुंचा दिया, उनका हाथ सीधे मेरे नंगी बूब्स दूध पर पहुंच गया जैसे हाथ से मेरे दूध को छुआ, मेरे मुंह से एक सिसकी निकली, तभी मकान मालिक बोले- यार संध्या, तू तो फुल चुदवाने के मूड में आई है, फिर क्यों इतना नाटक करी तूने? आज तो तुमने अंदर ब्रा भी नहीं पहनी, ऐसा लड़की तभी करती है जब उसे चुदाई करवानी हो या दूध दबवाने हो!मैं शरमा गई कुछ नहीं बोली क्योंकि ये बात मकान मालिक सच ही बोले.
अब मकान मालिक अंकल खड़े हो गए, टॉप के ऊपर से ही मेरे सीने में किस किया और मुझसे लिपट गए, मेरे को गले से लगा लिया. उनका शरीर बहुत भारी भरकम था और सीधे अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिये. उधर नीचे उनका लन्ड खड़ा होकर तन गया था, सीधे मेरी चूत पर पेंटी के ऊपर से ही सटा कर खड़े-खड़े अपनी कमर को रगड़ रहे थे.होंठों पर होंठ रखे होने से उनकी गर्म सांसें मेरे नाक की बहुत गर्म सांसों से टकराने लगी.
मुझे अब कुछ कुछ होने लगा, मुझे धीरे धीरे जाने क्या सुरूर चढ़ने लगा. जीजा मेरे सामने आकर खड़े हो गए, उनके हाथ में दारू का ग्लास था और वह अपने हाथ से अपने लन्ड को पैंट के ऊपर से ही दबा रहे थे.
मकान मालिक मेरे पीछे आ गए और बोले- हाथ ऊपर करो संध्या!मैंने नहीं किये तो अपने आप करवाए और मेरे टॉप को नीचे से खड़े खड़े उतार दिया, जैसे ही मेरा टॉप उतरा… तब पीछे खड़े मकान मालिक सीधे मेरी पैंटी के ऊपर से ही मेरी पीछे गांड में अपना लन्ड रगड़ने लगे और पीछे से मेरे दोनों दूध कस के पकड़ लिए.उधर मेरे सामने खड़े सतीश जीजा पैंट की ज़िप खोलकर अपना सामान अंदर से बाहर निकाल लिया, मैं बिल्कुल एकटक सतीश जीजा का लन्ड देखने लगी, वह बड़ी बेशर्मी से मेरे सामने अपने हाथ से अपना लन्ड रगड़ने लगे.
तभी मकान मालिक बोले- क्यों बे सतीश, कंट्रोल नहीं होता क्या?सतीश जीजा बोले- ऐसी आइटम को चुदते देखने में भी मजा है अंकल… मुझे ऐसे ही मजा आ रहा है, आप फुल इन्जवाय करो संध्या के साथ! आपको इससे सेक्सी सुंदर और पर्फेक्ट फिगर वाली कोई दूसरी लड़की नहीं मिलेगी, संध्या को नंगी देख लेने पर जन्नत का मजा मिल जाता है. मैंने संध्या को अपने गांव में एक बार लैट्रिन करने के लिए बाहर मैदान में, इसे अपनी पैंटी उतार कर बैठी थी, झाड़ी में छुप कर देखा था, तब पहली बार संध्या की मस्त चूत और गांड बिना कपड़ों के देखी, और फिर आकर जहां कपड़े बदलती थी, वहीं छुप गया, तब पहली बार इसको पूरे कपड़े उतार के नंगी देखा तो उसी समय मैं पागल सा हो गया था, तब से आज तक मैं संध्या को सोचकर दिन में तीन से चार बार मुट्ठ मार कर अपने लन्ड को शांत करता हूं. संध्या को बिना कपड़े नंगी देखकर ही हर कोई अपने होश खो बैठेगा और जो इसे छू ले उसकी तो जिंदगी ही बदल जाए! बहुत सेक्सी बहुत हॉट माल है. अंकल आप बहुत लकी हैं जो आज इसको आप अपने हाथों से संध्या की गांड, दूध दबा रहे हैं और होठों को चूस रहे हैं. संध्या की नाक बहुत सेक्सी है, उसको भी मुंह में भर लेना चूसना, बहुत परफेक्ट है इसका एक एक अंग, अंकल आप संध्या को आज सटिस्फाई कर दो, अंकल ऐसे ही आप दोनों को देखकर मुझे बहुत मजा आ रहा है.
तभी अंकल बोले- यार सतीश, तू सच बोल रहा है, यह तो कयामत है, संध्या का पूरा बदन ऐसे जल रहा है लगता है इसके अंदर बहुत आग है!मकान मालिक ने इतना कहते हुए बहुत जोर से मेरे दूधों को दबा दिया, मैं चीख उठी!
अंकल बोले- संध्या ने मुझे सिर्फ 15 मिनट दिए हैं, मैंने वादा किया है कि जब तक यह नहीं कहेगी तो बिना इसकी मर्जी के इसे नहीं चोदूंगा, उसमें से पांच मिनट हो भी चुके.
अब मकान मालिक बोले- संध्या तुम अपनी पैंटी उतारो, देखूं जरा तुम्हारी नंगी चूत और गांड!
मैं कुछ नहीं बोली.



RE: Chudai Kahani मेरी कमसिन जवानी की आग - - 09-05-2019

और उन्होंने कहते हुए मेरे पैंटी के ऊपर चूत के ऊपर जहां फूली हुई जगह थी, वहां पर हाथ रख दिया और बोले- यहां तो आग लगी हुई है, तुम्हारी पैंटी भी बहुत गर्म है.और उन्होंने मेरी चूत को पेंटी के ऊपर से ही दबा दिया, बोले- यह बहुत फूली है, पता है फूली चूत बहुत सेक्सी और चुदासी लड़की की रहती है.
मैं यह सब नहीं जानती थी, मैं खड़ी थी, उसने बैठकर मेरी पैंटी के ऊपर से फूली हुई जगह पर अपनी नाक रख दिया और बोले- बहुत सुगंधित महक आ रही है तुम्हारी चूत से!और मेरी जांघों को खड़े खड़े ही चूमने लगे. मेरी चूत के ऊपर फूली जगह पर पेंटी के ऊपर से ही बहुत चूम रहे थे.
इसके बाद टॉप को थोड़ा ऊपर करके मेरी कमर से लिपट गये और मेरी नाभि पर अपनी जीभ से चाटने लगे और नाभि को करीब 3-4 मिनट तक चूमते रहे. उधर मेरे फूली हुई जगह को पैंटी के ऊपर से चूत को दबाते जा रहे थे.मुझे थोड़ा थोड़ा कुछ होने लगा.
यह सब सतीश जीजा देख रहे थे और फिर सतीश जीजा बोले- अंकल, मुझे भी ड्रिंक करना है. मैं आपकी दारू पी सकता हूं क्या?अंकल बोले- हां बिल्कुल सतीश, तुम ले लो, सामने रखी है!सतीश जीजा गए और उन्होंने पूरा ग्लास दारू का भरा और पीने लगे.
मैं उनको देख रही थी, उनका पेंट का जिप जहां होता है, वह बहुत उठा हुआ था, मैं समझ गई कि जीजा भी अब एक्साइटेड हो गए लगता है.
तभी मकान मालिक ने नाभि चूमने के बाद मेरे टॉप के अंदर से हाथ मेरे सीने में पहुंचा दिया, उनका हाथ सीधे मेरे नंगी बूब्स दूध पर पहुंच गया जैसे हाथ से मेरे दूध को छुआ, मेरे मुंह से एक सिसकी निकली, तभी मकान मालिक बोले- यार संध्या, तू तो फुल चुदवाने के मूड में आई है, फिर क्यों इतना नाटक करी तूने? आज तो तुमने अंदर ब्रा भी नहीं पहनी, ऐसा लड़की तभी करती है जब उसे चुदाई करवानी हो या दूध दबवाने हो!मैं शरमा गई कुछ नहीं बोली क्योंकि ये बात मकान मालिक सच ही बोले.
अब मकान मालिक अंकल खड़े हो गए, टॉप के ऊपर से ही मेरे सीने में किस किया और मुझसे लिपट गए, मेरे को गले से लगा लिया. उनका शरीर बहुत भारी भरकम था और सीधे अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिये. उधर नीचे उनका लन्ड खड़ा होकर तन गया था, सीधे मेरी चूत पर पेंटी के ऊपर से ही सटा कर खड़े-खड़े अपनी कमर को रगड़ रहे थे.होंठों पर होंठ रखे होने से उनकी गर्म सांसें मेरे नाक की बहुत गर्म सांसों से टकराने लगी.
मुझे अब कुछ कुछ होने लगा, मुझे धीरे धीरे जाने क्या सुरूर चढ़ने लगा. जीजा मेरे सामने आकर खड़े हो गए, उनके हाथ में दारू का ग्लास था और वह अपने हाथ से अपने लन्ड को पैंट के ऊपर से ही दबा रहे थे.
मकान मालिक मेरे पीछे आ गए और बोले- हाथ ऊपर करो संध्या!मैंने नहीं किये तो अपने आप करवाए और मेरे टॉप को नीचे से खड़े खड़े उतार दिया, जैसे ही मेरा टॉप उतरा… तब पीछे खड़े मकान मालिक सीधे मेरी पैंटी के ऊपर से ही मेरी पीछे गांड में अपना लन्ड रगड़ने लगे और पीछे से मेरे दोनों दूध कस के पकड़ लिए.उधर मेरे सामने खड़े सतीश जीजा पैंट की ज़िप खोलकर अपना सामान अंदर से बाहर निकाल लिया, मैं बिल्कुल एकटक सतीश जीजा का लन्ड देखने लगी, वह बड़ी बेशर्मी से मेरे सामने अपने हाथ से अपना लन्ड रगड़ने लगे.
तभी मकान मालिक बोले- क्यों बे सतीश, कंट्रोल नहीं होता क्या?सतीश जीजा बोले- ऐसी आइटम को चुदते देखने में भी मजा है अंकल… मुझे ऐसे ही मजा आ रहा है, आप फुल इन्जवाय करो संध्या के साथ! आपको इससे सेक्सी सुंदर और पर्फेक्ट फिगर वाली कोई दूसरी लड़की नहीं मिलेगी, संध्या को नंगी देख लेने पर जन्नत का मजा मिल जाता है. मैंने संध्या को अपने गांव में एक बार लैट्रिन करने के लिए बाहर मैदान में, इसे अपनी पैंटी उतार कर बैठी थी, झाड़ी में छुप कर देखा था, तब पहली बार संध्या की मस्त चूत और गांड बिना कपड़ों के देखी, और फिर आकर जहां कपड़े बदलती थी, वहीं छुप गया, तब पहली बार इसको पूरे कपड़े उतार के नंगी देखा तो उसी समय मैं पागल सा हो गया था, तब से आज तक मैं संध्या को सोचकर दिन में तीन से चार बार मुट्ठ मार कर अपने लन्ड को शांत करता हूं. संध्या को बिना कपड़े नंगी देखकर ही हर कोई अपने होश खो बैठेगा और जो इसे छू ले उसकी तो जिंदगी ही बदल जाए! बहुत सेक्सी बहुत हॉट माल है. अंकल आप बहुत लकी हैं जो आज इसको आप अपने हाथों से संध्या की गांड, दूध दबा रहे हैं और होठों को चूस रहे हैं. संध्या की नाक बहुत सेक्सी है, उसको भी मुंह में भर लेना चूसना, बहुत परफेक्ट है इसका एक एक अंग, अंकल आप संध्या को आज सटिस्फाई कर दो, अंकल ऐसे ही आप दोनों को देखकर मुझे बहुत मजा आ रहा है.
तभी अंकल बोले- यार सतीश, तू सच बोल रहा है, यह तो कयामत है, संध्या का पूरा बदन ऐसे जल रहा है लगता है इसके अंदर बहुत आग है!मकान मालिक ने इतना कहते हुए बहुत जोर से मेरे दूधों को दबा दिया, मैं चीख उठी!
अंकल बोले- संध्या ने मुझे सिर्फ 15 मिनट दिए हैं, मैंने वादा किया है कि जब तक यह नहीं कहेगी तो बिना इसकी मर्जी के इसे नहीं चोदूंगा, उसमें से पांच मिनट हो भी चुके.अब मकान मालिक बोले- संध्या तुम अपनी पैंटी उतारो, देखूं जरा तुम्हारी नंगी चूत और गांड!मैं कुछ नहीं बोली.



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