Sex Kahani ह्ज्बेंड ने रण्डी बना दिया - Printable Version

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RE: Sex Kahani ह्ज्बेंड ने रण्डी बना दिया - sexstories - 06-19-2018

जेठ जी जैसे ही बाथरूम गए, मैं पेंटी खोजने लगी, मुझे ज्यादा शक जेठ पर ही था, पर पेंटी कहीं दिखाई नहीं दे रही थी।
तभी मेरी निगाह बेड के नीचे गई… और यह क्या… मेरी पेंटी तो यहाँ है!
और मैंने लपक कर जैसे ही पेंटी उठाई, मेरी उंगली में कुछ गीला सा लगा।
यह क्या पूरी पेंटी जेठ जी के वीर्य से सनी हुई थी और एक मादक गंध उसमें से निकल रही थी।
मैंने ना चाहते हुए पेंटी को मुँह के पास ले जा कर जीभ से चाट ली और मेरा इतना करना कि मेरे जिस्म में एक रोमांच और जेठ जी के लण्ड से निकलते वीर्य की कल्पना घूमने लगी।
तभी मुझे बाथरूम से जेठ के निकलने की आहट हुई और मैं घबराकर पेंटी वहीं फेंक कर साँसों को नियंत्रित करने लगी।
और जैसे जी जेठ जी बाहर आए, मैं जेठ जी को चाय देकर तुरन्त वहाँ से भाग आई।
अब मेरे दिमाग में वही सब नजारा चलने लगा, मेरी पेंटी जेठ के रूम में मिलना यह साबित कर रहा था कि जेठ जी मेरे रूम में आए थे और मेरी खुली चूत का दर्शन करके मेरी पेंटी को जानबूझ कर यहाँ से लेकर गए, और फिर वासना के नशे में लण्ड को मुठ मार कर वीर्य मेरी पेंटी में गिराकर लण्ड को राहत दिलाई।
मैं यही सोच रही थी कि तभी दरवाजे पर आहट हुई, मैंने देखा तो जेठ जी खड़े थे।
मुझे देख कर बोले- क्या सोच रही हो?
मैं हड़बड़ा कर बोली- कुछ नहीं, आप कब आए? और चाय पी ली?
‘मैंने तो चाय पी ली, पर तुमने शायद चाय नहीं पी क्योंकि तुम चाय को मेरे रूम में ही छोड़ कर चली आई। तुम किस ख्याल में खोई हो? क्या बात है?’
मैं कैसे कहती कि मेरी पेंटी आप के रूम में कैसे पहुँची और आपने मुझे पूरी नंगी देख लिया है, मैं बोली- जी, वो मैं भूल गई थी, मेरे सर में थोड़ा दर्द था तो मैं दवा लेने चली आई।
मैं जेठ जी को ऐसा बोल कर उनके रूम में कप लेने गई और जेठ भी मेरे पीछे ही अपने रूम में आए।
और मैं जैसे ही कप लेकर घूमी, मेरे जेठ अपने हाथ में मेरी पेंटी घुमा रहे थे- डॉली, तुम्हारा यह सामान मेरे पास है, शायद इसी की तलाश में हो?
‘न न् न् ने नहीं प्प्प्प्प् पर… यह आप के पास कैसे आई?’ हकलाते हुए मैं बोली।
तभी जेठ जी मेरे पास आकर मेरी बांह पकड़ कर बोले- मेरी जान, तुम जब अपनी चूत खोल कर सोई हुई थी, तब मैं तुम्हारे कमरे में गया था और तुम्हें उस हाल में देखकर मेरा मन तुम्हारी चूत चोदने का किया पर मैं मन मारकर तुम्हारी चूत छोड़ कर तुम्हारी पेंटी
को ही लेकर अपना काम किया और मन की तसल्ली कर ली।
‘आप यह क्या कह रहे हैं? आपको शर्म नहीं आई? आप मेरे जेठ हैं!’
मैं कुछ और कह पाती तभी जेठ जी ने मेरी बाजू पकड़ कर मुझे खींच कर अपने सीने से लगा लिया और बोले- मुझे क्यूँ तड़पा रही हो डॉली प्लीज? मैं बहुत प्यार करता हूँ तुमसे!’ कहते हुए मेरी लबों को चूमने लगे।
मैं किसी तरह अलग हुई- यह आप मेरे साथ क्या कर रहे हैं? मैं आपके छोटे भाई की पत्नी हूँ!
मैं जान बूझ कर त्रिया चरित्र फैला रही थी, जबकि मेरा मन खुद चुदने का कर रहा था, मेरी चूत सुबह से पानी पानी हो रही थी और
जब से मैंने अपनी पेंटी जेठ जी के रूम में देखी थी, मेरी चूत की कुलबुलाहट बढ़ गई थी।
पर मैं इतने आसानी से जेठ जी के हाथ नहीं आना चाह रही थी, और मैं वहाँ से पलट कर भागने लगी पर आज शायद मेरी चूत जेठ के लण्ड से बच नहीं पाएगी।
मुझे जेठ जी ने अपनी बाजुओं में दबोच लिया।
‘आहह्ह्ह… मुझे छोड़ो!’
पर आज जैसे कसम खा कर आए थे जेठ जी अपने भाई के पत्नी के बुर में लण्ड डालने की!
मैं छटपटाती रही पर मेरी एक नहीं चली और जेठ ने मुझे ले जा कर बेड पर पटक दिया, और मेरे ऊपर छा गए।
‘आहह्ह्ह छोड़ो ना… आप मुझे बरबाद ना करो!’
पर मेरी एक ना सुनी और सिर्फ इतना कहा- डॉली, मेरी पत्नी के गुजरने के बाद मैं चूत के लिए तरस रहा हूँ, मेरे ऊपर कृपा करो, मैं कोई जबरदस्ती नहीं करूँगा, पर आज तुम अपनी चूत मुझे देकर मेरे तड़पते लण्ड को कुछ राहत दो प्लीज!
उनका इतना कहना था कि मैं झूठा प्रतिरोध जो कर रही थी, बंद कर दिया लेकिन मैं शर्म के कारण जेठ का साथ नहीं दे पा रही थी, बस जिस्म को ढीला छोड़ दिया।
मेरे ऐसा करने से जेठ जी को लगा कि मैंने उनको अपनी चूत चोदने की अनुमति दे दी है।
वो बोले- मैं तुमको अच्छा नहीं लगता?
मैं बोली- ऐसी कोई बात नहीं है, आप मुझे अच्छे लगते हो लेकिन मैंने कभी आपके बारे में ऐसा कुछ सोचा नहीं है, और ऊपर से मैं आपके छोटे भाई की बीवी हूँ, हमारा आपका रिश्ता जेठ-बहू का है।
वो बोले- तुम मेरे छोटे की बीवी हो तो मुझे तुमसे प्यार करने का हक नहीं है?
ऐसा कहते हुए जेठ ने मुझे बाहों में भर कर मेरे होंठों का रसपान करने लगे और बोले- मैं तुमसे प्यार करता हूँ, इसलिए मुझे तुम्हारी चूत चोदने का पूरा हक है। इसमें कुछ बुरा नहीं है, बस जान, आज मुझे अपनी चूत दे दो।
यह सुन कर मैंने भी जेठ जी को अपने बाँहों में भीच लिया।
मेरे ऐसा करते जेठ जी ने खुश होकर एक हाथ से मेरी चूत दबा दी।
‘आहह्ह्ह सिई… और मैंने जेठ जी की बाहों में कसमसाते हुए अपनी पकड़ ढीली छोड़ दी।

जेठ जी ने अपना चेहरा ऊपर करके मेरे होठों को चूम लिया और हमारी साँसें आपस में टकराने लगी, मेरे अंदर एक अजीब सा नशा होने लगा था, मैं अपनी आँखें बन्द करके अपने होंठ खोल कर जेठ से चुदने के लिए उतावली होकर अपने होठों का अमृतपान कराने लगी। नीचे मेरी बुर के होठ खुल बंद होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे, लग रहा था मानो कह रहे हो ‘जेठ जी, आओ और चूम लो मुझे!’
तभी जेठ जी अपने कपड़े निकालकर नंगे हो गए और मेरे भी कपड़े निकालने लगे।
जैसे ही मेरे नीचे के भाग को नंगा किया, मेरी मस्त बिना पेंटी के चिकनी बुर देखकर जेठ जी मेरी चूत पर मुँह रख कर चाटने लगे और बोले- डॉली, क्या मस्त चूत है तेरी, सालों के बाद चूत के दर्शन हुए!
और मेरी बुर को खींच-खींच कर चूसने लगे।
और मैं जेठ का साथ और एहसास करके सिसकारने लगी, आहह्ह्ह सिईईई आहह्ह्ह करती रही और जेठ जी मेरे चूतड़ों को भींच कर मेरी चूत पी कर मेरी बुर की प्यास बढ़ाने लगे।
कुछ देर बाद जेठ जी मेरी बुर को चाटना छोड़कर ऊपर की तरफ मेरी नाभि पेट और छाती को चूमते हुए मेरे गले को चूमने लगे।
इधर नीचे उनका लण्ड मेरी बुर को छू रहा था और मैं सेक्स की खुमारी में अपनी चूत उठाकर लण्ड पर रगड़ते हुए बोलने लगी ‘आहह्ह्ह सिईईई… अब मत तड़पाओ… डाल दो मेरी बुर में अपना लण्ड और बना लो मुझे अपनी बीवी… आहह्ह्ह जान पेलो मुझे!
फिर जेठ ने अपना थूक निकाल कर अपने बाबूराव के सुपारे पर लगाया और अपने लण्ड के फ़ूले सुपारे को मेरी चूत पर लगा कर मेरे ऊपर लेट गए और मैं भी अपने पैर खोल कर ऊपर उठा कर जेठ जी के लण्ड को लेने के लिए दांत भींच कर धक्के का इंतजार करने लगी।
तभी जेठ जी ने एक जोर का धक्का मार कर लण्ड का सुपारा अंदर कर दिया।
‘आहह्ह्ह सीसी… आहह्ह्ह उफ मारो मेरी चूत… पूरा बाबूराव मेरी चूत में डाल दो…’
और जेठ ने शॉट पर शॉट लगा कर पूरा लण्ड मेरी चूत में डाल मेरी चूत चोदने लगे और मैं जेठ जी के हर शॉट पर चूत उठाकर लण्ड लेते हुए चिल्लाने लगी- चोद और जोर जोर से चोद… आज छोड़ना नहीं मेरी चूत को… अहह्ह्ह सी… सी सी आहह्ह्ह… मेरी जान, तेरे बाबूराव ने मेरी चूत को पसंद किया है, चोऊऊ… चोद इसको आज, इसकी गर्मी अपनी बाबूराव से निकल दो, फाड़ दे मेरी चूत को हाह्हआआ!
और जेठ भी लण्ड पेलते हुए ‘ले मेरी जान… खा मेरा लण्ड, तू रानी है मेरी, आहह्ह्ह ले मेरी जान चूत में लण्ड… आहह्ह्ह’ और पलट कर मुझे ऊपर कर लिया और मैं जेठ जी के लण्ड पर उछल उछल कर चुदने लगी।
मैं झरने के करीब पहुँच कर उनसे चिपक कर झड़ने लगी- आहह्ह्ह सीसी सीईईईई आहह्ह्ह… मैं गई आहह्ह्ह… सीसी!
मैं झड़ कर चिपक गई।
तभी जेठ मुझे नीचे लेकर शॉट लगाकर लण्ड पेलते हुए वीर्य मेरी चूत में गिराने लगे- आहह्ह्ह डॉली, मैं भी गया!
आहह्ह्ह सीसीई कहते हुए हम दोनों चिपक कर आराम करने लगे!


RE: Sex Kahani ह्ज्बेंड ने रण्डी बना दिया - sexstories - 06-19-2018

मैं चूत में लण्ड लिए हुए अभी लेटी थी और जेठ जी बड़े प्यार से मेरी पीठ सहला रहे थे, जेठ के चेहरे पर भी एक असीम आनन्द और संतुष्टि के भाव थे।
वासना का एक दौर तो खत्म था पर हमेशा के लिए जेठ से सेक्स का खेल शुरू हो चुका था और मैं भी जेठ जी से चुदा कर खुश थी, मुझे एक और बात की खुशी थी, घर में मेरी चूत को नया लण्ड मिल गया था।
तभी जेठ जी ने कहा- डॉली, तुमने मुझे आज जो खुशी दी है मैं इसका एहसान नहीं चुका सकता, आज से तुम मेरी बीवी हो, आज
तुमको चोद कर डॉली, मेरा लण्ड निहाल हो गया मेरी जान!
‘क्या भाई साहब? यह आप क्या कह रहे हो? इसमें एहसान की क्या बात है, आप मुझसे प्यार करते हो तो यह मेरा भी फर्ज है कि मैं भी आप को हर खुशी दूँ! आपको मेरी चूत कैसी लगी?’
‘बहुत अच्छा मेरी जान, मेरी रानी, अब तो तुम्हारी चूत हमारी है! बोलो है ना हमारी?’
‘हाँ भाई साहब यह आपकी है, जब चाहो आप इसे चोद सकते हो, पर मेरे पति के सामने वैसे रहना जैसे पहले थे, मैं नहीं चाहती कि उनको कुछ पता चले!’
मैं भी यही चाहता हूँ मेरी रानी!’ कहते हुए जेठ जी मुझे अपनी छाती से लगाकर चूमने लगे, तभी मेन डोर की घन्टी बज उठी और हम दोनों उछल पड़े, मैं बोली- आप जाकर दरवाजा खोलो, मैं अपने कमरे में जाती हूँ।
यह कहते हुए मैं अपने कपड़े लेकर भागी और रूम में पहुँच कर सीधे बाथरूम में घुस गई, जल्दी से फ्रेश होकर बाहर आई, फिर पूरी तरह तैयार होकर जब मैं रूम से निकली तो देखा कि जेठ जी से कोई मिलने आया है, उनके साथ का कोई अफसर था।
मैंने चाय नाश्ता ले जा कर टेबल पर रख दिया पर वह व्यक्ति बहुत हेन्डसम था, उसे देखते ही एक बार फिर मेरी चूत मचल उठी, मैं जितनी देर तक चाय निकालती रही उससे नयना चार करती रही।
वह भी कम नहीं था, वह भी जेठ जी से निगाह बचा कर मुझे घूर रहा था।
तभी किसी काम से जेठ जी अंदर रूम में गए कि वह एकाएक मेरी तारीफ कर बैठा- आप बहुत सुन्दर हो भाभी जी!
वह मुझे जेठ जी की पत्नी समझ रहा था शायद!
उसे जब चाय देने लगी तो उसका ध्यान केवल मेरी चूचियों पर था, मैं उसे ऐसा करते देख मुस्कुरा करके वहाँ से किचन में चली आई।
कुछ देर बाद मुझे जेठ जी ने बुलाया तो मैं वहाँ गई तो जेठ जी बोले- डॉली, आकाश कब आ रहा है? उसे फोन कर दो कि आज जल्दी आ जाए, आज मेरे अजीज दोस्त डिनर यहीं करेंगे!
‘जी भाई साहब!’ मेरे मुख से ये शब्द सुन कर वह मेरी तरफ प्रश्न वाचक निगाह से देखने लगा।
मैं वहाँ से जाने लगी, तभी जेठ जी ने कहा- डॉली, ये मिस्टर नायर है, इनका तबादला इसी शहर में हुआ है, अभी यह यहाँ नए हैं, जब तक इनका इंतजाम नहीं हो जाता, यहीं रहेंगे!
‘नायर जी, यह मेरे छोटे भाई की वाईफ है!’
मैंने नमस्ते कहा, उन्होंने भी नमस्ते कहा।
फिर मैं वहाँ से रूम में आकर पति को फोन कर के जानकारी दी, वे बोले- तुम सब्जी वगैरह लेकर खाना तैयार करो, मैं आता हूँ।
मैंने किचन में जाकर देखा कि क्या है और क्या नहीं है। फिर मैं भाई साहब से बोली- मैं सब्जी लेने जा रही हूँ।
मेरे जेठ बोले- तुम किचन में जाओ, मैं सामान ले आता हूँ।
मैं जेठ जी को बैग देकर चली आई, जेठ जी सामान लेने चले गए और मैं किचन का काम करने लगी।
इस समय मैं और नायर घर में अकेले थे, नायर की निगाह में मैं अपने लिए वासना के डोरे देख चुकी थी और यह भी महसूस किया था कि नायर एक रंगीन मिजाज के शख्स हैं, उनका व्यक्तित्व उनकी निगाह किसी को आकर्षित कर सकती है, मैं तो लण्ड चूत में लेते – लेते लण्ड की दीवानी ही हो चुकी थी, मेरा देर तक उनका देखना मेरी चूत कि आग भड़का रही थी, मैं इन्हीं ख्यालों में डूबी थी कि नायर ने मेरे पीछे से आवाज दी- मिस डॉली!
और मैं आवाज सुन कर चौंकते हुए पीछे हुई!
पर यह क्या? नायर बिल्कुल मेरे करीब था और मैं उससे पूरी तरह सट गई एक और झटका खा गई।
और जैसे ही मैंने दूर होना चाहा, मेरा पैर फिसला और मैं गिरने लगी पर मैं इस बार नायर की बाहों में थी, नायर ने मुझे पकड़ लिया था और मैं जैसे सुध बुध खोए नायर से चिपकी रही।
मेरा ध्यान तब टूटा जब नायर का लण्ड फुफकार कर मेरी चूत पर चुभने लगा, वैसे ही मुझे अपनी दशा का ध्यान आया, मैं नायर से छुट कर दूर खड़ी होकर गुस्से से बोली- नायर जी, यह क्या है? आप यहाँ क्या करने आए हैं? और कोई ऐसे पीछे खड़ा होकर पुकारता है? मैं हड़बड़ा गई, गिर जाती तो?
मैं जैसे ही चुप हुई, नायर बड़ी मासूमियत से बोला- मेरे रहते आप कैसे गिर जाती डॉली? पर मेरा ऐसा करने का कोई इरादा नहीं था,
मैंने दो तीन बार बाहर से ही पुकारा, पर आप पता नहीं किस ख्याल में डूबी थी, आपने सुना ही नहीं तो मुझे करीब आकर कहना पड़ा और आप मेरी वजह से डर गई, आई एम सो सॉरी डॉली! मुझे पानी चाहिए था!
कह कर नायर बाहर चला गया।
जब मैंने पानी ले जा कर दिया तो वह बोला- नाराज हो क्या? आप हो ही इतनी खूबसूरत कि हर कोई आपको किसी बहाने देखना चाहे मैं भी अपने को रोक नहीं पाया था!
मैं कुछ नहीं बोली और वहाँ से हटने लगी।
तभी उसकी एक आवाज और कान में पड़ी- तुम बहुत हॉट हो… पर मेरी किस्मत में कहाँ?
ये शब्द बोल कर नायर ने छुपे तौर पर सब जाहिर कर दिया, अब तो मुझे पूरा मौका मिल गया उसका जवाब देने का- नायर साहब, लक्ष्य पाने से पहले हार मान लेने वाले का किस्मत साथ नहीं देती… सफलता पाने के लिए प्रयास किया जाता है!
मैं वहाँ से चली आई, तब तक जेठ जी सामान लेकर किचन में आ गए और बैग मुझे देते हुए बोले- जान, रात में आ जाना, तुमको चोदने का बहुत मन कर रहा है, एक बार तुम्हारी बुर चोदने से तुमको चोदने की लालसा बढ़ गई है। मैं रात को इंतजार करूँगा।
मैं कुछ कहती, जेठ जी बाहर चले गए, मैं मन मार कर खाना तैयार करने लगी, पति भी आ चुके थे, सबने एक साथ खाना खाया और नायर की सोने की व्यवस्था जेठ जी के रूम में की गई।
मैं मेन गेट को लॉक करके जैसे ही रूम में जा रही थी, मुझे जेठ जी एक तरफ ले गए और बोले- मैं इंतजार करूँगा, तुम आना!
‘पर नायर है, कैसे होगा?’
जेठ जी बोले- तुम चुपचाप आधी रात को आना, हो जाएगा!
और जेठ जी चले गए।
मैं अपने रूम जाकर पूरी तरह नंगी होकर पति के बगल में लेट गई, पति तो मेरी चूत पेलने के लिए पहले से ही बिना कपड़ों के लेटे थे।
फिर हम लोग एक दूसरे से गुत्थम गुत्था होकर चूमने चाटने लगे, मैं पति का लण्ड मुँह में लेकर चूसने लगी और पति एक हाथ से मेरी चूत मसकते हुए लण्ड लालीपाप की तरह चुसवा रहे थे।
एकाएक पति ने कहा- लग रहा है कि किसी ने तुम्हारी चूत चोदकर गरमी निकाल दी है?
उनके इतना कहने से मैं डर गई पर बात बना कर बोली- आपके सिवा है ही कौन जो मेरी चूत की गरमी निकाले?
उसी समय पति ने मुझे नीचे लेकर मेरी चूत थोड़ी चाट कर मेरी बुर पर सीधे चढ़ाई कर दी, मेरी बुर पर लण्ड रखकर एक ही बार में लण्ड मेरी बुर में पेल दिया।
और मैं सोचने लगी कि मेरी पति से चुदाई के बाद जेठ से फिर चूत चुदेगी और वो भी नायर के रहते!
तो इस सोच से मैं ज्यादा गर्म होकर बुर उछालते हुए ‘आहह्ह सीसीसीइइइ आहह्ह्ह… चोद मेरे सनम, दिन की अधूरी चुदाई को मेरी चूत चोद कर पूरा करो… आहह्ह्ह ले पेल मेरी बुर… आहह्ह्ह!
और पति भी खूब गर्मजोशी से मेरी चूत पर शॉट लगा रहे थे और मैं बुर उठाकर पूरी कोशिश कर रही थी, लण्ड मेरी चूत की पूरी दीवार भेद कर मेरी बुर को चोद रहे पति भी मेरी चूची हाथों से गूंथते हुए मेरी चूत पर थाप पर थाप लगा रहे थे और मैं हर थाप को यही सोच रही थी कि यह जेठ जी का, अब नायर का थाप है!
मेरी चूत लण्ड खाते खाते भलभला कर झड़ने लगी- आहह्ह्ह सीइइइ उइइइ मम्म्म्मा आहह्ह्ह!
और मैं पति को भींच कर झड़ते हुए बुर पर लण्ड के धक्के खाती रही।


RE: Sex Kahani ह्ज्बेंड ने रण्डी बना दिया - sexstories - 06-19-2018

तभी पति ने बुर से लण्ड बाहर खींच कर मेरे मुँह में दे दिया और मैं लण्ड चाटने लगी और लण्ड मेरी मुँह में ही फायर हो गया।
पति ने झड़ते हुए लण्ड को गले तक सरका कर के वीर्य पूरा मेरे गले से नीचे कर दिया!!
पति मेरे मुँह में झड़ने के बाद बेड पर सोकर अपनी सांसों को नियंत्रित करने लगे, मैंने पति के वीर्य की एक बूंद को भी बर्बाद नहीं की, सब चाट कर साफ करके पति से चिपक कर सोने लगी।
कुछ देर बाद मैं एक बार फिर पति के लण्ड से खेलने लगी पर पति मेरी पहली चुदाई से थक चुके थे, बोले- जान सो जाओ, मुझे नींद आ रही है!
‘प्लीज जानू, एक बार और मेरी चूत चोदो, मैं एक बार और चुदना चाहती हूँ।’
‘नहीं मेरी जान, मुझे जोर की नींद आ रही है! प्लीज सो जाओ!’
मैं पति को दोबारा चोदने के लिए जानबूझकर कर कह रही थी, मुझे भी पति से चूत चुदवाने का मन नहीं था, मुझे तो जेठ जी का
लण्ड भा गया था, मैं भी पति के ना कहने पर थोड़ा नाराजगी जाहिर करके सोने की एक्टिंग करने लगी।
काफी रात बाद मैं उठकर बाथरूम गई और सुसू करने लगी।
शर्र… शर्र… की तेज आवाज जब मेरे कानों में पड़ी तो मेरी सेक्स भावना जागने लगी और मैं सुसू करने के बाद बुर को हाथ से सहलाते हुए बाहर निकली और नाईट गाउन पहन कर पति को देखा, वो गहरी नींद में सोए थे, मैं खुली चूत लिए- बिना ब्रा, पेंटी के ही दरवाजे की तरफ बढ़ी और सावधानी के साथ बाहर निकल कर दरवाजे के बाहर से बंद कर के मैं जेठ के रूम की तरफ चली गई, और मेरा हाथ जैसे ही दरवाजे पर पड़ा दरवाजा खुलता चला गया।
कमरे में एकदम घुप अंधेरा था कुछ दिख नहीं रहा था, पर मेरा घर होने के कारण मैं जानती थी कि कौन सी चीज कहाँ पर है और रूम में जेठ के और नायर के सोने की व्यवस्था अलग की थी, चारपाई पर नायर जी को और बेड पर जेठ जी!
वैसे भी जेठ रोज बेड पर सोते हैं !
मैं बेड की तरफ बढ़ी, शायद जेठ जी मेरा इंतजार करते सो चुके थे, मैं भी उनके पास जाकर लेट गई, जेठ जी भी पूरे कपड़े निकाल कर लोअर पहन कर सो रहे थे, मैं बड़ी सावधानी से बिना कोई आहट किए लोअर के ऊपर से जेठ जी के लण्ड को सहलाते हुए जेठ जी को
चूमने लगी।
जेठ जी नींद से जाग चुके थे पर अपनी तरफ से कोई हरकत नहीं कर रहे थे। मैं पागलों की तरह चूत जेठ जी की जांघ से रगड़ने लगी और फुसफुसा कर बोली- क्या हुआ मेरे जानू? गुस्सा हो गए क्या? देखो ना तुम्हारी बुर कितनी प्यासी है, इसको आपका लण्ड चाहिए जान, मेरी चूत में लण्ड डाल कर मेरी चुदाई करो, देखो ना मैं सबको छेड़कर इतनी रात बुर पेलवाने आई हूँ, चोदो ना आहह्ह जानू, लो मेरी छातियाँ पियो!
और मैंने अपना एक स्तन जेठ जी के मुँह में दे दिया।
जेठ जी खींच खींच कर चूसने लगे और मैं जेठ के बालो को सहलाते हुए चूची चुसाई करती रही।
तभी जेठ ने मुझे पलट कर मेरे ऊपर आकर बैठ गए।
मैं तो पहले से ही पूरी नंगी थी, बस एक गाउन पहने थी, जेठ जी मेरी चूची मसलते हुए अपना मुँह मेरी चूत पर लगा कर मेरी चूत का रसपान करने लगे।
और जैसे ही जेठ के होंठ मेरी प्यासी चूत पर गए, मैं मचल उठी ‘आहह्ह सीइइइ’ मेरी मादक सिसकारी कुछ तेज निकल गई, जेठ जी ने अपना हाथ मेरे मुँह पर रख कर इशारा किया कि उनके और मेरे सिवा कोई और है!
और फिर मेरी चूत को चपड़ चपड़ चाटने लगे और मैं चूत उठकर चटवाती रही।
मैं सिसकारियों को अपने होठों से दबाकर जेठ से अपनी बुर की सन्तरे की सी फांकों चुसवा रही थी।
तभी जेठ चूत चाटना छोड़कर नीचे खड़े हो गए और मुझे खींच लण्ड को मेरे मुंह में दे दिया, मैं मुँह खोल कर जेठ के लण्ड के सुपारे पर जीभ फिराते हुए लण्ड पूरे मुँह में भरकर आगे पीछे करके चूसती रही, कभी अंडे को चाटती तो कभी सुपारे को और कभी पूरा लण्ड मुँह में ले लेती और जेठ जी मुँह में ही धक्का लगा देते, जैसे मेरा मुंह नहीं चूत हो!
और मैं ‘गुग्ग्ग्ग्गुगू’ करते हुए लण्ड चूसती रही। लण्ड चाटते हुए मुझे जेठ का लण्ड कुछ मोटा लग रहा था।
और तभी जेठ ने अपना लण्ड मेरे मुँह से निकाल कर मुझे बेड पे लिटा कर मेरी टाँगें खोल कर और उनके बीच बैठकर अपने बाबूराव को
मेरी गर्म चूत पर रखकर ऊपर नीचे करते हुए रगड़ने लगे।
मैं सिसयाते हुए बोली- आहह्ह्ह सीईई मेरे चूत राजा, आपका लण्ड तो मेरी एक ही चुदाई करके फ़ूल कर मोटा हो गया है।
पर जेठ जी ने मेरी बातों पर ध्यान दिये बिना मेरी चूत को चौड़ा कर के एक धक्का मारा और आधा लण्ड मेरी गर्म चूत में घुसा दिया।
‘आहह्ह सीइइ उउफ्फ़’ करते हुए मैं अपने चूतड़ उछालने लगी और जेठ ही ने एक और तेज शॉट मार कर अपना पूरा लण्ड अंदर कर दिया और मैं आहह्ह कर उठी।
पर जेठ जी ने मेरे मुँह पर हाथ रख दिए और मेरी आहह्ह अंदर ही रह गई और जेठ जी पेलाई चालू करके मेरी बुर की नस नस को चटकाते हुए मेरी बुर चोदते हुए जब अपनी बाहों में लिया तो मुझे कुछ अजीब सा लगा पर मुझे चुदाई के सिवा कुछ नहीं सूझ रहा
था।
जेठ जी मेरे गालों को चूमते हुए लण्ड बुर में पेले जा रहे थे, मेरी चूत जेठ जी के लण्ड के हर शॉट के साथ पानी फेंक रही थी और मैं मदहोश होकर अपनी चूत उठा उठा कर चुदवाने लगी, मेरे हिलते उरोजों को जेठ जी बेरहमी से मसलते हुए लम्बे-लम्बे धक्के मारते हुए मेरी चूत को चोदते जा रहे थे और मैं ‘आहह्ह्ह सीई चोदो मेरे राजा… अब तो मैं आपकी बीवी बन गई हूँ, चोद चोद कर मुझे अपनी रखैल बना लो आहह्ह्ह आआहहह चोद बहू की चूत… ले मेरे राजा मेरी चूत चोद आहह्ह्ह याआआ राजाआ और घुसाआ अपनाआआ लण्ड’
और जेठ जी बिना कुछ बोले मेरी चूत चोदे जा रहे थे।
और फिर मुझे घोड़ी बना कर मेरी चूत में लौड़ा पेलने लगे, मैं हर शॉट पर करहाते हुए चूत मरवाती रही।
तभी एकाएक मेरी चूत पानी छोड़ कर झड़ने लगी और मैं घोड़ी बनी चूत में जेठ जी के लण्ड से चुदाते हुए जांघें भींचकर झड़ने लगी ‘आहह मैं गईइई आहह्ह सीईईई उफ्फ्फ…’
और मेरी झड़ती बुर पर जेठ के लण्ड के झटके बढ़ते गए और वो भी पंद्रह बीस शॉट मारते हुए एक शॉट घोड़े की तरह लगा कर हिनहिनाते हुए अपना बीज मेरी चूत में बोने लगे।
घोड़ी की चूत चुद कर शान्त हो गई थी, मेरा घोड़ा भी झड़कर मेरी चूत में आखिरी बूंद भी छोड़कर बेड पर लेट गया।
फिर मैं उठी और जेठ के लण्ड को चाट कर साफ किया और गाऊन पहन कर जेठ का माथा चूम कर अपने रूम में जाकर पति से चिपक कर सो गई !!
रात में जेठ से चुदने का नतीजा सुबह मेरी नींद पति के जगाने पर खुली.. और मैं सीधे बाथरूम में घुस गई और नहाकर फ्रेश होकर मैं रसोई में चली गई।
क्योंकि पति को ऑफिस जाने के लिए देरी हो रही थी और उधर जेठ के लिए भी चाय-नाश्ता बनाना था।
तभी जेठ जी किसी काम से रसोई में आए.. पर वह जैसे मुझसे गुस्सा हों.. क्योंकि वह कुछ बोल नहीं रहे थे।
मैं बोली- क्या हुआ मेरे जानू.. रात में तो खूब मस्ती से मेरी..
तभी मेरे नजदीक आकर जेठ जी मेरी बात को बीच में काटते हुए बोले- मत कहो मुझे जानू.. रात को मैं इन्तजार करते-करते थक गया और फिर ना जाने कब मुझे नींद आ गई.. पर तुम तो आई ही नहीं? 
‘ओ माई गाड.. फिर मुझे रात में किसने चोदा.. और अगर जेठ जी मेरी बात को रोककर यह बात ना कहते.. तो मैं यही बोलने जा रही थी कि रात में मेरी चूत चोदकर फुला दिए हो तो.. अब क्यों मुँह फुलाकर घूम रहे हो.. और अगर मैं ऐसा बोल देती तो क्या होता.. यानि मेरी बुर को नायर ने चोदा.. साला बोला भी नहीं बस मेरी चूत चोदता रहा।’
फिर मैं बात बनाते हुए बोली- भाई साब.. मैं बस डर के मारे नहीं आई.. कमरे में नायर जी भी सो रहे थे.. जाग जाते तो क्या होता? और मैं यह भी तो नहीं जानती थी कि आप कहाँ सोए थे।
मैं यह जानबूझ कर बोली ताकि शक को कन्फर्म कर लूँ..
‘मैं तो वहीं दरवाजे के पास ही चारपाई पर सोया था कि तुम को चोदकर इधर से ही बाहर निकाल देता.. बिस्तर की तरफ जाना ही नहीं पड़ता.. इसलिए मैंने नायर को बिस्तर पर सुला दिया था।’
मैं बात को बनाकर बोली- लो अच्छा ही हुआ जो मैं नहीं आई.. नहीं तो आप की जगह नायर मेरी चूत चोद देता.. मैं तो बिस्तर पर ही जाती और वहाँ तो नायर थे।
अब मैं कैसे कहती कि मेरी चूत की चुदाई आप के गफलत में नायर ने कर दी है।
जेठ- हाँ यह तो मैं सोचा ही नहीं और मैंने बताया भी नहीं कि मैं कहाँ सो रहा हूँ.. तुम ठीक नहीं आई.. नहीं तो नायर चोद देता और मेरी तुम्हारी पोल खुल जाती.. कि मैं तुमको चोदता हूँ। 
मैं मन ही मन बड़बड़ाई कि पोल और चुदाई दोनों खुल गई है.. बचा ही क्या है..
‘जी भाई साब.. मैं इसी लिए नहीं आई.. आज आप एक काम कीजिए.. आज आप बाहर सोना और नायर जी को अन्दर सुलाना.. कोई डर भी नहीं रहेगा और हम लोग खुल कर चुदाई का मजा भी ले लेगें..’
‘ओके मेरी जान.. आज मैं बाहर ही सोऊँगा..’ यह कहते हुए जेठ जी बाहर निकल गए। 


RE: Sex Kahani ह्ज्बेंड ने रण्डी बना दिया - sexstories - 06-19-2018

मैंने नाश्ता टेबल पर लगा दिया, पति पहले से ही बैठे थे.. तभी जेठ और नायर भी आ गए।
मैंने नाश्ता लगाते हुए गौर किया कि नायर कुछ ज्यादा ही खुश था..
सब लोगों ने नाश्ता कर लिया और पति के जाने के बाद नायर जेठ से निगाह बचाकर मेरे करीब आकर बोला- डॉली जी रात के लिए थैंक्स..
और फिर नायर और जेठ दोनों किसी काम से बाहर चले गए।
मैं घर में बैठ कर रात की नायर की चुदाई को याद कर रही थी कि ये साला नायर तो मस्त है.. उसे देख कर तो मेरी बुर चुदने के लिए सरसरा रही थी.. पर मैं नायर का लण्ड इतना जल्दी बुर में घुसवा लूँगी.. यह मैंने सोचा तक नहीं था।
नायर ने मेरी बुर की तो मस्त चुदाई की.. पर यह ठीक नहीं हुआ। वह मेरे और जेठ के सम्बन्ध को जान चुका था कि मैं उससे नहीं जेठ से चुदने गई थी.. गफलत से उससे चुद गई।
अब देखो नायर करता क्या है?!
मैं कोशिश करके उसे यह बताना चाहूंगी कि मैं तुमको देख कर रह नहीं पाई और रात चुदने चली आई.. यानि नायर जी आपके लण्ड से मैं खुद चुदी हूँ.. मेरा जेठजी से कोई सेक्स सम्बन्ध नहीं है।
बस यही सब सोचते हुए मुझे हल्की झपकी लग गई।
घन्टी की आवाज सुन कर उठी और गेट खोला तो जेठ और नायर थे, नायर मुझे देख कर मुस्कुराते हुए अपने होंठ पर जुबान फेर रहा था।
मैं वहाँ से हट गई और लंच तैयार करके जेठ और नायर को खाना खिलाकर फ्री होकर अपने कमरे में बैठ कर मोबाइल पर गेम खेल रही थी.. तभी आहट से मेरा ध्यान दरवाजे की तरफ गया।
नायर अन्दर आ रहा था.. वह सीधे मेरे बिस्तर के पास आकर मुझे एक पैकेट थमाकर बोला- डॉली जी.. यह आपका गिफ्ट है और हाँ आज रात मैं फिर इंतजार करूँगा।
मैंने आपके जेठ से बोल दिया कि बाहर मेरा बेड लगा देना.. मैं अकेला रहूँगा.. आप आएंगी ना.. मैं इंतजार करूँगा..
यह कहकर नायर बाहर चला गया.. मैंने पैकट खोल कर देखा कि दो सैट ब्रा-पैन्टी के थे, बिल्कुल लेटेस्ट डिजाइन के थे और साथ में एक कागज था जिस पर लिखा था- आज रात अपनी चूचियाँ और चूत पर.. इसमें से कोई एक जरूर पहन कर आना.. आई लव यू.. आपकी चूत का दीवाना- नायर।
मैं बस मुस्कुरा दी..
रात सब खा-पीकर जब सोने जाने लगे और मैं लाईट ऑफ कर रही थी.. तभी मेरी बगल से जेठ जाते हुए बोले- मैं कमरे में रहूँगा.. नायर बाहर रहेगा..
वे कहते हुए चले गए.. मैं कैसे कहती कि नायर सब बता चुका है और आपकी बहू की बुर पेल चुका है और आज रात दुबारा अपने लण्ड को आपकी बहू की बुर में डालना चाहता है।
मैं भी कमरे में गई तभी पति का फोन आया- मैं आज नहीं आ पाऊँगा.. तुम मेरा इन्तजार मत करना।
वे बोले और फोन रख दिया। 
मैं कुछ देर बाद जेठ के कमरे में जाकर बोल आई- मैं आऊँगी.. पर आप अन्दर-बाहर मत करना.. नहीं तो नायर को शक होगा।
मैं इतना कहकर चली आई और आराम करने लगी।
अब मैं यही सोच रही थी कि पहले किसके पास जाऊँ.. क्या नायर से फिर से चुदना ठीक रहेगा? 
यही सोचते हुए मुझे ना जाने कब नींद आ गई। फिर अचानक मेरी नींद खुलने का कारण बना किसी का हाथ… जो मेरे जिस्म पर चल रहा था।
‘कक्क्क्कौन.. हह्ह्ह्ह्है?’
‘मम्म्मैमैं.. ह्ह्ह्हूं.. नायर..’
‘अरे आप.. मेरे जेठ जी ने देख लिया.. तो..?’
‘नहीं मेरी रानी.. वह सो रहे हैं!’ और मेरी नाईटी ऊपर करके मुझे चूमने लगे और मैं भी कुछ देर बाद नायर का साथ देने लगी।
नायर ने मेरी नाईटी को निकाल दिया।
मैंने नायर के द्वारा लाए हुए ब्रा-पैन्टी को पहन लिया था। नायर भी अपने कपड़े उतार कर और अंडरवियर को भी निकाल कर एक गमछा लपेट कर आया था।
वह गमछा भी मेरे साथ मस्ती करते हुए छूट गया और नायर का लण्ड बाहर झूलने लगा। मैं नायर के मोटे-तगड़े लण्ड को पकड़ कर मुठियाते हुए मुँह में भर कर चूसने लगी, काफी देर तक मैं उसका लवड़ा चूसती रही।

तभी नायर ने लण्ड मुँह से निकाल कर मुझे बिस्तर पर लिटा कर मेरी जाँघों के बीच मेरी चूत पर मुँह रख कर मेरी चूत को चूम लिया।
‘आहह्ह्ह…’
नायर ने मेरी दोनों टांगों को कंधे पर रख लिया और वो अपनी जीभ लपलपाते हुए मेरी चूत में मुँह मारने लगा, अगले ही पल मेरी चूत की फांकों को कस कर चूसने लगा।
मैं नायर की चूत चटाई से गर्म होकर सिसकारियों को निकालते हुए चिल्लाने लगी- आआह्ह्ह.. मेरे राजा.. यसस्स स्स्सस्स.. चूसो मेरी चूत को अहह.. साले नायर.. भेनचोद.. चाट मेरी चूत को.. पूरा चाट.. इसको.. लवड़े.. आहह सीसीसीइइ.. उंउंउंउआह्ह्ह्ह..
और नायर मेरी चूत की फांकों को अलग करके मेरी बुर में जीभ डाल कर मेरी चूत की प्यास को बढ़ाते हुए काफी देर तक मेरी बुर की चुसाई करता रहा।
फिर अपने लण्ड के सुपारे को मेरी बुर पर लगा कर और पैरों को अपने कंधों पर रख कर.. शॉट लगाते हुए मेरी बुर में अपना पूरा लण्ड जड़ तक डाल कर मेरी बुर चोदने लगा।
मैं भी नायर के हर शॉट पर बस कराह रही थी ‘आह.. उई.. आह.. ऊंऊंह… ऊंऊएस्स्स्स्स.. आह..’
मैं सीत्कार करती रही और नायर मेरी चूत की धज्जियां उड़ाता रहा.. हर शॉट पर मेरी छातियां भींच लेता। 
नायर का लण्ड मेरी चूत में फूल गया था और नायर हर बार स्पीड बढ़ाकर दुगनी ताकत से लण्ड को मेरी बुर में पेल रहा था। मेरी हरामिन बुर भी लौड़े के शॉट खाकर पानी-पानी हो रही थी, इसी पानी में मेरी कामवासना का पानी भी करीब आता रहा।
अब तो मैं भी ‘आहें’ भरने लगी ‘आहह्ह्ह.. मजाआाआअ.. आह..सीईई.. और पेलो.. साले सांड.. लो मारो मेरी चूत..’ 
तभी नायर ने चुदाई का आसन बदल लिया। नायर ने बिस्तर के नीचे उतर कर मुझे बिस्तर के किनारे खींच लिया और पलट दिया। अब वो मेरी बुर में पीछे से लण्ड घुसाकर बुर चोदने लगा।
मेरी बुर एक आखिरी शॉट पर ही ‘फलफला’ उठी और मैं चादर भींच कर नायर के शॉट पर चूत दबाते हुए उसके लण्ड पर झड़ने लगी ‘आहसीईई.. आहह्ह्ह्.. मैं गई..’ 
पर नायर भी मेरी झड़ी हुई चूत की चुदाई काफी देर तक करता रहा।
फिर एक दौर ऐसा आया.. जब नायर मेरी पीठ से सट कर मेरी चूत में झड़ने लगा ‘ले डॉली.. साली छिनार.. आहह्ह्ह्.. मैंने भी तेरी चूत में अपना बीज डाल दिया.. आह्ह..’ वो यह कहकर हाँफने लगा।
नायर मेरी धकापेल चुदाई करके और मेरी बुर को वीर्य से भर दिया। अब वो निढाल होकर मेरी बगल में लेट गया और मेरे चूतड़ों को सहलाते हुए बोला- जानेमन वाकयी आप एक गरम और जबरदस्त चुदक्कड़ माल हो.. अगर आप इजाजत दें तो आप की करारी गदराई गांड को भी चोद लूँ.. एक बार फिर आप के हुस्न के नशे को जज्ब करना चाहता हूँ। 
‘अभी नहीं.. क्योंकि वैसे ही आपने मेरी चूत चोदकर मुझे पस्त कर दिया.. और अन्दर जेठ भी हैं… अगर उन्होंने हमें एक साथ देख लिया.. तो मेरे घर पर आपकी यह आखरी रात साबित होगी.. और फिर आप मेरे हुस्न के दीदार के लिए तरसते रह जाओगे।’
मैंने बिस्तर से उठकर नायर को जबरदस्ती कमरे से निकाल कर नायर को चेतावनी दे दी.. कि अगर हर रात और दिन मुझे भोगना है.. तो अब मेरे कमरे में मत आना और जब मैं इशारा दिया करूँ.. तभी मेरे करीब आना और जाकर अब सो जाओ। 
यह कहते हुए मैं अन्दर से दरवाजा बंद करके साँसों को नियंत्रित करने लगी। मैंने नायर को जानबूझ कर यह कही थी.. क्योंकि अभी मुझे जेठ के पास जाना था और अगर नायर से ऐसा ना कहती तो हो सकता था कि वह फिर कमरे में आ जाता और मुझे ना पाकर खोजता और मैं जेठ से चुदते पकड़ी जाती..
मैं कुछ देर आराम करने के बाद कमरे से निकली और नायर के करीब जाकर देखा.. नायर जाग रहा था। मुझे देख कर बोला- क्या जान.. चूत फिर चुदने को फड़क रही है क्या?
मैं हड़बड़ा उठी.. पर बात बना कर बोली- मैं यह देखने आई थी कि कुछ चाहिए तो नहीं.. और इधर की लाईट भी जल रही थी।
यह कहते हुए मैं स्विच ऑफ करके ‘गुडनाइट’ कहकर अपने कमरे की तरफ चल दी.. पर कुछ आगे जाकर जेठ की तरफ घूम गई। 
मैं यह सब जान कर कि नायर को भ्रमित करने को कर रही थी। मैं जेठ के सामने वाले दरवाजे से न जाकर मैं गलियारे की तरफ बढ़ गई.. क्योंकि जेठ वाले कमरे में दो दरवाजे लगे थे। एक सामने से.. दूसरा गलियारे की तरफ से खुलता था.. जो बाहर से ही बंद था। जिसे मैं आसानी से खोल कर बिना आहट अन्दर जा सकती थी।
यही मैंने किया भी.. मैं अन्दर पहुँच कर दरवाजा बंद करके बिस्तर की तरफ बढ़ गई। मैंने अंधेरे में टटोल कर देखा तो जेठ बिलकुल नंगे लेटे थे और शायद सो भी गए थे क्योंकि मेरे छूने से कोई हरकत नहीं हुई। मैं सीधे उनके मुरझाए लण्ड को मुँह में भर कर चूसने लगी। 
मेरे ऐसा करने से जेठ जी उठ गए.. और मेरे सर पर हाथ रखकर मेरा सर अपने लण्ड पर दबाते हुए बोले- आ गई डॉली.. आह.. मेरी जान.. मैं तो तुम्हारी इसी अदा का तो गुलाम हूँ.. तुम किसी एक के लिए नहीं हो.. तुम्हारी चूत और हुस्न केवल मेरे छोटे भाई के लिए ही नहीं बना है.. यह मेरे जैसे हुस्न के जौहरियों के लिए भी है.. इसे लोग जितना भोगेंगे.. उतना ही निखरेगी..
मैं उनका लण्ड चूसते हुए जेठ की बात सुन रही थी, मैं सुपारे को खींचकर चूसते हुए लण्ड मुँह से निकाल कर बोली- आप तो नाहक ही मेरी तारीफ कर रहे हैं.. क्या मैं सच में इतनी मस्त हूँ?
‘यस मेरी जान.. तुम्हारी हर एक अदा जान मारने के लिए काफी है..
‘ओह.. तो देखिए.. अब मेरी हॉट अदा..’ और मैं खड़ी होकर जेठ के मुँह को खींच कर अपनी चूत पर लगाकर फांकों को फैलाकर बोली- लो.. इसे चाटो..


RE: Sex Kahani ह्ज्बेंड ने रण्डी बना दिया - sexstories - 06-19-2018

मेरा इतना कहना और करना जेठ के लिए जैसे खजाना खुलना जैसा हो गया और वो मेरी चूत को चूसने-चाटने लगे।
जेठ जी मेरी बुर को पूरी तरह से मुँह में भरकर चूस रहे थे। कुछ देर चूसने के बाद मेरी बुर के ऊपर से चूमते हुए मेरी नाभि को चाटते हुए मेरी चूचियों के निप्पलों को चाटते हुए मेरे होंठों को मुँह में लेकर अपने जीभ को मेरी मुँह में भर दिए। मुझे जेठ के मुँह का स्वाद कुछ कसैला सा लगा। 
‘यह कैसा स्वाद है?’
मेरे ध्यान में आते ही मेरे दिल कि धडकन बढ़ गई.. कहीं जेठ भी इस स्वाद को समझ ना चुके हों.. और समझ गए हों.. अभी वे पूछेंगे तो मैं क्या कहूँगी?
तभी उन्होंने मेरा किस करना छोड़ दिया.. और बोले- डॉली क्या हुआ.. कहाँ खोई हो?
‘कहीं नहीं..’ मैं कहते हुए जेठ के होंठ को किस करने के लिए आगे हुई.. तभी जेठ जी बोल उठे- कैसा स्वाद है मेरे होंठों का.. और मुँह का.?
मैं उनके ये पूछते ही सन्न रह गई.. क्या कहूँ..?
‘अच्छा है.. जैसा सेक्स में होता है..’ मैं यह एक ही सांस में बोल उठी।
पर शायद जेठ जी संतुष्ट नहीं हुए.. जेठ जी बोले- मैं बताऊँ.. यह मर्द के वीर्य का स्वाद है.. सही कहा ना मैंने?
‘नहीं.. ऐसा तो नहीं है.. आपका शक गलत है.. कौन चोदेगा मुझे?
‘शायद नायर ने चोद दिया हो?’
‘यह आप क्या कह रहे? मैं थोड़ा गुस्से में बोल उठी। 
‘ऐसा कुछ नहीं है.. मैं जाती हूँ यहाँ से..’ ये कहकर मैं छूटने की कोशिश करने लगी।
‘कहाँ जाओगी मेरी जान.. क्या फिर नायर से चुदने का मन है क्या?’
मैं बस चुप हो गई.. कुछ नहीं बोली। 
तभी जेठ ने कहा- मैंने सब देख लिया है जब नायर तेरी बुर चोद रहा था.. डॉली यह ठीक नहीं कि घर की इज्जत बाहर वाले के हवाले कर दी जाए। वह क्या सोचता होगा हम लोगों के विषय में?
तभी मुझे बोलने का मौका मिल गया- सही कह रहे हैं आप.. कल रात मैं आई और बिस्तर पर गई आपसे चुदने.. और चोद नायर ने दिया.. मुझे जानकारी सुबह हुई जब आपने पूछा कि रात क्यों नहीं आई तो मेरे होश ही उड़ गए कि फिर रात में कौन ने मेरी बुर की चुदाई की.. पर मैंने आपसे यह बात छिपा ली लेकिन नायर यह जान चुका था कि मैं आपसे चुदती हूँ और वह मुझे बोला कि डॉली मैं आपके राज को राज रख सकता हूँ.. अगर तुम चाहो.. मैं उससे बोली कैसे तो नायर ने बोला कि जब मैं चाहूँ तुमको मेरे लण्ड के नीचे आना पड़ेगा.. नहीं तो मैं आप के पति से सब बता दूँगा..
मैं पहले तो डिसाईड नहीं कर पाई.. लेकिन वह अभी कुछ देर पहले मेरे कमरे में आकर पूछने लगा कि क्या सोचा है.. तो मैं कुछ नहीं बोली.. तो नायर को लगा कि मैं उसके लण्ड के नीचे चूत देने को तैयार हूँ..फिर नायर ने मेरी चुदाई की.. जिसमें ना चाहते हुए मैं भी साथ दे रही थी।
अब आप ही बताओ अगर नायर से नहीं चुदती तो क्या होगा.. आपको पता ही है.. आपको यहाँ से जाना होगा सो अलग.. और अपने भाई से ऑख नहीं मिला पाते इसी लिए मैंने चूत देकर नायर का मुँह बंद कर दिया। अगर गलत है तो अब नहीं जाऊँगी। 
मैंने जानबूझ कर बात को बढ़ाकर बताया ताकि मेरे और नायर के सेक्स सम्बन्ध को जानकर जेठ नायर को घर से निकाल देते। मैं जेठ की निगाह में मैं गिरना नहीं चाहती थी।
मेरी बातों का जेठ पर गहरा प्रभाव पड़ा, वे बोले- सॉरी डॉली.. मैं गलत समझा तुमको.. तुम्हारा कोई दोष नहीं है.. तुमको मैंने ही नायर के रहते बुलाया था जो कि नहीं बुलाना चाहिए था। तुम तो आई थी मुझे अपने बुर का सुख देने.. पर नायर ने तुम्हें चोदकर सुख ले लिया और मेरी तुम्हारी चुदाई की पोल भी जान गया।
मैं बोली- लेकिन आप यह बात नायर से मत करना कि तुमको भी जानकारी है, आप अनजान बने रहना..
‘ओके मेरी डार्लिंग…’
और फिर मैं एक बार जेठ के आगोश में थी। जेठ मेरी योनि को कुचलकर अपनी वासना को शान्त करना चाहते थे।
मैं भी एक बार फिर गरम हो कर पनियाई चूत को जेठ के लौड़े से रौंदवाने के लिए जेठ से लिपट कर अपनी छाती को जेठ के मुँह में देकर और हाथ से लण्ड को सहलाते हुए बोली- मैं आपकी हूँ.. आपके लिए कुछ भी कर सकती हूँ.. चाहे इसके लिए कितने भी नायरों से क्यों ना चूत चुदानी पड़े। 
तभी जेठ ने भी मेरी छाती की घुंडी को जोर से मसक दिया और मैं सीतकार उठी- आहह्ह्ह्… आहसीईई..
मैं भी खड़े-खड़े ही जेठ के लण्ड को पकड़ कर मस्ती भरी सिसकारी लेकर चूत पर रगड़ते हुए फनफनाते लौड़े का आनन्द ले रही थी।
जेठ जी मेरी चूचियाँ और चूतड़ों को दबा सहला रहे थे, वे बोले- नायर से चूत चुदाने पर कैसा लगा? 
‘नायर से चुदने में बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा.. मैंने तो बस बात को आगे बढ़ने से रोकने के लिए उसके लण्ड से अपनी चूत का सामना कराया था.. नहीं तो नायर के लण्ड पर मैं मूतती तक नहीं..’
तभी जेठ बोल उठे- लेकिन जानू मैं जब खिड़की से देख रहा था.. तो लग रहा था कि तुम भी पूरी तरह अपनी चूत को नायर को देकर खुलकर नायर के लण्ड से अपनी चूत की ऐसी-तैसी करा रही हो?
‘मैं बस उसका दिल रखने के लिए ऐसा कर रही थी और मैं खुल नायर के लण्ड से इसलिए खेल रही थी ताकि जल्दी उसका लण्ड वीर्य उगले और उससे पीछा छुड़ा कर मैं आपके पास आकर आपके मस्त लौड़े से अपनी बुर का कचूमर निकलवाऊँ।’ 
जेठ जी ने इतना सुनते ही मेरी चूचियों को कस कर भींच लिया।
‘आहह्ह.. सिईईई.. थोड़ा धीरे हार्न बजाओ ना.. उफ्फ्फ्फ आहसी!’
मैं भी जेठ जी के लौड़े से खेलती हुई बात कर रही थी।
तभी जेठ मेरी चूत पर हाथ फेरते हुए मुझे लेकर बिस्तर पर बैठ गए और मेरे अधरों का रसपान करने लगे। मैं बस जेठ की चौड़ी छाती से चिपकी हुई जेठ द्वारा किए जा रहे यौन आनन्द का सुख ले रही थी।
फिर जेठ ने मुझको अपनी गोद में लिटा लिया और झुक कर मेरे नाभि वाले हिस्से पर अपने तेज दांत गाड़ते हुए मेरी नाभि को चाटने लगे.. ‘आहह्ह्ह्.. उफ्फ..’ करते हुए मैं बस जेठ की गोद में मचल रही थी।
‘उइअम्म्मा.. सिइइइईई.. क्या आज आपका इरादा मेरी जान लेने का है.. जानू मेरी चूत भभक रही है.. आपके लौड़े को अन्दर लेने के लिए.. और आप मुझे केवल तड़पा रहे हो..’
‘मेरी जान, तुम्हारे जिस्म को बस चूमने चाटने का मन कर रहा है.. और वैसे भी अभी रात तो पूरी बाकी है मेरी जान..’ कहते जेठ जी मेरी नाभि को चाटते हुए मेरी बुर से लेकर नाभि तक जीभ घुमा रहे थे।
जब उनकी जीभ मेरी बुर तक पहुँचती तो मैं कमर को और ऊपर उठा रस छोड़ती बुर को ज्यादा से ज्यादा उनकी जीभ पर रगड़ना चाहती.. पर जेठ जी मेरी फड़कती योनि को तड़पाने की कसम खा हुए थे।
तभी जेठ धीरे-धीरे चूमते हुए.. जब वो मेरी चूत तक पहुँचे और मेरी चूत पर जीभ घुमाते हुए मेरी चिकनी बुर को बेदर्दी से चाटने लगे। मैं तड़प उठी और फिर जैसे ही जेठ जी मेरी बुर से मुँह हटाना चाहा.. मैं जेठ के सर पर हाथ रख कर अपनी बुर पर दबा कर सिसियाने लगी।
‘आआआ आआअहह.. ओह माय गॉड.. चूसो मेरी बुर.. आआअहह..’
मेरी मस्ती से अब जेठ ने भी मेरी चूत के निकलते रस को चाटते हुए जैसे ही मेरी चूत के फांकों को मुँह में भर कर खींचकर चूसा.. मैं दोहरी हो उठी।
‘आहसीईई.. ऐस्स्स्से.. ही चाटो आहह्ह.. खा जाओ.. मेरी बुर..’
मैं सिसयाते हुए जेठ का हाथ पकड़ कर अपने चूचियों पर रखकर दबाने लगी।
मेरा इशारा समझ कर जेठ मेरी चूचियाँ भींचते हुए मेरी बुर को पूरी तरह खींच खींचकर चाट रहे थे।
मेरी वासना चरम पर थी..
आज जेठ के प्यार का अंदाज कुछ निराला था, वे मुझे पलटकर मेरे चूतड़ों और गांड के चारों तरफ चाटते हुए पीछे से मेरी योनि को जब चाटते.. तो मैं सीत्कार उठती और उनका हाथ मेरी पीठ को सहलाता.. तो कभी मेरी छाती को दबाते और नीचे मेरी बुर के निकलते योनि रस का पान करते।
अब उन्होंने मुझे उठने का इशारा किया… मैं जैसे ही उनकी गोद से उठी.. वह बिस्तर पर पीठ के बल लिटाकर मेरे ऊपर लेटकर अपने शरीर से और नीचे लौड़े से मेरी गाण्ड और बुर की मालिश करने लगे।
मैं बोली- भाई सा.. अब आप मेरी बुर को चोद दीजिए.. मैं चुदने के लिए पागल हो गई हूँ.. बस अब आप अपने मोटे लण्ड को मेरी बुर में फंसाकर मेरी योनि को कुचल दीजिए.. अब नहीं रहा जाता.. मेरी बुर को आपके लण्ड की सख्त जरूरत है।
जेठ ने अपना हाथ नीचे ले जाकर मेरी चूचियों को पकड़ कर दबाते हुए कहा- मेरी जान.. अभी कुछ देर पहले नायर ने तुम्हारी चूत का पानी निकाल दिया था और तुम भी नायर के लण्ड पर झड़ गई थीं.. पर साली तेरी चूत फिर से लण्ड के लिए फड़फड़ा रही है..
मैं बोली- जी भाई सा.. मेरी चूत फड़फड़ा रही है.. अपने जेठ का लण्ड लेने को..
वो- मेरी बहू रानी.. जरूर.. मैं तेरी बुर में लण्ड पेलूँगा.. क्योंकि तू तो अब मेरी रखैल है..
यह कहते हुए जेठ जी ने अपना लण्ड पीछे से ही मेरी चूत में लगा कर मुझे चूतड़ों को उठाने को कहा और मैंने जैसे ही चूतड़ उठाए.. भाई साहब ने एक जोरदार शॉट मार कर अपना पूरा लण्ड मेरी चूत में उतार दिया।
भाई साहब का लण्ड मेरी योनि को चीरता हुआ मेरी बच्चेदानी से जा टकराया और मैं चीख उठी- आआआ आआहह.. मार डाला रे.. भाई साहब.. आप का लण्ड.. ओह माई गॉड..
और जेठ जी लण्ड जड़ तक पेले हुए मेरी पीठ और गले पर चूमने लगे, अपना मुँह मेरे कान पर लगा कर गरम-गरम साँसें छोड़ते हुए मेरी बुर में लौड़ा ठोकने लगे।
मैं भी उनके हर शॉट पर चूतड़ उठा कर जेठ जी का लण्ड चूत में उतार लेती। 
जेठ के लौड़े के अंडों की हर मार जब मेरे चूतड़ों और लण्ड की मार चूत पर पड़ती.. तो ‘थपथपथप’ की आवाज से कमरा गूँज उठता।
मेरे जेठ जी काफी देर पीछे से लण्ड पेलते रहे और मैं चूतड़ उठाकर लण्ड लेते हुए झड़ती रही।
‘आहह्ह.. उइइइइ.. आहसीईई.. मैं गग्गईईई.. आह राजा.. चोदो..’
लेकिन तभी जेठ जी ने मेरी झड़ती चूत से लण्ड को बाहर खींच लिया.. मेरी चूत अभी पूरी झड़ी नहीं थी। मैं उनकी इस हरकत से बौखला उठी- न..न.. न्नहहीं.. यहह्ह.. क्क्क्क्या कर रहे हैं.. चोदो.. मैं झड़ रही हूँ…
पर जेठ को जैसे सुनाई ही नहीं दे रहा था और जेठ जी ने मुझे पीठ के बल पलट दिया।


RE: Sex Kahani ह्ज्बेंड ने रण्डी बना दिया - sexstories - 06-19-2018

मैं आधी अधूरी झड़ी बुर को अपने हाथों से भींचकर पूरी तरह झड़ना चाहती थी। तभी जेठ ने मेरा हाथ बुर से हटाकर एक बार फिर लण्ड मेरी चूत पर लगा कर शॉट मारते हुए चूत में लण्ड पेल कर हुमुच-हुमुच कर मेरी अलबेली चूत चोदने लगे। 
मैं जेठ से बोलने लगी- आह्ह.. डाल दे जालिम.. मेरी अधूरी झड़ी चूत में लण्ड.. आहह्ह्ह्.. चोद पूरी तरह निचोड़ कर झाड़ दे.. आहह्ह्ह्.. सिईईईई.. उईई आहह्ह..
जेठ शॉट पर शॉट लगाते रहे और बुर फचफचाती रही। एक बार फिर मेरी अधूरी झड़ी बुर झड़ने लगी- ‘आहह्ह्ह.. मेरा हो गया.. लगाओ शॉट आहसीईई.. चोदो.. मारो मेरी बुर.. आह मैं बड़बड़ाती रही और जेठ लण्ड पेलते रहे।
मैं पूरी तरह झड़कर जेठ से लिपट कर झड़ी चूत पर लण्ड की चोट खाती रही, पर आज ना जाने क्यों जेठ झड़ ही नहीं रहे थे।
काफी देर तक चूत को रौंदने के बाद भाई साहब भी अपना अनमोल रस मेरी चूत में छोड़ने लगे।
उन्होंने मुझे बाँहों में भर कर एक आखिरी शॉट लगाकर लण्ड जड़ तक पेल कर अपने अनमोल खजाने को मेरी बच्चेदानी में डाल दिया। 
आज पूरी रात जेठ ने कई बार बुरी तरह चोदा और मैं चुदाई से थककर जेठ की बाँहों में ही सो गई। 
काफी देर तक चूत को रौंदने के बाद भाई साहब भी अपना अनमोल रस मेरी चूत में छोड़ने लगे और मुझे बाँहों में भर कर एक आखिरी शॉट लगाकर लण्ड को मेरी चूत की जड़ तक डाल कर अपने अनमोल खजाने को मेरी बच्चेदानी में डालने लगे।
आज पूरी रात जेठ ने कई बार बुरी तरह से मुझे चोदा और मैं चुदाई से थककर जेठ की बाँहों में सो गई। 
मेरी नींद सुबह 6 बजे खुली.. वो भी तब जब नायर जेठ के कमरे का दरवाजा पीट रहा था।
मैं हड़बड़ा कर उठ बैठी और जेठ को जगा कर बोली- बाहर नायर है और मैं इतनी सुबह तक आप ही के कमरे में पूरी नंगी लेटी हूँ.. अब क्या होगा?
मैं आप को बता दूँ कि जेठ ने चोद कर मुझे इतना थका दिया था कि सुबह होने का पता ही नहीं चल पाया था। 
तभी नायर ने फिर आवाज लगाई- भाई साहब उठिए.. भाभी कमरे में नहीं हैं और आप भी अभी तक सो रहे हैं।
जेठ जी मुझसे बोले- डॉली तुम जिस रास्ते आई हो.. उसी से निकल कर छत पर चली जाओ.. ताकि नायर को लगे कि तुम छत पर थीं।
जेठ ने नायर से बोला- हाँ भाई मैं उठ गया हूँ.. रुको खोल रहा हूँ।
‘ठीक है..’
जेठ ने जानबूझ कर एक बात कही- डॉली छत पर होगी.. उसकी क्या जरूरत पड़ गई?
‘भाई साहब.. चाय पीना चाह रहा था।’
जेठ जी ऐसा बोल कर यह जानना चाहते थे कि कहीं नायर ने छत पर भी जाकर ना देखा हो.. और अगर गया होगा तो कोई और बात बना कर बताई जाए..
तभी नायर ने आवाज दी- ठीक है.. मैं देखता हूँ छत पर.. आप उठिए.. 
नायर की बात सुन कर मेरी जान निकल गई.. मैं जेठ से बोली- जल्दी जाकर दरवाजा खोलो.. और रोको उसे.. नहीं तो सब काम चौपट हो जाएगा। 
मैं कपड़े लेकर नंगी ही भागकर बगल वाले गेट को खोलकर बाहर निकल कर वहीं खड़ी रही.. क्योंकि नायर बाहर था.. मैं छत पर जा नहीं सकती थी और अगर जेठ ने देरी की.. तो वह इधर भी आ सकता है। मैं नंगी खड़ी अभी यही सोच ही रही थी कि अन्दर से जेठ की नायर को आवाज देते हुए दरवाजा खुलने का आवाज आई। मैं अब भी वहीं खड़ी रहकर यह जानना चाह रही थी कि नायर कमरे में अन्दर गया कि नहीं। 
तभी नायर की आवाज सुनाई दी- बहुत देर तक सोते रहे हैं?
‘हाँ यार.. रात ठीक से सो नहीं पाया था.. और सुबह नींद आ गई।’
नायर बोला- भाभी ने अभी तक चाय ही तक नहीं पिलाई और वे इतनी सुबह छत पर क्या करने चली गईं?
जेठ ने कहा- आप बैठो.. मैं बुलाता हूँ।
मैं इतना सुनते सीधे छत पर भागी और छत पर पहुँच कर ही रूकी। मैं हड़बड़ाहट में भूल ही गई थी कि मैं पूरी नंगी ही खुली छत पर आ गई हूँ।
मैं यहाँ आपको बता दूँ कि मेरी छत पर दो तरफ से ऊँची दीवार है.. पर दो तरफ खुला है.. और जिस तरफ खुला है.. उसके एक तरफ सड़क है और उस तरफ छत पर लोहे की रेलिंग लगी है.. जिससे सब कुछ दिखता है.. और दूसरी तरफ एक मकान था.. जिस पर तीन फुट ऊँची दीवार है.. जो बिलकुल मेरी छत से सटी हुई है। मैं पूरे इत्मीनान से नंगी खड़ी हो कर लम्बी-लम्बी साँसें ले रही थी। इस हड़बड़ी में मैं यह भूल गई थी कि कोई भी बगल वाली छत से मुझे देख सकता है।
मैंने जैसे ही नीचे से जेठ के बुलाने की आवाज सुनी.. मैं अपने होश में आई और मेरे पास नाईटी तो थी.. जिसे मैंने झट से पहन ली.. पर ब्रा-पैन्टी नहीं पहनने की वजह से मेरा जिस्म पूरी तरह से खुला ही था। 
तभी मेरा ध्यान बगल वाली छत पर गया.. उधर बगल वाले चाचा जी थे.. जो अक्सर सुबह के समय छत पर आकर कसरत करते थे। आज तो वह एकटक मुझे घूर रहे थे.. वो भी एक कच्छा पहने हुए थे।

मेरा ध्यान जैसे ही उनके कच्छे पर पड़ा.. उसमें में से उनका लण्ड बाहर को निकला हुआ था.. जो कि इस टाईम पूरा तन कर खड़ा था.. और वह एक गधे के लण्ड के समान झूल रहा था। 
मैं उनके लण्ड को देखने में यह भूल गई कि वह भी मुझे देख रहे हैं.. शायद उन्होंने मुझे पूरी नंगी देख लिया था.. इसी लिए वह मुझे वासना भरी निगाहों से देख रहे थे। उनकी निगाहें मेरे पूरे जिस्म को निहार रही थीं.. और मैं यह सोचकर शर्म और डर से लज्जित हो उठी कि पता नहीं वे मुझे पूरी तरह से नंगी देख कर क्या सोच रहे होंगे।
कहीं वे इस बात को किसी से कह बैठे.. तो क्या होगा.. बस यही सोचते हुए मैं शर्म से गड़ी जा रही थी और अपने अधखुले जिस्म को ढंकने की नाकाम कोशिश करते हुए मैं नीचे जाने के लिए जैसे ही सीढ़ी की तरफ जाने लगी..
तभी चाचा जी की आवाज मेरे कानों में पड़ी.. और मेरे पैर वहीं जम गए।
जिन्होंने कभी मुझसे बात तक नहीं की है.. आज वह मेरा पूरा नंगा जिस्म ही देख चुके हैं और मेरे जिस्म को नंगा देख कर आज इनका लण्ड भी फड़फड़ा उठा है।
उन्होंने अपना लण्ड बाहर निकाल कर मुझे भी अपने लौड़े के दीदार करा दिया है और अब पता नहीं क्या कहेंगे कि बहू कोई बात है क्या.. जो तुम बिना कपड़ों के छत पर घूम रही हो.. और जो कुछ भी पहने हुए हो.. वह भी तुम्हारे हसीन शरीर को ढकने के लिए काफी नहीं है।
इस समय मेरा मुँह सीढ़ी की तरफ था और मेरी पीठ और चूतड़ चाचा जी की तरफ थे। मैं उनके मुँह से ऐसे शब्द सुन कर और यह सोच कर कि शायद वे इस समय मेरे चूतड़ और उसकी दरार में निगाह करके बोल रहे हैं.. और कहीं ना कहीं वह मुझे ऐसी हाल में देख कर उत्तेजित होकर खुले सेक्सी शब्द बोल रहे हैं।
पर मैंने उनकी बातों का कोई जबाब ना देते हुए नीचे को भाग आई.. पर नीचे एक और मुसीबत थी.. नायर से मेरा सामना हो गया। नायर ने मेरी तरफ बढ़कर मुझे पकड़ लिया और बोला- कहाँ गई थीं जानम.. इतनी सुबह छत पर कहीं और किसी से चुदने गई थीं क्या?
मैं नायर से बोली- रात में आपने जिस हालत में मुझे चोदकर छोड़ा था.. वैसे ही तो हूँ.. बस यूँ ही छत पर खुली हवा लेने चली गई थी।
यह बात मैं नायर से कह जरूर रही थी.. पर मेरी निगाह जेठ को खोज रही थी.. जिसे नायर ने ताड़ लिया कि मैं किसे देख रही हूँ।
‘आपके जेठ बाथरूम गए हैं.. इस समय मेरे और तुम्हारे सिवा कोई नहीं है..’
यह कहते हुए नायर ने मुझे खींच कर अपनी गोद में उठा कर कमरे में लेकर चला गया और मुझे बिस्तर पर पटक कर मेरी छाती को मुँह में भर कर चूसने लगा। 
‘यह आप क्या कर रहे हो.. अगर भाई साहब आ गए तो क्या होगा..? छोड़ो मुझे..’
पर नायर मेरी चूचियों को आटा की तरह गूँथते हुए पी रहा था और एक हाथ से मेरी चूत पर रख कर भींचने लगा। छत पर घटी घटना से मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया था.. जिसमें नायर ने अपनी एक उंगली डाल दी और आगे-पीछे करने लगा। तभी बाहर से बाथरूम का दरवाजा खुलने की आवाज आई और नायर मुझे छोड़कर जाने लगा।


RE: Sex Kahani ह्ज्बेंड ने रण्डी बना दिया - sexstories - 06-19-2018

मैं नायर से गुस्से में बोली- जो आप अभी कर रहे थे.. ठीक नहीं था.. मैं आपको पहले भी मना कर चुकी हूँ.. यदि आप को मेरी इज्जत की कोई परवाह नहीं है.. तो मैं आपसे कोई रिश्ता नहीं रखूँगी..
‘सॉरी बेबी.. गलती हो गई.. अब नहीं करूँगा..’ यह कहते हुए नायर बाहर निकल गया और मैं बाथरूम में चली गई। 
फिर मैं फ्रेश होकर नाईटी के नीचे ब्रा-पैन्टी पहन कर रसोई में चली गई और चाय बनाकर जेठ और नायर को दे कर और अपनी चाय लेकर अपने कमरे में आकर सोचने लगी कि आज जो हुआ ठीक हुआ कि नहीं.. पता नहीं क्या होगा। 
तभी जेठ मेरे कमरे में आकर मेरे से बोले- डॉली, नायर को देख कर लग नहीं रहा कि यह साला तेरी बुर को चोद चुका है.. फिर भी उससे बच कर रहना..
यह कहते हुए उन्होंने मेरे होंठ का एक चुम्बन लिया.. फिर मेरी छाती दाबकर बोले- डॉली.. नाश्ता तैयार कर दो.. नायर मेरे साथ ही बाहर जाएगा।
‘ओके.. मैं अभी तैयार करती हूँ।’ 
फिर मैंने नाश्ता तैयार करके दोनों को करा दिया।
जेठ और नायर बाहर चले गए और अब मैं घर में अकेली थी। मेरे दिमाग में वही सब बातें और सीन चल रहा था और बगल वाले चाचा का गधा चाप लण्ड भी मेरी आँखों में घूम रहा था।
क्या मस्त लण्ड था.. 
चाचाजी की उम्र तो 55 की होगी.. पर लण्ड और कसरती जिस्म मस्त है.. एक बार फिर मैं मान-मर्यादा को भूल कर चूत में उनका लण्ड लेने का ख्वाब देखने लगी।
मैं नहा-धोकर अच्छी तरह तैयार होकर बिना ब्रा-पैन्टी के एक टॉप और स्कर्ट पहन कर फिर से छत पर चल दी.. यह देखने कि मेरे हुस्न को देख कर वह अब भी जरूर छत पर मेरी ताक में होंगे।
मैं गीले कपड़े लेकर छत पर गई ताकि ऐसा लगे कि मैं नहाकर कपड़े फैलाने आई हूँ। छत पर पहुँच कर मैंने बगल वाली छत पर निगाह दौड़ाई.. पर वह कहीं नहीं दिखे.. मैं थोड़ा दीवार की तरफ बढ़कर चारों तरफ देखने लगी.. पर वहाँ कोई नहीं था।
मैं मायूस होकर अपनी बुर दाबते हुए नीचे आने लगी, तभी मुझे बगल वाली छत पर बने कमरे के खुलने की आवाज आई।
मैं रूक कर देखने लगी.. वही चाचा थे, वह सीधे मेरी तरफ आ रहे थे।
मेरे जिस्म में थरथराहट होने लगी और जी घबड़ाने सा लगा।
तब तक वह मेरे पास आकर बोले- किसे खोज रही हो बहू?
मैं उनके इस सवाल से घबरा गई- कक्क्हाँ.. किस्स्स्सी.. को तो न्..न्..न्..नहीं..
‘लेकिन मैंने कमरे की खिड़की से देखा था कि तुम किसी को ढूँढ रही थीं?’
‘नहीं तो..’ 
ये सब बातें करते हुए चाचा दीवार फांद कर मेरी छत पर आ गए और बिल्कुल मेरे करीब आकर बोले- तुम मुझे ही देख रही थी ना.. मुझे पता है बहू.. अगर औरत प्यासी हो.. तो मन भटकता ही है.. और अगर कोई मेरा लौड़ा देख चुकी हो.. तो मैं समझ सकता हूँ कि उसके तन-बदन में आग लग गई होगी.. तुम चाहो तो तुम्हारी आग बुझ सकती है और मेरी भी..
‘छी:.. आप कैसी बातें कर रहे हैं कोई अपनी बहू समान औरत से ऐसी बातें करता है क्या? आप बहुत गंदे हो.. मैं वैसे ही देख रही थी.. इसका मतलब यह तो नहीं कि मैं आपको ही देख रही थी.. और सुबह मैं अपनी छत पर थी.. चाहे जैसे थी.. पर आप ही मुझे घूर कर देख रहे थे और अपना ‘वह’ निकाल कर दिखा रहे थे।’ 
‘तुम ठीक कह रही हो.. पर तुम्हारी वजह से मेरी सोई हुई वासना जाग गई है.. और तुम चाहे जो भी कहो.. तुम भी मेरा लण्ड देख कर चुदने के लिए व्याकुल तो हो..’ ये कहते हुए बुड्ढे ने मुझे पकड़ कर चिपका लिया।
मैं घबराते हुए बोली- ये क्या कर रहे हैं.. कोई देख लेगा.. क्या कर रहे हो.. छोड़ो मुझे.. 
‘मैं छोड़ दूँगा.. पर तुम एक बार जो अधूरा कहा है.. वो पूरा कहो.. मैं ‘वह’ क्या दिखा रहा था.. बोल दो.. तो अभी छोड़ दूँगा..’
मैं छटपटाती रही.. पर वह मुझे कस कर अपनी छाती से चिपकाए हुए बोले- जल्दी करो.. नहीं तो कोई देख लेगा।
मैं सर नीचे करके बोली- लण्ड.. अब छोड़ो..
वह बोले- कैसा लगा.. बता दो तो जरूर छोड़ दूँगा।
‘आप चीट कर रहे हैं..’
‘आपको जाना है.. तो बोलना पड़ेगा और वो भी सही-सही..’
मैं क्या करती.. मेरे पास उनकी बात मानने के सिवा कोई चारा नहीं था- ‘अच्छा लगा..’
‘एक बात और.. तुमको मेरे लण्ड को देख कर चुदने का मन कर रहा है ना?’ 
मैं छूटने के लिए भी और मेरे दिल में लण्ड भा गया था इसलिए भी बोल पड़ी- हाँ.. कर रहा है चुदने का मन..
तभी मैं चिहुँक उठी.. उन्होंने अपना एक हाथ ले जाकर मेरी बुर को दबा दिया था..
‘आउआह्ह..’ 
मेरी सीत्कार सुन कर उन्होंने मुझे छोड़ दिया.. मैं वहाँ से सीधे नीचे आते वक्त बोली- मैंने जो कहा है.. सब झूठ है.. मेरा कोई मन नहीं है..
पर उन्होंने मुस्कुराते हुए मुझे एक किस उछाल दिया।


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मैं वहाँ से भागकर अपने बेडरूम में जाकर उस पल को याद करने लगी कि क्या ठरकी बुढ्ढा है.. साला इतना जल्दी मेरे जोबन पर हाथ लगा देगा.. मुझे यह उम्मीद ही नहीं थी.. पर उसने जो हरकत की.. वह मेरी चूत के आग को भड़काने के लिए काफी थी।
चाचा बहुत रसिक मिजाज लग रहा है.. और उसका लण्ड भी बहुत हैवी है.. मेरे मन मस्तिष्क में अभी यह चल ही रहा था कि तभी घन्टी की आवाज सुनाई दी और मैंने गेट खोला तो सामने पति खड़े थे।
पति ने मुझे वहीं गले लगा कर चूम लिया, फिर अन्दर आकर गेट बन्द करके मुझे गोद में उठा लिया और अन्दर ले जाकर बिस्तर पर लिटाकर मेरी चूची को दबाते हुए बोले- कैसी कटी मेरी जान की रात मेरे बिना? 
मैं मन ही मन बुदबुदाई कि बहुत ही मस्त.. काश आज भी नहीं आते.. तो दिन में बगल वाले ठरकी से कुछ और मजे ले लेती।
‘क्या सोच रही हो..?’
‘कुछ नहीं.. आप खुद ही देख लो मेरी रात कैसी रही.. आपके बिना मेरी मुनिया का क्या हाल हुआ है..’
मैंने जानबूझ कर दो अर्थी बात कही थी.. क्योंकि आप सभी तो जानते ही हैं रात में मेरी चूत कई बार चोदी गई। 
तभी पति ने मेरी स्कर्ट को ऊपर करके मेरी चूत पर हाथ रख कर हल्का सा दबाकर पूछा- कैसी हो.. मेरे बिना कैसी रही रात?
पति चूत से बात कर रहे थे और फिर मेरी चूत की फांक को खोल कर देखने लगे।
‘यह क्या.. तुम तो आँसू बहा रही हो.. मेरी मुनिया को लण्ड चाहिए क्या?
उन्होंने पुचकारते हुए अपनी एक उंगली मेरी बुर में डाल दी। 
‘आहह्ह्ह्.. सीईईई..’
मैं सुबह से ही चाचा की हरकतों से इतना गरम थी और चाचा के लण्ड के विषय में सोचकर मेरी चूत मदनरस छोड़ रही थी.. उस पर से पति के बुर में उंगली पेलने ने मेरी सिसकारी निकाल दी।

‘वाह मेरी जान.. मेरी मुनिया ही नहीं तुम भी चुदने को तड़प रही हो..’
मैं कैसे बताऊँ आपको कि मैं रात भर चुदी हूँ.. तब तो यह हाल है.. औऱ यह बगल वाले बुढ़ऊ का भी लण्ड लेने को उतावली है।
मैं मन में बुदबुदा रही थी।
फिर पति मेरे ऊपर लेट कर मेरे होंठों को चूसते हुए मेरी बुर मसकने लगे। मुझे लगा कि कुछ देर और चला तो हम लोग अभी चुदाई के गोते लगाने लगेंगे।
मैं पति से बोली- आप पहले नहा लो और कुछ खा लो.. फिर अपनी मुनिया की गरमी निकालना। 
मेरी बात मान कर पति बाथरूम में नहाने चले गए और मैं रसोई में चली गई। मैं खाना गरम करके टेबल पर लगा कर पति के आने का वेट करने लगी। कुछ देर बाद बाथरूम का दरवाजा खुलने की आवाज आई और पति बेडरूम से पूरे नंगे ही बाहर निकल आए थे। टावेल से बाल सुखाते हुए मेरी बगल में आकर किस करके बैठ गए। 
‘अरे.. यह क्या.. आप ऐसे ही नंगे ही खाना खाओगे?’
‘हाँ मेरी जान.. इसके बाद तो मुझे तुम्हारी चूत चोदनी है.. क्योंकि रात से आपके लण्ड महाराज भी बहुत उछल रहे हैं अपनी मुनिया की चुदाई करने के लिए।’
मैं बस मुस्कुरा दी। 
तभी पति ने कहा- मैं सोचता हूँ कोई खाना बनाने वाले को रख लूँ और वह घर का काम भी कर लिया करेगा.. सारा काम तुमको करना पड़ता है।
‘मैं भी यही सोच रही थी.. पर मैंने कभी आपसे कहा नहीं.. बगल में एक खाना बनाने वाली आती है.. मैं उससे बात करूँ?’ 
‘नहीं.. आज मेरे पास एक लड़का आया था.. उसका नाम संतोष है.. उसे काम चाहिए.. वह कह रहा था कि वह हर प्रकार का खाना बना लेता है और इससे पहले वह एक साहब के यहाँ काम करता था। मेरे पूछने पर वह बोला सर मैं खाना पोंछा और घर का सब काम करूँगा.. मैंने उसे शाम को बुलाया है। तुम कहो तो कल से आ जाए.. या तुम एक बार खुद मिल कर डिसाईड कर लो कि कैसा है।’
‘ठीक है शाम को उसे घर का पता देकर भेज देना.. मैं बात कर लूँगी।’
फिर हम लोगों ने खाना खाया और मैं बर्तन आदि समेट कर रसोई में ले गई। तभी पति नंगे ही रसोई में आकर मुझे गोद में लेकर बेडरूम में चले आए।
‘आकाश अभी बहुत काम है.. छोड़ो बाद में..’ 
पर पति ने मेरी एक ना सुनी और मुझे भी नंगी करके बिस्तर पर लिटा कर खुद मेरे ऊपर चढ़ कर मेरे छाती और निप्पलों को मसकने लगे। एक तो मेरे चूचुक मिसवाने के लिए गैर मर्द के हाथ लगाने से सुबह से ही खूब तने हुए थे.. ऊपर से पति ने मेरे चूचुकों को कसके पकड़ लिया। 
चूचुक दबाते हुए बोले- वाह जान.. आज तो तुम्हारी चूचियों में गजब का तनाव है.. ये भी तो फड़क रही हैं मसलवाने के लिए और तुम मना कर रही थीं। तभी पति ने मेरी घुंडियों को जोर से मसक दिया। 
‘आहह्ह्ह.. सीईईई.. ओफ्फ्फ्फ..’
मैं पति के सीने से चिपक गई। मेरी हालत तो बगल वाले चाचा ने अपने लण्ड दिखाकर और मुझे अपने सीने से चिपका कर जो अश्लील शब्द मुझसे बुलवाए थे.. तभी से मेरी बुर चुदने के लिए मचल रही थी। 
अब अचानक पति ने मुझे पकड़ करके झुका दिया और पति अपना गरम सुपाड़ा.. मेरे गुलाबी होंठों पर रगड़ने लगे- ले चूस इसे..
और मैंने अपने होंठ खोल कर सुपाड़े को मुँह में भर लिया। मैं अपने गुलाबी.. मखमली होंठों से पति के सुपाड़े को रगड़ते हुए लण्ड अन्दर ले रही थी साथ ही मैं सुपाड़े के निचले हिस्से को चाट भी रही थी।
थोड़ी देर तक मैं ऐसे ही पति के मोटे सुपाड़े को चूमती-चाटती रही। तभी पति ने उत्तेजित होकर मेरे सर को और जोर से अपने लण्ड पर दबाया और आधा लण्ड मेरे मुँह में घुसा दिया।
मैं अपनी गर्दन ऊपर-नीचे करके खूब कसके चूस रही थी।
कुछ देर चुसाने के बाद पति ने लण्ड मेरे मुँह से खींच कर बाहर निकाल लिया और मुझे बिस्तर के सहारे घोड़ी बना कर मेरे पीछे मेरी चूत और गाण्ड पर लण्ड घिसने लगे।
मेरी रस चूती बुर पर.. तो कभी रस लगे लण्ड से मेरी गुदा द्वार पर.. लण्ड दबा देते। थोड़ी देर चूत और गुदा के छेद की लण्ड से मालिश करने के बाद पति ने लण्ड मेरी चूत पर सटाया और एक झटके में सुपाड़ा अन्दर पेल दिया।
‘अह्ह्ह्हा आआइइइइइ इइइइइइ..’
मैं पति के लण्ड पेलने से खुद पर नियंत्रण नहीं रख पाई और मेरे मुँह से तेज सिस्कारियों की आवाज निकलने लगी। 
पति मुझे घोड़ी बनाए हुए थे.. इसलिए मेरी फूली हुई चूत बाहर को निकली हुई थी। ऐसे में पति के लण्ड का हर शॉट जब मेरी चूत पर कस-कस के पड़ता.. तो मेरी चूत निहाल हो उठती। पति का लण्ड मेरी चूत रगड़ता घिसता ही जा रहा था।


RE: Sex Kahani ह्ज्बेंड ने रण्डी बना दिया - sexstories - 06-19-2018

मुझे एक नए किस्म का मजा मिल रहा था.. इसी तरह मुझे चोदते हुए पति ने मेरे गोल-गोल हिलते हुए मम्मों को पकड़ उन्हें दबा-दबा के कसके चोदते रहे। मैं चूत में लण्ड पाकर बेहाल होकर हर शॉट खुल कर ले रही थी। मैं फूली हुई चूत को पीछे करके लण्ड के हर शॉट को चूत पर लगवाती हुई कराहती रही ‘ओह.. उफ्फ आहह्ह्ह..’ 
पति मेरी चूची रगड़ते.. पीठ और गले पर चूमते.. कस-कस कर बुर से लण्ड सटाकर चोद रहे थे। मैं भी बुर में सटासट पति का लण्ड पेलवा रही थी। मेरी चूत शॉट लेते हुए झड़ने के करीब थी.. मेरा पानी गिरने ही वाला था।
अब पति भी चूत में लण्ड और तेजी से ठोक रहे थे। तभी पति ने मुझे किचकिचा कर चपका लिया और कसकर पकड़ लिया और पति के लण्ड से पिचकारी निकलने लगी।
‘ओह नहींईईई.. अह्ह्ह्ह्ह ह्ह्ह्ह्.. ह्ह्ह.. यह्हह्ह क्क्क्क्क्या किया.. मेरी चूत प्यासी है.. और चोदो ना.. नहींईईई ईईई.. ऐसा ना करो.. मेरी बुर मारो.. चोदो..’
मैं चिल्लाती रही.. पर पति झड़ कर मेरे ऊपर से उतर कर लम्बी-लम्बी साँसें लेते हुए बोले- ओह्ह्ह.. सॉरी.. मैं रात से इतना गरम था कि तुम्हारी गरम चूत में पिघल गया.. आज रात में जरूर पानी निकाल दूँगा। 
मैं कर भी क्या सकती थी.. मैं प्यासी चूत लेकर पति के बगल में लेट गई। लेकिन मेरा तन-मन बैचेन था। इस टाइम मुझे कुछ सूझ ही नहीं रहा था। मैं कुछ भी ऊँच-नीच कर सकती थी.. मेरे ऊपर वासना का नशा हावी था। अभी मेरे दिमाग में यही सब चल रहा था और तब तक पति खर्राटे भरने लगे। 
मैं बगल वाले चाचा से जो हुआ वह आगे नहीं होगा यही सोच थी कि चाहे अंजाने या जान कर जो भी हुआ.. वह अब नहीं होगा.. वह हैं तो मेरे पड़ोसी.. मैं उनसे अब कभी नहीं मिलूँगी.. ना ही उनकी तरफ देखूँगी.. पर मेरी वासना शायद अब मेरे बस में नहीं रह गई थी।
मुझे इस समय कोई मर्द नहीं दिख रहा था.. जो मेरी चूत को अपने लण्ड से कुचल कर शान्त कर सके.. बस मेरी निगाह में बगल वाले चाचा दिख रहे थे और मैं सेक्स के नशे में बिलकुल नंगी ही छत पर जाने का फैसला करके चल दी।
मैं पूरी तरह नंगी ही सीढ़ियाँ चढ़ती गई। मैंने सेक्स के नशे में चूर होकर यह भी नहीं सोचा कि इस वक्त वह होंगे कि नहीं.. कोई और होगा तो क्या होगा.. पर मेरी वासना मेरी चूत को पूरा यकीन था कि ऊपर आज जरूर किसी का लण्ड मिलेगा और मेरी चूत पक्का चुद जाएगी।
मैं वासना में अंधी पूरी तरह नंग-धड़ंग छत पर पहुँच कर देखने लगी। उधर कोई नहीं दिखा.. बगल वाली छत पर हर तरफ निगाह दौड़ाई.. पर चाचा कहीं नहीं दिखे।
मैं अपनी किस्मत को कोसते हुए दीवार से टेक लगाकर अपनी टपकती चूत और मम्मों को अपने हाथों से सहलाने लगी। मेरी फिंगर जैसे ही चूत की दरार में पहुँची.. मेरी आँखें मुंद गईं.. ‘ओफ्फ.. आहह्ह्ह्.. सिईईई..’ 
मेरे होंठ काँप रहे थे और मैं यह भी भूल गई थी कि अगर चाचा के सिवाए कोई और देख लेगा तो मुसीबत आ जाएगी.. पर मैं आँखें बंद करके अपने ही हाथों अपनी यौन पिपासा को कुचल रही थी। मैं जितनी चूत की आग को बुझाना चाहती थी.. आग उतना ही भड़क रही थी। 
तभी मैं चाचा को याद करके चूत के लहसुन को रगड़ने लगी और यह सोचने लगी कि चाचा मेरी रस भरी चूत को चाट रहे हैं और मैं सेक्स में मतवाली होकर चूत चटा रही हूँ। मैं अपने दोनों हाथों से बिना किसी डर लाज शर्म के अपने मम्मे मसकते हुए सिसकारी ले-ले कर चूत को खुली छत पर नीलाम करती रही। 
मैं जल्द से जल्द वासना के सागर में गहरे गोते लगना चाहती थी। मैं सेक्स के नशे में इतनी चूर थी कि मुझे कुछ ख्याल ही नहीं रह गया था, मैं कल्पनाओं में खोई हुई चूत में लण्ड लेना चाहती थी, मैं बाहरी दुनिया से बेखबर आँखें बंद किए हुए मुझे बस यही दिख रहा था कि मेरी चूत को चाचा अपने जीभ से चाटे जा रहे हैं।
मैं यही सोचती रही और मुझे मेरी कल्पना हकीकत लगने लगी, मुझे सच में लगने लगा कि चाचा मेरी चूत को चाटते हुए बुर की नरम और मुलायम पंखुड़ियों को अपने मुँह में भर कर चूसे जा रहे हैं। मैं उनसे चूत चटवाने का मजा लेती रही और चाचा का हाथ मेरी पूरे शरीर की मालिश करते हुए मेरी बुर में जीभ डालकर मेरी चूत की पोर-पोर को उत्तेजित करते हुए मुझे मेरी चरम सीमा के करीब लाते जा रहे थे।
‘आहह्ह.. उफ्फ.. सीसीसीइ इइइ.. ओह्ह्ह्ह्ह सीई..’ 
चाचा एक हाथ से मेरी चूचियों को पकड़ कर मसकते हुए मेरी चूत को कुत्ते की तरह चाटते जा रहे थे और मैं चाचा के सर को पकड़ कर अपनी बुर पर चांपते जा रही थी। 
तभी चाचा का एक हाथ मेरे पिछवाड़े पर घूमने लगा। अब वे मेरे चूतड़ों की दरार को मसकते हुए मेरी गाण्ड के छेद में एक उंगली डाल कर मेरी चूत का रस पीते जा रहे थे।
मैं खुली छत पर सब कुछ भूली हुई.. बस अपनी बुर को राहत देना चाहती थी, मैं बस चाहती थी कि कब बुर में चाचा का मस्ताना लण्ड घुस जाए और मैं चाचा के लण्ड को बुर में लेते हुए भलभला कर झड़ जाऊँ ‘आहह्ह्ह सीसी सीसी स्स्स्स्सीइइ इई..’ 
चाचा का हाथ मेरे खुले जोबन को धीरे-धीरे सहला रहा था और होंठ मेरी बुर को चाट रहे थे।
‘आहह्ह्ह..’
जब चाचा मेरे कड़े-कड़े चूचुकों को मसलते.. तो मेरी सिसकी निकल जाती। मेरी बुर हरपल झड़ने के करीब हो रही थी.. कभी भी मेरी चूत से रस निकल सकता था। कभी भी मेरी चूत पानी छोड़ सकती है।
तभी एकाएक मुझे महसूस हुआ कि कोई ने मेरी जाँघों पर अपना हाथ रख कर कसके दबोच लिया हो.. मुझे सेक्स की जगह जाँघ पर चिकोटी काटने से पीड़ा हुई.. और मुझे महसूस हुआ कि मेरी बुर पर अब कोई हरकत नहीं हो रही है। मैं कल्पना में जिस सर को पकड़ कर बुर पर दाब कर चटा रही थी.. वह हकीकत लगने लगा। 
मेरे मन मस्तिष्क में बातें चलने लगीं क्या यह हकीकत में हो रहा था? सच में कोई है?
कोई है तो क्या हुआ.. मुझे मेरी मंजिल चाहिए.. चाहे जो हो.. है तो मर्द.. पर तभी दुबारा दबाव देते हुए उसने मुझे झकझोर दिया और अब मैं सेक्स से कांपते हुए ना चाहते हुए भी मैंने आँखें खोलीं..
मेरे दोनों जाँघों के बीच में चाचा बैठे थे.. यानी मेरी कल्पना हकीकत हो गई थी। मेरी चूत मेरी चूचियों और मेरे चूतड़ चाचा के हाथों से रोंदे जा रहे थे।
‘आअअअ अअआप?’
‘हाँ मेरी जान.. आपका दीवाना..’
यह कहते हुए चाचा ने एक बार फिर मेरी बुर पर मुँह लगा दिया..
मेरे ऊपर तो सेक्स हावी था ही.. मैं सिसकारी लेकर एक बार फिर सब भूल कर चाचा का सर चूत पर दाबने लगी ‘आहह्ह्ह.. सीईईई.. ऐसे ही चाटो.. मैं झड़ जाऊँगी.. आहह्ह्ह.. मेरी प्यास बुझा दो.. आहसीईईई.. आहह्ह्ह..’
एक बार फिर चाचा मेरी चूत पीना छोड़ कर खड़े हो गए और मुझे अपनी बाँहों में भर लिया।
‘चच्च्च्च्चाचा.. यय्य्य्य्ह कक्क्क्क्क्या.. कर रहे हो.. मेरी प्यासी चूत को चाटो न.. ऐसा ना करो!’
मैं चाचा के चूत पीना छोड़ने से पागल हो उठी थी.. मुझे सेक्स चाहिए था.. मुझे इस टाईम सेक्स के सिवा कुछ दिख सुन नहीं रहा था।
तभी चाचा मेरे होंठों के पास अपने होंठ सटाकर बोले- अच्छा.. सच-सच बताओ.. मेरी जान.. तुम्हारा भी मन कर रहा था कि नहीं मुझसे मिलने को.. मेरे लण्ड को अपनी चूत में लेने को.. बोलो ना? जब तुम खुल कर बोलोगी.. तभी मैं तेरी चूत की सारी गरमी को चोद कर ठंडी कर दूँगा… बोल मेरी जान..


RE: Sex Kahani ह्ज्बेंड ने रण्डी बना दिया - sexstories - 06-19-2018

चाचा मेरे तमतमाते होंठों को चूमने लगे और मैं सेक्स में मान-मर्यादा भूल कर अपने ससुर के समान बुढ्ढे से बेहया बन गई थी ‘हाँ.. कर रहा था.. बहुत कर रहा था.. इसी लिए मैं यहाँ आई थी.. आपका प्यार पाने..’
मैंने अपने मन की बात सच-सच बता दी।
चाचा के होंठ अब मेरे गालों पर थे- और क्या करवाने को कर रहा है?
मेरे गालों को काटते हुए चाचा ने पूछा।
‘वही सब करवाने को.. जो आप करने को आप यहाँ आए हैं..’
‘नहीं.. आज तुम्हारी सजा यही है कि आज तुम खुलकर बताओ कि तुम्हारा मन क्या कर रहा.. नहीं बोलना चाहती हो तो मैं चला जाऊँगा।’
‘नन्..न..नहीं.. रुको मैं बताती हूँ.. मेरा मन कर रहा था चुदवाने का.. तुमसे आज अपनी चूत चुदवाने ही तो आई हूँ!’
और यह कह कर मैंने भी चाचा के गालों पर कस के चुम्मी लेकर उन्हें अपनी बाँहों में भर लिया- तो अब चोदो ना.. अब तो मेरे मन की बात तो जान ली ना.. अब चोदो ना..
‘ले.. अभी चोदता हूँ.. अपनी रानी को..’ 
और चाचा वहीं बगल में ले जाकर के मुझे खड़े-खड़े ही मेरे जोबन को कसके रगड़ने.. मसलने और चूमने लगे और मेरी जवानी को चाचा हाथों से कस-कस कर रगड़ते जा रहे थे, मेरे चूचुकों को पकड़े हुए और मेरे उत्तेजित अंगूरों को कस-कस के चूसते लगे। 
चाचा मेरी दोनों जांघों के बीच मेरी योनि प्रदेश पर अपना लण्ड नेकर से निकाल कर लगा करके मेरे भगनासे को लण्ड से रगड़ने लगे। चाचा के ऐसा करने से लण्ड मेरी योनि रस से भीग कर मेरी चूत पर फिसलने लगा। 
मैं चाचा के लण्ड से चुदने के लिए व्याकुल हो कर सिसकारी लेते हुए बोली- प्लीज.. आहह्ह्ह् सीईईई.. चोदो ना.. मेरी बुर.. आहह्ह्ह् अब इन्तजार नहीं हो रहा.. डाल दो मेरी चूत में अपना लण्ड..
और मैं चूत चुदाने के नशे में अंधी होकर पूरी जांघें खोल कर लण्ड के अन्दर जाने का इन्तजार साँसें रोक कर करने लगी।
मैं जवानी के नशे में पागल हो रही थी ‘बस.. बस करो ना.. अब और कितना.. उह्ह्ह.. उह्ह्ह.. ओह्ह्ह.. बस्स्स्स.. और मत तड़पाओ.. डाल दो ना…’
शायद मेरी फरियाद सुन कर चाचा को मेरे ऊपर दया आ गई। मेरी फड़कती चूत को देखकर चाचा ने मेरी बुर में अपना लण्ड घुसाने के लिए मेरी चूत के मुहाने पे लण्ड लगा कर.. मेरी दोनों चूचियों को पकड़ कर पूरी ताकत से धक्का लगा दिया।
चाचा का सुपाड़ा मेरी चूत के अन्दर घुस गया था। 
‘उह.. उफ्फ्फ उह आहह्ह्ह..’ करते हुए चाचा से लिपट कर पूरी चूत चाचा के हवाले करके मैं बुर को चाचा की तरफ करके दूसरे शॉट का इंतजार करने लगी।
चाचा मेरी चूचियों को मुँह में भरकर लण्ड को चूत पर दबाने लगे। 
तभी मेरे कानों में पति के बुलाने की आवाज सुनाई पड़ी- डॉली कहाँ हो.. मुझे जाना है.. मैं सो गया और तुमने जगाया भी नहीं.. डॉली कहाँ हो? 
मेरी तो वासना काफूर हो गई.. अब क्या करूँ मैं?
मैंने चाचा को जाने को बोला.. पर चाचा छोड़ ही नहीं रहे थे।
‘प्लीज चाचा जाओ.. वोव्व्व्व्वो हह्हस्बेण्ड आ जाएंगे।’
तभी मुझे लगा कि पति सीढ़ी चढ़ रहे हैं ‘वो आ रहे हैं प्लीज छोड़ो.. नहीं तो बवाल हो जाएगा।’
यह कहते हुए पता नहीं कहाँ से मेरे अन्दर इतनी ताकत आ गई कि मैंने चाचा को दूर ढकेल दिया।
जैसे ही चाचा दूर हुए.. ‘फक्क’ की आवाज के साथ सुपारा बाहर निकल गया।
मैं बोली- जाओ आप.. मैं भी प्यासी हूँ व्याकुल हूँ.. आपसे चुदने को.. पर अभी आप भागो यहाँ से..
और चाचा तुरन्त दीवार फांद कर छत पर बने कमरे के पीछे चले गए। पर अब एक और मुसीबत थी.. मैं सेक्स के नशे में इतनी अंधी हो गई थी कि मैं बिना कपड़े पहने ही छत पर आ गई थी और पति एक-एक सीढ़ी चढ़ते हुए ऊपर आ रहे थे.. मेरी समझ नहीं आ रहा था कि मुझे ऐसी हालत में देख कर वे क्या सोचेगें और अब क्या होगा? 
तभी शायद एक या दो बची हुई सीढ़ी से ही उन्होंने आवाज दी- डॉली कहाँ हो.. छत पर हो क्या?
तभी मुझे याद आई नाईटी तो मैं सूखने को डाली थी.. वही पहन लेती हूँ।
मैं यहाँ पति का जबाब देना उचित समझ कर बोल पड़ी- हाँ.. मैं यहाँ हूँ.. आई..! 
ये कहते हुए मैं नाईटी लेने को लपकी और नाईटी लेकर बगल में होकर पहन कर.. मैं अपने घबड़ाहट पर कंट्रोल कर रही थी कि पति सामने आ गए।
‘तुम यहाँ क्या कर रही हो.. और यह क्या.. तुम्हारे कपड़े तो कमरे में पड़े है.. और तुम यहाँ नाईटी में क्या कर रही हो? कोई तुमको इस हालत में देख लेता तो..?’
‘मैं यहाँ चुदने आई थी.. पर यहाँ तो परिन्दा भी नहीं है, जो मेरी चुदाई कर सके.. शायद मेरी किस्मत में आज चुदाई लिखी ही नहीं है।’
मैं पति से जानबूझ कर थोड़ा गुस्सा होकर बोली। 
‘नहीं मेरी जान.. मैं ज्यादा गरम हो गया था.. इसलिए तुम्हारी चूत की गरमी सहन नहीं कर सका और मेरा पानी निकल गया.. पर तुम इस समय यहाँ से नीचे चलो.. कोई तुम्हारी जिस्म को देख लेगा तो मेरे ना रहने पर तुम्हारा बलात्कार कर बैठेगा और फिर मेरी बदनामी होगी सो अलग.. कि मेरी वाईफ नंगी ही छत पर घूमती है.. उसके जिस्म की आग नहीं बुझ रही है।’
अब पति मुझको पकड़ कर मनाते हुए नीचे लेकर चल दिए और मैं भी ज्यादा नखरा ना करते हुए पति के बाँहों में चिपक गई और नीचे आ गई, फिर मैंने रसोई में जाकर चाय बनाई।
चाय पीकर पति तैयार होकर आफिस के लिए निकल गए, जाते हुए मुझे समझाते गए- तुम अपने कपड़े ठीक कर लो और मैं यहाँ से जाते ही संतोष को भेजता हूँ तुम उससे बात करके डिसाईड कर लेना कि क्या करना है और मुझे फोन करके बता देना।
फिर पति मेरी चूचियों को दबाते हुए किस करके बोले- जान आज रात तुम्हारी चूत की सारी गरमी निकाल दूँगा.. वादा है.. अब तो हँस दो।
और मैं भी मुस्कुराते हुए पति के होंठों का किस करने लगी।
पति के जाने के बाद मैं मुख्य दरवाजा बन्द करके बेडरूम में आ गई। मैंने नाईटी को निकाल कर एक दूसरा टू-पीस की नाईटी पहन ली।
नाईटी के अन्दर सिर्फ ब्रा पहनी.. चूत बिना पैन्टी के ही रहने दी। फिर मैं बेड पर बैठ कर कुछ देर पहले बीते हुए पलों को याद करने लगी।
मैं भी क्या बेहया बन गई थी.. अपने पड़ोसी वो भी एक बुड्डे के लण्ड से मैं अपनी चूत लड़ा बैठी.. पर जो भी हो जैसा भी हो.. साले का लण्ड मस्त है.. और मैं तो गई भी नहीं थी.. वही खुद मेरे पास आया है.. इसका मतलब उसे भी एक चूत की आवश्यकता है। आज कुछ देर और पति नहीं जागे होते और ऊपर छत पर नहीं आते तो मैं आज पड़ोसी के लण्ड से चूत चुदवा कर संतुष्ट हो चुकी होती।


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