Holi sex stories-होली की सेक्सी कहानियाँ - Printable Version

+- Sex Baba (//internetmost.ru)
+-- Forum: Indian Stories (//internetmost.ru/widgetok/Forum-indian-stories)
+--- Forum: Hindi Sex Stories (//internetmost.ru/widgetok/Forum-hindi-sex-stories)
+--- Thread: Holi sex stories-होली की सेक्सी कहानियाँ (/Thread-holi-sex-stories-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%81)

Pages: 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13


RE: Holi sex stories-होली की सेक्सी कहानियाँ - sexstories - 11-01-2017

ननद ने खेली होली--16

तब तक कोई और भौजाई, शलवार में हाथ डाल के...बिन्नो बडा छिपा के माल रखा है...अरे आज जरा होली के दिन तो अपनी बुल बुल को बाहर निकालो....और उस के बाद साडी साया...चोली ब्लाउज सब रंग से सराबोर और उस के बाद पकड पकड के रगडा रगडी...।

मेरी और लाली भौजी की भी होली की कुश्ती शुरु हुयी।

पहला राउंड उनके हाथ रहा, मेरी साडी उन्होने खींच के उतार ली और ये जो वो जा, देखते देखते सब ननदों में चिथडे चिथडॆ हो बट गयी।

लेकिन मैने हाथ उनके ब्लाउज पे मारा...और थोडी देर में वो टाप लेस थी। ब्लाउज में हाथ डाल के होली खेलते समय मैने उनके ब्रा के हुक पहले से ही खॊल दिये थे.बेचारी जब तक अपने जोबन छुपाती, साडी भी गई और दोनों हाथों में पक्के रंग लगा के मैने कस के उनकी चूंचीया मसली रगडी...जाके अपने भैया से रगड रगड के छुडवाना...कोइ भाभी बोलीं।

टाप लेस तो थोडी देर में मैं भी हो गई। फिर पहले तो खडे खडे,,,फिर पैर फंसा के उनहोने मुझे गिरा दिया और फिर ना सिर्फ रंग बल्की कीचड, सब कुछ....अपनी ३६ डी चूंचीयों से मेरी चूंचीयां रगडती....लेकिन जब वो मेरी चूंचीयों का मजा ले रही थी मैने हाथ जांघो मे बीच कर सीधे साये का नाडा खॊल दिया और जैसे ही वो उठी, पकड के खींच दियां और वो सिर्फ पैंटी में।

पहला राउंड एक दूसरे के सारे कपडॆ उतारने तक चलना था और पैंटी उतारना बहोत मुश्किल हो रहा था। जब हाथ थक गये तो मैने होंठों का सहारा लिया...पहले तो उसके उपर से जम के होंठ रगडे। मुझे मालूम था की उनके चूत पे होंठों का क्या असर होता है। ये सिक्रेट मुझे ननदोइ जी ने खुद बताया था। और साथ में दांत लगा के मैने पैंटी में थोडी चीर लगा दी पिर पहले तो दो उंगली डाल के , फिर हाथ से उसे तार तार कर दिया और दोनों हाथों मे लहरा के अपनी जीत का ऐलान कर दिया। यही नहीं, पीछे से उन्हे पकड के...उनकी टांगों के बीच अपनी टांगे डाल के अच्छी तरह फैला दिया। उनकी पैंटी के अंदर मैने जो लाल पीला बैंगनी रंग लगाया था वो सब का सब साफ साफ दिख रहा था...और मेरी उंगलियों ने उनकी बुर को फैला के सबको दर्शन करा दिये..।

अरे देखॊ देखॊ..ये वही चूत है जिसके लिये शहर के सारे लडके परेशान रहते थे...एक ने आ के देखते हुये कहा तो दूसरी बोली लेकिन लाली बिन्नो ने किसी का दिल नहीं दुखाया सबको खुश किया। और उसके बाद गुलाल, रंग सीधे बाल्टी...।

लेकिन लेज कुश्ती का अंत नहीं था अभी तो...फिर सेकेंड राउंड शुरु हुआ...और चारॊं ओर से ननदों भाभीयों का शोर...।

अरे चोद दे ननद साली को गली के गदहों कुत्तॊ से चुदवाती है आज पता चलेगा..।

अरे क्या बोलती हो भाभी....रोज तो हमारे भैया से चुदवाती हो। इस शहर का लंड इतना पसंद था तभी तो मां बाप ने भेजा यहां चुदवाने को...और तुम तो तुम तुम्हारी बहने भी अपने जीजा के लंड के लिये बेताब रहती हैं...ननदें क्यों चुप रहती। अरे इनकी बहने तो बहने....भाई भी साले गांडू हैं।

ये राउंड बहोत मुश्किल हो रहा था...मैं उन्हे नीचे नहीं ला पा रही थी। लेकिन तभी मुझे गुद गुदी की याद आई...और थोडी देर में मैं उपर थी...दोनों टागों के बीच मेरी चूत उनके चूत पे घिस्सा मार रही थी। फिर दो उंगलियों के बीच दबा के कस के मैने पिंच किया...उनकी क्लिट...और दांतों से उनके निपल कच कचा के काट लिये....इस तिहरे हमले से १० मिनट में उन्होने चें बोल दिया.फिर तो वो हल्ला बोला भाभीयों ने ननदों पे ...कोइ नहीं बचा।

और मैं भी अपनी ननद कॊ क्यों छॊडती.पिछली बार तो मैं घर पे भूल गई थी पर आज मेरी असिस्टेंट अल्पी पहले से तैयार थी...१० इंच का स्ट्रैप आन डिल्डॊ...और फिर तो लाली ननद की वो घचाघच चुदाई मैने की की वो अपनी स्कूल में चुदाई भी भूल गई।

क्यों ननद रानी याद है ना हारने वाली को सारे मुहल्ले के मर्दों से चुदवाना पडेगा...जोर से मैने पूछा।

हां...सारी भाभीयां एक साथ बोलीं..।

और उसमें मेरे सैंयां भी आते हैं...हल्के से मैने कान में कहा।

अब हार गयी हूं तो और कस के धक्का नीचे से लगाती बोलीं तो शर्त तो माननी पडेगी।

और फिर तो उंगली, फिस्टिंग...कया नहीं हो रहा था...और दूबे भाभी के यहां हुआ वो तो बस ट्रेलर था...मैने भी लाली ननद के बाद अपनी कमसिन ननदों को नहीं छोडा..सब कुछ किया करवाया। इसके बाद तो मर्दों से चुदवाना उनके लिये बच्चों का खेल होगा।

और अगले दिन होली के दिन....जब होली के पहले ...ये मस्ती थी...मुहल्ले भर के भाभियों ने तो इनको पकडा ही अल्पी की सहेलियों ने भी....और फिर मुह्ल्ले के लडके भी आ गये और सारे देवरों ने कुछ भी नहीं छोडा....दिन भर चली होली। कीचड पेंट वार्निश और कोई लडका नहीं होगा जिसके पैंट में मैने हाथ न डाला हो या गांड में उंगली ना की हो...और लडकों ने सबने मेरे जोबन का रस लूटा...और ननदों कॊ भी...यहां तक की बशे में चूर इन्हे इनकी भाभीयां पकड लाई और मैने और दूबे भाभी ने लाली को पकड के झुका रखा था...और पीछे से अल्पी ने पकड के अपने जीजा का लंड सीधे उनकी बहन की बुर में...।

शाम को कम्मो का भी नम्बर लग गया। हम लोग उसके यहां गये...अल्पी नहीं थीं। उसकी मम्मी बोली की अपने सहेलियों के यहां गई और सब के यहां हो के तुम लोगों के यहां पहूंचेगी ३-४ घंटे बाद। कम्मॊ जिद करने लगी की मैं जीजा की साथ जाउंगी। मैं बोल के ले आई और फिर घर पहुंच के..।

मैने अपनी चूंची उस कमसिन के मुंह में डाल दी थी और टांग उठा के ...होली के नशे में हम तीनों थे। थोडा चीखी चिल्लाई पर...पहली बार में तो आधा लेकिन अगली बार में पूरा घोंट लिया।

अगले दिन जैसा तय था गुड्डी को ले के हम वापस आ गये।

उस के साथ क्या हुआ ये कहानी फिर कभी....।

लेकिन जैसी होली हम सब की हुई इस २१ की वैसी होली आप सब की हो ....सारे जीजा, देवर और नन्दोइयों की और

सारी सालियों सलहजों भाभीयों की।

समाप्त


RE: Holi sex stories-होली की सेक्सी कहानियाँ - sexstories - 11-01-2017

ससुराल की पहली होली-1

"ओह भाभी प्लीज,…"

" क्या कह रही है तू ,…स्क्विज ,…ओ के " और ये कह के मैंने उसके टॉप फाड़ते किशोर उभारो को और जोर से दबा दिया। उसके खड़े निपल्स को भी मैंने पुल करना शुरू कर दिया।

" नहीं भाभी , छोड़िये न ," बड़ी शोख अदा और नाज से छुड़ाने की कोशिश करते उस किशोरी ने कहा।
और मैंने दूसरे जोबन को भी दबाना शुरू कर दिया और उसे चिढ़ाते हुए छेड़ने लगी ,

" अरी , अभी तो ऊपर से दबा रही हूँ। कल होली के दिन तो खोल के रगुंगी , रगड़ूंगी , मसलूँगी और अगर तुम्हारा मन करे न तो तुम्हारे उसे ' दिन में भैया और रात में सैयां ' वाले भाई से भी दबवा , मसलवा दूंगी। "

लाज से उसके गाल टेसू हो गए।



और जैसे ही मैंने उसे छोड़ा , एक पड़ोसन चालु हो गयीं ,
" अरे ननद रानी ये जवानी के हॉर्न , दबाने के लिए ही तो हैं। "

ये होली के पहले कि शाम थी , और हम लोग अपनी ननद मीता को छेड़ रहे थे।


वह ग्यारहवें में पढ़ती थी और उम्र का अंदाजा आप लगा लें। खूब लम्बी , सुरु के पेड़ कि तरह छरहरी , उभरते हुए टेनिस के गेंद कि साइज के उभार , और मचलते , छलकते , बलखाते नितम्ब , चोटियां लम्बी सीधे नितम्ब के दरारों तक पहुंचती … खूब गोरी , दूध में दो चार बूँद गुलाबी रंग के डाल दें बस वैसा रंग , भरे हुए गाल ,…

लेकिन शर्मीली कुछ ज्यादा ही थी।

ननद भाभियो में जो गालियां चलती हैं , बस वो चिढ जाती थी यहाँ तक की जीजा साली के खुले मजाक में भी। पिछली होली में उसके जीजा ने रंग लगाने के बहाने जब उसके जीजा ने फ्राक के अंदर हाथ दाल के उसके बड़े टिकोरे ऐसे जोबन दबा दिए , तो वो एकदम उछल गयी।


लेकिन मैंने तय कर लिया था की इस होली में इसकी सारी लाज शरम उतार के उसे होली का असली मजा दिलवाउंगी। आखिर एकलौती भाभी हूँ उसकी।

शादी के बाद ये मेरी दूसरी होली थी लेकिन ससुराल में पहली।

पिछली होली तो मेरे मायके में हुयी जब ये आये थे और क्या नहीं हुआ था वहाँ। रंग के साथ मेरी बहन रीमा को 'इन्होने ' अपनी मोटी पिचकारी का स्वाद भी चखाया। और सिर्फ रीमा ही नहीं , उसकी सहेलियों को भी। कोई नहीं बचीं। यहाँ तक की मेरी भाभी भी , अपनी सलहज को तो उन्होंने आगे और पीछे दोनों ओर का मजा दिया। और भाभी ने भी उनकी जबरदस्त रगड़ाई की थी।

लेकिन ये होली पूरी तरह मेरी होनी थी ससुराल में देवर ननदों के साथ रंग खेलने की , मजे लेने की।


और ननद के नाम पे यही मीता थी , इनकी ममेरी बहन , लेकिन सगी से भी ज्यादा नजदीक।


और देवर के नाम पे मीता का एक भाई रवी।

मेरी जिठानी , नीरा मुझसे दो चार साल ही बड़ी थी और हर मजाक में मेरा हाथ बटाती। और इस बार होली में साथ देने के लिए उनके गाँव की जो बनारस में ही था , वहाँ से उनकी भाभी भी आयी थी , चमेली भाभी। बिना गाली वाले मजाक के तो वो बोल नहीं सकती। कसी हुयी देह , खूब भरी भरे नितम्ब और गद्दर जोबन। ।और जब गारी गातीं तो किसी की भी पैंट , शलवार उतार देतीं।

जैसे मीता , मेरी नन्द शर्मीली थी वैसे ही मेरा देवर रवी। हम लोग तो कहते भी थे "

"तेरा पैंट खोल के चेक करना पड़ेगा देवर है कि ननद। … "

खूब गोरा , एकदम नमकीन और बात बात पे शर्माता , मीता से दो साल बड़ा था , उन्नीस का ,अभी बी एस सी में था।

उपफ मैंने अपने बारे में तो बताया नहीं। 

जब मेरी शादी हुयी थी आज से डेढ़ दो साल पहले तो मैं रवी की उम्र कि थी , उन्नीस लगा ही था।

मैं छरहरी तो हूँ लेकिन दुबली पतली न हूँ न रही हूँ खास तौर पे खास जगहो पे।
मैं नवी दसवी में थी तभी , जब मेरे सहेलियों के टिकोरे थे मेरे उभार पूरे स्कूल में ,…

गोरी , भरे भरे गाल , रूप ऐसा जो दर्पण में ना समाये और जोबन ऐसा जो चोली में न समाये

और पतली कमर पे ३५ साइज के हिप्स भी खूब भरे भरे लगते ,

और राजीव तो मेरे उभारो के दीवाने , सबके सामने भी हिप्स पिंच कर लेते

" थोड़ी सी पेट पूजा कहीं भी कभी भी " वाले ख्याल के थे वो , और मैं कौन होती उनको मना करने वाली।

२० दिन के हनीमून में उन्होंने पूरी सेंचुरी लगायी थी , मुख मिलन छोड़ के , और उनका ये जोश अभी भी जारी थी।


उपफ मैं भी न बजाय कहानी सुनाने के अपनी ही ले बैठी। चलिए तो तो अब ससुराल में अपनी पहली होली कि बात आगे बढ़ाती हूँ।

जैसा मैं बता रही थी होली के पहले वाले शाम की बात ,

मेरी ननद मीता आयी थी और थोड़ी देर बाद रवी भी आ गया मेरा छोटा देवर।

मैं , मेरी जेठानी नीरा भाभी , और उनकी भाभी , चमेली भाभी गुझिया बना रहे थे।

रवी , एकदम चिकना , नमकीन , मुस्करा के मैंने अपनी जेठानी से कहा ,
" दीदी , कच्ची कली "
" कच्ची कली या कच्ची कला " अपनी हंसी रोकते हुए वो बोलीं।

लेकिन चमेली भाभी को तो रोकना मुश्किल था , वो बोलीं ,
" अरे ई गाँव में होते न तो रोज सुबह शाम कबहुँ गन्ने के खेत में कबहुँ अरहर के खेत में , लौंडेबाज , निहुरा के इसकी गांड बिना मारे छोड़ते नहीं। "

होली का असर तो मुझ पे भी था मैं बोली ,

' अरे भाभी , गाँव शहर में कौन फरक , कल होली में तो ई पकड़ में आएगा न बस सारी कसर पूरी कर देंगे। मार लेंगे इसकी हम तीनो मिल के। "
" एकदम कल इसकी गांड बचनी नहीं चाहिए " चमेली भाभी बोली और अबकी खुल के मेरी जेठानी ने भी उनका साथ दिया।

रवि , मेरे देवर की किस्मत वो हम लोगो की ओर आ गया और मुझसे पूछ बैठा ,

" भाभी कल होली के लिए कितना रंग लाऊं "
और चमेली भाभी ने छूटते ही जवाब दिया ,

" आधा किलो तो तुम्हारी बहन मीता के भोंसड़े में चला जाएगा और उतना ही तुम्हारी गांड में "

शर्मा के बिचारा गुलाबी हो गया।

दूसरा हमला मैंने किया , इक वेसिलीन कि बड़ी सी शीशी उसे पकड़ाई और समझाया ,

" देवर जी ये अपनी बहन को दे दीजियेगा , बोलियेगा ठीक से अंदर तक लगा लेगी और बाकी आप लगा लेना , पिछवाड़े। फिर डलवाने में दर्द कल होली में थोडा कम होगा "

बिचारे रवी ने थोड़ी हिम्मत की और जवाब देने की कोशिश की

" भाभी डालूंगा तो मैं , डलवाने का काम तो आप लोगों का है "

और अबकी जवाब मेरी जेठानी ने दिया ,
" लाला , वो तो कल ही पता चलेगा , कौन डलवाता है और कौन डालता है। "

मैंने उसके गोरे चिकने गालों पे जोर से चिकोटी काटी और बोली ,
" देवर जी , कल सुबह ठीक आठ बजे , अगर तुम चाहते हो मेरे इन सलोने चिकने गालों पे सबसे पहले तुम्हारा हाथ पड़े "

" एकदम भाभी बल्कि उसके पहले ही आपका देवर हाजिर हो जाएगा। "

वो गया और हम देर तक खिलखिलाती रहीं।

राजीव ,"मेरे वो "रात को सोने जल्दी चले गए।

होली के पहले की रात , बहुत काम था।

गुझिया , समोसे , दहीबड़े ( ये कहने की बात नहीं की आधे से ज्यादा भांग से लैस थे ) और ज्यादातर खाना भी। अगला दिन तो होली के हुडदंग में ही निकलना था।

नीरा भाभी , मेरी जिठानी और चमेली भाभी ने कड़ाही की कालिख अपने दोनों हाथों में पोत ली , अच्छी तरह रगड़ के और दबे पाँव राजीव के कमरे में गयी. वो अंटागफिल गहरी नींद में सो रहे थे ।

आराम से उनकी दोनों भाभियों ने उनके गाल पे कड़ाही की कालिख अच्छी तरह रगड़ी। नीरा भाभी ने फिर अपने माथे से अपनी बड़ी सी लाल बिंदी निकाली और राजीव के माथे पे लगा दी। वो चुटकी भर सिंदूर भी लायी थीं और उससे उन्होंने अपने देवर की मांग भी अच्छी तरह भर दी। चमेली भाभी तो उनसे भी दो हाथ आगे थीं , उन्होंने राजीव का शार्ट थोडा सरकाया और उनके उस थोड़े सोये थोड़े जागे कामदेव के तीर पे , रंग पोत दिया। मैं पीछे खड़ी मुस्करा रही थी।


और जब वो दोनों बाहर गयीं तो मेरा मौका था।

पहले तो मैंने अपने कपडे उतारे।

राजीव ने तो सिर्फ शार्ट पहन रखा था। मैंने उसे भी सरका के अलग कर दिया। और अब मेरे। रसीले होंठ सीधे उनके लिंग पे थे। थोड़े ही देर चूसने के बाद लिंग एकदम तन्ना गया। मेरी जुबान उनके कड़े चर्मदंड पे फिसल रही थी. कितना कड़ा था।

मेरे रसीले गुलाबी होंठ उनके खूब बड़े पहाड़ी आलू ऐसे मोटे कड़े सुपाड़े को चाट रहे थे , चूम रहे थे चूस रहे थे। बीच बीच में मेरी जीभ की नोक उनके सुपाड़े के पी होल के छेद में सुरसुरी कर देती थी। अब वो पूरी तरह जग गए थे।

मैंने उन्हें जबरदस्त आँख मारी और मेरा एक हाथ अब मेरे पति के बॉल्स को मादक ढंग से सहला रहा था दबा रहा था। यही नहीं , मेरी तर्जनी का नेल पालिश लगा लम्बा नाख़ून , बॉल्स से उनके पिछवाड़े के छेद तक स्क्रैच कर रहा था। और जब मैंने नाख़ून राजीव के पिछवाड़े के छेद पे लगाया , तो बस उनकी हालत खराब हो गयी।

वो मचल रहे थे , उछल रहे थे अपने हिप्स जोर जोर से पटक रहे थे। और हिप्स उठा उठा के अपना बित्ते भर लम्बा , मोटा मूसल , मेरे संकरे गले में ठूंस रहे थे।


RE: Holi sex stories-होली की सेक्सी कहानियाँ - sexstories - 11-01-2017

मेरी भी हालत खराब थी। पूरा लंड हलक तक मेरे अंदर था। मेरे गाल फूले हुए थे ,आँखे बाहर निकल रही थीं। लेकिन मैं रुकी नहीं और पूरे जोर के साथ चूसती रही , चाटती रही. उनका लिंग फड़क रहा था और जब मैंने अपने जुबान पे प्री कम की कुछ बूंदो का स्वाद महसूस किया तभी मैं रुकी।

मैंने धीमे धीमे उनका लिंग बाहर निकाला , आलमोस्ट सुपाड़े तक , लेकिन सुपाड़ा अभी भी मेरे मुंह के अंदर था।

कुछ देर रुक के मैंने उसे फिर चुभलाना चूसना शुरू कर दिया।

और अबकी मेरी शरारती उंगलियां और नटखट हो गयीं। कभी वो राजीव के बॉल्स को सहलाती , कभी हलके से तो कभी जोर दबा देतीं और फिर वो पिछवाड़े के छेद पे पहुँच। उंगली का टिप हलके हलके गोल गोल चक्कर कट रहा था कभी गुदा द्वार को दबा रहा था , नाख़ून से स्क्रैच कर रहा था।

राजीव उचक रहे थे , चूतड़ उठा रहे थे , लेकिन अब बिना रुके मैं जोर जोर से लंड चूस रही थी। मेरी जीभ लंड को नीचे से चाट रही थी , सहला रही थी। दोनों होंठ चर्मदण्ड से रगड़ रहे थे और गाल वैक्यूम क्लीनर से भी तेज चूस रहे थे। राजीव झड़ने के कगार पे थे।

लेकिन अबकी मैं नहीं रुकी और चूसने, की रफ्तार बढ़ा दी और साथ ही मेरी उंगली का जो टिप उनके पिछवाड़े , दबा रहा था , सहला रहा था , मैंने पूरे जोर के साथ टिप अंदर घुसा दी।

जिस तेजी से उन्होंने झड़ना शुरू किया मैं बता नहीं सकती। लेकिन मैं पिछवाड़े घुसी ऊँगली के टिप को गोल गोल घुमाती रही। हमेशा , मैं उनकी गाढ़ी थक्केदार मलायी घोंट लेती थी , लेकिन इस बार मैंने उनके लिंग कि सारी मलायी एक कुल्हड़ में गिरा दी। लेकिन मैं इतने पे ही नहीं रुकी। मैंने लंड के बेस को फिर से दबाया , बॉल्स को भींचा , और एक बार फिर लंड से गाढ़ी मलायी की पिचकारी फूट पड़ी। वो निकलता ही रहा , निकलता ही रहा और पूरा बड़ा सा कुल्हड़ भर गया।

और अब जब मैं उनके पास गयी उन्होंने मुझे कस के अपने चौड़े सीने पे भींच लिया।

उनकी प्यार भरी उंगलियां मेरी पान सी चिकनी पीठ सहला रही थीं। 

और कुछ ही देर में उनके भूखे नदीदे होंठो ने मेरे मस्ती से पागल कड़े निपल्स को गपुच कर लिया और जोर जोर से चूसने लगे। उनके होंठो का दबाव मैं अपने उभारों पे महसूस कर रही थी , और दांतों की चुभन भी। उनके दांतो के निशान के हार मेरे निपल्स के चारों ओर पड गए।



और साथ ही उनकी जीभ , कभी मेरे कड़े तने निपल्स को सहलाती , लिक करती नीचे से ऊपर तक। जोबन का रस लेना किसी को सीखना हो तो राजीव से सीखे। मस्ती से मेरी आँखे मुंदी पड रही थीं। 

मेरे हाथ अब राजीव के हिप्स को सहलाने लगे , दबोचने लगे। और मेरी प्रेम गली अब उनके कामदण्ड को दबा रही थी।

थोड़ी देर में उनका लिंग फिर तन्ना के उठ खड़ा हुआ।


अब राजीव से भी नहीं रहा गया और उन्होें मेरी गोरी गुलाबी केले के तने ऐसी चिकनी जांघो को पूरी तरह फैला दिया और वो मेरे ऊपर आ गए। चौदहवीं के चाँद की चांदनी पूरे कमरे में बिखरी पड़ रही थी। बाहर से फाग और कबीर गाने की आवाजें आ रही थी

अरे नकबेसर कागा लै भागा मोरा सैयां अभागा ना जागा।

लेकिन मेरा सैयां जग गया था , और उसका काम दंड भी। उ


न्होंने अपने खूब तन्नाये , बौराये लिंग को मेरे क्लिट पे रगड़ना शुरू कर दिया और उनका एक हाथ अब निपल्स को कभी फ्लिक करता तो कभी पुल करता। एक हाथ निपल्स और जोबन पे और दूसरा मेरे क्लिट पे , मैं पागल हो रही थी चूतड़ पटक रही थी। लेकिन वो तो यही चाहते थे।



थोड़ी देर बाद उन्होंने मेरे दोनों निचले होंठो को फैला के अपना सुपाड़ा , उसमे सेट कर दिया और साथ में दो उँगलियों से क्लिट को रोटेट करने लगे।

मैं बावरी हो गयी , नीचे से चूतड़ उठा उठा के कोशिश करने लगी कि वो लंड अंदर पेल दें। लेकिन वो मुझे तड़पा रहे थे , आखिर हार के मैं बोल ही पड़ी

" चोद दो मेरी चूत , डाल दो अपना मोटा लंड मेरे राजा , पेलो न प्लीज , चोदो न ," 

और राजीव यही तो सुनना चाह रहे थे। और अब पागलों की तरह उन्होंने मेरी चुदाई शुरू कर दी। एक झटके में ही बित्ते भर का लंड मेरी कसी चूत के अंदर था। जैसे कोई धुनिया रुई धुनें बस उसी तरह , और मैं भी चूतड़ उठा उठा के जवाब दे रही थी।

लेकिन राजीव का मन इतनी आसानी से भरने वाला कहाँ था। थोड़ी देर में उन्होंने मुझे कुतिया बना दिया , उनका फेवरिट आसन , और अब तो धक्को की ताकत और बढ़ गयी। उनके बॉल्स सीधे मेरे चूतड़ो से टकराते। और साथ में ही उनके हाथ पूरी ताकत से मेरे बूब्स निचोड़ रहे थे।

कुछ देर में फिर उन्होंने पोज बदला और अब हम आमने सामने थे। चुदाई की रफ्तार थोड़ी मन्द पड़ गयी , लेकिन वो बिना रुके चोदते रहे।

मैं थक कर चूर हो गयी , पसीने से नहा गयी लेकिन राजीव का लंड पिस्टन की तरह अंदर बाहर होता रहा। और फिर वो झड़े तो , झड़ते ही रहे , झड़ते ही रहे। साथ मैं मैं भी।

मैंने अपनी टांग उनके ऊपर कर ली। उनका लिंग मेरे अंदर ही था। और हम दोनों कब सो गए पता नहीं चला।
सोते समय उनके दोनों हाथ मेरे उभार पे थे , मेरी टांग उनके ऊपर और लिंग मेरी बुर में।

भोर के पहले पता नहीं कब हम दोनों की नींद खुली और कब चुदाई फिर से चालु हो गयी पता नहीं।

मैंने हलके हलके पहले कमर हिलायी , फिर चूत में उनके लंड को निचोड़ना शुरू कर दिया। उन्होंने धक्को कि रफ्तार बढ़ायी , और अबकी जबी वो झड़ने वाले थे तो मैंने उनका लंड निकाल के सीधे कुल्हड़ के ऊपर किया और सारी मलायी कुल्हड़ में।

" ये क्या कर रही हो " मुस्करा के उन्होंने पुछा।

" एक स्पेशल रेसिपी के लिए " मैं भी मुस्करा के बोली।

सोने के पहले मैंने उन्हें एक ग्लास दूध दिया , रोज की तरह। लेकिन एक फर्क ये था की आज उसमें एक सिडेटिव था। और कुछ ही देर में उनकी अाँख लग गयी। तीन बार झड़ने के बाद वो थोड़े थक भी गए थे।

और जब मैं श्योर हो गयी की वो गाढ़े नींद में सो गए हैं , तो मैं हलके से उठी और बेड शीट को भी सरका दिया। और उनके कपड़ो के साथ ही उसे भी हटा दिया। अब वहाँ कुछ भी नहीं था जिससे अपने को वो ढक सकते। मैंने अपनी ब्रा और पैंटी उनके पास रख दी और साथ में मेरी लिपस्टिक से लिखा एक नोट भी रख दिया ,

" होली के लिए आपकी ख़ास ड्रेस "

दरवाजा मैंने बाहर से बंद कर दिया। .


RE: Holi sex stories-होली की सेक्सी कहानियाँ - sexstories - 11-01-2017

ससुराल की पहली होली-2

जब मैं बाहर निकली तो मेरे पड़ोस के मकान के एक कमरे की लाइट जल रही थी। राजन का कमरा था वो। पडोसी और इनसे उम्र में कम होने से मेरा देवर तो लगता ही था , वो था भी बड़ा रसिया। और देह भी खूब गठी , कसरती , मस्क्युलर।

मैं उसे जॉन कहती थी। उसकी बाड़ी एकदम जान अब्राहम से मिलती थी , मैनली मस्क्युलर।


जब भी वो बालकनी से मुझे अकेले खुल के रसीले अश्लील मजाक करता। एक दिन तो उसने मुझे फ्लाइंग किस भी कर दिया लेकिन मैं कौन कम थी। अपने ब्लाउज के बटन खोल के कैच कर के मैंने उसमें उसे रख दिया। अब तो हम लोगो कि इशारे बाजी और बढ़ गयी और एकदम खुल के होने लगी।

एक बार उसने अंगूठे और तरजनी से चुदाई का इंटरनेशनल सिम्बल बनाया तो मैंने भी जोर से हिप्स के धक्के मार के उसका जवाब दिया।

और आज तो होली का दिन था , वो मेरा देवर था छेड़छाड़ तो बनती थी। वोजब बाहर निकला तो मैंने जबरदस्त गुड मार्निंग की। पहले तो नाइटी के उअप्र से अपने उभारों को मैंने सहलाया , फिर नाइटी के बटन खोल के सुबह सुबह अपने जोबन का दर्शन करा दिया ( ब्रा पैंटी तो मैं इनके लिए छोड़ आयी थी )

यही नहीं ,मैंने अपने निपल्स को सहलाया भी और पुल भी किया।

उसका शार्ट तन गया। लेकिन होली का असर दोनों ओर था।


उसने शार्ट खोल के अपना लंड निकाला। एकदम मस्त , कड़ियल। ७-८ इंच का रहा होगा और खूब मोटा। मुझे दिखा के मुठियाने लगा। मैंने भी उसके लंड पे फ्लाइंग किस दिया , जीभ निकाल के चिढ़ाया और सीढी से धड़ धढ़ाती नीचे चली गयी। नीरा भाभी और चमेली भाभी आलरेडी जग गयी थीं और सुबह का घर का काम शुरू हो गया था।


हम लोगों ने किचेन का काम जल्दी जल्दी ख़तम किया और साथ में रंग बनाने का और , ' और भी तैयारियां '.

मैं सोच रही थी क्या पहनू होली खेलने के लिए , मैं अपने पुराने कपडे देख रही थी।

बॉक्स में एक पुरानी थोड़ी घिसी आलमोस्ट ट्रांसपेरेंट सी , एक गुलाबी साडी मिली।

अब सवाल ब्लाउज का था। राजीव ने दबा दबा के साइज बड़ी कर दी थी।

मेरा चेहरा खिल उठा एक पुरानी आलमोस्ट बैकलेस लो कट चोली थी , खूब टाइट जब मैंने सिलवाई थी शादी के दो साल पहले। और शादी के बाद मेरी साइज राजीव ३४ सी से बढ़ाकर ३६ कर दी थी। बड़ी मुश्किल से फिट हुयी वो भी ऊपर के दो बटन खोल के , बस आधे से ज्यादा मेरे गद्दर गोरे जोबन दिख रहे थे और जरा सी झुकती तो मेरे मटर के दाने के बराबर निापल साफ दिखते।

मैंने जिद कर के अपनी जिठानी को भी एक पुरानी धुरानी खूब घिसी 'सब कुछ दिखता है ' वाली साडी और वैसा ही लो कट एकदम टाइट ब्लाउज पहनवाया।

लेकिन सबसे हिम्मती थीं चमेली भाभी , उन्होंने एक सिंथेटिक झलकती हुयी पीली साडी पहनी और साथ में एक स्लीवलेस स्पधेड ब्लाउज और वो भी बिना ब्रा के।

चमेली भाभी ने मेरे जोबन पे चिकोटी काटी और हंस के बोला ,


" क्यों तैयार हो ससुराल की पहली होली के , लिए देवरो से डलवाने के लिए "


मैं कौन पीछे रहने वाली थी। सफेद ब्रा विहीन ब्लाउज से झांकते उनके कड़े निपल्स को पिंच करके मैंने भी छेड़ा

"और आप भी तो तैयार हो मेरे सैयां से मसलवाने रगड़वाने के लिए। "


अभी आठ भी नहीं बजे थे लेकिन दरवाजे की घंटी बजी।

मैंने दरवाजा खोला। और कौन , मेरा गोरा चिकना , शर्मीला देवर , रवी। एक लाल टी शर्ट और हिप हगिंग जींस में सब मसल्स साफ दिख रही थीं।

मैंने प्यार से उसके गोरे नमकीन गाल सहलाये और बोला , " तैयार हो डलवाने के लिए "

शर्म से उसके गाल गुलाबी हो गए
चमेली भाभी ने भी देवर के चिकने गाल सहलाये और छेड़ा ,
" माल तो बड़ा नमकीन है , गाल तो पूरा मालपूआ है कचकचा के काटने लायक "

नीरा भाभी ने हम दोनों को डांटा

" बिचारा सीधा साधा देवर , इत्ती सुबह आया। तुम दोनों बिना उसे कुछ खिलाये पिलाये , सिर्फ तंग कर रही हो। "

चमेली भाभी एक प्लेट में गुझिया और एक ग्लास में ठंडाई लाई।ये कहने की बात नहीं है की दोनों में भांग कि डबल डोज थी।

रवी मेरे देवर ने कुछ बोलने कि हिम्मत की
" भाभी मेरी पिचकारी पूरी तैयार है। ".

मैंने झुक के जानबूझ के प्लेट से गुझिया उठायी। और जोबन के साथ निपल भी मेरे देवर को साफ दिख रहे थे। जब तक वो सम्हलता , भांग की दो गोली पड़ी गुझिया उसके मुंह में।

और अब मैंने छेड़ा ,
"अरे देवर जी , पिचकारी में कुछ रंग बचा भी है कि सब मेरी ननद मीता के अंदर डाल आये ?"

और अबकी मेरा आँचल भी ढलक गया और अब तो जोबन पूरा उसकी आँख में गड गया और मैंने मुस्करा के चिढ़ाया

" सिर्फ देखने के लिए ,…"
" मैं समझा आज तो छूने पकडने और मसलने का मौका मिलेगा " मेरा देवर भी कम शरारती नहीं था।


भांग की अब चार गोली उसके पेट में चली गयी थी और ५-१० मिनट में उसका असर पूरा होना था।

चमेली भाभी क्यों पीछे रहतीं और उन्होंने भांग मिली ठंडई तो पिलायी और साथ ही गुझिया खिलाने कि भी जिद करने लगी।

रवी नखड़े कर रहा था , तो चमेली भाभी आपने अंदाज में बोली
" अरे लाला ज्यादा नखड़ा न करो नहीं तो निहुरा के पीछे वाले छेद से घुसेड़ दूंगी अंदर "

मैं भी हंस के बोली

" और क्या जाएगा तो दोनों ओर से अंदर ही और पिछवाड़े के छेड़ का मजा मिलेगा वो अलग। "

बिचारा मेरा देवर , तीसरी भंग वाली गुझिया भी अंदर।

मैं आन्गन में आगयी और रंग भरी पिचकारी उठा के उसे ललकारा ,

" आ जाओ मेरी ननद के यार , देखु तेरी बहनो ने क्या सिखाया है। "

"उसने मुझे पकड़ने की कोशिश की , लेकिन वो जैसे ही पास आया मैंने सारी पिचकारी। , सररर अपने देवर की 'तीसरी टांग' पे खाली कर दी।

और उधर पीछे से मेरी जेठानियों, चमेली भाभी और नीरा भाभी ने बाल्टी का रंग उसके पिछवाड़े ,


लेकिन मेरा देवर , रवी , मेरे पीछे पड़ाही रहा। एक दो बार कन्नी काट के मैं बची लेकीन उसने पकड़ ही लिया। मैंने अपने चेहरे को छुपाने की दोनों हाथों से भरपूर कोशिश की , लेकिन उंसकी जबरदस्त पकड़ के आगे , …

थोड़ी देर में उसके हाथ में मक्खन से गाल सहला रहे थे , रगड़ रहे थे। मेरी उसे रोकने कि लाख कोशिश , सब बेकार गयी। यही नहीं थोड़ी देर में उसके रंग लगे हाथ सरक के नीचे आने लगे।

मेरे भी दोनों हाथ उसे रंग लगा रहे थे , पीछे से चमेली और नीरा भाभी भी रंग लगा रही थी , लेकिन बिना रुके उसके हाथ मेरी चोली के अंदर घुस ही गए। वैसे भी लो कट चोली में दोनों जोबन आधे से ज्यादा तो बाहर ही थे। पहले तो वो थोडा घबड़ायाया , झिझका कि कही मैं बुरा न मान जाऊं। लेकिन कौन भाभी होगी जो होली में चोली के अंदर घुसे हाथ वो भी देवर के हाथ का बुरा मानती।

वो हलके हलके रंग लगता रहा फिर खुल के मेरे जोबन को जोर जोर से रवी खुल के रगड़ने लगा , मसलने लगा। यहाँ तक कि एक बार उसने निपल भी पिंच कर दिए। मस्ती से मेरे उभार पत्थर हो रहे थे , निपल भी खूब कड़े हो गए थे। बिचारी चमेली भाभी और नीरा भाभी की लाख कोशिशों के बावजूद उसके दोनों हाथ जोर जोर से मेरी गोल गोल रसीली चूंचीयों का खुल के रस ले रहे थे। 

रवी थोडा और बोल्ड हो गया और उसने एक हाथ मेरे साये में डालने की कोशिश की। लेकिन मैंने उसे बरज दिया।

" देवर जी , नाट बिलो द बेल्ट "
और वो ठिठक गया। 

लेकिन ये मनाही चमेली भाभी के लिए नहीं थी। कड़ाही की कालिख से पुते उनके हाथ रवी के पिछवाड़े उसके पैंट के अंदर घुस गए और चमेली भाभी की उंगली अंदर पिछवाड़े इस तरह घुसी की बिचारे रवी की चीख निकल गयी।


RE: Holi sex stories-होली की सेक्सी कहानियाँ - sexstories - 11-01-2017

" अरे देवर जी अबहिं तो एक ऊँगली घुसी है जो इतना चीख रहे हो " चमेली भाभी ने मुंह बनाया।

" अरे नहीं चीख वो इस लिए रहा है , की एक उंगली से इसका क्या होगा , ये तो पुराना मरवानेवाला है " नीरा भाभी , मेरी जेठानी ने टुकड़ा जड़ा।


चमेली भाभी की उंगली अंदर ही थी की नीरा भाभी ने उसे गुदगुदी लगानी शुरू की और रवी को मुझे छोड़ना पड़ा.
और अब फिर बाजी मेरे हाथ थी।

नीरा भाभी और चमेली भाभी ने कस उन्हें दबोच लिया लिया था बिचारे हिल डुल भी नहीं सकते थे।

अब मौका मेरे हाथ था।

मैंने खूब आराम से गाढ़े पक्के लाल ,काही और बैंगनी रंगो की कॉकटेल अपने हाथों पे बनायी और बहोत ही प्यार से देवर जी के चिकने गालों पे रगड़ा। फिर उन नरम मुलायम गालों पे जोर से चिकोटी काटते, चमेली भाभी के साथ मिल के उनकी शर्ट , बनियाइन उतार के और बोला ,

" मेरी छिनाल ननद के यार , आपने तो सिर्फ टॉप में हाथ डाला था और हमने आपको पूरा टॉपलेस दिया। "

रंग मैंने उसकी छाती पे भी लगाया और अंगूठे और तरजनी के बीच उसके टिट्स को ले के पहले तो गोल गोल घुमाया , फिर लम्बे नाखूनों से जोर से पिंच कर दिया।

एक गाल पे मैंने लाल काही रंग लगाया था तो दूसरे पे , नीरा भाभी ने वार्निश की तीन चार पक्की परत लगा दी। यहीं नहीं , वार्निश और सफेद पेंट उन्होंने देवर की छाती पे भी कई कोट लगा दिया। उसके चारों

और जब देवर की छाती मेरी जेठानी के कब्जे में हो गयी तो मेरे हाथ सरक के , उनके पैंट के अंदर घुस गए और मेरी उंगलिया , गाढ़ा पक्का लाल रंग , 'उसके 'चारों और लगाने लगीं। मस्ती से तन्ना के वो एकदम टन्न हो गया , लेकिन देवर ने अपना विरोध दर्ज कराया
में
" भाभी , आपने बोला था , की नाट बिलो द बेल्ट और आप खुद ,…"

उसकी बात काट के मैंने 'उसे 'दबोचते हुए बोला " यही तो देवर आप मात खा गए। अरे होली तो उन्ही सब कामों के लिए होती है जिसे रोज मना किया जाता है। "

जब तक मैं अगवाड़े बिजी थी चमेली भाभी ने पिछवाड़े का मोर्चा सम्हाल रखा था और वो भी ' अंदर तक डुबकी लगा के '.


मैं गयी और एक बाल्टी गाढ़ा रंग सीधे पैंट के अंदर,…

और मौक़ा पा के अब चमेली भाभी ने आगे पीछे दोनों और का मोर्चा सम्हाल लिया। एक हाथ उनका आगे से 'चर्म दंड मंथन ' कर रहा था और दूसरे ने पीछे के छेद में गचागच , गचागच , अंदर बाहर , और अब दो उँगलियाँ अंदर थीं ,…

रंगो का स्टाक ख़तम हो गया था , उसे लेने मैं गयी और इधर बाजी पलट गयी।


रवी मेरे देवर चमेली भाभी को दौड़ाया , और वो भागीं।


लेकिन उनकी साडी का आँचल रवी की पकड़ में आ गया। उसने जोर से खींचा और, थोड़ी ही देर में पूरी साडी मेर्रे देवर के हाथ में। उसने साडी का बण्डल बनाया और सीधे छत पे।

चमेली भाभी अब सिर्फ ब्लाउज और साये में , और ब्लाउज भी सफेद , स्लीवलेस।
और रवी ने उन्हें अब दबोच लिया था। 

चमेली भाभी अब सिर्फ ब्लाउज और साये में , और ब्लाउज भी सफेद , स्लीवलेस।
और रवी ने उन्हें अब दबोच लिया था।

सहायता करने के लिए मैंने गाढ़े लाल रंग की एक बाल्टी सीधे रवी के ऊपर फेंकी , लेकिन मेरा देवर भी कम चतुर चालाक नहीं था।

उसने चमेली भाभी को आगे कर दिया और पूरी की पूरी बाल्टी का रंग चमेली भाभी के ब्लाउज पे।


अब वो एकदम उनके जोबन से चिपक गया था।


रवी ने चमेली भाभी के बड़े बड़े गद्दर जोबन को , ब्लाउज के ऊपर से पकड़ा , लेकिन बजाय हाथ अंदर डालने के , उसने आराम से चट चट उनकी , चुटपुटिया बटन खोल दीं। और दोनो गोरे गोरे , गदराये , खूब बड़े जोबन बाहर थे। बस अब तो रवी की चांदी थी। जोर जोर से वो चमेली भाभी की रसीली चूंचियां मसलने रगड़ने लगा।

बीच बीच में वो उनके बड़े खड़े निपल्स को भी पिंच करता , अंगूठे और तर्जनी के बीच लेकर रोल करता , पुल करता। जिस तरह से चमेली भाभी सिसकियाँ भर रही थीं , ये साफ था की उन्हें कितना मजा आ रहा है।

वो कस कस जे अपनी दनो हथेलियों से उनकी चूंची दबा रहा था , रगड़ रहा था , नाखुनो के निशान बना रहा था।
और जब एक पल के लिए उसने हाथ हटाया तो चमेली भाभी की गोरी गोरी चूंचिया , एकदम लाल भभूका हो गयीं थी। मैं और नीरा भाभी पूरी कोशिश कर रहे थे , उसे छुड़ाने को लेकिन चमेली भाभी की चुन्ची में जैसे कोई चुम्बक लगा हो , मेरे देवर के दोनों हाथ वही चिपक गए थे।

हार कर नीरा भाभी ने वही ट्रिक अपनायी , गुदगुदी।

और अबकी जब देवर ने चमेली भाभी को छोड़ा , तो हम लोगों ने कोई गलती नहीं की।

चमेली भाभी और मेरी जिठानी , नीरा भाभी ने मिलकर उसके दोनों हाथ पीछे कर के पकडे। और मैंने उस के हाथ उसी की शर्ट और बनियाइन से जोर जोर से डबल गाँठ में बाँध दी। अब वो लाख कोशिश करता ये छूटने वाली नहीं थी। ( आखिर मैं भी गाइड की लीडर थी और कैम्प की मस्तियों के साथ साथ नाट में मुझे मेडल भी मिला था )

अब बाजी एक फिर हम तीनो के हाथ में थी।

वो बिचारा गिड़गिड़ाया , शिकायत की। 

" भाभी आप तीन , और मैं अकेला , कम से कम हाथ तो छोड़ दीजिये "

"एकदम नहीं। " अपने भीगे ब्लाउज से झाकते जोबन उसके पीठ पे पीछे से रगड़ते मैं बोली , और साथ में मेरे दोनों हाथ उसके टिट्स पे थे। जोर से पिंच कराती मैंने उसकी बात का जवाब दिया ,


" अरे जा के अपनी छिनार बहना से पूछना, वो भी तो एक साथ तीन तीन बुलाती है चढ़ाती है। "

" अरे , एक बुर में, एक गांड में और एक मुंह में " चमेली भाभी ने बात का खुलासा किया।
" अरे लाला ,कभी तुमने नंबर लगाया की नहीं , मीता के साथ। पूरे मोहल्ले में बांटती है और मेरा देवर ६१ -६२ करता है। " नीरा भाभी क्यों पीछे रहती और उसकी पैट की ओर दिखाकर मुझे इशारा किया।
फिर क्या था , नइकी भौजी थी मैं। मेरा हक़ था।

झुक के पहले तो मैंने पैंट की बेल्ट निकाली , फिर बड़े आराम से ,बटन खोली ,उसके उभरे बल्ज को रंग लगे हाथों से रगड़ा और फिर पल
भर में पैंट नीचे। 

चमेली भाभी ने पैंट उठा के वहीँ फ़ेंक दी , जहाँ कुछ देर पहले रवी ने उनकी साडी फेंकी थी, सीधे छत पे।

बिचारा मेरा देवर , अब सिर्फ एक छोटी सी चड्ढी में था और तम्बू पूरा तना हुआ।

नीरा भाभी मेरी जिठानी पे भी अब फगुनाहट सवार हो गयी थी। हाथों में उन्होंने लाल रंग मला और सीधे , फ्रेंची फाड़ते बल्ज पे ही रगड़ने मसलने लगी।

मैं और चमेली , जो पैर अब तक रंगो से बचे हुए थे पैंट के कवच में , उन्हें लाल पीला करने में जुट गयी।
इतना तो मैंने मायके से सीख के आयी ही थी की अगर होली के दिन देवर का एक इंच भी बिना रंगे बच जाय , तो फिर देवर भाभी की होली नहीं।

चमेली भाभी रवी के सामने कड़ी हो के जोर से उन्होंने उसे अपनी अंकवार में भर लिया और लगी अपनी बड़ी बड़ी चूंचियों का रंग देवर के सीने पे पोतने।

वही रंग जो कुछ देर पहले रवी ने उनके गद्दर जोबन पे रगड़ा मसला था।

चमेली भाभी के हाथ अब रवि के छोटे छोटे लेकिन खूब कड़े मस्त चूतड़ों पे था और उन्हें जोर जोर से भींच रहा था , दबोच रहा था। और जैसे ये काफी ना हो , उन्होंने अपने गीले पेटीकोट से झांकती , चुन्मुनिया को भी रवी के चड्ढी फाड़ते तन्नाये लिंग पे रगड़ना शुरू कर दिया।

मैं क्यों पीछे रहती। मैंने उसे पीछे से दबोचा। कुछ देर तो उस के छोटे छोटे टिट्स को तंग किया , फिर देवर को दिखा के , हाथ में बार्निश लगायी और दोनों हाथ सीधे चड्ढी के अंदर , और' उसे 'मैंने गपच लिया।

खूब बड़ा , ६ इंच से ज्यादा ही होगा , लेकिन ख़ास बात थी उसकी मोटाइ और कड़ाई।
थोड़ी देर मुठियाने के बाद मैंने एक झटके से सुपाड़ा खोल दिया और अंगूठे से सुपाड़े को मसलते , कान में बोला

" क्यों देवर जी ये हथियार कभी तेरी बहन , मीता की प्रेम गली में गया है। चौबीसो घंटे चुदवासी रहती है वो। "

लेकिन मेरी बात चमेली भाभी और नीरा भाभी ने एक साथ काटी।
" अरे मीता की फिकर मत करो , उस पे तो हमारे भाई चढ़ेंगे दिन रात। सफेद दरिया बहेगी उस की बिल से। ये तो इन्होने हमारी सास के भोसड़े के लिए
सम्हाल कर रखा है। "

और उसी के साथ अबकी चमेली भाभी ने दो उंगली पूरी जड़ तक एक झटके में उसके पिछवाड़े पेल दी और आशीष भी दिया।

" तेरी इस मस्त गांड को खूब मोटे मोटे लंड मिलें , अगली होली तक चुदवा चुदवा कर हमारी सास के भोसड़े की तरह हो जाय , जिसमें से तुम और मीता निकले हो। "

रवी सिसक रहा था , हलके से चीख रहा था कुछ दर्द से कुछ मजे से।


वार्निश के बाद अब पे कड़ाही की कालिख मल रही थी।

" देवर जी ये रंग सिर्फ एक तरीके से छूट सकता है , घर लौट के मेरी कुँवारी ननद से खूब चुसवाना इसको "

" बाकी का चीर हरण तो कर दो " नीरा भाभी दर्शन के लिए बेताब हो रही थीं।

मैं थी नयकी भौजी , इसलिए हक़ मेरा ही था।

अपने गदराये जोबन उसकी पीठ पे रगड़ते हुए मैंने चिढ़ाया , "मार दिया जाय की छोड़ दिया जाय , बोला साले भडुवे क्या सलूक किया जाय."

और मेरे उँगलियों ने एक झटके में चड्ढी खिंच के नीचे।

चमेली भाभी ने उसे भी वहीँ पहुंचा दिया , जहाँ उनकी पैंट थी , छत पे।

स्प्रिंग वाले चाक़ू की तरह वो बाहर निकला , एकदम खड़ा मोटा , और पहाड़ी आलू ऐसा सुपाड़ा मैंने पहले ही खोल दिया था।

लाल , नीला, वार्निश , कालिख रंगो से पुता।

मेरा तो मन ललच रहा था अंदर लेने के लिए। मेरी रामप्यारी एकदम गीली हो गयी थी उसे देख के , लेकिन सबके सामने।

नीरा भाभी ने रवी को छेड़ा ,

" क्यों देवर जी तुम्हे ऐसा ही विदा कर दें "


RE: Holi sex stories-होली की सेक्सी कहानियाँ - sexstories - 11-01-2017

ससुराल की पहली होली-3

" क्यों देवर जी तुम्हे ऐसा ही विदा कर दें "

लेकिन अबकी चमेली भाभी रवी की और से बोल उठीं।

" अरे ऐसा गजब मत करियेगा। इतना चिकना माल , ऐसी कसी कसी गांड ( और अपनी बात सिद्ध करने के लिए रवी के दोनों चूतड़ों को फैला के गांड का छेद दिखाया भी , वास्तव में खूब कसा था। )

और इंहा इतने लौंडेबाज रहते हैं , फिर होली का दिन ,… मार मार के इनकी गांड फुकना कर देंगे। महीना भर गौने के दुल्हिन कि तरह टांग फैला के चलेंगे। "

" फिर तो ,… यही हो सकता है की हम लोग इनको अपने कपडे पहना दें , साडी , चोली। कम से कम इज्जत तो बच जायेगी। " भोली बन के मैंने सुझाव दिया , जिसे सर्वसम्मति से मान लिया गया।

फिर देवर जी का श्रृंगार शुरू हो गया।
और साथ में गाना भी

" अरे देवर को नार बनाओ रे देवर को "


सबसे पहले मैंने अपनी पैंटी में उस तन्नाये खूंटे को बंद किया। फिर कपडे पहनाने का काम चमेली और नीरा भाभी ने सम्हाला , और श्रृंगार का काम मेरे जिम्मे।

चमेली भाभी ने अपना पेटीकोट उतार के उन्हें पहना दिया तो एक पुरानी गुलाबी साडी , नीरा भाभी ने उन्हें पहना दी।

मैंने पैरों में महावर लगाया , घुँघर वाली चौड़ी पायल पहनायी , बिछुए पहनाये , और फिर हाथ में कुहनी तक हरी हरी चूड़ियाँ। कान नाक में छेद नहीं होने की परेशानी नहीं थी।

मेरे पास स्प्रिंग वाली छोटी सी नथ थी और बड़े बड़े झुमके , बस वो पहना दिए। गले में मटर माला। होंठो पे गाढ़ी लाल लिपस्टिक , आँखों में काजल , मस्कारा , और सब मेकअप खूब गाढ़ा , जैसे मेरे ससुराल की रेड लाइट एरिया , कालीनगंज में बैैठने वाली लग रही हों।

चमेली भाभी ने ब्रा और चोली पहनायी लेकिन मुझे कुछ 'मिसिंग' लग रहा था और ऩीने दो रंग भरे गुबारे , ब्रा के अंदर ऐडजस्ट कर दिए।

बाल भी फिर से काढ़ के मैंने औरतों की तरह सीधी मांग निकाल दी।

मस्त रंडी लग रही है , मुस्करा के नीरा भाभी ने बोला। फिर उन्हें कुछ याद आया ,

" एक कसर बाकी है " उन्होंने आँख नचा के मुझसे कहा।
" क्या भाभी ," मैंने पूछा।

" सिन्दुरदान " वो बोलीं।
छुटकी भौजी मैं थी तो ये काम भी मैंने कर दिया और नीरा भाभी से कहा , "

" भाभी , सिन्दुरदान तो हो गया , अब सुहागरात भी तो मनानी चाहिए "
" एकदम निहुरा साली को " अबकी जवाब चमेली भाभी ने दिया और जबरन पकड़ा के निहुरा भी दिया और पेटीकोट भी उठा दिया।
नीरा भाभी ने पैंटी घुटने तक सरका दी और मुझसे कहा ,

" मार लो साल्ली की , सिन्दुरदान तूने किया पहला हक़ तेरा है "

और मेरे कुछ समझने के पहले , चमेली भाभी ने एक गुलाल भरा मोटा कम से कम ७ इंच लम्बा कंडोम मेरे हाथ में थमा दिया।

और मेरे कुछ समझने के पहले , चमेली भाभी ने एक गुलाल भरा मोटा कम से कम ७ इंच लम्बा कंडोम मेरे हाथ में थमा दिया।

बस क्या था , घचाघच , घचाघच, पूरी ताकत से मैंने पेल दिया।


एक बात तो अब तक मैं सीख ही चुकी थी की बुर चोदने में भले कोई रहम दिखा दे , गांड मारने में कतई रहम नहीं दिखाना चाहिए।

न मारने वाले को मजा आता है और न मरवाने वाले को।

और सबसे बड़ी बात ये थी की चमेली और नीरा भाभी ने जिस तरह से उनसे निहुरा रखा था , वो एक सूत भी हिल डुल नहीं सकता था।

गुलाल से भरा कंडोम का डिल्डो आलमोस्ट ७ इंच अंदर था। और अब मैं उसे गोल गोल घुमा रही थी।

" कल मैंने क्या कहा था , आज देखेंगे कौन डालता है , कौन डलवाता है। " नीरा भाभी , मेरी जेठानी ने देवर को छेड़ा।

गुलाल भरा कंडोम आलमोस्ट बाहर निकाल के एक धक्के में पूरा अंदर डाल के मैंने पूछा , " बोल भेजेगा न , शाम को अपनी उस रंडी बहन को "

" हाँ भाभी , हाँ " रवी बोला और मैंने अब डिल्डो , अपनी जेठानी के हाथ में पकड़ा दिया।

लेकिन सबसे हचक के गांड मारी चमेली भाभी ने , पूरी ताकत से। और फिर उसे अंदर ठेल के पैंटी पहना के खड़ा कर दिया।

हम तीनो ने उन्हें नारी वेश में बाहर कर के दरवाजा बंद कर लिया।

"जाके अपनी बहन से निकलवाना इसे " पीछे से नीरा भाभी बोलीं।

हमने थोड़ी देर सांस ली होगी , अपने कपडे ठीक किये होंगे ,बाल्टी में फिर से रंग घोला होगा की दरवाजे पे फिर से खट खट हुयी।

रेहन और नितिन थे , दोनों इनके लंगोटिया यार , इसलिए मेरे 'स्पेशल ' देवर। 

हमने थोड़ी देर सांस ली होगी , अपने कपडे ठीक किये होंगे ,बाल्टी में फिर से रंग घोला होगा की दरवाजे पे फिर से खट खट हुयी।

रेहन और नितिन थे , दोनों इनके लंगोटिया यार , इसलिए मेरे 'स्पेशल ' देवर।

रिसेप्शन में इनके सामने ही दोनों ने कहा था , " साले इत्ता मस्त माल ले आया है , हम छोड़ेंगे नहीं" और मुझसे बोला " भौजी , आने दो होली , बचोगी नहीं आप। "


मैं कौन मजाक में पीछे रहने वाली थी , मैंने भी बोला।
" अरे फागुन में देवर से बचना कौन चाहता है , "


पिछली होली मायके में मनी इसलिए मैं बच गयी थी। और मैं जानती थी अबकी ये दोनों छोड़ने वाले नहीं।


दोनों कि निगाह इनके सामने भी मेरे चोली फाड़ जोबन पे रहती थी , और मैं भी कभी झुक के कभी उभार के ललचाती रहती थी।

हम तीन थे और ये दो , लेकिन अमिन समझ गयी की वो पक्का प्लान बना के आये हैं।

नितिन ने चमेली भाभी और नीरा भाभी को उलझाया और बची मैं और रेहन।


मैंने समझती थी कि उससे अकेले पर पाना मुश्किल है , इसलिए मैंने भागने में ही भलाई समझी।

आगे आगे मैं पीछे रेहन।

और मैं स्टोर रूम में घुस गयी.
और यही मेरी गलती थी। ( लेकिन एक मीठी सी गलती)

स्टोर रूम घर के ऐसे कोने में था , जहाँ कुछ भी हो , पूरे घर में उसका अंदाज भी नहीं लग सकता था।

छोटा सा कमरा , वहाँ कुछ पुराने फर्नीचर पड़े थे। आलमोस्ट अँधेरा , बस एक बहुत छोटा सा रोशनदान।

दौड़ते भागते मैं थक गयी थी , कुछ सांस भी फूल गयी थी। मैं एक पुरानी मेज का सहारा लेके झुक के खड़ी थी।
और तब तक दरवाजा बंद होने कि आवाज हुयी , रेहन। वो ठीक मेरे पीछे था।
और जब तक मैं कुछ करती , उसके रंग लगे हाथ मेरे गोरे मुलायम गालों पे थे।


RE: Holi sex stories-होली की सेक्सी कहानियाँ - sexstories - 11-01-2017

गालों पे लाल रंग रगड़ते , रेहन ने चिढ़ाया।
" भाभी मैंने बोला था न की , इस होली में नहीं छोडूंगा। "

" वो देवर असली देवर नहीं है , जो भाभी को होली में छोड़ दे " मैंने भी होली के मूड में जवाब दिया।
वो इस तरह मुझसे पीछे से चिपका था की मैं हिल डुल भी नहीं सकती थी। मेरे दोनों हाथ अभी भी मेज पे थे।


और रेहन का एक हाथ मेरे गोरे चिकने पेट पे था जहाँ वहा काही नीला रंग लगा रहा था।


मेरा आँचल कब का ढलक चूका था और चोली फाड़ जोबन लो कट ब्लाउज से खुल के झाँक रहे थे , रेहन को ललचा रहे थे।

लेकिन रेहन ने ब्लाउज में हाथ डालने की कोशिश नहीं की। पेटे पे रंग रहे उसके हाथ ने बस ब्लाउज के सारे बटन खोल दिए। बड़े बड़े जोबन के चलते ऊपर के दो बटन तो बंद ही नहीं थे , रवी से होली के चक्कर में एक बटन गायब हो चूका था , बस तिन बचे जो रेहन ने खोल दिए


और साथ ही फ्रंट परं ब्रा का हुक भी।

मेरी दोनों रसीली चूंचिया , छलक कर बाहर आ गयीं।




" भाभी जान , होली के दिन भी इन्हे बंद कर के , देवरों से छुपा के रखना एकदम गलत है। "

दोनों जोबन को कस के रगड़ते मसलते वो बोला। 

बड़ी बेरहमी से वो मेरी चूंची मसल रहा था। राजीव भी रगड़ते थे लेकिन प्यार से।

पूरी ताकत से , मेरी चूंची वो दबा रहा था , कुचल रहा था , पीस रहा था।

दर्द हो रहा था मुझे मैं हलके हलके चीख भी रही थी।


लेकिन ये मैं भी जानती थी और रेहन भी की अगर में खूब जोर से चिलाउं तो भी घर में नहीं सुनायी पड़ने वाला था और इस समय तो होली का हंगामा , बाहर से लाउड स्पीकर पे होली के गानो की आवाज
, कोई सवाल ही नहीं था।


और अब मुझे उस दर्द में भी एक नया मजा मिलने लगा। एक ऐसा मजा , जिसे मैं आज तक जानती भी नहीं थी।
और उसी समय , रेहन ने पूरी ताकत से मेरे खड़े निपल्स को पुल कर दिया।

दर्द से मैं चीख उठी। " नहीं देवर जी ऐसे नहीं प्लीज लगता है " मैंने बोला।

" " तो क्या भाभी जान ऐसे " उसने दूसरा निपल पहले से भी ज्यादा जोर से पुल किया , और मेरी आँखों से आंसू का एक कतरा , मेरे गालों पे छलक पड़ा

रेहन ने पहले तो उसे चाटा , फिर कचकचा के काट लिया।

" अरे देवर जी क्या करते हो निशाँ पड़ जाएगा। " मैं बोली।

" अरे भाभी जान यही तो मैं चाहता हूँ की आपके इस देह पे आपके देवर रेहन का निशान हर जगह पड़ जाये , जिससे आपको अपने इस प्यारे देवर की याद आती रहे "

और उसी के साथ कचकचा के एक चूंची पे उसने पूरी ताकत से काट लिया और दूसरी पे अपने सारे नाखूनों के निशान गोद दिए।

मजे की बात ये थी कि अब मुझे ये सब बहुत अच्छा लग रहा था।

और साथ उसने एक हाथ से मेरा पेटीकोट और साडी कमर तक उठा दी और अब मैंने ऊपर और नीचे दोनो ओर से नंगी थी।

" अरे होली भाभी से खेलनी है , भाभी के कपड़ों से थोड़े ही खेलनी है। " रेहन बोला।

रंग अब आगे पीछे दोनों और लग रहा था। उसका बल्ज मेरे नंगे चूतड़ों से रगड़ खा रहा था। और रेहन ने मेरा हाथ खीच के अपने बल्ज पे रख के जोर से दबाया ,

" भाभी जान देखिये , कितना रंग है आपके देवर की पिचकारी में ".
मस्ती से मेरी भी हालत ख़राब थी। तब तक रेहन कि जींस सरसराती नीचे गिर गयी और उसका मोटा खूंटा ,

मैंने उसे पकड़ने में थोड़ी आनाकानी कि उसने चार जबरदस्त हाथ मेरे चूतड़ों पे जड़ दिए। फूल खिल आये गुलाबी वहाँ। 

मैंने फिर लंड हाथ में पकड़ने की कोशिश की। इतना मोटा था कि मुश्कल से हाथ में समां रहा था , और लम्बा भी खूब।

थोड़ी देर तक वो चूतड़ और चूत के बीच रगड़ता रहा , मस्ती से मेरी आँखे मुंदी जा रही थीं। बस मन कर रहा था चोद दे हचक कर ,

रवी मेरे देवर के साथ मस्ती से हालत खरा ब हो रही थी। उसके पहले सुबह जान का बम्बू देख चुकी थी।

रेहन भी न , अब वो जोर जोर से मेरे बूब्स और क्लिट साथ साथ रगड़ रहा था , बस मन कर रहा था की , लेकिन रेहन को तड़पाने में मुझे मजा आ रहा था।

अंत में उसने मेरे मुंह से कहलवा ही लिया की मैं उससे चुदना चाह रही हं।


लेकिन उसने मुझे नीचे बैठाया और बोला , 

"भाभी जरा पिचकारी को चूम चाट तो लो और लंड से ही जोर से एक बार मेरे गाल पे , चांटे कि तरह लगा.

और मैंने मुंह खोल के उसका सुपाड़ा अंदर ले लिया , और जोर जोर से चूसने लगी।


कुछ ही देर में वो मेरा सर पकड़ के जोर जोर से मेरा मुंह चोद रहा था।

मैं लाख गों गों करतीं रही लेकिन वो हलक़ तक धकेल के ही माना।

मैं भी जोर जोर से चूसतीं रही , और जो वो झडने को हुआ , तो लड पूरा बाहर निकालकर , सारी की सारी मलायी , मेरे चेहरे , बालों पे और रस लगे सुपाड़े को मेरी चूंचियों पे जोर जोर से मसल के लगाया।

"मैंने ये तय किया था कि आप से पहली होली लंड के रंग से ही खेलूंगा " मुस्करा के रेहन ने बोला। 

तब तक रोशनदान से मैंने देखा की कुछ औरतों का झुण्ड हमारे घर की ओर आ रहा है।

मैंने रेहन को बोला चलो निकलो लगता है ये सब यही आ रही हैं और फिर मुझे ढूँढ़ेंगीं।

निकळते निकलते रेहन बोला भाभी ये होली का ट्रेलर था , असली होली चुन्मुनिया के साथ खेलनी है , मेरी चूत मसलते हुए बोला।

" अरे देवर जी , अभी तो शाम को होली होनी है , यहाँ तो होली रंगपंचमी तक चलती है , मैं ही कौन छोड़ने वालीं हूँ , आपकी पिचकारी को पिचका के ही दम लुंगी। "


मैंने भी जोर से उसके लंड को दबाते हुए जवाब दिया।

बाहर निकल कर उसका दोस्त मिला , और जिस तरह उसने इशारा किया लग रहा था की , नीरा भाभी के साथ वो 'एक राउण्ड खेल 'चूका है। 

इतने देवर आये मैंने गिन नहीं सकती थी।


पड़ोस के लड़के , इनके दोस्त , दूर दराज के रिश्तेदार , बस एक चीज कामन थी ,शायद ही कोई ऐसा देवर बचा हो जिसने मेरे ब्लाउज के अंदर हाथ डाल के जोबन का रस न लिया हो और अपना खूंटा न पकड़वाया हो।


और जो थोड़े बहुत हिम्मती होते थे , वो रामप्यारी को भी सहला देते ऊँगली कर देते। लेकिन मैं , चमेली भाभी और नीरा भाभी के साथ मिल के बराबर का मुकाबला कर रही थी , कितनो के कपडे फटे , अगवाड़े पिछवाड़े हर जगह रंग ही नहीं लगा , कई देवर चमेली भाभी के ऊँगली के भी शिकार हुए।


और देवरों के लंड मुठियाने में नीरा भाभी भी हम लोगों से पीछे नहीं थी।

एक बिचारा छोटा देवर , ८-९ में पढता होगा , नीरा भाभी ने उसकी हाफ पैंट सरका के नीचे कर दी और मुठियाने के साथ उसी से उसकी बहनो को एक से एक गालियां दिलवायी और फिर बोला , " खड़ा मैने कर दिया है , झड़वाना चुन्नी से जा के "


लेकिन उस के निकलने के पहले चमेली भाभी ने उसे निहुरा दिया और मुझसे बोला ,

" कोमल देख , अभी इस साल्ले ने गांड मरवाना शुरू किया है कि नहीं। "

मैं क्यों पीछे रहती , इतना चिकना देवर था। मैंने भी घचाक से एक ऊँगली अंदर की , और बोला

नहीं भाभी अभी तो एकदम कच्ची कली है। "

नीरा भाभी ने मुझे ललकारा , " अरे तो कर दे न निवान साल्ले काओ , अच्छा मुहूरत है। होली के दिन गांड मरवाना शुरू करेगा तो उमर भर के लिए गांडू बनेगा। कितने लौण्डेबाजों का भला करेगा।

अपनी जिठानी कि बात भला मैं कैसे टालती। 

लेकिन जो मजा औरतों कि होली में आया वो इससे भी १० गुना था।

न कोई रिश्ते का बंधन , न कोई उमर का लिहाज।

चमेली भाभी की भाषा में बोलूं तो कच्चे टिकोरे वालियों से लेकर बड़े रसीले आमों वाली तक।


ननदों की जो टोली आयी उसमें कुछ फ्राक में थी , कुछ टॉप स्कर्ट में और कुछ शलवार कुर्ते वाली। ज्यादातर कुँवारी थी लेकिन कुछ शादी शुदा भी , साडी में।


एक ननद कि शादी अभी कुछ महीने पहले ही हुयी थी। उसके हस्बेंड कल आने वाले थे। चमेली भाभी ने उसी को धर दबोचा और साडी उठा के सीधे अपनी चूत से चूत रगड़ते हुए बोलीं

" अरे ननदोई नहीं है तो क्या चल भौजी से मजा ले ".



नीरा भाभी ने मुझे एक टिकोरे वाली की और इशारा किया , लाली पड़ोस की थी अभी दसवें में गयी थी।

मैंने उसे पीछे से धर दबोचा और एक झटके में फ्राक का ऊपर का हिस्सा फाड़ के अलग , सफेद ब्रा मेरे लाल रंग के रंगे हाथों से लाल हो गयी और थोड़ी देर में जमीन पे थे।

कस कस के मैंने उसकी चूंची मलते पूछा ,

" क्यों मेरे देवरों से दबवाना अभी शुरू किया कि नहीं "
" नहीं भाभी " शर्मा के वो बोली।
" अरे मैंने तो सूना था कि मेरी सारी ननदें , चौदह की होते ही चुदवाना शुरू कर देती है , और तू ,…चल मैं ही अपने किसी देवर से तेरी सेटिंग कराती हूँ। " और ये कह के मैंने उसकी चड्ढी भी खींच दी। 


RE: Holi sex stories-होली की सेक्सी कहानियाँ - sexstories - 11-01-2017

ससुराल की पहली होली-4

झांटें बस आना शुरू ही हुयी थीं। मैंने थोड़ी देर तक तो उस कच्ची कली की मक्खन सी चूत को सहलाया फिर एक झटके में उंगली अंदर पेल दी।

लेकिन तब तक खूब जोर का शोर हुआ , और मैंने देखा की चमेली भाभी के यहाँ बाजी पलट चुकी थी। ५-६ ननदें एक साथ , और अब चमेली भाभी नीचे थीं।

एक शलवार वाली उनकी खुली जांघो के बीच धीमे धीमे एक पूरी लाल रंग कि बाल्टी उड़ेल रही थी। " भाभी अब तोहार चूत की गरमी कुछ शांत होई।

एक शादी शुदा ननद , अपनी बुर उनके मुंह में रगड़ रही थी और दो चार कम उम्र कि ननदे भाभी की चूंचियों पे रंग लगा रहै थी।

और मेरी भी खूब दूरगत हुयी , आखिर नयकी भौजी जो थी।

लेकिन मुझे मजा भी बहुत आया। कोई ननद नहीं बची होगी , ज्सिकी चूत में मैंने उंगली न की हो। और कोई ननद नहीं होगी जिसने मेरी चूंचियों पे रंग नहीं लगाया और चूत नहीं मसली। 

लेकिन तबक तक कालोनी से भाभियों की एक टोली आयी और फिर बाजी पलट गयी।

और भाभियों की टोली में एक ग्रूप , ' इन्हे ' ढूंढते हुए , मेरे कमरे में पहुंचा।

बिचारे निर्वस्त्र घेर लिए गए। बस मेरी ब्रा पैटी थी उसी में उन्हें पहना कर भाभियाँ उनके हाथ पैर पकड़ के , घर के पीछे बने एक चहबच्चे में ले जा के डाल दिया। वहाँ पहले से ही रंग कीचड़ सब भरा था।




चार पांच भाभियाँ उसी में उतर गयी और उनकी वो रगडयाइ हुयी कि पूछिए मत। बड़ी देर के बाद जब वो निकल पाये , और मुश्किल से नीरा भाभी ने उन्हें कपडे दिए और साथ में रंग की एक बड़ी सी ट्यूब। 

" भौजाइयों के साथ बहुत होली खेल लिए अब जरा अपनी बहन के साथ भी अपनी पिचकारी की ताकत जा के दिखाओ और हाँ ये पेंट की ट्यूब ले जाओ उस मीता छीनार की चूंचियों पे जम के लगाना और बोलना शाम को जरूर आये। "

उनकी जान बची और वो भागे।

मैं भी छत पे ऊपर चली गयी।

करीब बारह बज रहा था और चार घंटे से लगातार , होली चल रही थी। थोड़ी देर के अल्प विराम के लिए मैं छत पे चली गयी

और छत पहुँच के घर के बाहर का होली का हंगामा देखने को मिला।

क्या नजारा था।

बगल कालोनी लड़कियों औरतो की होली चल रही थी। रंग से सराबोर कपडे , देह से चिपके , सारे कटाव उभार दिखातीं , ललचाती।

जो कभी जरा सा दुपट्टे के सरकने पे परेशान हो जाती थीं , वो आज जवानी के सारे मंजर दिखा रही थीं। उभरती चूंचिया , भरे भरे चूतड़ , सब कुछ शलवार , साडी से चिपक के जान मार रहा था। लेकिन एक तेज शोर ने मेरा ध्यान सड़क की खींचा।


ढेर सारे हुरियारे , एक ठेले पे माइक लगाए शोर मचाते , टीन , कनस्तर , ढोल बजाते , कबीर गाते , गन्दी गन्दी गालियां , और वो भी मोहल्ले की औरतों का नाम ले ले के , और बीच बीच में जोर जोर से नारे लगाते ,

ये भी बुर में जायेंगे लौंडे का धक्का खायँगे

होलिका रानी ज़र गयीं , बुर चोदा , ई कह गयीं।

और सबसे मजेदार था एक आदमी जो सबसे आगे था और गधे पे बैठा था और जोर जोर से गालियां दे रहा था।

कुछ औरतें घर की छतों पर से उन पर बाल्टी , पिचकारी से रंग फ़ेंक रही थी और उन औरतों का नाम ले ले के वो एक से एक गन्दी गालियां दे रहे लेकिन वो सब मजे ले रही थीं

अचानक की उस हुजूम ने मुझे उन्हें देखते हुए देख लिया। फिर तो तुफान मच गया।

ले गाली ले गाली ,

अरे कोमल भौजी , खोला केवाड़ी , उठावा तू साडी ,

तोहरी बुर में चलायब हम गाडी

और फिर कबीर,…

चना करे चुरमुरुर , चिवड़ा मचामच अरे चिवड़ा मचामच ,

अरे कोमल भौजी टांग उठावा , अरे चोदब घचागच , अरे चोदब गचागच।

हो कबीरा सारर साररर , खूब चली जा हो खूब चली जा


एक पल के लिए मैंने सोच हट जाऊं , लेकिन होली की मस्ती मुझे भी पागल कर दे रही थी।

जैसे ही वो गधे वाला मेरी छत के सामने से निकला , मैंने रंग भरे गुब्बारे एक के बाद एक उन सबो पे मारे और उधर से भी पिचकारी की बौछार सीधे मेरी चोली पे ,

जाते जाते वो बोला , " अरे भौजी , तानी चोली का गुब्बारा दा न

औ दो गुबारे भीगे देह से एकदम चिपके ब्लाउज से रगड़े और उस के पिछवाड़े दे मारा

" हे भौजी , तनी चोली क गुब्बरवा हमहुँ के दे देती न " पीछे से जोरदार बाहों ने सीधे मेरे कहा।

मुड़ कर देखा तो और कौन, मेरा फेवरिट देवर जान
स्ट्रांग , मैनली , मस्क्युलर , जिम टोंड सिक्स पैक्स ,

जोर से उसने अपनी बांहो के नागपाश में भींच लिया और मेरे गालो पे चुम्बन के गुलाब खिलाता बोला ,

मैंने सोचा आज तो पास से हैप्पी होली बोल दूँ।

कुछ नाराजगी , कुछ मुस्कान के साथ मैंने उसे मुड़ के देखा।

सिर्फ एक टी शर्ट और छोटे से बाक्सर शार्ट में वो ,

" हे कोई देख लेगा तो और आये कैसे "

' अरे भौजी घबड़ाओ मत , छत का दरवाजा मैंने बंद कर दिया है , और वैसे भी नीचे आँगन में जो उधम है आधे एक घंटे तक किसी को आपको सध लेने की फुरसत नहीं होगी। और जहाँ तक आने का सवाल है , सिम्पल छत लांघ के "


RE: Holi sex stories-होली की सेक्सी कहानियाँ - sexstories - 11-01-2017

मैंने मुड़ के देखा। सच में सीढ़ी से छत का दरवाजा बोल्ट था , और छत पे आने का यही रास्ता था। नीचे आँगन से होली के उधम की जोरदार आवाजें आ रही थीं / कालोनी के औरतों लड़कियों की टोली आ गयी थी और आधे घंटे से ज्यादा ही धमाल होना था।

राजीव भी एलवल गए थे , मीता के यहाँ होली खेलने। उन्हें भी एकघंटे तो लगना ही था।

फिर मैंने जान की बालकनी की और देखा , इतना आसान भी नहीं था। देवर ने बड़ी हिम्मत दिखायी थी फगुए का नेग बनता ही था।

मैं मुस्करा दी।

बस इससे बड़ा ग्रीन सिग्नल और क्या हो सकता था।

जान के ताकतवार हाथो का प्रेशर मेरे ब्लाउज से छलकते बूब्स पे दूना हो गया।
और होली चालू हो गयी।

मेरा ब्लाउन वैसे ही बहुत टाइट लो कट था , उपर के दो बटन मैंने खोल रखे थे , मेरी बड़ी बड़ी चूंचियों को उसमे समाने के लिए। 

एक बटन रवि से होली खेलने के समय टूट गया और अब सिर्फ नीचे के दो बटनो के सहारे मेरे गद्दर जोबन थोडा बहुत ढंके थे।

और वैसे भी मेरी ब्रा और पेटीकोट दोनों नीचे ननदो से होली खेलते समय ही उतर गए थे।

अब मैंने सिर्फ साडी ब्लाउज में थी और दोनों देह से चिपके रंगो से भीगे।

जान की मरदाना , तगड़ी उंगली मेरे भीगे उरोजो से चिपकी हुयी थी , उसे दबोच रही थी दबा रही थी

और साथ ही उसका मोटा खूंटा , शार्ट फाड़ता , मेरी गीली बड़े बड़े चूतड़ों से चिपकी साडी के बीच गांड की दरार में धक्के मार रहा था।

नीचे मेरी ननदों ने जो भांग पिला दी थी , कुछ उस का असर और कुछ जो सड़क पे हुरियारे गालियां दे रहे थे उनका असर ,

मैं भी सीधे गालियों पे उतर आयी।

जान का एक हाथ अब ब्लाउज के अंदर था , वो मेरी चूंची दबा रहा था , मसल रहा था , निपल पिंच कर रहा था। 

अपना मोटा लंड मेर्री गांड पे रगड़ते उस ने पूछा , " क्यों भाभी डाल दूँ " और मैं चालु हो गयी।


" अरे साल्ले , हरामी के जने , छिनार के , भोंसड़ी के , होली में भौजाई के वो तो वैसे नहीं डालेगा , तो क्या अपनी, … मेरी सास ननद की बुर में डालेगा , भँड़वे , वो तो वैसे ही रोज शाम को कालीनगंज ( रेड लाइट ऐरिया मेरी ससुराल का ) वहाँ जोबन की दूकान लगा के बैठती हैं "

इसका नतीजा वही हुआ जो मैंने सोचा था , अगले झटके में ब्लाउज के बाकी दोनों बटन खुले और ब्लाउज छत पे था।

और जान के हाथों पे लगा गाढ़ा लाल रंग जोर जोर से मेरी चूंचियो पे

अब तक सुबह से दरजन भर से ज्यादा देवर मेरी चूंची मर्दन कर चुके थे , लेकिन जो जबदस्त रगड़ाई ये कर रहा था , दोनों हाथो से , लग रहा था जैसे कोई चक्की चल रही हो जो मेरे उभारों को कुचल के रख दे ,
ताकत के साथ तरीके का का भी अद्भुत मिश्रण था ,



होली में मैं मैं क्यों पीछे रहती , और रंग भरे गुब्बारे तो रखे ही थे ,

मैंने झुक के एक उठाया , पीछे हाथ कर के जान की शार्ट सरकाई और सीधे लाल रंग का गुब्बारा उसके 'खूंटे ' पे फोड़ दिया।

लाल भभूका, और शार्ट पैरों पे। देवर भाभी की होली हो और देवर का काम दंड कैद रहे यह कोई भाभी कैसे देख सकती है।

लेकिन जान भी तो मेरे देवर था उसने साडी उठा के बस मेरे कमर में छल्ले की तरह फंसा दिया और अब एक हाथ मेरे फेवरट देवर का मेरी चूंची रगड़ रहा था और दूसरा मेरा चूतड़।

असल में मेरे सारे देवर मेरी चूंचियों के साथ मेरे भरे भरे चूतड़ों के भी दीवाने थे और इसे तो मैंने ललचाने , चिढ़ाने के लिए अक्सर इसे दिखा के अपने नितम्ब मटका देती थी।

एक गुब्बारे से तो मेरे देवर का काम चलता नहीं , इसलिए झुकी हुयी मैंने दूसरा बैंगनी रंग का गुब्बारा उठाया और फिर उसके लंड पे सीधे दबा के और अबकी जो रंग बहा तो वो हाथो में पॉट के मैंने देवर के लंड को मुठियाना शुरू कर दिया।

कित्ती मुश्किल से मेरी मुट्ठी में आ पाया वो।

आज होली में जोनाप जोख की थी मैंने , उसमें मेरे इस देवर का साइज २० नहीं बैठता था। बल्कि पूरा २२ था।
रंग लगाते हुए एक झटके में मैंने सुपाड़ा खीच के खोल दिया , मोटा , पहाड़ी आलू ऐसा , एकदम कड़ा।

मैंने छज्जे पे झुकी थी ही , जान ने टाँगे फैलायीं और सीधे सुपाड़ा मेरी चूत के मुंह पे .

सुबह से चूत में आग लगी थी।

एक तो मैंने राजीव को रात में एक बार मुंह से झाड़ दिया था और उसके बाद सुबह से पहले तो रवी के साथ मस्ती , फिर रेहन और देवर नन्द , लेकिन चूत की खुजली बढती ही जा रही थी। कितने देवरों ननदों ने उंगली की लेकिन झड़ने के पहले ही,…

मस्ती से मेरी आँखे बंद थी , चूंचियां पत्थर हो रही थीं , निपल भी एकदम कड़े हो गए थे ,… और मैंने अपनी चूत उस के सुपाड़े पे रगड़ना शुरू कर दिया।

जान भी न , बजाय आग बुझाने के और आग भड़काने में लगा था , एक हाथ जोर जोर से चूंची मसल रहे थे , दूसरा क्लिट रगड़ रहा था।

मैंने फिर गालिया बरसानी शुरू कि ,

" अरे डालो न क्या मेरी ननदो के लिए बचा रखा है "


और एक झटके में मेरे देवर ने मूसल पेल दिया , पूरा सुपाड़ा अंदर और मैं बड़ी जोर से चिल्लाई

" साल्ले अपनी, .... भोंसड़ा समझ रखा है क्या , जरा आराम से कर न "


जिस तरह से लंड रगड़ता , दरेरता , घिसटता मेरी बुर में घुसा , दर्द से जान निकल गयी लेकिन मजा भी खूब आया।

जान ने सुपाड़े तक लंड निकाला और फिर गदराये चूतड़ों को पकड़ के ऐसा हचक के धक्का मारा की फिर जान निकल गयी। 

मेरे निपल्स उमेठते उसने छेड़ा ,

" अरे भौजी होली में जब तक भाभी क बुर भोंसड़ा न बन जाय तब तक चुदाई का कौन मजा "

जिस तरह से लंड रगड़ता , दरेरता , घिसटता मेरी बुर में घुसा , दर्द से जान निकल गयी लेकिन मजा भी खूब आया।

जान ने सुपाड़े तक लंड निकाला और फिर गदराये चूतड़ों को पकड़ के ऐसा हचक के धक्का मारा की फिर जान निकल गयी।



मैं छज्जे को खूब जोर से पकड़ के झुकी थी।

मेरी साडी बस एक पतले से छल्ले की तरह मेरे कमर में फँसी , अटकी थी। ब्लाउज तो कब का साथ छोड़ चूका था मेरे दोनों मस्त कड़े कड़े रंगों से रँगे , पुते उरोज भी झुके थे और मेरा पडोसी देवर , एक के बाद एक धक्के पे धक्के मारे जा रहा था। और थोड़ी ही देर में सुपाड़ा सीधे मेरी बच्चेदानी पे ठोकर मार रहा था। हर ठोकर के साथ मैं गिनगिना उठती।

मैं चीख रही थी , सिसक रही थी , सिहर रही थी , अपने देवर के पूरे खानदान को एक से के गालियाँ दे रही थी।

लेकिन उससे और जोश में आके उसके चोदने की रफ्तार दुगुनी हो रही थी। 

मेरे दोनों हाथ तो छज्जे को पकडे हुए थे , उसे जोर से भींच रहे थे , लेकिन , मैं ,कभी चूतड़ से धक्के का जवाब धक्के से , और कभी कसी संकरी बुर में उसके मोटे मूसल को निचोड़ के , जवाब दे रही थी।
चुदाई की रफ्तार खूब तेज हो गयी थी और तभी , उसने मेरे क्लिट को जोर से पकड़ के रगड़ दिया , और मैं पत्ते की तरह कांपने लगी।

मैं तेजी से झड रही थी। जैसे कोई खूब बड़ी सी पिचकारी में रंग भर के एक झटके में छोड़ दे ,…छ्र्र्र्र्र छ्र्र्छ्र्र्र्र,… बस उसी तरह

और उपर से मेरे दुष्ट देवर ने आग में धौंकनी चला दी। झुक के वो मेरे निपल्स जोर ज्जोर से चूसने लगा , हलके से बाइट कर दिया ,

मस्ती से मेरी आँखे मुंदी जा रही थी बिना रुके मैं बार बार झड़ रही थी।

धीरे धीरे उसने फिर से धक्के की रफ्तार बढ़ायी , मेरी थकान कम हुयी और मैं फिर पूरे जोश में चुदाई का मजा ले रही थी , उसी तरह छज्जे पे झुके डागी पोज में

तब तक सड़क पे फिर कुछ हुरियारों का शोर सुनायी पड़ा और लंड अंदर घुसेड़े , मुझे उठा के वो छज्जे से दूर छत पे ले गया और मुझे दुहरा कर के फिर चुदाई शुरू कर दी.


RE: Holi sex stories-होली की सेक्सी कहानियाँ - sexstories - 11-01-2017

ससुराल की पहली होली-5

तब तक सड़क पे फिर कुछ हुरियारों का शोर सुनायी पड़ा और लंड अंदर घुसेड़े , मुझे उठा के वो छज्जे से दूर छत पे ले गया और मुझे दुहरा कर के फिर चुदाई शुरू कर दी.
मुझे उसने आलमोस्ट दुहरा कर दिया था और हुमक हुमक कर चोद रहा था।

उसका घोड़े जैसा लंड चूत फाड़ते , चीरते सीधे बच्चेदानी पे धक्का मार रहा था। साथ ही लंड का बेस क्लिट पे रगड़ खा रहा था।

" पह्ले तो मैं सोचती थी सिर्फ मेरी सास ने ही , लेकिन अब लगता है की मेरी ससुराल की सारी औरतों ने गदहों , घोड़ों से घूम घूम के चुदवाया है , तभी तो ये गदहे , घोड़े जैसे लंड वाले लड़के जने । "

देवर की चौड़ी छाती पे अपनी चूंची पे लगा सारा रंग लपेटते , लगाते , जोर से उसकी पीठ पकड़ कर अपनी भींचते हुए मैंने चिढ़ाया।

जवाब जॉन के बित्ते भर के लंड ने दिया। आलमोस्ट निकाल के उसने एक ही धक्के में पूरा पेल दिया।

मेरी जान आलमोस्ट निकल गयी और देवर ने बोला "

अरे भाभी न होता तो आपको होली का मजा कैसे देता "

बात उसकी एकदम सही थी।


मैं भी मस्ती में चूतड़ उठा उठा के चुदा रही थी , बिना इस बात का ख्याल किये की मैं नीले गगन के खुली छत पे चुदा रही हूँ।



साथ में उसने फिर जोर जोर से मेरी चूंची मसलनी शुरू कर दी और एक निपल उसके मुंह में था।

मैं एक बार फिर झड़ने के कगार पे थी।

हाँ देवर जी और जोर से उह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आह क्या मजा, जॉन प्लीज ,…ऱुको मत ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह "

और जैसे ही मैं झड़ने लगी , उसने चुदायी और तेज कर दी। उसकी भी आँखे मुंदी जा रही थी।

और थोड़ी देर में मेरे उछलते गिरते चूतड़ों की थाप पर , सुर ताल पे ,

उसकी मोटी लम्बी पिचकारी ने रंग फेकना शुरू कर दिया।

गाढ़ा थक्केदार , रबड़ी , मलायी की तरह सफेद बिना रुके ,

और मैं चूतड़ उठा उठा के रोपती रही , लीलती रही , घोंटती रही ,… और फिर थक के लेट गयी।

लेकिन तब भी मेरे देवर कि पिचकारी ने रंग फेकना जारी रखा , होली का असली रंग जिसकी प्यास मेरी बुर को सुबह से थी। 

और जब उस ने लंड बाहर निकाल तो भी , खूब मोटा कड़ियल ,

मैंने साडी ठीक की। छत पर गिरा ब्लाउज उठा के पहना , बटन तो सारे टूट गए थे , लेकिन तभी उसने रोक दिया ,

और मेरी खुली चूंचियों पे चेहरे पे अपने सुपाड़े पे लगे वीर्य को रगड़ मसल दिया। क्या मस्त महक थी।

मैंने उसे साफ करने की कोशिश की तो उसने मन कर दिया , नहीं भाभी , होली कि निशानी। 

लाल , बैंगनी , नीले , रंगो के ऊपर गाढ़ा सफेद थक्केदार ,…

देवर की बात ,… मैं कौन होती थी टालने वाली। चून्चियों के ऊपर ब्लाउज बस लपेट लिया।

मैं ने आंगन की और देखा तो वहाँ होली का हंगामा ख़तम हो चूका था। बस दो चार लड़कियां बची थी , वो भी अब जा रही थीं।

मैं चलने को हुयी तो जान ने एक बार फिर पीछे से पकड़ लिया ,

" भाभी , आप को पीछे से देखता हूँ तो बस यही मन करता है इस कसर मसर करती गांड को मार लूँ "

मैंने अपनी गांड उसके शार्ट से झांकते , मोटे लंड पे कस के रगड़ दिया और मुस्करा के बोली ,

" अरे देवर जी अभी कौन सी होली ख़तम हुयी है। होली कि शाम बाकी है , फिर यहाँ तो होली पांच दिन चलती है। और मैं कौन सा गांड में ताला डाल के
रखूंगी। भौजाई तुम्हारी तो उसकी सब चीज तुम्हारी। "

और उसे दिखा के एक एक बार जोर से गांड मटकाई , और सीढ़ियों से धड़ धडाती हुए नीचे चल दी।
मैं सोच रही थी अभी , थोड़ी देर पहले मेरी एक ननद आयी थी , उसकी शादी भी मेरे साथ ही हुयी थी। उसकी पिछले साल पहली होली ससुराल में मनी।

वो बोल रही थी ,

" भाभी , पहली होली में ही मैंने 'हैट ट्रिक ' कर ली। सुबह सबसे पहले मेरे नंदोई ने होली खेलते हुए ही नंबर लगा दिया। फिर इनका एक कजिन देवर , छोकरा सा , इंटर में पढता था , और शाम को इनके एक फ्रेंड ने। रात में तो ये इन्तजार में थे ही "

मैं सोच रही थी चलो मेरा भी ससुराल की पहली होली का खाता तो खुल ही गया। 

गनीमत थी नीरा भाभी किचेन में थी और , चमेली एक बार फिर से बाल्टी में रंग घोल रही थी।

मैं चुपके से आँगन में पहुँच गयी।

चमेली भाभी मुझसे कुछ पूछतीं , उसके पहले दरवाजा खुला और रंगे पुते ,मेरे 'वो ' राजीव दाखिल हुए , अपनी ममेरी बहन मीता के यहाँ से होली खेल कर।

' क्यों डाल आये मीता की बिल में , मजा आया " नीरा भाभी , मेरी जेठानी ने अपने इकलौते देवर को चिढ़ाया।

वो कुछ जवाब देते उसके पहले उनके कान में मैं फुसफुसाई ," नीरा भाभी और चमेली भाभी को छोड़ियेगा मत। देवर के रहते , होली में भाभी अनचुदी रह जाय बड़ी नाइंसाफी है। और फिर पिछले साल आप ने मेरी भाभी का भी तो अगवाड़ा पिछवाड़ा , कुछ भी नहीं छोड़ा था। "

मुस्करा के उन्होंने नीरा भाभी को पकड़ा और जब तक नीरा भाभी कुछ समझे उनका आन्चल , राजीव के हाथ में था और अगले झटके में पूरी साडी।

कुछ ही देर में चोली और ब्रा का भी वही हश्र हुआ। 

लेकिन चमेली भाभी थी न , मेरी जेठानी का साथ देने। उन्होंने पल भर में राजीव के कपडे उतार फेंके।

लेकिन मैं थी न अपने पति का साथ देने वाली।

मैंने चमेली भाभी की साडी खींच दी और अगला झपट्टा ब्लाउज पे मारा। ब्रा उन्होंने पहना ही नहीं था और पेटीकोट ननदो ने न सिर्फ उतारा था बल्कि चिथड़े चिथड़े कर के फ़ेंक दिया था।

और जब मैंने मुड़ के नीरा भाभी की ओर देखा तो वो रंगो के बीच गिरी पड़ी थी और मेरे पति और उनके देवर , अपनी भौजाई के दोनों गदराये , बड़े बड़े खुले उरोजों को रंग से , रंगने में लगे थे।


अगले ही पल मेरी जेठानी की लम्बी गोरी टाँगे उनके कंधे पे , और उनकी फैली दूधिया जांघो के बीच में वो,… .एक धक्के में उनका बित्ते भर का लंड उनकी भाभी की रसीली बुर में ,… 

और उधर चमेली भाभी अब मेरे पीछे पड़ गयीं। पल भर में मेरी साडी उनके हाथ में थी। पेटीकोट ब्रा तो ननदो ने कब का उतार दिया था , और ब्लाउज के बटन जान ने तोड़ दिए थे। मैं भी अब नीरा भाभी और चमेली भाभी की हालत में आ गयी थी। उन्होंने मुझे ललकारा

" जब तक तेरा साजन नीरा भाभी पे चढ़ाई कर रहा है , मैं तुम्हे मजा चखाती हूँ। "

चमेली भाभी से जितना आसान नहीं था। जल्द ही मैं उनके नीचे थी। उनकी 38 डी डी साइज की बड़ी बड़ी छातियाँ मेरी चूंचियों को रगड़ रही थी और बुर मेरे चूत पे घिस्से मार रही थी। मैं कौन पीछे रहने वाली थी।

कैंची मार के अपनी लम्बी टांगो से मैंने चमेली भाभी की पीठ जोर से दबोच ली और मैं भी नीचे से अपनी चूत उनकी बुर से रगड़ने लगी। और हम लोगों की 'लेस्बियन रेस्लिंग' देख के ' उनका जोश और बढ़ गया।

अपनी भौजाई को आँगन में हुमच हुमच कर चोदते हुए वो बोले ,

" भाभी आपका तो पिछले साल का भी उधार चुकाना है " ( पिछले साल की होली में वो मेरे मायके में थे )

और मेरी जेठानी भी कम नहीं थी। उनके हर धक्के का जवाब चूतड़ उठा उठा के दे रही थी जैसे न जाने कितनी बार उनसे चुद चुकी हों।

नीचे से जोर से धक्का लगाते वो बोली ,

" अरे देवर जी आपके लिए एक बढ़िया इनाम है ", . 


खुश होके उत्सुकता से उन्होंने पूछा
" क्या है भाभी , बताइये न "

" एक मस्त माल है , एकदम कच्ची कली , उठता हुआ अनछुआ जोबन , जांघो के बीच गुलाब की पंखुड़िया "

" नाम तो बताइये न " सोच के ही उनका मन खराब हो रहा था। 




" सिर्फ इस शर्त पे नाम बताउंगी , की तुम ना सिर्फ उसकी लोगे बल्की खूब हचक हचक के चोदोगे। " मेरी जेठानी ने और आग लगायी।

" हाँ भाभी हाँ पक्का , नेकी और पूछ पूछ " वो बोले।

" मेरी ननद , तेरी ममेरी बहन और जिल्ला टॉप माल , मीता। एक बार चोद लोगे तो बार बार मांगोगे " हँसते हुए उनके साइन पे अपनी चूंचियों को रगड़ते मेरी जेठानी ने चिढ़ाया।

फिर तो ऐसी धकापेल चुदाई उन्होंने शुरू की…


उसी बीच मैंने चमेली भाभी साथ बाजी पलट दी थी।

अब मैं ऊपर थी और वो नीचे।

और मेरे हाथ में गुलाल भरा एक बड़ा सा कंडोम था जो , जब तक चमेली भाभी सम्हले , घचाक से मैंने उनकी बुर में पेल दिया। 

मैंने राजीव ओर देखा और हम दोनों मुस्कराये।

अब हम दोनों जैसे बद कर , एक टेम्पो में हचक हचक चोद रहे थे थे।

वो अपनी भौजाई और मेरी जेठानी , नीरा भाभी को और मैं चमेली भाभी को , गुलाल भरे कंडोम डिल्डो से।

चमेली भाभी भी चूतड़ उछाल उछाल के मजे ले रही थीं और थोड़ी देर में वो तेजी से झड़ने लगी।

और यही हालत बगल में नीरा भाभी की हुयी। उनके झड़ने के साथ ही उनके देवर और मेरे ' वो ' भी तेजी से झड़ने लगे। मेरी जेठानी की बुर गाढ़ी सफेद थक्केदार , मलायी से भर गयी। यही नहीं राजीव का सफेद वीर्य , बुर से निकल कर उनकी दोनों जांघो पर भी बह रहा था। 

दोनों निशचल पड़े थे।

मैंने राजीव से कहा ,

" अरे मेरी जेठानी की चूत को साफ कौन करेगा ". 

राजीव से दूबारा बोलने कि जरूरत नहीं पड़ी। अपनी रसीली भाभी की दोनों जांघो को उन्होंने फैलाया और सेंटर में मुंह लगा के

लप लपालप , लप लपालप वो चाटने लगे। जैसे कोई मस्त रसमलाई चाट रहे हों। वो चाट रहे थे चूस रहे थे और बीच बीच में अपनी भाभी की गीली बुर में जीभ की नोक डाल के जुबान से चोद भी रहे थे।

मस्ती से चूर नीरा भाभी , नीचे से चूतड़ उछाल रही थीं , सिसक रही थी और उनका सर अपनी बुर पे पकड़ जोर जोर से रगड़ रही थीं।

और इस का असर राजीव के मस्त खूंटे पे भी हुआ। वो फिर से अंगड़ाई लेने लगा।उ

सका गोल मटोल , थोडा सोया थोडा जागा , लीची सुपाड़ा देख के मुझसे नहीं रहा गया और मेरे मुंह में भी पानी आने लगा।

उधर चमेली भाभी , वो भी उठ के बैठ गयी थीं। उन्होंने मुझे आँख मारी , अपनी मझली ऊँगली , तर्जनी के ऊपर रखी और अचानक दोनों ऊँगली , राजीव की गांड में पेल दी

मैं चमेली भाभी का तरीका ध्यान से देख रही थी। दोनों ऊँगली एक के ऊपर एक आराम से घुस गयीं , और अब उन्होंने दोनों उँगलियों को अलग किया गोल गोल गांड में घुमाया और फिर कैंची की फाल की तरह फैला दिया और सटासट आगे पीछे करने लगी।


इस का असर सीधे राजीव के लंड पे पड़ा और अब वो पूरी तरह तन के खड़ा हो गया।

मेरे लिए अपने को रोकना अब मुश्किल हो रहा था। मैंने उनके मोटे सुपाड़े को मुंह में भर लिया और लगी चुभलाने , चूसने। 

थोड़ी देर तक ऐसे ही चलता रहा।

चमेली भाभी अब तीन उंगली से अपने देवर की गांड मार रही थी। उनके देवर और मेरे वो , अपनी भाभी की बुर चूस चाट रहे थे और मैं उनका लंड चूस रही थी।

चमेली भाभी ने पैंतरा बदला और फिर मेरी बुर पे हमला किया। उँगलियों से उन्होंने मेरी बुर को फैला रखा था और जोर जोर से चूस चाट रही थी। साथ में हलके से क्लिट को भी वो बाइट कर लेतीं।


लेकिन मैं भी , हाईस्कूल से बोर्डिंग में थी और ११वी से लेकर कालेज तक इस खेल में चैम्पियन थी। 

थोड़ी देर में हम दोनों फिर 69 कि पोजिशन में थे , मैं ऊपर और वो नीचे.
और अपनी मस्ती में हम लोगो ने ध्यान नही दिया की नीरा भाभी , मेरे उनके चूत चाटने से कब झड गयीं।

वो और राजीव मेरे और चमेली भाभी के बगल में आके बैठ गए। राजीव का लंड एकदम तना , टनटना रहा था।

चमेली भाभी की चूत चाटते , चूसते मैंने दोनों हाथों से चमेली भाभी की जांघो को फैलाया और राजीव को इशारा किया।


बस फिर क्या था। राजीव का मोटा लंड चमेली भाभी की चूत में था और ऊपर से मैं चमेली भाभी की क्लिट चूस , चाट रही थी।
वो पहले ही एक बार मेरी जेठानी की बुर में झड़ चुके थे , इसलिए उन्हें टाइम तो लगना ही था। 

जैसे कोई धुनिया रुई धुनें , बस उस तरह वो चमेली भाभी की चूत चोद रहे थे। और चमेली भाभी भी चूतड़ उठा उठा के जवाब दे रही थीं।

बहुत देर कि चुदायी के बाद दोनों देवर भाभी साथ झड़े। 


This forum uses MyBB addons.

Online porn video at mobile phone


mere pati ki bahan sexbabatik tok girls nude sexbabachudai kathasex maeathi photoMai chodta rha maa chudti rhiHot. Baap. Aur. Pati. Bed. Scean. Xvideosamlaingikh stories Biaph.niaga.chut.pisab.photo.comxxxbandana. sarmaJavni nasha 2yum sex stories Nude Veebha Anand4 sahl ki Daughterssex video Vilese garl ki desi chudayi video vargan hdसलवार सूट खोलकर करे सेक्सी वीडियो देसी hdjanbhuj kar bhid me chudi hindi storyvarsha routela gif seXbaba fuck Priti ki honeymoon me chudai ki kahani-threadलडकै को वीर्या पीने से फायदेnand bhoajai ne ghar me sbhi ko khus karti hui chodai sex bhri khani hindi me bistar se"Horny-Selfies-of-Teen-Girls"Nange hokar suhagrat mananachoti bachi ke sath me 2ladke chod raheEEsha rebba hot sexy photos nude fake assऔरत के बलाउ के अँदर के कपडे पर Xxxहिंदी सेक्स की याद 12 साल लड़की का कैटरीना सफर साथ दो भोसड़ी की गांड मार दी क्लिपbudhi ghodi lal lagam pornMai bazi aur bahut kuch chudai kahanimami bathroom naha rhe bhanej chut dekhi xxxbf kahanichuchi misai ki hlUrdu sexy story Mai Mera gaon aur family ponamdidi ki chudaiTatte chusogi to jaldi jhad jaunga storyसासरा आणि सून मराठी सेक्स katha wwwxvideo.com gorichitiXXX गांड़ की मजेदार कहानियाँ हिन्दी मेँCarmi caur sex foto nude chuchiप्यासी चुत की बड़े लम्बे मोटे लन्ड से धड़ाधड़ चोदते हुए चूदाई विडियोSex story Ghaliya de or choot fadiचूतो का मेलाseksi fillm yoni ka viriy nikla ling seचुसनेवाली sex मुवी होलिबुड sexdarzi ne bhan ko ghodi bnaya- raj sharma stories Sexx nangie 8 mintues kie dounload hdराज शर्मा सुस्पेंसिव सेक्स स्टोरीकोमल ताई तिची जाउ xnxxchori chori chupke chopke chinaal xxxxxIndiansexphotos page 12pesab pilane ki gandi gali hindi sex khani.comभाभी के नितंम्बsrimukhi lanjaMera beta meri gand sahlane laganon veg Kahani Kamsin bachiyon ke sathfuddi chatan waliya pron pic दीदी बहन भाई भैया घर जंगल सर्दी में चूत चुदाई सेक्स स्टोरी कहानीAbitha fake nudedusreki bibv ghar pe bola ke chodai 20 sal ke ladki se full hd sexacoters aliyabhatt xxx videoववव बेटे को पैसे देकर छुड़वाई माँ बेटा आल देसी कहानी कॉमनई लेटेस्ट हिंदी माँ बेटा सेक्स चुनमुनिया कॉमrima ki dabi wasna on xossipyमम्मे टट्टे मर्दन चूचेचूतसेaurat ling par kaise phool banwati haiकोमल सरदारनि कि चुत चुदाईपकितानिलडकिचुढाईदेसी माँ की दहकते बदन की गरमा गरम बुर छोडन की गाथा हिंदी मेंShraddha kapoor fucking photos Sex babaरीमा के परिवार के फोटो दिखाऐXX video bhabhi devar ki sexy video blazer.com Baatein sexy baatelarki ke tuliya ke andar usko khub chudai and chudai rep sexy vodio agal bagal papa mami bic me peti xxxpriya prakash varrier sexbavaडिल्डौ घुसा मेरी चुत मेma and vata ki chudai ki kahani hindigalat fami maa sexstoryमराठी झ**झ** कथाsamantha सेकसी नंगेफोटो Hdlun bahir nikalo meri phudi sebilkul dehatiaunti ki sexy wwwwKajal agrawal naked photo sexbaba.netxxx khun nikala asa video bf khatarnak jangal kaMERI madmast rangila Bibi antarvasona storyfhudi nudaalay bhaat ko nanga karkay uskay saath pronTv actress chuddai storywww mastaram net chudai ki kahani e0 a4 b5 e0 a5 80 e0 a4 b0 e0 a5 8d e0 a4 af e0 a4 aa e0 a4 a4 e0xxxteugu.cowHiNDI ME BOOR ME LAND DALKA BATKARTAchunmuniya sexnetradhika apte porn photo in sexbabadipika bhadauriya nudy sex image