Holi sex stories-होली की सेक्सी कहानियाँ - Printable Version

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RE: Holi sex stories-होली की सेक्सी कहानियाँ - - 11-01-2017

मै मां के पीछे खडा होकर उनकी बांहो को छूते हुये बाबुजी से पूछा,

“बाबुजी आप मां के साथ होली नही खेलेंगें?”

“खेलेंगे , लेकिन रात को....” बाबुजी ने मुस्की मारते हुये कहा और वापस मुझसे पुछा,

“लेकिन तु अपनी मां के साथ होली खेला कि नही...?” उन्होने मां की ओर देखते हुये कहा , ”तेरी इस मस्तानी मां के साथ होली खेलने के लिये सभी साल भर इन्तंजार करते है. “

मां ने हमारी ओर गुस्से से देखते हुये कहा “ क्या फालतू बात कर रहे हो, बच्चे को बिगाड रहे हो...कोई मां से भी होली खेलता है क्या...”

“साली, रंडी , बेटे का पूरा लौडा खा गयी और अब सती- सावित्री बन रही है. मैने सोचा कि मां को इस हालत में देखकर बाबुजी भी गरमा गये है...और चुंकि मेरे सामने अपनी बीबी के साथ मस्ती मारने मे शरमा रहे है, इस लिये मुझे भडका रहे है कि मै मां को और मस्त करुं.

“देखिये ना बाबुजी , मै इतने सालो के बाद होली में घर पर हूं तो भी मां मुझे रंग नही लगाने दे रही है.., मैने कितना खुशामद किया फिर भी मुझे रंग नही लगाने दिया...” मैने मां की गोरी –चिकनी बांहो को सहलाते हुये कहा...

“और इसी गुस्से मे तुमने मेरा साडी खोल कर फेक दिया....” मां ने मेरी बात काटते हुये कहा, “चलो कोई बात नही, आज मै तुम लोगों के सामने ऐसी ही रहुंगी...”

“लेकिन मां रंग लगाने दो ना....” मैने मां की गालो को सहलाते हुये कहा.. ”चल, हट् जा..” मां ने मुझे कोहनी से धक्का मारते हुये कहा..”बाहर जा , बहुत लडकी मिल जायेगी , उनको ही रंग लगाना....मां के साथ बच्चे रंग नही खेलते...जा मुझे काम करने दे..”

“ अरे रानी, जिद्द क्यो करती हो ? इतने सालो बाद तो बेटा होली पर घर मे है....पहले कैसे हर साल होली पर रोती रहती थी कि ‘बेटा होली में घर क्यों नही आता है..और इस बार जब वो है तो नखडा मार रही हो....लगाने दो रंग , खेलो होली बेटे के साथ...” बाबुजी ने मां क़ॉ बडा सा लेक्चर दे दिया.

“मैने गालों और बाहों पर तो रंग लगाने दिया था. “ मां ने सफाई दी.

“लेकिन मुझे तो तुम्हारे साथ ऐसे रंग खेलना था जैसे एक जवान लडका और लडकी होली खेलते है..” मैने मां को अपनी ओर घुमाते हुये कहा.

मां ने गैस बंद कर दिया और आंखे नीची किये हुये कहा, “बेटा, मै तुम्हरी मां हूं, दोस्त नही..बस गाल मे लगा दिया वही बहुत है...” मां ने अपना दोनो हाथ मेरे कंधो पर रख्खा और कहा ,

“ठीक है, चलो एक बार मै तुम्हे चुमने देती हूं... जहां मन है चुम लो...”

वो सीधी खडी हो गयी और अपना आंख बंद कर लीया. मैने बाबुजी कि ओर देखा. बाबुजी मेरा असमंजस समझ गये... ”बेटा, इतना अछ्छा मौका कहां मिलेगा!. ळे लो , चुम लो ..जल्दी करो नही तो वो फिर कुछ नहीं करने देगी. “ बाबुजी ने भी इजाजत दे दी.

फिर क्या था. मैने एक हाथ मां की पीठ पर रख कर उनको अपनी ओर खींचा और दोनो हाथों मे कस कर बांध लिया. मै ने खुब जोर से दबाया और मां कसमसाने लगी. एक हाथ आगे लाकर उनकी गुलाबी चिकनी गालो को सहलाया और कुछ देर सहलाने के बाद गाल को सहलाते सहलाते मैने मां के चेहरे को उपर उठाया और अपने ओंठों को मां की रसीली ओंठों के उपर रख्खा और धीरे धीरे चूमने लगा. थोडी देर पहले मैने मां को जम कर चोदा था लेकिन अभी बाबुजी के सामने मां को चुमने मे जो मजा आ रहा था वो कुछ और ही था. पहले धीरे धीरे फिर खुब जोर से ओंठों को चूसा और चुम्मा लेते लेते मै एक हाथ् मां चुची पर रख कर हौले हौले चुची को सहलाने लगा..मां फिर कसमसाने लगी लेकिन मैने उसे अलग होने नही दिया और जोर जोर से चुची को मसला... मै मा को चुमता रहा और चुची को इतना और इस तरह से मसला कि ब्लाउज के सारे बटन खुल गये और मेरे हाथों में मां की नंगी चुची थी. चुमना जारी रखते हुये मैं ने बाबुजी कि ओर देखा तो उनके चेहरे पे कोई गुस्सा नही था. थोडी देर तक चुची को और मसला और हाथ को मां के पेट को सहलाते हुये कमर पर हाथ लाया. मस्त , चीकनी कमर को सहलाना बहुत अछ्छा लग रहा था और तभी मुझे लगा कि मां अपनी हांथो से मेरे पीठ को सहलाते सहलाते मेरे चुत्तरो को दबाने लगी है और मुझे अपनी ओर दबा रही है. मैने मां की ओंठों को चूमना छोड उनकी गालो को चुमा, चूसा और काटा भी. मां ने अपनी आंखे खोल दी थी. मैने उनकी आंखो में मुस्कुरा कर देखा और एक चुची की घुंडी को अंगुली से रगडते - रगडते दुसरी चुची को चुसने लगा. अब मै आराम से मां की चुची का पुरा मजा ले ले कर दबा रहा था, चूस रहा और साथ में घून्डीओ का भी स्वाद ले रहा था जैसे बचपन मे मां का दुध पीता था. अब मां भी आराम से बेटे को अपना दुध पिला रही थी.

“देखा आपने, साले को थोडी सी छूट दी तो आपके लाडले ने ब्लाउज ही उताड दिया...” मां ने बाबुजी से शिकायत की लेकिन मुझे अपनी चुची से अलग नहीं किया. मै मां की चुचीओं का मजा ले रहा था साथ ही उनकी मख्खन जैसी चिकनी और लचकिली कमर को भी सहला रहा था. मां को अन्दाजा था कि मेरा अगला कदम क्या होगा..तभी उन्होने फिर बाबुजी से कहा,

“अब अपने बेटे को हट्ने के लिये कहो , पता नहीं , इसका क्या ईरादा है?


RE: Holi sex stories-होली की सेक्सी कहानियाँ - - 11-01-2017

“घबराती क्यो हो? बेटा ही दूध पी रहा है ना..वो भी अपने बाप के सामने ...पीने दो , कब से उसने अपनी मां का दूध नही पिया है...” बाबुजी का जबाब सुनकर मै बहुत खुश हो गया और मां भी.

“ले बेटा, पी ले जितना पीना है... मै अब कुछ नही बोलुंगी....” मां ने मेरा माथा सहलाते हुये कहा,

“जानते हो जी, तुम्हारा बेटा एक नंम्बर का रंडी बाज है... मुझे बता रहा था कि वो सिर्फ बडी उम्र की औरतों के पास ही जाता है...”

“क्यों बेटा? एक तो रंडी के पास जाना ही नही चाहिये और अगर कभी कभी मन भी करें तो कमसिन लडकी के पास ही जाना चाहिये...ज्यादा चली हुई औरतो के साथ क्या मजा आता होगा!. “ बाबुजी ने मुझे सलाह देते हुये पूछा...

मेरा हाथ अब मां के साया के उपर फिसल रहा था और मुझे चूत की गरमाहट् महसूस हो रही थी. मैने एक हाथ से चुची को मसला और दुसरे हाथ से मां की बूर को साया के उपर से दबाते हुये कहा,

“ मुझे मां जैसी उम्र कि औरतो के साथ मस्ती मारना अछ्छा लगता है...” कहते हुये मै बूर को साया के उपर से मसला...

“ओह्ह विनोद, क्या कर रहे हो बेटा ....अब छोडो , बहुत दबा लिया..” मां ने कहा और साथ ही मुझे जोर से चिपका लीया..

“मां जैसी दीखने बाली औरते क्यो अछ्छी लगती है..” बाबुजी ने पूछा..

“क्यूं कि मुझे मां सबसे अछ्छी लगती है...” और मैने साया का नाडा झटके से खींच दिया. मां अब बिलकुल नंगी थी और एक हाथ से चूत को मसल रहा था और दुसरे हाथ से एक चुची को दबा रहा था .

मैने बाबुजी की ओर देखते हुये कहा कि , जब से मैने औरत के बारे मे जाना है तुब से सिर्फ मुझे मां ही अछ्छी लगती है...मैने इमानदारी से कहा कि, चूंकि मै मां के साथ मस्ती नही मार सकता था इस लिये मैने होस्टेल जाने की जिद्द की थी.

मैने मां को अपनी बांहो मे लेकर खुब चुमा चाटा , चुची को मसला और चूत को रगडा.

मां को प्यार करते हुये मैने बाबुजी से कहा कि उनकी माल दुनिया कि सबसे अछ्छी माल है..और आज मै बहुत खुश हू कि वो मस्त माल मेरी बांहो मे नंगी खडी है और मै उसकी मदहोश करने बाली जवानी को प्यार कर रहा हूं.

मै मां को लेकर बाहर आया और गोदी मे बैठा लिया. मेर लंड पैंट के नीचे पुरा टाइट हो गया था इस लिये ही मैने मां को लंड के उपर बिठा लिया. बाबुजी भी हमारे सामने बैठ गये और देखते रहे कि किस तरह एक बेटा अपनी मां की नंगी जवानी से खेल रहा है.

“बस बेट, अब छोडो, तुम्हारे दादाजी आने बाले होंगे.” कहते हुये मां खडी हो गयी. मैने झांट सहलाते हुये पुछा कि झांट क्यो नह्वी साफ करती हो तो मां ने जबाब दिया कि उसे झांट सहलाना अछ्छा लगता है. मैने मां से खुशामद की कि एक बार झांत साफ कर अपना चिकना चूत दिखा दे... बाबुजी ने भी कहा कि उन्होने भी कई बार मां से साफ करने को कहा है लेकिन मानती ही नही है...


RE: Holi sex stories-होली की सेक्सी कहानियाँ - - 11-01-2017

बुरा न मानो होली है --२



मैने कहा, “बाबुजी अब आप चिंता मत किजिये , “साली खूद् साफ नही करेगी तो मै ही झांट साफ कर दुंगा. “

मां किचन गयी और वहा से अपना साया और ब्लाउज लेकर आयी.

साया पहनते हुये मां ने कहाँ , “पुछो अपने बेटे से कि उसे मां के साथ होली खेलने में मजा आया कि नही.”

“बहुत मजा आया मां. सिर्फ पिचकारी से रंग डालना बाकी रह गया वो बाद मे डाल लूंगा.”

मां ने साया और ब्लाउज पहन लिया था लेकिन वैसा नही जैसा पहले पहना था. मै कुछ बोलता, उस से पहले बाबुजी ने वो बात कह दी जो मै कहना चाहता था... ”रानी, ऐसे क्या पहन रही हो.? आज होली है, ऐसा पहनो की हुम लोगों को कुछ ना कुछ माल दिखता रहे...”

“बोलो तो , नंगी ही रहूं. “ कह कर मां ने साया खोल दिया और नंगी हो गई. बूर को उचकाते हुये कहा, “अब ठीक है ना...बाबुजी (दादाजी) को भी बहू का बूर देखना अछ्छा लगेगा..”

“क्या मां, तुम भी....” कहते हुये मै मां के पास गया और साया उठाकर इस तरह बांधा कि साया के उपर से काली काली झांटे दिखाई देने लगी. साया ठीक करने के बाद मैने ब्लाउज का उपर क बटन तोड दिया और कपर्डेल को थोडा फैला दिया. अब मां की चुची उपडी हिस्सा और दोनो चुची का मिलन स्थल पुरा दीख रहा था.

“बेटा , मुझे इस तरह देख कर तेरे दादाजी आज हत्तू मारेंगे और अपनी बहु कि चूत का सपना देखेंगे...” मां ये कहते हुये अपने कमरे मे चली गयी.

मां के वंहा से हटते ही बाबुजी ने कहा, “ बेटा , लगता है तु मां को चोदना चाहता है..”

“हां बाबुजी , पिछले 6 साल से मां को चोदने का मन है , लेकिन आप से डर लगता है..”

आज अछ्छा मौका था , बाबुजी के सामने मां को नंगा कर पूरा मजा लिया और उस से पहले मा ने चूत को भर-पूर चोदने दिया. बस अब बाबुजी को मनाना था कि मै जब चाहू मां को चोद सकुं. हिम्मत करके मैने कहा,

“बाबुजी , अब अगर मां की बूर मे लौडा नही पेल पाउंगा तो मै पागल हो जाउंगा...मां के चूत के चक्कर मे ही मै रंडीओ के पास जाने लगा ..जब भी मै किसी भी रंडी को चोदता हूं तो यही सोच सोच कर चुदाई करता हूं कि मै किसी रंडी को नहीं अपनी मां की चूत मे लौडा पेल रहा हूं.. ”

मैने अन्धेरे मे एक तीर फेंका, “ बाबुजी मै आज वादा करता हूं कि जब मेरी शादी होगी तो आपको अपनी बीबी चोदने को दुंगा ..बस बाबुजी आप मा को बोलीये कि मुझसे चुदवाये , जब भी मै चाहु...”

मै डर् रहा था कि बाबुजी क्य बोलेंगे , डांटेगे लेकिन नही, बाबुजी को शायद अपनी अनदेखी बहु कि चूत का ख्याल आ गया और बाबुजी खडे हो गये और प्यार से मुझे गाल पर एक चपत मारी और कहा, “अब से तेरा जब मन करें , मां को चोद, मेरे सामने भी और मेरे पीछे भी, मै उसको बोल दुंगा , तुझे खुब मजा दे...लेकिन बस , इतना ध्यान रखना कि किसी को कुछ पता ना चले...

मैने मन ही मन कहा, “ मां आज दादाजी और मुझसे चुद्वायी तो आपको पता चला क्या..”

जो भी हो, मै बहुत खुश था कि मै अपनी सबसे प्यारी माल को जब चाहूं चोद सकता था.

तभी बाहर दरवाजे पर दस्तक हुई.

दादाजी अन्दर आये और मां अन्दर से बाहर आई. हम सबने मां की झांटे और चुची देखी. दादाजी के आंखो मे चमक आ गयी और मां ने दादाजी को आंख मारी और किचन चली गयी.

अन्दर जाते जाते उसने कहा, “आप लोग सब स्नान कर लिजीये..फिर खाना खायेंगे.”

हम लोग एक दुसरे को नहाने के लिये बोल रहे थे .मै चाहिये रहा था कि बाबूजी और दादा पहले नहाने जायें तो मै मां के साथ एक चुदाई और कर लुं. यही इछ्छा दादा की भी रही होगी तभी दादा भी बाद मे नहाने की बात कर रहे थे. तभी बाहर दरवाजे पर फिर दस्तक हुई. मां किचन से बाहर आयी और हमरे पास आकर कहा कि हम सभी कमरे के अन्दर ही रहें और जब तक मां ना बोले, कोई कमरे से बाहर ना आये. मालती वापस घूमी तो मेरा कलेजा और कलेजा के साथ लौडा खुश हो गया. पीछे से मां कि चुत्तरो का उपरी मिलन स्थल दीख रहा था. हुम मांसल चुतारो को देखते रहे और वो गान्ड हिलाती हुयी चली गयी दरवाजा खोलने. दर्वाजे पर दुबारा दस्तक हुई . मां ने कुन्डी खोला और तीन लडके अन्दर आये. मां ने दरवाजा बन्द किया और उन तीनो में जो बडा लडका था उसे गले लगाकर बांहो मे दबाया. उस लडके ने मां की गालो को चूमा और फिर वो तीन लडके को लेकर मां बरामदे पर आयी. तब मै और बाबुजी ने उस बडे लडके को पहचाना. वो बल्लु था जो चार साल पहले तक हमारे यहां पुराने मकान मे काम करता था. ज़ब मैने उसे आखरी बार देखा था वो 12-13 का दूबला पतला लडका था . हुमने जब मकान बदला तो उसने यह कहकर काम करना बन्द कर दिया था कि हमारा घर उसके घर से बहुत दूर है और आज वही साला मां से होली खेलने के लिये इतनी दूर आया. अब बल्लु 16-17 का साल का जवान हो गया था. दीखने मे हट्टा कठ्ठा था और करीब 5’7” लम्बा था. उसके साथ जो 2 लडके थे वे बल्लु से छोटे थे करीब 14-15 साल के , उनकी दाढी मुंछ भी ठीक से नही नीकली थी. हम सब ने देखा कि बल्लु बार बार मालती को चूम रहा है और साथ ही कभी चुची पे तो कभी साया के उपर से चूत को सहला रहा है.


RE: Holi sex stories-होली की सेक्सी कहानियाँ - - 11-01-2017

मां तीनो को लेकर बिलकुल हमारे नजदीक बरामदे पर आ गयी. अब हमें उनकी आवाज भी साफ साफ सुनाई देने लगी थी.. मां – “ये दोनो कौन है..”

बल्लु- मेरे दोस्त है, मै इन्हे दूनिया की सबसे मस्त माल दिखाने लाया हुं.” मां – धत्त ..बोल क्या खायेगा...

बल्लु.. “जो खिलाओगी खाउंगा लेकिन पहले थोडा रंग तो खेल ले..” बल्लु आगे बढा.

मां थोडा पीछे हट् गयी और कहाँ , “ मै तुमसे नाराज हु, तु पीछ्ली होली मे रंग खेलने क्यो नही आया...मै दिन भर तेरा इंतजार करती रही... आज तुझे दो साल के बाद देखा है... लगता है कोई दुसरी मुझसे अछ्छी माल मिल गयी है.. ”

बल्लु झट्के से आगे बढ कर मां को बांहो मे लेकर जकड लिया और कहा.. “ मुझे और कोई माल नही दीखती है, हर समय सिर्फ आपकी मस्त जवानी मेरे आंखो के सामने तैरती रहती है..” बल्लु ने मां की मांसल चुत्तरो को मसलते हुये ओंठो को चुमा और कहा ,

“मालकिन , अब कितना तरपाओगी... पीछले चार सालों से आपको चोदने के लीये तडप रहा हुं.. कितना तडप्पाओगी....अब बरदास्त नही होता है....”

मां भी बल्लु को चुमती रही और कहा ..” दुनिया मे औरत की कमी है क्या...पैसा फेंको तो एक से बढ्कर एक मस्त चूत मिल जायेगी चोदने के लिये ...” और मां ने बल्लु का हाथ पकड्कर अपनी चुची पर दबाया . मां इन छोटे छोटे लडको के सामने चूत और चोदने कि बातें कर रही है...इतना तो तय था कि बल्लु ने मां को अभी तक नही चोदा था. चूंकी आज होली है और आज के दिन मां अपना चूत लोगों के लिये खोलना कर रखती है तो शायद अभी बल्लु से चुदवा ले...मां ने बल्लु से फिर कहा,

“तु साला शादी क्यो नही कर लेता है...एक चूत मिल जायेगी , रोज चोदते रहना अपनी घरवाली को और अपने दोस्तों से भी उसे चूदवाना...” कहते हुये मां ने बल्लु को धक्का दिया और कहा , देख तेरे ये दोस्त चुप-चाप खडे है..इन्हे भी मेरे साथ होली खेलने दे..”

मां की हरकत पर हम सब परेशान थे. उन लडको को नही पता था कि घर के अन्दर उनकी माल का जवान बेटा, ससुर और घरवाला बैठा है और सब देख सुन रहा है.. लेकिन ये रंडी जान बूझ कर हम सब को अपना रंडीपना दीखा रही है.

बल्लु ने अपने दोनो दोस्तो से कहा, “ अरे यार चुप-चाप क्यो खडे हो, अछ्छा मौका है.. इतनी मस्त और हसीन माल के साथ होली खेलने का मौका जल्दी नही मिलेगा...जहां मन करें रंग लगा लो..”

और बल्लु ने खुद अपने पॉकेट् से रंग का पुडिया नीकाला और कुछ रंग हाथ मे लगा कर कुछ पानी लिया और दोनो हाथो मे रगडा . बल्लु का दोनो हाथ गहरा लाल रंग का हो गया और वो मालती की तरफ बढा .

“ चल साला, रानी के ब्लाउज का बट्न खोल दे....”

एक लडके ने दोनो हाथों से मालती की चुची को खुब रगडा और फटा फट सारे बटन खोल दाले...उसने ब्लाउज को अलग किया और तीसरे लडके ने पीछे से ब्लाउज को बदन से बाहर नीकाल दिया.

अब मां कमर से उपर नंगी थी. उसकी मोटी –मोटी गोल गोल चुची उपर –नीचे हो रही थी. बल्लु के दोस्त , एक आगे से और दूसरा पीछे से खुब मसल मसल कर चुचीयों को मसल रहा था... ”क्यों रे कैसा माल है...” बल्लु ने पूछा. ”सच भैया..ऐसा चुची तो मेरी 20-21 साल की दीदी का भी नही है.. ओफ कितना टाइट है और कितना मोता भी....” एक ने कहा और चुची को मसलता रहा.


RE: Holi sex stories-होली की सेक्सी कहानियाँ - - 11-01-2017

दुसरा जो पीछे से चुची मसल रहा था , कहा “ बल्लु भैया, घुन्डी ( नीपल) तो देखो, इतना लम्बा ना तो तेरी मां का है ना मेरी मा का... मै आज भी दोनो का दूध चुस कर आया हुं...उन दोनो की चुची पीचक गयी है, पुल पुल हो गया है..और ये देखो क्या मस्त है... हम तीनो रात भर चूसते रहेंगे तो भी कडा का कडा ही रहेगा .. भैया मै एक बार चुची को चुंसु. “

“जल्दी से दोनो एक एक चुची का दूध पी लो..तब तक मै अपनी रानी को रंग लगाता हुं. “ बल्लु ने कहा और दोनो हाथो से पहले गालों पर रंग लगाया और ओंठों को बार बार चुसता रहा और बाकी दोनो लडके एक एक घुंडी को मुह मे लेकर चुची दबा दबा कर पुरा मजा ले रहे थे.. बल्लु बार बार हाथों मे रंग लेता था, कभी लाल, कभी नीला, कभी हरा और कभी पीला और थोडी ही देर मे मेरी मां एक रंगीन पोस्टर बन गयी.

“बेटा, तुम लोगों ने बहुत दूध पी लिया अब जरा असल माल का मजा लो॥ जल्दी से साया खोलो और चूत का दर्शन करो..”

बल्लु ने कहा और एक लडके ने झट्के से साया का नाडा खोलना दिया और मेरी मां बिल्कुल नगी थी. साया के खूलते ही तीनो मालती के उपर लट्क गये और मां तीनो को खुश करने मे लग गयी. वो पैर फैला कर खडी हो गयी . क़ोई चुची मसल रहा था तो कोई चूत मे अंगुली घुसेर कर मजा ले रहा था. एक चुत्तरो को सहला रहा था. तीनो बारी बारी से अपनी जगह बदल रहे और मां उन तीनो को अपनी जवानी का जलवा दीखा रही थी. एक 35-36 साल कि मस्त जबान औरत तीन कम उम्र के लडको को नंगी जवानी दिखा दिखा कर मस्ता रही थी. दोनो छोटे लडके चुची और चूत से खेल रहे थे और बल्लु मालती को रंगने मे व्यस्त था. उसने मां को उलत पलत कर उसकी पीठ, छाती, जांघे, कमर , चुत्तर सबको लाल पीले हरे रंग से रंग डाला. यहा तक की उसने बुर की पत्तीयो को भी फैला फैला कर रंग डाला. मां पांव चियार कर लेटी थी. तीनो लडके बारी बारी से चूत मे अंगुली पेल पेल कर मजा ले रहे थे. अचानक बल्लु खडा हुआ और फटा फट नंगा हो गया. हम सब दंग रह गये. बल्लु का लौडा मेरे और दादाजी के लौडे से लम्बा और मोटा था. बल्लु ने लौडे को हिलाते हुये कहा,

“मालकिन, देखो तुने मेरी क्या हालत बना दी है.. तेरी चूत को याद कर कर ये लौडा इतना बडा हो गया है...अब तो इसे अपनी बूर मे घुसाकर इसकी प्यास बुझा दो.... चोदने दो मालकिन....”

और बल्लु मां के नजदीक गया. मां ने उसका लौडा पकड कर हिलाने लगी और कहा ,

“तु हमेशा गलत समय पर आता है.. अब मालिक लोग आने बाले है...और फिर इन बच्चो के सामने कैसे चुदवाउंगी...कभी अकेले आना ...प्यार से इसे बूर का रस पिलाउंगी.. अभी मुझे इसका रस पीने दे... “ मां खुब जोर जोर से लंड हिलाने लगी और उधर उन दोनो लडको ने भी अपने सारे कपडे उतार दिये और अपने अपने लंड को मां के बूर से रगडने लगे. शायद उन बच्चो को नहीं मालुम था कि चुदाई कैसे की जाती है... मां बल्लु क लंड हिलाती रही और 3-4 मिनट के बाद बल्लु का लंड पानी फेंकने लगा. बल्लु का सारा विर्य मां के गालों पर चिपक गया . उधर दोनो लडके बूर मे अपना लौडा रगड रहे थे और उन्होने भी माल उगल दिया. इतना ही नही, उन दोनो लडको ने बूर को रगडा और झुक कर बूर को चुमा.

जब तीनो ठंडे हो गये तो मां उठी और उनको कपडे पहन ने को कहा और खुद किचन मे चली गयी . तभी बाबुजी ने धीरे से कहा , “ ओह , साली चुदवाई क्यो नही ..मै तो चुदाई देखना चाह्ता था...”

मां किचन से वापस आयी तो उसके हाथ मे खाने पीने का सामान था.. मां ने अपने हाथों से उन तीनो को खीलाया और साथ ही उनसे फिर चुची और चूत मसलवाई..

“मालकिन, कब आंउ , चोदने .. “ बल्लु ने बूर को मसलते हुये पुछा.

“देख अभी विनोद आया हुआ है , 15-20 दिनो मे वो चला जायेगा फिर आना ..पहले तुम चोदना और मेरी चूत का मजा लेना . मेरी चूत तुमको पसन्द आये तो बाद मे इन दोनो को भी लेकर आना...इनको दूध पीलाउंगी और तु मुझे चोदना और हां खबरदार , अगर मुझसे पहले किसीको चोदा तो मै अपना बूर भी देखने नही दुंगी.”

और कुछ देर के बाद मां नंगी ही तीनो को दरवाजे के बाहर तक छोड आयी. बल्लु ने मां को इस तरह से रंग दिया था कि कोई ये नही बोल सकता था कि वो नंगी है.

दरवाजा बंद करने के बाद मां सीधा कमरे की ओर आने लगी तो हम तीनो बाहर आ गये . इससे पहले कि हम कुछ कहे , मां ने कहा,

“ आप लोगों को ये मुफ्त का सिनेमा अछ्छा लगा कि नही. “ उसने अपनी चुची को सहलाया और कहा , “बल्लु ने कितना मेहनत से मेरे बाडी को रंगा है.. मै आज ऐसे ही रहुंगी सिर्फ मुह साफ करना परेगा..”

“लेकिन तुमने लौडा बूर मे क्यो नही लिया..हमारे लंड से भी बडा और मोटा लंड था,, बहुत मजा आता उस लंड से तुम्हारी चुदाई देखने मे...” बाबुजी ने कहा ..

“साला, पिछले चार साल से मेरे चूत के चक्कर मे है... साले को सब मजा देती हुं बस अब तक चोदने नही दिया..आज अगर तुम लोग घर मे नही रहते तो शायद मै तीनो से चुदवाती ...खैर अब आप लोग नहा लो... “

मां बाथ रूम गयी और दस मिनट के बाद वापस आई. उसने सिर्फ मुह का रंग हटाया था . बाकी सारे शरीर पर रंग वैसे का वैसे ही लगा था. काले काले झांट भी रंगीन हो गये थे. मां अब बिलकुल नंगी घुम रही थी..इस लिये हमें उसे चोदने की जल्दी नही थी... मां कि हरकतो से यह पता चल गया था कि आज वो हम तीनो ( बेटा, घरवाला और ससुर) को पुरा मस्ती देने के मूड मे है...

मै यह इंतजार कर रहा था कि मां कब हम तीनो के पास आये और कहे कि “ मुझे चोदो.”


RE: Holi sex stories-होली की सेक्सी कहानियाँ - - 11-01-2017

हुम तीनो मर्द बारी बारी से नहा लिये. मन तो हमारा भी कर रहा था कि नंगे ही रहे लेकिन घर मे और भी मर्द थे इस लिये हम तीनो ने कपडे पहन लिये. मां पिछले एक घंटे से ज्यादा समय से नंगी ही घूम रही थी. चेहरे को छोड कर साली का पुरा बदन रंगा हुआ था. मां ने खाना परोसा .हम सब ने जिद्द करके मां को अपने साथ ही बीठाया. हम तीनो उसकी रंगीन मस्त गदराई जवानी को देख देख कर खाना खाते रहे और मां हमें अपना चूत पुरा खोलकर दिखाती रही. खाना खाते खाते देखा कि मां बार बार अपने शरीर को खुजला रही है..कभी पेट को, कभी गालो को, कभी चुची को तो कभी चूत को... ”बहु, क्या हुआ...इतना क्यो खुजला रही हो...” दादाजी ने पूछा.

“लगता है , रंग काट रहा है..इतना देर तक रंग शरीर पर लगा रहेगा तो काटेगा ही..” दादाजी ने फिर कहा.. ”अछ्छा होगा कि तुम रंग साफ कर लो..नही तो कही कुछ दाग –उग ना रह जाये, “

दादाजी ने अपनी बहु से कहा , “ बेटी तेरी मस्त गदरायी जवानी पर कोई भी दाग अछा नही लगेगा....जा रानी तु रंग साफ कर ले...हम सब ये बरतन बासन साफ कर लेंगे...”

हम सब ने खाना खतम किया और सब बरतन उठाकर किचन मे ले गये. दादाजी ने फिर कहा, “जा बेटी रंग साफ कर ले...और ऐसा कर आंगन में ही नहा ...”

“ठीक है बाबुजी...आप जैसा बोलीये...” मां ने मेरी ओर देख और कहा ,

“चल बेटा, तीन चार बालटी पानी आंगन मे रख दे...”

मां बीच आंगन मे बैठ् गयी और मै फटा फट चार बालटी पानी लाकर मां के पास रख दिया. मां ने नहाना शुरु किया और अपने बॉडी पर साबुन रगड रगड कर नहाने लगी..लेकिन बल्लु का रंग बहुत पक्का था.

“लगता है, मै ये सब रंग साफ नही कर पाउंगी ...आप लोग भी मुझे साफ करो. “ मां ने कहा . हम तीनो तो इसी इंतजार मे थे. हम अपने कपडे उतारने लगे तो मां ने मना कर दिया और कहा,

“अगर आप लोग नंगे होईयेगा तो मै सारे कपडे पहन लुंगी.” वो खडी हो गयी और अपनी चूत को ढंक लिया.

“ठीक है रानी, हम नंगे नही होगे.. तुम ही अपना जवानी हमें दीखाती रहो.. “ दादाजी ने कहा. वो मां के सामने गये और एक साबुन हाथ मे लेकर दोनो हाथो से मां की पीठ और चुत्तर पर रगडने लगे. मां खडी थी और दादाजी आराम से नंगे शरीर पर साबुन लगा रहे थे और पानी भी डाल रहे थे.

“तुम दोनो क्या देख रहे हो? तुम लोग भी लगाओगे तो जल्दी साफ हो जायेगा..” मां ने हमारी ओर देखते हुये कहा. मैने और बाबुजी ने दादाजी कि तरह सिर्फ जांघिया पहन कर मां के पास गये और मै मा की चूत और जांघ पर साबुन लगाने लगा और बाबुजी ने चुची को साफ करना शुरु किया. करीब आधे घंटे से ज्यादा समय तक हम तीनो मां की एक एक माल को रगडते रहे और आखिरकार मां बिल्कुल साफ हो गयी. पहले की तरह उनका अंग अंग चमकने लगा . हम तीनो ने साबुन लगाते लगाते और पानी से साफ करते करते कई बार बूर और गांड मे अंगुली पेल कर मां की जमकर चुदाई की. मां भी इतनी गरम हो गयी थी की हम तीनो उसको रगड रहे थे और वो रंडी सिसकारती मारती हुई मजा ले रही थी. अपने को समभालने के बहाने उस कुतिया ने कई बार जांघिया के उपर से हमारा लौडा सहलाया. हम तीनो का लौडा जांघिया को फाड कर निकलने को तैयार था

नहाने के बाद मां और भी हसीन और मालदार लग रही थी. मेरा तो मन कर रहा था कि साली रंडी को वही बाबुजी और दादा के सामने पटक कर चोद दालुं. शायद दादा भी यही चाह रहे थे तभी वो बहुत प्यार और आराम से अपनी बहु के सुडौल बदन को तौलियी से पोंछ रहे थे. पोंछते पोंछते दादा ने कहा ,

“बेटी, तेरी प्यारी सी चूत इन झांटों ने ढक कर रख्खी है.. कुछ भी नही दीखता है.. तेरा घरवाला कुछ बोलता नही.....मैने तो तेरी सास ( दादीजी) को कभी भी झांट बढाने नही दिया और दादाजी ने मां के पैंरो के पास बैठ कर चूत को चूमा और दोनो हाथो से झांट अलग कर बूर की फांक को फैलाया कहा, .

“ कितना प्यारा माल है...चुमने और चाट्ने का मन करता है... लेकिन इन झांटो के बीच बूर चुसने और चाट्ने मे मजा नही आयेगा. “

दादा ने फिर बूर को फैलाया और अन्दर के गुलाबी माल को चुमा. दादा खडे हो गये और मां के दोनो गालो को अपने हाथों मे दबाया और खुब प्यार से चुची मसल मसल कर चुमा. मां को सहलाते हुये दादा ने कहा ,

“लगता है तेरा घरवाला कभी तेरी चूत को चुसता नही है... तो फिर तुम्हे चूत का मजा तो अभी तक मिला ही नही होगा...रानी चुदाई से ज्यादा मजा चूत चटवाने मे आता है... चूत साफ कर ले फिर तुझे ऐसा मजा दुंगा कि बूर चाटने के लीये लोगों से खुशामद करती रहेगी.”

दादा ने मां को फिर से चुमा और अलग हट गये. मां हम लोगों के सामने पैर चियार कर बैठ गयी. कुछ देर हम तीनो की तरफ देख कर कहा..

“आप लोग अपने को मर्द कहते हो ! दो घंटे से एक रंडी नंगी घर मे घुम रही है..लंड के लीये तरस रही है और तुम नामर्द लोग बस उपर उपर मजा ले रहो हो..”


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मां ने अपनी चूची मसलते हुये कहा, “ कि मै बेबकूफ हुं कि बल्लु और उसके दोस्तो से नही चुदवाया यह सोच कर कि उनके जाने के बाद मुझे नंगा देख कर तुम लोग मुझे एक के बाद एक चोदते रहोगे....”

मां ने घुंडी को रगडा और कहा ,” अब कोई दुसरा मर्द ढुंढना पडेगा जो मुझे चोद चोद कर थका डाले..”

मां का इतना कहना था कि दादा ने अपना जांघिया उतारा और मां को गोदी मे उठा कर बेड रुम मे ले जा कर बेड पर पट्का और बिना कोई चुम्मा चाटी के अपना तनतनाया हुआ लौडा बूर मे पेल दिया...एक बार मां भी कराह उठी.. “राजा धीरे...”

उसके बाद करीब 15 मिनत तक दादा जी दना दन अपनी बहु कि चुदाई करते रहे और उस रंडी का बेटा और घरवाला चुदाई देखता रहा. जब मुझे लगा कि दादाजी झरने बाले है मैने बाबुजी से कहा कि दादाजी के लंड बाहर निकालने के बाद वो अपनी बीबी को चोदे . मैने कहा कि मै बाद मे चोदुंगा..

दादाजी ने अपना पानी बूर मे गिराया और कुछ देर के बाद लंड बाहर खींच लिया .. झांतो के बीच रंडी की खुली हुई चूत दीख रही थी. मैने बाबुजी को धक्का दिया,

“बाबुजी, रंडी आपका लंड का इंतजार कर रही है...”

बाबुजी खडे हुये और जाकर अपनी बीबी को चोदने लगे...

दादाजी मेरे बगल में बैठे थे . उनका लौडा थोडा ढीला हो गया था.

“दादाजी कैसा है रंडी का चूत, मजा आया चोदने मे..?.” मैने पुछा.

“अरे, कुछ मत पुछ बेटा, तेरी मां बहुत मस्त माल है.. जब भी मौका मिले कुतिया को खुब चोद...बहुत गरमी है साली के चूत मे... “ दादा ने अपना लौडा सहलाते हुये कहा,

“पहले तो सोचा था कि कल चला जाउंगा लेकिन नही अभी 8-10 दिन और रहुंगा और रंडी कि जम कर चुदाई करुंगा. आज या कल साली का झांट साफ कर दिन भर बूर चुसता रहुंगा ..और कुतिया को लौडा चुसाउंगा .....दादा ने जांघिया के उपर से मेरा लौडा सहलाया और कहते रहे ,

“ मादरचोद को तु भी खुब चोद और कल जा कर बल्लु और उसके दोस्तो को बुला कर ला.. सब मिल कर इस माल का मज़ा लेंगे..”

दादा मेरा लौडा सहला रहे थे मुझे बहुत अछा लगा, और मैने जांघिया उतार दिया. मेरा लौडा भी मां को चोदने को बेकरार था.

दादा ने लंड अपनी मुठ्ठी मे लेकर दबाया और कहा कि मै किसी तरह से बल्लु और उसके घर मे कोई जवान लडकी हो या उसकी मां हो या बहन हो तो उसे भी साथ लाउं जिससे हमें भी बल्लु कि तरह नया माल का मजा मिले. दादा मेरे लंड को मसल रहे थे तो अचानक मैने भी दादा का लंड लेकर मसलने लगा.. ये पहला मौका था कि मैने किसी और का लंड पकडा था और आशचर्य मुझे लंड पकडना अछा लग रहा था . मुझे ध्यान आया कि बल्लु कि एक छोटी और एक बडी बहन है.. और शायद दोनो कि शादी हो चूकि है...मुझे ये सोचकर बहुत आनन्द आया कि कल या परसो मां मेरे और दादा के सामने बल्लु और उसके दोस्तो से मरवायेगी और मै और दादा बल्लु की बहन और मां को चोदेंगें. तभी देखा की बाबुजी रंडी की बूर से लंड नीकाल कर उठ गये है. बाबुजी ने मेरा लौडा दबाया और कहा ,

“जा बेटा , अपनी कुतिया मां को इतना चोद कि साली चुदाना भुल जाये ... “

लेकीन मैने बाबुजी और दादा कि तरह सत सत चुदाई श्रु नही की. मै कुछ देर तक मां को चुम्मा लिया, चुची को चुसा , बूर को भी फैला कर उससे खेला और उसके बाद मैने लंड को बुर मे पेला. मै खुब जोर जोर से धक्का मार रहा था. ये पहला मौका नही था कि मै लोगों के सामने चोद रह था. मैने पहले कई बार अपने दोस्तो के साथ एक रंडी की बारी बारी से चुदाई की है...और मै मां को पुरा दम लगा कर चोदता रहा.. मुझे खुश रखने के लिये या मां को सच मुच बहुत मजा आ रहा था , वो जोर जोर से सिसकारी मारने लगी. ”आह्ह्ह....बेटा...आह्ह्ह्ह...और पेलो....फाड दे चूत को.....ठंडा कर दे बूर को...आह्ह्ह्ह....बहुत मजा आ रहा है....चोद अपनी मां को... चोद चोद कर रंडी बना दे.. बहुत मस्त लौडा है तेरा बेटा, रोज चोद..जब मन करें चोद... आह्ह्ह्ह.......

और इस तरह सिसकारी मारते मारते वो ठन्डी हो गयी और पैर फैला कर शांत हो गयी. मै चुदाई कर ही रहा था कि दादाजी मां के बगल मे आकर बैठ गये और चुचि को मसलते हुये पुछा ,

“बोल कुतिया, हम लोग मर्द है कि नही...” ”हां राजा, तुम तीनो मर्द हो...मेरी बूर खुश हो गयी... अब जो बोलो सब करुंगी ...” मां ने दादा के लौडे को सहलाते हुये कहा. ळेकिन मैने दादा को टोका .. ”दादाजी आज बहुत हो गया ...अभी हम लोग थोडा आराम करते है..क्योंकी घंटे बाद लोग बाग गुलाल खेलने आयेंगे. आप मां के साथ सो जायीये .”

मैने बूर से लंड खींचा और मां के मुह पर लंड रगडते हुये कहा,

“मां मेरा पानी अभी नही निकला है, रात को पहले मै चोदुंगा. “

दादा और मां एक साथ और हम अलग अलग बेड पर सो गये. ऎक घंटे के बाद उठे और सबने साफ , नये सफेद कपडे पहने. मां ने गोटा लगे हुये नये कुर्ता और सलवार् पहना. उनहोने खुब सुन्दर मेक-अप किया. मां को सजा धजा देख कर दादा ने कहा ,

“रानी, तुमको देखकर सारे मर्द पागल हो जायेंगे..”

बानुजी ने कहा , “ और हां लोगो को कपडे के अन्दर हाथ डालने से मना मत करना ... सलवार थोडा ढीला बांधो और कुर्ता का एक बट्न खोल कर रख्हो.”

जैसा बाबुजी ने कहा , मां ने कपडा ठीक किया.


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बाबुजी ने मुझे और दादा से कहा कि हम हाथ डाल कर देखें कि चूत और चुची तक हाथ पहुचता है कि नही. मैने कुर्ता उठाकर सलवार मे हाथ डाला ..और चूत को मसला. मां ने चड्डी नही पहना था. दादा ने कुर्ते के उपर् और नीचे दोनो ओर से हाथ घुसाया और चुची को दबाया.

“आराम से लोग चुची दबा सकते हैं...” दादा ने कहा...

हम लोगों का इंतजार करने लगे. बारी बारी से कई लोग अपने अपने परिबार के साथ आये और आपस में गुलाल रगड कर एक दुसरे के गले मिले और चले गये. ऐसा कोई नही आया जिसमे हिम्मत हो कि वो हम सब के सामने मां को चुम सके या कपडो के अन्दर हाथ घुशेर कर चुची और चूत का मजा ले सके. उपर उपर तो कई मर्द और औरतों ने मां की चुची को मसला और मजा लिया.

करीब 9 बजे एक ऐसा परिवार् आया जिसे देख कर मै बहुत खुश हो गया. ये मेरा स्कूल का दोस्त अमित था. वो अभी किसी दुसरे शहर में पढ रहा था. हम दोनो करीब दो साल के बाद मिले .


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होली पर बीबी चुदी दीदी चुदी--1

दोस्तों मेरा नाम रोहित हे और मेरी बीबी का नाम पद्मा हे...मेरी शादी को ३ साल हो गए हे...में १ कंपनी में अच्छी पोस्ट पर हु और मेरा वेतन काफी अच्छा हे..\मेरी एक बड़ी दीदी हे जिनकी शादी ५ साल पहले हुई थी ,हम दोनों भाई बहन के बीच आपस में बहुत प्यार था,मेरे जीजाजी एक बिसनेस मैन हे ,और वो भी दीदी कि तरह मेरा बहुत ख्याल रखते हे \

इस बार होली पर पद्मा ने मुझसे कहा कि हम दीदी और जीजाजी को होली खेलने हमारे यहाँ बुला लेते हे ,हम होली भी खेल लेंगे और मिल भी लेंगे। मुझे पद्मा का यह आईडिया पसंद आया और मेने दीदी और जीजाजी से आग्रह किया कि इस बार वो होली हमारे साथ ही मनाये ,मेरे कई बार कहने के बाद वो मान गए और होली के एक दिन पहले वो हमारे पास आ गए।

मेरी बीबी पद्मा एक आकर्षक वयक्तित्व कि धनि हे,उसका फिगर उसके वयक्तित्व में चार चाँद लगाता हे,खूबसूरत चेहरा ,लम्बे बाल ,भरी हुई छातिया ,पतली कमर,उभरे हुए कूल्हे उसको और भी सुन्दर बनाते हे,सबसे बड़ी बात हे कि वो एक अच्छी मेजबान भी हे और मेहमानो का पूरा ख्याल रखती हे।

होली के दिन सुबह से ही वो होली कि तैयारिओं में जुट गयी, उसने दीदी और जीजाजी के लिए शानदार नाश्ता बनाया,मेने जीजाजी को कहा कि नाश्ते से पहले वो कुछ ड्रिंक वगेरा लेने चाहेंगे तो उन्होंने कहा क्यू नही। हम दोनों ने रम के ३-३ पेग लिए ,इतने में पद्मा आ गयी और उसने हमारे लिए नाश्ता लगाने लगी पद्मा ने साड़ी पहनी हुई थी जिस पर बिना बाँहों का ब्लाउस था वो भी लो नेक का जिसमे वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी.आदमी चाहे जितना भी अच्छा हो दुसरे की बीवी को देखकर उसके मुह में लार टपकने लगती है ! मैंने ध्यान दिया की जीजाजी बार बार पद्मा के उरोजो की तरफ ही देख रहे थे !जब पद्मा उसे पकोड़े देने झुकी तो वो उसके ब्लाउस में दिखती उरोजो की लकीर को देख रहे थे ! और जब पद्मा किचन की तरफ जाने लगी तब वो पद्मा के हिलते हुए कुलहो को घूरे जा रहे थे ! उसने जीजाजी को छेड़ते हुए कहा कि वो ड्रिंक ही करते रहेंगे या उसके साथ होली भी खेलेंगे,जीजाजी ने कहा सलहज साहिबा आपके साथ होली खेलने का ही तो मूड बनाया हे,और ये कहते ही वो उठ खड़े हुए।पद्मा ने कहा आपने गुलाल लगाना है तो कोई बात नहीं पर अगर आपने कोई पक्का रंग लगाया तो अच्छा नहीं होगा !

उन्होंने कहा नहीं भाभी हम कोई पक्का रंग नहीं लगाएँगे !जीजाजी उठे और पद्मा के गालो पर रंग लगाने लगे उन्होंने पद्मा का पूरा चेहरा गुलाल से रंग दिया। में जिस मकान में रहता था उसके पीछे एक खुला गार्डन था जिसके

चारो और चारदीवारी थी ,हमने होली खेलने का वंहा ही प्रोग्राम रखा था,मेने दीदी और जीजाजी के गुलाल लगाया ,उन्होंने भी मेरे गुलाल लगाया,पद्मा ने भी दीदी के गुलाल लगाया और जीजाजी के भी गुलाल लगाया,मेने दीदी से कहा कि हम तो अंदर बैठते हे और इन दोनों को होली खेलने देते हे,दीदी मेरी बात मान गयी और वो मेरे साथ अंदर आ गयी,पद्मा और जीजाजी गार्डन में चले गए।

हम जिस कमरे में बेठे थे उस से गार्डन का पूरा हिस्सा दीखता था,न जाने मुझे ऐसा क्यू लग रहा था कि ये होली कुछ खास होने वाली हे।

जीजाजी ने गार्डन में जाते ही एक पैकेटअपनी जेब से निकला उनके हाथ में एक पैकट पद्मा ने देखा तो वो चिल्ला पड़ी नहीं ये नहीं !!!! वो पक्का रंग था ! जीजाजी बोले भाभी कोई बात नहीं एक बार नहाते ही ये सब उतर जाएगा ! वो पद्मा की तरफ बढ़ने लगे।

जीजाजी ने पद्मा को आखिर दबोच ही लिया और उसके चहरे पर रंग लगाने लगे ! पद्मा ने बहुत कोशिश की अपने आप को बचाने की पर जीजाजी के आगे उसकी एक न चली ! उन्होंने बुरी तरह उसका चेहरा रंग दिया ! पद्मा को रंग लगाने के लिए उसको घेरने लगे ! अब तो पद्मा ने वहा से भागने में ही भलाई समझी ! वो किचन की तरफ भागने लगी ! पर जीजाजी ने उसका रास्ता रोक लिया और उसके हाथों पर रंग लगाने लगा इस धक्का मुक्की में कई बार उन का हाथ पद्मा के स्तनों को छू जाता !

पद्मा ने उन से निकलने की कोशिश की तो जीजाजी ने उसको पकड़ने की कोशिश की तो जल्दबाजी में उन्होंने पद्मा की कमर में हाथ डाल दिया और दोनों हाथों से घेरा बना कर उसे पीछे से कस कर पकड़ लिया !

ओह ये क्या !!!! पद्मा के पीछे जीजाजी बिलकुल उससे चिपक कर खड़ा हो गए और उसको अच्छी तरह से जकड लिया उसका फुला हुआ लंड पद्मा की गांड की दरारों के बिलकुल बीच में था !! पद्मा जितना अपने आप को जीजाजी से छुड़ाने की कोशिश करती उतना ही वो जीजाजी से रगड़ खाती और उतना ही जीजाजी को मज़ा आता ! वो भी जान बुझ कर पद्मा को दबाये जा रहा थे ! और अपने नीचे के हिस्से को पद्मा की गांड से रगड़े जा रहे थे ! इधर जीजाजी ने अब पद्मा के बदन का ऊपर का जो भी हिस्सा साफ़ देखा वहां वो कस कस के रंग लगाये जा रहे थे ! उसकी गरदन उसकी पीठ हाथों जहाँ भी नंगा हिस्सा था वहां उनका हाथ चलता जा रहा था ! पद्मा के साथ इस धक्कामुक्की में पद्मा की साड़ी का पल्लू नीचे गिर गया !

पद्मा के ब्लाउस में झांकती उसकी दोनों स्तनों की लकीर उन के सामने थी ! ! मैंने सोचा अब ये क्या करेंगे ! कही कुछ ज्यादा ही न हो जाये ! पद्मा भी अब थोडा तेज़ चिल्लाने लगी थी !! पर उन पर तो अब वासना का भुत चढ़ चूका था ! जीजाजी ने एक रंग का पाकेट खोला और पद्मा के ब्लाउस की दरार को एक उंगली से हल्का सा उठाया और पूरा पाकेट अन्दर उड़ेल दिया ! पूरा रंग पद्मा के ब्लाउस में चला गया पर वो रंग सुखा हुआ था ! जीजाजी भाग कर बाथरूम से एक जग में पानी ले आये और उसने भी ब्लाउस को थोडा सा उठा कर पूरा पानी अन्दर डाल दिया ! अब पद्मा का पूरा ब्लाउस गिला और रंग से सरोबार हो गया था ! ब्लाउस गीला होने से अब उसके अन्दर की ब्रा भी अब साफ़ चमकने लगी थी जीजाजी का हाथ अब पद्मा की कमर से ऊपर आ कर उसके चूचो तक आ चूका था ! ! पद्मा बाथरूम की तरफ भागने लगी ! तभी जीजाजी ने पद्मा का जो पल्लू जमीन की तरफ था उस पर पाँव रख दिया ! पद्मा जब भागी तो पल्लू बड़ा होने के कारण उसकी साड़ी खुल गयी पद्मा ने अपनी साड़ी उठाना जरुरी नहीं समझा होगा उसे लगा होगा अब तो ये मुझे रंग लगा ही चुके है अब सीधा बाथरूम जाकर नहा लेती हूँ तो वो अपनी खुलती हुई साड़ी को और उतर कर बाथरूम की तरफ भागी ! अब ये सीन देख कर तो जीजाजी मचल उठे भागते हुए पद्मा के बदन से चिपका हुआ उसका पेटीकोट उसकी गांड की शेप बता रहा था ! ३६ की गांड को देखते ही जीजाजी पद्मा के पीछे भागे और पद्मा के बाथरूम का दरवाज़ा बंद करने से पहले ही दरवाज़ा पकड़ कर खड़े हो गए ! उसके पीछे जीजाजी भी पद्मा को धकेलते हुए अन्दर की तरफ आ गए ! अब पद्मा फिर से बाथरूम में उनसे घिर गयी ! अब पद्मा ने उनको कहना शुरू किया तो जीजाजी ने कहा देखो भाभी आज होली है ! और आज तो हम आप को तस्सली से रंग लगा कर ही रहेंगे अब चाहे अपनी मर्ज़ी से लगाने दो या फिर ज़बरदस्ती !!! बोलो क्या करना है ! पद्मा ने भी अब सोचा के अब ये मानने वाले नहीं है ! और वैसे भी इस रगडा रगड़ी में उसे भी जरुर मज़ा आया होगा ! उसने भी कहा ! देखो रंग लगा लो पर में चुपचाप नहीं लगवाने दूंगी ! आप अपनी कोशिश करों रंग डालने की में अपनी कोशिश करुँगी अपने को बचाने की !! ठीक है !!!

अब होली थोड़ी और गरम होने वाली थी क्योंकि पद्मा को भी अब मज़ा आने लगा था ! उसे तो लगा था के जीजाजी सच में वो सिर्फ होली खेलने आये है पर में जानता था क्या चल रहा है ! अब मेरी बीवी उन के सामने सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउस में होली खेलने को बिलकुल तैयार हो चुकी थी ! जीजाजी ने तुरंत एक जग पानी उठाया और पद्मा के वक्षस्थल की तरफ फ़ेंक दिया एक बार फिर पद्मा का उपरी हिस्सा गीला हो गया और उसकी ब्रा, ब्लाउस से झाकने लगी !फिर तो जीजाजी ने लगातार ३ ४ बार पद्मा के ऊपर जग से पानी डाल दिया जिससे पद्मा बिलकुल तरबतर हो गयी !! उसका पेटीकोट भी उसकी बदन से बुरी तरह चिपक गया और उसके पुरे बदन की शेप साफ़ साफ़ दिखने लगी ! अब तो जीजाजी ने जानबूझ कर पद्मा के कमर में हाथ डाल कर उसे उठा लिया और कहने लगा की अब तो आप को शावर के नीचे ही गीला करेंगे ! जीजाजी ने पद्मा को आगे की तरफ से उठा लिया जिससे पद्मा के चुचे जीजाजी के चहरे के सामने आ गए और उनके दोनों हाथ पद्मा के पीछे उसकी गांड के नीचे पहुच गए जीजाजी ने पद्मा को कस कर पकड़ा और उसे उठा कर शोवर के नीचे ले आये ये देख कर जीजाजी ने अब शोवर चालू कर दिया ! अब पद्मा और जीजाजी दोनों भीगने लगे !जीजाजी ने जिस तरह से पद्मा को उठाया था उससे पद्मा का पेटीकोट थोडा सा ऊपर को हो गया था ! जिस से उसकी टांगों का पिछला हिस्सा नंगा हो गया था ! मतलब उसके टांगों का पिछला हिस्सा घुटनों तक दिख रहा था !!! जीजाजी से रहा नहीं गया और उसने थोडा सा रंग लेकर उसकी टांगों में मसलना शुरू कर दिया !!

जबजीजाजी भी अच्छी तरह गीला हो गए तब उसने मेरी बीवी को नीचे उतारा पद्मा का एक एक अंग साफ़ दिख रहा था ! ! जीजाजी अब कुछ ज्यादा ही वहशी हो चूका थे क्योकि उसने अपने हाथ में रंग लेकर पद्मा के ब्लाउस के ऊपर लगा दिया ! पद्मा ने उन्हें मन किया पर अब वो कहा मानने वाला थे उन्होंने फिर से उसके एक साइड के चुचे पर रंग लगा दिया ! अब पद्मा कहा वो अब होली नहीं खेलेगी पर जीजाजी नही माने वो फिर भी उसके चुचों में रंग लगाता रहा रहे !!! पद्मा बाहर जाने को हुई तो जीजाजी ने उसको पीछे से दोनों हाथों से पकड़ लिया पद्मा के दोनों हाथ अब पीछे की तरफ थे और उसके चुचे सामने की तरफ को तने हुए जीजाजी ने पद्मा के ब्लाउस में हाथ डाल दिया और उसके चूचो में रंग लगाने लगे पद्मा चिल्लाई !!!! पर उन्हें कोई फरक नहीं पड़ा ! जीजाजी उसके दोनों चूचो को भिचने लगा और वो पद्मा के पीछे उसकी गांड से सट कर खड़ा हो गए और उसकी गांड पे अपने लंड से घिस्से लगाने लगे ! जीजाजी ने मौके का फायदा उठाया औरउन्होंने पद्मा का पेटीकोट उसकी जांघों तक उठा दिया !! जीजाजी उसकी जांघों पर रंग रगड़ने लगे ! पद्मा तड़पने लगी और बुरी तरह अपने आप को छुड़ाने की कोशिश करने लगी ! पर जितना वो हिलती उतना ही जीजाजी को मज़ा आता ! जीजाजी अब पद्मा की टांगों को रंग लगा कर उठ चूका थे और अब वो पद्मा के चुचिओं पर पिल पड़े ! जीजाजी ने पद्मा के ब्लाउस के हुक खोलने शुरू किये ! पद्मा अब जोर जोर से चिल्लाने लगी ये देख जीजाजी ने उसका मुह बंद कर दिया !जीजाजी ने कुछ देर में उसके हुक पुरे खोल दिए पर ब्लाउस को उतारा नहीं !! पर उसके मुम्मो को दबाता जरुर रहे , पीछेअपना लंड लगातार उसकी गांड से रगड़े जा रहाथे ! जीजाजी ने अब पद्मा के हाथ छोड़े और उसके दोनों चुचे पीछे से पकड़ लिए और जोर जोर से उन्हें मसलने लगे जीजाजी ने तभी पद्मा के पेटीकोट के नाड़े को खोलने की कोशिश की पर वो शायद अटक गया था इसलिए उस से वो खुला नहीं ! जीजाजी घुटनों के बल नीचे बैठ गया और वही से नाड़े को खोलने लगा पर नाड़ा फंस चूका था ! झल्ला कर जीजाजी ने पद्मा का पेटीकोट ऊपर उठा दिया और पद्मा की चूत पर अपना हाथ रख दिया और उसे भी रगड़ने लगे !!! अब तो ये तय था की अब वो मेरी बीवी का कांड करने ही वाले है ! जीजाजी ने पीछे अपना लंड निकल लिया था और पद्मा की गांड की दरार पर धक्के पर धक्का लगाये जा रहा थे ! !! मैंने पद्मा को देखा तो चूत में उंगली डालने पर उसकी आँखें बंद हो चुकी थी और वो भी जीजाजी के बाल पकड़ कर उसे अपनी चूत की तरफ खिंच रही थी ! थोड़ी देर में जीजाजी ने अपना मुह पद्मा की चूत की तरफ किया और उसकी दोनों टांगों को चौड़ा किया और अपनी जीभ उसकी चूत पर लगा दी !!! एकदम से पद्मा के मुह से आह निकली ! और उसने कस कर जीजाजी के बाल भीच लिए !!१ इस से पद्मा का पेटीकोट नीचे जीजाजी के सर के ऊपर आ गया अब पद्मा की चूत चाटते हुए वो दिख नहीं रहा था पर पद्मा का चेहरा देख कर साफ़ था की नीचे जीजाजी की जीभ पद्मा की चूत चोद रही है !!! बहुत गरम द्रश्य था ! जीजाजी ने अब पद्मा की ब्रा को ऊपर किया और उसके निप्पलों को चूसने लगा एक दम कड़क निप्पल हो चुके थे ! जीजाजी पीछे अपना लंड निकाल कर पद्मा की गांड पर रगड़ रहा थे ! काफी देर से रगड़ने की वज़ह से शायद वो झडने वाला था ! हा सच में उन्होंने पीछे पद्मा की गांड के ऊपर अपना सारा माल निकाल दिया था और अपने लंड को ख़ाली करने के लिए वो उसे आगे पीछे किये जा रहा था ! जीजाजी ने अपना लंड अपनी पेंट से नक़ल कर पद्मा के हाथ में दे दिए पद्मा उसके तने हुए लंड की मुठ मरने लगी ! और जीजाजी उसके चूचो को चूसते रहे !!


RE: Holi sex stories-होली की सेक्सी कहानियाँ - - 11-01-2017

पद्मा और जीजाजी कि गरम हरकतो ने मुझे भी काफी गरम कर दिया था,इधर दीदी भी जीजाजी कि सब हरकतो को देख रही थी तो उनका भी पूरा चेहरा लाल हो चूका था जबकि जीजाजी और पद्मा ये समझ रहे थे कि उन दोनों को कोई नही देख रहा हे इसलिए वो ये सारा तमाशा कर रहे थे।

शायद अब पद्मा भी काफी गरम हो गयी थी और उसको लगने लगा था कि जीजाजी उसे चोदे बगैर मानेगे नही तो उसने जीजाजी से धीरे से कहा कि जीजाजी अब सहन नही होगा पर ये भी हे और दीदी भी बाकि होली आप रात को मना लेना। जीजाजी ने कहा सलहज जी क्या गारंटी हे कि आप रात को मुझे होली मनाने देंगी?और रोहित का आप क्या करेंगी,तब पद्मा ने कहा कि आप रात को फिर से इनके साथ ड्रिंक करने बेठ जाना और इनको इतनी पिला देना कि इन्हे सुबह तक होश नही आये तब में आपके साथ अभी का अधूरा काम पूरा कर दूंगी,पर उन दोनों को ये पता नही था कि दीदी और में उनकी ये बात सुन रहे हे।

दीदी ने मेरे पास आकर कहा कि कि रोहित मुझे पता नही था कि तेरे जीजाजी पद्मा के साथ ऐसी होली खेलेंगे ,मेने कहा दीदी कोई बात नही,कभी कभी सब बहक जाते हे ,मेरी समझ में ये तो आ गया था कि पद्मा के मन में भी आज जीजाजी से चुदाई का मन हे,पर न जाने क्यू में भी ये सोच रहा था कि आज जीजाजी और पद्मा कि चुदाई देखु।

हुआ रात को वो ही जीजाजी ने मुझसे कहा कि साले साहब थोड़ी ड्रिंक हो जाये,,मेने सहमति से अपना सर हिला दिया और हम ड्रिंक करने बेठ गए,दीदी कमरे में सोने चली गयी और हम अपने रूम में आकर ड्रिंक करने लगे ,पद्मा ने नमकीन वगेरा रख दी और हम पेग पर पेग बनाते चले गए,में देख रहा था कि जीजाजी अपना पेग तो छोटा बना रहे थे पर मेरा पेग लार्ज बना रहे थे ,में भी उन दोनों कि चुदाई देखना चाहता था इसलिए उनकी नजरे बचाकर कभी कभी पेग को फेला भी देता था।

हम दोनों दारू पीते पीते बातें करने लगे ! पीते पीते रात के १०.३० बज गए ! पद्मा भी अब सो चुकी थी या कहे की सोने का नाटक कर रही थी ! मैंने इस तरह से नशा चड़ने की एक्टिंग की जीजाजी को लगा अब में जरुर सो जाऊंगा , और मैंने किया भी ऐसे ही में वही जहाँ नीचे बिस्तर लगा हुआ था वही लेट गया , अब जीजाजी उठे और पद्मा को जगाने लगा !

"भाभी देखो रोहित भाई तो यही लुड़क गए ! "

"ओह हो ये भी ना इनको भी ज्यादा नहीं झिलती अब ये तो सुबह ही उठेंगे "

मुझे पता था की वो दोनों जानबूझ कर ऐसी बातें कर रहे है ! पद्मा ने वहां से सारा सामान उठाया और किचन में रखने चली गयी जीजाजी वही मेरे पास लेट गए

"आप ऊपर सो जाए में यहाँ इनके पास नीचे लेट जाती हूँ , आप को नीचे नींद नहीं आएगी " पद्मा ने जीजाजी को कहा !

"नहीं भाभी आप भाई को ऊपर बेड पर लेटा दो और आप भी ऊपर सो जाओ में यहाँ आराम से सो जाऊंगा "

पद्मा ने मुझे उठाने की कोशिश की पर में भी तो पक्का खिलाडी था ! में भी इस तरह से बेसुध पड़ा रहा की उन दोनों को यकीं हो जाए की में सच में नशे में सो गया हूँ

"क्या भाई ऐसे ही नशे में ऐसे ही सो जाते है क्या भाभी"

"हा ज्यादा पी लेते है तो ऐसे ही हो जाते है अब ये सुबह ही उठेंगे और फिर सर पकड़ कर बैठ जाएँगे "

"मतलब अब नहीं उठेंगे "

"हा जी अब नहीं उठेंगे "

"पक्का है ना "

"हा हा पक्का है "

"

में समझ गया अब काम शुरू होने वाला है , पर मुझे डर भी था की कही इन दोनों में मुझे इनको कुछ करते देख लिया तो पद्मा का क्या रिअक्शन होगा ! तो मुझे बड़ी सावधानी से सब कुछ देखना होगा !

"चलो अब रात बहुत हो गयी है मुझे नींद आ रही है , आप भी सो जाएँ " पद्मा उठी और उसने टी वी और लाईट दोनों बंद कर दी !

धत तेरे की ये क्या ये लाईट बंद हो गयी अब क्या कद्दू दिखेगा मुझे, हो गया सारे प्लान का गुड़ गोबर !

जीजाजी मेरे बगल में आकर लेट गए और पद्मा ऊपर बेड पर ! काफी देर तक वो दोनों ऐसे ही पड़े रहे में भी ये सोच रहा था क्या हुआ क्या आज इन का मन नहीं हो रहा !

अब लेटे लेटे मुझे सही में नींद आने लगी थी ! तभी अचानक पद्मा उठी और किचन में फ्रीज़ में पानी पीने की लिए उसने लाईट जलाई मैंने चुपचाप देखा तो जीजाजी भी उठे हुआ थे और पद्मा को ही देख रहा था !

"क्या बात है भाभी नींद नहीं आ रही है " उसने धीरे से कहा!

"आ तो रही है पर प्यास भी तो लग रही है ना , बिना प्यास मिटाए नींद कहा से आएगी" पद्मा ने भी धीरे से जवाब दिया

बस अब की बार लाईट बंद ना हो में ऐसा भगवान् से प्राथना कर रहा था

"प्यास तो मुझे भी लगी है "

"तो बुझाते क्यों नहीं "

ऐसा सुन कर जीजाजी खड़े हुए और किचन की तरफ चले गए वहां उन्होंने भी पानी पिया और फिर मेरे पास आकर मुझे हिलाते हुए मुझसे पानी के लिए पूछा ! पर में कहाँ उठाने वाला था जब उसे तस्सली हो गयी की में अब नहीं उठूँगा तो वो फिर से किचन में गया जहाँ पद्मा खड़ी थी

उसने पद्मा के कान में कुछ कहा तो पद्मा मुस्कुरा दी , उसके बाद पद्मा ने लाईट बंद कर दी और वापस बिस्तर पर लेट गयी !जीजाजी मेरे पास दुबारा आ गए , में सोच रहा था ये हो क्या रहा है !

थोड़ी देर हुई होगी की जीजाजी चुपके से उठे और सीधा बिस्तर पर चढ़ गए ! अँधेरा होने की वज़ह से मुझे साफ़ साफ़ नहीं दिख रहा था पर उन दोनों की फुसफुसाहट थोड़ी थोड़ी सुनाई दे रही थी !

"आप यहाँ क्या कर रहे हो " पद्मा ने अचानक उन्हें देख कर कहा

"भाभी अब तो नाराज़ ना हो दिन में में कुछ ज्यादा ही मस्त हो गया था इसलिए "

"तो अब क्या इरादा है"

"अब तो सारी रात ही हमारी है "

"अच्छा दिन में तो इतनी जल्दी हो गए अब रात भर क्या मुझे लोरी सुनाओगे"

"ये देखो ना क्या हाल है मेरा "

"अरे बाप रे ये क्या है"

" भाभी देखो ना कैसे तड़प रहा है "

"तो में क्या कर सकती हूँ इसका "

"आप कुछ मत करो जो करूँगा में करूँगा "

"देखते है "

"ये क्या ...? नहीं अभी कपडे मत उतारो "

"तो भाभी मज़ा कैसे आएगा "

"ऐसे ही करना है वो कर लो "

जीजाजी उसके कपडे उतारने की कोशिश कर रहे होंगे और पद्मा उसे मना कर रही होगी ! अब तो मेरा तन कर आधा इंच और लम्बा हो गया था !

"बस नीचे की स्कर्ट उतारने दो ना भाभी "

"नही , अरे .....नहीईइ ना ओह्ह हो आप मानोगे नहीं .....कही रोहित उठ गया तो "

"अब वो नहीं उठता "

"चलो नीचे उतारो मत बस ऊपर कर लो "

"नहीं ना भाभी मज़ा तो नंगे बदन ही आता है "

"प्लीस्स्स्स ....नहीई आप नहीं मानोगे ना ......ओह्ह्ह हो ....मत करो !!!!!!

"अब आएगा ना मज़ा" जीजाजी ने जितने वाली आवाज़ में कहा

मतलब स्कर्ट उतार चूका था !


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