Rishton Mai Chudai खानदानी चुदाई का सिलसिला
09-03-2018, 08:56 PM,
#11
RE: Rishton Mai Chudai खानदानी चुदाई का सिलसिला
ये देखते हुए मेरे दोस्त ने अपनी बीवी की टाँगों को घुटनो के नीचे से उसकी चारपाई के किनारे से लटका दिया और उसकी साड़ी उपर करके उसपे चादर डाल दी और खुद नीचे बैठ के उसकी चूत चाटने लगा. तकरीबन इसी समय शायद मिन्नी को पेशाब करना था और वो कमरे से बाहर आई. जिस तरीके से दोस्त की पोज़िशन थी उससे वो सॉफ नज़र नही आ रहा था. केवल उसके शरीर का कुच्छ हिस्सा दिख रहा था. शायद नींद की वजह से मिन्नी का ध्यान उसकी तरफ नही गया. पर थोड़ी ही देर बाद जब वो पेशाब करके लौटी तो उसकी नींद टूट चुकी थी और उसका ध्यान उन मियाँ बीवी पे गया. मिन्नी ने कुच्छ सेकेंड उनको देखा और फिर पकड़े जाने के डर से वो अंदर चली गई. इसके चेहरे पे एक घबराहट और एक जिग्यासा के भाव थे. मैने मिन्नी को आधी खुली आँखों से घर की एक खिड़की के पास छुप के मेरे दोस्त और उसकी बीवी का कांड होते हुए देखा. अब मेरी भी जिग्यासा जाग उठी और मैं उन दोनो के साथ साथ मिन्नी को भी गौर से देखने लगा. मेरा दोस्त चूत के रस का दीवाना है और वो बहुत मस्ती में अपनी बीवी की चूत चूस रहा था.

साड़ी और चादर की वजह से उसे बीच में शायद साँस लेने के लए रुकना पड़ रहा था. उसकी बीवी इतनी गरमा गई थी कि उसने अपने चेहरे से चादर हटा दी थी और बंद आँखों से सिसकियाँ लेते हुए अपनी चूचिओ को मसल रही थी. उसकी बड़ी बड़ी गोल गोल चूचिओ पे चाँद की रोशनी पड़ रही थी. एक दम से रंडी वाले एक्सप्रेशन उसके चेहरे पे थे. उधर मैने देखा की मिन्नी भी उसी की तरह अपने सूट पर से अपनी चूचिओ को सहला रही थी. मुझे लगा कि अब मेरी एक चुदास बहू की तलाश ख़तम होने वाली है. उस औरत को देखते हुए मिन्नी ने अपनी चूचिओ को अपने सूट में से बाहर निकाल दिया. शायद इसने उस रात ब्रा नही पहनी थी. इसके मम्मे भी चाँद की रोशनी में बीच बीच में नज़र आ रहे थे. अपने दाहिने हाथ से इसने एक चूची पकड़ रखी थिया और शायद दूसरे हाथ से ये अपनी मुनिया सहला रही थी. थोड़ी देर में वो औरत झरने लगी. उसकी साँसे तेज़ हो चुकी थी और उसकी छाती ज़ोर ज़ोर से उपर नीचे हो रही थी. साली के चूचक बहुत कड़े हुए पड़े थे जिन्हे वो बार बार खींच रही थी. मेरे लंड का भी बहुत बुरा हाल था और मैं धोती के अंदर उसे मसल रहा था.

अपनी बीवी को झाड़वा के मेरा दोस्त उसके पास गया और उसके चूचे चूसे. उसने शायद अपनी बीवी को ज़मीन पे कुतिया बना के चूत मरवाने को कहा. पर उसकी बीवी ने उसके कान में कुच्छ कहा और उन दोनो ने अपनी पोज़िशन बदल ली. मेरे दोस्त की बीवी घुटनो के बल साड़ी को कमर पे समेटे ज़मीन पे कुतिया बन गई और मेरे दोस्त ने अपनी टांगे घुटनो से मोड़ के चारपाई की साइड में लटका ली. अब उसने उपर चादर ले ली. उसकी बीवी ने चादर के नीचे घुस के उसका लंड चूसना शुरू कर दिया. अब जिस तरीके से उसकी साड़ी उठी हुई थी उसके मांसल चूतर मेरे को साइड से नज़र आ रहे थे. मेरा मन भी मचल रहा था उसकी चूत मारने के लिए. पर मुझे डर भी लग रहा था. तभी मेरे दिमाग़ में एक विचार आया. कि ये सब तो मिन्नी देख रही है. अगर मैने अपने दोस्त की बीवी की इस स्तिथि में चुदाई की तो एक औरत दो मर्दों से एक साथ चुदेगि. और अगर मिन्नी वो सब देख के भी अंदर नही गई तो इसका मतलब वो मेरी बहू बनने के लए पूरी योग्य है. ये विचार मन में आते ही मेरा डर दूर हो गया और मैने डिसाइड किया कि अपने खानदान के लिए मैं अपने दोस्त का गुस्सा भी से लूँगा. चाहे दोस्ती टूट जाए पर आज मैं अपने बड़े लड़के का रिश्ता पक्का कर के जाउन्गा.

ये सोचते ही मैने अपनी धोती कुर्ता खोल दिया और अपनी चारपाई से उठ के दबे पाँव अपने दोस्त की बीवी के पिछे चला गया. उसके चूतर काफ़ी चौड़े थे और उनको देख के मेरे मूह में पानी आ गया. मिन्नी तब भी चुपके चुपके सब देख रही थी. मेरे दोस्त की बीवी की चूत रस से भीगी हुई थी और मुझे यकीन था कि अगर मैने एक झटके में उसके छेद में लंड डाला तो वो बिना चुदे नही रहेगी. बस मुझे अपने लंड का एन ठीक रखना था ताकि जैसे ही मैं नीचे झुकू और उसके बदन से अपना बदन मिलाऊ तो उसको घबरा के इधर उधर होने का मौका ना मिले. इसके लिए मैने अपने 7 इंच के लंड को अच्छे से पूचकारा और उसपे थूक लगाया. ये सब मिन्नी देख रही थी इसका मुझे पता था. मेरे शरीर पे सिर्फ़ एक बनियान थी जिसकी वजह से मुझे दिक्कत हो सकती थी. मैने उसे अपने दाँतों के बीच पकड़ा और एक आख़िरी बार अपने लंड को नीचे से पकड़ते हुए मेरे दोस्त की बीवी की चूत का निशाना लिया. ठीक उसी समय मेरे दोस्त की बीवी ने उसके लंड को अपने मूह से बाहर निकाला और शायद थोड़ा साँस लेने लगी. जैसे ही उसने अपना सिर वापिस नीचे झुकाया मैने एक शॉट में अपना मूसल उसके छेद में पेल दिया. उसकी तर बतर चूत में मेरा थूक से सना लोडा एक तीर की तरह घुसता चला गया और मैने झट से उसकी कमर पकड़ ली. अपने मूह में अपने पति का लंड होने की वजह से वो चीख नही पाई और ना ही वो दर्द शो कर पाई. अगर करती तो उसके लंड को दाँतों से काट लेती.

बस मैने 2 - 3 सेकेंड तक अपना लोडा उसकी चूत की गहराईयो में रोका और फिर धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिए. छिनाल ने एक दम सब खुच्छ भाँप लिया पर ना तो उसके मूह से लंड बाहर आया और ना ही उसने अपने चूतर इधर उधर किए. उसके बाद करीब 10 मिनट तक उसकी गदराई जवानी के मज़े लूटे मैने. बीच बीच में मुझे खिड़की के किनारे पे मिन्नी का चेहरा और उसकी चूचिओ के दर्शन हो रहे थे. मैं पूरी मस्ती में अपने दोस्त की बीवी को चोद रहा था. उसने अपना एक हाथ चादर से निकाल के मेरे अंडों को नीचे से सहलाना शुरू कर दिया. उसके चूतर मेरी चुदाइ से मस्ती में काँप रहे थे. मेरे दोस्त को तो अपना लंड चुसवाने से ही फ़ुर्सत नही थी. मेरे लिए इससे रोमांचक बात नही थी कि अपने ही दोस्त की बीवी की चूत की सिकाई अपने ही दोस्त के सामने कर रहा हूँ और उसे पता तक नही. मेरा लंड इस उत्तेजना के मारे और उस औरत के हाथों की नर्मी की वजह से और फूल गया था. मुझे मेरे धक्कों का ख़याल रखना था कि कही चारपाई ना हिलने लगे इसलिए मैने थोड़ा आगे झुक के उसकी कमर के बगल से हाथ डाल के उसकी चूत के दाने को आगे की तरफ से सहलाना शुरू कर दिया. इस पोज़िशन में मैं ज़ियादा धक्के नही मार सकता था और मुझे उसकी चूत के पिछे के हिस्से को घिसना था. वो रांड़ भी कुतिया बनी अपने मूह से गूऊंन्न गूवंन्न करते हुए लंड के चूपे लेती रही और अपनी गांद को मेरे से घिसती रही. 1 ही मिनिट में उसका शरीर काँपने लगा. उसके शरीर की कंपन उसके मूह से होती हुई उसके पति के लंड पे दौड़ गई और वो साला भी झरने लगा. उसकी गरम मुनिया के रस ने जैसे ही मेरे लंड को भिगोया तो उसने अपनी चूत को अंदर की तरफ़ से टाइट किया और मुझसे भी रुका नही गया. मेरे लंड ने भी एक के बाद एक कई पिचकारियाँ मेर दोस्त की बीवी की चूत में दाग दी. करीब 30 सेकेंड तक हम तीन एक साथ छूटते रहे. मेरे दोस्त की बीवी कुच्छ सेकेंड के लिए शांत हुई तो मुझे लगा कि मेरा दोस्त उठ ना जाए. मैने तुरंत अपना लोडा बाहर निकाला और उसे उस रांड़ की गांद पे झाड़ा जिससे कि मेरा बचा हुआ वीर्य उसकी गांद पे लग जाए. फिर मैं अपनी चारपाई के पास खड़ा होके धोती बाँधने लगा. साली उस रांड़ ने एक और मस्त काम किया, जिस हाथ से वो मेरे अंडकोष सहला रही थी उस हाथ से अपनी चूत को कुरेदा और फिर गांद पे फेरा और मेरे दोस्त के शरीर के निचले हिस्से से चादर हटा दी. फिर मेरी तरफ देखते हुए उसने अपने हाथ को चॅटा और अपनी जीभ निकाल के उसपे मेरा वीर्य लगा हुआ दिखाया. फिर अपने पति के लंड पे वही हाथ अच्छे से रगड़ा और उसके लंड के चूपे मारने लगी. करीब 10 चूपे ले लेने के बाद वो उठ के दूसरी चारपाई पे लेट गई.
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09-03-2018, 08:56 PM,
#12
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मैने भी लेटने से पहले एक बार खिड़की की तरफ नज़र दौड़ाई तो देखा की मिन्नी भी खड़े खड़े झाड़ रही थी, इसमे उस समय इतना उन्माद भरा था कि इसकी आँखें बंद थी और चूचियाँ खिड़की के सामने खुल के आई हुई थी जैसे के इसे परवाह नही थी कि कोई इसे देख ले. ये नज़ारा देखते ही मेरे मंन को तस्सली मिल गई कि मेरे घर की सबसे बड़ी बहू मुझे मिल गई है. ''

''इसके बाद इसके पिताजी से मैने 2 बार शहर में मुलाकात करके रिश्ता पक्का किया और एक साल बाद ये मेरे घर की बहू बन के आई.'' बाबूजी अब अपना आधा खड़ा लंड सहलाते हुए उठे और मिन्नी को चूम लिया.

'' हाए हाए बाबूजी आप तो सच में बहुत गंदे हो..अपनी बहू की चूचियाँ शादी से पहले ही देख ली..क्या बाबूजी आप जैसा बहू चोदु ससुर तो दुनिया में कहीं नही होगा...उउउम्म्म्मम बाबूजी जाइए मैं आपके लंड से नही खेलती...उउम्म्म्मम ऊओ'' बाबूजी के चुंबन के बीच मिन्नी ने अपनी शिकायत दर्ज की. उसकी चूचिओ पे बाबूजी का हाथ रगड़ खा रहा था.

'' मेरी प्यारी छिनाल बहूरानी......अगर मैने तेरी इन चूचियो को शादी से पहले देखा तो तूने भी मेरे लंड को अच्छे से निहारा था ना उस रात और वो भी मेरे दोस्त की बीवी की चूत में. तो हो गया हिसाब बराबर. चल अब आजा और नखरे ना कर अब मुझे दूध पिला के खुश कर दे नही तो मेरा वोही चूड्दकर लंड खड़ा कैसे होगा. उसे ताक़त कहाँ से मिलेगी....??'' बाबूजी ने नीचे झुकते हुए मिन्नी की घुंडीओ से खेलते हुए उसे पुचकारा.

लंड एक बार फिरसे तन चुके थे और चूते फिर से गीली.....संजय उठा और राखी को साथ लेके डाइनिंग टेबल की तरफ बढ़ गया. उसका 11 इंच का पतला लोडा राखी के हाथ की शोभा बढ़ाए हुए था. राजू ने सखी को अपने पर से उठाया और उसे सोफे पे लिटा दिया और उसकी चूत में जीभ चलाने लगा और सुजीत ने अपना मोटा काला लोडा सखी के मूह की तरफ बढ़ा दिया.

एक बार फिर से खानदानी चुदाई का सिलसिला शुरू हो गया.........
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09-03-2018, 08:56 PM,
#13
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खानदानी चुदाई का सिलसिला--5 

गतान्क से आगे..............


''' उफफफफफ्फ़....भैयाअ.....अराआम से पेलो नाअ.....क्या जान लोगे मेरी चूत की...ऊओह हाआन्न्न्न्न......फिच..पिच ..ऊओह माआ....एससस्स भैयाअ......मम्मे भी चूस लो थोड़े....बस चूत के पिछे ही पड़े हुए हूऊओ........स्ल्लुउउउउर्र्रर्प्प....मम्मूऊउंम्म....ऊहह बसस्स भैया थोरी देर और ...हान्न ऐसे ही छोटे धक्के...मोटा है बहुत भैया....मज़ाअ आ रहा हॅयियी ...क्याअ आपको मेरी चूत चोद्ने में मज़ाआ आ रहा है ?? बताओ ना भैयाआ....कैसी लगती हू आपको.......और कितना चोदोगे मुझे...कितने दिन कितने साल...कब तब...कैसे कैसे...बताओ भैयाआ......उउम्म्म्मममम अच्छे मम्मे चूसना चोदो बस चोदो और बताओ...आअपके मुँह से सुनना है...प्लस्सस्स ...ऊहह ऊहह ऑश ......''' सखी अब कार्पेट पे पीठ के बल लेटी थी और सुजीत का काला लंड अंदर बाहर हो रहा था. सुजीत का लंड घर में सबसे मोटा था. किसी आम औरत की कलाई जितना मोटा और एक दम काला. उसका सुपाड़ा लाइट पिंक कलर का था. बड़ा तगड़ा कॉंट्रास्ट था. सखी की टांगे एक दम चौड़ी हुई पड़ी थी. ठप ठप की आवाज़ के साथ सुजीत लंबे और छोटे स्ट्रोक्स लगा रहा था. सखी अपनी चूत पे हल्के बॉल रखती थी और घर के सभी मर्द अपने लंड और टट्टों को सॉफ रखा करते थे.

''' तेरी चूत को मैं कई साल तक बजाउन्गा सखी...तू मेरे लोड की शान है...जितनी मस्ती से तू मेरा लोडा लेती है उतनी मस्ती से राखी शादी से पहले चूसा करती थी इसे...तेरे चूचे भी अच्छे सख़्त हैं...मुझे तेरे चूचे राखी से भी बड़े करने हैं चूस चूस के.....करवाएगी ना..अपने जेठ से अपने ये संतरे बड़े...??? ऊओह हां अच्छा लग रहा है...गांद उठा के तू जब मरवाती है तो मस्त रंडी लगती है.....उउम्म्म्म वैसे तू इस घर की सबसे अच्छी रांड़ बन सकती है.....तुझमे वो एक्सट्रा अदा है......बस अब तू जल्दी जल्दी लंड चूसना सीख जा....फिर देख तेरे जेठ तेरे को कितना मज़ा देते हैं.......उम्म्म्मम...चल अब दोबारा चूची चूसने दे.....उउउंम स्लुउउर्र्ररप्प्प्प...ऊओह....उउंम्म..म्मूुआअ...'''' और सुजीत दोबारा चूचिओ को चूसने लगा.

15 - 20 मिनिट हो चुके थे सबको लगे हुए. सखी को संजय के पतले लंड की आदत ज़ियादा थी पर जब से उसने सुजीत के लए टांगे खोली थी तब से उसकी फुददी का तूफान भड़का हुआ था.. सुजीत की सबसे अच्छी बात थी कि उसको लोडा घुसाते ही कुच्छ हो जाता था. शायद ये सिर्फ़ सखी ने एक्सपीरियेन्स किया था. उसके स्ट्रोक्स बड़े तरीके से लगते थे और लगातार. सखी को अपनी पहली छुदाई याद आई सुजीत के साथ. उस दिन राखी ने उसकी चूत अच्छे से चाट के गीली की थी और उसे अपने हाथों से पकड़ के सुजीत के लंड पे चढ़वाया था. उसकी तो जान निकल गई थी उस दिन. पर फिर जब राखी ने उसके मम्मे चूस तो थोड़ी राहत मिली थी.

उस दिन घर के सभी सदस्यों ने उसे खूब पैसे भी दिए थे. ये उसकी चूत खुलाई के पैसे थे. उन पैसों से सखी ने 3 पॅंटी और ब्रा के सेट लिए. उस दिन भी घर में अच्छा नाटक हुआ था. बड़ी भाभियो ने मुँह सूजा लिए थे कि उन्हे भी वैसी सेक्सी ब्रा पॅंटीस मिलनी चाहिए. बाबूजी ने मम्मे चूस चूस के उन्हे मनाया था. नेक्स्ट डे बाबूजी के साथ जाके 3नो बहुओं ने शॉपिंग की थी.

सखी के झरने का टाइम हो रहा था. उसकी निपल्स पे सुजीत के दाँत बहुत अच्छे लग रहे थे. सुजीत भी बीच बीच में फनफना रहा था. लगता था कि वो भी जल्दी झरेगा. सखी ने अपनी टांगे उसकी कमर के आस पास लपेट ली और उसकी पीठ पे अपने हाथ फेरने लगी. अपनी आँखें मून्दे वो मस्ती ले रही थी. आज उसे एक अजीब सा सुकून मिल रहा था. ना जाने क्यों उसके मन में एक खुशी थी. शायद इसलिए कि अब उसे आगे से बर्त कंट्रोल पिल्स नही खानी पड़ेंगी. उसे अब अपने होने वाले बच्चे का ख्याल आ रहा था. सुजीत भैया की चुदाई से उसे लग रहा था कि वो बहुत सारा पानी छोड़ेंगे. क्या पता उसके बच्चा ठहर जाए....???? सबसे छोटी बहू सबसे पहले मा बन जाए...मस्ती और उन्मान्द से अब उसका बदन अकड़ने लगा और बिना कोई आवाज़ किए वो झरने लगी.......एक के बाद एक उसकी चूत ने कई बार रस छोड़ा.... फुचह फूकक्चह की आवाज़ एक दम से बढ़ गई....लंड और भी भीग चुका था...चूत के पानी की चिकनाई और नरम चूचिओ पे कड़े कड़े निपल चूसने का मज़ा...उसपे सखी के नरम हाथ उसकी गांद की माँग पे चलते हुए.......

'''ऊऊऊओह सखिईीईईईईई.............ये लीई......ऊऊऊओह''''' और सुजीत झरने लगा. कुच्छ देर पहले ही वो मिन्नी की चूत में झाड़ा था पर अब फिर उसका लंड लंबी लंबी पिचकारिया मारने लगा. सखी चूत में रस की फुहार पाते ही धन्य हो गई और एक बार फिर से झरने लगी. उसने अपनी चूची से सुजीत को हटा के उसके साथ ज़ुबान लड़ा दी. दोनो झरते हुए एक दूसरे को चूसने लगे. बदन से बदन लिपट गये... वीर्य और चूतरस का मिश्रण जांघों के साथ बहने लगा. सुजीत का पूरा वजन सखी के नाज़ुक बदन पे था और बाजुए उसकी पीठ को घेरे हुए थी. छाती से मम्मे चिपके पड़े थे. और इसी पोज़िशन में एक दूसरे को हल्के हल्के चुंबन दिए जा रहे थे. करीब 2 मीं तक सुजीत का लंड अंदर धंसा रहा और फिर धीरे धीरे सिकुड़ते हुए बाहर निकल आया. थकान से निढाल दोनो एक दूसरे की बगल में लेटे हुए बाबूजी को मिन्नी की सिकाई करते हुए देखने लगे.

बाबूजी मिन्नी की चूत में ज़बरदस्त धक्के लगाए जा रहे थे. मिन्नी के चूतर आधे हवा में थे और वो सिसकियाँ ले रही थी. उसके बगल में लेटे हुए सखी ने उसकी चूचियो से खेलना शुरू कर दिया. सखी की टाँगो के बीच हाथ फेरते हुए मिन्नी ने उसका और सुजीत का रस चूत से कुरेदा और चाटने लगी. बाबूजी की रफ़्तार लगातार बढ़ती जा रही थी. उनके पूरे चेहरे पे पसीना था जो कि मिन्नी के पेट पे टपक रहा था. मिन्नी भी झरने के करीब थी. सखी ने झुक के उसकी चूची को मुँह में भर लिया और ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी. बाबूजी के धक्के इतने तेज़ थे कि उसे चूची मुँह में रखने में दिक्कत हो रही थी. सुजीत भी थोड़ा खिसक के अपनी बड़ी भाभी की दूसरी चूची पे मुँह मारने लगा. उसका लंड फिर से उभर रहा था. उसका खड़ा होता हुआ लंड सखी ने देखा और सुजीत को लंड से पकड़ के मिन्नी भाभी के मुँह के नज़दीक कर दिया. साथ ही वो भी मिन्नी भाभी के मुँह के नज़दीक अपना चेहरा ले गई. बाबूजी ने एक बार नज़र उठा के देखा तो उनका जोश और बढ़ गया. सखी कभी मिन्नी को किस करती तो कभी सुजीत के काले लंड को चूस्ति थूक लगा के और फिर मिन्नी के मुँह में लगा देती.
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09-03-2018, 08:56 PM,
#14
RE: Rishton Mai Chudai खानदानी चुदाई का सिलसिला
मिन्नी का चेहरा सखी के थूक और सुजीत के भीगे हुए लंड से गीला हो चुका था. वो अब अपनी चूचिओ को दबाए हुए, गांद उठा उठा के अपनी चूत अपने ससुर से मरवा रही थी. गोरे बदन पे जगह जगह लाल निशान पड़ गए थे. बाबूजी ने अपनी स्पीड नही छोड़ी और जैसे ही गपगाप एक बार और सुजीत का लंड मिन्नी के मुँह में गया वो अपनी पिचकारियाँ छोड़ने लगे. वीर्य की धारे मिन्नी की चूत में बहने लगी. वो एक दम से चिल्ला उठी और झरने लगी. झरते हुए भी उसने सुजीत का लंड नही छोड़ा और अपने चेहरे पे उसे मलती रही. बाबूजी घुटनो के बल बैठे हुए उसकी चूत में रस डालते रहे. थोड़ी देर में उनका मुरझाया हुआ सॅटिस्फाइड लंड जब चूत से बाहर आया तो लपक के सखी ने उसे मुँह में भर लिया और चूसने और चाटने लगी. मिन्नी भाभी की चूत के रस और सुपादे के छेद से निकलता वीर्य उसके मुँह को बहुत स्वाद लग रहा था.

उधर संजय और राजू ने भी राखी की चूत और मुँह की अच्छी सेवा की थी. संजय ने अपना सारा वीर्य राखी की चूत में पिछे से ऊडेला था. और राजू का वीर्य उसके मुँह में था. अभी भी राखी संजय और राजू के बीच सॅंडविच बनी उनके लोड़ों से खेल रही थी. वो तीनो भी थक चुके थे और आके सबके साथ कार्पेट पे लेट गए.

करीब 10 मीं सुसताने के बाद राखी ने उठ के किचन से खाने का सामान लाना शुरू कर दिया. उसके साथ सखी और मिन्नी भी लग गई. सभी नंगे घूम रहे थे. थोड़ी देर में खाना लग गया और सभी लोग नंगे ही टेबल पे आ गए.

'' बाबूजी आपने एक बात नही बताई मिन्नी भाभी के बारे में. आपने इन्हे सबसे पहले राजू भैया के अलावा किस से चुद्वाया और कैसे ? और आपका नंबर कब लगा ?'' सखी ने फिर से चुलबुली बातें छेड़ते हुए पुछा.

'' अर्रे बेटी ये एक मज़ेदार बात है. तेरी भाभी जब राजू के साथ हनिमून पे गई तो इसने मेरा और मेरे दोस्त और उसकी बीवी का किस्सा राजू को बताया. राजू ने यही बात मुझे बताई. तब मैने राजू को बताया कि किस तरीके से मिन्नी ने उनको देख के अपनी चूत सहलाई थी. पूरी बात सुनके राजू समझ गया कि मिन्नी को 2 मर्दों का सीन पसंद है. इसने घर में मिन्नी को ब्लू फिल्म्स दिखाई जिसमे एक औरत 2 या ज़ियादा मर्दों से चुद रही थी. बस फिर क्या था एक दिन मिन्नी ने इसे कह दिया कि मुझे भी ऐसा करना है. जब ये बात राजू ने अगले दिन मुझे कही तो उस समय मिन्नी रात की ज़बरदस्त चुदाइ के बाद सो रही थी. मैने उसी समय राजू को मेरे साथ उसके रूम में चलने को कहा. सोई हुई मिन्नी उस समय बहुत सुन्दर दिख रही थी. इसके चूतर उपर की तरफ थे. राजू ने पिछे से इसकी चूत में लोडा पेला और ये उल्टी लेटे लेटे चूत मरवाने लगी. उसी समय मैं इसके मुँह के पास अपना लोडा लहराता हुआ पहुँच गया. अब नंगी तो ये थी ही और उपर से राजू से चुद भी रही थी. मस्ती में इसने ये नही देखा कि लंड किसका है और लगी चूसने. बाद में जब इसकी चूत चुदाई ख़तम हुई तो इसने उठ के मुझे देखा. उस दिन तो इसकी शरम देखने वाली थी. पर फिर मैने भी इसको जम के प्यार किया और इसकी सारी झिझक दूर कर दी. बस तब से वो दिन और आज का दिन ये मेरे लंड से कभी भी कहीं भी चुद लेती है. उसी रात हम चारों से इसे एक साथ चोदा था. अगले 3 दिन तक इसकी चूत सूजी रही.'' बाबूजी ने हस्ते हुए सारी बात कह डाली.

'' अर्रे वाह बाबूजी...आपकी ये बड़ी बहू तो बहुत ही छिनाल निकली...सॉरी भाभी मैं ऐसे कह रही हूँ ..पर सच में ये एक कॉंप्लिमेंट है. आप बुरा मत मानना.'' सखी बोली.

'' अररी बुरा क्यों मानूँगी. समझती हूँ तेरी बात. पर मुझे सबसे ज़ियादा खुशी इस बात की है कि बाबूजी घर में पहले मर्द थे इनके अलावा जिन्होने मुझे प्यार किया. आख़िर ये मेरा रेकॉर्ड बन गया पर्मनेंट. अपने पति के अलावा सबसे पहले अगर किसी ने मुझे लंड लगाया तो वो बाबूजी थे. और ये बात मैं हमेशा राखी को भी कहती हूँ...'' मिन्नी मुस्कुराते हुए और प्राउड फील करते हुए बोली. बोलते समय उसकी छाती आगे को निकली हुई थी और तेज़ी से उपर नीचे हो रही थी.

उसकी बात सुन के बाबूजी, राखी और सुजीत मुस्कुरा दिए और राखी ने बाबूजी का लोडा हल्के से सहला दिया. उसका ये आक्षन देख के सुजीत को छोड़ के बाकी सब थोड़ा अचंभे में पड़ गए.

'' बाबूजी आप कुच्छ छुपा रहे हैं. और शायद राखी भाभी भी. बताइए ना क्या बात है.'' सखी ने एक बार फिर बात छेड़ी.

'' चलो पहले सब खाना समेट दो और फिर आ जाओ. आज लगता है कि सिर्फ़ कहानियाँ सुनने का दिन है. '' कहते हुए बाबूजी उठ के हाथ धोने चले गए. सब लॅडीस ने फटाफट खाना समेटा और वापिस ड्रॉयिंग रूम में आ गई. महफ़िल फिर एक बार जॅम गई. बाबूजी ने सोफा पे अपनी जगह ले ली और थोड़ी देर के लए सब मर्द अपनी अपनी पत्निओ के पास बैठ गए. राखी और सुजीत थोड़ा मुस्कुरा रहे थे. बाबूजी ने सबकी तरफ देखा और मुस्कुराते हुए फिर राखी को देखा और उसे आँख मारी. राखी की घुंडिया एक दम तनी हुई थी. उसकी गोरी गोरी जांघों पे सुजीत का एक हाथ था. खुले बालों में वो मस्त दिख रही थी.

'' ह्म्‍म्म लगता है की सोने से पहले एक बार फिर से प्रोग्राम बन जाएगा. सखी तू बहुत शरारती है, अपने इस बूढ़े ससुर से इस उम्र में इतनी मेहनत करवाएगी. पहले जैसे कहानियाँ सुनाते सुनाते जोश आ जाएगा और फिर से मुझे कुच्छ करना पड़ेगा...'' बाबूजी मुस्कुराते हुए बोले.

'' बाबूजी आप बिल्कुल चिंता ना करें इस बार मैं आपको मेहनत नही करने दूँगी..आप बस मज़े लेना और सारी मेहनत मुझपे छोड़ देना.'' सखी ने बाबूजी के लंड पे कूदने का मंन बना लिया था.

'' तो सुनो फिर. बात उन दिनो की है जब मिन्नी घर में बड़ी बहू बन के आ चुकी थी. अब ये बेचारी घर में अकेली औरत और घर में 4 मर्द. वो भी मुश्टंडे... और उपर से हरिया हमारा नौकर. उसे भी जब मौका मिलता तो वो इसका स्वाद ले लेता था. तो ये बेचारी काफ़ी दिन तक सहती रही पर फिर एक दिन इससे रहा नही गया और जब मैं इसकी ले रहा था तो इसने मुझसे शिकायत की कि अब अकेले मुझसे घर नही संभलता. एक के बाद एक 4 भूखे लोगों की भूख कब तक मिटाउँगा आख़िर मेरा भी जिस्म है....मैं भी इंसान हूँ. भूखे भेड़िओ की तरह नोच देते हैं मुझे बाबूजी ये आपके 3नो बेटे. अब मैं सोच में पड़ गया की अब सुजीत का ब्याह भी हो जाना चाहिए.''
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09-03-2018, 08:57 PM,
#15
RE: Rishton Mai Chudai खानदानी चुदाई का सिलसिला
'' पर परेशानी वही थी कि लड़की कैसी हो. पर ये सुजीत भी छुपा रुस्तम था. घर में ये अपनी भाभी से मज़े लेता था और बाहर राखी से. राखी और इसका चक्कर कॉलेज से था. मैने इसकी शादी के बारे में सोचा और इससे बात की. ये तो राखी का दीवाना था और इसे लगा कि कहीं वो इसके हाथ से निकल ना जाए. कहीं मैने अपनी मर्ज़ी से ढूँढ दी तो ये मना नही कर पाएगा. सो इस घबराहट में इसने मुझे सब कुच्छ बता दिया राखी के बारे में. तब मैने राखी की फोटो मँगवाई इससे. फोटो में राखी ने चुरिदार सूट पहना हुआ था. इसकी फोटो देख के मैं समझ गया कि ये हमारे खानदान में फिट हो सकती है. बड़े बड़े मम्मे और इसकी मोटी बढ़िया गांद देख के मेरा दिल फिसल गया. पर दुविधा वही थी क्या ये जितना सेक्सी दिखती है उतनी ही सेक्स की भूखी भी है ?? तब मैने सुजीत से डाइरेक्ट पुछा कि क्या इसने कभी राखी से संबंध बनाए ? इसने मुझे बताया कि रखी के साथ ये कई बार संभोग कर चुका था. पर हमेशा जल्दी का काम होता था. तस्सली से ये लोग सिर्फ़ एक बार होटेल में कर चुके थे. उस एक्सपीरियेन्स के बेस पे इसका कहना था कि राखी काफ़ी कामुक लड़की है.''

'' इसने मुझे ये भी बताया कि राखी इसके लिए केले चूस चूस के प्रॅक्टीस भी करती है. ये बात मेरे दिमाग़ में बैठ गई. मैने कहा कि मुझे रखी का टेस्ट लेना होगा तभी वो इस घर की बहू बनेगी. अब ये बात ये खुल के राखी से नही कर सकता था. सो मैने इसके साथ मिल के एक प्लान बनाया. एक रात इसने मिन्नी की जम के चुदाई की और उस रात अपने बदन से उसके रस की खुश्बू को सॉफ नही किया. अगले दिन ये राखी को मिलने बिना नहाए चला गया. इसने राखी के साथ बाहर घूमने का प्रोग्राम रखा और उसे एक सुनसान जगह पे ले गया. प्लान के मुताबिक मैं भी उस जगह पे मौजूद था. मेरे बताए अनुसार इसने पहले राखी को बहुत गरम किया और इसकी चूत चॅटी और फिर रखी से अपना लंड चुसवाना शुरू कर दिया. लंड मुँह में लेते ही रखी ने इसे कहा कि क्या तुम किसी को चोद के आए हो. अब उस समय राखी का सबसे बड़ा टेस्ट था. वो पुच्छ तो रही थी पर लंड को सहलाए और पूचकारे जा रही थी. सुजीत ने बहाना किया कि नही रात मूठ मारी थी और सॉफ नही किया था सो उसका वीर्य ही लगा हुआ है और सूख गया है. पर इसका शक दूर नही हुआ. स्वाद ले लेके ये लंड तो चूस्ति रही पर 2 बार और इसने पुछा. इधर सुजीत ने इसकी चूत में अपनी उंगलियाँ डाली हुई थी कुच्छ इसी तरीके से जैसे कि मेरी जुड़ी हुई उंगलियाँ हैं. प्लान के मुताबिक मैं भी कपड़े उतार के नज़दीक ही छुप गया. जब सुजीत ने देखा कि मैं रेडी हूँ तो इसने राखी से कहा कि मैने रात भाभी को चोदा था और ये उनकी चूत का रस है जो लंड पे चिपका है. एक बार के लिए तो राखी दंग रह गई और पिछे को हटी पर सुजीत ने भी चालाकी से उसकी चूत में उंगलियाँ डाले रखी. ये कुतिया की तरह थी और सुजीत पेड़ से पीठ लगाए बैठा था. राखी ने इसे 2 - 3 गालियाँ दी और गुस्सा दिखाया. पर इससे पहले कि ये ज़ियादा कुछ कहती सुजीत ने इसे एक चुम्मा दे डाला और इसकी चूचियाँ भींच दी. तुम सबको पता है कि इसकी गीली चूत का रास्ता इसके मम्मो से जाता है. बस ये मस्ती में लहरा उठी. चूत में उंगली और घुंडीयों को मसल्ते हुए हाथ और बिना कुच्छ और बोले इसने फिर मस्ती में सुजीत का काला लोडा मुँह में भर लिया.''

'' सच कहूँगा आजतक मैने ऐसा मादक नज़ारा नही देखा. खुले आसमान में दिन के समय ये पूरी गांद होला हिला के चूत में उंगली ले रही थी और इसकी बुर पनिया रही थी. जंघें बिल्कुल रस से तरबतर. मम्मे भारी और सूट के टॉप से आधे बाहर निकले हुए और मुँह में इसका काला नाग. कसम से मैं रुक नही सकता था. पर अभी भी कुच्छ बाकी था. सुजीत ने इसे झूठी कहानी सुनाई कि कैसे भाभी को एक साथ 2 मर्द चाहिए. इसने झूठ बोला कि राजू मिन्नी को अकेले संभाल नही पाता इसलिए कभी सुजीत तो कभी संजय राजू और मिन्नी के साथ सोते हैं. ये सुनते ही राखी के बदन में आग लग गई और इसने लंड के चूपे बढ़ा दिए. थूक लगा लगा के ये ऐसे चूस रही थी कि जैसे किसी मरने वाले को एक आख़िरी खाना नसीब हो रहा हो. ''

'' इसकी ये हालत देख के सुजीत ने 3 बार इसकी चूत से उंगली निकाली और मुँह में लेके चॅटी और मैं इसका इशारा समझ गया. मैं नंगी अवस्था में रखी के पिछे आ गया और सुजीत की जगह अपनी जुड़ी हुई उंगली इसकी चूत में पेल दी. इससे ज़ियादा होश तो था नही सो ये मज़ा ले लेके लंड चूस्ति रही. मैने भी मौके को देख के अपना हथियार तैयार किया और इसकी चूत में पेल दिया. तभी सुजीत ने इसको उपर उठा के अपने होठ इसके मुँह पे लगा दिए. सुजीत ने इसके कंधे पकड़े हुए थे और मैने इसके चूतड़. मुँह तो बूँद था ही सो ये चीख भी नही पाई. मैने तबाद तोड़ 10 - 12 धक्के इसकी गीली चूत में लगा दिए. सारे स्ट्रोक्स लंबे लंबे थे ताकि इसकी चूत को अंदर तक घर्षण मिले और ये और भी गरमा जाए. तभी इसने ज़बरदस्ती अपने को सुजीत से छुड़ाया और मूड के मेरी तरफ देखा. इतने में सुजीत ने इसके चूचे बाहर निकाल के मसलना शुरू कर दिया. इसके मुँह से एक लंबी सिसकारी निकली और इसने मेरी तरफ देखते हुए मुँह खोला और मैने अपनी जुड़ी हुई उंगली जो कि इसके रस से भीगी थी इसके मुँह में डाल दी. ये चूतड़ हिला हिला के चुद्ने लगी और मेरी उंगली को चूसने लगी. फिर इसने झुक के सुजीत का लोडा वापिस मुँह में ले लिया और दुगने जोश से चूसने लगी. मेरे से अब रहा नही जा रहा था और मैने सुजीत को इशारा किया. सुजीत समझ गया और लगा इसकी चुचियो से खेलने. इसकी चूचिओ को मसल मसल के इतना गरमा दिया कि इसने कुच्छ ही देर में मेरे लंड पे रस की फ़ुआर कर दी.''

जैसे ही ये झर के हटी मैने और सुजीत ने इसे संभलने का मौका नही दिया और एक साथ खड़े होके इसके खुले मुँह पे मूठ मारना शुरू कर दिया. ये बड़ी उतावले पन से मुँह खोल के बैठ गई और अपनी चूत से खेलती रही. मैने और सुजीत ने एक साथ इसके मुँह पे पानी छोड़ा. एक तरफ से वो पिचकारियाँ मार रहा था और दूसरी तरफ से मैं. फिर मैने पिचकारी छोड़ते छोड़ते इसके मुँह में लंड ठूँसा और चुस्वाया. फिर सुजीत ने इसके चेहरे गालों और माथे पे लगा वीर्य का मिश्रण अपने लंड से समेट के इसके होठों पे लगाया. सच में उस समय इसमे पूरी रांड़ बहू बनने के लकछन मुझे दिखाई दे गए. जब ये सुजीत का लोडा चूस रही थी और हम दोनो के मिले जुले वीर्य का स्वाद ले रही थी मैं वहाँ से खिसक गया और घर आ गया.''

'' कुच्छ दिन बाद मैने इसकी फोटो घर में सबको दिखाई और कहा कि ये हमारी दूसरी बहू बनेगी. मिन्नी को यकीन नही हुआ और इसने मुझे पुछा कि क्या ये हमारे घर के माहौल में शामिल हो पाएगी. तब मैने कहा कि मैं एक पारखी हूँ और हीरा पहचानता हूँ और ये भी कहा कि ये हम सबसे ज़ियादा तुम्हे खुश रखेगी (आख़िर कार मिन्नी का रस चाट चुकी थी और उसका स्वाद ले चुकी थी)''
क्रमशः.................................
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09-03-2018, 08:57 PM,
#16
RE: Rishton Mai Chudai खानदानी चुदाई का सिलसिला
खानदानी चुदाई का सिलसिला--6 

गतान्क से आगे..............


दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा इस कहानी छटा पार्ट लेकर हाजिर हूँ
''जब हम लोग इसके घर पहली बार पहुँचे तो मैने जान भूज के 2 दिन की शेव नही की और धोती कुर्ता और पगड़ी पहेन के और काला चश्मा लगा के गया. मुझे उमीद थी कि ये मुझे पहचानेगी नही. उसके बाद इन दोनो का रिश्ता पक्का हो गया. पर सगाई के बाद इसने सुजीत से कहा कि ये मुझे अपना कमरा दिखना चाहती है कि ये कैसी ड्रेसस पहनती है और मुझे आगे के लिए कोई ऐतराज़ ना हो. इसके मा बाबूजी को कुच्छ अजीब लगा पर वो कुच्छ बोले नही और इसने मुझे अपने कमरे में ले जाके मेरी धोती में हाथ डाल दिया. मैं एक दम घबरा गया और साथ ही अचंभित भी रह गया. देखते ही देखते इसने मेरा लंड मुट्ठी में भर के बाहर निकाला और उसे सहलाते हुए चूसने लगी. ये उस दिन भी इतनी कामुक लग रही थी कि मैं इसे रोक नही पाया और खड़े खड़े उपर से इसके मम्मो की गहराइओ को नापते हुए इसके मुँह में झर गया.''

'' इसने मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखा और अपना मुँह अच्छे से सॉफ किया और बचा हुआ वीर्य भी चाट लिया. फिर खड़े होके इसने अपने उरोज ब्लाउस में से निकाले और मेरे मुँह की तरफ करके बोली....'बाबूजी उस दिन आपने ना तो इन्हे छुआ था और ना ही ढंग से देखा था...पर आज ये आपके स्पर्श और आपकी जीभ का इंतेज़ार कर रहे हैं. आराम से चूसिए और बताइए कि आपकी दूसरी बहू का स्वाद कैसा है.' ये कह के ये हंस दी और मुस्कुराते हुए मेरे खुले मुँह को चूम लिया. साथ ही साथ इसने मेरे हाथों को पकड़ के अपने मम्मो को सहेलवाया और फिर मेरे मुँह को अपनी छातियो के बीच दबा दिया. जब मैं इसकी खुश्बू ले रहा था तो ये बोली कि उस दिन आपको पता चल गया था कि मेरी चूचिओ से मेरी चूत का क्या रिश्ता है और सच में अगर सुजीत उन्हे नही छूता तो शायद आपकी ये जुड़ी हुई उंगलियाँ भी कमाल नही कर पाती.''

''इसका ये कहना था और मैं समझ गया कि इसने आज मुझे कैसे पहचाना. मैने भी खुशी से पागल होके 2 मिनट तक इसकी चूचिओ का सेवन किया. तब मुझे लगा कि कोई आ जाएगा सो मैने इसका ब्लाउस वापिस सेट किया और मुस्कुराते हुए इसे एक चुंबन दिया. फिर मैने इसको सबके बीच आशीर्वाद दिया और अपनी नई फॅमिली में मुस्कुराते हुए वेलकम किया....''' बाबूजी अपने तन्ने हुए लंड को सहलाते हुए बोले.

मिन्नी का मुँह खुला का खुला ही था और राखी थोड़ा शरमाई हुई नीचे देख रही थी. सुजीत जिसे कि दूसरे किस्से का पता नही था वो भी कभी राखी को तो कभी बाबूजी को देख रहा था. अचानक से मिन्नी के मुँह से एक सिसकारी निकली. सखी ने उसके निपल को उंगलिओ के बीच उमेथ दिया था और उसको गाल पे एक किस दी.

'' बाबूजी आप और राखी...मतलब आपने राखी को शादी से पहले ही चोद दिया था..बाबूजी ..आप तो ...सच में..मैं क्या बोलूं...आप ना....'' मिन्नी थोड़ा गुस्से से एग्ज़ाइट्मेंट में बोली. सारी कहानी सुन के उसकी चूत पनिया गई थी. राजू का 10 इंच उसके चूतरो पे फनफना रहा था.

'' हां हां बोल दे कि मैं बहुत बड़ा ठरकि हूँ...पर बेटी एक बात याद रखना कि मेरे पास राखी को घर में लाने के लिए ये टेस्ट करना ज़रूरी था और सबसे बड़ी बात ये कि मेरी चाय्स ग़लत नही निकली..आज जब तू चूत चुस्वाति है तो थॅंक्स तो मुझे ही करती है कि मैने तुझे ऐसी देवरानी ला के दी. ''' बाबूजी लंड सहलाए जा रहे थे.

इतने में सखी उठी और उनसे जाके लिपट गई. देखते ही देखते उसने बाबूजी से अपनी जीभ लड़ा दी और उनके लंड पे अपनी चूत का मुख्या द्वार सटा दिया. द्वार खुला और घोड़ा अंदर हो गया. थोरी देर शांति रही और फिर चूत में मची कुलबुलाहट ने अपना रंग दिखा दिया और देखते ही देखते एक हसीन साँवली सी चूत एक अधेड़ उम्र के लंड पे उछ्लने लगी. राखी ने आगे झुक के सुजीत का लंड पिछे से लिया और संजय अपनी मिन्नी भाभी की चूत में गोते खाने लगा. राजू अपना 10 इंच का लोडा कभी मिन्नी को खिलाता तो कभी रखी के मुख चोदन का मज़ा लेता....और इस तरीके से बाबूजी के परिवार का एक और सामूहिक चोदन शुरू हो गया.

'' बीबीजी ..ऊओ बीबी जी दरवाज़ा खोलिए बीबी जी...'' कमला उर्फ कम्मो दरवाज़ा भड़भाड़ा रही थी. '' सुबह के 8 बज गए है और बीबी जी अभी तक सो रही हैं ..ऐसा तो होता नही है..'' कम्मो अपनी सोच में डूबी दरवाज़े पे इंतेज़ार कर रही थी.
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09-03-2018, 08:57 PM,
#17
RE: Rishton Mai Chudai खानदानी चुदाई का सिलसिला
कम्मो की उमर 36 साल थी. कद 5 फ्ट 3 इंच. बदन गथीला था. 2 बच्चों की मा तो कहीं से भी नही लगती थी. मेहनत करना उसकी बचपन की आदत थी. दिमाग़ से थोड़ी कमज़ोर थी पर दुनियादारी और लोगों की समझ थी उसे. 19 साल की उमर में जब उसका ब्याह हुआ तो उसे पता नही था कि आने वाले दिन कितने कठिन होंगे. पति एक फॅक्टरी में मज़दूर था. सॅलरी ठीक थी. घर में सास और एक बड़ा जेठ था जो कि शादी नही करना चाहता था. वो भी फॅक्टरी में काम करता था पर सॅलरी छोटे भाई से कम थी. उसको बस फॅक्टरी का काम और घर वापिस आके पूजा करने का शौक था. वैसे दिखने में ठीक था.

4 साल में कम्मो के 2 बच्चे हुए. दोनो लड़के. सास बहुत खुश थी पोते पा के. कम्मो घर के काम काज में लगी रहती. एक दिन अचानक जैसे सुखी परिवार पे बिजली गिरी. पति का फॅक्टरी में आक्सिडेंट हो गया और उसका एक हाथ काम करना बंद हो गया. कुच्छ दिन के बाद उसको फॅक्टरी से निकाल दिया गया. अब वो दिन भर घर पे रहता और बच्चों को देखता और कम्मो ने दूसरों के घरों में जाके काम करना शुरू कर दिया. सास अपने बेटे की हालत देख के बीमार रहने लगी और 1 साल में उनका देहांत हो गया. अब कम्मो की ज़िम्मेवारियाँ और भी बढ़ गई. इसी बीच उसके जेठ को फॅक्टरी से 10 किमी दूर गॉडाउन में शिफ्ट कर दिया गया. कुच्छ दिन तो वो रोज़ आता जाता था पर फिर बस के किराए का बोझ तकलीफ़ देने लगा. कम्मो के कहने पे उसने गॉडाउन में ही रहना शुरू कर दिया और हफ्ते - 15 दिन में घर आने जाने लगा.

कम्मो जैसे तैसे 3 - 4 घरों में काम करके परिवार पाल रही थी. उनमे से एक घर में सिर्फ़ 3 औरतें और एक 55 - 60 साल के बुज़ुर्ग रहते थे. दरअसल वो घर शहेर के एक अच्छे व्यापारी का था जो कि विदेश में काम चलाता था. साल में 2 बार घर आता था. घर की औरतों में उसकी बीवी, उसकी बड़ी विधवा बहेन और उसकी छ्होटी साली थी. बीवी अकेली होने की वजह से अपनी बहेन को साथ ले आई थी. कुच्छ समय बाद जब उसकी बड़ी बहेन विधवा हो गई तो वो भी वहीं घर पे आके रहने लगी. ये परिवार काफ़ी संपन्न था पर घर में एक जवान मर्द की कमी थी. जब भी वो व्यापारी घर आता तो जैसे घर स्वर्ग बन जाता. एक रोज़ जब कम्मो उनके घर काम कर रही थी तो उसने देखा कि मालिक की बहेन छुप छुप के खिड़की से कुच्छ देख रही है. कम्मो ने दूसरी ओर से जाके कमरे में झाँका तो वो व्यापारी अपनी बीवी के साथ चुदाई में मशगूल था.

कम्मो समझ गई कि विधवा बहेन अपने भाई और भाभी का वासना भरा खेल देख के उत्तेजित हो गई है. वैसे यही हाल कम्मो का भी था. उसका पति घर पे रहने की वजह से सुस्त हो गया था और अपनी बीमारी के चलते कम्मो से अच्छा सेक्स नही कर पाता था. कम्मो की आँखों के सामने जो दृश्य था उसने उसके बदन की आग को अच्छे से भड़का दिया था. ना जाने कैसे और कब कम्मो ने मालिक की बड़ी बहेन के पास जाके उसके खुले चूचे पकड़ लिए और दोनो औरतें लंड चूत का खेल देखते देखते कब चूत चूत का खेल खेलने लगी. ये बात आज भी कम्मो को अचंभित कर देती है. पर उस दिन के बाद कम्मो ने कभी भी चूत चूत खेलने का मौका नही छोड़ा. उन्ही दिनो उसकी मुलाकात हरिया काका से हुई जो कि बाबूजी का नौकर था. हरिया काका उसे सब्ज़ी मंडी में मिला करते थे. 3 - 4 मुलाकात के बाद हरिया काका उसे बाबूजी के यहाँ ले आए और उसे पार्ट टाइम नौकरी दिलवा दी. कुच्छ ही दिनो में कम्मो को सिर्फ़ चूत चूत खेल के बोरियत होने लगी. उसने अपने दिल की बात मालिक की विधवा बहेन से कही. अब दोनो का मन लंड खाने को होने लगा. पर करें तो कैसे. ये उलझन भी सुलझ गई जब उस व्यापारी की बीवी और साली कुच्छ दिन के लिए अपने गाओं गए. मौके का फ़ायदा उठाते हुए कम्मो ने हरिया को अपने जाल में फँसाया और उन्हे सिड्यूस किया.

हरिया जो कि उन दिनो घर में आई नई नई मिन्नी को देख के मचलता था, बिना मौका गँवाए दोनो भूखी शेरनीओ के बाड़े में घुस गया. कम्मो और उसके मालिक की चूड्दककर विधवा बहेन की रोज़ अपने तगड़े लंड से सेवा करता. कभी कभी एक साथ तो कभी अलग अलग. पर ये मौका सिर्फ़ आधे घंटे के लए ही मिल पाता था. शाम को सब्ज़ी के बहाने से जाता और कम्मो उसे वहाँ से अपने मालिक के घर के पिछे बने कमरे में ले जाती. वहाँ हरिया उसका और उसकी विधवा मालकिन का जोबन लूटता. ख़ास तौर से उसे उस ठर्कि विधवा की चुदाई में मज़ा आता कि किस तरह से एक शरीफ घर की चुदास औरत उसके मोटे तगड़े लंड को मुँह में रख के पूजती थी. कम्मो से तो वो बाबूजी के घर में भी छेड़ छाड़ कर लेता था. पर कम्मो को एक चीज़ की कमी महसूस होती थी... हरिया के आने से उसका चूत चूत का खेल कम हो गया था. पर अब उसे चूत चाटने की आदत पड़ चुकी थी. उसकी विधवा मालकिन जब हरिया के लंड पे चढ़ती तो कम्मो खूब चटाई करती पर उसको कुच्छ खाली पन सा लगता था. शायद कि जिस चूत में हरिया का लोडा था वो उसपे अपना हक समझती थी.
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09-03-2018, 08:57 PM,
#18
RE: Rishton Mai Chudai खानदानी चुदाई का सिलसिला
जब व्यापारी की बीवी और साली वापिस आए तो हरिया के लिए मौके कम हो गए. पर हरिया को तब तक मिन्नी की चूत का स्वाद लग चुका था. हां मिन्नी की चूत उसे कम ही मिलती थी पर फिर भी वो काम चला रहा था. कम्मो भी वापिस चूत चूत के खेल से खुश थी. पर तभी उस व्यापारी की विधवा बहेन के लिए एक अच्छा रिश्ता आया और जल्दी जल्दी में उसकी शादी हो गई. कम्मो एक बार फिर अकेली पड़ गई. पर जैसा कि कहते हैं कि जहाँ चाह वहाँ राह. बहेन की शादी के कुच्छ दिन बाद जब व्यापारी अपनी बीवी की सिकाई कर रहा था तो कम्मो ने उसकी साली को अपने जोबन से खेलते हुए देखा. कम्मो की तो जैसे लॉटरी निकल पड़ी और उसे अपने पुराने दिन याद आ गए. कम्मो ने जल्दी ही उस साली के साथ भी समलैंगिक संबंध बना लिए. साली चूकि लंड के खेल से बिल्कुल अंजान थी सो उसका चूत चूत के खेल में मन ज़ियादा अच्छे से लगा. कम्मो को जैसे स्वर्ग मिल गया. जवान लड़की उसकी चूचियो को चूस्ति तो कम्मो की चूत के धारे रुके नही रुकती थी. एक बार उसकी प्रेमिका ने उससे अपनी चुदाई की बात कही. जोश में आके कम्मो ने हरिया को निमंत्रण दे डाला. हरिया भी कहाँ मौका छोड़ता. उसने भी साथ दिया और साली की कुँवारी चूत पे अपने लंड की मोहर लगा दी. साली को तो जैसे जन्नत मिल गई. लंड का स्वाद चूत को लगते ही वो पागल हो गई. हरिया से 2 बार और चुद्ने के बाद उसने अपने कॉलेज के दोस्तों से संबंध बनाने शुरू कर दिए. कम्मो के साथ अब वो कट कट के रहने लगी. कम्मो भी इस बात को कब तक संभालती सो उसने एक दिन साली के साथ ज़बरदस्ती की. शायद ये सोचना मुश्किल है पर उस दिन कम्मो ने साली का रेप किया. हालाँकि अंत समय तक साली भी उसके मुँह में झरी पर उसको एक नौकरानी के हाथों अपना रेप बेइज़्ज़ती लगा और उसने कुच्छ दिनो में कम्मो को काम से निकलवा दिया.

इधर बाबूजी के घर में काम करते हुए कम्मो को 3 साल हो गए थे. राखी भी घर में बहू बन के आ चुकी थी. हरिया का देहांत हो चुका था. अब कम्मो के लिए लंड चूत और चूत चूत के खेल कम हो गए थे. बच्चों की ज़िम्मेवारियाँ और पति की सेवा करते करते वो थक जाती थी. इसी दौरान बाबूजी के यहाँ से उसे पर्मनेंट नौकरी का न्योता मिला. सुबह 8 बजे से लेके शाम 4 बजे तक उसे घर के काम देखने थे. सॅलरी भी अच्छी थी सो उसने बाकी सब घर छोड़ के बाबूजी के यहाँ ही नौकरी कर ली. उसके सामने सामने घर में तीसरी बहू भी आई. सेक्स के मामले में उसे हरिया काका का लंड बहुत याद आता था. पर मजबूरी में वो सिर्फ़ अपने पति और उसके एक दोस्त के साथ ही गुज़ारा कर रही थी. पति का दोस्त कभी कभी शहेर से आता तो उसको 2 -3 घंटे जम के चोद्ता. बाकी समय या तो वो अपनी मुनिया सहला लेती या पति से सेक्स कर लेती.

जब से कम्मो ने बाबूजी के यहाँ काम शुरू किया था उसे पैसे की कमी नही हुई. काम वो अच्छे से करती थी, हाथ में सफाई भी थी और देखते देखते उसके कपड़े और रंग ढंग बदलने लगे. अब वो पूरे रूप से नौकरानी नही लगती थी. किसी मध्यम वर्ग की महिला लगने लगी थी. सखी के घर में आने के बाद से घर का माहौल काफ़ी बदल गया था. अब घर में हमेशा चहक रहती थी. पहले सभी शांत रहते थे पर अब कुच्छ ना कुकच्छ मज़ाक चलता रहता था. बाबूजी के रंग भी बदल गए थे. वो भी खुश रहते थे. कम्मो की नज़र बाबूजी और उनकी धोती पे रहती थी. वो हमेशा सोचती कि उनकी धोती में छुपा हुआ डंडा कैसा दिखता होगा. उसे लेने में कैसा मज़ा आएगा. मौका ढूँढ के वो उसके अंडरवेर जाँचती और उसे अक्सर उनके अंडरवेर में अलग अलग खुश्बू आती. उसने घर के बाकी लोगों के अंडरवेर भी सूँघे और उसे कन्फ्यूषन होती कि कभी किसी के कछे या कछि में एक टाइप की स्मेल आती तो कभी कैसी.

पर कम्मो कभी रंगे हाथों कुच्छ देख नही पाई. घर में जो भी होता था उसकी पीठ पिछे ही होता था. कभी कभी जब वो दोपहर को घर जाती बच्चों को खाना खिलाने तो वापिस आके उसको किसी ना किसी कमरे की बेड की हालत खराब मिलती. ऐसा लगता था कि बेड पे सेक्स का घमासान हुआ है. पर कौन किसके साथ करके गया ये कभी नही पता चला उसे.

दरवाज़े पे खड़े खड़े जैसे 5 मिनट में पिच्छले 10 - 12 साल की कहानी उसे
की आँखों के सामने घूम गई. एक बार फिर कम्मो ने हाथ बढ़ा के दरवाज़ा भड़भादाया और इंतेज़ार करने लगी.


दोपहर को किचन में काम करते हुए कम्मो परेशान थी. आज घर का महॉल थोड़ा बदला सा था. सब थोड़े चुप थे. सुबह पहली बार आने पे किसी ने दरवाज़ा नही खोला. कम्मो वेट करके थक के बाज़ार चली गई. वापिस 9 बजे लौटी तो घर में सब जागे हुए थे और चाइ पी रहे थे. आज सखी भी इतना नही चहेक रही थी.

शाम का खाना बन चुका था और कम्मो को घर जाना था. कम्मो ने चाइ बनाई और टेबल पे लगा दी. सब वहीं बैठ थे सिवाए बाबूजी और सखी के. राखी ने कम्मो को बाबूजी के कमरे में चाइ देने को कहा. चाइ का प्याला लए कम्मो बाबूजी के कमरे पे दस्तक देने लगी थी कि अचानक उसके कान में आवाज़ पड़ी. दरवाज़ा पूरा बंद नही था और सखी अंदर बाबूजी से बात कर रही थी.

'' बाबूजी आज आपको क्या हो गया है. सुबह से गुम्सुम हैं और आपको देख के बाकी सब भी ऐसे ही हो गए हैं. मुझे अच्छा नही लग रहा. चलिए अपना मूड ठीक कीजिए और सनडे शाम की तैयारी करते हैं. माना कि कल जो भी बातें हुई वो सबके लए समझना थोड़ा डिफिकुल्ट है पर अब जो सच है सो है. और फिर आपने भी दिल की बात कह के कोई ग़लत नही किया. सबको जानने का हक था. कभी ना कभी तो राज़.....'' सखी की बात बीच में अधूरी रह गई, क्योंकि अचानक राखी ने कम्मो को आवाज़ दी और कम्मो को दरवाज़ा खटखटाना पड़ा. कम्मो के कमरे में आते ही बाबूजी ने उसकी तरफ पीठ कर ली और सखी कुर्सी पे बैठे उसे घूर्ने लगी. कम्मो को लगा कि उससे कोई बात च्छुपाई जा रही है. चाइ रख के वो राखी के पास पहुँची और सब काम ख़तम करके अपने घर को चल दी.

पूरे रास्ते कम्मो सखी की बात के बारे में सोचती रही. आख़िर ऐसी कौन सी बात है जो राज़ है. इसी उधेड़बुन में वो घर पहुँची और देखा कि दोनो बच्चे पढ़ाई में लगे है. उसका पति नहाने गया हुआ था. कम्मो ने जल्दी जल्दी खाना बनाया और बच्चों को 7 बजे खाना खिला दिया. इतने में उसका पति तैयार हो के बाहर जाने लगा, कहा कि अपने दोस्त के घर जाना है उसके बेटे की सगाई को तैयारी के लिए. कम्मो घर पे बच्चों के साथ अकेली थी. कम्मो अभी भी बाबूजी और सखी की बात के बारे में सोच रही थी. इसी सोच में वो नहाई और अपने को तैयार किया. बच्चे अपना स्कूल बॅग पॅक करके सोने चले गए. 8 बज चुके थे. कम्मो खाना खाने के लए पति का इंतेज़ार कर रही थी कि तभी पति के दोस्त का लड़का रमेश आ गया. रमेश की सगाई एक हफ्ते बाद होने वाली थी. उमर करीब 23 साल थी. देखने में ठीक था पर दिमागी तौर पे भोला था. पड़ाई ज़ियादा नही की और बचपन से बाप के साथ खेत में काम करता था. अपनी खेती से उनका घर चलता था.

रमेश ने कम्मो से कहा कि चाचा आज रात नही आएँगे क्योंकि पिताजी के साथ बहुत सारी बात करनी है तो आप खाना खा लेना. कम्मो ने उसे वहीं बैठा लिया. रमेश को बड़े होते हुए देखा था उसने. उसके लिए वो एक बच्चे जैसा ही था. पर अब जब उसकी शादी होने लगी थी तो कम्मो उसे थोड़े अलग ढंग से देखने लगी. क्या ये लड़का शादी के लिए तैयार है ? इतना भोला है ये कि इसे तो लड़कियो के बारे में पता भी नही होगा. ये शादी के फ़र्ज़ कैसे निभाएगा ? सोचते सोचते कम्मो उसके बदन को गौर से घूर्ने लगी. कुर्ते पाजामे में बैठा रमेश उसे अचानक से कामदेव लगने लगा. चेहरे पे हल्की दाढ़ी और उसकी बड़ी बड़ी आँखें उसके चेहरे को आकर्षित बना रही थी.
क्रमशः............................................
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09-03-2018, 08:58 PM,
#19
RE: Rishton Mai Chudai खानदानी चुदाई का सिलसिला
खानदानी चुदाई का सिलसिला--7 

गतान्क से आगे..............


दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा इस कहानी सातवाँ पार्ट लेकर हाजिर हूँ
कम्मो ने रमेश को रोकने के लिए उसे खाना खा के जाने को कहा. रमेश ने मना किया तो कम्मो बोली कि तेरे चाचा के लिए भी बनाया था तो अब जब वो नही खा रहे तो खाना वेस्ट होगा. तू खा के जा. रमेश मान गया. कम्मो को मन में शरारत सूझ रही थी. उसने सलवार कमीज़ पहनी हुई थी. खाना लगाने से पहले वो बाथरूम में अपनी ब्रा उतार के आ गई. रमेश वरामदे में चारपाई पे बैठा था. कम्मो ने उसके सामने एक छ्होटा टेबल लगा दिया और खाना परोसने लगी. साथ ही साथ वो रमेश को छेड़ भी रही थी.

'' क्यों रे रमेश अब तू इतना बड़ा हो गया कि तेरा ब्याह हो रहा है....?''

'' देखो वक़्त कैसे गुज़रता है..कल तक चड्डी बनियान में घूमता फिरता था और आज...''

'' तुझे पता भी है कि शादी का मतलब क्या होता है...? किसी ने बताया तुझे कि नही..? अर्रे बोलता क्यूँ नही घर में लुगाई आने वाली है और तुझे उसको खुश रखना होगा ..सो किसी से कुच्छ सीखा कि नही कि लुगाई को खुश कैसे रखते हैं..??''

कम्मो अपनी बड़ी बड़ी चूचिओ को अच्छे से झुक झुक के दिखा रही थी और खाना लगा रही थी. रमेश उससे सिर्फ़ 2 फुट दूर था. मस्ती लेते हुए कम्मो के चूचक भी सख़्त हो गए थे. चूत में अजीब सी बेचैनी होने लगी थी. रमेश चाची के चूचकों को देख पा रहा था. उसे भी अजीब सा लग रहा था. उसके बड़े भाई ने उसे कुच्छ बातें बताई थी सुहागरात के बारे में. पर इतना खुल के कुच्छ ना बोला था. चाची के सवालों से उसकी जवानी देख के रमेश के कछे में भी कुच्छ हो रहा था. जब अपने खेतों में रमेश किसी सांड़ को किसी गाए पे चढ़ते हुए देखता था तो उसे जो मन करता था वैसा ही उसका मॅन अब भी कर रहा था.

'' जीि चाची बड़े भैया ने बताया था ..कि जब बीवी पहली बार घर आएगी तो क्या करना है..'' रमेश की नज़रे कम्मो की छाती पे गढ़ी थी पर वो ज़ियादा कुच्छ बोल नही पा रहा था.

'' क्या बताया रे तुझे उसने..मैं भी सुनू. '' कम्मो ने रमेश के लए खाना परोस दिया और अपनी थाली लेके वहीं ज़मीन पे बैठ गई. उसे अपने मादक मम्मे अच्छे से दिखाने थे इस नए नए जवान हुए लौंदे को.

'' जी वो उन्होने बताया कि कैसे पहली बार जब वो साथ होगी तो क्या क्या करना है मुझे. कैसे उससे बात करनी है और कैसे उसे आराम से अपने से गले लगाना है..और फिर उन्होने कहा कि उसके बाद सब अपने आप हो जाएगा.'' रमेश खाना खाते हुए बोला.

'' अच्छाअ. तेरे बड़े भाई ने ये बताया कि आगे क्या होगा अपने आप ?'' कम्मो मुस्कुरा रही थी. उससे पता था कि इस सवाल के जवाब के हिसाब से उसको मौका मिल सकता है.

'' नही चाची उन्होने कहा कि सब ठीक होगा और मैं कोई ज़बरदस्ती ना करूँ. सब अपने आप हो जाएगा. मुझे कुच्छ करने की ज़रूरत नही पड़ेगी.'' रमेश बोला.

'' ह्म्‍म्म्म लगता है तेरा भाई भी तेरे जैसा बुध्हु है...पता नही अपनी लुगाई को कैसे खुश रखता होगा ?'' कम्मो मन ही मन खुश थी कि अब उसके हाथ एक सुनेहरी मौका है.

खाना ख़तम हुआ तो कम्मो ने बर्तन धो के किचन में रख दिए. बर्तन धोते हुए उसने जान भूज के अपने सूट को आगे से थोड़ा गीला कर लिया. उसके सूट का लेफ्ट हिस्सा भीगा हुआ था और उसके चूचक सॉफ दिख रहे थे. काली घुंडी क्रीम सूट के कपड़े से चिपकी हुई थी और खड़ी थी. कम्मो चारपाई पे आके बैठ गई और रमेश से सिर्फ़ 1 फुट की दूरी पे थी. घर की बत्तियाँ बंद कर दी थी और बाहर वरामदे में दोनो चारपाई पे बैठे थे. तकरीबन आधा चाँद निकला हुआ था.

'' चाची अब मैं घर जाता हूँ.. मा इंतेज़ार करेगी खाने पे.'' रमेश उठने को हुआ.

'' अर्रे बैठ ना .. मुझे पता है कि तू कहाँ जाएगा इस समय. वो तेरे बेकार के दोस्तों के साथ बैठ के गप्पें हाँकेगा. अभी मुझे एक बात पुच्छनी है तुझसे ? वो बता दे और फिर चले जइयो. '' कम्मो ने उसका हाथ पकड़ लिया और उसे बिठा लिया. हाथ पकड़ते ही कम्मो को कुच्छ होने लगा. रमेश का हाथ बहुत बड़ा और कठोर था.

'' ये बता कि तेरे भाई ने तुझे कहा कि तुझे कुच्छ करने की ज़रूरत नही होगी.. तो क्या तुझे लगता है कि सब कुच्छ तेरी लुगाई करेगी ? तू कुच्छ नही करेगा ? '' कम्मो उसके हाथ को सहला रही थी.

'' चाची मुझे लगता है कि वो ही करेगी. भैया ने कहा कि मैं ना करूँ तो इसका मतल्ब तो लुगाई ही करेगी..अब क्या करेगी ये नही पता.'' रमेश के कछे में तनाव बन रहा था.

'' अच्छा चल ठीक है अगर ऐसा है तो एक काम करते हैं. तू मुझे अपनी लुगाई समझ के अपनी छाती से लगा और फिर देखते हैं कि बिना तेरे कुच्छ किए क्या होता है. '' कम्मो थोड़ा खिसक के रमेश से सॅट के बैठ गई. उसे थोड़ा मुड़ना पड़ा रमेश की तरफ जिससे उसके सूट का भीगा हुआ हिस्सा रमेश के दाहिने हाथ की साइड पे था.

'' चाची आप मेरी लुगाई थोड़े हो..आप तो चाची हो और आपको कैसे लगाऊ अपनी छाती से. क्या चाची आप मुझे शर्मिंदा ना करो...''

''' अर्रे मेरे भोले भतीजे अगर मैने तुझे कुच्छ सीखा दिया तो इसमे ग़लत क्या है ...चाची हूँ मुँह बोली कोई सग़ी थोड़े ही हूँ. चल अब नखरा छोड़ और ले मुझे अपनी बाहों में. फिर देखते हैं क्या होता है...'' कम्मो मुस्कुराते हुए बोली. उसका हाथ बड़ी नर्मी से रमेश के बालों में फिर रहा था.

रमेश ने सिर झुकाए हुए कम्मो की चूचिओ को देखा और फिर उसे धीरे से कंधों से पकड़ के अपनी छाती से लगा लिया. कम्मो उस पोज़िशन में जितना अपने को रमेश से चिपका सकती थी चिपकाने लगी. उसने रमेश की पीठ पर अपनी बाहें कस दी और रमेश ने उसकी कमर के आसपास उसे पकड़ा हुआ था.
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09-03-2018, 08:58 PM,
#20
RE: Rishton Mai Chudai खानदानी चुदाई का सिलसिला
दोनो बदन में एक अजीब सी गर्मी हो चुकी थी. रमेश को समझ नही आ रहा था कि वो आगे क्या करे. उसके हाथ कम्मो की कमर पे थे और उसे अपनी बालों वाली छाती में कम्मो के चूचक चुभ रहे थे. उसका मन कर रहा था कि वो कम्मो को ज़ोर से जाकड़ ले और उसे अपने शरीर से चिपका ले. पर उसे अपने भाई की कही बात याद आ रही थी कि उसे कुच्छ करने की ज़रूरत नही तो वो थोड़ा कंट्रोल करता रहा. कम्मो ने भी कुच्छ नही किया बस उससे चिपकी रही और मन ही मन उसकी उलझन पे मुस्कुराती रही. इसी पोज़ में करीब आधा मिनिट हो गया दोनो को.

रमेश का लंड अब कछे में ऐंठ रहा था. उसका मंन कर रहा था कि अपने लंड को हाथ में ले के मुठियाए. गाए/सांड़ को देख के वो अक्सर मुठियाता था. पर चाची के सामने सब कैसे करूँगा. यहाँ से निकलूं तो घर जाके करूँगा. उसे क्या पता था कि आज उसकी लॉटरी लगेगी. कम्मो ने जान भूज के कुच्छ नही किया और कुच्छ सेकेंड के बाद उससे अलग हो गई.

'' अब बोल तू ..क्या हुआ ..क्या मैने कुच्छ किया. नही ना ..अर्रे रमेश तेरा भाई बहुत निक्कमा है जो तुझे ठीक से समझाया नही. तुझे लगता है कि मैं ये करके खुश हो गई ? तेरी लुगाई इससे खुश हो जाएगी ? बोल...'' कम्मो ने रमेश के गालों पे एक हल्की सी चपत दी.

'' नही चाची मुझे नही लगता कि वो इससे खुश होगी.. अब भैया ने जितना कहा मैने आपके साथ किया. आगे मुझे नही आता...आप ही बताओ क्या क्या करना होगा मुझे.'' रमेश परेशान था और उसकी परेशानी सॉफ झलक रही थी. उसका लंड उसे दिक्कत दे रहा था और कछे में तंबू बन चुका था.

'' चल आजा मैं तुझे सिखाती हूँ सब कि एक औरत को क्या क्या चाहिए. आजा मेरे भतीजे आज मैं तेरी लुगाई बन जाती हूँ. '' ये कहते हुए कम्मो उठी और उसका हाथ पकड़ के अपने कमरे में ले गई.

कमरे में डबल बेड पे पहुँच के कम्मो ने उसे बिठा दिया. '' अब जो जो मैं कहूँगी तू करता जा और सीखता रह.'' कहते हुए कम्मो एक चुन्नी ले आई, दरवाज़ा बंद की और बत्ती जला दी और अपने सिर पे लेके एक नई दुल्हन की तरह बेड पे जाके बैठ गई. दोनो हाथ उसके मुड़े हुए घुटनो पे थे. उसने अपनी चुन्नी से घूँघट बना के अपना चेहरा च्छूपा लिया.

'' चल अब मेरे नज़दीक आ और मेरा घूघत उठा. और फिर मेरे चेहरे को अपने हाथों में पकड़.''
'' अब मेरे माथे को चूम और मेरी बंद आँखों को... अब मेरे गालों को सहला और मेरी चुन्नी मेरे शरीर से अलग कर दे.''
'' अब मेरी ठोडी को पकड़ के मेरे चेहरे को उपर उठा और उसे देख और फिर मेरे होठों पे अपने होंठ लगा.''
रमेश के होंठ अपने होठों पे लगते ही कम्मो के शरीर में आग लग गई. रमेश भी पागल हो गया और आव ना देखा ताव उसे बेतहाशा चूमने लगा. कम्मो को अब नई दुल्हन बन के नही रहना था. उसने लाज शरम सब छोड़ दी और रमेश को अपने गले से लगा दिया. रमेश उसकी गर्दन गाल और चेहरे को चूमे जा रहा था.

दोनो अब गरम चुके थे. कम्मो बिस्तर पे लेट गई और रमेश को अपने उपर खींच लिया. फिर रमेश का चेहरा पकड़ के उसके होंठो को चूसने लगी और अपनी जीभ उसके मुँह में घुसा दी. कम्मो की जीब मुँह में घुसते ही रमेश की लार टपकने लगी और उसका थूक बाहर निकल आया. कम्मो के होंठ और आस पास का हिस्सा उसके थूक से भर गया.


रमेश के हाथ अब कम्मो की चूचियो पे थे. वो उन्हे ज़ोर ज़ोर से दबा रहा था. कम्मो ने उसे एक धक्का दिया और उसे बिस्तेर पे चित कर दिया. कम्मो उसकी कमर के आस पास पैर करके बैठ गई और अपनी कमीज़ उतार दी. अपने मोटे गथीले मम्मो को पकड़ के ज़ोर से दबाया और फिर अपने निपल खींच के लंबे किए. रमेश का हाथ उसके पेट पे चल रहा था. कम्मो ने आगे झुक के रमेश के मुँह से मुँह लगाया और उसके मुँह में थूका. फिर उसके मुँह में अपनी चूची लगा दी. रमेश हवस में पागल हो चुका था. उसे चूची का स्वाद बहुत मज़ेदार लगा और बेसब्र होके उसे चूसने लगा. उसने दोनो मम्मो को साइड से पकड़ लिया और बीच की तरफ भींचने लगा. दोनो निपल उसके मुँह के सामने थे और उसने एक साथ दोनो निपल को मुँह में भर लिया. कम्मो की सिसकी निकल गई. आज तक दोनो निपल एक साथ किसी ने नही चूस थे. उसकी चूत पनिया गई थी.

कम्मो ने और देर नही की और रमेश को नंगा करने लगी. रमेश का पाजामा उतरते ही उसने उसने लोडा मुँह में भर लिया. रमेश का लंड करीब 7 - 8 इंच का था. शुपाडे पे प्री कम लगा था. लंड की चॅम्डी ने सुपादे को आधा ढक्का हुआ था. हाथ से मुठियाते हुए कम्मो ने लंड को अपनी जीभ से चॅटा और फिर जीभ से लंड को मारने लगी. रमेश के मुँह से सिसकियाँ निकली और उसने गांद उठा के अपना लंड कम्मो के मुँह में धकेला. कम्मो गुप्प से लंड को 4 - 5 इंच अपने मुँह में ले गई और उसपे थूक उदेलने लगी. उसके हाथ रमेश की जांघों और टट्टों से खेल रहे थे. रमेश अपने बाल सॉफ नही करता था. उसके लंड और टट्टों से पसीने की हल्की स्मेल आ रही थी. कम्मो ने बहुत दिन के बाद एक अच्छा तगड़ा मूसल मुँह में लिया था. उस मादक गंध से वो पागल हुई जा रही थी और उसके सब्र के बाँध टूट रहे थे.
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