Porn Hindi Kahani जाल
11-03-2018, 02:10 AM,
#81
RE: Porn Hindi Kahani जाल
जाल पार्ट--82

गतान्क से आगे......

"क्या बात है,रंभा?",उसना दाया हाथ रंभा के दाए कंधे पे रखा,"..मेरी बात बुरी लगी तो माफी चाहता हू."

"ऐसी बातो का क्या फायडा,शाह साहब जब ये जिस नज़म तक हमे ले जाती हैं मैं वाहा जा नही सकती.",रंभा ने आधा जिस्म घुमाया & उदासी से बोली.

"मगर क्यू नही जा सकती?",शाह ने उसे अपनी ओर पूरा घुमाया & उसके दोनो कंधो पे अपने हाथ जमा दिए,"..मैं तुम्हारे लायक नही क्या इसीलिए?"

"नही-2..",रंभा ने परेशान हो उसकी तरफ देखा,"..ये बात नही पर..",उसने बात अधूरी छ्चोड़ फिर से नज़रे झुका ली.

"तो क्या बात है?!",शाह ने उसे झकझोरा.

"मुझे..मुझे डर लगता है.",रंभा ने धीमी आवाज़ मे कहा.

"किस बात से डर लगता है?"

"कही किसी को पता चल गया तो?",रंभा ने उसकी ओर परेशान निगाहो से देखा.

"तो?!..तो अच्छा होगा..फिर मैं हमेशा तुम्हारे साथ रह सकता हू.",शाह ने उसके हाथ थाम लिए.

"पागल मत बानिए.मैं शादीशुदा हू."

"जो आदमी तुम्हारी कद्र नही करता,तुम्हे छ्चोड़ किसी और की बाहो मे घुसा रहता है,उसके चलते तुम मेरी मोहब्बत ठुकरा रही हो!",रंभा ने उसे ऐसे देखा जैसे उसे हैरत हुई हो कि शाह को कैसे पता चला समीर की हर्कतो के बारे मे,"हां,मुझे पता है सब कुच्छ.अब बताओ,उस इंसान के लिए तुम ना बोल रही हो?"

"नही..",रंभा बहुत पशोपेश मे होने का नाटक कर रही थी,"..देखिए शाह साहब,आप प्रणव को जानते है ना?"

"हां."

"तो मैं और वो..",रंभा ने फिर नज़रे नीची कर ली.

"हां तो क्या हुआ?",रंभा ने जैसे सोचा था गुफ्तगू वैसे ही आगे बढ़ रही थी.

"तो अब आपके साथ ये सब..शाह साहब,कल को समीर और मैं अलग हो जाएँगे तब मेरा क्या होगा?..क्या मैं प्रणव से लेके आपके बिस्तर तक घूमती रहूंगी?..यही वजूद रह जाएगा मेरा?!",रंभा की आँखो मे गुस्से के साथ-2 पानी छल्छला आया था.

"नही,ऐसा नही होगा.",शाह बहुत गंभीर आवाज़ मे बोला,"..मुझे पता है तुम्हारे & प्रणव के बारे मे.तुम किसके साथ क्या रिश्ता रखती हो,ये तुम्हारा फ़ैसला होगा मगर अगर तुम चाहोगी तो..",शाह के दिमाग़ मे रंभा की बात से बिजली कौंधी थी-अगर रंभा मान गयी तो उसे प्रणव या किसी और की कोई ज़रूरत नही रहेगी & उसका काम भी हो जाएगा,"..महादेव शाह ये वादा करता है कि तुम्हे अपनी दुल्हन बनाएगा & अपनी आख़िरी सांस तक तुम्हारे साथ रहेगा."..हां..हां..जब करोड़ो के शेर्स लेके दहेज मे आऊँगी तो दुल्हन तो बनाओगे ही!..रंभा ने मन ही मन सोचा.

"आप..आप मुझे बहला रहे हैं.",उसने काँपती आवाज़ मे कहा.

"हां,मेरा फ़र्ज़ है कि तुम परेशान हो तो तुम्हे बहलाउ लेकिन मैने जो कहा है वो बिल्कुल सच है.चाहो तो आज़मा लेना मुझे.समीर तुम्हे छ्चोड़ेगा & तुम चाहोगी तो मैं तुमसे शादी कर लूँगा."

"महादेव..",रंभा ने काँपते होंठो से बोला & फिर सुबक्ते हुए हाथ छुड़ा के घूम के अपनी पीठ शाह की ओर कर ली..उसकी चाल काम कर गयी थी..अब उसे पता चल सकता था कि कही विजयंत मेहरा के हाल के पीछे इन दोनो का हाथ तो नही था.

शाह जानता था कि मच्चली अब जाल मे फँस चुकी है.उसने रंभा के कंधे पकड़ उसे अपनी ओर घुमाया & अपने आगोश मे भर लिया.रंभा कुच्छ देर उसके सीने पे हाथ रखे मुँह च्छुपाए सिसकने का नाटक करती रही & फिर खामोश हो गयी.शाह उसकी नंगी पीठ सहलाए जा रहा था & जब उसने देखा की उसकी सिसकिया रुक गयी है तो उसने दाए हाथ से उसकी ठुड्डी पकड़ उसका चेहरा उपर किया.

"तुम्हे पहली बार देखा था तब से तुम्हे पाने की हसरत थी.आज भी यही सोच के तुम्हे दावत दी थी कि शायद मेरी किस्मत मेहेरबान हो जाए.",वो उसकी काली आँखो मे झाँक रहा था,"..& किस्मत मेहेरबान हुई भी तो किस तरह,कहा मुझे बस तुम्हारे साथ बस 1 रात की चाह थी & तुमने अपनी तमाम राते मेरे नाम कर दी.",..कितना शातिर शख्स था?!..& बातो का जाल बुनने मे माहिर..ना जाने आज तक कितनी लड़कियो को इसने इस तरह फाँसा होगा!..2 घंटे भी नही हुए मिले हुए & मुझसे शादी के लिए हां भी करवा ली इसने..तुम इसी बदगुमानी मे रहो,मिस्टर.शाह & देखो मैं तुम्हे कैसे मज़ा चखाती हू!

शाह झुका & रंभा के होंठो से पानी की बूंदे चखने लगा.रंभा ने शर्मा के मुँह बाई तरफ फेरा मगर शाह के हाथ ने उसके गाल को थाम 1 बार फिर उसके चेहरे को अपने सामने किया & इस बार दोनो हाथो मे उसके चेहरे को थाम उसके होंठो को अपने होंठो से सटने पे मजबूर कर दिया.रंभा अपने होठ नही खोल रही थी & बस शाह को उन्हे चूमने दे रही थी मगर थोड़ी देर बाद शाह की ज़ुबान ने इसरार कर-2 के उसके होंठो को खुलवा ही लिया & फिर उसके मुँह मे घुस उसकी ज़ुबान को प्यार करने लगी.

अगर शाह शातिर था तो रंभा भी जिस्मो के खेल की माहिर थी.शुरू मे शरमाती रंभा ने अब ये जताया कि शाह के होंठो ने उसे मस्त कर दिया है & अब वो अपनी शर्मोहाया भूल रही है.उसने अपने हाथ शाह के कंधो पे जमा दिए & उसकी किस का जवाब देने लगी.शाह के हाथ पानी के नीचे उसकी नंगी पीठ को सहला रहे थे.

रंभा 1 भोली-भाली लड़की का नाटक कर रही थी मगर उसे मज़ा बहुत आ रहा था.शाह ने चूमते हुए हाथो का दबाव बढ़ाया & रंभा को खुद से सटा लिया.उसका खड़ा लंड रंभा के पेट पे दब गया तो रंभा की चूत मे भी कसक उठने लगी.ठंडे पानी मे शाह के जिस्म का गर्म एहसास उसे रोमांच से भर रहा था.काफ़ी देर बाद रंभा ने सांस लेने के लिए होंठ लगा किए तो शाह ने उसके खूबसूरत चेहरे पे किस्सस की झड़ी लगा दी.

"छ्चोड़िए ना!..कही कोई आ गया तो?",रंभा ने उसे शरमाते हुए परे धकेलने की नाकाम कोशिश की.

"यहा कौन आएगा?",शाह उसके गाल चूमते हुए उसकी गर्दन पे गया था & उसकी कमर के मांसल हिस्सो को दबा रहा था.

"कोई नौकर..& वो आपका ड्राइवर..आहह..!",शाह ने उसके क्लीवेज पे अपने तपते होंठ रख दिए थे.

"मैने सबको घर से बाहर भेज दिया है.मैं तुम्हारे साथ 1-1 पल का भरपूर लुत्फ़ उठाना चाहता हू.",शाह ने उसे खुद से बिल्कुल चिपका लिया तो रंभा भी मस्ती मे भर गयी & अपनी आँखे बंद कर ली & उसकी हर्कतो का मज़ा लेने लगी.शाह उसके पूरे जिस्म को च्छुना चाहता था,चूमना चाहता था मगर पूल मे ये मुमकिन नही था.उसने रंभा को उठाया & पूल से निकाल के फर्श पे लिटा दिया.वो बुड्ढ़ा था मगर कमज़ोर नही.रंभा उसकी इस हरकत पे खुश हुई-शाह मे दम-खाँ था & रंभा को बिस्तर मे उस से खुश होने का नाटक नही करना पड़ेगा बल्कि बहुत मुमकिन था कि शाह उसे भरपूर मज़ा दे.

अब रंभा ज़मीन पे लेटी थी & शाह पूल मे खड़े-2 ही उसके होंठ चूम रहा था & उसके स्विमस्यूट से ढँके पेट को सहला रहा था.रंभा दाए हाथ से उसके सर को थामे थी & बाए को उसके पेट पे चलते हाथ के उपर रखे थी.शाह ने उसके होंठो को छ्चोड़ा & फिर उसके बाए हाथ को थाम उसकी गुदाज़ बाँह को चूमने लगा.उसकी दोनो बाहो को चूमने के बाद उसने रंभा को पलटा & पूल से निकल घुटनो पे बैठ उसकी गीली पीठ को अपने गर्म लबो से सुखाने लगा.रंभा उसके चूमने से कांप रही थी & उसकी पीठ की थरथराहट देख शाह भी जोश मे पागल हुआ जा रहा था.उसने स्विमस्यूट के स्ट्रॅप्स उसके कंधो से सरकाए & रंभा को घुमा के सीधा किया.

रंभा अब थोड़ी घबराई निगाहो से उसे देख रही थी & उसने अपने हाथ अपने सीने पे रख लिए थे.शाह की आँखो मे वासना थी.रंभा का उभरा सीना जिस तरह से उपर-नीचे हो रहा था & घबराते हुए उसने जिस तरह उसे च्छुपाया था-ये सब उसके जोश को बढ़ा रहे थे.उसने मुस्कुराते हुए उसके हाथो को सीने से हटाया & उसके स्ट्रॅप्स को पूरा नीचे खिचते हुए उसके स्विमस्यूट को उसकी कमर तक कर दिया.सामने का नज़ारा देख शाह का हलक सुख गया.वो जानता था कि रंभा बेहद हसीन है मगर उसका जिस्म इतना नशीला,इतना दिलकश होगा,इसका अंदाज़ा उसे नही था.रंभा की गोरी,मोटी छातियाँ उसके सामने उपर-नीचे हो रही थी,उनके गुलाबी निपल्स बिल्कुल कड़े उसे अपनी ओर बुलाते दिख रहे थे.उसका सपाट पेट थरथरा रहा था & उसके बीच उसकी गोल,गहरी नाभि जैसे उसकी ज़ुबान के इंतेज़ार मे ही थी.

घुटनो पे बैठ के महादेव शाह ने रंभा की छातियो को अपने हाथो से हल्के से दबाया तो उसके मुँह से आह निकल गयी & उसने अपनी छातियो पे दबे उसके दोनो हाथो को पकड़ लिया.शाह ने उसके हाथो को उठाके चूमा & फिर उन्हे उसके सर के उपर ले जाते हुए ज़मीन से लगाया & फिर रंभा के दाई तरफ लेट गया & अपने बाए हाथो मे उसके दोनो हाथो को पकड़ के उसके सीने पे झुक गया.उसने दाए हाथ मे उसकी बाई चूची को भरा & अपने मुँह को उसकी दाई चूची से लगा दिया.

बुंगले का वो खुला हिस्सा रंभा की मस्त आहो से गुलज़ार हो गया.शाह उसकी 1 चूची को मसलते हुए दूसरी को चूस रहा था.रंभा का दिल तो कर रहा था की उसके बालो को नोचे,उसकी पीठ को खरोन्चे मगर उसके हाथ शाह की गिरफ़्त मे थे & वो बेबस थी लेकिन ये बेबसी भी उसे अलग ही मज़ा दे रही थी.शाह तो उसकी चूचियो को देख पागल हो गया था.वो उन्हे पूरा का पूरा मुँह मे भर चूस रहा था & बीच-2 मे हल्के-2 दन्तो से काट भी रहा था.उसके निपल्स को वो दन्तो मे पकड़ उपर खींचता तो रंभा को हल्का दर्द होता मगर उस से भी कही ज़्यादा मस्ती का एहसास होता.

वो च्चटपटा रही थी & अपनी कसी जंघे आपस मे रगड़ रही थी.उसकी चूत की कसमसाहट अब बहुत बढ़ गयी थी.शाह उसके निपल्स को उंगलियो मे पकड़ के मसलते हुए चूचियो के उभारो के नीचे चूम रहा था & जीभ से छेड़ रहा था.उसने दोनो चूचियो के बीच मुँह घुसा के रगड़ा & वाहा भी चूसने लगा.वो रंभा के सीने पे अपने होंठो & दन्तो के निशान छ्चोड़ते जा रहा था & रंभा अब मस्ती मे सुबक्ते हुए च्चटपटा रही थी.उसकी चूत की कसक बहुत ज़्यादा बढ़ गयी थी & उसने बेचैन हो अपनी कमर उचकानी शुरू कर दी & बहुत जोरो से सिसकने लगी.शाह समझ गया कि वो झड़ने वाली है & उसने उसकी चूचियो को चूसना & तेज़ कर दिया अगले ही पल रंभा सिसकते हुए झाड़ गयी.

शाह ने उसके हाथ छ्चोड़े तो रंभा ने उसकी गर्दन को पकड़ उसे नीचे खीचा & उसे बड़ी शिद्दत से चूमने लगी.शाह केवल बाते बनाना ही नही जानता था वो 1 लड़की के जिस्म से खेल उसे खुश करना भी जानता था.रंभा ने उसके मुँह मे ज़ुबान घुसाई & फिर उसकी ज़ुबान को जम के चूसा.

काफ़ी देर तक चूमने के बाद शाह ने उसके होंठ छ्चोड़े & दोनो चूचियो पे 1-1 किस दी.उसके बाद वो नीचे गया & उसके गोरे पेट को चूमने लगा.रंभा जैसी हसीन लड़की से वो आज तक नही मिला था & उसके नशीले जिस्म के साथ खेलना उसके लिए बिल्कुल अनोखा & रोमांचकारी एहसास था.

रंभा 1 बार फिर आहे भरती हुई कसमसाने लगी थी.शाह की ज़ुबान उसके पेट को अपनी नोक से छेड़ते हुए उसकी नाभि मे उतर गयी थी & उसे चाट रही थी.रंभा उसके सर को पकड़े बेचैनी से अपने पेट से अलग करना चाह रही थी.उसकी ज़ुबान की हरकते उसे पागल कर रही थी मगर शाह भी उसके हाथो की परवाह ना करता हुआ उसके पेट पे जुटा हुआ था.जब रंभा 1 बार फिर मस्ती मे नही डूब गयी शाह ने उसकी नाभि से जीभ नही निकाली.

रंभा अब नशीली आँखो से उसे देख रही थी.उसका दिल कर रहा था की जल्दी से वो उसकी बिकिनी को उतारे & उसकी प्यासी चूत को प्यार करे.शाह ने उसके पेट से सर उठाया & उसकी तरफ देखा & जैसे उसकी आँखो मे झलक रही उसकी हसरत को पढ़ लिया.उसने उसकी कमर पे अटकी बिकिनी को नीचे खींचा तो रंभा ने अपनी गंद उठा दी.अगले ही पल वो अपने नये प्रेमी के सामने बिल्कुल नंगी थी.

रंभा के हाथ 1 बार फिर उसके सीने पे आ गये थे & वो बस शाह की अगली हरकत का इंतेज़ार कर रही थी.शाह ने उसकी चूत को देखा-ऐसी चिकनी,गुलाबी,नाज़ुक & कसी चूत उसने अपनी ज़िंदगी मे पहले कभी नही देखी थी.आज वो इस से जी भर के खेलेगा मगर उस से पहले उसे उसकी जाँघो & टाँगो का स्वाद चखना था जिन्होने शाम से ही लुभा & ललचा के उसका बुरा हाल किया हुआ था.

उसने रंभा की जाँघो को सहलाया तो उसने अपने घुटने उपर मोड़ दिए.शाह उसके उठे डाए घुटने को चूमने लगा & उसके हाथ रंभा की टांगो से लेके जाँघो के अन्द्रुनि हिस्सो पे घूमने लगे.रंभा च्चटपतती हुई अपने बालो से खेलते हुए आहे भर रही थी & अपनी जाँघो को आपस मे रगड़ अपनी चूत को शांत करने की कोशिश कर रही थी.

शाह उसके घुटने से नीचे उसकी मोटी जाँघ पे आया & चूमने के साथ-2 उसकी गुदाज़ जाँघ को चूसने भी लगा.रंभा तो मस्ती मे पागल ही हो गयी.शाह तुरंत अपने घुटनो पे बैठ गया & उसकी दाई टांग को हवा मे उठा दिया & फिर उसकी जाँघ के निचले हिस्से को चूमने,चाटने लगा.रंभा ने बाया हाथ बढ़ा उसके बाल पकड़ लिए & नोचने लगी.

आसमान के सितारे शाह की किस्मत से रश्क कर रहे थे & चाँद रंभा के हुस्न को देख जल गया & कुच्छ बादलो के पीछे च्छूप गया.ठंडी हवा के झोंके ने रंभा के जिस्म को कंपा दिया मगर शाह की हर्कतो ने उसके बदन की गर्मी को बढ़ाए रखा था.

शाह ने उसकी जाँघ चूमते हुए उसके नीचे हाथ लगा उसे पलट दिया & फिर उसकी चौड़ी गंद पे हाथ फिराने लगा.उसने उसकी गंद पे हल्की-2 च्पते लगानी शुरू की & उन चपतो पे जिस दिलकश अंदाज़ मे वो थरथराती,उसे देख उसका लंड उसके ट्रंक्स मे & कुलबुलाने लगा.शाह झुका & उसकी कमर के मांसल हिस्सो को दबाते हुए उसकी गंद की फांको को चूमने लगा.रंभा अपनी कोहनियो पे उचक अपने सर को झटकती आहे भरने लगी.

शाह उसकी फांको को भींचते हुए चूम रहा था & उसकी छातियो की तरह यहा भी अपने दन्तो से हल्के-2 काट रहा था.रंभा की मस्ती बा बहुत बढ़ गयी थी & उसने कमर हिला पानी चूत को ठंडी ज़मीन पे दबा उसका इज़हार किया.शाह भी जाल मे ताज़ा-2 फँसी मच्चली की च्चटपटाहत देख उसकी बेचैनी का सबब समझ गया & उसने उसे पलट के सीधा किया & उसकी टाँगे खोल दी.

रंभा की चूत से बहता रस उसकी जाँघो पे टपक आया था.उसने पहले उसकी जाँघो से उसे सॉफ किया & फिर उसकी गुलाबी चूत मे अपनी ज़ुबान उतार उसे सुड़कने लगा.रंभा की टाँगे अपने-आप हवा मे उठ गयी & वो उसके सर को पकड़ अपनी चूत पे भींचती,कमर उचकती चीखने लगी.शाह उसकी गंद के नीचे हाथ लगाए उसे हवा मे उठाके उसकी चूत को ज़ोर-2 से अपनी लपलपाति जीभ से चाट रहा था.रंभा के जिस्म मे बिजली दौड़ रही थी.उसने शाह के बाल पकड़ के उसे अपनी चूत पे बहुत ज़ोर से दबाते हुए कमर उचकाई & झाड़ गयी.काफ़ी देर तक रंभा झड़ने की खुमारी मे सिसकती रही & शाह भी उसकी चूत चाटता रहा.जब उसकी सिसकिया रुकी तो शाह उपर आया & उसे चूमने लगा.रंभा ने भी उसे बाँहो मे भर लिया & चूमने मे उसका साथ देने लगी.इस वक़्त शाह शक़ के दायरे मे खड़ा शख्स नही बस 1 मर्द था जो उसे भरपूर जिस्मानी खुशी से रूबरू करवा रहा था.

शाह ने किस तोड़ी & उसे अपनी बाहो मे उठा लिया.रंभा ने अपनी बाँहे उसके गले मे डाल दी & उसे चूमने लगी.शाह उसे लेके बंगल के अंदर अपने बेडरूम मे ले आया & बिस्तर पे लिटा दिया.

रंभा उस आलीशान बेडरूम को देखने लगी.कमरे की 1 दीवार पे बड़ा सा आईना लगा था जोकि दर-असल उसके पार बाथरूम का दरवाज़ा था.जिस पलंग पे रंभा लेटी थी वो बहुत बड़ा था & उसपे मखमली चादर बिछि थी जिसका मुलायम एहसास उसके रूमानी ख़यालो को & भड़का रहा था.कमरे की सजावट देख के ही लगता था कि शाह बहुत रंगीन मिजाज़ आदमी है & इस बिस्तर पे उसने कयि लड़कियो को चोदा होगा.

रंभा ने दाई तरफ लगे बड़े शीशे मे देखा तो पाया की बिस्तर पे की जाने वाली 1-1 हरकत उसमे सॉफ दिखती थी.उसका दिल खुद को शाह की बाहो मे उस से चुद्ते देखने के ख़याल से ही मस्ती मे भर उठा.शाह उसे देखते हुए मुस्कुरा रहा था.जवाब मे रंभा भी मुस्कुराइ तो शाह उसके सर के पास आ खड़ा हुआ.

उसने रंभा की आँखो मे देखते हुए उसका दाया हाथ पकड़ के अपने स्विम्मिंग ट्रंक्स पे रखा तो रंभा ने हाथ पीछे खींचने की कोशिश करते हुए शरमाने का नाटक करते हुए आँखे बंद कर ली जबकि उसका दिल तो बड़ी देर से शाह के लंड को देखने के लिए मचल रहा था.

शाह ने उसके हाथ को पकड़ के अपनी ब्रीफ पे दबाया & वही पकड़े रखा.रंभा वैसे ही आँखे बंद किए गर्दन घुमाए पड़ी रही.शाह ने दूसरे हाथ से अपने ट्रंक्स नीचे सरकाए & अपना नंगा लंड रंभा के हाथ मे थमाया & फिर उसकी ठुड्डी पकड़ चेहरा अपनी ओर किया,"ज़रा देखो तो जान कैसे पागल हो रहा है ये तुम्हारे लिए."

"उन..हूँ..मुझे शर्म आती है.",रंभा ने मुँह फेर लिया & बया हाथ अपने चेहरे पे रख अपनी हया का इज़हार किया.शाह घुटनो के बल बिस्तर पे चढ़ा & अपना लंड उसके चेहरे के बिल्कुल करीब ले गया & उसका चेहरा फिर अपनी ओर घुमाया.

"बस 1 बार देख तो लो इसे.",थोड़ी मान-मनुहार के बाद रंभा ने अपनी आँखे खोली & शाह के लंड को देखा.शाह का लंड 9 इंच लंबा था.हाथो मे लेते ही रंभा को उसकी मोटाई का एहसास हो गया था मगर आँखे खोलने पे जब उसने उसे देखा तो उसकी आँखे हैरत से फैल गयी.इतना मोटा लंड ना तो देवेन का था ना ही विजयंत मेहरा का,"कैसा लगा?",रंभा उसके सवाल पे शरमाते हुए मुस्कुराइ & हाथ लंड से खींचने लगी मगर शाह ने उसे ऐसा नही करने दिया.

"क्या हुआ पसंद नही आया,जान?",शाह के सवाल पे रंभा ने & शरमाने का नाटक किया.शाह उसकी इन अदाओं से जोश मे पागल हो गया था,"..अब तो ये सिर्फ़ तुम्हारा है,मेरी रानी!",उसकी आवाज़ बिल्कुल जोश से भरी हुई थी,"इसे प्यार तो करो.",उसने रंभा का चेहरा थाम लंड को आगे ला उसके गाल से सताया.

"धात!",रंभा ने शरमाते हुए उसे झिड़का मगर लंड के चेहरे से सताते ही वो उसे मुँह मे भरने को पागल हो उठी थी.शाह झुका & उसे चूमा & फिर उसे लंड हिलाने को कहा.रंभा ने धीमे-2 लंड हिलाना शुरू किया तो शाह आहे भरने लगा.उसने रंभा का सर पकड़ा & फिर लंड को उसके होंठो पे रगड़ने लगा.रंभा ना-नुकर कर रही थी & उसकी शर्म,उसकी झिझक शाह की हवस की आग मे घी का काम कर रही थी.

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क्रमशः.......
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11-03-2018, 02:10 AM,
#82
RE: Porn Hindi Kahani जाल
जाल पार्ट--83

गतान्क से आगे......

महादेव शाह अपने दाए हाथ मे लंड को पकड़,बाए से रंभा की ठुड्डी थाम उसके गुलाबी होंठो पे अपने लंड को रगड़ रहा था.कुच्छ देर बाद रंभा ने अपने होंठ ज़रा से खोले & उसके सूपदे को चूमा.शाह खुशी से भर गया & उसने लंड को अंदर धकेला,रंभा ने सुपादे को मुँह मे भरा & & फिर चूमा.

"हां..जान..आहह..चूसो..इसे ..प्यार करो..रानी..ओह..!",शाह उसे बढ़ावा देते हुए लंड को उसके मुँह मे धकेल रहा था.थोड़ी देर मे आधा लंड रंभा के मुँह मे था & वो उसकी कमर पकड़े उसे चूस रही थी.शाह उसके सर को थामे उसकी ज़ुल्फो से खेलता खुशी से आहे भर रहा था.रंभा ने कुच्छ देर बाद उसके लंड को बाए हाथ मे थामा & हिलाते हुए उसके सूपदे को चाटने लगी.

शाह तो जैसे जन्नत मे पहुँच गया था.उसे उम्मीद नही थी कि ये लड़की इतनी मस्त होगी.वो उसके आंडो को दबाते हुए लंड को चाट रही थी,उसकी झांतो मे नाक घुसा के मुँह रगड़ रही थी.रंभा भी उस तगड़े लंड को देख जोश मे आ गयी थी.उसके नाज़ुक हाथ मे वो लंड & बड़ा लग रहा था & उसके ज़हन मे ये ख़याल आया कि उसकी कोमल चूत का वो क्या हाल करेगा & वो और मस्त हो गयी.

शाह ने दोनो के जिस्मो को इस तरह घुमाया कि वो शीशे मे रंभा को अपना लंड चूस्ता देख सके.रंभा के लिए भी इस तरह खुद को लंड चूस्ते देखना बड़ा मस्ताना तजुर्बा था.शाह तो पागल ही हो गया था.कुच्छ देर बाद रंभा ने उसका लंड छ्चोड़ दिया,"अब हो गया.",शरमाते हुए वो बिस्तर पेलेट गयी & अपना मुँह तकिये मे च्छूपा लिया.

शाह ने उसकी उभरी गंद को सहलाया तो वो चिहुनकि.शाह ने उसकी टाँगे पकड़ उसे खींचा & उसकी गंद को बिस्तर के किनारे से लगा के टाँगे हवा मे उठा दी.अब वक्त आ गया था उस नज़नीन के जिस्म के साथ मिल इस खेल के सबसे मस्त हिस्से को अंजाम दे भरपूर मज़ा पाने का.रंभा धड़कते दिल के साथ अधखुली आँखो से उसे देख रही थी.

शाह ने उसकी टाँगे उठा के उसकी जाँघो के निचले हिस्से को पकड़ उसकी चूत को बिल्कुल नुमाया किया & फिर लंड को चूत पे रख दिया.जैसे ही लंड चूत से सटा रंभा की कमर अपने आप उचकी मानो कह रही हो की लंड को फ़ौरन चूत मे घुसाओ!शाह ने उसकी जाँघो के निचले हिस्सो पे हथेलिया जमा के आगे झुकना शुरू किया & कमरे मे रंभा की आह गूँज उठी.

"आहह..!",मोटा लंड उसकी चूत को बुरी तरह फैला रहा था & वो दर्द & मज़े मे कराह रही थी.उसका जिस्म कमान की तरह मूड गया & उसने सर पीछे ले जाके आँखे बंद कर ली थी.शाह धीरे-2 लंड को जड तक उसकी चूत मे उतार रहा था & पूरा अंदर जाते ही वैसे ही उसकी जाँघो को पकड़ वो ज़ोर-2 से धक्के लगाने लगा.

रंभा मस्ती मे चीखने लगी.लंड उसकी चूत की दीवारो को बुरी तरह रगड़ रहा था & वो मस्ती मे कभी अपने बाल नोचती तो कभी शाह के सीने को कराह रही थी.शाह भी उसकी चूत की कसावट से हैरान हो गया था & उसके धक्के भी खुद बा खुद तेज़ हो गये थे.इतना मस्ताना एहसास आज तक किसी लड़की की चुदाई मे उसे नही हुआ था.

उसके दिल मे खुद को इस हुसनपरी को चोद्ते हुए देखने की ख्वाहिश जागी & उसने उसकी जंघे छ्चोड़ी & आगे झुक उसके उपर लेट गया & उसे चूमते हुए चोदने लगा 7 घुटनो के बल बिस्तर पे चढ़ गया.थोड़ी ही देर मे उसने खुद को रंभा के उपर बिस्तर पे इस तरह कर लिया था कि अगर वो बाए & रंभा दाए देखती तो शीशे मे अपनी चुदाई को सॉफ-2 देख सकती थी.

"देखो,मेरी बाहो मे तुम कितनी हसीन लग रही हो,मेरी जान!",शाह ने रंभा के होंठो को चूमा & धक्के लगाते हुए उसका सर दाई तरफ घुमा शीशे की ओर इशारा किया.रंभा ने देखा तो शीशे मे उसे शाह उसके बाए गाल पे अपना दाया गाल जमाए खुशी से भरा उसे चोद्ता दिखा.रंभा नम अपनी बाहे & टाँगे उसके जिस्म पे कस दी & उसकी पीठ नोचने लगी.उसकी मस्ती शीशे मे अपने प्रेमी & अपने अक्स को देख बहुत ज़्यादा बढ़ गयी थी.

"उउन्न्ञनह..महादेव....आननह..!",उसने उसकी गंद को नोचा & उसकी कमर पे टाँगे फँसाए कमर उचकाने लगी.वो पूरी तरह से मदहोश थी.शाह का लंड उसकी कोख पे चोट कर रहा था & वो अब बिकुल बहाल थी.अगले ही पल ज़ोर से चीख मारते वो झाड़ गयी मगर शाह का काम अभी ख़त्म नही हुआ था.

वो झुक के उसकी चूचियाँ अपने हाथो मे दबोच के पीने लगा.उसके धक्के अब धीमे मगर गहरे हो गये थे.रंभा हर धक्के पे कराह उठती.शाह चुदाई मे माहिर था & रंभा उसका भरपूर लुत्फ़ उठा रही थी.शाह उसके बदन से उपर उठ गया & अपने हाथो के सहारे टिक के धक्के लगाने लगा.

रंभा मस्ती मे बेचैन हो उसके सीने के बालो से खेलते हुए उसके निपल्स को छेड़ रही थी.उसके चेहरे पे बस मस्ती ही मस्ती दिख रही थी.उसकी चूत ने झाड़ते वक़्त जो मस्ताना हरकत की थी,शाह उस से खुशी से पागल हो गया था & उस वक़्त उसने दिल ही दिल मे 1 अहम फ़ैसला लिया था.अभी तक वो रंभा को बस 1 मोहरे की तरह इस्तेमाल करना चाह रहा था.उसके ज़रिए वो ट्रस्ट ग्रूप पे क़ब्ज़ा जमाके प्रणव & सारे मेहरा परिवार को किनारे करने की सोच रहा था.अभी भी वो रंभा के ज़रिए ही ग्रूप को हथियाने की सोच रहा था मगर अब किनारे करने वालो मे रंभा का नाम नही था.वो इस लड़की के हस,उसके जिस्म का दीवाना हो चुका था & अब वो उस से शादी कर उसके साथ अपनी बाकी की ज़िंदगी उसके पति & ट्रस्ट के मालिक के रूप मे गुज़रना चाहता था.

रंभा उसके सीने से लेके कंधो तक हाथ चलाते हुए उसके चेहरे को सहला रही थी.उसके हाथ शाह के बालो से खेलने के बाद उसके जिस्म की बगलो से नीचे सरकते & उसकी पुष्ट गंद को दबा लंड को & गहरे धक्के लगाने का इसरार करने लगते.रंभा का जिश्म कांप रहा था & उसके होंठ लरज रहे थे.वो शाह को चूमना चाहती थी & इसके लिए उसने उसकी गर्दन मे हाथ डाला & उचकने लगी.शाह उसकी हसरत समझ गया & उसके हाथ गर्दन से अलग कर घुटनो पे हो गया.

उसने रंभा की गुदाज़ बाहे पकड़ उसे उपर उठाया & अब वो घुटनो पे था & रंभा उसकी कमर पे टाँगे फँसाए उसकी गोद मे बैठ गयी.शाह उसकी मखमली पीठ सहलाते हुए धक्के लगा रहा था & वो उसके कंधो के उपर से बाहे ले जाते हुए उसकी पीठ नोचती मस्ती मे सूबक रही थी.शाह उसकी गंद की मोटी,कसी फांको को मसल रहा था.उसके अंदो मे अब हल्का-2 दर्द हो रहा था जोकि इस बात का इशारा था कि उसका लंड अब और बर्दाश्त करने की हालत मे नही था.

उसने अपने हाथ आगे लाए तो रंभा ने दाई बाँह उसकी गर्दन मे डाली & बाई पीछे ले जा हाथ बिस्तर पे टीका दिया & कमर हिलने लगी.शाह उसकी चूचियो को मसल्ते हुए चूस रहा था.रंभा 1 बार फिर मस्ती के उसी आलम मे पहुँच गयी थी जहा बस नशा ही नशा होता था.शाह ने उसकी चूचियो से खेलने के बाद 1 बार फिर अपने दोनो हाथ उसकी गंद की फांको के नीचे लगाए तो रंभा फिर से उसकी गर्दन मे बाहे डालते हुए उसकी पीठ खरोंछने लगी & कमर उचकाने लगी.

शाह उसे पागलो की तरह चूमने लगा & उसकी गंद मसलने लगा.रंभा के नाख़ून उसकी पीठ छेद रहे थे.उसकी चूत उसके लंड पे सिकुड-फैल रही थी & वो अब खुद पे और काबू नही रख सकता था.दोनो के होंठ आपस मे सिले हुए थे मगर फिर भी दोनो की आहे बाहर आ रही थी.तभी रंभा ने किस्स तोड़ी & उसकी बाहो के सहारे पीछे झुक गयी & ज़ोर से

चीखी.उसका जिस्म कांप रहा था & उसकी कमर बहुत तेज़ी से हिल रही थी.वो झाड़ रही थी & उसकी चूत ने शाह के लंड के उपऱ अपनी मस्तानी हर्कतो को और तेज़ कर दिया था.उसी वक़्त उस हरकत से बहाल शाह ने भी आह भरी & उसका जिस्म झटके खाने लगा.उसका लंड रंभा की चूत मे अपना गाढ़ा,गर्म वीर्य छ्चोड़े जा रहा था.रंभा ने वीर्य को सीधा अपनी कोख मे च्छूटता महसूस किया & सुबक्ते हुए उसके होंठो पे हल्की सी मुस्कान तेर गयी.ये देखा और शाह भी मुस्कुराया & लंबी-2 साँसे लेता हुआ उसने रंभा को बाहो मे भर लिया & दोनो सुकून से भरे जिस्म अपनी साँसे संभालने मे लग गये.

महादेव शाह रंभा के उपर से उतरते हुए दाई करवट पे हुआ तो उसका सिकुदा लंड रंभा की चूत से बाहर आ गया मगर शाह ने अपनी बाई टांग रंभा की जाँघो के बीच घुसाए रखी & उसे बाहो मे भर चूमने लगा.वो रंभा की गंद को बाए हाथ से दबाते हुए उसके दाए कंधे & गर्दन को चूमते हुए शीशे मे देख रहा था.रंभा ने उसकी ये हरकत पकड़ ली & फ़ौरन उसे धकेलते हुए उसके उपर से होती हुई बिस्तर की दूसरी तरफ अपनी दाई करवट पे आ गयी.

“अरे!क्या हुआ?”,शाह ने अपनी दाई टांग उसकी जाँघो के बीच घुसा दाए हाथ से उसकी बाई जाँघ को पकड़ अपनी कमर पे चढ़ाया & उसे सहलाने लगा.

“क्या देख रहे थे आप शीशे मे?”,रंभा ने बनावटी गुस्से से उसके सीने पे मारा.

“तुम्हारी गंद..”,शाह ने उसकी गंद की बाई फाँक को हाथ मे भर के दबाया,”..बहुत मस्त है!& क्या हुआ अगर देख रहा था तो?”

“मुझे अच्छा नही लगता.”,रंभा ने इतराते हुए कहा.

“अच्छा.क्यू?”,शाह का हाथ उसकी गंद से उसके चेहरे पे आ गया था.

“बस ऐसे ही..शर्म आती है.”,रंभा ने लजाने का नाटक करते हुए उसके कंधे मे मुँह च्छूपा लिया.शाह उसकी अदओ के जाल मे अब पूरी तरह फँस चुका था.उसे अब यकीन हो गया था कि रंभा उसपे पूरा भरोसा करने लगी है.उसका दिल खुशी से भर गया..अब ट्रस्ट ग्रूप उसके करीब आता दिख रहा था..जिस दिन ग्रूप उसके हाथ आ गया उस दिन उसका मक़सद पूरा होगा..उस दिन उसके सारे सपने हक़ीक़त मे बदल जाएँगे & फिर कोई जद्दोजहद भी नही रहेगी..फिर वो इस हसीना के साथ ज़िंदगी का भरपूर मज़ा उठाएगा!

“इस सब के बाद भी शर्म आ रही है?”,शाह ने उसके चेहरे को उपर किया & उसके सुर्ख लब चूम लिए.

“हूँ.”,रंभा के गाल मस्ती मे लाल हो रहे थे जिसे शाह उसकी हया समझ रहा था.शाह का लंड फिर से जागने लगा था.उसने रंभा की जाँघ पे हाथ चलते हुए उसके गालो को चूमना शुरू कर दिया.

“उउन्न्ञणन्..सुनिए..”,शाह ने उसकी आवाज़ नही सुनी.वो तो सर झुका के रंभा की चूचियाँ चूमने मे मशगूल था,”..महादेव..सुनिए ना..उउन्न्ञन्..”,रंभा ने उसके बाल पकड़ उसका मुँह अपने सीने से अलग किया & फिर उसे धकेल के बिस्तर पे लिटाया & उसके उपर चढ़ गयी & उसके सीने पे अपनी चूचियाँ दबाते हुए उसके गाल सहलाने लगी,”1 बात पुच्छू आपसे?”

“पुछो.”,शाह उसकी ज़ूल्फेन उसके चेहरे से हटा रहा था.

“आप अपने वादे से मुकरेंगे तो नही?”,रंभा चिंतित नज़र आ रही थी.

“तुम्हे भरोसा नही मुझपे?”,शाह उसकी गुदाज़ बाहें सहला रहा था.

“बात वो नही है पर..मैं 1 बार धोखा खा चुकी हू & अब..”,रंभा ने नज़रे नीची कर ली & शाह के सीने पे 1 उंगली चलाने लगी.

“कहो तो करारनामे पे दस्तख़त कर दू कि तुम ही मेरी दुल्हन बनोगी!”,शाह ने उसे पलटा & उसके उपर सवार हो उसकी आँखो मे झाँका.रंभा उसे खामोशी से देख रही थी..लगता तो था कि ये सच कह रहा है मगर इसका कोई भरोसा नही..पर अभी इसका यकीन करने के अलावा & कोई चारा नही था.

“आप तो बुरा मान गये..”,रंभा ने उसे दोबारा पलटा & उसके उपर आ उसे चूमने लगी,”..मेरी हालत भी तो समझिए..दूध का जला छाछ भी फूँक-2 के पीता है.”,उसके पूरे चेहरे को उसने अपनी किस्सस से ढँक दिया.

“बुरा तो लगा मुझे..”,शाह उसकी कमर सहला रहा था,”..मेरी सच्ची मोहब्बत पे शुबहा किया तुमने.”

“आइ’म सॉरी,डार्लिंग!”,रंभा उसे चूमते हुए उसके सीने पे आ गयी & उसके सीने के बालो मे उंगलिया फिराती उसके निपल्स को हौले-2 काटने लगी. शाह उसकी ज़ूलफे सहला रहा था.रंभा उसके सीने को चूमते हुए नीचे जा रही थी.शाह उसके इरादे को भाँप के खुश हो गया & उसकी उंगलिया रंभा की ज़ुल्फो से & गर्मजोशी से खेलने लगी.रंभा उसके पेट को चूमते हुए उसकी झांतो तक पहुँच चुकी थी,”आइन्दा कभी ये ग़लती नही करूँगी.आप मुझसे खफा मत होइए,प्लीज़!”,मासूमियत से कहते हुए उसने शाह के लंड को मुँह मे भर लिया.

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क्रमशः.......
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11-03-2018, 02:10 AM,
#83
RE: Porn Hindi Kahani जाल
जाल पार्ट--84

गतान्क से आगे......

“आ..आहह..!”,महादेव शाह की आँखे खुद बा खुद बंद हो गयी & वो सर पीछे कर आहे भरने लगा.रंभा उसके लंड को हाथो मे पकड़ हिला रही थी & उसके सूपदे को चाट रही थी.सूपड़ा दोनो के मिले-जुले रस से गीला था & रंभा को उसका स्वाद मस्त कर रहा था.रंभा ने अपनी ज़ुबान लंड की लंबाई पे फिराई,वो दाए हाथ की मुट्ठी बना लंड को उसमे जाकड़ रही थी मगर उसके अंगूठे & उंगलियो के बीच थोड़ा सा फासला रह रहा था जोकि शाह के लंड की मोटाई का सबूत था.रंभा का दिल 1 बार फिर शाह के मर्दाने अंग को अपनी चूत मे महसूस करने के लिए तड़प उठा.उसी वक़्त उसे देवेन की याद आई & उसे थोड़ी ग्लानि महसूस हुई.देवेन से मिलने के बाद,उसकी माशुका बनने के बाद उसे लगा था कि उसकी तलाश ख़त्म हो गयी थी और ऐसा था भी.वो अब और किसी के साथ ज़िंदगी बिताने की सोच भी नही सकती थी..लेकिन फिर शाह के साथ उसे इतना मज़ा क्यू आ रहा था..क्या आगे भी वो किसी और मर्द के साथ इसी गर्मजोशी से हुमबईस्तर होगी?..लेकिन क्यू?..वो तो देवेन को दिलोजान से चाहती है..फिर और मर्दो की उसे क्या ज़रूरत?..पर फिर शाह के लंड को वो इतनी खुशी से क्यू चूस रही है?..रंभा को उस वक़्त खुद के बारे मे 1 सच्चाई का एहसास हुआ..मैं देवेन को चाहती हू..दुनिया मे किसी भी इंसान से ज़्यादा पर मेरे जिस्म की खुशी भी उतनी ही ज़रूरी है & मैं उसके साथ कोई समझौता नही कर सकती..ये 1 मसला था जिस पर उसे देवेन के साथ बात करनी होगी..पर अभी नही..अभी तो उसके सामने इस शातिर इंसान का ये बहुत ही मस्ताना लंड था..रंभा ने उसे मुँह मे भर इतनी ज़ोर से चूसा की शाह आह भरता उठ बैठा.

उसने रंभा को उठाके अपनी गोद मे बिठाया तो रंभा ने भी अपने दोनो घुटने उसके जिस्म के दोनो ओर जमा दिए & उसके सर को थम लिया.शाह उसकी कमर को कसते हुए खुद से चिपका चूमने लगा.दोनो के हाथ 1 दूसरे के जिस्मो पे बेचैनी से फिसल रहे थे,उनके सिले होंठो के पीछे उनकी ज़ुबाने आपस मे गुत्तगुत्था थी & उनके नाज़ुक अंग आपस मे सटे मिलने की कसक से भरे हुए थे.शाह रंभा के रेशमी जिस्म को बाहो मे भर उसके नशे मे मदहोश हो रहा था & उसकी हर्कतो से उसकी बेचैनी,उसका जोश साफ झलक रहे थे.रंभा उसके जोशीले प्यार से मस्त हो गयी थी.उसका बदन मज़े की आस मे मचल रहा था.शाह के लिए रंभा का जवान जिस्म किस्मत से मिला वो तोहफा था जिसके साथ अब वो जी भर के खेलना चाहता था.

उसके हाथ रंभा की चूचियो से आ लगे & उन्हे दबाते हुए वो उन्हे चूसने लगा.ऐसा नही था की उसने कभी ऐसी बड़ी छातियो से नही खेला था मगर रंभा की चूचियो जैसी बड़ी मगर कसी & गोरी,रसीली चूचियो उसके लिए बिल्कुल ही नया तजुर्बा थी.वो उन मुलायम उभारो को गर्मजोशी से दबाता हुआ चूम & चूस रहा था & रंभा बस उसके सर को पकड़े मस्ती मे च्चटपटती आहें भर रही थी.शाह ने अपनी ज़ुबान से उसके दोनो निपल्स & अरेवला को छेड़ा तो वो सिहर उठी.उसकी चूत की कसक 1 बार फिर उसके सर चढ़ के बोल रही थी.अब तो बस उसे शाह का लंड चाहिए था अपनी चूत के अंदर.शाह ने उसकी चूचियो का जम के लुत्फ़ उठाने के बाद उसकी कमर को पकड़ उसके पेट को चूमा & फिर उसकी कमर पे अपना चेहरा रगड़ने लगा.

उसकी कमर को जाकड़ उसके बाई तरफ चूमते हुए शाह की निगाह उसकी गंद पे पड़ी तो उसने उसकी कमर के किनारे अपना चेहरा टीकाया & अपने हाथो मे उसकी मस्तानी गंद की कसी फांको को दबाने लगा.उसकी कमर चूमते हुए उसने उसकी गंद थपथपाई तो रंभा की आहो मे और इज़ाफ़ा हो गया.रंभा के शानदार जिस्म के इस क़ातिल अंग पे उसके हाथो की ताप से पैदा हुई दिलकश थरथराहट देख शाह के दिल मे उसके इस अंग का भरपूर लुत्फ़ उठाने की ख्वाहिश पैदा हो गयी.उसने सर रंभा के जिस्म के पीछे ले जाते हुए उसकी गंद की बाई फाँक को चूमना शुरू कर दिया तो रंभा आगे झुक गयी & सहारे के लिए शाह के पीछे पलंग के हेडबोर्ड को थाम लिया.वो भी शाह की नियत समझ गयी थी & उसकी धड़कने भी आने वाले गर्मागर्म पॅलो की मस्ती को सोच और तेज़ हो गयी थी.

शाह ने रंभा को बिस्तर पे उल्टा लिटा दिया & उसकी गंद को दीवानो की तरह प्यार करने लगा.उसकी गुदाज़ फांको को कभी वो आपस मे मिलके दबाता तो कभी बिल्कुल फैला देता & उनकी दरार मे अपनी नाक घुसा के रगड़ देता.रंभा उसकी हर्कतो को अपनी बाई तरफ शीशे मे देख रही थी & उसके जिस्म की गर्मी पल-2 बढ़ रही थी.आज मर्द और औरत के जिस्मानी रिश्तो के 1 नये पहलू से वो रूबरू हुई थी-वो ये की अपने आशिक़ के साथ खेलते हुए दोनो के अक्सो को शीशे मे देखना बेहद रोमांचक,बेहद मस्ताना तजुर्बा था.शाह उसकी मांसल गंद पे अपने होंठो के निशान छ्चोड़ रहा था जब उसने अपनी नयी-नवेली महबूबा को शीशे मे देखते पाया.दोनो की नज़रे मिली & शाह मुस्कुरा दिया.रंभा उस मदहोशी के आलम मे भी अपने मक़सद को भूली नही थी.उसकी 1-1 हरकत बस शाह को अपने जवान हुस्न के जाल मे फँसाने के मक़सद से थी.रंभा ने अपनी नशीली आँखो से शाह को देखा और चूमने का इशारा किया.

अब तो शाह के जोश का ठिकाना ना रहा.उसकी ज़ुबान रंभा की गंद की दरार को चाटते हुए उसके छेद से आ लगी & उसे छेड़ने लगी.उसके हाथ अभी भी गंद की फांको को मसल रहे थे.रंभा अब बिस्तर की चादर को बेसब्र हाथो से खींचती & ज़ोर से आहे भर रही थी.शाह उसकी गंद की छेद मे तेज़ी से उंगली कर रहा था.रंभा जानती थी कि वो ये सब उसके गंद के छेद को खोलने के लिए कर रहा है ताकि उसके लंड को अंदर घुसने मे आसानी हो.अचानक शाह बिस्तर से उतरा & 1 कॅबिनेट खोल 1 ट्यूब निकल के वापस आया.उसने उस ट्यूब से क्रीम निकल रंभा की गंद के छेद को भर दिया & अपने लंड पे भी उसे मला,फिर उसने रंभा की कमर पकड़ उसकी गंद को हवा मे उठा लिया & घुटनो पे खड़ा हो उसके पीछे आ गया.

“वी..माआआआआअ......!”,रंभा बहुत ज़ोर से चीखी & बिस्तर की चादर को और ज़ोर से भींच लिया.शाह का मोटा लंड उसकी गंद के छेद को बुरी तरह फैला रहा था & वो बहुत च्चटपटा रही थी.शाह उसे प्यार भरे बोल बोल समझते हुए लंड को अंदर धकेले जा रहा था.आधे लंड को घुसा उसने उसी से रंभा की गंद मारनी शुरू कर दी.कमर हिलाते हुए वो दोनो को शीशे मे देख रहा था & उसका जोश और बढ़ रहा था.थोड़ी देर बाद वो रुका & रंभा की कमर थाम उसे घुमाने लगा & थोड़ी देर मे रंभा बिस्तर पे हाथो & घुटनो पे सीधा शीशे के सामने थी & शीशे मे ही उसकी और शाह की नज़रे मिली हुई थी.

महादेव शाह अब बहुत ज़्यादा जोश मे आ गया था.रंभा की गंद की कसावट उसके लंड को पागल किए जा रही थी & अब उसे बस उस सुराख को अपने रस से भरना था.शाह अपने घुटनो से उठ रंभा की टाँगो के दोनो तरफ पैर जमा के थोड़ा झुक के खड़ा हो गया & उसकी गंद पकड़ धक्के लगाने लगा.कमरे मे रंभा की आहें-नही आहें नही मस्ती भरी चीखें-गूंजने लगी.रंभा की गंद शाह के लंड के अंदर घुसने पे सिकुड जाती & शाह का अगला धक्का पहले धक्के से ज़्यादा जोश मे भरा होता.

वो उसकी गुदाज़ गंद को जोश मे मसलते हुए धक्के लगा रहा था.रंभा की चूत को वो च्छू भी नही रहा था मगर वाहा खलबली मची हुई थी.रंभा बस बिस्तर के सहारे उसकी चादर की सलवटो के ज़रिए अपनी मस्ती,अपनी बेचैनी का इज़हार करती अपने जिस्म मे पैदा हो रहे मज़े का लुत्फ़ उठा रही थी.उसकी चूत तो ऐसे पानी छ्चोड़ रही थी मानो शाह का लंड गंद मे नही चूत मे ही धंसा हो & उसे इस बात से बहुत खुशी & उतनी ही हैरत हो रही थी.

शीशे मे शाह का जोश से तमतमाया चेहरा दिख रहा था & रंभा उस से नज़रे मिलाए आहें भरती हुई उसे चूमने के इशारे पे इशारे किए जा रही थी.शाह ने उसकी गंद की फांको को हाथो मे भर बहुत ज़ोर से दबोचा & आख़िरी धक्के लगाए.

"ओह....हाआाआआन्न्‍नननननननननणणन्.....!",रंभा बिस्तर की चादर नोचती च्चटपटाए हुए चीखने लगी.शाह के गर्म वीर्य के गंद मे च्छूटते ही उसकी चूत मे भी जैसे कुच्छ फुट पड़ा था.उसका जिस्म कांप रहा था & वो सब भूल गयी थी.वो खुशी मे डूबी आसमान मे उड़ रही थी & उसे ये होश नही था की वो सूबक रही थी.उसकी आँखो से आँसू बह रहे थे जोकि उसकी तकलीफ़ नही बल्कि शिद्दती मज़े का इज़हार कर रहे थे.

शाह का जिस्म झटके खा रहा था & उसका लंड तो वीर्य की बौच्हर पे बौच्हर छ्चोड़े जा रहा था.उसे भी खुद पे हैरत हो रही थी.आजतक किसी लड़की के साथ उसने इस कदर मज़े को महसूस नही किया था.वो निढाल हो आगे गिरा & रंभा को अपने जिस्म के नीचे दबा दिया.दोनो लंबी-2 साँसे ले रहे थे.शाह ने उसके चेहरे को ढँकी ज़ुल्फो को किनारे किया & उसके दाए गाल को चूम लिया.उसकी वासना को जिस तरह इस लड़की ने भड़काया था वैसा उसकी पिच्छली ज़िंदगी मे कभी कोई लड़की नही कर पाई थी.

लंड सिकुदा तो शाह ने धीरे से उसे गंद से बाहर खींचा & करवट बदली.रंभा अभी भी धीमे-2 सिसक रही थी.शाह उसकी पीठ सहलाने लगा.कुच्छ पल बाद रंभा ने करवट बदली तो शाह ने उसे बाहो मे भर लिया.

"तुम्हे तकलीफ़ तो नही हुई?",शाह उसकी ज़ूलफे सवार रहा था.

"हुई..पर उस से भी कही ज़्यादा..अच्छा लगा.",रंभा ने फिर उसके सीने मे मुँह च्छूपा लिया,"पर.."

"पर क्या?"

"पर अब मैं आपसे दूर नही रह सकती!",रंभा की आवाज़ मे बेसब्री थी.

"मेरा भी तो यही हाल है पर तुम्हारे तलाक़ तक तो रुकना होगा."

"मुझसे अब इंतेज़ार नही होता!",रंभा की आँखे नम हो गयी थी..ये उसकी चाल का आख़िरी पर बहुत अहम हिस्सा था.वो 1 बेवफा बीवी का नाटक रही थी जो अपने आशिक़ के साथ के लिए किसी भी हद्द तक जा सकती थी.

"इंतेज़ार तो मुझसे भी नही होता!",शाह के जज़्बात भी शिद्दती होने लगे थे.ये पहला मौका था उसकी ज़िंदगी मे जब उसे दौलत से भी ज़्यादा कोई लड़की प्यारी & ज़रूरी लग रही थी.पर रंभा तो उसके हाल-ए-दिल से नावाकिफ़ थी & उसकी बातो की सच्चाई परखने मे लगी थी,"पर क्या कर सकते हैं!"

"ठीक है मैं कल ही तलाक़ की अर्ज़ी दे देती हू.आप बस समीर को हटाइए मेरी ज़िंदगी से.",उसने शाह के सीने मे चेहरा दफ़्न किया और सुबकने लगी,"..मुझे अब 1 पल भी उसके साथ नही रहना!"

"अरे!ऐसे जल्दबाज़ी मे ये काम नही करना.",शाह घबरा गया.उसे लगा कि ये जज़्बाती लड़की कही सारा खेल ही ना बिगाड़ दे,"..अभी कुच्छ दिन इंतेज़ार करो."

"मैं नही करती इंतेज़ार!",रंभा झटके से उठ बैठी.उसकी आँखे आँसुओ से लाल थी,"आपको भी मेरी कोई फ़िक्र नही!",वो घुटनो पे हाथ रख मुँह च्छूपा रोने लगी.शाह फ़ौरन उठ बैठा और उसे समझाने की कोशिश करने लगा.

"तो फिर क्या बात है आख़िर जो आप मुझे रोक रहे हैं तलाक़ लेने से?",शाह उसके आँसू पोंच्छ रहा था & सोच रहा था कि आख़िर क्या बोले रंभा से..क्या उसे उसका असली मक़सद बता देना चाहिए?..कही ये भड़क गयी तो?..फिर ये उसका राज़ खोल देगी & उसे भी इसे ना चाहते हुए भी ठिकाने लगाना पड़ेगा.

"बोलिए!क्या बात है आख़िर?",रंभा ने उसे झकझोरा.

"रंभा,मैं जो कहूँगा उसे ठंडे दिमाग़ से सुनना.",शाह उसे बाई बाँह के घेरे मे ले बहुत गंभीर हो गया था.रंभा भी उसे ध्यान से सुनने लगी,"रंभा,मैं ट्रस्ट ग्रूप का मालिक बनाना चाहता हू.",रंभा ने चौंकने का नाटक किया,"..प्रणव भी मेरे साथ है.हमारा मानना है कि ट्रस्ट और ऊँचाइयाँ छु सकता है लेकिन समीर उसे सही ढंग से चला नही रहा.प्रणव ने तुमसे इस बारे मे कुच्छ बात की है या नही मुझे नही पता.",उसने झूठ बोला,"..देखो,रंभा मे नही चाहता कि तुम्हे लगे कि ट्रस्ट को हथियाने के लिए मैं तुम्हारे करीब आया पर प्रणव से किया कंपनी बचाने का वादा भी मुझसे तोड़ा नही जाता.इसी पशोपेश की वजह से मैं तुमसे ऐसे बात कर रहा था.",रंभा ने उसकी बात सुन सर झुका लिया.

"क्या आपको मेरे और प्रणव के बारे मे पता है?",रंभा सर झुकाए हुए थी.अब वो धीरे-2 शाह का पूरा भरोसा जीतने की ओर कदम बढ़ा रही थी.

"नही क्या..ओह..",शाह थोड़ी देर से बात समझा.

"पर अब नही.उस भले इंसान ने मुश्किल वक़्त मे मुझे सहारा दिया & हम करीब आ गये पर आज मुझे एहसास हुआ है कि मुझे असल सुकून & खुशी केवल आपके आगोश मे मिलती है!",रंभा रुवन्सि थी,"..अब सिफ आपकी होके रहना चाहती हू.प्लीज़ आप मुझे मत छोड़िएगा.",शाह ने उसे बाहो मे भर लिया.कुच्छ सिसकियो के बाद रंभा ने उसका चेहरा हाथो मे भर लिया,"..आप अगर मुझसे शादी करते हैं तो फिर आपको ट्रस्ट का मालिक बनाने का ख्वाब छ्चोड़ना होगा.है ना?",शाह ने हां मे सर हिलाया,"..& इस बात से सबसे ज़्यादा तकलीफ़ पहुँचेगी प्रणव को जो हम दोनो का दोस्त है.",शाह ने फिर सर हिलाया.

"तो कुच्छ ऐसा करते हैं कि हम भी 1 हो जाएँ & उसे भी मायूस ना होना पड़े.",रंभा की आँखो मे 1 विश्वास था & आवाज़ मे 1 ठंडापन जिस से शाह भी थोड़ा हिल गया था.

"क्या?"

"अगर तलाक़ होता है तब तो कंपनी गयी हाथ से.तो बात कुच्छ यू होनी चाहिए कि कंपनी भी हो,समीर भी रास्ते से हट जाए और हम दोनो भी 1 हो जाएँ."

"तुम कहना क्या चाह रही हो?",शाह समझ रहा था रंभा का इशारा & मन ही मन खुश था कि उसकी मुश्किल वो खुद आसान कर रही थी.

"अगर समीर नही रहता है तो क्या होगा?",उसके होंठो पे 1 कुटिल मुस्कान आ गयी थी.

"क्या होगा?"

"उसकी कोई वसीयत नही है & सब कुच्छ मेरा होगा.मैं कंपनी की मालकिन बनूँगी & मेरा दूसरा पति और उसका दोस्त मालिक.",शाह कुच्छ देर खामोशी से उसे देखता रहा.रंभा सांस रोके उसके रिक्षन का इंतेज़ार कर रही थी.शाह के होंठो पे मुस्कान की हल्की सी लकीर खींच गयी जोकि थोड़ी ही देर मे गहरी हुई & फिर अगले ही पल दोनो हंसते हुए 1 दूसरे को बाहो मे भर खुशी से चूम रहे थे.रंभा अपनी चाल मे कामयाब हो गयी थी.

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क्रमशः.......
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11-03-2018, 02:11 AM,
#84
RE: Porn Hindi Kahani जाल
जाल पार्ट--85

गतान्क से आगे......

“तुम्हे अब अपने घर लौट जाना चाहिए.”,खाना ख़त्म होरे ही महादेव शाह ने 1 बार फिर रंभा को बाहो मे भर लिया.

“उन्न्ञणन्..मेरा मन नही है.”,रंभा उसके गले मे बाहे डाल उसके होंठ चूमने लगी,”..आज रात यही रुक जाती हूँ.”

“दिल तो मेरा भी यही चाहता है..”,शाह ने किस तोड़ी,”..पर हमारे प्लान की कामयाबी के लिए ये बहुत ज़रूरी है कि किसी को हमारे रिश्ते की ज़रा भी भनक ना लगे इसीलिए कह रहा हू कि तुम घर लौट जाओ.”

“ठीक है.”,रंभा ने काफ़ी उदास होने का नाटक किया पर सच्चाई ये थी कि उसे थोडा बुरा तो लग रहा था.शाह के साथ चुदाई मे उसे बहुत मज़ा आया था & अभी उसका दिल वाहा से जाने को कर नही रहा था,”..आप कहते हैं तो जाती हू.”

“मेरी जान,उदास क्यू होती हो.”,शाह ने उसे वैसे ही पचकारा जैसे कोई किसी रूठे बच्चे को पूचकारता है,”.मेरा वादा है की चाहे कुच्छ भी हो जाए मैं रोज़ तुमसे मिलूँगा.”

“सच?”,रंभा ने किसी भोली लड़की की तरह खुश होने का नाटक किया.

“सच!”,दोनो 1 लंबी किस मे खो गये जिसके बाद रंभा वाहा से निकल गयी.घर पहुँच उसने समीर से छुप के देवेन को फोन किया & उस से कल मिलने की बात की.देवेन ने इलाक़े जायज़ा ले लिया था & उसे सब ठीक लगा तो उसने रंभा को अगली सुबह उनके पास आने को कहा.

गोआ से लौटने के बाद रंभा समीर से अलग कमरे मे सोने लगी थी.अपने बिस्तर पे लेटी वो अपने आशिक़ो के बारे मे सोच रही थी & उसे प्रणव का ख़याल आया.वो उठ बैठी..वो ज़रूर अभी आएगा..इस ख़याल की आते ही रंभा दबे पाँव कमरे से निकली और समीर के कमरे तक गयी और अंदर झाँका.वो गहरी नींद मे सो रहा था.वो वाहा से हटी & बाल्कनी मे चली गयी.

10 मिनिट बाद उसे प्रणव आता दिखा तो उसने हाथ से उसे रुकने का इशारा किया & फिर दबे पाँव नीचे गयी,”तुम्हारा ही इंतेज़ार कर रही थी.”,उसने उसका हाथ पकड़ा & उसे घर के अंदर ले आई.कुच्छ देर बाद दोनो रंभा के कमरे मे बैठे थे.

“कहा चली गयी थी तुम अपने दफ़्तर से?”,प्रणव के हाथ उसके जिस्म से आ लगे & वो उसे बाहो मे भर पागलो की तरह चूमने लगा.

“आराम से..आहह..आवाज़ मत करो प्रणव..कही समीर ना जाग जाए!”,उसने आँखे बंद कर ली.उसका दिल नही कर रहा था प्रणव के साथ चुदाई करने का.घर आके उसे महसूस हुआ था कि शाह ने उसे कितना थका दिया था & वो अब बस सोना चाहती थी.पर वो प्रणव को नाराज़ भी नही करना चाहती थी.

“क्लब चली गयी थी & फिर इधर-उधर घूमती वापस आ गयी..उउन्न्ह..!”,प्रणव ने उसे बिस्तर पे लिटा दिया था & उसके उपर चढ़ उसके चेहरे को चूमते हुए उसकी नाइटी के उपर से ही उसकी चूचियाँ दबा रहा था.

“मुझे बुला लेती.”,प्रणव ने उसकी नाइटी के गले को नीचे किया & उसकी दाई छाती को बाहर निकाल चाटने लगा.

“प्रणव..डार्लिंग..उउन्न्ञणन्..बुरा तो नही मनोगे?”,उसने उसके बाल पकड़ उसका सर सीने से उठाया.

“क्या बात है,रंभा?”,प्रणव फ़ौरन उसकी चूचियाँ छ्चोड़ उसकी आँखो मे देखने लगा & उसके गाल सहलाने लगा.

“आज दिल नही कर रहा.”

“ओह.”,प्रणव की आवाज़ मे मायूसी सॉफ झलक रही थी & वो उसके उपर से हटने लगा की रंभा ने उसे रोक लिया.

“दिल तो ये कर रहा है कि बस तुमहरि मज़बूत बाहो मे सुकून से सो जाऊं पर ये मुमकिन नही.”,रंभा ने ठंडी आह भरी.समीर का दिल खुशी से भर उठा.जहा रंभा उसके लिए 1 मोहरा थी जो उसे ट्रस्ट ग्रूप का मालिक बनाने वाली थी & 1 खूबसूरत खिलोना थी जिस से वो अपने जिस्म की हवस मिटाता था वही वो उस से मोहब्बत करने लगी थी.

“हां,जान फिलहाल तो ये मुमकिन नही पर हालात बहुत जल्द बदलेंगे.”,रंभा ने उसे झुका के गले से लगा लिया.उसे खुद पे गुरूर भी हो रहा था & हैरत भी..ये सारे चालाक मर्द इतनी आसानी से उसकी झूठी,रस भरी बातो मे फँस कैसे जाते थे!

कुच्छ देर बाद वो बड़े आराम से सो रही थी.

विजयंत मेहरा की नींद खुली तो वो कमरे से बाहर आया.उसने देखा कि घर के मैं दरवाज़े पे 1 लॅडीस कोट पड़ा था.उसने आगे देखा तो पाया कि घर के हॉल से लेके देवेन के कमरे तक के रास्ते मे 1 लॅडीस टॉप,जीन्स & ब्रा भी पड़े थे.वो समझ गया की रंभा आई है & उसका दिल खुशी से भर गया.वो आगे बढ़ा मगर उसने देखा की देवेन के कमरे का दरवाज़ा बंद था.उसे मायूसी हुई पर वो कर ही क्या सकता था.दोनो के इतने एहसान थे उसपे & वो अपने जिस्मानी स्वार्थ के लिए दोनो की मोहब्बत मे खलल नही डालना चाहता था.उसने दरवाज़े से कान लगाया तो अंदर से रंभा की मस्तानी आहो की धीमी आवाज़ उसके कान मे पड़ी & वो बेचैन हो गया.

वो वाहा से हटा & रसोई मे चला आया & चाइ बनाना लगा.जब से वो डेवाले आया था उसे 1 अजीब सी उलझन & बेचैनी ने आ घेरा था.उसे ये शहर,यहा की आबो-हवा सब देखे-2 से लगते थे मगर उसे कुच्छ याद नही आ रहा था.उसे उसी वक़्त रंभा की याद आई थी & वो उसे ये सब बताना चाहता था.आज वो आ गयी थी मगर..

उसने चाइ बनाई & कप मे डाल पीते हुए रंभा के कमरे से भरा आने का इंतेज़ार करने लगा.

“उउन्न्ञनननगगगगगगगघह……!”

“आहह…….!”,सलवटो से भरे बिस्तर पे आपस मे गुत्थमगुत्था दो जिस्मो ने 1 साथ ज़ोर से आ भर अपने-2 जिस्मो के मज़े की इंतेहा तक पहुचने का प्लान किया.

“तो उसका इरादा तुमसे शादी कर कंपनी हड़पने का है पर उसके पहले समीर को रास्ते से हटाना ज़रूरी है.”,देवेन अभी भी रंभा के उपर ही था.उसका लंड सिकुड़ने के बावजूद रंभा की चूत मे था.रंभा उसके चेहरे को अपनी उंगली के पोरो से सहला रही थी & वो कभी उसके चेहरे तो कभी चूचियो को चूम रहा था.

“हूँ..& अब इस काम मे हमे उसकी ‘मदद’ करनी है.”,देवेन ने उसकी ओर देखा और दोनो हंस पड़े.

“अच्छा तुम 1 काम करना..”,उसने हँसती हुई रंभा के होंठ चूमे & फिर उसके जिस्म से हट गया & बिस्तर से उतर अपने कपड़े पहनने लगा,”..जब भी अगली बार मिलो इस शाह से,मुझे खबर करना,मैं उसे देखना चाहता हू.”

“ठीक है.”,रंभा ने देवेन को अपने & शाह की पूरी कहानी नही बताई थी ना ही देवेन ने उस से ज़्यादा तफ़सील से उस बारे मे पुछा था.रंभा ने अपनी पॅंटी पहनी तो देवेन बाहर चला गया & उसके कपड़े लेके लौटा.रंभा को उस वक़्त थोड़ी ग्लानि महसूस हुई..ये शख्स उस से मोहब्बत करता था & वो भी उसे जान से ज़्यादा चाहती थी..फिर अभी भी दूसरे मर्दो से चुदने मे उसे मज़ा क्यू आता था?..वो देवेन की तरफ पीठ कर कपड़े पहनने लगी..ना जाने क्यू उस से नज़रे मिलाने मे उसे झिझक होने लगी थी.कपड़े पहन वो शीशे के सामने खड़ी हो बाल ठीक करने लगी & तब उसने अपनी ही आँखो मे झाँका..वो ऐसी ही थी & ये बात सबसे पहले उसे खुद कबूलनी थी.इसके लिए शर्मिंदा होने की कोई ज़रूरत नही थी उसे.ये उसकी शख्सियत का अहम हिस्सा था & इसके बिना वो खुश होके नही जी सकती थी.उसने अपने बाल ठीक किए & कमरे से बाहर आई.

सामने चाइ का कप उसकी ओर बढ़ाए विजयंत खड़ा था,”गुड मॉर्निंग,डॅड.कैसे हैं आप?..थॅंक्स!”,उसने आगे बढ़ विजयंत का गाल चूमा & कप ले लिया.

“ठीक हू.”,रंभा ने उसके चेहरे के भाव पढ़ लिए & देवेन से आँखो के इशारे से पुछा तो सुने कंधे उचका दिए.रंभा ने विजयंत की पीठ पे हाथ रखा & उसे उसके कमरे मे ले गयी.

“डॅड,जो भी बात है मुझसे कहिए.”,विजयंत कुच्छ पल सर झुकाए बैठा रहा & फिर उसने उसे अपने दिल का हाल बताया.रंभा को खुशी हुई कि उसे कुच्छ तो जाना-पहचाना लगा मगर साथ ही थोड़ी घबराहट भी हुई.देवेन की दिमागी हालत अभी भी नाज़ुक थी & उसे बहुत एहतियात से रहना था.अब यहा यूरी भी नही था उनकी मदद के लिए.

“डॅड..”,उसने उसके कंधे पे हाथ रखा,”..अभी मैं आपको आपकी कंपनी हड़पने के लिए चल रही चालो के बारे मे कुच्छ बताउन्गि पर उस से पहले आपसे 1 बात कहना चाहती हू.आपकी तबीयत अभी भी ठीक नही है.आप अपने दिमाग़ पे बहुत ना डालें.आपको सब याद आ जाएगा & वो भी बहुत जल्दी.ये उलझन तो यही जता रही है कि आपको कुच्छ तो याद आ रहा है.मगर फिर भी ज़रा भी तकलीफ़ हो,परेशानी हो,मुझे फोन कीजिए.मैं फ़ौरन आऊँगी.ओके?”

“ओके.”,विजयंत मुस्कुराया तो रंभा ने 1 बार फिर उसका गाल चूमा & उसे बाहर हॉल मे देवेन के पास ले आई जहा दो नो ने उसे शाह & प्रणव के बारे मे बताया.

“अच्छा देवेन..”,रंभा अपनी कार की ड्राइविंग सीट पे बैठी तो देवेन ने दरवाज़ा बंद किया,”..दयाल को ढूँडने के काम मे कुछ नया हुआ?”

“हां,कल होगा.”

“अच्छा,क्या?”,रंभा ने खुश होके पुचछा.

“कल का अख़बार पढ़ना.”

“बताइए ना!”,वो मचल गई.

“ना!कल का अख़बार पढ़ना खुद बा खुद समझ जाओगी.”,वो मुस्कुराया.रंभा समझ गयी की वो अभी कुच्छ नही बताने वाला & शोखी से मुस्कुराती अपने दफ़्तर के लिए रवाना हो गयी.

“एक्सक्यूस मी,मेडम.”,रंभा ने अपनी कार पार्क की तो 1 शॉफर उसके करीब आ खड़ा हुआ.

“यस?”,रंभा ने उसे सवालिया निगाहो से देखा.

“ये आपके लिए.”,उसने 1 पॅकेट उसे थमाया & सलाम कर चला गया.

रंभा ने पॅकेट के अंदर देखा तो 1 गिफ्ट पेपर मे लिपटा डिब्बा था जिसपे 1 गुलाब का फूल चिपका था & 1 कार्ड था जिसपे सुर्ख स्याही से लिखा था,”फॉर माइ डार्लिंग-फ्रॉम म”.रंभा समझ गयी कि उसके नये आशिक़ ने उसे तोहफा भेजा है.वो पॅकेट लिए अपने दफ़्तर मे आई.

कॅबिन के एकांत मे उसने जल्दी से तोहफा खोला तो अंदर से लेस की हल्के गुलाबी रंग की ट्रॅन्स्परेंट लाइनाये निकली.रंभा ने मुस्कुराते हुए स्ट्रेप्लेस्स ब्रा & पॅंटी को देखा.शाह आदमी जैसा भी हो उसकी पसंद बहुत अच्छी थी.रंभा ने देखा डिब्बे मे 1 क्रेडिट कार्ड जैसा भी कुच्छ था.उसे उठाया तो उसने पाया कि वो होटेल कलमबस के 1 रूम का के कार्ड था & उसके साथ 1 और कार्ड था जिसपे सुर्ख स्याही से लिखा था,2 पीएम.

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क्रमशः.......
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11-03-2018, 02:11 AM,
#85
RE: Porn Hindi Kahani जाल
जाल पार्ट--86

गतान्क से आगे......

1.55 पे रंभा 5-स्टार होटेल कलमबस के लग्षुरी सूयीट के दरवाज़े को खोल अंदर दाखिल हो रही थी.उसने अभी भी सवेरे वाला कोट & गहरी नीली जीन्स पहनी थी मगर उनके नीचे उसने अपनी ब्रा & पॅंटी उतार आशिक़ के तोहफे को अपने जिस्म पे सज़ा लिया था.

रंभा सूयीट मे दाखिल हुई & सोफे पे अपना बॅग रख बेडरूम मे गयी.वाहा मध्हम रोशनी थी & खुश्बू वाली मोमबत्तिया जल रही थी,माहौल बड़ा ही रोमानी था,”आओ मेरी जान.”,उसकी आहत सुन कमरे की खिड़की के पास ड्रेसिंग गाउन पहने खड़ा महदेव शाह घुमा & 1 डोर खींच पर्दे को गिरा दिया.अब उस कमरे का बाहर की दुनिया से कोई सरोकार नही था.

शाह उसके करीब आया & दोनो 1 दूसरे से लिपट गये & चूमने लगे.दोनो 1 दूसरे को ऐसे चूम रहे थे जैसे बरसो बाद मिले हो जबकि बस कुच्छ ही घंटे हुए थे उनकी पिच्छली मुलाकात को.शाह ने चूमते हुए रंभा के कोट के बटन खोल उसे उसके कंधो से नीचे फर्श पे सरका दिया.रंभा भी उसके गाउन की बेल्ट खोल रही थी.कुच्छ ही पल बाद शाह उसके स्ट्रेप्लेस्स ट्यूब टॉप से नुमाया गोरे कंधो को सहलाता उसकी ज़ुबान से अपनी ज़ुबान लड़ा रहा था & रंभा उसके नंगे सीने के बालो मे हाथ फिरा रही थी.

रंभा के हाथ शाह के सीने से लेके उसके पेट तक आते & फिर पीछे उसकी कमर से होते हुए पीठ तक जाते,जहा से वो शाह के सर पे पहुँच उसके सफेद बालो को खींचने लगते.शाह ने उसकी कमर को अपनी गिरफ़्त मे कसा & अपनी ज़ुबान उसके मुँह मे घुसा के अंदर घुमाई तो रंभा के जिस्म मे बिजली दौड़ गयी.शाह की मज़बूत बाहो मे उसे फिर वही मस्ती महसूस होने लगी थी.

शाह अब उसकी गंद दबा रहा था.कसी जीन्स मे उसकी चौड़ी गंद देखते ही उसका जोश बढ़ गया था & अब उसका इज़हार वो अपने बेसब्र हाथो के ज़रिए कर रहा था.रंभा गंद के मसल्ने से चिहुनक उठी थी & अब सिले लबो के पार भी उसकी आहे बाहर आ रही थी.उसने शाह को बाहो मे भर उसकी पीठ को नोचा & अपनी ज़ुबान से उसकी ज़ुबान को अपने मुँह से बाहर निकाला & फिर उसके मुँह मे अपनी जीभ घुमाने लगी.

कुच्छ पॅलो बाद शाह ने उसके लबो से अपने लब जुदा किए & उसकी गर्दन चूमने लगा.रंभा के जिस्म की खुश्बू उसे मदहोश कर रही थी.वो उसकी गर्दन को होंठो से काटने लगा था & रंभा उसकी इस हरकत से च्चटपटाने लगी थी.

“ओह..छ्चोड़िए भी!”,उसने शोखी से उसे परे धकेला तो शाह उसे देखने लगा.स्लीव्ले ट्यूब टॉप के उपर से उसकी धदक्ति छातियो का बहुत हल्का हिस्सा दिख रहा था.कसे टॉप & जीन्स मे जिस्म के कटाव बड़े दिलकश अंदाज़ मे उभर रहे थे.रंभा के होंठो पे खेलती शोख मुस्कान शाह को लुभा रही थी.

शाह का दिल अब अपनी महबूबा को नंगी देखने का था.वो उसे देखता हुआ आगे बढ़ा & उसके पीच्चे आया & उसकी ज़ुल्फो को उसके बाए कंधे के उपर से आगे की ओर कर दिया.उसकी उंगली रंभा की उपरी पीठ पे घूमने लगी तो रंभा ने मस्ती मे आँखे बंद कर आह भरी.शाह की उंगली पीठ के नंगे हिस्से पे घूमते हुए टॉप के बीचोबीच आ फाँसी & उसे नीचे खींचने लगी.रंभा उसकी इस हरकत से आहत हो आगे होने लगी तो शाह ने टॉप मे उंगली फँसाए हुए ही उसे पीछे खींचा & फिर उंगली नीचे की तो टॉप थोड़ा नीचे सरक गया.

शाह ने बाई बाँह मे उसकी कमर को लप्पेट उसे अपनी छाती से सटा लिया & उसके दाए कंधे & गर्देन को चूमने लगा.उपर से उसे रंभा का हल्का क्लीवेज दिख रहा था & ये बात उसके लंड को फनकाने के लिए काफ़ी थी.लंड ने हरकत की & रंभा की कमर को छुआ तो उसकी चूत भी कसमसने लगी.शाह के दोनो हाथो ने उसकी बाहो को उठा अपने गले मे डाला & फिर उनके गुदाज़ अन्द्रुनि हिस्सो को सहलाने लगे.रंभा ने शाह के दाए गाल को चूमा & फिर उसके बालो मे उंगलिया घूमते हुए उसके होंठो को चूमने लगी.शाह की उंगलिया उसकी बाँह को सहलाते हुए उसे सिहरा रही थी.

शाह के हाथ उसकी बाँह से उसकी चिकनी बगलो पे आए तो उसे हल्की गुदगुदी महसूस हुई & वो बड़े नशीले अंदाज़ मे हंस दी & अपनी बाहे नीचे कर ली.शाह के हाथ उसकी बगलो से निकल उसके जिस्म की बगल मे आ गये थे & टॉप को दोनो तरफ से पकड़ नीचे खींच रहे थे.रंभा का दिल धड़क उठा,अब शाह उसे अपनी दी हुई ब्रा मे देखेगा..कैसा लगेगा उसे?..क्या वो उतनी ही हसीन दिखेगी जितनी शाह ने ब्रा खरीदते वक़्त सोचा होगा?..क्या उसकी छातिया उसे & लुभावनी लगेंगी?..क्या सोच रही थी वो?दिल के दूसरे कोने से 1 दूसरी आवाज़ उठी..शाह उसके लिए बस 1 खिलोना था & उसके लिए ऐसी बातें!..हां तो क्या हुआ.. पहली आवाज़ ने जवाब दिया..ये सब 1 खेल था & ये सोचना भी उसी खेल का हिस्सा!

शाह ने उसके टॉप को कमर तक खींचा & फिर नीचे बैठ टॉप को उसकी जाँघो &टाँगो से सरकाते हुए उसके जिस्म से अलग कर दिया.शाह उसकी जीन्स उतार उसे पूरी लाइनाये मे 1 साथ देखना चाहता था.उसके होंठ रंभा की मांसल कमर को चूम रहे थे & उसके चिकने पेट पे उसके बेसब्र हाथ घूम रहे थे.

रंभा अपने बालो से खेलती आहे भर रही थी.शाह उसकी कमर को दबाते हुए उसकी जीन्स के उपर से ही उसकी गंद को चूम रहा था,”,बड़ी मस्त गंद है तुम्हारी!”,उसने उसकी फांको को दबाते हुए उसकी कमर पकड़ उसे अपनी ओर घुमाया & उसके पेट को चूमने लगा.

“ऐसी क्या बता है उसमे?..ऊहह..सभी की ऐसी ही होती है..ओवववव….!”,उसके पेट को चूमते हुए शाह ने उसकी नाभि मे जीभ उतरी थी & फिर उसके निचले हिस्से की चमड़ी को दन्तो से बड़े हल्के से काटा था.

“तुम्हे क्या पता जानेमन कितनी मस्तानी गंद है तुम्हारी..मेरी जगह आओगी तब समझोगी.”,शाह ने उसकी जीन्स के बटन कोखोला & उसे नीचे सरकाया.झीने लेस मे उसकी गीली चूत उसे दिखी तो पाजामा मे उसका लंड बाहर आने को कुलबुलाने लगा.

“उउम्म्म्म..जानती हू आप मर्दो को..बस अपने मतलब के लिए झूठी तारीफ करते हैं!”,रंभा बारी-2 से दोनो टाँगे उठा जीन्स को उतारने मे शाह की मदद कर रही थी.शाह ने जीन्स को उतार के उच्छल दिया & खड़ा हो रंभा को देखने लगा.

लेस के ट्रॅन्स्परेंट ब्रा मे उसके गुलाबी,किशमिश के दानो सरीखे कड़े निपल्स साफ दिख रहे थे.ब्रा के उपर से उसकी आधी छातियाँ नुमाया थी & उसकी तेज़ धड़कनो की कहानी कह रही थी.उसका सपाट पेट भी उसकी उलझी सांसो से उपर-नीचे हो रहा था & उसके नीचे उसकी झीनी पॅंटी से उसकी गीली चूत की दरार शाह को सॉफ दिख रही थी.शाह उसके गिर्द घूम उसे हर अंदाज़ से देखने लगा.रंभा के पीच्चे आ उसने उसकी ज़ुल्फो को उठा की आगे किया & उसकी लगभग नंगी पीठ को देखा.गोरी मखमली पीठ से नज़र नीचे फिसली तो पॅंटी के उपर पीठ के दोनो तरफ उसे 2 हल्के गड्ढे नज़र आए.शाह उन्हे देख जोश से पागल हो गया.रंभा की गोरी गंद & उसकी दरार भी पॅंटी के झीने लेस से सॉफ नज़र आ रहे थे.

“झूठ नही कह रहा,मेरी जान.सच 1 पल के लिए मर्द बन के उसकी निगाहो से अपने हुस्न को देखा तब मेरा हाल समझोगी!”,शाह अपने सीने पे बेचैनी से हाथ फिरा रहा था.

“अच्छा-2!..मान गयी आपकी बात..अब बस देखते ही रहेंगे क्या!”,रंभा ने इस शोख अंदाज़ मे उसे देख के ताना मारा कि शाह का जोश उसके सर चढ़ गया.वो आगे बढ़ा & रंभा को बाहो मे भर के दीवानो की तरह चूमते हुए बिस्तर की ओर गया & उसे लिए-दिए उसपे गिर गया.उसके गर्म लब रंभा के चेहरे & ब्रा से बाहर झाँकती चूचियो के हिस्सो पे घूमने लगे.रंभा उसके लंड को अपनी चूत पे दबा महसुसू करती उसकी ज़ुल्फो से खेलती आहे भरने लगी.उसने नज़रे घुमाके कमरे को देखा,वाहा की हल्की रोशनी,खामोशी मे गूँजती उनकी मस्तानी आवाज़ें माहौल को बहुत रोमानी बना रही थी & उसका उसपे बहुत असर हो रहा था.

महादेव शाह रंभा के नंगे कंधो & उपरी,गुदाज़ बाहो को चूम रहा था & अपनी कमर हिला लंड को चूत पे दबा रहा था.रंभा मस्ती मे चूर आहे भर रही थी.शाह उसके सीने से नीचे उसके पेट पे आया & फिर उसकी मोटी जाँघो को चूमने लगा.उसके बेसब्र हाथ जाँघो की कोमलता महसूस करते उनपे घूम रहे थे.उसने रंभा की कमर मे हाथ डाल उसे थोड़ा बेदर्दी से पलटा.

"आउच....!",रंभा कराही पर शाह उस से बेख़बर उसकी पिच्छली जाँघो को चूम रहा था.उसके हाथ तो रंभा की सुडोल टाँगो को सहलाते नही थक रहे थे.

"आहह..!",रंभा फिर करही.शाह उसकी जाँघो को काट रहा था,"..उफफफ्फ़..क्या कर रहे हैं?..ओईइ..काट क्यू रहे हैं?",शाह की टांग रंभा के सर के तरफ थी & रंभा ने मौका पाते ही अपना हाथ उसके पाजामे मे घुसा दिया था.

"जानेमन,तुम हो ही इतनी रसीली की जी करता है तुम्हे खा जाऊं!" ,शाह दोबारा उसकी जाँघो को अपने दन्तो से छेड़ने लगा & रंभा ने उसका पाजामा ढीला कर उसके लंड को दबोच लिया.

"अब रसीला तो आपका भी है,मैं तो नही खाती इसे!",रंभा ने लंड को हाथ मे पकड़ खींचा तो शाह ने बिस्तर पे थोडा सरकते हुए लंड को उसके चेहरे के करीब कर दिया,"कहिए तो खा लू?",रंभा ने शाह के लंड की फॉरेस्किन को दन्तो मे पकड़ बहुत हौले से खींचा.

"आहह..!",शाह मज़े मे आँखे बंद कर कराहा,"..तुम किस चीज़ की बात कर रही हो,डार्लिंग?..ज़रा उसका नाम भी तो लो.",दोनो अब करवट से 1 दूसरे के नाज़ुक अंगो की तरफ मुँह किए लेते थे.शाह ने नीचे अपनी महबूबा के चेहरे को देखते हुए सवाल पुचछा.

"उन..हूँ..",रंभा ने उसकी झांतो मे मुँह च्छूपा लिया,"..मुझे शर्म आती है.",वो उसके लंड से खेल रही थी,उसकी झांतो मे उसने अपना चेहरा दफ़्न किया हुआ था & फिर भी शर्म की बात कर रही थी.शाह उसकी इस अदा पे जोश से पागल हो गया.

"बोलो ना जानेमन!",उसने उसकी पॅंटी नीचे खींची & उसकी गंद की बाई फाँक को काटने लगा.

"उन..हूँ..ओवववव..!",शाह के दंटो की हर्कतो से वो आहत हो गयी.

"जब तक नही बोलॉगी मैं काटता रहूँगा.",शाह उसकी मोटी गंद के माँस को मुँह मे भरे जा रहा था.

"उन्न्ह..लंड..!",रंभा ने बहुत धीरे से,शाह की झांतो मे मुँह च्छूपा के कहा & फिर उसके अंडे चूम लिए.शाह ने जोश मे भर उसकी पॅंटी पूरी नीचे खींच दी & फिर उसकी जंघे फैला उसकी गीली चूत अपने सामने की.

"पूरी बात बोलो,जान.",उसने उसके गीलेपान को जीभ से चटा.

"आपके लंड को खा लू मैं..ऊहह...!",रंभा उसकी ज़ुबान के चूत मे घुसने से मस्त हो उठी.उसके जिस्म मे सनसनाहट होने लगी थी.

"खा लो मेरी जान!",शाह ने उसे घुमा के सीधा लिटाया & उसके मुँह मे लंड उतरते हुए उसकी चूत चाटने लगा,"..तुम्हारा ही है ये लंड,जो मर्ज़ी करो इसके साथ!..& मैं तुम्हारी रसीली चूत को खाउन्गा..देखो कितना रस बहा रही है ये!..क्या बात है रंभा,ये इतनी गीली क्यू हो रही है?",शाह ने उसके दाने को अपनी ज़ुबान से & उसके दिल को अपनी बात से छेड़ा.

"आपके लंड की हसरत मे आँसू बहा रही है,सरकार.",रंभा ने इस अदा से जवाब दिया की शाह खुशी से भर गया & कमर हिला उसके मुँह को चोदने लगा.

"उननग्घह..ओफ्फो..!",रंभा ने मुँह से लंड को निकाल दिया,"आननह...इतना बड़ा है आप...का ..है......लंड & आप इसे ..उफफफफफफ्फ़.....मेरे मुँह मे भर रहे हैं..मारना चाहते हैं मुझे क्या..हाईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई..!",शाह की ज़ुबान से आहत हो रंभा ने झाड़ते हुए उस से शिकायत की.शाह ने उसकी चूत से बहता सारा रस चॅटा & फ़ौरन उसके उपर से उतार घूम के उसके साथ लेट गया.

"क्या बात करती हो!तुम तो मेरी जान हो,मेरी रानी!..तुम्हारी जान लेने की सोच सकता हू भला.क्या करू..तुम्हारी रसीली चूत & नशीली ज़ुबान ने इसे..",उसने रंभा के हाथ मे अपना लंड दे दिया,"..मस्ती मे बेसब्र कर दिया था."

"बहुत मस्ती चढ़ती है इसे..अभी इसे ठीक करती हू!",रंभा ने अपनी ज़ुबान निकली तो शाह ने भी जीभ निकाल दी & दोनो आपस मे जीभ लड़ने लगे.रंभा बहुत तेज़ी से शाह के लंड को कस के जकड़े हुए हिला रही थी.शाह ने उसके ब्रा को नीचे किया & दाए हाथ से उसकी छातिया दबाने लगा.रंभा का हाथ उसके लंड को झड़ने के बहुत करीब ले जा चुका था & वो अभी ऐसा नही चाहता था.उसने कुच्छ देर तक छातियो को दबाने के बाद हाथ उनसे हटा नीचे ले जा रंभा के हाथ को लंड से अलग किया & फिर उसे बाहो मे भर ब्रा को उसके जिस्म से अलग कर दिया.

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11-03-2018, 02:11 AM,
#86
RE: Porn Hindi Kahani जाल
जाल पार्ट--87

गतान्क से आगे......

रंभा ने अपनी बाई टांग उसकी कमर पे चढ़ा दी & उसकी दाई टांग पे उपर से नीचे चलाते हुए अपनी बेचैनी का इज़हार करने लगी.शाह ने उसकी गंद से लेके छातियो तक हाथ फिराया & फिर उसे खुद से अलग कर बिस्तर से उतर के खड़ा हो गया.रंभा उसे सवालिया निगाहो से देखने लगी तो वो मुस्कुराते हुए झुका & उसे गोद मे उठा लिया.

"इसे उठा लो.",कमरे के कोने मे रखी 1 मेज़ पे रखी आइस-बेकेट मे ठंडी हो रही शॅंपेन की ओर उसने इशारा किया तो रंभा ने बॉटल उठा ली & फिर शाह के होंठ चूमने लगी.शाह उसे गॉस मे उठाए बाथरूम मे चला गया & खाली बाथटब मे उतरा.रंभा गोद से उतरते ही टब के फर्श पे घुटनो पे बैठ गयी & जब शाह टब मे खड़ा हुआ तो उसे बॉटल थमा दी.

"पुक्क्ककक..!",शॅंपेन का कॉर्क खुला तो रंभा ने हाथ बढ़ा के बॉटल अपने आशिक़ से ले ली & फिर उसके लंड को चूमने लगी.शाह कमर पे हाथ रखे उसे देख रहा था.रंभा ने बॉटल दाए हाथ मे ली & लंड के नीचे बाई हथेली जमा दी,फिर उसने बड़े धीरे से शॅंपेन की धार लंड पे डाली & उसके बाद उसके नीचे मुँह लगाके उसे पीने लगी.शाह तो खुशी से पागल हो गया.

"आपके जैसी ज़ालिम नही हू..",रंभा ने शोखी से नज़रे उपर की & शॅंपेन गिरने से रोका,"..लंड पसंद है तो उसे खा नही पी रही हू.",उसने दोबारा शराब की धार लंड पे डाली & 2-3 घूँट भरे.अंडे भी गीले हो गये थे & रंभा ने उनसे भी शराब चाट ली.शाह उसकी इस मस्त हरकत से गर्म हो गया था.उसने फ़ौरन उसे उपर उठाया & बाहो मे भर चूम लिया.

उसने अपनी महबूबा से बॉटल ले ली & शराब उसकी चूचियो पे उदेलने लगा.उसने अपना मुँह रंभा की चूचियो के नीचे लगाया & उसके निपल्स से झरने सी गिरती शराब को पी उसके जिस्म के नशे मे खोने लगा.रंभा ने जिस्म पे गिरती ठंडी शराब से सिहर उठी थी,शाह की लपलपाति ज़ुबान उसकी चूचियो से शराब की बूंदे सॉफ कर रही थी & उसकी चूत मे वो वही प्यारी कसमसाहट महसूस करने लगी थी.

शाह ने बॉटल को उसकी चूचियो के बीच लगाया & उस वादी से शराब को उसके पेट पे गिराने लगा.शॅंपेन की सुनेहरी धार रंभा के पेट के बीचो बीच उसकी नाभि से टकराती & उसके ठीक नीचे लगी शाह की ज़ुबान पे गिरती.रंभा शाह के रोमानी अंदाज़ की कायल हो गयी थी.वो उसका दुश्मन था मगर फिर भी वो उसके जिस्म की दीवानी हो गयी थी.रंभा ने बेचैनी मे अपनी चूचियाँ अपने ही हाथो से दबानी शुरू कर दी.उसका जिस्म अब शाह के लंड के लिए तड़पने लगा था.

महादेव शाह ने अपना हाथ नाभि के नीचे से हटाया & अपना मुँह & नीचे किया.शॅंपेन की धार अब नाभि के गड्ढे मे थोड़ा सा अंदर जाती & फिर बाहर आ सीधा रंभा की चूत पे गिरती जहा शाह की लपलपाति ज़ुबान उसे सुड़ाक रही थी.रंभा चूत पे ठंडी शॅंपेन & आशिक़ की आतुर ज़ुबान की हर्कतो से पागल हो आहे भरने लगी.उसकी चूत की कसक अब उसके सर चढ़ गयी थी.उसे अब कुच्छ होश नही था सिवाय इसके की उसका आशिक़ उसके करीब था & उसका लंड उसे चाहिए था.

"आननह..!",रंभा अपना सर उपर उठाए अपने बालो को बेचैनी से नोचती चीख रही थी.शाह की लपलपाति ज़ुबान ने उसे फिर से झाड़वा दिया था.शाह ने फ़ौरन बॉटल टब के फर्श पे रखी & उसकी कमर को बाहो मे कस उसके पेट को चूमने लगा.रंभा देर तक झड़ने की शिद्दत से बहाल हो सुबक्ती शाह की बाहो के घेरे मे खड़ी रही.

जब शाह ने देखा कि रंभा संभाल चुकी है तो उसने उसकी कमर पकड़ उसे घुमाया & उसकी गंद पे अपने हाथ बड़ी गर्मजोशी से फेरने लगा.उसने रंभा के पीछे जा उसे आगे झुकाया तो रंभा ने झुक के टब को थाम लिया.झुकने से रंभा की पूर्कशिष गंद & उभर आई & शाह का लंड उस गुदाज़ अंग को देख फंफनाने लगा.

शाह ने शॅंपेन की बॉटल उठाई & उसकी धार को रंभा की गंद की दरार पे गिराया & अपनी ज़ुबान गंद के छेद पे लगा के उसे पीने लगा.ज़ुबान की नोक गंद के छेद को लपलपाते हुए छेद रही थी & रंभा टब को थामे कसमसाते हुए आहे भर रही थी.

शाह ने बॉटल को नीचे रखा & रंभा की गंद के छेद को ज़ुबान से गीला करने लगा.रंभा उसकी नियत भाँप गयी & हटने लगी तो शाह ने उसे मज़बूती से पकड़ लिया,"कहा जा रही हो?"

"नही,आप बहुत ज़ालिम हैं.मुझे वाहा करेंगे.",रंभा ने फिर से छूयी-मुई का नाटक किया.

"कहा करूँगा मेरी जान?",शाह उसकी गंद की फांको को बेदर्दी से मसलते हुए उसकी गंद को चाट रहा था,"..उसका नाम लो जल्दी!",उसने उसकी गंद मे उंगली बहुत अंदर तक घुसा दी.

"ओईईईईईईई..गंद मेरी गंद मे करेंगे आप..ओह्ह्ह्ह....!"

"वो तो करूँगा.",शाह ने उसे घुटनो पे झुका दया & उसकी गंद के छेद पे लंड टीका दिया.उसने टब के किनारे रखे बब्बल सोपा की बॉटल को टब मे उदेला & फॉसट खोल दिया तो टब मे पानी भरने लगा.

"नही..बहुत दर्द होता है..प्लीज़ मत करिए..आअन्न्न्नह.....!",शाह ने उसकी अनसुनी करते हुए लंड को अंदर घुसा दिया.शर्ब मे भीगी उसकी गंद उसे आज & भी नशीली लग रही थी.रंभा टब को थामे छॅट्पाटा रही थी.शाह का लंड बेहद मोटा था & उसे थोड़ा दर्द हो रहा था.उसकी गंद की सिकुदा शाह के लंड को दबोच उसे भी पागल कर रही थी.उसने उसकी कमर पकड़ उसकी गंद पे ज़ोरदार चपत लगानी शुरू कर दी.

"तड़क्क्क....!",चपत पे जब रंभा की गंद थरथराती & वो हिस्सा लाल हो जाता तो ये देख शाह & जोश मे भर जाता & अगला धक्का & ज़ोर से लगता.

"हाईईईईईईईईईईई..मैं....मार..गाइिईईईईईईईईईई...है..राआंम्म्ममम..महादेव मेरी गंद फॅट जाएगी..ओईईईईईई..माआआआआआअ..!",जितना दर्द हो नही रहा था रंभा उतना होने का नाटक करती चीख रही थी.शाह उसकी गंद की दोनो फांको को अपने हाथो की मार से लाल किए दे रहा था.रंभा का मस्ती से बुरा हाल था.उसकी चूत पिच्छली रात की ही तरह गंद मारने से और कसक से भर उठी थी.

"कैसे फटेगी मेरी रानी!",शाह आगे झुका & उसकी पीठ से सताते हुए उसकी चूचियो को हाथो मे भर उसके बाए कंधे के उपर से उसके गाल चूमने लगा,"..तुमसे ज़्यादा मुझे प्यारी है ये गंद..देखो कितने प्यार से मार रहा हू."

"ऊन्न्न्नह..हटो ज़ालिम!",रंभा ने अपने चेहरे से उसका चेहरा झटका,"..आपको बस अपनी ही पड़ी रहती है..हाईईईईईईई..कितना दर्द होता है..आप क्या जाने!"

"और मज़ा?..मज़ा भी तो उतना ही आता है..उस से भी कही ज़्यादा..है की नही?..मेरी कसम सच-2 कहना तुम्हे बहुत मज़ा आता है या नही गंद मरवाने मे.",उसने उसके बाए कान को काटा & दोनो चूचियो को बहुत ज़ोर से दबाया.

"आन्न्न्नह..हााआआन्न्‍ननणणन्....बहुत मज़ा आता है..मगर ये सिर्फ़ आपकी मिल्कियत है..आपके लिए मैं कोई भी दर्द सह सकती हू....ओह..महादेव..क्या हो रहा है मुझे?!..हाईईईईईईईईईईईईईई....!",सफाई से झूठ बोलती रंभा उसकी बाहो मे क़ैद च्चटपटाने लगी.वो झाड़ गयी थी & उसकी गंद ने लंड को & कस लिया था.गंद की कसावट & रंभा के प्यार के इज़हार ने शाह के जोश को चरम पे पहुँचा दिया & उसका लंड गंद मे वीर्य की फुआहरें छ्चोड़ने लगा.

बात्ट्च्ब मे पानी भर चुका था,महादेव शाह ने फॉसट बंद किया & फिर झुक के रंभा को बाहो मे भरा & उपर उठा के उसकी ज़ूलफे चूमने लगा.जब थोड़ी देर बाद लंड सिकुदा तो उसने उसे रंभा की गंद से बाहर खींचा & फिर टब मे उसे बाहो मे भरे बैठ गया.झाग भरे पानी मे रंभा उसकी टाँगो के बीच उसके सीने से लगी बैठी थी.शाह उसके दोनो कंधो से लेके उसके चेहरे के हर हिस्से को चूम रहा था.उसके हाथ रंभा के पूरे पेट & सीने पे घूम रहे थे.शाह साबुन के झाग को उसकी चूचियो पे मलने लगा तो रंभा मुस्कुराने लगी & अपने सीने की गोलाईयो पे चलते उसके हाथो के उपर अपने हाथ रख उन्हे दबाने लगी.

“उउम्म्म्म..जादू है आपके हाथो मे!”,उसने अपने दोनो घुटने मोड़ लिए थे,”काश मैं रोज़ इसी तरह आपके साथ नहा पाती!”,रंभा उसके बाए कंधे पे झुकी & उसके बाए गाल को चूम लिया.

“बहुत जल्द ऐसा मुमकिन होगा,रंभा.”,शाह उसके पेट को रगड़ रहा था,”मैने सब सोच लिया है.”

“क्या?!सच?”,रंभा खुशी से बोली.उसका दिल धड़क उठा था..क्या घिनोनी साज़िश सोची है इस आदमी ने समीर को रास्ते से हटाने की?..& क्या विजयंत मेहरा भी इसी की किसी साज़िश का शिकार था?

“हां,तुम्हारा बेवफा पति 1 हादसे का शिकार होगा.”,शाह के हाथ उसकी जाँघो पे घूमने लगे थे.रंभा का जिस्म खुद बा खुद थोड़ा पीछे हो गया था ताकि उसकी गंद शाह के लंड को & आचे तरीके से महसूस कर सके.

“हादसा?”

“हां,हमारे मुल्क की सड़कें जितनी खराब हैं,उतनी ही खराब हमलोगो की ड्राइविंग है.आए दिन सड़क हादसे होते रहते हैं.1 & होगा & हमारी राह का रोड़ा हमेशा के लिए रास्ते से हट जाएगा.”

“मगर कब & कैसे?”,शाह के हाथ उसके घुटनो से लेके चूत तक चल रहे थे & वो 1 बार फिर वही मस्ती महसूस कर रही थी.

“इसके लिए मुझे तुम्हारी मदद चाहिए.”,शाह के दाए हाथ की उंगली उसकी चूत से लगी तो रंभा ने टाँगे & फैला दी.

“हां2.बोलिए!”,उसके जिस्म की मस्ती बढ़ रही थी & साथ ही शाह की बातो से दिल की धड़कने भी.

“मुझे समीर के अपायंट्मेंट्स की जानकारी चाहिए ताकि मैं ये हादसा सही तरीके से प्लान कर सकु.मुझे किसी ऐसे वक़्त उसके साथ ये हादसा करवाना है जब वो अकेला या बहुत से बहुत ड्राइवर के साथ किसी खुले,सुनसान या फिर तेज़ ट्रॅफिक वाले रास्ते से जा रहा हो.”

“हूँ..ऊहह..!”,शाह की उंगलिया उसकी चूत मे घुस घूमने लगी थी,”ये हो जाएगा पर 1 बात कहनी है.”

“हां,बोलो.”,शाह का लंड 1 बार फिर तन गया था & रंभा की गंद मे चुभ रहा रहा था.

“आप ये काम अभी कुच्छ दिनो के बाद कीजिए.मानपुर वाले प्रॉजेक्ट का सरकारी टेंडर किसी भी दिन खुलने वाला है & वो ट्रस्ट ग्रूप को मिलना पक्का ही समझिए लेकिन अगर टेंडर खुलने से पहले समीर को कुच्छ होता है तो फिर वो टेंडर हमे मिलेगा,मुझे नही लगता.सरकार के लिए भी वो प्रॉजेक्ट बहुत अहम है & बिना मालिक की कंपनी को वो ये टेंडर कभी नही देना चाहेगी.हमारी रकम अगर सबसे कम भी होगी तो भी कुच्छ उलट-फेर कर वो टेंडर हमे नही दिया जाएगा & हमे बहुत नुकसान होगा.”

“वाह!ये तो तुमने बड़े पते की बात की है!”,शाह की उंगलिया & तेज़ी से उसकी चूत मे घूमने लगी तो रंभा आहे भरने लगी,”ठीक है.अब वक़्त तुम बतओगि & हादसा मैं करवाउन्गा.”

रंभा की चूत ने शाह की उंगलियो को जकड़ना शुरू किया तो उसका लंड उंगलियो की जगह लेने को मचल उठा.शाह ने उसकी सुनते हुएरंभा को अपने सीने से उठाया & आगे झुका दिया.रंभा आगे झुकी & अपनी गंद थोड़ी उठा दी.शाह ने दाए हाथ मे अपना लंड थामा & बाए को रंभा की जाँघ पे टीका अंगूठे से चूत की फाँक को थोडा खोलते हुए लंड के सूपदे को अंदर घुसा दिया.रंभा सूपदे के अंदर जाते ही पीछे झुकी & लंड को पूरा अंदर लेते हुए1 बार फिर अपने आशिक़ के सीने से लग गयी.

रंभा ने बात्ट्च्ब के किनरो पे हाथ जमा उनके सहारे कमर उचकानी शुरू कर दी.शाह का मोटा लंड उसकी चूत की दीवारो पे बुरी तरह रगड़ रहा था & उसके जिस्म मे मज़े का तूफान उठना शुरू हो गया था.शाह के हाथ उसकी चूचियो को दबा रहे थे,उसकी उंगलिया उसके निपल्स को मसल रही थी.ष्हा भी उसी की तरह मज़े से भरा था,रंभा का जिस्म उसे जन्नत की सैर करा रहा था & वो उसका भरपूर लुत्फ़ उठा रहा था.

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क्रमशः.......
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11-03-2018, 02:11 AM,
#87
RE: Porn Hindi Kahani जाल
जाल पार्ट--88

गतान्क से आगे......

रंभा ने अपनी बाहे पीछे ले जा शाह के गले मे डाली & उसके बाए कंधे पे अदाते हुए उसे चूमने लगी.उसकी ज़ुबान का अपने मुँह मे इस्तेक्बाल करते हुए शाह ने उसकी चूचियो को पकड़ के बहुत ज़ोर से खींचा.

“आन्न्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह..ज़ालिम!”,रंभा ने उसके कान को काट लिया,”..इन्हे उखाड़ना चाहते हैं क्या?!”,शाह उसकी बात सुन हंस दिया & उसकी दाई बाँह को अपनी गर्दन मे डाल झुका & उसकी दाई छाती को मुँह मे भर चूसने लगा.बाथरूम मे रंभा की मस्तानी आहो का शोर भर गया.वो कमर हिलाए जा रही थी & उसके उपरी जिस्म मे कंपकंपी हो रही थी.उसका सीना खुद बा खुद शाह के मुँह की ओर उठ रहा था.रंभा की चूत की कशमकश अब अपने चरम पे पहुँच रही थी.उसकी पलकें नशे से बोझल हो गयी थी.वो बहुत तेज़ी से कमर हिलाए जा रही थी.वो मंज़िल के बहुत करीब थी & जल्द से जल्द वाहा पहुचना चाहती थी.

“ऊऊऊ..आहह....!”,उसने अपना जिस्म कमान की तरह मोड़ दिया & च्चटपटाने लगी.उसकी बंद पलके & चेहरा देख लगता था जैसे वो बेहोश होने वाली है.बेहोश नही पर बेख़बर तो वो थी हर बात से,यहा तक की अपने आशिक़ से भी.उसे बस अपने जिस्म मे फुट रहे मज़े का होश था.वो हवा मे उड़ रही थी & बहुत खुश थी.उसे क्या खबर थी की किस तरह उसकी चूत की शिद्दती कसावट से बहाल होने के बावजूद शाह ने खुद को झड़ने से रोका हुआ था.शाह के आंडो मे मीठा दर्द हो रहा था & वो भी बस झड़ना चाहता था लेकिन उसका दिल उसे रोक रहा था..बस थोड़ी देर &..उसके बाद ये मज़ा भी दोगुना हो जाएगा!

जब रंभा ने आँखे खोली तो पाया शाह उसके जिस्म को प्यार से सहलाते हुए उसकी ज़ूलफे चूम रहा था.उसका लंड वो अभी भी चूत मे महसूस कर रही थी पर वो कोई हरकत नही कर रहा था.रंभा के दिल मे शाह को शुक्रिया कहना चाहता था & उसने अपने सुर्ख लबो को उसके लबो से सटा के ये काम किया.शाह ने उसके होंठो को चूमते हुए उसकी जंघे पकड़ के उसे उपर उठाते हुए उसके लंड को उसकी चूत से निकाल लिया.रंभा को उसकी इस हरकत से हैरानी हुई..वो तो अभी झाड़ा भी नही था.

शाह टब से निकला & रंभा की बाँह थाम उसे भी निकाला & शवर के नीचे ले आया.बहते पानी के नीचे अपनी महबूबा के जिस्म से वो साबुन के झाग को साफ करने लगा तो उसने भी उसके साथ वही हरकत की.दोनो 1 दूसरे को चूमते हुए नहला रहे थे.शाह ने रंभा के जिस्म को साफ करने के बाद उसे अपने आगोश मे भर लिया.दोनो अपने-2 हसरत भरे हाथ 1 दूसरे की पीठ से लेके गंद तक चलाने लगे.रंभा के मुलायम पेट से सटा शाह का सख़्त लंड उसके जिस्म को मस्ती को कम नही होने दे रहा था.रंभा की चूत शाह के लंड के लिए फिर से कुलबुलाने लगी थी.रंभा भी उसके विर्य के गीलेपान को अपनी चूत मे महसूस करना चाहती थी.

और शाह ने जैसे उसके दिल की आवाज़ सुन ली.उसके चेहरे को हाथो मे थाम चूमते हुए उसने उसे शवर के नीचे से घूमते हुए दूसरी तरफ किया तो रंभा की गंद वॉशबेसिन से आ लगी.शाह ने किस तोड़ी & उसकी कमर थाम उसे बेसिन के बगल मे काउंटर पे बिठा दिया.रंभा ने उसका इरादा समझते हुए अपने पाई उपर काउंटर पे चढ़ा अपनी टाँगे खोल अपनी गुलाबी,गीली चूत उसके लंड के लिए पेश कर दी.शाह आगे बढ़ा & अगले ही पल उसका लंड रंभा की चूत मे था.दोनो 1 दूसरे से चिपत गये,उनकी ज़ुबाने आपस मे गुत्थमगुत्था हो गयी & 1 बार फिर उनकी चुदाई शुरू हो गयी.

शाह रंभा की भारी-भरकम जाँघो पे हाथ फिरते हुए धक्के लगा रहा था & उसके होंठ अभी भी रंभा के होंठो से सटे थे.रंभा भी उसकी पीठ से लेके गंद तक अपने हाथ चला रही थी.वो उसकी गंद पकड़ ऐसे दबाती मानो लंड को & भी अंदर जाने को कह रही हो.

शाह ने अपने बाई तरफ लगे बेसिन के शीशे मे खुद को देखा ,रंभा का अक्स उसमे ठीक से नज़र आ नही रहा था,मगर इतना दिख रहा था की शाह उसे चोद रहा है.शाह हमेशा की ही तरह खुद को 1 हसीन लड़की के जिस्म से खेलते देख & जोश से भर गया.उसके धक्के & तेज़ & गहरे हो गये.रंभा ने बाई बाँह उसकी गर्देन मे डाल उसे गले से लगा लिया & आहे भरती हुई दाई से उसकी पीठ & गंद खरोंछने लगी.शाह ने उसे चूमते हुए उसकी चूचिया मसली & फिर उसकी दाई टांग उठा अपने बाए कंधे पे रख उसकी चूत को थोडा और खोल दिया.

“ओह..आन्न्‍न्णनह........औउउउउउउईईईईईईईईईईईइ........हाआआऐययईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई.....!”,बाथरूम मे रंभा की आहें,जिस्मो की टकराने की आवाज़ & शाह की जद्दोजहद भरी आवाज़ें गूंजने लगी.दोनो प्रेमी 1 बार फिर अपने पसंदीदा खेल के अंजाम तक पहुँच रहे थे.शाह रंभा की जाँघ थामे उसके चेहरे को चूमते हुए अब दीवानो की तरह धक्के लगा रहा था.रंभा बैठी उसके धक्को से मस्त हुए जा रही थी..बस कुच्छ ही पल & फिर वही शिद्दती खुशनुमा एहसास..वो अनूठा एहसास जिसके जैसा & कोई एहसास नही!..दोनो ने 1 साथ लंबी आह भरी..रंभा की हसरत पूरी हो गयी थी..अपनी चूत मे वो शाह के वीर्य की गर्माहट महसूस कर झाड़ रही थी & शाह..शाह खुद को आईने मे देख रहा था..क्या नशा था इस लड़की के जिस्म मे?..वो दीवाना हो गया था इसका..ऐसा मज़ा..ये खुशी..उसने कभी किसी के साथ महसूस नही थी ही.पिच्छली रात से लेके अब तक वो इसके जिस्म को जम के भोग चुका था,2 बार इसकी गंद मार चुक्का था पर फिर भी उसका दिल नही भरा था..,”ओह..रंभा!जादू कर दिया है तुमने मुझपे!”,उसके होंठो पे दिल की बात आ ही गयी.रंभा ने उसे बाहो मे भरा & उसके माथे को चूम मन ही मन मुस्कुराने लगी..अब उसे पक्का यकीन था कि महादेव शाह उसके जाल मे पूरा फँस चुका है.

अगली सुबह रंभा ने नाश्ते की मेज़ पे पड़ा अख़बार देखा तो उसे पिच्छले दिन की देवेन की कही बात याद आ गयी.उसने जल्दी से अख़बार उठाया & उसके पन्ने पलटने लगी.आख़िरी पन्ने पे 1 इशतहार पे उसकी नज़र पड़ी & उसके होंठो पे मुस्कान फैल गयी.

मेरे अज़ीज़ दोस्तो-रोशन पेरषद,दानिश सुलेमान,बीसेसर गोबिंद & दयाल.मैं मुल्क वापस आ गया हू पर तुम लोगो का कोई पता नही चल रहा.मुझसे जल्दी मिलो-देवेन.

नीचे डेवाले के जिस पते पे मिलने का वक़्त & तारीख लिखी थी उस पते को पढ़ रंभा को हँसी आ गयी.उसने जिस इलाक़े मे देवेन को घर दिलवाया था वो था तो शहर के बीच पर कुच्छ दिन पहले वाहा पानी की काफ़ी किल्लत थी & उस वजह से वाहा कोई रहने को तैय्यार नही था.पर ऐसी जगह देवेन & विजयंत के लिए बिल्कुल सही थी.पानी की कमी से दोनो को शुरू मे थोड़ी तकलीफ़ तो हुई पर फिर वो इसके आदि हो गये.जिस घर का पता देवेन ने लिखा था वो उसके किराए के मकान के ठीक सामने का मकान था जो खाली पड़ा था.

गोआ की ही तरह अब देवेन विजयंत के साथ अपने घर से ही उस घर पे नज़र रखेगा & अगर दयाल वाहा आया तो फिर....रंभा को अपनी मा की याद आई & वो संजीदा हो गयी..कितना कम जानती थी वो मा को..इतनी अहम बात उसने पूरी ज़िंदगी अपने सीने मे दबाए रखी..सिर्फ़ इसीलिए की वो मुझे हर परेशानी से दूर रखना चाहती थी..रंभा का दिल भर आया.आज अगर उसे किसी की कमी खलती थी तो वो सिर्फ़ अपनी मा की.आज उसके पास सारा ऐशो-आराम था पर उसकी मा नही थी.रंभा ने अख़बार मोड़ के रखा & आँखो की नमी पोंचछति अपने कमरे मे चली गयी.

देवेन ने मुल्क के 8 अख़बारो के हर बड़े शहर के एडिशन्स मे ये इश्तेहार डलवाया था.उसे उमीद थी कि दयाल अपने सभी फ़र्ज़ी नामो & देवेन का नाम पढ़ 1 बार तो उस पते पे ज़रूर आएगा.पर इस बीच उसे महादेव शाह को भी देखना था & उसपे नज़र रखने की भी कोई तरकीब सोचनी थी.उसका मोबाइल बजा तो उसने उसे उठाया & नंबर देख के मुस्कुरा दिया,”अख़बार पढ़ लिया तुमने?”

“हां.”,रंभा हंस दी,”क्या लगता है आपको?आएगा वो?”

“देखो,हम तो बस उमीद कर सकते हैं.वैसे भी उमीद पे दुनिया कायम है!”

“हूँ..अच्छा,सुनिए.शाह समीर को किसी सड़क हादसे मे ख़त्म करना चाहता है.”

“अच्छा.कोई बात नही,ये सड़क हादसा हम करवा देंगे.”

“हां,पर..”

“पर क्या?’

“मुझे थोड़ी घबराहट हो रही है.”

“जोकि लाज़मी है.रंभा,घबराहट मुझे भी होती है.हम काम ही ऐसे करने जा रहे हैं.पर तुम 1 हिम्मती लड़की हो.इस वक़्त अपना हौसला मज़बूत रखो.जिस तरह से 2 दिन की मुलाकात मे ही शाह तुमसे मिलके तुम्हारे पति की मौत प्लान कर रहा है,उस से तो यही लगता है कि यही वो शख्स है जिसके लालच & बदनीयती ने विजयंत का ये हाल किया है.”,रंभा खामोश रही.शाह इस कहानी का खलनायक सही पर उन दोनो के जिस्मो के बीच 1 ऐसा नाता जुड़ गया था जिसकी कशिश का ख़याल आते ही वो मदहोश होने लगती थी,”..तुम बस अगली मुलाकात के वक़्त मुझे उसकी शक्ल दिखा दो.”

“ठीक है,देवेन.”,उसने कुच्छ देर देवेन से उसके बारे मे बात की & फिर विजयंत को फोन पे बुला उसकी खैर भी पुछि.उसके बाद फोन रख वो गुसलखाने मे चली गयी.अब उसे तैय्यार होना था.उसे पता था कि शाह आज उसे फिर कही बुलाएगा.उसका दिल आज की मुलाकात के बारे मे सोच रोमांच से भर उठा.अपने दुश्मन के लिए ऐसे जज़्बात!..रंभा को फिर खुद पे हैरत हुई..पर जब तक शाह का असली चेहरा सामने नही आता,तब तक तो वो उसके साथ जम के लुत्फ़ उठा सकती थी.उसने कपड़े उतारे & झाग भरे बात्ट्च्ब मे बैठ गयी & पिच्छली दोपहर की रंगीन यादो मे खो गयी.

दयाल ने भी अख़बार पढ़ा और गुस्से & तनाव से बौखला उठा..इतने बरसो बाद ये देवेन कहा से आ खड़ा हुआ & उसे उसके बारे मे इतना सब कुच्छ कैसे पता चला?..उसने डेवाले के पते को पढ़ा जिसपे 15 दिन बाद मिलने की तारीख लिखी थी.वो सोच मे पड़ गया की आख़िर उस रोज़ वाहा जाए या नही?..जाना तो उसे होगा ही..पता नही देवेन क्या और कितना जानता था उसके बारे मे?..दयाल ने अख़बार किनारे रखा & देवेन से मुलाकात के पहले उस जगह को 1 बार देखने का फ़ैसला किया.

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"अब तो रंभा वापस आ गयी है..",प्रणव ने जूस ख़त्म कर ग्लास मेज़ पे रखा,"..अब समीर का काम पूरा करने मे आप झिझक क्यू रहे हैं?"

"झिझक नही रहा बल्कि इंतेज़ार कर रहा हू.",महादेव शाह मुस्कुराया.

"इंतेज़ार!",प्रणव झल्ला उठा,"..अब किस बात का इंतेज़ार?!"

"मानपुर वाले टेंडर के खुलने का.",प्रणव ने सवालिया निगाहो से देखा तो शाह ने उसे वही समझाया जो रंभा ने उसे समझाया था.

"ओह..मान गये आपके दिमाग़ को मिस्टर.शाह!"

"ठीक है.टेंडर खुलने के बाद ही हम समीर को रास्ते से हटाएँगे."

"1 बात और."

"कहिए."

"उसकी मौत के बाद रंभा को ही कंपनी की मालकिन बने रहने दो.",ओरिजिनल प्लान के मुताबिक कुच्छ दिनो बाद प्रणव को रंभा को फुसला के उस से कंपनी की बागडोर ले लेनी थी & उसे किनारे कर देना था.प्रणव ने सोचा था कि रंभा को वो अपनी रखैल बनके रखेगा.उस बेचारे को क्या पता था कि शाह & रंभा मिल चुके हैं & अब हालात मे बहुत बदलाव आया है.

"पर क्यू?"

"देखो,प्रणव.पहले विजयंत मेहरा गायब हो जाता है.उसके कुच्छ महीनो बाद उसका बेटा सड़क हादसे मे मारा जाता है.लोगो को इसमे से साज़िश की बू सूंघने मे ज़्यादा वक़्त नही लगेगा तो इसीलिए रंभा को मालकिन बने रहने दो.वैसे भी वो तो सिर्फ़ चेहरा होगी कंपनी कि असल लगाम तो तुम्हारे हाथो मे ही होगी."

"हूँ."

"देखो,जब समीर लापता हुआ & मिला & विजयंत मेहरा झरने से गिरा तब ना समीर कंपनी का हिस्सा था ना ही रंभा.पर तुम थे.अब जब समीर मरेगा तो रंभा पे शक़ तो कोई नही करेगा पर उसकी मौत से तुम्हे ही सबसे बड़ा फ़ायदा होगा.अब ऐसे मे अगर कुच्छ गड़बड़ हुई & तुम कंपनी के मालिक बन गये तो फँसेगा कौन?..तुम."

"आपकी बात थी लगती है.",प्रणव सोच मे पड़ गया था.शाह की बात उसे ठीक लग रही थी..रंभा तो 1 रब्बर स्टंप होगी,कंपनी चलाएगा तो वो ही!,"ठीक है.जैसा आप कहें.",वो शाह से हाथ मिला के वाहा से चला आया.

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क्रमशः.......
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11-03-2018, 02:11 AM,
#88
RE: Porn Hindi Kahani जाल
जाल पार्ट--89

गतान्क से आगे......

देवेन बाज़ार से 2 आरामकूर्सिया ले आया था & विजयंत के साथ उन्ही पे बैठ के सामने वाले घर पे नज़र रखे था.देवेन ने अपने घर के मैन दरवाज़े पे ताला लगा दिया था.दयाल शातिर आदमी था & देवेन पूरी एहतियात बारात रहा था.

"देवेन,इस शख्स से इतनी नफ़रत की वजह मुझे समझ आती है पर तुम्हे लगता नही की इंटेक़ाम वो आग है जिसमे इंसान खुद ही झुक्साता है?",विजयंत कुर्सी पे अढ़लेता कोल्ड ड्रिंक पी रहा था.

"तुम सही कह रहे हो,विजयंत पर 1 बात बताओ.जिस लड़की से मैं प्यार करता था,जिसकी ज़िंदगी सँवारने का वादा किया था मैने,इस दयाल की वजह से उसे भी पूरी ज़िंदगी तकलीफें उठानी पड़ी..& वो दयाल..वो तो अपने पसनद की ज़िंदगी अपनी शर्तो पे जीता रहा.तो क्या उसे सज़ा नही मिलनी चाहिए?",देवेन की आवाज़ मे दर्द की कराह सुनाई दे रही थी.विजयंत कुच्छ नही बोला.उसे देवेन की बता सही लग रही थी.

"अब अगर इस काम मे मुझे अपनी जान भी गँवानी पड़े तो मुझे परवाह नही.",कुच्छ देर खामोशी च्छाई रही जिसे देवेन ने ही तोड़ा,"तुम बताओ,विजयंत..जब तुम्हे पता चलेगा कि तुम्हारे इस हाल का ज़िम्मेदार कौन है तो तुम क्या करोगे?"

विजयंत देवेन को देखने लगा..क्या करेगा वो?..क्या करना चाहिए उसे?..उसे तो कुच्छ याद नही था तो उसे कैसे समझ आता की उसके साथ असल मे हुआ क्या था जोकि उसकी याददाश्त चली गयी थी..रंभा & देवेन कहते थे कि वो झरने से गिरा था & उसे चोट लगी थी..तो क्या किसी ने धकेला था उसे या कुच्छ और हुआ था?..पर हक़ीक़त तो ये ही थी ना की उसे कुच्छ याद नही तो उसे क्या पता की वो क्या करेगा..!",पता नही."

उसके जवाब मे देवेन हैरत से उसे देखने लगा.दोनो कुच्छ देर 1 दूसरे को देखते रहे & उसके बाद 1 साथ खिलखिला के हंस पड़े.

रंभा अपने ड्रेसिंग टेबल के शीशे मे खुद को निहारते हुए पीली सारी लपेट रही थी.वो झुकी तो स्लीव्ले ब्लाउस के गले मे से उसकी चूचियो के बड़े से हिस्से का अक्स शीशे मे दिखा & वो मुस्कुरा उठी.अभी-2 उसने मेकप से उनके ब्लाउस के गले मे से झँकते हिस्सो पे पड़े महादेव शाह के होंठो के निशानो को च्छुपाया था.उसने सारी लपेट के आँचल सीने पे डाला.सारी के झीने कपड़े मे से उसका सपाट पेट & गोल नाभि झलक रहे थे.उसने थोड़ा घूम के पीछे का हिस्सा देखा.ब्लाउस की बॅक बहुत गहरी या कहिए कि थी ही नही.पीठ के पार 4 हुक्स के सहारे 1 पतली पट्टी ने उसे उसकी छातियो पे कस रखा था.सारी थोड़ी नीचे से बँधी गयी थी ताकि उसकी दिलकश कमर देखने वालो को घायल करती रहे.उसने पैरो मे हाइ हील की सॅंडल्ज़ पहनी & बॅग उठा निकल गयी.बाहर जिस मर्द ने भी उसे देखा,कसी सारी मे उभरते उसके कटाव को देख अपने लंड को च्छुए बिना नही रह सका.

उन सबसे बेख़बर रंभा अपने दफ़्तर पहुँची.वो तो सिर्फ़ 1 ही शख्स के लिए सजी थी-अपने दुश्मन महादेव शाह के लिए.दोनो को आज कहा मिलना था,ये उन्होने तय नही किया था बस वक़्त मुक़र्रर था,2 बजे.रंभा ने सवेरे ही समीर के ब्लॅकबेरी से उसके अगले 15 दिनो के अपायंट्मेंट्स की लिस्ट उस वक़्त निकाल ली थी जब वो नहा रहा था.इस वक़्त वो उस काग़ज़ को देखते हुए ट्रस्ट फिल्म्स की उन प्रोडक्षन्स के शेड्यूल को देख रही थी जिनमे कामया काम कर रही थी.

रंभा ने देखा ठीक 10 दिन बाद समीर के शेड्यूल मे दोपहर 2 से लेके शाम 6 बजे तक के बीच कोई अपायंटमेंट नही था.अब इत्तेफ़ाक़ ऐसा था कि अगले 10 दिनो तक सिर्फ़ 1 दिन के ब्रेक के साथ कामया भी केवल ट्रस्ट फिल्म के लिए ही शूटिंग कर रही थी & उसकी छुट्टी भी उसी रोज़ थी जिस रोज़ समीर दोपहर 4 घंटे के लिए कुच्छ नही कर रहा था.रंभा को उसके काम की जानकारी मिल गयी थी.उसने कुच्छ & काम निपटाए & 2 बजे तक का वक़्त किसी तरह कटा.

अपने आशिक़ से मिलने की आस मे उसकी चूत मे अभी से ही कसक उठने लगी थी.1.30 पे उसने काम ख़त्म किया & अपने कॅबिन से जुड़े बाथरूम मे जाके पहले खुद को शीशे मे निहारा & फिर दफ़्तर से निकल गयी.अभी तक शाह ने फोन नही किया था & उसे अब लगने लगा था कि कही वो आज की मुलाकात रद्द ना कर दे.बेसमेंट पार्किंग मे वो अपनी कार के पास पहुँची ही कि किसी ने उसे पीछे से बाहो मे भर लिया.वो चौंकी & चीखी मगर 1 मज़बूत हाथ उसके मुँह पे आ लगा.

उस जिस्म के एहसास को वो बहुत अच्छे से पहचानती थी.अपने मुँह पे दबे हाथ को रंभा ने चूमा तो उसे चौंकाने वाले शख्स ने उसे घुमाया & अपनी बाँहो मे भर लिया.शाह आज खुद अपनी माशुका को लेने आया था.दोनो 1 दूसरे से लिपटे 1 दूसरे को चूम रहे थे.रंभा तो उसकी ज़ुबान के एहसास से ही मस्त हो गई थी & अपनी छातियो को शाह के सीने पे रगड़ रही थी.शाह भी उसकी कमर को मसल रहा था.तभी किसी कार के आने की आवाज़ आई तो शाह ने उसे खींचा & अपनी कार मे बिठा लिया.

देवेन & विजयंत मेहरा 1 साथ चौंक के उठ बैठे.1 काले शीशो वाली काली कार बहुत धीमे-2 उनके घर के सामने से जा रही थी.उस कार ने उनकी सड़क के 2 चक्कर लगाए.देवेन ने छत पे जाके च्छूप के देखा,वो कार उनके पूरे मोहल्ले का चक्कर लगा रही थी.जो भी था होशियार था.देवेन का दिल किया की दौड़ता जाए & उस कार को रोक अंदर से ड्राइवर को निकाल ले जोकि उसे पूरा यकीन था कि दयाल ही होगा.

देवेन ने नीचे आ विजयंत को नज़र रखने का इशारा किया & 1 मोबाइल उसे थमाया & फिर दूसरा मोबाइल ले पीछे के रास्ते निकल अपनी कार मे बैठ गया.विजयंत ने देखा कार सामने वाले घर के सामने रुकी पर उसमे से कोई उतरा नही,कार 3-4 मिनिट खड़ी रही & फिर वाहा से चली गयी.विजयंत ने फ़ौरन ये बात देवेन को बताई जोकि मोहल्ले के बाहर अपनी कार मे बैठा था.जैसे ही काली कार बाहर आई देवेन उसके पीछे लग गया.

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महादेव शाह ने अपनी कार के काले शीशो का फायडा उठाते हुए रंभा को बाहो मे भरा & दोनो दीवानो की तरह 1 दूसरे को चूमने लगे.उनके हाथ 1 दूसरे के जिस्मो पे किसी 1 जगह नही टिक रहे थे.शाह उसकी लगभग नंगी पीठ देख के ही बावला हो गया था & उसकी चिकनी त्वचा को सहलाते हुए उसके आँचल को हटाता ब्लाउस के उपर से ही उसकी चूचियो को दबा रहा था.उसके हाथो की छुअन महसूस करते ही रंभा के निपल्स कड़े हो गये & ब्लाउस के कपड़े मे उनका नुकीला उभार सॉफ झलकने लगा.तब शाह को एहसास हुआ की उसकी महबूबा ने ब्रा नही पहना है.वो & जोश मे भर गया & उसके क्लीवेज को चूमने लगा.उसके सीने को अपने होंठो से तार करते हुए उसने आँखो के कोने से देखा की 1 बार फिर बेसमेंट खाली था.

उसने फ़ौरन रंभा को छ्चोड़ा & कार से उतरा.उसके बाद उसके दरवाज़े की तरफ गया & खोल उसे भी उतरा.रंभा की सारी का आँचल ज़मीन पे था & वो तेज़ साँसे ले रही थी.शाह ने 1 पल उसके सीने से लेके उसके पेट तक नज़र फिराई.रंभा को उसकी आँखो मे सिफ वासना दिखी & उसकी चूत उसकी नज़रो की तपिश से & कसमसाने लगी,"कोई हमे देख ना ले?"

रंभा के डर को अनदेखा करते हुए शाह ने उसे बाहो मे भर घुमाया & कार के बॉनेट पे झुका दिया.उसके हसरत भरे हाथ उसकी पीठ से लेके कमर तक घूमने लगे & उनके पीछे-2 उसके गर्म होंठ.रंभा आहें भरने लगी,".उउम्म्म्म..प्लीज़,महादेव..कोई देख लेगा तो ग़ज़ब हो जाएगा..ऊहह..!",शाह उसकी गुदाज़ कमर के माँस को चूस रहा था & उसके पेट को दबा रहा था.रंभा उसकी हर्कतो से अब मस्ती मे काँपने लगी थी.उसकी कार पार्किंग के 1 कोने मे खड़ी थी & वाहा दोनो के पकड़े जाने के कम ही चान्सस थे मगर फिर भी वाहा कभी भी कोई भी आ सकता था & रंभा को उसी बात का डर था.उसे हैरत हो रही थी कि जिस शाह ने उसे होशियार रहने की नसीहत दी थी,आज वही इस तरह की ख़तरे भरी हरकत कर रहा था.पर जो भी कर रहा था,था बहुत रोमांचक!

रंभा के जिस्म को जब शाह चूमता तो वो ऐसे कसमसाती मानो उसे उसकी च्छुअन से बहुत तकलीफ़ हुई हो.तकलीफ़ उसे हो रही थी,मस्ती 1 हद्द से आगे बढ़ती है तो उसकी शिद्दातको बर्दाश्त करना मुश्किल हो जाता है.इंसान के दिल मे 1 बेचैनी भर जाती है जो उसे परेशान करने लगती है लेकिन उस परेशानी से ज़्यादा सुकून पहुचाने वाली चीज़ शायद ही दुनिया मे दूसरी हो!

शाह अब ज़मीन पे बैठ गया था & रंभा की सारी कमर तक उठा उसकी जाँघो & टाँगो के पिच्छले हिस्सो को चूम रहा था.रंभा अभी भी उस से वाहा से चलने की मिन्नते कर रही थी पर शाह पे तो जैसे उसके जिस्म को वही भोगने का जुनून सवार था!शाह का लंड भी मौके के ख़तरे & रोमांच से ऐसा ताना था की उसे अब उसमे थोड़ा दर्द होने लगा था.

शाह ने देखा की रंभा ने आज भी वही कल वाली उसकी दी पॅंटी पहनी थी.उसका दिल उसकी चौड़ी,मक्खनी गंद को अपने दिए तोहफे मे लिपटे देख खुशी से भर उठा & वो उसकी फांको को दबाते हुए चूमने लगा.रंभा बॉनेट पे झुकी कार को थामे & ज़ोर से आहें भरने लगी.

थोड़ी देर तक उसकी जाँघो पे हाथ फिराते हुए उसकी गंद चूमने के बाद शाह ने पॅंटी को उतारा & अपनी पॅंट की जेब के हवाले किया.उसने उसकी गंद की फांको को ज़ोर से खींचते हुए फैलाया & उसकी चूत मे जीभ घुसा दी.

"उउन्नग्घह..प्लीज़..आहह..महा..देव....यहा नही..आहह..!",शाह की ज़ुबान ने बहुत जल्द ही उसकी चूत से रस की धार च्छुड़वा दी & फिर उसकी गंद के छेद को चाटने लगा.रंभा मस्ती मे कसमसाते हुए आहे भरी जा रही थी की शाह उठा & उसकी कमर को बाए हाथ मे जाकड़ दाए से अपनी पॅंट की ज़िप खोलने लगा.रंभा उसका इरादा भाँप गयी & उसका दिल धड़क उठा..अब बात हद्द से बाहर जा रही थी..कोई भी आ सकता था यहा & ये आदमी तो पागल हो गया था!

रंभा उसकी हाथ को हटा घूमी & उसे चूमने लगी पर शाह पे तो जैसे उसे वही चोदने का भूत सवार था.उसका बाया हाथ नीचे गया & उसकी सारी जोकि घूमने से नीचे आ गयी थी,को फिर से उठा उसकी टाँगे फैलाने लगा.रंभा फ़ौरन उसे रोकती हुई उसके सीने को चूमती नीचे बैठ गयी & उसके लंड को मुँह मे भर लिया.रंभा ने इतनी तेज़ी से उसके लंड को हिलाते हुए चूसा कि शाह की आ निकल गयी.वो उसके सर को पकड़ उसके मुँह को चोदने लगा.रंभा भी अपनी ज़ुबान से उसके सूपदे को छेड़ते हुए जल्दी-2 उसके लंड को चूस रही थी पर शाह का इरादा उसके मुँह मे झड़ने का था नही.

उसने फ़ौरन उसे उठाया & चूमा.रंभा की चूचियाँ उसके सीने मे दबी तो सुने नीचे देखा & पाया की ब्लाउस के गले मे से वो निकलने को बेताब हो रही हैं.शाह के सर पे तो जुनून सवार था.उसके हाथ रंभा की पीठ पे थे ही.उसने अपने हाथो से उसके ब्लाउस को पकड़ के खींचा & उसके हुक्स टूट गये.उसने ब्लाउस को बेदर्दी से उसके जिस्म से अलग कर फेंका & उसकी चूचियो को आपस मे दबाते हुए चूसने लगा.रंभा के होंठ खुल गये मगर उनमे से कोई आवाज़ नही आ रही थी.उसके अंदर मस्ती का सैलाब उमड़ आया था.वो 1 पब्लिक प्लेस मे लगभग नंगी अपने आशिक़ के बाहोमे खड़ी थी & इस ख़याल से उसका जिस्म रोमांच से थरथरा रहा था.

शाह कुच्छ देर उसकी चूचियो से खेलता रहा & फिर घुमा के कार के बॉनेट पे झुकाया & उसकी सारी उठा दी,"..प्लीज़..महादेव..ऊहह..!",शाह ने उसकी बाई टांग उठाके बॉनेट पे चढ़ा दी थी & उसकी चूत मे उंगली करने लगा था.शाह ने कुच्छ देर उंगली करने के बाद उसे हटा अपना लंड उसकी चूत पे लगाया & अंदर धकेला,"..आहह..महादेव..प्लीज़..!",शाह ने उसकी कमर को दाए & चूचियो को बाए हाथ मे दबोचा & चोदने लगा.लंड अंदर घुसते ही उसकी सख्ती & गर्मी,नाज़ुक चूचियो के बेदर्दी से पीसने & माहौल के रोमांच से रंभा मस्त हो गयी & आँखे बंद कर ली.अब तो उसे भी चुद के उस लंड से झड़ने की ही ख्वाहिश थी.उस बेचारी को क्या पता था कि शाह के दिमाग़ मे क्या चल रहा था!

शाह ने कुच्छ देर उसकी चूत को चोदा & फिर लंड बाहर निकाला.बॉनेट पे झुकी मस्ती मे चूर रंभा को लंड का निकलना बुरा लगा तो उसने आँखे खोली मगर अगले ही पल उसकी आँखे फैल गयी & बेसमेंट मे उसकी चीख गूँज उठी,"आईईईईईईयययययययईई..मररर्र्ररर गायययययीीईईईईईई..!"

बेसमेंट मे 1 गार्ड ड्यूटी पे था जो वाहा बने 1 कॅबिन मे बैठा खाना खा रहा था.रंभा की चीख सुन वो बाहर आया & चारो तरफ देखा पर जहा शाह रंभा की गंद मार रहा था उस जगह थोड़ा अंधेरा था & दोनो के जिस्म 1-2 कार्स की आड़ मे उसे नज़र नही आए.शाह & रंभा अपने खेल मे जुटे उसे देखते रहे.वो कुच्छ देर खड़ा रहा & फिर वापस अपने कॅबिन मे जा अपना खाना ख़त्म करने लगा.

शाह ने लंड उसकी चूत से निकाल उसपे थुका & फिर उसे लंड को उसकी गंद के संकरे सुराख मे घसा दिया.रंभा चीखी तो उसने बाए हाथ से उसका मुँह दबा दिया & दाए से उसकी कमर जकड़े उसकी गंद मारने लगा.कुच्छ देर बाद उसका दाया हाथ पेट से सरक चूत पे आ गया & उसे कुरेदने लगा.रंभा दर्द & मस्ती के मिलेजुले एहसास मे सब भूल गयी थी.उसकी चीखें शाह के हाथ मे दफ़्न हो रही थी.

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देवेन उस काली कार से दूरी बनाए हुए उसके पीछे चल रहा था.शाह शहर के बीचोबीच के इलाक़े मे आ गया था जहा बड़े-2 दफ़्तर थे.देवेन ने देखा कि कार ट्रस्ट ग्रूप की 1 बिल्डिंग मे घुसी तो वो भी उसके पीछे हो लिया.उस बिल्डिंग मे ट्रस्ट फिल्म्स के अलावा 1-2 बाँक्स भी थे.गार्ड के पुच्छने पे देवेन ने बॅंक का ही नाम बताया.काली कार बेसमेंट पार्किंग मे गयी तो देवेन भी उसके पीछे-2 उस पार्किंग मे चला गया.

"उउन्नग्घह...आन्न्ग्ग्ग्घ्ह्ह्ह्ह्ह्ह..!",रंभा घुटि-2 आवाज़ मे आहे भर रही थी.उसकी चूत & गंद पे हुए दोतरफे हमले से उसके जिस्म ने हथियार डाल दिए थे & वो झाड़ रही थी.उसके जिस्म के दोनो पूर्कशिष सुराख अपनी मस्तानी जकड़न मे शाह के लंड & उंगली कस रहे थे & उसे भी झड़ने पे मजबूर कर रहे थे.रंभा अपनी गंद मे शाह के गर्म वीर्य को महसूस कर मस्ती मे पागल हो रही थी.रोमांच & मस्ती मे उसके झड़ने की शिद्दत बहुत बढ़ गयी थी.

झड़ने के बाद शाह उसकी पीठ पे झुक गया था & उसके मुँह से हाथ हटा उसे चूम रहा था,"..आप बहुत ज़ुल्मी हैं..!",रंभा आशिक़ से मचल रही थी,"..उउंम..नही..",उसने उसके होंठो की पेशकश ठुकराई तो शाह ने प्यार भरे बोल बोल उसे मनाया & उसके गुलाबी होंठो के रसको चूसने मे आख़िरकार कामयाब हो गया.

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क्रमशः.......
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Reply
11-03-2018, 02:11 AM,
#89
RE: Porn Hindi Kahani जाल
जाल पार्ट--90

गतान्क से आगे......

तभी दोनो को किसी कार के आने की आवाज़ सुनाई दी.शाह ने फ़ौरन लंड बाहर खींचा & रंभा की सारी नीचे कर उसे कार मे बिठाया,फिर वही ज़मीन पे गिरे उसके बॅग & फटे ब्लाउस को उठाया & उसे थमाके खुद कार मे बैठ गया.उसने कार स्टार्ट की तभी 1 और कार पार्किंग मे आई.रंभा ने देखा & उसके मुँह से हैरत भरी आवाज़ निकलते-2 बची..सामने वाली कार देवेन की थी.रंभा ने बॅग से अपना मोबाइल निकाला & पहले शाह को कनखियो से देखा..वो कार निकालने मे मशगूल था.

काली कार वाहा आई & रुक गयी.देवेन 1 खाली जगह मे कार लगा उसके ड्राइवर के उतरने का इंतेज़ार कर रहा था.काली कार का दरवाज़ा अंदर से खुला & वो बाहर की तरफ धकेला ही जा रहा था कि कुच्छ देख वो रुक गया.शाह की कार बाहर निकल रही थी & वो काली कार का ड्राइवर शायद उसे देख रुक गया था.देवेन भी शाह की कार को देख रहा था मगर उसे पता नही था कि अंदर कौन है.

तभी वो चौंक गया,काली कार के ड्राइवर ने कार स्टार्ट कर उसे तेज़ी से एग्ज़िट की तरफ बढ़ा दिया था.ठीक उसी वक़्त लिफ्ट आई & उसमे से 2 लोग उतर अपनी कार की तरफ बढ़े.देवेन ने अपनी कार काली कार के पीछे लगाई पर तभी वो दो लोग अपनी कार मे बैठ उसे रिवर्स कर उसी की कार के सामने ले आए थे.देवेन ने झल्ला के हॉर्न बजाया पर रास्ता सॉफ होने 2 मिनिट लगे & जब वो बाहर आया तो काली कार नदारद थी.वो आधे घंटे आस-पास के इलाक़े को छानता रहा मगर वो कार नही मिली.

रंभा मोबाइल पे मेसेज टाइप कर रही थी जब महदेव शाह ने उस से मोबाइल छीन पीछे की सीट पे फेंका & दाए हाथ से स्टियरिंग संभाले बाए से उसे अपनी ओर खींचा & चूमते हुए कार चलाने लगा.रंभा समझ गयी की अब मेसेज करना ख़तरे से खाली नही & फिर पार्किंग मे हुई चुदाई के बाद वो बहुत मस्त भी हो गयी थी.उसने बाया हाथ शाह के लंड पे रखा जोकि अभी भी उसकी पॅंट से बाहर था & उसके बाए गालो को चूमने लगी.

कार 1 सिग्नल पे रुकी तो शाह ने उसके सीने पे पड़ा आँचल हटाया & उसकी चूचियो चूसने लगा.रंभा सीट पे आडी उसकी ज़ुबान से मस्त होने लगी..कितना मस्ताना एहसास था ये!..वो शहर की भीड़ के बीचोबीच थी..उसकी खिड़की के बाहर 1 बाइक पे लड़का बैठा था..हर तरफ लोग थे पर किसी को ये खबर नही थी कि वो कार मे नगी थी & उसका आशिक़ उसकी चूचियाँ पी रहा था..उफफफ्फ़..रंभा ने आँखे बंद कर शाह के बॉल नोचे!

कुच्छ देर बाद बत्ती हरी हुई तो शाह ने महबूबा की चूचियाँ छ्चोड़ी & कार अपने गहर की तरफ बढ़ा दी.गहर पहुँचते ही गेट के बाहर खड़े दरबान ने सलाम ठोनकतेहुए गेट खोला & कार अंदर दाखिल हो गयी.दरबान गेट के बाहर था & आज भी शाह का घर बिल्कुल सुनसान था.

रंभा के कार से उतरते ही शाह ने उसे बाहो मे भर लिया & वही खुले मे ही उसे चूमने लगा.उसे खुद पे हैरत हो रही थी..इस लड़की मे ऐसी क्या कशिश थी..क्या जादू था जो वो इस तरह दीवानो सी हरकतें कर रहा था!..रंभा ने उसकी शर्ट पकड़ ज़ोर से खींची तो उसके बटन्स टूट के बिखर गये.रंभा ने कमीज़ को उसके जिस्म से अलग किया & उसके निपल्स को चूसने लगी.

शाह उसकी पीठ पे हाथ फिरा रहा था.रंभा उसके सीने को चूमती नीचे झुकी & उसकी पॅंट भी उतार दी.अब शाह पूरा नंगा था & वो सिर्फ़ सारी मे.वो शाह के लंड को चूसने मे जुट गयी तो शाह गाड़ी की बॉनेट से टिक के खड़ा हो गया & उसके बालो मे उंगलिया फिराने लगा.रंभा शाह के आंडो को चूस रही थी & अपनी उंगली से उसके लंड के छेद को हौले-2 छेड़ रही थी.शाह के लंड मे उसके छुने से सनसनी दौड़ गयी.उसने रंभा को पकड़ के उपर उठाया तो रंभा ने उसके गले मे बाहे डाल दी & उसे चूमने लगी.

शाह उसकी मांसल कमर & गुदाज़ गंद को सहलाते हुए उसकी किस का जवाब दे रहा था.शाह के गर्म हाथो की हरारत रंभा को फिर से मस्ती मे बावली कर रहे थे.रंभा चूमते हुए आहे भरने लगी थी & आगे होके अपनी चूत शाह के लंड पे दबा रही थी.अब उसे बस वो लंड अपनी चूत मे चाहिए था.शाह ने उसकी गंद की कसी फांको को पकड़ा & बाहर की ओर फैलाया तो रंभा ने आह भरते हुए किस तोड़ी & सर पीछे झटका.

उसके ऐसा करने से रंभा की चूचियाँ शाह के सामने उभर गयी & उसने अपना मुँह उनसे लगा दिया.रंभा ने भी चूचियाँ आगे उचका दी ताकि उसका आशिक़ आराम से उन्हे चूस सके.रंभा के जिस्म मे बिजली दौड़ने लगी.शाह उसके निपल्स को दन्तो से काटने के बाद पूरी की पूरी चूची को मुँह मे भर ज़ोर से चूस्ता तो वो सिहर उठती.शाह का दिल उसके मस्ताने उभारो को दबाने का किया तो उसने उसकी कमर पकड़े हुसे उसे घुमा के बॉनेट से लगाया & फिर उसकी कमर पकड़ उसे उसपे बिठा दिया.

रंभा ने अपनी टाँगे खोल उसे आगे खींचा तो उसने उसकी चूचिया पकड़ ली & मसलते हुए चूसने लगा.रंभा पीछे झुकती हुई आहे भर रही & अपनी ज़ूलफे झटक रही थी.उसके हाथ अभी तक शाह के सर से लगे अपने सीने पे उसे दबा रहे थे मगर अब उसकी चूत की कसक बहुत ज़्यादा बढ़ गयी थी.रंभा के हाथ शाह के सरक के नीचे उसकी पीठ से होते हुए उसकी गंद पे आए & उसे दबाया.

शाह उसका इशारा समझ गया & उसके होंठ रंभा की चूचियो से फिसलते हुए उसके पेट के रास्ते उसकी चूत तक पहुँचे.थोड़ी देर उसने बॉनेट पे बैठी रंभा की अन्द्रुनि जाँघो को चूमा & फिर उसकी चूत मे जीभ फिराने लगा.रंभा का जिस्म झटके खाने लगा & वो मस्ती मे आहें भरते हुए अपनी टाँगो से शाह के जिस्म को & अपने हाथो से उसके सर को अपनी चूत पे दबाने लगी.शाह काफ़ी देर उसकी चूत चाटता रहा & जैसे ही उसने महसूस किया कि वो झड़ने की कगार पे है वो खड़ा हो गया & उसकी जंघे थाम अपना लंड उसकी चूत मे धकेला.

रंभा ने उसके कंधे थाम लिया & अपनी जंघे पूरी फैला उसके लंबे & बेहद मोटे लंड को चूत मे घुसने मे मदद की.वो उस से चिपेट गयी & उसके बाए कंधे पे ठुड्डी टीका उसकी पीठ & गंद से लेके उसके बालो तक बेसब्र हाथ चलाती उस से चुदने लगी.शाह के धक्के सीधे उसकी कोख पे पद रहे थे & उसके जिस्म मे मज़े की धाराएँ बहने लगी थी.चाँद धक्को के बाद उसके नाख़ून शाह के जिस्म को कहरोंछने लगे & वो झाड़ गयी.

झाड़ते ही वो निढाल हो बॉनेट पे लेट गयी.शाह ने बाया हाथ उसके पेट पे रखा & दाए से उसकी चूचिया मसलता उसे चोदने लगा.बंगल के खुले अहाते मे चिड़ियो की चाहचाहाहट के साथ दोनो की आहें,दोनो के जिस्मो के टकराने की आवाज़ & चुदाई से बॉनेट मे होती आवाज़ गूँज रही थी.

रंभा ने अपने सीने को मसल्ते आशिक़ के हाथो के उपर अपने हाथ जमा दिए थे & अपनी टाँगे उसकी कमर पे कसे उसकी चुदाई से पागल हुए जा रही थी.शाह भी बस अब उसकी चूत मे झड़ना चाहता था.वो आगे झुका & रंभा के कंधो के नीचे से हाथ लगाते हुए उसे अपनी बाहो मे भर लिया & उसके चेहरे को चूमते हुए धक्के लगाने लगा.रंभा भी उसके जिस्म को बाहो मे भर उसे खरोंछती अपनी कमर उचकाती उसका भरपूर साथ दे रही थी.

"आन्न्ग्घ्ह्ह्ह्ह्ह्ह...!"

"ओह..!",रंभा शाह की चुदाई से बहाल हो कराही & झाड़ गयी.झाड़ते ही उसकी चूत ने शाह के लंड को दबोचा & वो भी आपे से बाहर हो वीर्य उगलने लगा.दोनो ने मंज़िल पा ली थी & अब बहुत सुकून था उनके चेहरो पे पर दोनो को पता था कि ये तो बस पहला पड़ाव है.अभी दोनो को शाम तक इस सफ़र को करना था & उसमे ऐसी काई मंज़िले तय करनी थी.

वो काली कार शाह के बंगल के बाहर आई & रुक गयी & उसका शीशा कुच्छ इंच नीचे हुआ,अभी भी उसके ड्राइवर की शक्ल च्छूपी थी.जब दोनो प्रेमियो ने साथ-2 मंज़िल पा के अपनी मस्तानी आहो से उसका इज़हार किया तो वो आवाज़ बाहर बैठे दरबान के कानो & उस कार के ड्राइवर तक पहुँची.दरबान अपने मालिक की हर्कतो से अच्छी तरह वाकिफ़ था & वो बैठा-2 मुस्कुराया & उस कार के ड्राइवर ने आवाज़ें सुनते ही शीशा बंद किया & कार वापस ले ली.

उस कार से बेख़बर शाह ने अपनी माशुका को अपनी बाहो मे उठाया & उसके हुस्न & जवानी का और लुफ्त उठाने के मक़सद से बंगल के अंदर चला गया.

“क्या हुआ?”,देवेन के वापस लौटते ही विजयंत मेहरा ने उस से सवाल किया.देवेन ने कंधे झटके जैसे उसे भी कुच्छ पता नही.विजयंत के माथे पे उसका जवाब सुन शिकन पड़ी तो उसने बताया कि कैसे उसने काली कार को खो दिया.

“हूँ..अच्छा,देवेन क्या ऐसा हो सकता है कि उस काली कार वाले को तुम्हारे पीछा करने का पता चल गया हो & उसने तुम्हे चकमा दिया हो?”

“लगता तो नही पर पक्का नही कह सकता.”

“तब तो हमारे पास तुम्हारी इश्तेहार मे दी तारीख तक इंतेज़ार करने के अलावा & इस सामने वाले घर पे नज़र रखने के अलावा & कोई चारा नही.”

“हाँ.”,देवेन ने ताकि आवाज़ मे जवाब दिया.उसके दिमाग़ मे बार-2 पिच्छले घंटे की बाते घूम रही थी.कभी उसे खुद पे गुस्सा आता कि क्यू उसने उस कार को नज़रो से ओझल होने दिया तो कभी वो इस सोच मे डूब जाता कि क्या सचमुच दयाल ही था उस कार मे.कुच्छ देर बाद उसने इस फ़िज़ूल की जद्दोजहद को अपने ज़हन से निकाला & रंभा का नंबर मिलाने लगा.घंटी बजती रही पर उसने फोन नही उठाया.देवेन ने 2-3 बार & उसका नंबर ट्राइ किया & फिर छ्चोड़ दिया.उसने सोचा कि ज़रूर वो किसी काम मे फँसी होगी मगर किस काम मे ये उसे पता नही था.

रंभा उस वक़्त महादेव शाह के सीने पे हाथ जमाए उसके लंड को अपनी चूत मे लिए कूद रही थी.उसका मोबाइल वही कार की पिच्छली सीट पे बज रहा था पर उसे उस वक़्त फोन क्या खुद का भी होश नही था.शाह के सख़्त हाथ उसकी कोमल चूचियो को मसल रहे थे & उसकी मस्ती का कोई ठिकाना नही था.शाह 2 बार झाड़ उसके जिस्म मे झाड़ चुका था & इसी वजह से अब वो झड़ने मे ज़्यादा वक़्त ले रहा था.रंभा ने देखा की वो थोडा थका भी लग रहा था.अपनी उम्र के हिसाब से तो इस वक़्त उसे गहरी नींद मे होना चाहिए था मगर वो किसी जवान मर्द की तरह 2 घंटे मे तीसरी बार उसे चोद रहा था.ये तो शायद कयि जवानो के बस की बात भी नही थी..पर फिर भी मुझे इसका ख़याल रखना होगा..रंभा ने सोचा & उसी वक़्त उसकी चूत ने अपनी मस्तानी हरकते शुरू कर दी & नतीजतन उसके साथ-2 शाह भी झाड़ गया.

“ओह्ह..थक गयी मैं तो..”,रंभा हाँफती उसके सीने पे पड़ी हुई थी,”..पागल कर देते हैं आप!“,शाह ने उसे हंसते हुए अपने उपर से उतारा तो रंभा उसकी बाहो के घेरे मे उसके बाई तरफ लेट गयी.

“पागल तो तुमने मुझे कर दिया है.”,शाह उसके जिस्म को प्यार से सहला रहा था,”अच्छा,ये बताओ कि समीर की अपायंट्मेंट्स के बारे मे पता किया तुमने?”

“आप मुझे इसके अलावा..”,रंभा ने उसके सिकुदे लंड पे चपत लगाई,”..किसी और बात के बारे मे सोचने का वक़्त दें तब तो पता लगाऊं!”,शाह उसके जवाब पे हंस पड़ा & फिर उबासी ली.रंभा ने इसीलिए झूठ बोला क्यूकी पहले उसे सब कुच्छ देवेन को बताना था & उसके साथ मिलके सारी प्लॅनिंग करनी थी.

“थोडा आराम कीजिए अब.”,रंभा ने उसका सीना सहलाया.

“हूँ.”,शाह को भी नींद आ रही थी,”मैं इसलिए पुच्छ रहा था क्यूकी मुझे पता चला है कि बस 4 दिन बाद ही मानपुर प्रॉजेक्ट का टेंडर खुलने वाला है.”

“ ओह.आप बेफ़िक्र रहिए,मैं जल्द ही ये काम पूरा करूँगी.”

“ओके,डार्लिंग.”,रंभा ने उसके सीने पे सर रख दिया & उसका पेट सहलाने लगी.कुच्छ ही देर मे शाह सो गया.कुच्छ देर तो रंभा वैसे ही पड़ी रही पर जब उसे यकीन हो गया कि शाह गहरी नींद मे चला गया है तब वो धीरे से उसकी बाँह केग हियर मे से निकालते हुए उठी & शाह की अलमारी खोल उसका 1 ड्रेसिंग गाउन निकाल के पहना.

“हेलो,देवेन.सॉरी पहले आपका फोन नही उठाया.”,वो बाहर आके कार से अपना मोबाइल निकाल उसपे बात कर रही थी.

“तुम हो कहा?”

“शाह के घर पे.”,रंभा को ना जाने क्यू ये बात बताते हुए थोड़ी ग्लानि सी हुई.

“ओह.”,देवेन की आवाज़ मे भी कुच्छ ऐसा था जोकि रंभा को आहत कर गया,”..तो वो कहा है?”

“सो रहा है.”

“अच्छा.”,देवेन की आवाज़ कुच्छ ज़्यादा भारी थी मगर उसने फ़ौरन खुद को संभाला,”..अच्छा ये सुनो,कोई आया था इश्तेहार मे दिए पते पे?”

“क्या?!कौन?!”,रंभा की धड़कने भी तेज़ हो गयी थी.देवेन ने उसे पूरी बात बताई,”..अच्छा,देवेन.ये शाह समीर का आक्सिडेंट करवाने को उतावला हो रहा है.उपर से मानपुर का टेंडर भी बस 4 दिनो मे खुलने वाला है.”

“समीर की अपायंट्मेंट्स मिली तुम्हे?”

“हां.”

“तो ठीक है.तुम इस शाह से ये निकलवाने की कोशिश करो की आख़िर वो समीर के साथ ये हादसा करवाएगा कैसे?..किस जगह पे?..किस से?..सब कुच्छ मगर होशियारी से.ये मुझे बहुत शातिर इंसान लगता है.ऐसे इंसान को ज़रा भी शक़ हुआ तो वो खुद को बचाने के लिए कुच्छ भी कर सकता है.”

“आप चिंता ना करें,देवेन.मैं सब संभाल लूँगी.”

“मुझे पूरा भरोसा है रंभा पर तुम्हे यू अकेला छ्चोड़ने मे फ़िक्र तो होती ही है ना.”

“बस ये सब निपट जाए,देवेन फिर सुकून ही सुकून होगा.”

“बस ऐसा जल्द से जल्द हो.”

“हाँ.अच्छा अब फोन रखती हू.शाम को आऊँगी.”

“ठीक है..अरे!रूको,अभी फोन मत काटो.”,देवेन के ज़हन मे तभी 1 ख़याल आया.

“हां,क्या हुआ?”

“रंभा,अब तुम यहा अपनी कार से नही आना & ना ही सामने के दरवाज़े से.जब भी आना पहले मुझे फोन करना & आते वक़्त अपनी शक्ल च्छुपाए रखना.देखो,आज जो आया वो आगे भी आ सकता है.तुम्हारी शक्ल लोग पहचानते हैं.अब मैं नही चाहता कि अगर वो काली कार फिर आती है तो उसका ड्राइवर कही तुम्हे देख कोई अटकल ना लगाए.”

“ठीक है,देवेन.मैं ख़याल रखूँगी.अब रखू फोन?”

हां.बाइ!”

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Reply
11-03-2018, 02:12 AM,
#90
RE: Porn Hindi Kahani जाल
जाल पार्ट--91

गतान्क से आगे......

होटेल वाय्लेट की 25वी मंज़िल के अपने बाप के सूयीट के बिस्तर पे समीर कामया को अपनी बाहो मे कसे लेटा चूम रहा था.कहने की ज़रूरत नही के दोनो नंगे थे & उनके हाथ 1 दूसरे के नाज़ुक अंगो से खिलवाड़ कर रहे थे.समीर दाए हाथ की उंगली से उसकी चूत कुरेदता हुआ उसके उपर झुका बाए से उसकी दाई चूची दबाता उसके चेहरे को चूम रहा था & दोनो जिस्मो के बीच अपना बाया हाथ घुसा कामया उसके लंड को हिला रही थी.

"समीर,रंभा तलाक़ देने मे कोई आना कानी तो नही करेगी ना?",समीर ने उसे अभी-2 मानपुर वाले टेंडर के 4 दिनो के बाद खुलने की बात बताई थी & साथ ही ये भी बाते था कि उसके बाद वो अपने वकील के ज़रिए रंभा को तलाक़ देने की करवाई शुरू करवा देगा.

"नही,कामया.",समीर ने अपना हाथ हटा के उसकी जगह अपना मुँह उसकी छाती से लगा दिया.

"उउम्म्म्म....तो फिर हमारे इंतेज़ार के दिन ख़त्म हुए?"

"हां,मेरी जान."

"ओह,समीर!",कामया ने हाथ उसके लंड से हटा उसे बाहो मे भरा & उसे पलट के उसके उपर आ गयी.उसका हाथ दोबारा दोनो जिस्मो के बीच गया & समीर के सख़्त लंड को पकड़ चूत के मुँह पे रखा,"..आख़िरकार हम 1 हो ही जाएँगे!..कितनी जद्ड़ोजेहाद की हमने इस सब के लिए!"

"हां,मेरी जान.अब तुम मेरी रानी बनोगी & हम दोनो मिलके इस सारी मिल्कियत पे राज करेंगे.",समीर ने उसकी कमर जाकड़ नीचे से अपनी कमर उचकाई & लंड उसकी चूत मे घुसा उसकी चुदाई शुरू कर दी.

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रंभा के लिए महादेव शाह और उसका रिश्ता बस जिस्मानी था.उसे उसके साथ सोने मे जो मज़ा आता था वो अनूठा था पर शाह उसके लिए शक़ के घेरे मे खड़ा वो शख्स था जोकि शायद उसके ससुर विजयंत मेहरा की मौजूदा हालत का ज़िम्मेदार था & अब उसके पति समीर की ज़िंदगी लेने की भी सोच रहा था.पर उसने महसूस किया था कि शाह के जज़्बात अब केवल जिस्मानी नही रह गये थे बल्कि उसके दिल मे भी रंभा के लिए जगह बन गयी थी.

रंभा ने सोच लिया था कि अब वो इस पहलू को मद्देनज़र रख के आगे की चाले चलेगी & इसी सोच को ध्यान मे रख वो देवेन से बात करने के बाद वो अंदर बंगल की रसोई मे आ गयी थी & अपने सोते हुए आशिक़ के लिए खाना बनाने मे लग गयी थी.खाना लगभग तैय्यार ही था जब उसका मोबाइल बजा.उसने देखा उसकी सहेली सोनम का फोन था.

"हाई!सोनम,बोल कैसी है?",रंभा ने मुस्कुराते हुए फोन कान से लगाया & दूसरे हाथ से खाने को प्लेट मे निकालने लगी.समीर अपनी माशुका से मिलने लंच के वक़्त गया था & ये खबर किसी तरह सोनम को पता चल गयी & उसने उसे ये बात फ़ौरन बताना ठीक समझा तो फोन कर दिया.रंभा को अभी अपने पति & उसकी प्रेमिका की रंगरलियो मे खलल डाला नही था तो उसके लिए ये खबर अभी किसी काम की नही थी पर तभी उसे 1 ख़याल आया.

"अच्छा सुन,छ्चोड़ उन दोनो को.आज शाम तो मिल रही है ना?",दोनो ने शाम मिलने की बात पहले ही तय की थी.सोनम ने हां बोला तो रंभा ने उस से समीर के अगले 10-15 दिनो की अपायंट्मेंट्स की कॉपी साथ लाने को कहा.वो उसके ब्लॅकबेरी से ये जानकारी निकाल चुकी थी मगर सोनम से दोबारा उसका शेड्यूल मंगवाने मे कोई हर्ज नही था.कुच्छ देर सहेली से बाते करने के बाद उसने फोन साइलेंट मोड पे किया & अपने बॅग मे डाला,फिर खाना ट्रे मे सज़ा अपने आशिक़ को जगाने चल दी.

टेंडर खुलने वाला था & मानपुर प्रॉजेक्ट मिलने की उमीद मे समीर ने कुच्छ प्रॉजेक्ट्स को जल्द से जल्द निपटाने की बात सोची थी.इसके चलते इधर काम बढ़ गया था & प्रणव भी बहुत मसरूफ़ हो गया था पर उस मसरूफ़ियत मे भी उसने अपने असली मक़सद & उसमे उसका साथ दे रहे महादेव शाह के बारे मे सोचना नही छ्चोड़ा था.

शाह उसे शुरू से ही थोड़ा अजीब इंसान लगा था.वो अपने घर से बहुत कम निकलता था & उसके यहा बहुत लोग आते-जाते भी नही थे पर समीर के लिए उसके घर के दरवाज़े हुमेशा खुले रहते थे.उसे शायद प्रणव पे पूरा भरोसा था पर प्रणव के उसके बारे मे ख़यालात ऐसे नही थे & इसीलिए उसने सोच रखा था कि समीर को शाह के ज़रिए रास्ते से हटवाने के बाद वो उसी बात का इस्तेमाल कर शाह को अपने रास्ते से हटा देगा.

पर इधर चंद दिनो से शाह उसे बदला-2 नज़र आ रहा था.1-2 बार उसने उस से मिलने का वक़्त बदल दिया था & जब मिला तो ना जाने किस जल्दी मे दिखा.जब उसने समीर को मारने के प्लान के बारे मे पुछा तो उसने बात टाल दी & कहा की वो फ़िक्र ना करे,काम हो जाएगा.प्रणव को उसका रुख़ कुच्छ ठीक नही लगा पर अब वो क्या कर सकता था!वो बहुत आगे आ चुका था & अब मुड़ना नामुमकिन था.उसने तय किया की चाहे जो भी हो वो अगली मुलाकात मे शाह से इस बारे पे ज़रूर बात करेगा.

-------------------------------------------------------------------------------

शाह इस वक़्त अपने बिस्तर मे बैठा खुद को दुनिया का सबसे खुशनसीब इंसान समझ रहा था.कुच्छ ही देर पहले उसकी महबूबा ने उसे जगाके अपने हाथो से लज़ीज़ खाना खिलाया था & उसके बाद शाह ने उसे बाहो मे भर उसके जिस्म पे लिपटे अपने ड्रेसिंग गाउन की बेल्ट खोल दी थी.दोनो पलंग के हेडबोर्ड से टेक लगा के बैठे थे & शाह ने अपनी माशुका को बाई बाँह मे घेरा हुआ था.रंभा उसकी ओर चेहरा किए घूम के बैठी थी & अपनी चूचियो पे घूमते उसके दाए हाथ से मस्त हो रही थी.

"तुमने इतनी तकलीफ़ क्यू उठाई?बस इस इंटरकम से फोन करना था & कोई नौकर आ जाता..",शाह ने साइड-टेबल पे रखे फोन की ओर इशारा किया,"..और खाना बना देता.",शाह ने उसकी चूचियाँ मसली तो रंभा ने गाउन से बाई टांग निकालते हुए शाह की टाँगो पे चढ़ा दी.

"उउंम्म....",उसने अपना बाया हाथ शाह की छाती दबाते हाथ के उपर रख दिया & उसे दबाने लगी,"..लगता है आपको मेरा बनाया खाना पसंद नही आया?"

"नही,मेरी जान.तुम तो मुझे ग़लत समझ गयी.",शाह उसके गालो को चूमने लगा,"..इतना लज़ीज़ खाना तो मैने ज़िंदगी मे पहले कभी खाया ही नही!मैं तो बस ये कह रहा था कि मुझे तुम्हे तकलीफ़ उठाते देख अच्छा नही लगता.",शाह नंगा था & उसने रंभा के सीने से हाथ हटा उसकी जाँघ को पकड़ जब अपनी टांग पे और चढ़ाया तो उसका लंड रंभा की चूत से जा लगा.

"आपके लिए खाना बनाने मे तकलीफ़ कैसी!",रंभा थोड़ा आगे हुई & खुले गाउन से झँकति अपनी चूचियो शाह के बालो भरे सीने से सटा दी & उसके कंधो पे अपने हाथ रख दिए,"..1 बात कान खोल के सुन लीजिए..",उसने उसके बाए गाल पे जीभ की नोक फिराते हुए उसे बाए कान मे उतरा & फिर उसे छेड़ने के बाद दन्तो से कान को काटा,"..शादी के बाद हर रोज़ कम से कम 1 बार आपको मेरे हाथ का खाना खाना ही पड़ेगा."

"ठीक है.",शाह का हाथ गाउन मे घुस उसकी गंद को सहला रहा था,"..अब तो हम आपके गुलाम हैं & आप हमारी मल्लिका!",शाह की बात रंभा हंस दी.शाह ने उसकी गंद सहलाते हुए उसपे चिकोटी काट ली.

"आउच!",रंभा ने बाए हाथ से उसका दाया हाथ पकड़ लिया,"..ऐसे पेश आते हैं अपनी मल्लिका से?",उसने बनावटी गुस्सा दिखाया.

"ये तो प्यार है जानेमन.",शाह ने मुस्कुराते हुए उसकी गंद मे 1 उंगली घुसा दी तो रंभा चिहुनक के उस से & सात गयी.शाह उसके गले को चूमते हुए उंगली से उसकी गंद मारने लगा.रंभा उसकी टाँगो पे टांग चढ़ाए उसके लंड पे चूत को दबाने लगी.

"ओह..महादेव....डार्लिंग..अब जल्दी से मुझे अपनी दुल्हन बनाइए!",रंभा की मस्ती बिल्कुल सच्ची थी पर उसके मुँह से निकलते बोल बिल्कुल झूठे.कमरे मे लगे शीशे मे वो खुद को शाह की बाहो मे देखा & जोश मे आ गयी थी & यही हाल शाह का भी था,"..अब मुझसे & इंतेज़ार नही होता.बताइए ना..हाईईईईईईईईईई..",उंगली गंद मे कुच्छ ज़्यादा अंदर घुस गयी & उसी वक़्त उसका बाया निपल शाह के दन्तो के बीच आ गया,"..कब उस गलिज़ इंसान को मेरी ज़िंदगी से निकालेंगे ताकि मैं हर पल आपकी बाहो मेसुकून से गुज़ार साकु..?..आननह..!",चूत पे दब्ता लंड & गंद मे चलती उंगली ने रंभा को फ़ौरन झाड़वा दिया.

"ये तो तुम्हारे उपर है,जानेमन.तुम समीर की अपायंट्मेंट्स के बारे मे बताओ तभी तो मैं उसकी मौत का वक़्त मुक़र्रर करू.",शाह ने उंगली गंद से बाहर खींची तो मस्ती मे डूबी रंभा खुद ही उसकी गोद मे बैठ गयी.दोनो घुटने शाह के दोनो ओर बिस्तर पे जमा के उसने खुद को शीशे मे देखा तो शाह ने उसके कंधो से गाउन नीचे सरका उसे नंगी कर दिया.वो आगे झुका & उसकी चूचियो को हाथो मे भर खींचते हुए उन्हे चूसने लगा.

"उउन्न्ञणन्..वो तो बता दूँगी पर 1 बात बताइए उसे मारेंगे कैसे & फिर क्या हम फँसेगे नही उसके क़त्ल के जुर्म मे?",शाह ने उसकी चूचिया छ्चोड़ी & अपने लंड को उसकी चूत पे टीका के उसे नीचे बिठाया.रंभा आँखे बंद कर उसके लंड को अंदर लेने लगी.

"उसका क़त्ल नही होगा,1 हादसा होगा & हादसे के ज़िम्मेदार हम नही होंगे.",शाह की आवाज़ मे खून जमाने वाला ठण्दपन था.रंभा बेइंतहा मस्ती मे डूबी थी पर उस वक़्त शाह की आवाज़ की ठंडक से डर उसकी आँखे खुल गयी,"..सड़क पे 1 ट्रक उसकी कार से टकराएगा जिसमे उसकी मौत होगी.उसके बाद ट्रक ड्राइवर गिरफ्तार होगा.पता चलेगा कि वो नशे मे धुत था और उसे सज़ा होगी."

"पर कोई हमारे लिए क्यू फाँसी चढ़ेगा?",दोनो 1 दूसरे से जुड़े बैठे थे.चुदाई अभी शुरू नही हुई थी.

"फाँसी नही जैल होगी उसे.उसने जान बुझ के धक्का नही मारा था & मेरी जान,इस काम के लिए उसके परिवार को वो दौलत मिलेगी जो उसने सपने मे भी नही सोची होगी & फिर भी अगर किसी को इसके बारे मे पता चलेगा तो भी वो उस ड्राइवर से हमारे तक के सिरे को ढूंड नही पाएगा,ये मेरी गॅरेंटी है."

"& अगर समीर आक्सिडेंट मे बच गया तो?"

"ऐसा नही होगा.",शाह कुटिलता से मुस्कुराया,"..वो ड्राइवर ये पक्का करेगा कि पोलीस को समीर की बेजान लाश मिले.अगर समीर ट्रक के धक्के से नही मारा तो फिर ड्राइवर अपने हाथो से उसे मारेगा.",रंभा कुच्छ पल उसे देखती रही.उसे शाह से डर लगने लगा था पर इस वक़्त वो अपने दिल के जज़्बातो को ज़ाहिर करने की ग़लती नही कर सकती थी.वो भी शाह की तरह ही उसकी आँखो मे झँकते हुए मुस्कुराने लगी.

"आइ लव यू,महादेव!",वो आगे झुकी & शाह को इस शिद्दत से चूमा की वो सिहर उठा.रंभा ने काफ़ी देर बाद अपने लब उसके लाबो से जुदा किए & उसके चेहरे को हाथो मे भर उसकी आँखो से अपनी आँखे मिला दी.उसका चेहरा तमतमाया हुआ था,शाह को चूमते वक़्त उसका डर बहुत कम हो गया था & 1 विश्वास उसके अंदर आ गया था कि वो इस इंसान को अपनी उंगलियो पे जैसे मर्ज़ी नचा सकती है.इस ख़याल से उसे बहुत रोमांच हुआ जोकि उसके चेहरे पे सॉफ दिख रहा था.

"महादेव,1 बात का वादा कीजिए.",रंभा वैसे ही उसकी आँखो मे देख रही थी.

"किया मेरी जान."

"उस कामीने को मारने मे आप मुझे अपने साथ रखेंगे."

"क्या?!..तुम ये तकलीफ़ क्यू उठाओगी,मेरी रानी.तुम बेफ़िक्र रहो,मैं हू ना तुम्हारे साथ."

"बात वो नही है.आप जब भी अपने प्लान पे अमल करें तो मुझे अपने साथ रखें.मेरी दिली तमन्ना थी की अपने बेवफा पति को अपने हाथो से मारू.वो करना तो बेवकूफी होगी तो उसे मारने के प्लान को अंजाम देने मे मैं आपके साथ रह अपनी ये हसरत इस तरह पूरी करना चाहती हू.",शाह उसे गौर से देख रहा था..इतनी मोहब्बत थी इसे समीर से तभी तो इतनी नफ़रत भी है!..ये शिद्दत..ये जुनून उसकी मोहब्बत मे भी दिखता था & इसी ने उसके हुस्न के साथ मिलके उसपे जादू कर दिया था!..अब ये हुसनपरी मेरी है..सिर्फ़ मेरी..इसकी हर ख्वाहिश पूरी करूँगा मैं..चाहे कुच्छ भी हो जाए!

"ठीक है,रंभा.मैं तुम्हारी ख्वाहिश ज़रूर पूरी करूँगा.",रंभा आगे झुकी & अपने आशिक़ को चूमने लगी.शाह ने उसे बाहो मे भरा & उसकी किस का जवाब देते हुए कमर उचकते हुए चुदाई शुरू कर दी.

देवेन 1 झटके से उठ बैठा.वो दोपहर का खाना खा के सोने चला गया था.कुच्छ देर पहले हुई बातो को सोचते हुए वो बस सोने ही वाला था कि 1 ख़याल उसके दिमाग़ मे बिजली की तरह कौंधा..दयाल जितना शातिर था उतना ही ख़तरनाक भी..ड्रग्स के धंधे के आकाओं को भी झांसा दिया था उसने & इंटररपोल जैसी एजेन्सी को भी..वो काली कार कही बस इलाक़े का मुआयना करने तो नही आई थी..हमले के पहले का मुआयना!

देवेन बिस्तर से उतरा & फटाफट समान पॅक करने लगा.अपना समान बाँधने के बाद उसने विजयंत मेहरा को जगाया & उसे सारी बात बताई,"पर अब हम जाएँगे कहा?",विजयंत जल्दी-2 अपना समान अपने बॅग मे डाल रहा था.

"पता नही.पर इस शहर से बाहर जाना पड़ेगा.",देवेन रंभा का फोन लगा रहा था पर वो फिर से फोन नही उठा रही थी.उसने कुच्छ सोच के इस बार अमोल बपत को फोन लगाया.

"क्या यार!तू तो गायब ही हो गया."

"बात ही कुच्छ ऐसी थी,बपत साहब."

"अच्छा & यार..तुम भी कमाल हो.",बपत हँसने लगा,"..अख़बार मे इशतहार देने से वो साला आ जाएगा क्या?!",बपत ने इशतहार देख लिया था.

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क्रमशः.......
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