Long Sex Kahani सोलहवां सावन
07-06-2018, 02:27 PM,
RE: Long Sex Kahani सोलहवां सावन
मुख सेवा 








भइया से कुछ देर में नहीं रहा गया और उन्होंने लगाम अपने हाथ में ले ली। 

अब बजाय मैं भैय्या का लंड चूसने के , वो मेरा मुंह चोद रहे थे ,पूरी ताकत से। 


एक से एक धक्के , और कुछ ही देर में मैं गों गों कर रही थी। उनका मोटा सुपाड़ा सीधे मेरे गले के अंदर तक धक्के मर रहा था जोर जोर से। मेरे गाल फूले हुए थे , आँखे उबल रही थीं , मैं बुरी तरह चोक कर रही थी , 





लेकिन उन्होंने जोर से मेरा सर पकड़ के , मेरे किशोर मुंह में , एकदम अंदर तक अपना मेरी कलाई से भी मोटा लंड ठूंस रखा था और बार बार धक्का मार रहे थे। 


५-६ मिनट मैंने उनका साथ दिया , लेकिन मेरे गाल अब दुखने लगे थे। 

एक पल के लिए वो रुके तो मैंने अपना मुंह बाहर हटा लिया। 


लंड खूब तन्नाया ,मोटा कड़ा ,पगलाया ,... 


मुझे एक शरारत सूझी , जैसे लड़कियां बबल गम के थूक के गोले बनाती हैं , एक खूब बड़ा सा गोला बना के उनके मोटे सुपाड़े पर सीधे सीधे , वो खूब गीला लसलसा हो गया। फिर एक बार और थूक का गोला , ... 

कामिनी भाभी मेरी शरारत भरी हरकतों को देख के मुस्करा रही थी। 

मैंने भैया की लालची आँखों की ओर देखा और उनकी चोरी पकड़ी गयी। 

चूसने चाटने में , मेरी साडी जो बस ऐसे ही लपेटी थी कब की मेरे उभारों से हट चुकी थी और सिर्फ एक पतले से छल्ले की तरह मेरी पतली कमरिया में बस टंगी सी थी। 

उनकी नदीदी आँखे मेरे गोल गोल ,कड़े कड़े ,किशोर उभारों पे टंगी थी ,प्यासी बेताब। 

मैंने मुस्करा के एक बार उनकी ओर देखा और फिर अपनी गुरु कामिनी भाभी की ओर ,


दोनों जोबन के बीच मैंने उस शैतान लंड को पकड़ लिया और थोड़ी देर अपनी चूंचियों से बस दबाती रही। 






और थोड़ी देर में ही आगे पीछे ,ऊपर नीचे , ... यही तो सिखाया था कामिनी भाभी ने चोदना सिर्फ लड़कों का काम थोड़े ही है। 

मैं अपनी गोल गोल चूंची से , अपने नए नए आये उभारों से उन्हें चोद रही थी , और भैया सिसक रहे थे ,तड़प रहे थे। 


एक किशोर कुँवारी कन्या अपने छोटे छोटे उभारों के बीच किसी मर्द के मोटे मूसल ऎसे लंड को लेकर आगे पीछे करे ,बस आप सोच सकते हैं कैसा लगेगा , भइया को वैसे ही लग रहा था। 

लेकिन उनके गोल गोल सुपाड़े को देख के मुझसे रहा नहीं गया। दोनों उँगलियों से जो मैंने उसे दबाया तो गौरेया की चोच की तरह उसने चियार दिया , वही पी होल ( पेशाब का छेद ) और बस , मेरी जीभ की नोक सुरसुरी करने लगी। 

टिट फक और साथ में जीभ की नोक से पी होल में सुरसुरी ,


हममें से किसी को ये ध्यान नहीं था की खिड़की जो बाहर धान के खेत और आम के बगीचे की ओर खुलती थी पूरी तरह खुली थी , धान के खेत में रोपनी वालियों के गाने की वाजें अभी भी सुनाई पड़ रही थीं ,... 






असल में न मुझे फरक पड़ता था न भैय्या को। हम दोनों को एक दूसरे के अलावा कुछ भी न सुनाई पड़ रहा था न दिखाई। 


लेकिन भाभी ने भैय्या को हड़काया ,

" तुम बिस्तर पर बैठे हो , अरे गुड्डी बिचारी कब से जमींन पर , ... तुम्हारी छोटी बहन है , ज़रा उसे प्यार से गोद में तो बिठाओ। "
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07-06-2018, 02:27 PM,
RE: Long Sex Kahani सोलहवां सावन
भैय्या की गोद में 



अब तक 


दोनों जोबन के बीच मैंने उस शैतान लंड को पकड़ लिया और थोड़ी देर अपनी चूंचियों से बस दबाती रही। 

और थोड़ी देर में ही आगे पीछे ,ऊपर नीचे , ... यही तो सिखाया था कामिनी भाभी ने चोदना सिर्फ लड़कों का काम थोड़े ही है। 

मैं अपनी गोल गोल चूंची से , अपने नए नए आये उभारों से उन्हें चोद रही थी , और भैया सिसक रहे थे ,तड़प रहे थे। 


एक किशोर कुँवारी कन्या अपने छोटे छोटे उभारों के बीच किसी मर्द के मोटे मूसल ऎसे लंड को लेकर आगे पीछे करे ,बस आप सोच सकते हैं कैसा लगेगा , भइया को वैसे ही लग रहा था। 

लेकिन उनके गोल गोल सुपाड़े को देख के मुझसे रहा नहीं गया। दोनों उँगलियों से जो मैंने उसे दबाया तो गौरेया की चोच की तरह उसने चियार दिया , वही पी होल ( पेशाब का छेद ) और बस , मेरी जीभ की नोक सुरसुरी करने लगी। 

टिट फक और साथ में जीभ की नोक से पी होल में सुरसुरी ,


हममें से किसी को ये ध्यान नहीं था की खिड़की जो बाहर धान के खेत और आम के बगीचे की ओर खुलती थी पूरी तरह खुली थी , धान के खेत में रोपनी वालियों के गाने की वाजें अभी भी सुनाई पड़ रही थीं ,... 

असल में न मुझे फरक पड़ता था न भैय्या को। हम दोनों को एक दूसरे के अलावा कुछ भी न सुनाई पड़ रहा था न दिखाई। 


लेकिन भाभी ने भैय्या को हड़काया ,

" तुम बिस्तर पर बैठे हो , अरे गुड्डी बिचारी कब से जमींन पर , ... तुम्हारी छोटी बहन है , ज़रा उसे प्यार से गोद में तो बिठाओ। "
/………………………..
और जैसे कोई फूल उठा ले , भैय्या ने मुझे उठा कर अपनी गोद में ,...




आगे 
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07-06-2018, 02:27 PM,
RE: Long Sex Kahani सोलहवां सावन
" तुम बिस्तर पर बैठे हो , अरे गुड्डी बिचारी कब से जमींन पर , ... तुम्हारी छोटी बहन है , ज़रा उसे प्यार से गोद में तो बिठाओ। "
/………………………..
और जैसे कोई फूल उठा ले , भैय्या ने मुझे उठा कर अपनी गोद में ,...







……………………….
... लेकिन मैं गोद में बैठी नहीं। 

शायद भाभी पहले से ही ताक में थी। 

भइया भी शायद ,... 

भाभी ने दोनों अंगूठों को पिछवाड़े के छेद में फंसा कर पूरी ताकत से , मेरी गांड चियार दी थी। 

और भैय्या ने अपना तन्नाया ,बौराया मोटा, कड़ा खूंटा सीधे मेरे छेद पे सेट कर दिया। उसके साथ ही उन्होंने मेरी पतली कटीली कमरिया में हाथ डाल के मुझे अपने मोटे गुस्सैल सुपाड़े पे दबाना शुरू कर दिया। 

भौजी ने मेरे छेद को चियार भी रखा था और भैय्या के खूंटे को भी एकदम से सीधे वहीँ ,और थोड़ी ही देर में ,सुपाड़ा मेरी गांड के छेद में फंस गया। 

भैया के दोनों हाथ अब मेरी कमर पे थे , और नीचे की ओर वो पूरी ताकत से अपने मोटे लंड पे पुल कर रहे थे। 

भौजी भी अब , उनके दोनों हाथ मेरे कंधे पे थे और वो खूब जोर जोर से मुझे नीचे की ओर ढकेल रही थीं 

मुझे भी कामिनी भाभी की सीख याद आ गयी थी , और मैं भी पूरी ताकत से अपनी पूरी देह का वजन , पूरी ताकत से नीचे की ओर अब मैं भी डाल रही थी। 

दर्द हो रहा था , एकदम फटा जा रहा था , छरछरा रहा था। लेकिन दाँतो से अपने होंठों को कस कस के काट के किसी तरह मैं चीख रोक रही थी , दर्द को घोंट रही थी। 

भैया का जोर कमर पे, भाभी का कंधे पे और मेरा खुद का प्रेशर ,... थोड़ी देर तक पूरी ताकत से। 


गप्पाक 

घचाक से मोटा सुपाड़ा मेरी गांड में समा गया। मेरी गांड ने जोर से भैय्या का सुपाड़ा भींच लिया , जैसे वो अब कभी नहीं छोड़ेगी उसे। 


भैय्या का एक हाथ मेरी पतली कमर पे छल्ले की तरह कस के चिपका हुआ था और उनका प्रेशर ज़रा भी कम नहीं हुआ। लेकिन दूसरा हाथ सीधे वहीँ जिसके लिए वो तब से ललचाये थे जब से उन्होंने पहली बार मुझे गाँव के मेले में देखा था। मेरे रसीले नए नए आये किशोर जोबन , जवानी के फूल ,

भैया का हाथ कभी उसे सहलाता ,कभी दबाता तो कभी निपल पकड़ के हलके से पुल कर लेता। 

दूसरा उभार भी अब उन्ही के कब्जे में था ,उनके होंठों के। कभी वह चूमते ,कभी चूसते और कभी काटते। 

साथ में भौजी की गालियां ,
" साल्ली, हरामजादी ,रंडी की जनी, छिनार अब लाख गांड पटक , सुपाड़ा तेरी गांड में अंडस गया है। अब बिना तेरी गांड मारे बाहर निकलने वाला नहीं , चाहे भोंसड़ी के तू खुशी ख़ुशी गांड मरवाये या रो रो के , भाईचोद अब तो तेरी गांड के चिथड़े उड़ने वाले हैं। तेरे सारे खानदान की गांड मारूं , मरवा ले अब गांड अपने भैय्या से। "

मेरे मुंह से निकलते रह गया , " भौजी आप के मुंह में घी शक्कर। " मैं भी तोसुबह से यही चाह रही थी। लेकिन भौजी की लगातार बह रही गाली गंगा में मुश्किल था कुछ कहना। 

हाँ पल भर के लिए मैं गांड में अंडसे मोटे सुपाड़े को भूल गयी और मैंने भी टाँगे लता की तरह भैया की कमर में कस के लपेट ली थी। मेरी बाहें भी उनकी पीठ से चिपकी थीं। और मैं अपने मस्त उभार भैय्या के चौड़े सीने पे जोर जोर से रगड़ रही थी , मेरे गुलाबी रसीले होंठ उनके होंठों को चूम ,चूस रहे थे। और कान भाभी की मस्त गालियों का मजा ले रहे थे। 


" हरामन की जनी , भंडुओं की रखैल , रंडी की औलाद तू तो पैदायशी खानदानी छिनार है। तेरा सारा खानदान गांडू है , क्यों इतना नखड़ा दिखा रही है गांड मरवाने में , भाईचोद। "

अचानक बहुत तेज दर्द हुआ। जैसे किसी ने तेजी से छूरा ,बल्कि तेज तलवार पूरी की पूरी एक बार में घुसा दी हो। 

हुआ ये की जब मस्ती में मैं डुबी थी , भैया को भाभी ने इशारा किया और भैय्या ने पूरी ताकत और तेजी से ,... कमर उचका के , उन्होंने दोनों हाथों से चूचियों को कस के दबोच रखा था और नीचे से अपना मोटा खूंटा पूरी ताकत से पुश किया। भाभी ने भी साथ में कंधे को जोर से दबाया , और ,... 

अंदर तक ,...
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07-06-2018, 02:28 PM,
RE: Long Sex Kahani सोलहवां सावन
पूरा अंदर , ... 



अंदर तक ,... 
…………….

दरेरते रगड़ते छीलते घिसटते गांड का छल्ला पार हो गया था। 

मैं बड़ी जोर से चीखी ,और किसी ने भी मेरी चीख रोकने की कोशिश नहीं की। भैय्या ने भी नहीं ,

भाभी तो बोलीं , " अरे चीखने दो साल्ली को , बिना चीख पुकार के गांड मरौवल का मजा क्या। रोने दो , चोदो हचक हचक के। आखिर तेरी बहन भी तो इसका भाई बिना नागा रोज चोदता होगा। चोदो गांड इस छिनार की हचक के , फाड़ दो साली की मोची से सिलवा लेगी। "

भैय्या पे वही असर हुआ जो भौजी चाहती थीं। 

वो पूरे जोश में आगये , हचक हचक के पूरी ताकत से ,..
दरेरते ,रगड़ते, फाड़ते घुस रहा था। 

दर्द के मारे जान निकल रही थी , मैं गांड पटक रही थी , चीख रही थी , आंसू मेरे गाल पे गिर रहे थे , लेकिन भौजी की गालियां ,

" काहें छिनरो मजा आ रहा है मोटा लौंडा घोंटने में , अबहिन तो बहुत मोट मोट लौंडा घोंटोगी , मेरी रंडी की जनी। घोंटो घोंटो बहुत चुदवासी हो न तेरी गांड का भोंसड़ा बनवा के भेजूंगी , कुत्ता चोदी। " 

अनवरत ,नान स्टाप। 

तबतक उन्होंने कुछ किया जिससे मेरी बस जान नहीं निकली,

आधे से ज्यादा खूंटा मैं घोंट चुकी थी। 
भइया बजाय धक्का मारने के बस ठूंसे जा रहे थे , गजब की ताकत थी उनमे। 


लेकिन भौजी ने मुझे पकड़ के ऊपर खींचा जोर से , और भैया ने भी नीचे , आलमोस्ट लंड बाहर हो गया सुपाड़ा भी काफी कुछ बाहर , लेकिन तभी ,... दोनों ने एकसाथ , भौजी ने ऊपर से दबाया और भइया ने नीचे से पेलना शुरू किया और एक बार फिर , मेरी गांड के छल्ले को चीरता फाड़ता वो मोटा सुपाड़ा ,

और भौजी ने जोर से मेरे निपल की घुन्डियाँ मरोड़ दीं ,


और मुझसे बोलने को कहा ," बोल छिनार बोल , वरना चाहे जितना चीखेगी छोडूंगी नहीं , बोल की मैं छिनार हूँ , भाईचोदी हूँ , चुदवासी हूँ। 

लेकिन बोलने से भी नहीं जान बची , 

" जोर से बोल , और जोर से बोल। ..अरे पूरी ताकत से बोल , दस दस बार , वरना गांड में तेरे कुछ भी दरद नहीं हो रहा है , छिनार की जनी , जिस भोंसड़े से शहर भर के भंडुओं के छोड़ने के बाद से निकली है न , उसी में इस गाँव के सारे मर्दों को , ...घोड़े दौड़ा दूंगी उसमे। "


मैं रंडी की जनी हूँ , मैं गाँव में चुदवाने ,गांड मरवाने आई हूँ , पूरे गाँव की रखैल हूँ , मैं पूरे गाँव से गांड मरवाउंगी। मैं नंबरी छिनार हूँ ,...और भी। .. 

पांच दस मिनट तक , पूरे जोर से ,... भौजी की धमकी , ...अगर एक बार भी धीमे बोली न तो पांच बार और बोल , भंडुए की औलाद , ...और साथ में धमकी ,... तेरी गांड में तो कुछ भी दरद नहीं हो रहा है ननद रानी। अगर एक बार भी बोलने में हिचकी न ,तो ये अपना हाथ कोहनी तक तेरी बुर में पेल दूंगी , कुँवारी आई थी गाँव में भोसड़ी वाली हो के जायेगी। 


और मुझे उनके बात पे पूरा विश्वास था। 

उस दिन रात में मैं चंपा भाभी के दरवाजे के बाहर से सुन चुकी थी ,चंपा भाभी मेरी भाभी से कह रही थीं की वो और कामिनी भाभी दोनों मिल के मुट्ठी करेंगी , एक गांड में और दूसरी भाभी की बुर में। 

भाभी की माँ भी तो एक बार अपनी होली का किस्सा सूना रही थी , चम्पा भाभी और मेरी भाभी के सामने, कैसी अपनी शादी के चार पांच साल बाद , होली में मेरी भाभी की बुआ की ( यानी अपनी ननद की ) इसी आँगन ,इसी आँगन में पहले नंगा करके रंग लगाया , रगड़ा और पूरी की पूरी मुट्ठी उनकी बुर में ,... 


इसलिए कामिनी भाभी कर भी सकती थीं , और मैं उनकी बात मान के जोर जोर से बोल रही थी ,

मैं रंडी की जनी हूँ , मैं गाँव में चुदवाने ,गांड मरवाने आई हूँ , पूरे गाँव की रखैल हूँ , मैं पूरे गाँव से गांड मरवाउंगी। मैं नंबरी छिनार हूँ। ... 


लेकिन जब पांच दस मिनट बोल के रुकी तो मैंने देखा , भैय्या मुस्करा रहे थे और उससे भी ज्यादा , भाभी। .. 

" नीचे देख ज़रा छिनरो , " भौजी बोलीं और मैंने देखा और दंग रह गयी। 

आलमोस्ट पूरा , मुश्किल से दो ढाई इंच बचा होगा , छ सात इंच मैं घोंट गयी थी। 

अब मैं भाभी की ट्रिक समझी , गाली दे दे के , मुझसे गालियां दिलवा के मेरा ध्यान उन्होंने गांड में हो रहे दर्द से हटा दिया था। और भैय्या मेरी दोनों चूंचियां पकड़ के ,कस कस के , हुमच हुमच के अपना मोटा लंड उचका उचका के मेरी कसी कुँवारी गांड में ठेल रहे थे। 

( हाँ ये बात अलग है जो मैं चिल्ला चिल्ला के बोल रही थी ,मैं चुदवासी हूँ ,पूरे गाँव की रखैल बनूँगी , मेरी गांड को मोटे मोटे लंड चाहिए , बाहर धान के खेत में काम करने वालियां अच्छी तरह सुन रही थीं और जिस तरह से वोबातें बाटतीं है ,पनघट पे ,खेत में ,गाँव के पोखर पे ,... शाम तक गाँव की सारी औरतों को ये बातें मालूम हो गयीं। )

" बिन्नो अब तेरा नंबर है , घोंट चूतड़ उठा के ,दिखा दे कैसी नंबरी चुदक्कड़ है तू , अपनी मायकेवाली रंडियों का नाम मत डूबा। "
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07-06-2018, 02:28 PM,
RE: Long Sex Kahani सोलहवां सावन
ले लिया मजा पिछवाड़े का 


" बिन्नो अब तेरा नंबर है , घोंट चूतड़ उठा के ,दिखा दे कैसी नंबरी चुदक्कड़ है तू , अपनी मायकेवाली रंडियों का नाम मत डूबा। "

मैंने हलके हलके शुरू किया , लेकिन भैय्या पूरा साथ दे रहे , जब मैं ऊपर की ओर खींचती , तो वो मेरी पतली कमरिया पकडे ,मुझे ऊपर की ओर धकेलते ,और जब मैं नीचे की ओर लंड घोटने के लिए पुश करती तो भैय्या मुझसे दुगनी ताकत से अपने उस मस्ती के खम्भे पे , मेरी कमर पकड़ कर ,... नीचे की ओर खींचते। 


लगी मेरी भौजी भी थीं , लेकिन उनका सिंगल प्वाइंट प्रोग्राम था , मस्ती से मेरी हालत खराब करने का। 

भैय्या जिस तरह से मेरी चूंचियां दबा रहे थे , उससे भी दूनी ताकत से कामिनी भाभी, और साथ साथ उनकी खेली खायी उंगलिया कभी मेरी कसी चूत में तो कभी क्लिट पे , ननदों को झाड़ने के नजदीक लाकर छोड़ने में उन्हें महारत हासिल थी और आज फिर वही ,... 

मेरे लंड पे ऊपर नीचे होने की स्पीड बढ़ गयी। साथ में जब आलमोस्ट पूरा लंड गांड में घुस जाता तो बजाय ऊपर नीचे करने के मैं कभी आगे पीछे करती , गोलगोल घूमती , जिससे पूरे लंड का मजा मेरी गांड को मिल सके। और साथ में भैया के सीने पे अपनी गोल गोल चूंचियां रगड़ती , उनकी पीठ पे मस्ती से अपने नाख़ून से नोचती ,

पूरी ताकत से , और साथ में जोर जोर से भाभी की गालियों का जवाब भी दे रही थी। 

पांच छ मिनट बाद एक मिनट के लिए मैं रुकी , और नीचे देखा तो बस जोर से शर्मा गयी। 

भैय्या के हाथ दोनों , पलंग पर थे। वो कब का मुझे ऊपर नीचे करना बंद कर चुके थे , इसका मतलब सिर्फ मैं अपनी ताकत से लंड के ऊपर नीचे ,

और लंड एकदम जड़ तक गांड में घुसा हुआ था। 

खुली खिड़की से आ रही ठंडी हवा के बावजूद मेरी देह पसीने पसीने थी। 


रुक काहें गयी छिनरी चोदो न , घोंटो अपने भैया का लंड , भौजी खिलखिलाते बोलीं। 

फिर तो जैसे बच्चे मस्ती से ट्रैम्पोलिन पे उछलते हैं बस उसी तरह से , बार बार आलमोस्ट लंड के ऊपर तक से लेकर पूरे जड़ तक... 

उछल उछल कर गांड में लंड घोंट रही थी। 

लेकिन मेरी थकान की बात और कौन समझता , भौजी के अलावा ,


उन्होंने भैया को चढ़ाया , बहुत देर ई रंडी बैठ ली गोदी में अरे कुतिया की तरह जब तक गांड नही मारोगे न ,.... 

भैय्या ने उनको बात पूरा करने का मौक़ा भी नहीं दिया ,
……………………………
ये बात भइया की माननी पड़ेगी , नंबरी चुदक्क्ड़ थे और गांड मारने में तो एकदम एक्सपर्ट , ... इंच क्या एक सूत भी लंड टस से मस नहीं हुआ। 

पूरा का पूरा लंड गांड में और मुझे उन्होंने निहुरा के ,


और अब जो मेरी गांड मराई शुरू हुयी बस लग रहा था , अब तक जो था वो सिर्फ ट्रेलर था। 
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Reply
07-06-2018, 02:28 PM,
RE: Long Sex Kahani सोलहवां सावन
कुतिया बना के ,... 


[attachment=1]anal 11.jpg[/attachment]
पूरा का पूरा लंड गांड में और मुझे उन्होंने निहुरा के ,


और अब जो मेरी गांड मराई शुरू हुयी बस लग रहा था , अब तक जो था वो सिर्फ ट्रेलर था। 


खूब दर्द , खूब मजा।
मेरी आधी देह बिस्तर पे थी , पेट के बल. गोल गोल ,पथराई चूचियाँ बिस्तर से रगड़ती, चूतड़ हवा उठा हुआ , भैय्या के दोनों हाथ मेरे चूतड़ों को थामे , और पैर मुश्किल से जमीन छूते, हाँ भाभी ने पेट के नीचे कुशन और तकिए लगा दिए थे ढेर सारे , इसलिए चूतड़ एकदम उठे हुए , डॉगी पोज में ( मुझे रॉकी की याद आ गयी ). 

एक बात और , रात में तो चारो और सन्नाटा था ,घुप्प अँधेरा था ,कमरे में मुश्किल से लालटेन को रौशनी में कुछ झिलमिल झिलमिल सा दिखता था,लेकिन इस समय तो दिन चढ़ आया था। सुनहली धूप खिड़की से हो के पूरे कमरे में पसरी थी , बाहर टटकी धुली अमराई , गन्ने और धान के खेत दिख रहे थे , धान के खेतों से रोपनी वालियों के गाने की मीठी मीठी आवाजें सुनाई दे रही थी। 

लेकिन मुझे न कुछ सुनाई दे रहा था ,न दिखाई दे रहा था न महसूस हो रहा था , सिवाय मेरी कसी कच्ची किशोर गांड में जड़ तक घुसा हुआ , गांड फाडू ,भैय्या का खूब मोटा लण्ड। गांड इतनी जोर से परपरा रही थी , फटी पड़ रही थी , की बस ,... 

और भैय्या को भी मेरी कसी कम उम्र वाली गांड के अलावा कुछ भी नहीं दिख रहा था। 


डॉगी पोज में भी पूरा रगड़ते दरेरते अंदर तक जाता है। 

एक बार डॉगी पोज सेट करने के बाद ,भइया ने धक्के लगाने शुरू किये और अब मेरी गांड को भी उनके लण्ड की आदत पड़ती जा रही थी। उनके हर धक्के का जवाब मैंने भी कभी धक्के से तो कभी गांड को सिकोड के कभी निचोड़ के , उनके लण्ड को दबोच के देती थी। 


लेकिन दो चार मिनट के बाद कामिनी भाभी ने उन्हें पता नहीं क्या उकसाया ,

उन्होंने एक बार फिर मेरे चूतडों को हवा में जोर से उठाया , पूरे ऊपर तक , लण्ड को आलमोस्ट सुपाड़ा तक बाहर निकाला और फिर एक धक्के में ही,... पूरा जड़ तक ,

मेरी बस जान नहीं निकली। हाँ चीख निकल गयी, बहुत जोर से , ... 

" उई माँ , ओह्ह्ह आह्ह ,उईईईईई , उई माँ ,'... 

यहाँ दर्द से जान निकल रही थी ,और उधर भौजी खिलखिलाते हुए मुझे चिढ़ाने में लगी थी ,

" अरे ओनके काहें याद कर रही हो ,का उन्हु क गांड मरवाने का मन है अपने भैय्या से , ले आना अगली बार , उन्हु के ओखली में धान कुटवाय दूंगी , तोहरे भैय्या से। "

चिढ़ाने में वो किसी को नहीं छोड़ती थी तो अपने सैयां को क्यों छोड़ती , उनसे बोली ,

" अरे सिर्फ बहनचोद बनने से काम नहीं चलेगा , ये तुझे मादरचोद बनाने पे तुली है बोलो है मंजूर ,मादरचोद बनना। "

भैया ने एक बार फिर अपना मोटा मूसल ऑलमोस्ट एकदम बाहर निकाला धीमे धीमे, मेरी गांड के छल्ले से रगड़ते दरेरते, और हंस के कहा ,

" एकदम , अरे जिस भोसडे से ये मस्त सोने की गुड़िया , मक्खन की पुड़िया निकली है ,वो भोसड़ा कितना मस्त होगा। उसको तो एक बार चोदना ही होगा , और मैं के बार छोड़ भी देता लेकिन तुम्हारी छुटकी ननदिया , खुद बार बार बोल रही है , तो अब तो बिना मादरचोद बने ,... "

और ये कह के उन्होंने पहली बार से भी करारा धक्का मारा। दर्द से मेरी जोर से चीख निकल गयी। 

जवाब भौजी ने दिया , " अरे बिचारी कह रही है , तो सिर्फ एक बार क्यों , उस छिनार की जिसकी बुर से ये जनी है एक लण्ड से और एक बार से काम नहीं चलता। फिर सिर्फ भोसड़े से काम थोड़े ही चलेगा , हचक हचक के उसकी गांड भी कूटनी होगी। "

भैय्या के धक्कों की रफ़्तार अब बढ़ गयी थी , और साथ में वो बोल भी रहे थे , ... 

" एकदम सही बोल रही है , और जब इस नयी कच्ची बछेड़ी के साथ इतना मजा मिल रहा है तो घाट घाट का पानी पी , न जाने कितने लौंडे घोंटी , उस के भोसड़े में कितना रस होगा। एक बार क्यों बार बार , ...और गांड भी ,... एक बार इस गांव में आएँगी न अपने समधियाने , तो बस अपने सारे पुराने यारों को भूल जाएंगी। "


भैय्या के इन धक्कों में दर्द के मारे जान निकल जा रही थी लेकिन एक बात और हो रही थी , न भौजी ,न भइया कोई भी न मेरी क्लिट छू रहां था , न मेरी चूंची ,

लेकिन एक अलग ढंग की मजे की लहर मेरी देह में दौड़ रही थी , मेरी चूत बार बार सिकुड़ रही थी ,अपने आप। अच्छी तरह पनिया गयी थी। बस जैसे झड़ते समय होता है ,वैसे ही , मुझे लग रहा था मैं अब गयी तब गयी ,

पिछ्वाडे भैय्या के न धक्के कम हुए न उनका जोर। दर्द ,छरछराहट भी वैसी ही थी , लेकिन अब अच्छा लग रहा था , मन कर रहा था और जोर से , और जोर से ,... 

ये बात चंपा भाभी ने भी बोली थी और बसंती ने भी , गांड मरवाने का असली मजा तो दर्द में है ,जिस दिन उस दर्द का मजा लेना आ जाएगा , न खुद गांड मरवाने के लिए पीछे पीछे दौडोगी। 

भैय्या ने लण्ड बाहर निकाला , लेकिन अबकी अंदर नहीं घुसेड़ा ,रुक गए। 

मैंने मुड़ के देखा , भौजी उनके कान में ,और वो भी एकदम जोरू के गुलाम , मुस्करा के हामी भर रहे थे ,

डाला उन्होंने , लेकिन अबकी खूब धीमे धीमे , मेरे दोनों पैरों को उन्होंने अपने पैरों के बीच डालकर जोर से सिकोड़ लिया और अब मेरी गांड और भिंच गयी। और आधा लण्ड घुसेड़ के वो रुक गए ,


फिर एक हाथ से अपने खूंटे के बेस को पकड़ के गोल गोल घुमाना शुरू कर दिया , पहले धीमे धीमे , फिर जोर जोर चार पांच बार क्लाक वाइज , फिर एंटी क्लाक वाइज ,... 

चार पांच मिनट के बाद , मेरे पेट में जो घुडमुड शुरू हो गयी और कुछ देर में तो जैसे तूफान , मैंने इशारे से भाभी को बुलाया और अपनी हालत बतायी , बोला भी ,

" बस दो मिनट ,पेट में गड़बड़ हो रहा ,भइया से बोलो न रुक जाए। "


" धत्त ,ऐसे समय कोई मरद रुकता है क्या , घबड़ा मत तेरी गांड में इतनी जोर की डॉट लगी है इतनी मोटी ,एक बूँद भी बाहर नहीं आएगा। न तेरा मक्खन न उनकी मलाई। "

उन्होंने शायद भैया से बोला और उन्होंने फिर गोल गोल घुमाना रोक के मुझे फिर से रगड़ रगड़ रगड़ के गांड मारना शुरू कर दिया। 

मेरी देह बिस्तर से रगड़ रही थी मैं एकदम झड़ने के करीब थी। 

बीच बीच में वो रोक के जैसे कोई मथानी से माखन मथे ,उसी तरह से अपने हाथ से पकड़ के मेरी गांड में , 

मेरी हालत ख़राब थी , मैं भी उनका लण्ड निचोड़ रही थी ,दबा रही थी। 

और कुछ देर में मेरी चूत को बिना कुछ किये मैं झड़ने लगी , खूब जोर जोर से , इतना तो मैं चुदते समय भी नहीं झड़ती थी। 

देह काँप रही थी ,जोर जोर से बोल रही थी , हाँ भैय्या हाँ मार लो मेरी चोद दो मेरी , मार लो गांड ,... हो हो उह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् ाह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् 

मैं पलग पर ढेर हो गयी , साथ में मेरी गांड भी जोर जोर से लण्ड निचोड़ रही थी ,दबा रही थी और उसका असर उन पर भी पड़ा , दो चार धक्के पूरी ताकत से मार के , वो झड़ने लगे। खूंटा एकदम अंदर तक धंसा था। 

देर तक हम दोनों साथ साथ झड़ रहे थे। 

दो कटोरी मलाई उन्होंने मेरी गांड में तो छोड़ी ही होगी , वो मेरे ऊपर लेटे रहे और मैं बिस्तर पर पेट के बल।
….
मैं कटे पेड़ की तरह बिस्तर पर पड़ गयी ,
-  - 
Reply
07-06-2018, 02:28 PM,
RE: Long Sex Kahani सोलहवां सावन
नया नया स्वाद 


मैं कटे पेड़ की तरह बिस्तर पर पड़ गयी ,

संज्ञा शून्य , शिथिल , निश्चल , मेरी पलकें मूंदी हुयी थीं ,साँसे लम्बी लम्बी धीमे धीमे चल रही थीं। 

पूरी देह में एक मीठे मीठे दर्द की चुभन दौड़ रही थी। 

बस सिर्फ एक चीज का अहसास था , अभी भी मेरे पिछवाड़े धंसे ,अंदर तक गड़े ,मोटे खूंटे का। 

कुछ देर में धीमे धीमे हलके से वो बाहर सरक गया , जैसे कोई मोटा कड़ियल सांप सरकते फिसलते हुए , बिल से निकल जाय। 

और मैंने अपना छेद भींच लिया , जोर से सिकोड़ के। साजन के जाने बाद जैसे कोई सजनी ,अपने घर की सांकल बंद कर ले। 

एक तूफ़ान जो अभी अभी मेरे ऊपर से गुजर गया था , उसका अहसास बस समेट के सजो के बचा के मैं अपनी बंद पलकों में रखे हुए थी। 


आँखे भले बंद थी लेकिन मैं महसूस कर सकती थी , भौजी मेरे पास आके बैठ गयी थीं , कुछ देर उन्होंने बहुत दुलार से मेरे बाल , गाल सहलाए , और मेरा सर उठा के अपनी गोद में हलके से रख लिया। और मुझे धीरे से सरका के , 

अब मैं आराम से पीठ के बल लेट गयी थी , भौजी के गोद में सर रखे , भौजी के प्यारे नरम हाथ मेरे गुलाबी गालों पे बहुत अच्छे लग रहे थे। 

मानुष गंध , और इस महक को तो मैं अमराई के आर पार से भी पहचान सकती थी , कामिनी भाभी के सैयां ,मेरे नए बने भैय्या ,... 

मन तो मेरा कर रहा था पलकें खोल के उन्हें आँख भर के देखने का , लेकिन कुछ आलस ,कुछ थकान और कुछ मस्ती भरी शरारत ,.... मैंने आँखे और जोर से भींच ली ,

लेकिन मेरे सबसे बड़े दुश्मन , ... मेरी मुस्कान ने मेरा भेद खोल दिया। 

और भौजी ने मेरा मुंह खुलवा दिया , जैसे वो बाकी छोटी कच्चे टिकोरे वाली ननदों के साथ करती थी। 

चट से उन्होंने मेरे गोरे गुलाबी पूरी ताकत से दबा दिया। 

पट से चिरई की चोंच की तरह मैंने मुंह चियार दिया , और 

सट से भैय्या ने अपना मोटा सुपाड़ा , मेरे खुले मुंह में ,.... 

भौजी अब कस के मेरा सर पकडे थीं , मैं सूत भर भी हिल डुल नहीं सकती थी। भैया का मोटा सुपाड़ा अभी भी पूरी तरह कड़ा , खूब फूला ,... 


वही साइज , वही कड़ेपन के अहसास ,जिसके लिए मैं तरसती थी ,भरे बाजार में उसे घोंट सकती थी ,

लेकिन स्वाद , स्वाद,... एकदम अलग। 

और तब तक मुझे अचानक याद आया , ...भइया का ,...अभी थोड़ी देर , बल्कि जस्ट , मेरी गांड ,... उसमें, ... 

बस मैेने पूरी कोशिश की , उसे मुंह से बाहर करने की , पूरी ताकत से , ... मैं छटपटा रही थी , लेकिन 

जब भैया ,भाभी की जुगलबंदी हो तो कुछ भी करना बेकार है सिर्फ चुपचाप मजे लेना चाहिए। पर सोच सोच कर , ...अभी अभी ये 

मैं पूरी कोशिश कर रही थी लेकिन भाभी ने कस के मेरे सर को कंधो को दबोच रखा था और भैय्या ने पूरी ताकत से अपना सुपाड़ा पेल रखा था मेरे मुंह में ,

दो चार मिनट में मैंने हार मान ली , और भौजी मुस्करा के बोली 

" अरे ननदो ,तेरा ही मक्खन है, चाट ले ,स्वाद ले ले के। नीचे वाले मुंह में तो खूब मजे ले ले के घोंट रही थी , बाहर खेत में काम करने वाली तक सुन रही थी औरअब काहे नखडा चोद रही हो , छिनारपना छोड़ , रंडी क जनी ,मजे ले ले के चूस। "
मेरा तन कब का उनके कब्जे में हो चुका था। 

बहुत ऐसा वैसा लग रहा था , बस किसी तरह भैया बाहर निकाल ले ,बस यही मन कर रहा था , मन गिनगिना रहां था , 

लेकिन सब कुछ मेरे बस में था क्या , मेरी जीभ , कुछ देर बाद पहले उसकी टिप भैय्या के लिथड़े चुपड़े सुपाड़े , फिर जीभ हलके हलके नीचे से , ... 

भैया ने पूरी ताकत से सुपाड़ा मेरे मुंह में धकेल रखा था। और मेरी जीभ की हलकी हलकी हरकतों से , सिसकियाँ भरने लगे थे। 

लेकिन भौजी इतनी आसानी से नहीं बख्शने वाली थी। 

" अरे काहें आंखियां मूंदले हउ। तनी खोल के देखा , कैसे मस्त मक्खन मलाई लगी है, खोलो सीधे से नहीं तो ,... " और भौजी ने इन्तजार भी नहीं किया , जोर से मेरे निपल के कान उमेठ दिए पूरी ताकत से। 

और मैंने दर्द के मारे आँख खोल दी , भैया का मोटा लण्ड ,लेकिन ,... लेकिन, मेरी ,... जैसे भौजी कह रही थीं एकदम , .... 
और भौजी ने दूसरी हरकत की , जिसके आगे हर ननद हार मान के मुंह खोल देती थी। 

उन्होंने कस के मेरे दोनों नथुने भींच लिए , सांस लेना है तो मुंह तो खोलना ही पडेगा , ऊपर से भैय्या ने भी जोर से निपल पकड़ के नोच लिया। 

मुंह खुल गया , और उनका लिथड़ा चुपड़ा सीधे मेरे मुंह में , 

गों गों ,... मैं आवाज कर रही थी ,चोक हो रही थी लण्ड पूरे गले तक , सांस भी फूल रही थी। 


" चाट चूट के पहले जैसा कर जल्दी वरना , ,... " भौजी ने हड़काया ,फिर प्यार से समझाया ,

" अरे स्वाद ले ले के , मजे ले ले के चूस , कस के चाट , बहुत मजा आयेगा , ज़रा प्यार से , अभी कुछ देर पहले कैसे चूस चाट रही थी , वैसे ही अरे तेरी गांड का ही तो है। "

कुछ देर तक तो मैंने ,... फिर धीरे धीरे,... जब भैय्या ने ७-८ मिनट बाद निकाला तो एकदम , ...साफ़ चिकना गोरापहले जैसा। 


जैसे कोई शैतान बच्चा कीचड़ में होली खेल के , खूब कीचड़ लपेट के आये और माँ उसकी नहला धुला के , रगड़ रगड़ के , पहले जैसा सुथरा , चिक्कन कर दे। 


जब मेरे मुंह से निकला ,तो खूब कड़ा भी हो गया था। 

" अभी जाना नहीं होता न तो निहुरा के एक राउंड और लेता तेरी ,... " वो बोले। 

" अरे जाओ जल्दी , बस छूट जायेगी। ये कही नहीं जा रही , तोहार बहिनिया अभी ७-८ दिन और रहेगी ,कल आ जाना फिर ,... " हँसते हुए भौजी बोलीं और मारे ख़ुशी पकड़ के चूम लिया सीधे मुंह पे। 
-  - 
Reply
07-06-2018, 02:29 PM,
RE: Long Sex Kahani सोलहवां सावन
कामिनी भाभी : मंजन 

अब तक 

और भौजी ने दूसरी हरकत की , जिसके आगे हर ननद हार मान के मुंह खोल देती थी। 

उन्होंने कस के मेरे दोनों नथुने भींच लिए , सांस लेना है तो मुंह तो खोलना ही पडेगा , ऊपर से भैय्या ने भी जोर से निपल पकड़ के नोच लिया। 

मुंह खुल गया , और उनका लिथड़ा चुपड़ा सीधे मेरे मुंह में , 

गों गों ,... मैं आवाज कर रही थी ,चोक हो रही थी लण्ड पूरे गले तक , सांस भी फूल रही थी। 


" चाट चूट के पहले जैसा कर जल्दी वरना , ,... " भौजी ने हड़काया ,फिर प्यार से समझाया ,

" अरे स्वाद ले ले के , मजे ले ले के चूस , कस के चाट , बहुत मजा आयेगा , ज़रा प्यार से , अभी कुछ देर पहले कैसे चूस चाट रही थी , वैसे ही अरे तेरी गांड का ही तो है। "

कुछ देर तक तो मैंने ,... फिर धीरे धीरे,... जब भैय्या ने ७-८ मिनट बाद निकाला तो एकदम , ...साफ़ चिकना गोरापहले जैसा। 


जैसे कोई शैतान बच्चा कीचड़ में होली खेल के , खूब कीचड़ लपेट के आये और माँ उसकी नहला धुला के , रगड़ रगड़ के , पहले जैसा सुथरा , चिक्कन कर दे। 


जब मेरे मुंह से निकला ,तो खूब कड़ा भी हो गया था। 

" अभी जाना नहीं होता न तो निहुरा के एक राउंड और लेता तेरी ,... " वो बोले। 

" अरे जाओ जल्दी , बस छूट जायेगी। ये कही नहीं जा रही , तोहार बहिनिया अभी ७-८ दिन और रहेगी ,कल आ जाना फिर ,... " हँसते हुए भौजी बोलीं और मारे ख़ुशी पकड़ के चूम लिया सीधे मुंह पे। 




आगे 




[attachment=1]1+(312).jpg[/attachment]" अरे जाओ जल्दी , बस छूट जायेगी। ये कही नहीं जा रही , तोहार बहिनिया अभी ७-८ दिन और रहेगी ,कल आ जाना फिर ,... " हँसते हुए भौजी बोलीं और मारे ख़ुशी पकड़ के चूम लिया सीधे मुंह पे। 


मैं खड़ी हो गयी थी। 

लेकिन मेरे पेट में अब फिर से एक बार तेजी से घुमड़ घुमड़ , 

जोर से 'आ रहां' था , और मैं टॉयलेट की ओर भागी। 



" दरवाजा अंदर से बंद नहीं होता ,और फिर हम तुम ही तो हैं " हस के भाभी बोलीं।
दरवाजा बंद करने का टाइम भी नहीं था मेरे पास। 

बाहर से छन छन कर भाभी ,भैय्या की आवाजें आ रही थीं,

" देर हो गयी , " भैय्या बोल रहे थे। 

" तुम्ही तो मेरी छुटकी ननदिया पे , लेकिन कोई देर वेर नहीं हुयी , मैंने आपका सामान , रास्ते के लिए खाना सब कुछ पैक कर दिया है। " खिलखलाती हुयी कामिनी भाभी बोलीं। 

" यार मॉल ही इत्ता मस्त है , मेरा तो मन भरा नहीं। " भईय्या की आवाज आई। 

" अरे आप तो कल ही आ जाओगे शाम तक , और वो अभी हफ्ते भर तो है ही , ले लेना , मन भर के। " भाभी के बोलने और दरवाजा बंद करने की आवाज आई। 

फिर रसोई से खटर पटर , थोड़ी देर बाद दरवाजे पे फिर खट खट हुयी , 

मेरा कान उधर ही चिपका था , रज्जो ग्वालन , भाभी के घर पर भी गाय भैंस वही दुहती थी और कामिनी भाभी के यहाँ भी , एक कजरी भैंस थी वो भी। 

वो और भाभी हलकी आवाज में बात कर रहे थे , लेकिन दोनों लोग हंस ज्यादा रही थीं , बात कम ,... कहीं कामिनी भाभी से वो मेरे बारे में तो बात , ... और तभी मुझे याद आया ,... वो खिड़की ,...उसी के बगल में कजरी भैसं बंधती है , वहीँ रज्जो दूहती है , और जब मुझे भैय्या , 'इस्तेमाल के बाद;' ... शायद मैंने रज्जो की झलक खिडकीसे ,.. 

लेकिन तबतक आवाजें फिर शांत हो गईं। रज्जो चली गयी थी और भाभी ने दरवाजा बंद कर लिया था। आगे के ही नहीं पीछे का भी दरवाजा बंद करने की आवाज आई ,


फिर किचन में खटर पटर ,

जब मैं बाहर निकली तो भौजी नाश्ते की टेबल लगा रही थीं और उनके हाथ में दूध का भरा ग्लास था , लबालब भरा और उसमें चार इंच मोटी साढ़ी।
……………………………………………………………………………………………………..
भौजी मुस्कराती हुयी मुझे अजीब निगाहों से देख रही थीं। 

और जब मैंने खुद को देखा तो , मैं भी मुस्कराए बिना न रह सकी। 
मेरा आँचल ,सीने पर से छलक गया था , मेरी दोनों गोल गोल गोलाइयाँ साफ़ दिख रही थीं , और उस से भी बढ़ के ,उस पर रात के निशान ,

भैया के दांत के निशान मेरे खड़े निपल के चारो ओर , चूसने और रगड़ने से जगह जगह लाल हो गया था , और नाखून के निशान तो भरपूर थे। 

भौजी ने मुझे जोर से अपनी अंकवार में भींच लिया और बोलीं , 

"नाश्ता लग गया है , चल ,कल रात बहुत मेहनत की तूने ,फिर सुबह सुबह। नीचे का मुंह तो भर गया अब ऊपर की बारी है। " 

भौजी से छुड़ाने की कोशिश करते मैं बोलीं, " बस एक मिनट भौजी , मंजन करके आई। " 

भौजी का एक हाथ कस के मेरी कमर को पकडे था , वहां जकड और बढ़ गयी। उनके हाथों की पकड़ भैय्या से भी कड़ी थी , एकदम सँडसी की तरह। दूसरे हाथ ने मेरे साडी उठा दी और अंदर घुस के ,सीधे , पहले हलके हलके ,फिर जोर जोर से मेरे नितम्बों को सहलाने ,दबाने लगा। 


" अरे हमार छिनार ननदो , तोहार भौजी काहें को हैं , मैं करा देती हूँ न मंजन। "

भौजी ने भी सिर्फ साडी अपने तन पे बस लपेट रखी थी और उनका भी आँचल सरक कर , ... फिर तो उनकी खूब बड़ी बड़ी ,एकदम पत्थर की तरह कड़ी ,मांसल गोलियां मेरे नए नए आये किशोर उभारों पर , 

चक्की चल रही ,..... 
दो पाटन के बीच में साबुत बचा न कोय। 


मेरी क्या बिसात थी। कामिनी भाभी की खूब बड़ी बड़ी कठोर चूचियाँ मेरे छोटे छोटे किशोर जोबन को कुचल रही थीं ,पीस रही थी। 

और उनका मेरे नितम्बों को सहलाता हाथ अब और दुष्ट , और शरारती हो गया था। पकड़ तेज हो गयी थी और रेंंगती सरकती उँगलियाँ अब सीधी गांड की दरार तक पहुँच गयी थी। 

गच्च , एक ऊँगली भौजी ने अंदर ठेल दी। 

उईईई ,.... मेरी चीख और सिसकी निकल गयी। 

गपाक , दूसरी ऊँगली भी भौजी ने पेल दी , जड़ तक। 

और अबकी मैं सिसक भी नहीं पायी , भौजी के होंठों ने मेरे होंठ सील कर दिए थे , और यही नहीं , उनकी जीभ मेरे मुंह में कबड्डी खेल रही थी। 

कुछ देर मेरा मुंह उनका जीभ वैसे ही चूसने लगा जैसे कुछ देर पहले उनके सैयां का मोटा खूंटा चूस रहा था। 

दोनों उँगलियाँ जड़ तक अंदर थीं , गांड में , कुछ देर तक तो अंदर बाहर ,अंदर बाहर , और जब उन्होंने अपनी जगह अच्छी तरह बना ली तो फिर गोल गोल जोर जोर से अंदर घूमने लगीं , और उसके बाद गांड की अंदरूनी दीवालों पे रगड़ रगड़ के ,


साथ साथ में भौजी की चूचियाँ भी हलके हलके कभी जोर जोर से मेरे उभार दबा रही थीं , रगड़ रही थी। 

उनके दांतों के निशान मेरे होठ पर बन रहे थे , 

जैसे कोई , टेढ़ी ऊँगली से कुछ , ...अब उंगलियां उस तरह से करोच करोच कर गांड की दीवालों से , खूब रगड़ रगड़ कर , चार पांच मिनट ,... 


अचानक भौजी अलग हो गईं और उनके एक हाथ ने जबरन मेरा मुंह खुलवा लिया ,जैसे भाभियाँ नन्दों के मुंह होली में खुलवाती हैं ,मंजन के लिए। 

फिर गांड से निकली भौजी की दोनों उँगलियाँ, जब तक मैं समझूँ ,कुछ सोचूं , सीधे मेरे मुंह में। 

रगड़ रगड़ कर , दांतों पर आगे से ,पीछे से ,मुंह के अंदर , गिन कर पूरे ३२ बार ,


भौजी की पकड़ से छूटने का सवाल ही नहीं था। 

दोनों उँगलियाँ , मुंह के अंदर ,, ... 

चल अब हो गया न मंजन , चल अब नाश्ता कर सीधे से ,भौजी छेड़ते मुस्कराते बोलीं और दूध का भरा ग्लास सीधे मेरे मुंह में। 

पीने के अलावा कोई चारा भी नहीं था।
-  - 
Reply
07-06-2018, 02:29 PM,
RE: Long Sex Kahani सोलहवां सावन
और नाश्ता भी , भाभी के यहां जो मैं करती थी ,उसका दूना। 

रोटियां खूब घर के निकले सफ़ेद मक्खन से चुपड़ी , और मैंने जरा सा भी ना नुकुर की तो बस , कामिनी भाभी चालू ,

" मत खाओ , अरे ऊपर के छेद से नहीं जाएगा तो मैं नीचे वाले छेद से घुसेड़ दूंगी , जाएगा तो दोनों ओर पेट में ही। बोलो। "

अभी अभी जिस तरह से उन्होंने दो दो ऊँगली की थी और फिर मंजन , मैं बिना ची चुपड़ किये खाने लगी। लेकिंन जब नहीं रहा गया , तो बोल उठी ,


" भौजी , मेरा पेट फूल जाएगा ," 

वो इतनी जोर से हंसी की पूछिए मत ,मेरे गाल को जोर से चूम के बोलीं ,

" अरे मेरी प्यारी बिन्नो , छिनरो , कुछ भी हो जाए लेकिन तेरा पेट नहीं फूलेगा। उहे गोली तो कल तुझे खिलाया है , एक गोली खाओ , महीने भर पेट फूलने के डर से छुट्टी। तुम्हे और गोली भी दे दूंगी , तीन चार महीने के लिए , बस जिस दिन माहवारी शुरू हो ,उसके दूसरे दिन , एक गोली खा लेना , बस महीने भर बिना नागा अपने यारों से चुदवाना ,भैय्या से चुदवाना , पेट फूलने का कोई डर नहीं। "

"और भौजी तीन चार महीने बाद,... " आँखे नचा के मुंह बना के मैंने पूछा। 

" अरे आओगी न तुम दिवाली में बस , ओही समय अगली खुराक मिल जायेगी , होली तक के लिए। "

होली में तो खैर मैंने पहले ही मन बना लिया थी की भाभी के साथ उनके गाँँव आउंगी। भाभी को आना ही था , उनके यहाँ रिवाज था लड़के के होने बाद पहली होली मायके में मनाई जाती है। तो बस , और भाभी की माँ ने खुद भाभी को बोला था और मैंने भी , आखिर जब भाभी ही नहीं होंगी तो घर पे मैं होली किससे खेलूंगी , और यहाँ तो न भाभियों की कमी , न भाभी के भाइयों की , 

सिर्फ सफ़ेद रंग से होली होगी तेरे साथ यहां , समझ ले, भाभी ने डराया चिढ़ाया , लेकिन उनकी मां और चंपा भाभी एक साथ मेरी ओर से बोलीं , तो तुम कुा समझती हो ये दर जायेगी। 

नाश्ते के बाद मैं कामिनी भाभी के पीछे ,रसोई में। 

वहां काम में मैं उनका हाथ बंटा रही थी और वो ज्ञान बाँट रही थी ,सेक्सोलोाजी के बारे में।
-  - 
Reply
07-06-2018, 02:30 PM,
RE: Long Sex Kahani सोलहवां सावन
सेक्स और किचन ज्ञान 



वहां काम में मैं उनका हाथ बंटा रही थी और वो ज्ञान बाँट रही थी ,सेक्सोलोाजी के बारे में।
शुरआत उन्होंने मसालों से की , पहले टेस्ट में तो मुझे १० में १० मिल गए , मसालों को पहचानने में , और इनाम में दो चुम्मी भी मिल गयी , एक गाल पे और दूसरा जोबन पे। 
लेकिन दूसरे टेस्ट में ज्ञान मेरा शून्य था ,लेकिन उसका पर्पज ही मेरा ज्ञान बढ़ाना था। 

जायफल मैं पहचान गयी थी , लेकिन कामिनी भाभी ने बताया उसका असली फायदा , खड़ा करने में। जिसका मुश्किल से खड़ा होता है न उसका भी इसे खिला देगी तो खड़ा हो जायेगी। 

" और भाभी जिसका पहले ही खड़ा हो जाता हो , " हँसते हुए मेरे दिमाग में मेरे कजिन रविंद्र का चेहरा घूम रहा था , और मेरी सहेली चन्दा ने जो उसके बारे में कहा था की , उसके इतना मोटा और कड़ा इस गाँव में भी किसी का नहीं है। 

" वो तेरी फाड़ के रख देगा , बिना झड़े रात भर चोदेगा। " 

बस मैंने नोट कर लिया अपने दिमाग में। खीर में खिलाऊंगी उसे , फिर देखती हूँ कैसे बचता है ,क्योंकि जो दूसरी बात भौजी ने बताई वो और मेरे काम लायक थी। 

जायफल का एक और असर होता है , आदमी का मन भी बार बार करने को करता है। जो बहुत सीधा साधा बनने की कोशिश करे न , उसके लिए अचूक है ये। 

इलायची भी थकान कम करने में मदद करती है और ताजगी लाती है। और साथ में ब्लड फ्लो भी बढ़ाता है , भाभी ने समझाया और ये भी की आखिर जब मर्द का खड़ा होता है तो वहां पे सारा खून पहुँच जाता है। और जब तक खून वहां पे रहता है तबतक वो , ... 

उनकी बात काट के मैं हँसते हुए बोली , भाभी इसीलिए जब मर्दों का खड़ा होता है तो बस उनकी बुद्धि काम करना बंद कर देती है , दिमाग का खून सीधे वहीँ पहुँच जाता है। 

भाभी खिलखिला के हंसी और बोलीं अब मेरी ननद पक्की समझदार हो गयी है , शहर में लौट के , ये समझदारी दिखाना लौंडो को पटाने में। 

सौंफ भी उन्होंने समझाया ,जोश बढ़ाने में मदद करती है लेकिन अदरक और लहसून दोनों में वीर्यवर्धक ताकत होती है। लहसुन की एक एक फांक अलग कर के , गाय के घी में हलका पकाओ और फिर शहद में डूबा दो। बस ,मर्द की ताकत दूनी। 

अनार के दाने ,गाजर , ये सब बहुत असर करते हैं। और उसके बाद उन्होंने लड़कियों के लिए भी क्या खाने से उभार और मस्त होते हैं , सब बताया। 

साथ साथ हम दोनों काम भी कर रहे थे। 

दाल बन गयी थी ,चावल उन्होंने चढ़ा दिया था , फिर वो मुझसे पूछने लगी बोल सब्जी कौन सी बनाऊं , और बिना मेरे जवाब का इन्तजार किये टोकरी से एक लम्बा मोटा बैंगन दिखा के मुझे छेड़ते हुए बोलने लगीं , तुझे तो बैगन बहुत पसंद है न ,मोटा और लम्बा। 


मैं घबड़ा गयी कहीं भाभी सीधे मेरी चूत में , ... मेरी भाभी भी मुझे अक्सर दिखा के चिढ़ाती थीं। लेकिन कामिनी भाभी तो ,... और ऊपर से रात को उनके सैयां ने इतना हचक हचक के चोदा है की बुर की अब तक बुरी हालत है। 

भाभी ने शायद मेरे चेहरे का डर भांप लिया था , मुस्कराते हुए वो बोलीं , घबड़ाओ मत अभी तोहरी बुरिया में नहीं डालूंगी , लेकिन चल तुझे दिखाती हूँ बुर में बैगन डालते कैसे हैं। 

फिर बैठ के टाँगे फैला के , एक हाथ से अपनी बुर फैलाई और दूसरी से उसकी टिप , ... मुझे पास में बैठा के दिखाया ,समझाया। 

मैं अचरज से देखती रही ,और सीखती रही , ... 
बाद में कामिनी भाभी खड़ी हो गयी और उसका असली खेल मुझे समझाया ,


" देख असली चीज ,घुसाना नहीं है ,उसे दबोच के अंदर रखना है। "

सच में भाभी किचन का सारा काम घूम टहल के कर रही थीं और वो टस से मस नहीं हो रहा था। 

" और इस का एक ख़ास फायदा , यार को पटाने का। बस कोई भी चीज , बैगन , गाजर जो तू अपने यार को खिलाना चाहे उसे अपनी चूत में घुसेड़ ले , कम से कम तीस चालीस मिनट , ... लेकिन जितना देर डालेगी न उतना असर ज्यादा होगा। बार बार अपनी चूत को सिकोड़ उस पे , सोच तेरे यार का लण्ड तेरी चूत में है। जितना चूत का रस निकलेगा , चूत का रस वो सोखे रहेगा न उसका असर और ज्यादा होगा। हाँ और एक बात , अगर लौंडे को उस चीज के नाम से भी नफ़रत होगी न , तो अगर तेरे चूत के रस से डूबा है तो तुरंत खाने को मुंह खोल देगा। "


मेरे सामने बार बार रविंद्र का चेहरा घूम रहा था , अब देखना बच्चू , कैसे बचता है मेरे चंगुल से। उसे आम एकदम पसंद नहीं है। बस ,दशहरी आम की खूब लम्बी लम्बी मोटी फांके अंदर डाल के , ... सब खिला डालूंगी। 

और तबतक कामिनी भाभी ने एक मंत्र भी मेरे कान में फूंका ,

" ॐ नमो गुरु का आदेश ,पीर में नाथ ,प्रीत में माथ ,जिसे खिलाऊं मोहित करूँ ,... " 

" बस जब तक बुर में भींचे रहूं ये मन्त्र थोड़ी थोड़ी देर में पढ़ती रहूं मन में , जिसे पटाना हो उसका नाम सोच के , और खिलाते समय भी ये मन्त्र बोलना होगा , हाँ साथ में कच्ची सुपाड़ी की एक बहुत छोटी सी डली , " 

और उन्होंने ये भी बोला की उनके पास कामरूप की कच्ची सुपारी रखी है वो मुझे दे देंगी। 

उसके साथ ही और बहुत सी ट्रिक्स , कल उन्होंने पिछवाड़े के बारे में बताया था आज अगवाड़े के बारे में , 

आधे घंटे में उन्होंने बैगन बाहर निकाला ,एकदम रस से भीगा और फिर उसका भुर्ता मुझसे बनवाया। 

खाना बन गया था , मैंने बोला भाभी मैं नहा लेती हूँ , तो वो बोलीं एकदम लेकिन मैं भी चलती हूँ साथ में , तुझे अच्छी तरह से नहला दूंगी।
-  - 
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