Incest Porn Kahani जिस्म की प्यास
07-19-2018, 01:18 PM,
#91
RE: Incest Porn Kahani जिस्म की प्यास
उसकी मा बिस्तर पर पड़ी अपनी बदन से खेल रही थी और उनको कोई होश नहीं था... ललिता को यह पता चल गया था

कि उसकी मा का यह हाल किसी से फोन पे बात करने की वजह से था मगर एक बात ललिता को नही पता थी कि

वो सब चेतन का कारण था... जितनी भी इज़्ज़त वो अपनी मम्मी की करती थी वो अब सारी ख़तम हो गयी थी...

वो अपने पापा नारायण के बारे में सोचके अफ़सोस जताने लगी... उसे समझ नही आ रहा था कि वो ये किसी को बताए

भी या नहीं... काई सारे सवाल थे जिसका जवाब उसके पास नही था...

आज का दिन दोनो बहनो के लिए दिल्ली में आखरी दिन था... दोनो ने घर पे वक़्त बिताना ही ठीक समझा मगर उनके भाई चेतन का कुच्छ आता पता नहीं था... शन्नो ने अपने बेटे के फोन पे मैसेज लिख दिया था कि कल डॉली और ललिता

भोपाल जा रहे है जैसा कि तुम चाहते थे..... इस मैसेज के भेजने के बाद ही चेतन कुच्छ घंटे में घर आ गया था....

चेतन शन्नो के प्रति बिल्कुल एक अच्छे बेटे की तरह व्यवहार कर रहा था मगर ललिता ऐसा कुच्छ भी नही कर रही थी...

उसे अपनी मम्मी पे गुस्सा आ रहा था क्यूंकी कल रात वो किसी से फोन पे बात करते हुए नंगी बिस्तर पे पड़ी अपने

जिस्म से खेल रही थी.... कोई भी बेटी अपनी मा को ऐसी हालत में देखना पसंद नही करेगी मगर इसका असर एक अलग तरह से हुआ शन्नो की बेटी पे.... खैर पूरा दिन ऐसे ही बीत चुका था....

उधर भोपाल में रश्मि आज स्कूल से जल्दी चली गयी थी... नारायण को पूरे आधा दिन स्कूल में राहत मिली जिसका

वो बहुत आनंद उठा रहा था... रश्मि के आस पास भटकने के कारण उसके काई काम रुके हुए पड़े थे...

सब कुच्छ निपटाते निपटाते काफ़ी देर हो चुकी थी.. नारायण ने घड़ी पे समय देखा तो 3:30 तक बज चुके थे...

नारायण ने सोच लिया था कि घर जाकर वो चैन की नींद सोएगा... अपने कॅबिन को बंद करके वो अपना बॅग लेके स्कूल बाहर जाने के लिए निकला... उसे लगा था कि पूरा स्कूल जा चुका है क्यूंकी कोई दिखाई नहीं दे रहा था...

वो जल्दी जल्दी चलके जाने लगा और फिर उसे टेबल या चेर के हिलने की आवाज़ आई... उसके कदम एक दम से रुक गये

और वो धीरे धीरे पीछे की तरफ जाने लगा... हर क्लास के कमरे पर ताला लगा हुआ था मगर उसकी नज़र एक

कमरे पे पड़ी जिसपे कोई ताला नहीं था... उस क्लास रूम पर छोटा सा शीसा था जिसकी वजह से अंदर बाहर

देखा जा सकता था... नारायण ने अपनी आखें फैला कर देखा तो उसे कुच्छ दिखाई नही दिया...

वो थोड़ा टेढ़ा हुआ तो उसे किसी का पाँव हिलते हुए दिखाई दिया जोकि हर अगले सेकेंड आगे पीछे हीले जा रहा था...

नारायण को पता चल गया था कि कमरे में कुच्छ गड़बड़ हो रही है... वो ज़ोर ज़ोर से उस कमरे के दरवाज़े पर

मारने लग गया.... हाथो के साथ साथ लाते भी दरवाज़े पर बरसाने लगा और फिर उसे कुण्डी खुलने की आवाज़ आई...

क्लास रूम का दरवाज़ा खोलने वाला एक पीयान जोकि नारायण को देखकर ज़रा सा भी नहीं घबराया...

नारायण ने उसको हल्क्का सा धक्का देते हुए हटाया तो वो दंग रह गया... उस कमरे के कोने में एक टेबल पे टाँगें

फेला कर रीत बैठी हुई.. रीत के जिस्म पर सिर्फ़ के सफेद रंग की कच्छि थी और वो बेहद शर्मिंदा लग रही थी..

नारायण गुस्से में कमरे में गया और उससे पहले वो कुच्छ बोलता रीत ने कहा " सर आप जैसा कह रहे है मैं वैसा ही कर रही हूँ... प्लीज़ आप मेरे घर वालो को कुच्छ मत बताईएएगा"

ये सुनकर नारायण वहाँ खड़ा का खड़ा रह गया... वो बोला "ये क्या बकवास कर रही हो तुम"

रीत बोली " सर आपने ही तो कहा था कि इस पीयान के साथ के मुझे ये सब करना पड़ेगा तभी आप वो म्‍मस क्लिप मेरे घर वालो को नहीं दिखाओगे.."

नारायण के माथे पर पसीना छाया हुआ था और मूड के देखा तो वो पीयान भी वहाँ से जा चुका था... उसके पास रीत से कहने के लिए कुच्छ नहीं था मगर वो समझ गया था कि रश्मि उसे और रीत दोनो को ब्लॅकमेल कर रही है....

नारायण ने रीत को कपड़े पहनने के लिए कहा और यहाँ से जाने के लिए कहा... इन सब हर्कतो में नारायण को एक बात समझ नहीं आई कि आख़िर कार क्यूँ रश्मि रीत को एक पीयान से चुद्वायेगी
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07-19-2018, 01:18 PM,
#92
RE: Incest Porn Kahani जिस्म की प्यास
अगले दिन दोनो बहने भोपाल के लिए शताब्दी ट्रेन में बैठके चली गयी थी.. ट्रेन में दोनो अपनी दुनिया में खोई हुई थी.. डॉली को राज से मिलने की

जल्दी थी अब और उससे और दूर नहीं रह सकती थी.. .. ललिता को ये बात समझ आ गयी थी कि जीतनो से भी वो चुदि थी वो सारे उसको कभी हासिल नहीं कर पाते

और शायद इसी वजह से उन्होने उसको कुत्तिया की तरह चोदा था जिसमें उसको भी बहुत मज़ा आया था और वहीं दूसरी ओर चंदर के साथ उसको वो मज़ा

नहीं मिलता और वो इन सारी ख़ुशनसीबी से वंचित रहती.... फिर डॉली ने हिम्मत दिखाते हुए ललिता को अपने बॉय फ्रेंड राज के बारे में सब कुच्छ बता दिया...

अपनी बहन को सारी कहानी बताते वक़्त भी वो इतना शर्मा रही थी कि कोई भी देख कर बता सकता था कि वो कितना प्यार करने लगी थी राज को....

ललिता को खुशी थी कि उसकी बहन का एक बॉय फ्रेंड है और वो भी भोपाल में मगर उसे इस बात की समझ नही आई कि वो लड़का उसकी बहन से 3-4 साल छोटा है तो वो

डॉली को खुश कैसे रखता होगा??

भोपाल में जब नारायण स्कूल में पहुचा तो असेंब्ली के बाद उसने स्कूल के सारे पीयन्स को अपने कॅबिन में बुलाया... अगले 10 मिनट में एक साथ सब

प्रिंसिपल के कॅबिन में पहुचे और नारायण सब को गौर से देखने लग गया... उसकी नज़र उसी पीयान पे पड़ी जो कल की दोपहर स्कूल के बाद रीत के साथ क्लास रूम

में मिला था... नारायण ने उस पीयान को वही रुकने के लिए कहा और बाकी सबको भेज दिया.... उस पीयान के माथे पर पसीना सॉफ दिख रहा था...

नारायण ने थोड़ी भारी आवाज़ करके पूछा "नाम क्या है तुम्हारा??"

वो पीयान बोला "जी.. मेरा.. नाम... सर मेरा नाम मोती है"

"पूरा नाम बोलो जल्द ही" नारायण ने गुस्से में कहा

पीयान बोला "मोती लाल है नाम"

नारायण बोला " अब जो भी मैं तुमसे पुच्छू तुम सच सच उसका जवाब दोगे.....कल दोपहर तुम उसे क्लास रूम में उस लड़की के साथ क्या कर रहे थे"

"सर जी मैने कुच्छ अपनी मर्ज़ी से नहीं करा.." मोटी लाल ने घबरा के कहा

"तो फिर किसने कहा था??" नारायण ने पूछा

मोटी लाल ने कहा "सीर परसो रिसेस के दौरान मैं जब खाना ख़ाके कुच्छ काम कर रहा तब वो ही लड़की मेरे पास आई थी और उसने मुझे कुच्छ अजीब से इशारे करें...

मैने उस वक़्त इतना ध्यान नहीं दिया था... फिर कल फिर वो आई थी और अंजान बन कर उसने मेरे मर्द्पन पे हाथ फेर दिया था और मैं उधर ही हिल गया था...

उसने मुझे जगह और समय बोला था मैं तो बस वहाँ गया था"

नारायण सोच में पड़ गया कि इसको भी रश्मि ने कुच्छ करने को नहीं कहा.... कुच्छ देर के बाद उसने मोती लाल को थोड़ा सा डांता और अपने कॅबिन से भेज दिया..

क्रमशः…………………..
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07-19-2018, 01:18 PM,
#93
RE: Incest Porn Kahani जिस्म की प्यास
जिस्म की प्यास--26

गतान्क से आगे……………………………………

लंच के दौरान नारायण ने रश्मि को अपने कमरे में बुलाया और उसको बैठने के लिए कहा... उसने हिम्मत दिखाते हुए रश्मि से पूछा

"ये मेरे पीठ पीछे क्या चल रहा है"

रश्मि ने पूछा "क्या चल रहा है सर" वो नारायण को सर सिर्फ़ उसे तंग करने के लिए बोल रही थी...

नारायण बोला "देखो तुम जितने पैसे माँग रही हो मैं तुम्हे दे रहा हूँ... कल जब मैं जब घर के लिए जा रहा था तब मैने एक क्लासरूम में रीत एक पीयान के साथ अकेले थी

और उसने वो दरवाज़ा भी अंदर से बंद कर रखा था... जब मैने रीत से पूछा इस बारे में तो उसने ये कहा कि मैं ये सब करवा रहा हूँ"

रश्मि नारायण को चिड़ा कर बोली "सर अब आप भोली लड़कियों से ये काम भी करवाने लग गये"

नारायण परेशान होके बोला "देखो" "दिखाइए" रश्मि ने एक दम से कहा..

फिर रश्मि बोली "हां मैने ये सब करवाया.. और ये सब क्यूँ किसलिए करवाया इसमे मुझे तुझे सफाई देने की ज़रूरत नही है.. तुझसे जितना बोलती हूँ उतना करा कर.

.ज़्यादा अकल दौड़ाएगा ना तो जितनी भी अकल है वो भी भाग जाएगी"

नारायण रश्मि की ऐसी बाते सुनके बोला "तुम्हे जो करना है करो मगर मेरा नाम मत लाओ.. प्लीज़"

रश्मि कुर्सी से उठी और कॅबिन के बाहर जाके बोली "अच्छी बात है तुझे ये पता चल ही गया है क्यूंकी अब कुच्छ च्छुपाने की ज़रूरत नही होगी" ये सुनकर नारायण

और भी ज़्यादा घबरा गया...

उधर दिल्ली में पूरे घर में शन्नो और चेतन रह गये थे और जब दोनो घर पे अकेले हो तो ज़्यादा दूर नहीं रह सकते.... चेतन ने अपनी मा को सफेद रंग की

बड़ी टी-शर्ट दी और उसको बोला, एक तरीके से हुकुम किया कि वो सिर्फ़ यही पेहेन्के घर पे घूमेगी... शन्नो अपने बेटे को ज़रा सा भी निराश नही करना चाहती थी

और अपनी नाइटी उतार के उस टी-शर्ट को पहेन लिया... वो टी-शर्ट उसकी आधी जाँघो को ही धक पा रही थी और उसने अपनी चूत को एक सफेद रंग की चड्डी से ढका हुआ था...

चेतन ने शन्नो को ब्रा पहेन ने के लिए सॉफ मना कर दिया था और शन्नो ने भी खुशी खुशी उसका कहना माना... सुबह से दोपहर होने तक केयी बारी चेतन

अपनी मा को छेड़ चुका था... कभी उसका हाथ शन्नो के मम्मो पे पड़ता तो कभी जाँघो पर... जब वो नाश्ता बनाने में लगी हुई तो चेतन में मस्ती में शन्नो

की शर्ट को उपर करकर उसकी सफेद पैंटी को देखने लगता... जब भी शन्नो झुकती तो उसके स्तनो की बीच की मलाई वाली सड़क उसके बेटे को सॉफ दिख जाती....

शन्नो इन्न हर्कतो से काफ़ी मचल उठी थी... दोपहर के कुच्छ 2 बज रहे थे और फोन की घंटी बजी.... शन्नो ने जब फोन उठाया तो उसको उसकी बहन की आवाज़ सुनाई दी

"हेलो दीदी.... कैसी हो आप" आकांक्षा ने प्यार से पूछा

शन्नो ने रूखा सूखा कह दिया "ठीक हूँ... बोलो क्या काम था"

आकांक्षा की आवाज़ में सॉफ झिझक थी.. उसने पूछा "चेतन है??"

शन्नो ने झूठ में कह दिया "वो स्कूल गया हुआ है"

"झूठ मत बोलो दीदी वो घर पर ही होगा मगर वो मोब नही उठा रहा" आकांक्षा ने मायूस होके कहा

शन्नो खुश हो गयी थी ये जानके और बोली " वो स्कूल में ही है'

इस दौरान चेतन पीछे से आया शन्नो की टी-शर्ट में हाथ घुसाकर उसके स्तनो को दबाने लगा... उसके होंठ शन्नो की गर्दन को चूमे जा रहे थे...

शन्नो के मुँह से सिसकने की आवाज़ आने लगी और उन्हे सुनके आकांक्षा को पता चल गया कि चेतन घर पर ही है.... आकांक्षा फोन पे चेतन चेतन करती रही और वही चेतन ने

अपना सीधा हाथ अपनी अपनी मा की पैंटी में घुसा दिया था... चेतन की उंगलिया उसकी मा की चूत मे अंदर बाहर हुए जा रही थी...

शन्नो कुच्छ ज़्यादा ही मदहोश हो गयी थी और शायद इसकी वजह ये थी कि उसकी बहन दूसरी तरफ चेतन के लिए तड़प रही थी.... उसको और तड़पाने के लिए शन्नो

ने फोन कट नहीं करा बल्कि चेतन को बाँहो में लेके उसको चूमने लगी और चेतन चेतन करके आवाज़ें निकालने लगी...
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07-19-2018, 01:18 PM,
#94
RE: Incest Porn Kahani जिस्म की प्यास
चेतन को अंदाज़ा हो गया था कि उसकी मा किसको जलाने में लगी हुई थी और वैसे भी अपनी मा को इतना गरम देखकर उसका लंड पूरा खंबे की तरह तना हुआ था...

दोनो फोन के सामने ही रहकर एक दूसरे को खुश करने लगे... ऐसा करने की शन्नो के पास 2 ही वजह थी पहली उसे ये सब करने में बहुत मज़ा आ रहा था और दूसरे

अपनी छ्होटी बहन को जलाने की....

खैर उधर दोनो बहने भोपाल के स्टेशन पे उतरी तो अब्दुल गाड़ी लेके आया हुआ था... डॉली ने अब्दुल को ललिता से मिलवाया और फिर तीनो घर के लिए रवाना हो गये...

डॉली ललिता को हर वो चीज़ बताने लग गयी भोपाल के बारे में जो उसे पता थी और ललिता भी वो सारी बातें कान खोलके सुनने लगी...

दोनो बहन पीछे बैठी थी तो अब्दुल ने भी कुच्छ बोला नहीं बस गाड़ी चला रहा था... फिर घर को देखकर ही ललिता काफ़ी खुश हो गयी... ये घर दिल्ली वाले

घर से काफ़ी बड़ा और काफ़ी अच्च्छा था... डॉली ने ललिता को पूरा घर दिखाया और फिर उसे उसका नया कमरा भी दिखाया....

डॉली ने नारायण को फोन करके बता दिया कि वो घर आ गयी है तो नारायण भी स्कूल से निकलके घर के लिए रवाना हो गया क्यूंकी स्कूल में रहकर उसका दिमाग़

फटा जा रहा था....

घर पहूचकर नारायण को बहुत ज़्यादा राहत मिली... अपनी दोनो बेटियो को देखकर वो काफ़ी खुश हुआ.. उसकी ज़िंदगी में तूफान आया था वो उस वक़्त के लिए कही खो

चुका था.... उस रात नारायण बड़ी चैन की नींद सोया... डॉली ने तकरीबन 3 घंटे तक अपने प्यार राज से फोन पे बात करी और बात करते करते सो गयी...

ललिता अपने बिस्तर पर चैन की नींद सो गयी...

अगली सुबह दिल्ली में जब घंटी बजी तो शन्नो अपने बिस्तर से उठी तो उसकी नज़र उसके बेटे चेतन पर पड़ी जोकि कल रात उसके साथ एक ही चद्दर में सोया था...

शन्नो के चेहरे पर मुस्कान आ गयी.... शन्नो ने अभी भी वोई लंबी सफेद रंग की टी-शर्ट पहनी थी और उसके नीचे वो पूरी नंगी थी...

घर की घंटी फिर से बजी तो शन्नो ने जल्दी से फर्श पे पड़ी अपनी पैंटी को उठाया और उसे पहेन लिया और भाग कर अलमारी की तरफ नीचे कुच्छ पहनने के लिए बढ़ी तो

चेतन ने अपनी नींद से भारी आवाज़ में कहा "अब इस्की क्या ज़रूरत है"

शन्नो अलमारी खोलते खोलते रुक गयी... चेतन बोला "आज आप ऐसे ही दूधवाले भैया के पास जाओगी बिना किसी झिझक के..."

"मगर चेतन" शन्नो के आगे बोलने से पहले ही चेतन बोला "कुच्छ मगर नहीं जाओ दरवाज़ा खोला.. दूध लो.. और दरवाज़ा बंद करदो... इसके अलावा कुच्छ करने की ज़रूरत नहीं है..."

एक बारी फिर से घंटी बजी तो शन्नो के कदम घर के दरवाज़े के तरफ बढ़ने लगे... चेतन की ऐसे बातें सुनकर शन्नो का गला सूख गया था...

शन्नो ने मूड के देखा तो चेतन अब अपने कमरे के दरवाज़े के पास ही खड़ा हो गया ये सबका मज़ा लूटने के लिए.... शन्नो ने सोचा कि वो पहले पतीला निकाल

लेती है ताकि ज़्यादा समय नही लगे तो उसने किचन सेपटीला निकाला और दरवाज़े की कुण्डी उपर से खोली जिस कारण उसकी टी-शर्ट उपर हो गई और उसकी सफेद पैंटी

पूरी तरह से दिखने लगी... अपनी टी-शर्ट को नीचे करते हुए शन्नो ने दरवाज़ा खोला...

उसकी जान में जान आ गयी... शायद दूधवाला वहाँ से तंग होके चला गया था... शन्नो ने झट से दरवाज़ा बंद करा और वापस चेतन के कमरे में चली गयी....

उसके दिमाग़ में चल रहा था कि अगर उस दूधवाले ने उसे ऐसी हालत में देख लिया होता तो क्या होता?? क्या वो सिर्फ़ आँखो से मज़ा लूटता?

या फिर मुझे वही दबोच लेता?? ये फिर हार्ट अटॅक से ही मर जाता"



सुबह भोपाल में नारायण के स्कूल चले जाने के बाद डॉली नहा के तैयार हो रही थी....

उसने एक स्किन टाइट ब्लू जीन्स पहनी थी और उसके उपर थोड़े बाजू वाला पीले रंग का टॉप... उसने जल्दी से जाके ललिता को उठाया जो कि अभी बिस्तर पे पड़ी सो रही थी... ललिता ने डॉली को तैयार देख कर पूछा "क्या कहीं जा रही हो क्या??"

डॉली बोली "नहीं हम कहीं नही जा रहे बस राज यहाँ पे आ रहा है मुझसे मिलने"

ये सुनके ललिता डॉली को चिडाने लगी...

डॉली ने ललिता का हाथ हाथ में लेके पूछा "अच्छा सुन तुझे कोई दिक्कत तो नहीं है ना यार"

"कैसी बात करदी आपने... मुझे क्या दिक्कत" ये सुनके डॉली ललिता के गले लग गयी और बोली "चल तू भी नहा और कुच्छ ढंग का पहेनले वो आ जाएगा थोड़ी देर में"
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07-19-2018, 01:19 PM,
#95
RE: Incest Porn Kahani जिस्म की प्यास
ललिता बिस्तर से उठी.. नहा धोकर तैयार होके बैठ गयी... उसने काली रंग की कॅप्री पहनी जो उसके पैरो से थोड़ी उपर तक

थी और उसके उपर उसने एक वाइट शर्ट पहेन ली.... ललिता डॉली का हाल देख देख के हँसे जा रही थी...

डॉली बहुत ही बेसब्री से अपने आशिक़ का इंतजार करने में लगी हुई थी और ललिता उसको चिड़ा चिड़ा कर मज़े लूट रही थी...

आख़िर कार वो पल आ ही गया और घर की घंटी बजी और डॉली भाग कर दरवाज़ा खोलने गयी....

जैसी उसने दरवाज़ा खोला तो राज ने उसको बाँहो में ले लिया ये सोचके कि वो घर पर अकेली थी...

राज अपने दोनो हाथ डॉली की पीठ फेरने लगा और डॉली को भी ख़याल नही रहा कि उसकी बहन ये सब कुच्छ देख रही होगी... ललिता जान के दो बारी ख़ासी ताकि दोनो को एहसास हो जाए कि वो भी घर में है...

ललिता पे नज़र पड़ते ही राज डॉली से दूर हो गया... डॉली ने भी अपने आपको काबू में करा और दरवाज़ा बंद

करकर उसने ललिता को राज से मिलवाया.... दोनो ने एक दूसरे से हाथ मिलवाया और फिर डॉली राज को अपने कमरे

में लेके चली गयी... ललिता को राज बड़ा चंदर टाइप का लगा क्यूंकी वो दिखने में गोरा क्यूट सा था और भोला भी

काफ़ी लग रहा था... खैर ललिता ने अपना समय टीवी देख कर बिताया मगर कहीं ना कहीं उसके दिमाग़ में

ये भी चल रहा था कि उसकी बड़ी बहन और उसका बॉय फ्रेंड बंद कमरे में कर क्या रहे होंगे...

शन्नो से रहा नही गया और वो टीवी बंद करके दबे पाओ डॉली के कमरे की तरफ बढ़ी.... कमरे का दरवाज़ा बंद था तो

ललिता उस दरवाज़े पर कान रखके दोनो की बातें सुनने लगी... दोनो इतनी धीमी धीमी बात कर रहे थे कि ललिता को

कुच्छ सुनाई भी नही दे रहा था... हारकर ललिता अपने कमरे में चली गयी और बिस्तर पे बैठकर कुछ ना कुछ सोचने लगी....

उधर डॉली के कमरे में दोनो बैठे हुए एक दूसरे की आँखों में देखकर इश्क़ लड़ा रहे थे...

राज बार बार कुच्छ ना कुच्छ कहकर डॉली को शरमाने में मझबूर कर रहा था.... डॉली का पीला टॉप उपर

से गहरा गला था जिसकी वजह उसका हल्का सा क्लीवेज दिख रहा था... जब भी वो झुकती तो क्लीवेज बड़ा हो जाता और

राज की साँस अटक जाती... राज से रहा नही जा रहा था और वो अपने सामने डॉली को कपड़े उतारते हुए

नंगा देखना चाहता था...... मौका मिलते ही उसने उस क्लीवेज पे अपनी उंगली चला दी और डॉली उसकी उंगली को मारते

हुए उसे थोड़ा दूर हो गयी... राज ने बड़े प्यार से डॉली को कहा "आज तुम बहुत ही ज़्यादा हॉट लग रही हो"

ये सुनके डॉली ने भी कहा "आज तुम बड़े डॅशिंग लग रहे हो" जिसको सुनके राज भी मुस्कुरा उठा...

कुच्छ देर इधर उधर की बातें करने के बाद डॉली बिस्तर से उठ कर अलमारी से अपना नया खरीदा हुआ टॉप राज को

दिखाने के लिए उठी तो राज ने उसकी टाइट गान्ड पे हाथ फेर दिया और डॉली हद्द से ज़्यादा शर्मा उठी....

डॉली ने राज को कुच्छ नहीं कहा और अलमारी खोलके अपना नया टॉप निकाला जोकि काले रंग का स्लीव्ले टॉप था....

उसको देखते ही राज बोला "ह्म्म ठीक है"

डॉली उदास होके बोली "बस ठीक... मुझे लगा तुम्हे बड़ा अच्छा लगेगा"

राज डॉली को देख कर बोला "पहन्के दिखाओ तो शायद ढंग से पता चलेगा"

डॉली उठ कर जाने लगी तो राज ने उसको रोक के पूछा "अर्रे कहाँ जा रही हो??"

डॉली बोली "तुमने ही तो बोला पेहेन्के दिखाओ तो चेंज करने जा रही थी बाथरूम"

राज बोला "क्यूँ मेरे सामने करने में क्या दिक्कत है"

डॉली हंस के बोली "मैं जानती थी तुम यही चाहते हो गंदे बच्चे"

राज ने रोने वाला चेहरा बना लिया जिसको देख कर डॉली बोली "अच्छा एक शर्त पे... तुम अपनी आँखें बंद कर्लो मैं यही चेंज करलूंगी"

दोनो में थोड़ी देर बहस होने के बाद राज ने बोला "ठीक है जैसे आप कहें"

"चलो फिर अपनी आखें बंद करो... आंड नो चीटिंग" डॉली ने राज से कहा और उसने अपनी आखें बंद करली मगर

उसके चेहरे पे से मुस्कुराहट जाने का नाम ही नहीं ले रही थी.... डॉली ने कुच्छ सेकेंड राज की ईमानदारी देखी और

फिर अपने बाल खोल दिए ताकि उसका पीला टॉप उनमें ना फँस जायें... उसने अपने टॉप को दोनो हाथो से पकड़ा और

उतारके बिस्तर पे रखा.... जब उसने वो काला टॉप बिस्तर से उठाया तो वो उसे खीच नहीं पाई क्यूंकी

राज ने पहले से ही उसका एक कोना पकड़ रखा था... राज ने भी उसी वक़्त अपनी आँखें खोली और डॉली को सफेद ब्रा

में देख कर हंस ने लगा... फिर उसने दोनो टॉप्स को अपनी मुट्ठी में कर लिया और डॉली उससे हाथा पाई करने लगी...

दोनो भूल गये थे कि ललिता अभी भी घर में मौजूद है और एक डूस्र से मज़ाक मज़ाक में लड़ने लगे...

राज ने डॉली को दोनो नाज़ुक हाथो को अपने एक हाथ से पकड़ लिया और दोनो एक दूसरे की आँखों में देखने लगे....
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07-19-2018, 01:19 PM,
#96
RE: Incest Porn Kahani जिस्म की प्यास
डॉली अब राज से लड़ नही रही थी... राज ने अपना दूसरा हाथ डॉली की पीठ की तरफ बढ़ाया और उसकी ब्रा

का हुक एक झटके में खोल दिया और डॉली की सफेद ब्रा राज के पेट पे जा गिरी.... डॉली अब उपर से पूरी नंगी हो चुकी थी... पंखे की हवा उसकी चुचियो पे लग कर उन्हे सख़्त बना रही थी... राज ने डॉली के हाथो को आज़ाद किया और डॉली

ने उसको बाँहो में ले लिया... डॉली के स्तन राज की छाती से चिपके पड़े थे और राज के हाथ डॉली की नंगी

पीठ को सहला रहे थे... दोनो एक दूसरे को चूमने लगे और राज ने डॉली की जीन्स की तरफ जब हाथ बढ़ाया तब डॉली

ने उसे रोकते हुए कहा "अभी नही.. ललिता है घर पर"

राज भी डॉली के कहने पे रुक गया और दोनो ने फिर एक दूसरे को आधे मिनट के लिए चूमा और फिर डॉली ने अपने

कपड़े वापस पहेन लिए... 2 बजने को आए थे और राज घर से निकलने ही वाला था... डॉली और राज ललिता

के कमरे में उससे मिलने के लिए मगर वो बिस्तर पड़ी सो रही थी.... राज और डॉली ने हसके कहा "और हम इससे डर रहे थे"

स्कूल में नारायण ने अपनी घड़ी में समय देखा तो उसे लगा कि अब घर के लिए निकलना चाहिए...

दोपहर के ढाई बज गये थे और नारायण अपना समान अपने बक्से में डालने लगा था.... वो अपनी कुर्सी से उठा और

दरवाज़ा की तरफ जैसे ही बढ़ा तो दरवाज़ा अपने आप खुल गया और उसके सामने रश्मि खड़ी हो गयी....

रश्मि ने एक काले नीले रंग की जीन्स के उपर लाल रंग का स्लीव्ले टॉप पहेन रखा था... नारायण को समझ नही

आ रहा था कि ये लड़की इस वक़्त उसके कॅबिन में क्या करने के लिए आई है.... नारायण को हल्का सा धक्का देकर वो कॅबिन

के अंदर गयी तो उसके पीछे पीछे रीत भी कमरे में आई स्कूल की यूनिफॉर्म में और उसके साथ वोई पीयान मोती लाल था.... रश्मि कुर्सी पे अपनी एक टाँग के उपर दूसरी टाँग रखके रानिओ की तरह बैठ गयी....

नारायण ने अपनी नज़रे घुमाई तो वो मोती लाल रीत के बदन जोकि स्कूल के कपड़ो से ढका हुआ था उसपे हाथ फेरने लगा...

रीत की आँखो में शरम सॉफ झलक रही थी जिसको देख कर नारायण ने रश्मि से बोला "ये क्या हो रहा है यहाँ??"

रश्मि बोली " दिख नहीं रहा क्या प्रिनिसिपल सर??"

नारायण बोला " देखो जो करना है करो बस स्कूल में ना करो"

रश्मि बोली " अर्रे गुस्सा क्यूँ हो रहे हो प्रिनिसिपल सर हमे तो खुद रीत ने कहा कि मेरेको प्रिनिसिपल सर के सामने

चुद्ना है तो बस हम उसकी चाहत को पूरा कर रहे है"

मोती लाल अपनी मस्ती में लगा हुआ था उसने रीत को गौद में उठाया और उसको नारायण की टेबल पे बिठा दिया....

नारायण को पता था कि उसके हाथ में कुच्छ नही है तो वो वहाँ से जाने लगा...

"एक मिनट" रश्मि ने नारायण को रोकते हुए कहा.. वो बोली "आपके बगैर तो मूवी बन ही नही सकती नारायण सर"

ये सुनके नारायण पीछे मुड़ा तो रश्मि ने अपने पर्स में हॅंडीकॅम निकाला और मोती लाल को पकड़ा दिया...

मोटी लाल ने कॅमरा शुरू करते हुए ही रीत को कहा "चल छमिया शुरू हो जा... और इस बार कोई गड़बड़ नही होनी चाहिए"

सहमी हुई रीत ने अपने खुले बालो को अपने कानो के पीछे करा ताकि उसका चेहरा कमेरे में ढंग से दिखे और

अपने चेहरे पे मुस्कान लाकर वो आहिस्ते से बोलने लगी "हाई मेरा नाम नवरीत कौर है और मेरा काम है आपको

खुश करना.... वैसे में एक स्कूल गर्ल हूँ मगर पढ़ाई से ज़्यादा मुझे चुदाई में मज़े आते है"

ये कहते कहते वो एक एक करकर अपनी सफेद शर्ट के बटन्स को खोलने लगी....

रीत ने फिर कहा " आज मैं अपने प्रिन्सिपल सर के कमरे में आई हुई हूँ जो मुझे सारे एग्ज़ॅम्स में फैल होने के लिए

डाटेंगे मगर मैं इनको अपने जिस्म के जादू में इतना डुबोदूँगी कि वो ये सब कुच्छ भूल जाएँगे"

ये कहते ही रीत अपने कंधे को हिलाते हुए अपनी सफेद स्कूल की शर्ट को उतारकर बैठ गयी.... उसके बाद मोती लाल ने

कॅमरा पॉज़ कर दिया और रश्मि बोली "प्रिनिसिपल सर आज आपको अपनी प्यारी स्टूडेंट रीत की वीडियो बनानी है तो हर

एक मजेदार सीन रेकॉर्ड होना चाहिए नहीं तो आप जानते है क्या होगा"

क्रमशः…………………..
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07-19-2018, 01:19 PM,
#97
RE: Incest Porn Kahani जिस्म की प्यास
जिस्म की प्यास--27
गतान्क से आगे……………………………………
नारायण चलता हुआ रश्मि के पास आया और रश्मि ने उसे कॅमरा पकड़ाया... मोती लाल हस्ता हुआ टेबल के नीचे बैठ गया और रश्मि ने रीत को वापस अपनी शर्ट पहेन्ने को कहा और फिर वो कॅबिन के दरवाज़े के पास चली गयी....

नारायण ने कॅमरा पॉज़ से हटाया और रीत कॅबिन के दरवाज़े से चलती हुई आई और इधर उधर देखने लगी....
"सर.... सर" रीत ने अपने मुँह को खोलते हुए दो बारी प्रिंसिपल को आवाज़ दी मगर जवाब कोई नही आया...

रीत प्रिंसिपल का वेट करने लगी तो धक कर कुर्सी पे बैठ गयी.... उसकी नज़र टेबल पे पड़े कुच्छ पेपर्स पे पड़ी जिसको
देख कर उसने कहा 'ओह्ह तो ये है मेरे सारे एग्ज़ॅम पेपर्स... सर तो है नही तो मैं इन्हे चुराके ही भाग जाती हूँ
तो किसिको पता नही चलेगा.... उसने पेपर्स को उठाया और शर्ट के अंदर डालके वहाँ से जाने लगी...
तभी वहाँ से आवाज़ आई "हॅंड्ज़ अप"

तो मोती लाल टेबल के नीचे से उछलता हुआ बाहर आया "ज़्यादा स्यानी बन रही हो... अभी सर को आने दो तुम्हारी खैर नहीं लड़की..."

"तुम कौन हो" रीत ने पूछा

"हम पीयान मोती लाल है" मोटी लाल ने गर्व से कहा... रश्मि नारायण के साथ खड़े होकर ये सब सुन रही थी और इस डाइलॉग पे उसकी हँसी छूट गयी...

रीत ने घबरा रश्मि को देखा और उसके गुस्से वाले चेहरे को देख कर वो मोतीलाल को देख कर शरारती अंदाज़ में बोली
"ओह्ह तो आप मोती लाल है... वो तो मैं बस ऐसी ही पेपर्स देख रही थी"

मोती लाल टेबल से चलता हुआ रीत के पास खड़ा हो गया और बोला "पेपर निकाल और टेबल पे रख"

रीत ने फिरसे अपनी शर्ट के बटन्स खोले और मोतीलाल का गला सूख गया.... दो बटन्स खोलने के बाद रीत ने पूछा "और देखोगे" तो मोती लाल एक प्यासे की तरह पानी देख कर बोला "हां हां"

रीत ने अपनी शर्ट के सारे बटन्स खोलदीए और मोती लाल को वो पेपर पढ़ाए... मोतीलाल उन्हे पकड़ के सूँगने लगा...
रीत ने मोती लाल के सीधे हाथ को पकड़ा और अपने एक स्तन पे रक्ख दिया जो कि सफेद ब्रा से ढका हुआ था...
एक स्कूल की लड़की के स्तन को दबाकर मोती लाल को मुँह से लार टपकने लगी और खुश होकर उसने दूसरा हाथ भी बढ़ाया और रीत के मम्मो को दबाने लगा.... रीत अपने मुँह से आहह ओह्ह की आवाज़ें निकालने लगी जैसे कि कोई भी चुदाई की मूवी में होती है.... मोती लाल अब बेकाबू हो चुका था और उसने रीत को अपनी बाँहों में भर लिया और उसकी शर्ट को उतारकर उसके उपरी जिस्म को चूमने और कभी कबार काटने लगा....

फिर उसके उठाकर टेबल पे बिठाया और उसकी ब्रा को चीर दिया... रीत के मम्मे मोती लाल की आँखों में घूमने लगे और
उसकी चुचियो को वो चूसने लगा... एक स्तन पे उसकी ज़ुबान चल रही थी तो दूसरे पे उसके हाथ...
फिर उसने रीत की स्कर्ट को उपर उठा दिया और उसकी सफेद पैंटी को नीचे कर दिया... उसकी चूत को देख कर पीयान मोती लाल बोला
'छोरि एक बाल भी नही है तेरी चूत पे... वाह देख कर मज़ा आ गया.. अब उसे कुत्ते की तरह चाटूँगा मैं"
रीत को टेबल पे लिटाकर वो अपनी ज़ुबान रीत की चूत पे लेगया और चाटने लगा..

नारायण को विश्वास नही हो रहा था रीत की चूत को देख कर जोकि पूरी तरह से गीली हो चुकी थी....
मगर जो हाल रीत की चूत का हो रहा था वो उसके लंड का भी था जो की आहिस्ते आहिस्ते खड़ा होने लगा था...
मोती रीत को चूत को चाटने में लगा और रीत मज़े में सिसकियाँ ले रही थी... कुच्छ देर बाद मोती बोला
"चल छोरि अब मुझे खुश कर..." ये कहकर उसने अपनी शर्ट को उतारा और उसका काला जपतला बदन सामने आया और
अपनी पॅंट को उतारकर उसने अपना लंड रीत के सामने रख दिया.... नारायण मोती लाल के लंड को देख कर दंग रह गया
क्यूंकी वो उसके लंड से काफ़ी शक्तिशाली लग रहा था... रीत टेबल से उतरी और उस महा लंड को चूमते हुए चूसने लगी.... मोती का लंड बालो से ढका हुआ था जिसके अंदर से अजीब सी बदबू कमरे में फेल गयी थी पर शायद अब तक
रीत उस बदबू में खुश्बू ढूँढ चुकी थी.... मोती लाल ने एक पल के लिए नारायण को देखा और हँसने लगा...
नारायण की पॅंट में से उसका लंड कूदने को आ चुका था मगर वो ऐसा कर नही सकता था...

अपना लंड चुस्वकार मोती लाल बोला "चल अब मैं तुझे खुश करता हूँ... आजा टेबल पे अपनी टाँगें चौड़ी करके बैठ जा... रीत मोती लाल से मदद लेती हुई टेबल पे बैठी और अपनी टाँगें चौड़ी करली... उसकी चूत का पानी टेबल से
बहता हुआ ज़मीन पे टपक रहा था... मोती लाल आगे बढ़ा और अपना लंड उसकी चूत में डालकर ठोकने लगा....
नारायण ने हाथ बढ़ा कर अपने लंड को ठीक करा और चलता हुआ रीत के पास जाने लगा ताकि वो उसको रेकॉर्ड कर सके
लेकिन रश्मि ने उसे वही रोक दिया....मोती लाल की पीठ की वजह से वो कुच्छ रेकॉर्ड नही कर पा रहा था और वो घबरा
गया था कि कहीं इस बात का फ़ायदा रश्मि ना उठा ले मगर वो चौक गया जब उसके साथ में खड़ी रश्मि के हाथ ने उसके
लंड को च्छुआ और उसकी पॅंट की ज़िप को खोलकर उस जागे हुए लंड को आज़ाद कर दिया...

नारायण ने रश्मि को देखका जोकि नारायण की तरफ देख नही रही थी मगर फिर भी उसका हाथ खुशी खुशी नारायण के
लंड पे चल रहा था... इतने समय के बाद ये खुशी महसूस करके नारायण अपने सारे गम भूल गया था....
जहा मोती लाल और रीत चुदाई की आवाज़ पूरे कमरे में घूम रही थी वही नारायण चुप चाप खड़ा रश्मि के हाथो
मज़े ले रहा था.... चोदता चोद्ता मोती लाल ने अपना सारा वीर्य रश्मि के चेहरे पे छिरक दिया और नारायण ने सारा
ज़मीन पे डाल दिया... कुच्छ वीर्य रश्मि के हाथो पे रह गया जिसको उसने ख़ुसी खुशी चाट लिया...
मोती लाल खुश होता हुआ अपने कपड़े पहनने लगा और जाते जाते रश्मि ने नारायण को कहा "कमरे में पहले से ही 4 कमेरे लगा रखे है हमने तुम्हे तो बस ऐसी ही खड़ा करवा रखा था हम ने..."

रीत भी अपने कपड़े पेहेन्के वहाँ से चली गयी.. मगर नारायण को यकीन नही हुआ कि इन लोगो ने मेरे कमरे में
हिडन कॅमरा लगा रखे है और मेरा इस तरह इस्तेमाल भी कर लिया... मगर एक ओर नारायण को ये भी समझ नही आया कि इन बातो में रश्मि ने उसके लंड को क्यूँ खुश करा..??
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07-19-2018, 01:19 PM,
#98
RE: Incest Porn Kahani जिस्म की प्यास
उधर दिल्ली में चेतन अपनी मा को घर में चोद चोद कर थोड़ा बोर होने लगा था मगर शन्नो दिन रात
अपने बेटे से चुद्ने के लिए तैयार रहती थी... नज़ाने ऐसा क्या जादू कर रखा था चेतन के लंड ने अपनी मा की चूत पर.... चेतन का मन किसी दूसरी औरत को चोद्ने को कर रहा था.... उसने अपनी मासी आकांक्षा को कॉल भी करने की
कोशिश करी मगर जब उसने उसे कॉल करा तो आकांक्षा ने उसका फोन नही उठाया और बादमें मैसेज करके कह दिया कि
वो अब देहरादून में है और उसे बात नहीं करना चाहती... आज की रात भी उसकी मा की चूत में खुजली हो
रही थी नज़ाने कितनी बारी उसने चेतन को ललचाने की कोशिश करी मगर शन्नो नाक़ामयाब रही.....

अगली सुबह घंटी बजते ही शन्नो की आँख खुली.... अपने बिस्तर से वो आँख मलते वे उठी उसका बेटा उसी बिस्तर के दूसरे
कोने में सोया पड़ा था... वैसे हमेशा चेतन शन्नो से चिपक के सोते था मगर आज ऐसा नहीं हुआ था...
वो देख कर शन्नो को एहसास हुआ कि कल की रात कितनी खाली थी... खैर बिस्तर से उठ कर उसने देखा कि उसने अभी भी वोई
बड़ी टी-शर्ट पहेन रखी थी जो चेतन ने उसको पहले पहनने को दी थी.... कल रात वो पेहेन्कर उसने चेतन को
अपनी तरफ आकर्षित करने की कोशिश करी थी मगर काम नहीं बना था.... उसे बाकी कपड़े ज़मीन पे ही पड़े थे और
जब उसने उन्हे उठाया तब उसे एक गंदा आइडिया आया और उसने अपने कपड़े वही ज़मीन पे ही छोड़ दिए....
उसी लंबी टी-शर्ट में जोकि उसकी जाँघो को आधा भी मुश्किल से ढक पाती थी उसमें धीमे धीमे चलके वो
दरवाज़ा खोलने के लिए बढ़ी... शन्नो को याद था कि चेतन उसको ये करते हुए देखना चाहता था....
दरवाज़े की तरफ पहूचकर उसने एक लंबी साँस ली और दरवाज़े की कुण्डी खोली... दरवाज़ा आवाज़ करते हुए खुला और
सामने दूधवाले के आँखें ज़मीन की तरफ देख रही थी.... शन्नो के पाओ को देख कर जोकि रेक्सोना की चप्पलो में
थे दूधवाले की आँखें बढ़ती हुई शन्नो की टाँगो पे पड़ी... धीरे धीरे वो शन्नो की मलाईदार टाँगो को
देखता गया ताकि अगर ये सपना हो तो जल्दी टूट ना जाए..... उसकी नज़रे जब शन्नो की जाँघो तक आई तो उसका पूरा गलासूख गया.... शन्नो के चेहरे पे शरम थी और उसका दिल ज़ोर ज़ोर से धड़के जा रहा था....

शन्नो ने हिम्मत दिखाते हुए कहा "ये लो पतीला 1 किल्लो दूध ही देना आज"

दूधवाले ने नज़रे शन्नो की नज़रो से मिलाई तो उसकी आखो में खो गया... शन्नो की नींद सी भरी आँखों में
इतना नशा था कि शन्नो को फिर दूधवाले को पतीला लेने के लिए कहना पड़ा.... दूधवाला अपनी टाइट पॅंट को उपर
खीचता हुआ ज़मीन पे बैठके अपने बड़े से डेक्चे में से दूध निकालने लगा.....
उसकी निगाहें शन्नो की जाँघो की तरफ थी वो देखने की दिल से दुआ कर रहा था कि मुझे इस खूबसूरत बाला की चूत
के दर्शन हो जाए मगर शन्नो की टाँगें एक दूसरे से जुड़ी होने के कारण कुच्छ दिखना मुश्किल था....
शन्नो को समझ आ गया था कि दूधवाला क्या देखना चाह रहा और वो अपने को रोक नहीं पाई और अपनी
टाँगो को थोड़ा चौड़ा कर दी... दूधवाले की आँखें शन्नो की गंदी पुरानी सफेद रंग पैंटी पे पड़ी और वो हिल गया...
इस कारण दूध शन्नो के पतीले में डालने के बजाए उसने फर्श पे गिरा दिया.... फर्श पे दूध की आवाज़ पड़ते ही
शन्नो ने अपनी टाँगो को वापस जोड़ लिया और दूधवाले ने भी अपनी नज़रे फेर दी... शन्नो के पतीले में दूध
डालकर वो अपने पॅंट के अंदर जागे हुए लंड को ठीक करता हुआ वो उठा.... शन्नो की उंगलिओ को छूता हुआ उसने वो
पातीला शन्नो को पकड़ाया और शन्नो ने दरवाज़ा बंद कर दिया..... दरवाज़े से टिक्क कर करीबन 1 मिनट
शन्नो लंबी लंबी साँसें लेती रही.... उसकी चूत ने उसकी पैंटी को नम कर दिया था.... उसने जल्दी से पतीले को किचन
में रखा और टाय्लेट जाके मूतने लगी.... टाय्लेट की सीट पे बैठकर वो उस दूधवाले के हावभाव को देख कर हँसने लगी... "बिचारा पागल हो गया होगा मुझे ऐसा देख कर" शन्नो ने हस्ते हुए कहा...

टाय्लेट से निकल कर जब शन्नो वापस अपने बिस्तर पे लेटी तो उसके बेटे चेतन ने उससे चिपकते हुए कहा "मज़ा आया ना??"
ये सुनके शन्नो चौक गयी कि चेतन को कैसे पता चला?? वो तो सो रहा था?? अपनी धीमी आवाज़ मे शन्नो ने "हां"
कहा और आँखें बंद करके सो गयी...

उधर दूसरी ओर ललिता की आँख कुच्छ लघ्हबघ सुबह के 11 बजे के करीब खुली.... अपनी आँखो को मलते हुए और ज़ोर
से उबासी लेते हुए वो बिस्तर से उठी... चलकर वो अपनी बहन डॉली के कमरे में गयी मगर वहाँ कोई नहीं था....
हर कमरे को देखने के बाद जब उसे डॉली नहीं दिखाई दी तो उसने डॉली को कॉल करा.. डॉली ने ललिता को
बताया कि वो राज के साथ गयी हुई है और थोड़ा समय लग जाएगा आने में तो तू नाश्ता कर लिओ...

ललिता को इतनी खुशी हुई कि वो मज़े में नाचने लग गयी.... नज़ाने कितने दिनो के बाद ललिता को एक दिन अकेले घर पे रहने को मिला था... वो अपने रात के कपड़ो में थी जोकि गुलाबी रंग का पाजामा और काला रंग का नूडल स्ट्रॅप
गुलाबी ब्रा के साथ पहना हुआ था...उसका फिलहाल नहाने का मन नहीं था तो वो टीवी ऑन करके गाने सुनने के लिए...
जब उसने टीवी ऑन करा तो केबल नहीं आ रहा था... उसको इतना गुस्सा आया उस वजह से और उसने डॉली से केबल वालो का
नंबर. माँगा ताकि वो उनको ठीक करने के लिए बुला सके.. फिर उसने केबल वालो को कॉल करा तो किसी प्रकाश ने फोन उठाया... ललिता ने बड़ी बदतमीज़ी से उससे बात करी और उसको तुरंत घर बुलाया केबल ठीक करने के लिए..
अब उसे ये अकेलापन काटने लगा था.... ललिता के दिमाग़ में घंटी बजी और तेज़ी से भागकर अपने कमरे में गयी और अलमारी खोलकर वो पालिका बाज़ार से खरीदी हुई सीडी निकाल ली..... अपने चेहरे पे गंदी सी हँसी लेकर वो टीवी की तरफ
बढ़ी और सीडी प्लेयर में उसने 'प्रेम का रस' नाम की अडल्ट पिक्चर लगा दी..... सोफे पर आल्ति पालती मारकर ललिता टीवी को
घूर के देखने लगी... कुच्छ 20 सेकेंड हो गये थे और तब तक टीवी पर काली स्क्रीन ही थी... ललिता ने सीडी प्लेयर के
रिमोट से पिक्चर आगे बढ़ानी चाही मगर वो वही रुक गयी.... गुस्से में उठकर ललिता ने दूसरी सीडी डाली और
वो भी नहीं चली... ललिता को अपनी किस्मत पर इतना गुस्सा आया कि उसने डिस्क को तोड़ दिया....

एक तो इतने दिनो के बाद पॉर्न देखने का मौका मिला था उसका भी फ़ायदा नहीं उठा पाई ललिता.... अकेले बैठकर वो केबल वालोइंतजार करती रही... उसने फिर गीज़र भी ऑन कर दिया ताकि जब केबल का काम हो जाए तब वो नहाने चली जाएगी....
आधा घंटे के बाद पूरा घंटा हो गया और कोई भी नहीं आया.. जब ललिता ने उनको वापस फोन मिलाया तो
नंबर. बीच में ही कटे जा रहा... ललिता का दिमाग़ खराब हो रहा था उसने सोचा नहा ही लेती हूँ नहीं तो फिर दीदी आजएँगी और 3-4 बातें सुनाएँगी.. ललिता ने अपने कमरे में से लाल रंग का तौलिया लिया और जाके डॉली के कमरे के
टाय्लेट में नहाने चली गयी क्यूंकी उसके कमरे में टाय्लेट नहीं था... ललिता ने एक के बाद एक धरधार अपने
कपड़े उतारे और शवर के नीचे खड़ी हो गई... इतना आनंद मिल रहा था उसको जब उसके बदन पे गरम पानी गिर रहा था... अच्छे ख़ासे 20 मिनट वो अंदर रही और इस दौरान अपने बदन को हाथ फेरती रही.... नज़ाने नहाते नहाते उसको
बड़ी ज़ोर से पेशाब आई तो वो शवर से हॅट कर टाय्लेट की सीट की तरफ भागी मगर एक दम से उसने अपने कदम रोक दिए.... अपने कदम वापस शवर के तरफ बढ़ा दिया और अपनी टाँगें थोड़ी सी खोलके वो नहाती रही....
उसके अंदर एक दम से मीठा दर्द उठा और उसने नलके को पकड़ लिया... उसकी चूत के पानी कीधार फर्श पे गिराने लगी था...
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07-19-2018, 01:19 PM,
#99
RE: Incest Porn Kahani जिस्म की प्यास
ललिता अपनी आँखों से अपनी चूत का पानी बहते हुए देखने लगी... फिर उसने अपने बदन को साबुन से धोया और अपने
बदन को पौछ्कर टाय्लेट के बाहर निकली..

उसने दो-तीन बारी ज़ोर से बोला "डॉली दीदी....... दीदी...... दीदी" मगर कोई जवाब नहीं आया....
अपने हल्के नम बदन पे लिपटा हुआ लाल तौलिया उसने दो उंगलिओ से खोल दिया और नंगी खड़ी हो गयी....
इस घर की सबसे अच्छी बात ये थी कि इसके आस पास कोई और घर नहीं था तो कोई भी घर के अंदर ताका झाकी नहीं
कर सकता था.. ललिता ने वो तौलिया अपने बालो पे बाँध दिया और चलकर अपने कमरे में जाने लगी....
जैसी ही वो डॉली के कमरे के बाहर निकली तभी घर का दरवाज़ा किसीने खोल दिया..... ललिता को नज़ाने क्यूँ लगा की वो
उसकी बहन नहीं कोई और है.... और अगले ही सेकेंड उसका ये वेहम हक़ीकत बन गया.... दरवाज़े के सामने खड़ा एक
सावला लंबा पतला आदमी सिर पर हल्के हल्के बाल और चेहरे पे हैरत लिए खड़ा था.... वो आदमी वही खड़ा
ललिता के नंगे बदन को देख कर जा रहा था.... ललिता ने जल्द से जल्द अपने सिर से तौलिया निकाला और अपने बदन
पे बाँध लिया.... इश्स दौरान ललिता के मम्मे ज़ोर से हिले जिनको देख कर उस आदमी का लंड हिल गया....
ललिता को घबराया देख उस आदमी ने भी अपनी आँख घुमा ली.....

ललिता उस आदमी की वजह से जल्दी से अपने कमरे में भाग गयी और दरवाज़ा लॉक कर दिया.... अपने बिस्तर पे बैठके
वो सोचने लगी कि ये आदमी कौन था और ऐसी ही घर में कैसे घुस गया?? कहीं चोर तो नहीं था क्यूंकी उसके हाथ में
एर बॅग भी तो था... ललिता दबे पाओ से दरवाज़े की तरफ बढ़ी और तभी उसने अपने कमरे के बाहर से एक आवाज़ सुनी...

"देखो बेटा तुम शायद ललिता होगी मैं तुम्हारी मम्मी का भाई यानी तुम्हारा विजय मामा हूँ...."
ललिता वहीं खड़े खड़े उस आदमी की बात सुनती रही... उस आदमी ने फिर से कहा "वो हुआ ऐसा कि मैने घर की बेल
बजाई तो वो बजी नहीं.. और काफ़ी देर खटखटाया भी मगर किसीने नहीं खोला... मुझे डॉली ने बताया था कि तुम घर पर ही होगी तो मैने दरवाज़े की नॉब को घुमाया तो वो अपने आप खुल गया... सॉरी अगर तुमको मेरी वजह शर्मिंदगी हुई हो"

ये सुनते ही ललिता बोली 'नहीं ऐसी कोई बात नहीं है... आप बैठिए मैं अभी बाहर आती हूँ"

ललिता ने जल्दी से एक हरी सफेद सलवार कुरती निकाली और सैफीड ब्रा पैंटी के साथ पहेन ली....
अपने बालो को कंघी करके अच्छे से बाँध कर एक लंबी साँस लेके उसने अपने कमरे का दरवाज़ा खोला...
सोफे के पास बैठे उसने अपने मामा को कहा "नमस्ते मामा... आप पानी पीएँगे??" ये कहकर ललिता को बड़ी
झिझक हुई और विजय को ललिता को धकि हुई देखकर काफ़ी राहत मिली.... पानी देते वक़्त ललिता विजय के साथ वाले
सोफे पे बैठ गयी और जहा उसका मोबाइल पड़ा था... उसने मोबाइल पे देखा तो डॉली के मीसड कॉल आए हुए थे
और मैसेज पे भी लिखा था कि विजय मामा आएँगे घर तो पहले ही नहा लेना"....

ये पढ़कर ललिता बोली 'डॉली दीदी ने मैसेज भी करा था कि आप आने वाले है मगर मैने देखा ही नहीं था...'

विजय ने कहा "कोई बात नहीं बेटी... हो जाता है ऐसा कभी कभी"

विजय को शांत देख कर ललिता भी उस बात भूलने की कोशिश करती रही... विजय ने बताया कि वो सिर्फ़ आज रात के लिएइन्दोर से यहाँ आया कुच्छ बिज़्नेस के काम से और कल सुबह की ट्रेन से वापस रवाना हो जाएगा... उसने अपनी पत्नी और
अपने 2 बच्चो के बारे में भी बताया जिन्होने ललिता और उसकी बहन को बहुत प्यार भेजा है....
फिर कुच्छ देर के लिए ललिता विजय मामू के साथ बैठी रही और उसके बाद डॉली घर आ गयी...
डॉली विजय मामू को जानती थी क्यूंकी जब वो उनसे आखरी बारी मिली थी तो उसकी उम्र कुच्छ 14 साल थी...
विजय अपनी दोनो भाँजियो को देखकर काफ़ी खुश हुआ और दोनो को एक बड़ी डेरी मिल्क का डिब्बा भी दिया....

कुच्छ देर बाद जब विजय आराम करने के लिए नारायण के कमरे में चले गया तब ललिता ने डॉली को बोला
"आप क्या डोर लॉक नहीं कर सकते थे"

डॉली ने कहा "अर्रे तेरेको जगाके बोला तो था कि दरवाज़ा बंद करले और तूने हां भी कहा था कि करलूंगी..
अब मुझे क्या पता तू नींद में ही हां कह रही थी..... और वैसे तंग ना कर मेरा मूड ऑफ है"

ललिता ने चिड़ाते हुए पूछा "क्यूँ क्या कर दिया आपके आशिक़ ने ऐसा जो आपका मूड ऑफ हो गया"

डॉली ललिता को हल्के से मारके बोली "चल हॅट... अपना काम कर"

क्रमशः…………………..
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07-19-2018, 01:19 PM,
RE: Incest Porn Kahani जिस्म की प्यास
जिस्म की प्यास--28

गतान्क से आगे……………………………………

उधर दिल्ली में कुच्छ 12 बजे चेतन अभी भी शन्नो के साथ बिस्तर पर चिपक कर लेटे हुआ था.... शन्नो ने चेतन का हाथ अपने पेट से हटाना चाहा मगर चेतन नहीं माना और अपनी मा को जकड़े रखा..... फिर शन्नो ने कहा "हटो ना मुझे नहाने जाना है... फिर बुआ के घर भी जाना है आज"

चेतन अपनी नींद में बोलता"अब उनके घर क्यूँ जाना" शन्नो अपने आपको छुड़ा बिस्तर से उठ गयी...

उसने चेतन से पूछा "तुम चलोगे ना मेरे साथ?? मैं अकेले बोर हो जाती हूँ" चेतन ने जाने से इनकार कर दिया

और शन्नो मायूस होकर अपने कपड़े निकालने लगी.... अपना तौलिया लेकर जब वो टाय्लेट में गयी तभी चेतन भी

अपने बिस्तर से उठ कर शन्नो के साथ टाय्लेट में घुस गया.... टाय्लेट की ट्यूब लाइट ऑन करके चेतन को शन्नो अपनी

बाँहों में भरके उसको शवर के नीचे ले गया और पानी ऑन कर दिया... दोनो के बदन कपड़ो के समैत भीग रहे थे... चेतन शन्नो को चूमे जा रहा था और शन्नो को काफ़ी माज़ा आने लगा था.... चेतन ने शन्नो के होंठो को

चूम लिया और उसके दोनो हाथ शन्नो के नितंबो पर चाँते बरसाने लगे.... शन्नो को अपने बदन में मीठा दर्द

महसूस होने लगा.... शन्नो ने चेतन के निकर में हाथ डालकर उसके लंड को पकड़ लिया और चेतन को समझ

में आ गया कि उसकी मा क्या चाहती है... शन्नो के सिर पे हाथ रख के चेतन ने उसे फर्श पे बिठाया और अपनी

निकर को नीचे कर के उसके हाथ में अपना लंड पकड़ा दिया.... शन्नो की गरम पीठ पर ठंडा ठंडा

पानी बरस रहा था और उसके हाथ में गरम जागा हुआ लंड था..... अपने बेटे के लंड को उसने चूसना शुरू

करा और चेतन अपनी पैर की उंगलिओ से उसकी चूत को रगड़ने लगा.... शन्नो की चूत काफ़ी गीली हो चुकी थी और चेतन

उसे और तडपा रहा था..... शन्नो का दूसरा हाथ चेतन के आंडो से खेल रहा था और उसका मुँह

रॅंडियो की तरह चले जा रहा था..... शन्नो नहीं चाहती कि उसके बेटे का लंड ऐसे ही झाड़ जाए और उसने लंड को

छोड़ दिया और अपनी पैंटी उतारके वो चेतन के लंड की दुआ करने लगी.... चेतन ने उसकी चूत के अंदर झट से दो

उंगलिया डाल दी और शन्नो की चीख निकल गयी.... चेतन बोला "अब ये लंड सिर्फ़ इनाम में ही मिलेगा..."

ये कहकर चेतन ने शन्नो के नितंब पर एक और चाँटा लगाया और टाय्लेट से चला गया.....

पूरे समय नहाते हुए शन्नो अपनी गीली चूत को तसल्ली देती रही.... वो सोचने लगी कि कैसे चेतन के लंड को जीत सकु.... नाहकार जब वो तौलिया अपने मम्मो पर लपेट कर बाहर निकली तब चेतन बिस्तर पे तैयार बैठा था....

शन्नो उसको तैयार देख बहुत खुश हो गयी और अपने बदन को वहीं तौलिए से आज़ाद कर दिया....

उस तौलिए से वो अपने गीले बालो को सुखाने लगी... सफेद रंग की ब्रा और पैंटी को पहनने के बाद उसने अपनी टाँगो

को थोड़ा थोड़ा उठाकर उसने पेटिकोट पहना और नाडे को कस्के बाँध दिया.... उसके जोड़ी दार आधे बाजू वाला

सफेद ब्लाउस को भी पहेन लिया जिसके सामने की तरफ हुक्स थे....... फिर वो हरे रंग की सिल्क की सारी जिसपर

सफेद रंग के फूल पत्ते थे वो बाँधने लगी और बाँधने के बाद उसने पिन से पल्लू को ब्लाउस के साथ जोड़ दिया....

अपने बालो को कंघी करके और एक हरी रंग की गोल बिंदी को लगाके वो तैयार हो गयी....

चेतन की नज़रे पूरी वक़्त उसके मा पर जमी थी और जब वो पूरी तरह से तैयार हो गयी तब उसे देख कर चेतन

के पसीने छूट गये.... घर के कपड़ो में भले ही वो बात ना आती हो मगर सारी में उसकी मम्मी एक दम

बॉम्ब लग रही थी.... सॅंडल पहनते वक़्त चेतन उसकी मम्मी को बड़ी हील वाली सॅंडल पहनने को बोला तो शन्नो ने एक काली बड़ी हील वाली सॅंडल पहेन ली.... घर को ताला लगाकर दोनो मा बेटे बुआ के घर जाने के लिए रवाना हो गये...

शन्नो ने चेतन की वजह आज ऑटो में जाने का सोचा और तकरीबन 10 मिनट के इंतजार के बाद एक ऑटोवाला रुका....

जब शन्नो उसमें बैठने लगी तब चेतन ने उस ऑटो वाले की तरफ देखा जिसकी नज़रे शन्नो की बड़ी गान्ड को घूरे

जा रही रही थी.... पूरी दुनिया ही थर्कि है ये सोचके चेतन मुस्कुराता हुआ ऑटो में बैठा.....

सब कुच्छ साधारण तरीके से बीतता रहा और वो दोनो बुआ के घर पे उतर गये.... ऑटो वाले को पैसे देके

उन्होने कुच्छ घंटे बुआ के घर पे बिताए और चेतन अच्छे बच्चे की तरह अपनी मम्मी से शराफ़त से पेश आ रहा था....

जब बुआ उन दोनो के सामने भी नहीं होती तब भी चेतन के दिमाग़ में कोई गंदी बात नहीं आई...

ये देख कर शन्नो को खुशी हुई कि उसके बेटे को किस जगह कैसे बर्ताव करना चाहिए इसकी समझ है और फिर सुबह

के बारे में सोचने लगी जब उसने दूधवाले के साथ इतनी गंदी हरकत करी थी.... खैर कुच्छ शाम के 6:00 बजे तक

शन्नो और चेतन बुआ के घर से निकले और हल्का अंधेरा आसमान में छाने लगा था...

दोनो मा बेटा साथ में चलने लगे और मैं रोड पे खड़े होकर वो ऑटो का इंतजार करने लगे....

काफ़ी देर तक कोई ऑटो नहीं रुका और फिर चेतन ने कहा "ऐसा करते हैं बस में ही चल लेते है पैसे भी कम जाएँगे"

उसकी मा ये सुनके बहुत खुश हो गयी और दोनो अगली ही बस में धक्के खाते हुए घुसे....

ये बात बताने की नहीं है कि दिल्ली की बसो में कितनी भीड़ होती है तो बैठना तो दोनो के नसीब में नहीं था.....

बस में हल्की रोशनी थी क्यूंकी सिर्फ़ दो ही लाइट जल रही थी जोकि एक सबसे आगे की तरफ थी और एक सबसे पीछे की तरफ.....

चेतन जोकि शन्नो के ठीक पीछे ही खड़ा था अपना मुँह शन्नो के कान के पास लाते हुए बोला

"मैने कहा था ना मेरा लंड अब सिर्फ़ इनाम में ही मिलेगा... अब खेल शुरू होता है"

ये कहते ही चेतन ने अपनी मा की सारी के अंदर हाथ घुसाते हुए शन्नो के गरम पेट को महसूस करने लगा....

हाथ को फेरते हुए हुए फिर वो शन्नो के हल्के बाहर निकले हुए पेट को लगातार नौचने लगा और शन्नो चुप चाप वही

खड़ी रही.... जब भी बस हिलती तो चेतन शन्नो की कमर को कस के जाकड़ लेता और शन्नो शर्मिंदा होकर अपनी सीधी तरफ की सीट को कस्के पकड़ लेती... उसकी उंगलिओ के निशान भी शन्नो की कमर पे छप चुके थे....

चेतन की उंगलिओ की हर अदा पे शन्नो का जिस्म मचले जा रहा था... चेतन की गहरी गरम साँसें शन्नो अपनी गरदन

पे महसूस कर रही थी और उसका उगता हुआ लंड कयि बारी उसकी गान्ड को छुए जा रहा था....

शन्नो की सीधे कान की तरफ चेतन कयि बारी धीरे धीरे पुच्छे जा रहा "मज़ा आ रहा है... मज़ा आ रहा है.

." जिसका जवाब शन्नो अपने बदन के कप कपाहट से दे रही थी.... मगर फिर चेतन के हाथ चलने बंद हो गये और

शन्नो ने अपनी नज़रो को पीछे करते हुए उसकी तरफ लाचार होकर देखा.... उसकी आँखों से सॉफ झलक

रहा था कि वो अपने बेटे से भीग माँग रही थी कि वो उसके बदन को छुए उसकी जिस्म की प्यास को संतुष्ट करें....

फिर चेतन ने शन्नो के हाथ को प्यार से पकड़ा... अपनी उंगलिओ को उसकी उंगलिओ पर चलता हुआ वो शन्नो के हाथ को

अपनी तरफ ले गया और शन्नो समझ गयी कि वो क्या चाहता है... शन्नो अपने बेटे को खुश करने के लिए अपना सीधा

उसके लंड की तरफ ले गयी और हल्के से उसपे रख दिया... आहिस्ते आहिस्ते उसकी जीन्स पर हाथ उपर नीचे उपर नीचे करती रही....

अब शन्नो के नितंब चेतन के लंड को पूरी तरह महसूस कर रहे थे क्यूंकी दोनो के बदन में कोई अंतर नहीं रह गया था... शन्नो को अगले ही जीन्स की ज़िप खुली मिली और बिना झिझक के उसने अपना हाथ अपने बेटे की जीन्स के अंदर डाल दिया...

शन्नो के लंबे नाख़ून चेतन के लंड पे जब भी चुभते वो बुर्री तरह पागल हुए जा रहा....

अब शन्नो की कमर चेतन के हाथो का जादू फिर से महसूस करने लगी.... शन्नो की गोरी चमड़ी को वो बेदर्दी से

मसले जा रहा और शन्नो अपने मन में सिसकियाँ लिए जा रही थी..... चेतन अपने शन्नो के मोटे मम्मो की तरफ ले

गया और ब्लाउस के उपर से दबाने लगा....
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