Desi Sex Kahani होता है जो वो हो जाने दो
10-09-2018, 03:59 PM,
RE: Desi Sex Kahani होता है जो वो हो जाने दो
सुबह अलका जब उठी तो उसे कुछ महीनों से हो रही अजीब-अजीब ख्यालो से मुक्ति का एहसास हो रहा था उसे आज बहुत ही बेहतर महसूस हो रहा था। बहुत बड़ी मुसीबत से छुटकारा पाने का एहसास उसके तन बदन को रोमांच से भर दे रहा था। अलका की नजर अपने बिस्तर पर अपने ही बगल में निश्चिंत होकर सो रहे अपने बेटे पर गई तो, उसके चेहरे पर खुशी और संतुष्टि भरी मुस्कान तैरने लगी। अलका की नजर राहुल के मासूम चेहरे पर एक ही रह गई उसे राहुल का मासूम चेहरा देखकर यकीन नहीं हो पा रहा था कि यह वही पहले वाला सीधा साधा और शर्मिला राहुल है जो एक समय था जब लड़की और औरतों से दूर भागता रहता था। उनसे बात करने में कतराता था और तो और वह मेरे से भी बात करता था तो अपनी नजरों को मेरे बदन पर टीका नहीं पाता था उसकी नजरें हमेशा इधर उधर ही घूमती रहती थी। कुल मिलाकर वह पूरी तरह से एकदम शर्मिला बच्चा ही था लेकिन अब यही शर्मिला बच्चा औरतों के सुख का साधन बन चुका है। राहुल के चेहरे को देख कर अलका अच्छी तरह से जानती थी कि उसके हथियार का लंबाई और मोटाई का पता लगा पाना बड़ा ही मुश्किल काम है । वह राहुल के सिर पर हाथ फेरते हुए मन ही मन में सोची कि आज इसका हथियार इतना ज्यादा तगड़ा हो चुका है कि वह मेरी ही क्या किसी भी लड़की और औरत को पूरी तरह से संतुष्टि प्रदान करने में सक्षम है। अलका एक तरह से अपने बेटे पर गर्व कर रही थी। क्योंकि वह भी अच्छी तरह से जानती थी कि अगर राहुल ना होता तो उसके पास बहुत पहले ही डगमगा गए होते और ना जाने क्या हाल होता। 


अलका अपने बदन पर गौर की तो शरमा गई क्योंकि इस समय भी वह संपूर्ण नग्नावस्था में बिस्तर पर बैठी हुई थी और उसके बगल में उसका बेटा राहुल भी पूरी तरह से नंगा लेटा हुआ था। अपनी हालत और अपने बेटे की हालत को देख कर उसके चेहरे पर मुस्कुराहट फैल गई। उसे रात वाली घटना याद आ गई, उसे वापस याद आ गया जब उसने विनीत से छुटकारा पाने की खुशी में एकदम बेशर्म होकर के खुद ही अपनी बेशर्मी और कामुकता का प्रदर्शन करते हुए अपने बेटे के खड़े लंड पर सवार होकर के और खुद ही उसके तगड़े लंड को पकड़ कर उसके गरम सुपाड़े को अपनी बुर की गुलाबी पत्तियों के बीच रख कर के ऊपर बैठना शुरु की थी और तब तक बैठती रही जब तक की उसके बेटे का लंड उसकी बुर की गहराई में खो नहीं गया। 
ऊफ्फफफ...... उस पल को याद करके इस समय भी अलका के बदन में झनझनाहट सी फैल जा रही थी। 


अलका रात को खुद की ,की गई हरकत की वजह से,,,शर्मिंदगी महसुस कर रही थी । लेकीन अलका को ईस बेशर्मी से भरी हरकत में भी बहुत ही ज्यादा आनंद की प्राप्ति हुई थी। अलंका की नजर जैसे ही खुद की बड़ी बड़ी चूचीयो पर गई तो उसे वह पल याद आ गया जब राहुल दोनों हाथों में भर भर कि इसे मुंह में लेकर चूसते हुए पीता था। अलका सोच-सोचकर उत्तेजना से भरी जा रही थी। । तीन-चार दिनों से वह ऑफिस नहीं जा रही थी विनय से छुटकारा पाने की बात से वह सोच रही थी कि आज ऑफिस जा कर देख लो और रास्ते में यह भी पता चल जाएगा कि विनीत का दिमाग ठिकाने आया कि नहीं। राहुल के स्कूल जाने का भी समय हो रहा था इसलिए वह राहुल को जगा कर नहाने के लिए जाने लगी तब तक राहुल भी नींद से जाग गया था। अलका अच्छी तरह से जानती थी कि सोनू अभी सो रहा होगा इसलिए वह निश्चिंत होकर बिल्कुल नंगी हालत नहीं कमरे के बाहर जाने लगी तो बिस्तर पर लेटे हुए राहुल बोला।

रुको मम्मी मैं भी चलता हूं नहाने आज हम दोनों साथ में ही रहेंगे क्योंकि अभी सोनू सो रहा होगा तब तक हम दोनों नहइतना कहने के साथ ही राहुल भी बिस्तर पर से बिल्कुल नग्नावस्था मे हीं खड़ा हो गया अलका की नजर जब राहुल की जांगो के बीच गई तो वह मुस्कुरा दी। क्योंकि राहुल का लंड सुसुप्तावस्था में भी तगड़ा लग रहा था। साथ में नहाने की बात से अलका के भजन में उत्तेजना की लहर दौड़ गई क्योंकि आज पहली बार वह अपने बेटे के साथ बिल्कुल नंगी होकर के नहाने का मजा लेने वाली थी। लेकिन यह सब जल्दी से मिटाना चाहती थी क्योंकि थोड़ी ही देर में सोनू भी जगने वाला था इसलिए वह राहुल से बोली।

तो चलो जल्दी करो राहुल सोनू के भी उठने का समय हो गया है। ( इतना कहने के साथ ही वह कमरे का दरवाजा खोल घर के बाहर निकल गई उसे मालूम था कि सोनू अभी सोया हुआ है लेकिन फिर भी वह चारों तरफ नजर घुमाकर तसल्ली करने लगी कि कहीं सोनू जग तो नहीं गया है। अलका ईस एकदम नंगी होकर चहलकदमी करते हुए बाथरूम की तरफ जा रही थी तब तक राहुल भी कमरे के बाहर आ गया और अपनी मां के पीछे पीछे उसकी मटकती हुई गांड को देखकर जाने लगा। अलका मस्ती में चलते हुए बाथरूम के दरवाजे तक पहुंच गई लेकिन जब तक राहुल बाथरूम के दरवाजे तक पहुंचता उसका सोया हुआ लंड उसकी मां की बड़ी-बड़ी गांड को मटकता हुआ देखकर धीरे धीरे जाग गया। राहुल की ईच्छा ऊसकी मां की गांड को देखकर फीर से चोदने की करने लगी । ईसलिए बाथरुम मे घुसते ही वह अपनी मां के बदन से लिपट गया ऊसकी मा भी बीते पल को याद करके पहले से ही गरमाई हुई थी । ईसलिए वह भी राहुल को चुमने चाटने लगी । राहुल का लंड तो पहले से ही पुरी तरह से तैयार था । वह एकबार फीर से अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को देखकर चुदवासा हो गया था । ईसलिए बिना पल गंवाए अपनी मां की पीठ पर हथेली रखकर नीचे की तरफ दबाते हुए ऊसे नीचे झुकने का ईसारा कीया ऊसकी मां भी अपने बेटे का इशारा कहां कर तुरंत नीचे झुक गई और राहुल पीछे से अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को अपनी हथेली में भरकर अपने लंड को अपनी मां की बुर में डालकर चोदना शुरू कर दिया। दोनों की सांसे एक बार फिर से तेज होने लगी दोनों एक बार फिर से मस्ती के सागर में गोते लगाने लगे राहुल जोर-जोर से अपनी मां की बुर में लंड पेले जा रहा था। और राहुल के हर धक्के के साथ अलका की सिसकारी निकल जा रही थी । दोनो जमकर चुदाई का मजा लेते रहे और थोड़ी ही देर में दोनों भलभलाकर झढ़ने लगे। 


इसके बाद राहुल और अलका दोनों एक दूसरे के बदन पर साबुन लगा कर बहुत ही अच्छे से नहाने का मजा लिए। 
दोनों बाथरुम से बाहर आ चुके थे अलका खाना बनाने में जुट गई थी वह सबके लिए नाश्ता तैयार कर रही थी। अलका के मन में अभी भी विनीत को लेकर शंका थी इसलिए वह राहुल को नाश्ता देते समय राहुल से बोली।

राहुल क्या मैं अब ऑफिस जा सकती हूं?

हां मम्मी बिल्कुल जा सकती हो। 

नहीं मेरा मतलब यह था की कहीं वह फिर से मुझे परेशान तो नहीं करेगा। 

नहीं मम्मी अब आप बेफिक्र रहो करो फिर जाइए वह आपको बिल्कुल भी परेशान नहीं करेगा यकीन ना आए तो शाम को ही आजमा लेना। 
( राहुल की बात सुनकर अलका बहुत खुशी हुई। राहुल स्कूल जाने से पहले अपनी मां से बोला।) 

मम्मी कल का दिन तुम्हें याद तो है ना कल मेरा जन्मदिन है।

हां बेटा मुझे पूरी तरह से याद है मैं भला कैसे भूल सकती हूं। ( इतना कहकर अलका मुस्कुरा दी और राहुल भी मुस्कुराकर स्कूल की तरफ चल दिया।)
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10-09-2018, 03:59 PM,
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दोनों बच्चों को स्कूल भेजकर खुद भी तैयार होने के लिए अपने कमरे में चली गई आज बहुत दिन बाद उसे ऑफिस जाने का मौका मिला था वरना विनीत के डर से वह कुछ दिनों से ऑफिस नहीं जा पाई थी और घर में ही बैठे बैठे बोर भी हो रही थी और विनीत की वजह से डरी सहमी भी रहती थी। लेकिन जब राहुल ने बताया कि वीनीत का दिमाग ऊसने ठिकाने लगा दिया है तब उसका मन प्रसन्न हुआ विनीत से छुटकारा पाने की बातों से उसे ऐसा लगने लगा कि जैसे कि उसे एक नई जिंदगी मिली हो। उसकी प्रसन्नता का ठिकाना ना था वह मन में गीत गुनगुनाते हुए आईने के सामने खड़ी होकर तैयार होने लगी। 
अलका पूरी तरह से तैयार हो चुकी थी संभोग के असीम सुख की प्राप्त कर करके एक अाह्लादक एहसास की वजह से उसकी खूबसूरती और उसके बदन का उठाव और कटाव दिन ब दिन ऊभरकर ओर भी ज्यादा उभरकर खूबसूरत हो गया था। 
अलका अपनी छातियों का उभार और अपने भरे हुए बदन को आईने में देखकर अपनी खूबसूरती पर खुद ही शरमा गई और गर्वित होने लगी। दिन ब दिन बढ़ती उसकी खूबसूरती का राज वो अच्छी तरह से जानती थी। वह जानती थी कि उसके बेटे के साथ जबरदस्त संतुष्टि भारी चुदाई की वजह से ही उसकी खूबसूरती दिन ब दिन निखरती जा रही थी। जेसे ही उसकी नजर उसकी खुद की बड़ी बड़ी चुचियों पर गई तो अपनी चुचियों के उभार को देख कर और उसकी खूबसूरती से वह खुद ही चौंधिया गई और वह अपने दोनों हाथों को अपनी दोनों गोलाइयों पर रखे बिना ना रह सकी। एक बार अपनी दोनो चुचियों को अपनी हथेली में भरकर ब्लाउज के ऊपर से ही दबा कर वह आईने में अपने रूप को देखने लगी और खुद ही शरमा कर मुस्कुरा दी।
उसकी नजर दीवार पर टंगे घड़ी पर गई तो झट से बिस्तर पर से अपना पर्श उठाई और कमरे से बाहर आ गई। वह घर से निकल कर जल्दी-जल्दी सड़क पर जाने लगी। अलका इस उम्र में भी क़यामत से कम नहीं लगती थी आज भी वह अपनी खूबसूरती के जलवे बिखेर रही थी। 
उसके बदन की बनावट और कटाव देखकर अच्छे अच्छों का पानी निकल जाता था। अपनी बेटी की उम्र की लड़कियों को भी वह बराबर का टक्कर देती थी। इसका ताजा उदाहरण राहुल ने दोनों औरतों को अपनी मां अलका के लिए ठुकरा कर दे दिया था। 
अलका जल्दी-जल्दी मस्ती के साथ सड़क पर अपनी गांड मटकाते हुए चली जा रही थी। उसकी भरावदार गांड की थिरकन किसी को भी मदहोश कर देने में सक्षम थी। सड़क पर आते-जाते ऐसा कोई भी मर्द नहीं होगा जिसकी नजर अलका के मदभरे रस टपकाते बदन पर ना पड़े। आगे से आ रहे राहगीर की नजर सबसे पहले उसकी बड़ी बड़ी चुचियों पर ही जाती थी और पीछे से आ रहे राहगीर की नजर उस की भरावदार बड़ी-बड़ी मटकती गांड. पर। 
अलका अपनी मस्ती में कदम बढ़ाते हुए और अपनी गांड मटका के ऑफिस की तरफ चली जा रही थी आज बहुत दिनों बाद खुली सड़क पर इस तरह से चलने पर उसे राहत महसूस हो रही थी। ऑफिस जाते समय रास्ते में ही उसे याद आया कि राहुल का जन्मदिन आने वाला था और उसने उसे पूरी तरह से खुश करने का वादा किया था। अपने किए हुए वादे का मतलब वह अच्छी तरह से जानती थी इसलिए वह उस वादे को याद करके शरमाते हुए मन ही मन में मुस्कुरा दी। थोड़ी ही देर में वह अपने ऑफिस पहुंच गई आज खुशी-खुशी में ऑफिस का काम करके अपने मन को हल्का महसूस कर रही थी। 

धीरे-धीरे घड़ी की सुई अपनी धुरी पर घूमती रही और शाम का वक्त हो गया। सपने निश्चित समय पर ऑफिस छूट चुकी थी और अलंकार ऑफिस से निकल कर अपने घर की तरफ जा रही थी। सुबह तक सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन ऑफिस से छूटने के बाद उसके मन में फिर से विनीत नाम का भूत घूमने लगा उसे फिर भी नहीं कर नाम से ही चिंता होने लगी। अलका को विनीत के द्वारा दी गई धमकी बार-बार याद आने लगी। अलका मन ही मन में घबराने लगीं उसके मन में ढेर सारे सवाल ऊठने लगे। विनीत के बारे में सोचते हुए वह सड़क पर चली जा रहे थे उसे अब डर लगने लगा था क्योंकि बाजार नजदीक थी और वहीं पर अक्सर उससे मुलाकात हो जाती थी। उसके मन में यह शंका बनी हुई थी कि अगर कहीं विनीत नहीं माना और फिर से उसे धमकाने लगा और उसके साथ मनमानी करने के लिए ब्लैकमेल करने लगा तो वह क्या करेगी, लेकिन राहुल नहीं तो उसे कहा था कि विनीत का दिमाग उसनें ठिकाने लगा दिया है अब वह उसे कभी भी परेशान नहीं करेगा और उसी के कहने पर तो मैं आज ऑफिस आई थी। यही सब खयाल रह-रहकर अलका के मन में उठ रहे थे और वह परेशान भी हो रही थी यही सब सोचते सोचते बाजार आ गया उसकी दिल की धड़कनें बढ़ रही थी और वह जल्दी जल्दी अपने कदम बढ़ाते हुए बाजार से निकल जाना चाहती थी। 
वह मन ही मन भगवान से दुआ कर रही थी कि वीनीत उसे रास्ते में ना मिले और वह बिना किसी मुसीबत के अपने घर चली जाए , धीरे धीरे करके वह बाजार के अंतिम छोर पर पहुंच गई जहां पर बाजार खत्म होता था उसकी चिंता कुछ कम होने लगी मुझे लगने लगा कि वहां पर ही मैं अभी नींद से उसका सामना नहीं होगा लेकिन उसका सोचना ही था कि सामने से उसे वीनीत मोटरसाइकिल पर आता दिखाई दिया उस पर नजर पड़ते ही अलका के दिल की धड़कने डर के मारे तेज हो गई। उसकी चाल कुछ धीमी हो गई ऐसा लग रहा था कि उसके पैर आगे बढ़ने से इंकार कर रहे हो धीरे धीरे विनीत करीब आ रहा था। अलका डर के मारे उसकी तरफ से अपनी नजरें फेर भी ले रही थी लेकिन रह रहकर उसकी नजरें बार बार वीनीत की तरफ चली जा रही थी। तभी कुछ करीब आया तो विनीत की नजर भी अलका के ऊपर पड़ गई उसकी नजर एक पल के लिए अलका के कामुक भरावदा़र बदन पर ही टिकी रह गई। अलका को और उसके बदन की खूबसूरती को देखकर विनीत के मन में लड्डू फूटने लगे और उसके मुंह में पानी आ गया। उसकी टांगों के बीच के हथियार में हरकत होने लगी। लेकिन तभी उसे राहुल के द्वारा दी गई शिकस्त के बारे में याद आ गया । उसे याद आ गया कि राहुल ने उसे कितना बेबस कर दिया था कि वह उसकी आंखों के सामने उसकी भाभी और उसकी होने वाली बीवी के साथ शारीरिक संबंध बना लिया और वह कुछ भी नहीं कर पाया। वह अच्छी तरह से समझ गया था कि राहुल से उलझना ठीक नहीं है। 
अलका सड़क के बाएं तरफ से जा रही थी और विनीत सड़क के बाएं तरफ से आ रहा था दोनों बिल्कुल करीब आमने सामने आने ही वाले थे कि दोनों की नजरें आपस में टकराई , अलका विनीत के नजर से नजर मिलते ही सहमं गई उसकी डर के मारे पसीने छूट गए एक डर की लहर उसके पूरे बदन में ऊपर से नीचे तक फैल गई। मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें। ना चाहते हुए भी घबराहट की वजह से उसके पांव ज्यो के त्यों वही ठिठक गए दोनों बिल्कुल करीब आ गए थे विनीत भी अलका की आंखों में झांकते हुए करते हुए बिल्कुल उसके करीब पहुंच गया था फर्क सिर्फ इतना था कि वह सड़क के ऊस ओर था और अलका इस और। 
अलका को लगने लगा कि राहुल की बातों का विनीत के ऊपर कोई असर नहीं हुआ है। उसकी घबराहट बढ़ती जा रही थी उसे यकीन हो गया कि वह करीब आ करके फिर से उसे धमकाएगा और अपने साथ सोने के लिए मजबूर करेगा वह सड़क पर बुत बने खड़ी होकर विनीत की तरफ ही देखे जा रही थी और विनीत भी उसी ही को घूर रहा था। विनीत एकदम आमने-सामने आ गया था लेकिन कभी विनीत अपनी नजर सामने की तरफ फेर लिया औअपनी मोटरसाइकिल एक्सीलेटर को बढ़ाकर तेजी से आगे निकल गया। 
अलका तो वहीं खड़ी खड़ी आश्चर्य से फटी आंखों से विनीत को सड़क पर दूर जाते देखती रह गई उसे यह सब एक चमत्कार सा लगने लगा। वह सड़क पर खड़ी होकर विनीत को तब तक देखती रही जब तक की वह आंखों से ओझल नहीं हो गया । पूरा खेल उल्टा पड़ गया था कुछ देर पहले अलका की दिल की धड़कन जो की बहुत ही तेज चल रही थी वह अब सामान्य होने लगी। विनीत को बिना कोई हरकत किए जाते देख कर उसकी जान में जान आ गई थी वह राहत सी महसूस कर रही थी। 
अलका को उसके सर से बहुत भारी बोझ हल्का होता नजर आ रहा था। उसे राहुल की कही हुई एक-एक शब्द पर यकीन होने लगा था वह अपने बेटे पर एकदम गर्वित हुए जा रही थी। राहुल पर उसे और ज्यादा प्यार होने लगा था सड़क पर खड़े खड़े ही उसने मन में निर्धारित कर ली की वह अपने बेटे को उसके जन्मदिन पर पूरी तरह से खुश कर देगी वह जो चाहेगा उसे सब कुछ देगी। 
कुछ ही देर पहले उसके चेहरे पर परेशानी के भाव नजर आ रहे थे लेकिन इस समय उसके चेहरे पर प्रसन्नता साफ झलक रही थी। वह खुशी-खुशी अपने पैर अपने घर की तरफ बढ़ा दी। 

घर पर पहुंचकर वह आराम से कुर्सी पर बैठ कर राहत की सांस ली। उसे आज अपने घर में अच्छा महसूस हो रहा था। सब कुछ नया-नया सा बदला बदला सा लग रहा था। अगर राहुल घर पर मौजूद होता तो वह उसे कसके अपने सीने से लगा लेती उसे ढेर सारा प्यार करती आखिरकार उसने काम ही ऐसा कुछ कर दिया
था। विनीत जैसी मुसीबत से छुटकारा दिला कर राहुल ने अलका को बहुत बड़ी मुसीबत से छुटकारा दिलाया था । अलका को इंतजार था राहुल के घर पर आने का क्योंकि उसे मालूम था वह इधर उधर घूम कर अपना टाइम पास करते रहता है इसलिए उसने झट से हाथ बहुत होकर तरोताजा हुई और रसोई में जाकर राहुल के मनपसंद का भोजन बनाने में जुट गई। 
जब तक राहुल आया तब तक खाना बन चुका था। सोनू कब से घर पर आकर अपने कमरे में पढ़ाई कर रहा था। अलका कुर्सी पर बैठ कर राहुल का इंतजार कर रही थी कि तभी राहुल घर में प्रवेश किया उसे देखते ही अलका कुर्सी पर से उठी और तुरंत आगे बढ़कर राहुल को अपने सीने से लगा ली , और लगी उसे चुमने चाटने लगी अपनी मां के इस व्यवहार को राहुल कुछ पल तक समझ ही नहीं पाया कि आखिरकार यह हो क्या रहा है। तभी अपने बेटे को बेतहाशा चूमते हुए अलका बोली।

बेटा तूने मुझे आज बहुत खुश कर दिया है तू नहीं जानता कि तूने मेरे सर से कितनी बड़ी मुसीबत को दूर किया है। मांग बेटा मांग तुझे जो मांगना है मुझ से मांग ले में तेरी सारी इच्छाओं को पूरी करूंगी। ईसलिए बेझिझक मांग ले। 
( अपनी मां की बात सुनकर राहुल को समझते देर नहीं लगी की ईतना ढेर सारा प्यार वीनीत से छुटकारा दिलाने की खुशी में है। ।।।।

अलका फिर से राहुल के गाल पर चुम्बनो का बौछार करते हुए बोली।

बोल बेटा तुझे क्या चाहिए तु जोे मांगेगा मैं तुझे वो दूंगी। ( राहुल अपनी मां की बात सुनकर बहुत खुश हुआ अपनी मां को खुश देखकर राहुल को बेहद खुशी हो रही थी। इसलिए राहुल खुश होता हुआ बोला।) 

मम्मी तुम खुश रहती है तू कितनी अच्छी लगती हो। और रही बात कुछ मांगने की तो कल मेरा जन्मदिन है बस कल के दिन अपना यह वादा याद रखना। 
( अपनी बेटी की बातें सुनकर अलका मुस्कुरा दी और एक बार फिर से उसे कस के अपने सीने से लगा ली . अलका की इस हरकत पर राहुल के बदन में उत्तेजना फेलने लगी। इसलिए वह बोला।) 

मम्मी मुझे जो चाहिए वह में कल अपने जन्मदिन पर मांग लूंगा लेकिन तुम्हारी इस हरकत से मेरा लंड खड़ा होने लगा है। 
( अपने बेटे की बात सुनकर अलका मुस्कुरा दी उसे भी इस का आभास हो चुका था। अपनी टांगों के बीच वह अपने बेटे के लंड की चुभन को महसूस कर चुकी थी इसलिए वह भी चुदवासी हो चुकी थी। अपने बेटे की लंड खड़े होने वाली बात को सुनकर वह बोली।) 

तो देर किस बात की है बेटा डाल दे अपना लंड मेरी बुर में मेरी बुर भी तो तेरा लंड लेने के लिए पानी पानी हो गई है। 
( अलका की बात को सुनते ही राहुल का लंड ठुनकी लेने लगा। लेकीन वह एक खेद जताते हुए बोला।)

लेकिन मम्मी सोनू .,,,,, 

सोनू अपने कमरे में पढ़ाई कर रहा है।( अलका राहुल की बात को बीच में ही काटते हुए बोली। अलका को भी बहुत ज्यादा ऊतावल मची हुई थी अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में लेने के लिए। राहुल भी अपनी मां की जल्दबाजी को देखकर एकदम से जोश में आ गया। अलका के बदन में उत्तेजना और प्रसन्नता के भाव बराबर नजर आ रहे थे और इसी के चलते वह खुद ही वहीं पर ही कुर्सी पकड़कर झुक गई और अपनी गांड को ऊपर की तरफ उठा दी यह राहुल के लिए इशारा था। वह ं अपनी गांड ऊचका कर अपनी नजरें घुमा कर राहुल की तरफ देखने लगी और उसे आंखों से इशारा करके अपनी साड़ी को ऊपर कमर तक उठाने का इशारा की,,,,, राहुल भी उत्तेजना से भर चुका था इसलिए वह भी एक पल की भी देरी किए बिना सीधे अपनी मां की साड़ी को पकड़कर एक झटके में ही कमर तक उठा दिया और पेंटी को नीचे जांघो तक सरका कर अपनी भी पेंट को खोलकर नीचे घुटनो तक सरका दिया। 
राहुल और अलका दोनों कामोतेजना के बहाव में बह़ते जा रहे थे। इस समय दोनों को इस बात का भी बिल्कुल भी फिक्र नहीं थी कि वह लोग ड्राइंग रूम में ही अपनी उत्तेजना को शांत करने में लगे हुए थे जहां पर किसी भी समय सोनु आ सकता था। लेकिन अलका आज बहुत खुश थी इसलिए वह राहुल को भी खुश करना चाहती थी इसलिए किसी भी चीज की फिक्र उन दोनों को बिल्कुल भी नहीं थी। राहुल तो कुछ ही देर में अपने लंड को अपनी मां की बुर में डालकर पूरी तरह से छा गया। राहुल अपनी मां की गरम सिसकारियों के साथ जोर जोर से धक्के लगाता हुआ चोदे जा रहा था। कुछ मिनटों की घमासान चुदाई के बाद दोनों एक साथ झड़ गए। दोनों अपनी कामोत्तेजना को बड़े सफाई के साथ मिटा चुके थे। 
भोजन करते समय राहुल ने अपनी मां को कल के प्रोग्राम के बारे में बताया। कल के दिन अलका को छुट्टी रखनी थी। राहुल अपनी मां और सोनू के साथ घुमने ओर खरीदी करने का प्रोग्राम बना लिया था। कल वह अपनी मां का ब्रांडेड ब्रा ओर पेंटी के साथ साथ ट्रांशपेरेंट गाऊन भी दीलाना चाहता था., जिसके बारे मे ऊसने अपनी मां को कुछ भी नही बताया था। जो की ऊसकीमां के लिए सरप्राईज था।
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10-09-2018, 03:59 PM,
RE: Desi Sex Kahani होता है जो वो हो जाने दो
सुबह राहुल की नींद खुली तो वह अपनी मां की कमरे में बिल्कुल नंगा उसकी मां की नंगी बाहों में लेटा हुआ था अलका और राहुल दोनों इस समय पहले की ही तरह बिल्कुल संपूर्ण नग्नावस्था में एक दूसरे की बाहों में बाहें डाल कर चरमोत्कर्ष के पश्चात नींद की आगोश में लेटे हुए थे। राहुल की आंख खुलते ही वह बहुत ही पसंद नजर आ रहा था क्योंकि आज ही उसका जन्मदिन था। राहुल दीवार पर टंगी घड़ी की ओर देखा तो काफी समय हो चुका था वैसे भी आज चिंता की कोई बात नहीं थी ना तो उसे स्कूल जाना था और ना ही उसकी मां को ऑफिस। उसने कुछ देर तक बिस्तर पर ही लेटे लेटे हुए अपनी मम्मी के रेशमी बालो मे ऊंगलियो को ऊलझा कर सहला रहा था। 
कुछ देर तक यूं ही लेटे रहने के बाद वह जैसे ही बिस्तर पर से उठने को हुआ, वैसे ही तुरंत अलका की भी नींद खुल गई। राहुल पर नजर पड़ते ही अलका मुस्कुराने लगी हो मुस्कुराते हुए उसे जन्मदिन की ढेर सारी बधाई देते हुए उसे गले से लगा ली। राहुल भी अपनी मम्मी की बधाई को मंजूर करते हुए अपने होठों को गुलाबी होता रखकर चुंबन करने लगा। गले मिलने के बाद राहुल अपनी मां को बोला।

मम्मी जल्दी से तुम नहा धोकर तैयार हो जाओ और सोनू को भी तैयार होने को कहो, मैं भी जल्दी से नहा धोकर तैयार हो जाता हूं क्योंकि आज हम लोगों को बाहर है खाना खाना है और सारा दिन बस घूमना है और खरीदी करना है।( राहुल की बात सुनकर अलका खुश तो हुई लेकिन उसके चेहरे पर उदासी छाने लगी अपनी मां को उदास होता हुआ देखकर वह बोला।)

क्या हुआ मम्मी तुम ऐसे उदास क्यूं हो गई?

बेटा बाहर घूमने फिरने की बात तो ठीक है लेकिन इतने सारे पैसे कहां है?

तुम चिंता मत करो मम्मी मैंने सारा बंदोबस्त कर लिया है बस आप जल्दी से तैयार हो जाइए फिर हम घूमने चलते हैं। 

( अपने बेटे की कहानी सुनकर अलका को राहत हुई उसे अब अपने बेटे पर पूरा पक्का यकीन होने लगा था। अगर वह कह रहा है कि बंदोबस्त कर के रखा है तो जरूर उसने कुछ ना कुछ बंदोबस्त किया होगा तभी तो वह बाहर घूमने फिरने और खरीदी करने की बात कर रहा है। अलका खुश होते हुए बस एक चादर भर अपने बदन पर लपेटी और वैसे ही बाथरूम की तरफ चल दी।


कुछ ही देर मे राहुल और सोनू तैयार होकर नीचे बैठे हुए थे वह दोनों अपनी मां का इंतजार कर रहे थे जो कि अपने कमरे में अभी भी तैयार हो रही थी लेकिन कुछ समय ज्यादा लगने की वजह से राहुल सोनू से बोला। 

तू यही बैठ मे मम्मी को बुला कर लाता हूं। ( इतना कहकर राहुल अपनी मां की कमरे की तरफ जाने लगा। कमरे के दरवाजे के पास पहुंच कर अपने हलके से दरवाजे को धक्का दिया तो दरवाजा खुद-ब-खुद खुल गया। राहुल की नजर जैसे ही कमरे के अंदर गई अपनी मां का गोरा बदन देखकर उसकी आंखें चौंधिया गई। अलका की पीठ उसकी तरफ थी और वह अपने दोनों हाथ पीछे लाकर ब्रा के हुक को बंद करने की कोशिश कर रही थी। राहुल अपनी मां के इस रूप को देखकर एकदम से चुदवासा हो गया। इस समय अलका की गांड साड़ी ज्यादा टाईट बंधी होने की वजह से कुछ ज्यादा ही भरावदार लगने लगी थी। राहुल के लिए ईतना लुभावना और कामुक दृश्य को दरवाजे पर खड़े खड़े देखते रहना एक बिल्ली का दूध से भरी हुई कटोरी को बस देखते रहने के बराबर था जोकि दोनों सूरत-ए-हाल में संभव नहीं था। इसलिए राहुल कमरे में दाखिल हुआ और सीधे अपनी मां के पास पहुंच कर अपनी एक हथेली को उसकी भरावधार गांड पर रखकर कस के दबा दिया। राहुल के ईस हरकत पर अलका के मुंह से आऊच्च निकल गया। 

आऊच्च,,,,,, क्या कर रहा है राहुल? ( वह फिर से अपनी ब्रा के हुक को बंद करने की नाकाम कोशिश करते हुए बोली।) 

क्या मम्मी हम दोनों कब से तुम्हारा नीचे इंतजार कर रहे हो और आप हैं कि अभी तक तैयार भी नहीं हो पाई हो। 

अरे देख नही रहा है,,,, इस मुआा ब्रा का हुक है की बंद ही नहीं हो रहा है। 

अच्छा लगे नहीं बंद कर देता हूं ।(इतना कहने के साथ ही राहुल ब्रा के दोनों स्ट्रेप को पकड़ कर खींचकर बड़ी मुश्किल से हुक में फसाते हुए बोला ।) 

कहां से हुक लगेगा मम्मी ईस ब्रा का साईज देखो और आपकी चुचियों का साइज देखो। यह तब की ब्रा लग रही है जब आपकी चूचियां नारंगी की तरह गोल गोल हुआ करती थी लेकिन अब आप की चूचियां रस से भरी हुई पके हुए आम की तरह बड़ी बड़ी हो गई है। 
( इतना कहने के साथ ही राहुल पीछे से अपनी मां को बाहों में भरते हुए चुचीयों को अपनी हथेली में भरकर दबा दिया। )

आऊच्च,,,, तो क्या करूं बेटा तू तो जानता है कि नई ब्रांडेड ब्रा खरीदने की मेरी तो हैसियत नहीं है। ( अपनी मां की बात को सुनकर वह बात को बदलते हुए बोला)

कोई बात नहीं मम्मी अब जल्दी करिए देर हो रही है। 

बस बेटा दो मिनट ( इतना कहते ही वह साड़ी के पल्लू को अपने कंधे पर ले ली अब वह पूरी तरह से तैयार हो चुकी थी। इस समय अलका का रूप देखते ही बन रहा था बला की खूबसूरत लग रही थी अलका। राहुल की नजर तो अलका के बदन के ऊपर से हट ही नहीं रही थी। अलका राहुल की नजर को भांप गई और शर्माते हुए बोली।)

तू तो ऐसे देख रहा है जैसे की पहले कभी मुझे देखा ही न हो। 

मम्मी आप को खुद पता नहीं है कि आप कितनी ज्यादा खूबसूरत हैं इसलिए तो जब भी आपको देखता हूं तो बस देखता ही रह जाता हूं। 


बस बस अब और ज्यादा तारीफ मत कर जल्दी चल देर हो रही है। 
( दोनों कमरे से बाहर की तरफ जाने लगे लेकिन जाते जाते भी राहुल की नजर उसकी मां की भरावदार नितंबों पर ही टिकी हुई थी जिसे वह कमरे के बाहर निकलते निकलते भी अपनी हथेली से जोर से दबा दिया और अलका राहुल की तरफ देखकर मुस्कुरा दी।) 

तीनों घर से बाहर निकल चुके थे घूमने के लिए। आज तीनों बहुत खुश नजर आ रहे थे। अलका का रूप तो देखते ही बन रहा था उसकी खूबसूरती में चार चांद लग गए थे। अपनी चुचियों के साइज से भी छोटे साईज का ब्लाउज पहनने की वजह से चुचियों का आकार कुछ ज्यादा ही बड़ा लग रहा था ऐसा लग रहा था कि अब यह दोनों कबूतर ब्लाउज फाड़कर बाहर फड़फड़ाने लगेंगे। चूच़ियों के ऊपरी हिस्से की पतली दरार कुछ ज्यादा ही लंबी और गहरी लग रही थी। जिस पर अगर किसी की भी नजर पड़ जाए तो उसका लंड बिना कहे खड़ा हो जाए। आने जाने वाले सबकी नजर अलका पर ही टिकी रह जाती थी जिसे राहुल भली-भांति समझ रहा था उसे अच्छा तो नहीं लग रहा था लेकिन कर भी क्या सकता था उसकी मां थी भी इतनी खूबसूरत और सेक्सी की किसी की भी नजर उस पर पड़े बिना रही ही नहीं जाती थी। राहुल को भी अलका का यह रूप बहुत ज्यादा भा रहा था। 
आज राहुल दिल खोलकर अपने भाई सोनू और अपनी मां पर पैसे खर्च कर रहा था और उनकी हर ख्वाहिशों को पूरी कर रहा था। उन दोनों की जो इच्छा होती थी वह उन दोनों को खिला रहा था पैसे की बिल्कुल भी चिंता नहीं थी क्योंकि 10000 की नोटों की गड्डी जो वीनीत की भाभी से लिया था। राहुल अपने भाई और अपनी मां को सभी जगहों पर घुमाया। पार्क में चिड़ियाघर में जहां-जहां हो सकता था सभी जगहों पर घुमाया। राहुल ने उन दोनों को सीनेमा भी दिखाया। अलका को आज अपनी जवानी के दिन याद आ गए जब पहली बार बार शादी कर के आई थी तब उसके पति ने पहली बार उसे सिनेमा के दर्शन कर आए थे और उस दिन के बाद आज उसका बेटा उसे सिनेमा दिखाने ले गया था। अलका के साथ-साथ सोनू बहुत खुश नजर आ रहा था क्योंकि उसने आज तक इतनी आजादी के साथ ना कहीं घूमा फिरा और ना ही इतना कुछ खाया। थियेटर में ज्यादा भीड़ नहीं थी और अंधेरा होने के बाद अंधेरे का लाभ उठाते हुए राहुल और अलका एक दूसरे को चुम्मा चाटी करने का पूरा आनंद उठाते रहे , राहुल की इच्छा तो अलकां को लंड चुसवाने की थी लेकिन पास में सोनू के मौजूदगी में ऐसा संभव नहीं लगा इसलिए सिर्फ चुंबन से ही काम चलाना पड़ा।
अलका की भी इच्छा बहुत थी थिएटर में नहीं अनुभव का आनंद उठाने के लिए लेकिन वह भी ऐसा ना कर सकी. लेकिन कामुक हरकतों की वजह से अपनी बुर जरूर गिली कर ली। फील्म देखकर बाहर निकले तो शाम हो चुकी थी। राहुल अपने लिए केक खरीदना चाहता था इसलिए वह दुकान से केक भी खरीद लाया। 
राहुल के मन में गुदगुदी सी होने लगी क्योंकि वह अपनी मां के लिए ब्रांडेड ब्रा और पैंटी और ट्रांसपेरेंट गाउन खरीदना चाहता था। उसकी उत्सुकता इस बात पर ज्यादा थी की यह सब ब्रांडेड कपड़े पहनने के बाद उसकी मां कैसी दिखेगी, यह सब सोच-सोच कर ही उसके लंड का तनाव बढ़ता जा रहा था। 
राहुल ने सबसे पहले सोनू के लिए कपड़े खरीदने और उसके बाद उसकी मां के लिए एक नई सी सुंदर सी साड़ी खरीदा नई साड़ी पाकर के तो अलका खुशी के मारे फुले नहीं समा रही थी। तीनों बहुत खुश नजर आ रहे थे अलका अपने बेटे की तरफ देख कर मन ही मन अपने आपसे ही बातें करते हुए कह रही थी कि वाकई मैं ऊसका बेटा अब बड़ा हो गया है। 
राहुल के बदन मे अजीब सी गुदगुदी मच रही थी क्योंकि इस समय वहं उसी दुकान के सामने खड़ा था जिस दुकान से विनीत की भाभी ने अपने लिए ब्रांडेड अंडर गारमेंट और राहुल के लिए टीशर्ट खरीदी थी राहुल को भी इसी शॉप से अपनी मां के लिए ब्रांडेड ब्रा और पैंटी के साथ-साथ ट्रांसपेरेंट गाउन भी खरीदना था। वह अपनी मां को साथ में लेकर जा नहीं सकता था क्योंकि वह उसे सरप्राइस देना चाहता था। इसलिए वह सोनू और अपनी मां को मैंगो जूस पिलाने के बहाने जूस की दुकान पर ले गया जोकि उसी शॉप के ठीक सामने ही थी। वहां जाकर वह दो ग्लास जुस का ऑर्डर कर दिया और अपनी मां और सोनु को वहीं बैठे रहने के लिए बोला। राहुल वहां से जाने लगा तो उसकी मां बोली।

तू कहां जा रहा है बेटा? 

तुम दोनों यहीं बैठकर जूस पीओ मम्मी मै तब तक सामने की शॉप से कुछ कपड़े खरीद कर लाता हूं। 

लेकिन कपड़े तो हमने ले लिए है ना तो अब कौन से कपड़े खरीदने हैं। 

मम्मी आप यहीं बैठकर जुस पीओ यह कपड़े आपके लिए ही है लेकिन सरप्राइज़ है। ( इतना कहने के साथ ही वह दोनों को वहीं छोड़ कर सड़क पार करके ऊसी शॉप मे चला गया।
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10-09-2018, 03:59 PM,
RE: Desi Sex Kahani होता है जो वो हो जाने दो
आज दूसरी बार राहुल ईस शॉप में कदम रख रहा था। वह पहली बार भी नहीं आना चाहता था लेकिन विनीत की भाभी ं उसे जबरदस्ती शोप मे ले आई थी। उस दिन उस को ब्रा और पेंटी खरीदते देख कर उसका भी मन हो रहा था कि वह भी अपनी मां के लिए ईस तरह के ब्रांडेड ब्रा और पेंटी खरीद कर उसे पहनने को दे लेकिन उस समय उसके पास पैसे नहीं थे। लेकिन आज उसकी जेब गर्म थी और वह अपनी मां को सरप्राइज भी देना चाहता था। शॉप में आते ही राहुल की आंखें कपड़ों की चमक और उसके ब्रांडेड लक्जुरीयस डिजाइन को देखकर चाौंधीया गई। वहां लेडीज अंडर गारमेंट्स के काउंटर पर गया तो वहां पर खड़ी लड़की उसे पहचानने और मुस्कुराते हुए उसका अभिवादन करते हुए बोली।

कहीए सर आपको क्या दिखाऊं? 
( उसकी बातें सुनकर राहुल को थोड़ी झिझक हुई वह थोड़ा शर्माने लगा । वह लड़की जो काउंटर पर खड़ी थी वह अनुभवी थी राहुल के असहजता का भाव वह भांप ली । इसलिए राहुल को सहज करने के उद्देश्य से वह मुस्कुराते हुए बोली।) 

सर आप बिल्कुल भी मत शर्माइए बस आप मुझे इतना बता दीजिए कि आपको चाहिए क्या? 
( ऊस लड़की की बात सुनकर राहुल थोड़ा सा हड़बड़ा गया और हड़बड़ाते हुए बोला।) 

ममममम,,,,,,, ममममम,,,, मुझे,,,,,,,, 
( राहुल के मुंह से इतना ही निकला था कि वह लड़की उसकी बात को बीच में काटते हुए बोली।) 

पहली बार किसी लेडी के अंडर गारमेंट्स खरीदने आ रहे हैं ना। 

हां( राहुल हां में सिर हिलाते हुए बोला।) 

आप बिल्कुल भी टेंशन मत लीजिए सर पहली बार ऐसा ही होता है यहां बहुत लोग पहली बार आते हैं। तो इसी तरह से थोड़ा सा घबरा जाते हैं। वह लोंग भी पहली बार ही अपनी गर्लफ्रेंड के लिए तो कोई अपनी आंटी के लिए तो कोई अपनी भाभी के लिए और कोई तो अपनी मम्मी के लिए भी लेने आता है। कहीं आप भी तो अपनी मम्मी,,,,,,,( इतना कहते ही वह मुस्कुराने लगी।)

ननननन,,,,, नही,,,,, मैं तो अपनी पड़ोस वाली भाभी के लिए लेने आया हूं ।

कौन जो उस दिन आप उनके साथ आए थे वही भाभी।


नही नही यह दूसरी भाभी है। वह क्या है कि उनके घर कोई इस समय मौजूद नहीं है खरीदने के लिए तो उन्होंने मुझे ही भेज दी। 


कोई बात नहीं सर आप बस साईज बताइए मैं आपको एक से एक ब्रांडेड ब्रा और पेंटी दिखाती हूं और जो भी आपको पसंद हो आप ले लीजिएगा। 

( राहुल अपनी मां के बदन के हर एक अंग से वाकिफ था। वह अपनी मां के बदन को पूरी तरह से अवलोकन कर चुका था। वह अपनी मां की दोनो चुचियों को अपनी हथेली में ले लेकर पूरी तरह से नाप चुका था। और उसकी भरावदार नितंबों का तो वह पहले से ही दीवाना था। इसलिए उसे अपनी मां का साईज बताने मे ऊसे नहीं जरा सी भी दिक्कत नहीं हुई। और उसने अपनी मां का साइज बता दिया। वह लड़की बहुत याद आ रही थी इसलिए उसने झट से राहुल के बताए अनुसार साइज की ब्रा और पेंटी निकालकर काउंटर पर रख दी। राहुल को ब्रा की डिजाइन और पैंटी की डिज़ाइन देखकर ही मदहोश होने लगा। वह मन ही मन कल्पना करने लगा कि ईस तरह की ब्रा और पैंटी पहनने के बाद उसकी मां कैसी दिखेगी। उसके बदन में अजीब सी उत्तेजना का अनुभव हो रहा था। उसने ब्रा और पेंटी को पसंद करने में ज्यादा समय नहीं लिया और झट से पसंद कर लिया। इसके बाद उसने उस लड़की को शॉर्ट ट्रांसपेरेंट गांऊन दिखाने को कहा। और उसका उनको भी उस लड़की ने बहुत ही अच्छी डिजाइन का दिखाया तो राहुल ने झट से उसे भी पसंद कर लिया। बहुत ही जल्दी उस लड़की ने अपने तरीके से राहुल को सहज कर ली थी। इसलिए तो उसकी हड़बड़ाहट खत्म हो चुकी थी।) 

मैडम आप से एक रिक्वेस्ट है।

जी बोलिए।

यह सारे अंडर गारमेंट्स आप अगर किसी गिफ्ट की तरफ पैक करके मुझे देंगीे तो कुछ ज्यादा ही अच्छा रहेगा। ( राहुल की बात सुनते ही वह लड़की समझ गई कि मामला कुछ और ही है इसलिए वह मुस्कुराते हुए बोली।)

ओहहहह,,,,,, तो मामला कुछ और ही है।(ईतना कहने के साथ ही वह फिर से मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए बोली।) 
कोई बात नहीं सर हो जाएगा लेकिन उसके एक्स्ट्रा चार्ज लगेंगे।

ठीक है मैं एक्स्ट्रा चार्ज दे दूंगा बस आप जल्दी से पेक कर दीजिए। 

( ऊस काम करने वाली लड़की ने जल्दी से सारे गारमेंट्स और गांव में को गिफ्ट की तरह बहुत ही अच्छे तरीके से पैक करवा दी। और वह बिल बनाने लगी। ऊस लड़की ने लॉ कट टी-शर्ट पहनी हुई थी जिसकी वजह से उसकी दोनों गालाइयों के बीच की लकीर साफ साफ नजर आ रही थी और हल्का हल्का दूधिया रंग के के दोनों गोलाई भी नजर आ रही थी। उस लड़की ने बिल बनाते समय तिरछी नजर से इस बात पर गौर की कि वह उसकी दोनों चुचियों की ही तरफ देख रहा है लेकिन वह इस बात को नजरअंदाज करके मुस्कुराते हुए बिल बनाने लगी। 
राहुल बिल का पेमेंट करते समय उस काउंटर वाली लड़की से बोला। 

अगर आप बुरा ना माने तो आपसे एक बात कहूं।

जी कहीए ।

आप उस( ऊंगली से कांच के अंदर रखी ब्रा और पैंटी की तरफ इशारा करते हुए) रंग और साईज की पहना करिए आप पर बहुत सूट करेगी। 
( राहुल की उंगली जिस तरफ निर्देश कर रही थी उस लड़की की नजर वहां गई तो वहां शरमा गई । इससे पहले कि वह कुछ बोल पाती राहुल काउंटर छोड़कर जाने लगा और वह जब पीछे मुड़कर देखा तो वह लड़की राहुल की तरफ देखते हुए मुस्कुरा रही थी।)

राहुल ब्रा पैंटी और गाउन को गिफ्ट पैक कराकर शॉप के बाहर आ गया। अलका कुछ पूछ पाती इससे पहले ही वह बोल दिया कि यह उसी के लिए गिफ्ट है जो कि आप अपने कमरे में जाकर खोलिएगा और पहनकर दिखाइएगा कि कैसा लगता है। इस बात को बोलते हूंए वह इस बात का भी ध्यान रख रहा था कि सोनू उसकी बात सुन ना ले। 
राहुल ने होटल से खाना भी पैक करवा लिया। अंधेरा हो चुका था जब तक वह घर पहुंचते रात के 8:00 बज चुके थे। जल्दी-जल्दी राहुल ने सारी तैयारियां कर ली और केक काट कर सबसे पहले उसने अपनी मां को खिलाया और उसके बाद सोनू को। सोनू और अलका ने बारी-बारी से राहुल को जन्मदिन की ढेर सारी बधाई दी तीनों बहुत खुश नजर आ रहे थे। 
होटल से लाया खाना खाने के बाद सोनू अपने कमरे में चला गया अरे राहुल सोनू के जाने के बाद कुछ गिफ्ट के पैकेट को अपनी मां के हाथों में थमाते हुए बोला।

मम्मी यह आपके लिए है जो कि एक सरप्राइज़ है। और वादे के मुताबिक आज के दिन आप मुझे बिल्कुल भी नाराज नहीं करेंगी। इसलिए इस गिफ्ट के पैकेट को ले जाकर आप अपने कमरे में खोलिए और इसमें जो भी हो उसे पहन कर मुझे दिखाएंगे और मैं थोड़ी देर में आपके कमरे में आता हूं। 
( राहुल की बातें सुनकर अलका को अजीब सा महसूस होने लगा उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार यह राहुल करना क्या चाहता है। इसलिए वह राहुल से बोली।) 

लेकिन बेटा इस डिब्बे में है क्या?

अगर मैं खुद बता दूंगा तो सरप्राइज़ किस बात की रही थी। इसलिए आप बिल्कुल भी सवाल मत करिए और अपने कमरे में जा कर के खुद इस डिब्बे को खोल कर देख लीजिए कि ईसमे क्या है? 

अलका आज के दिन भला कैसे इंकार कर सकती थी इसलिए उसे जाना ही पड़ा। वह अपने कमरे में उस डिब्बे को लेकर के जा चुके थी। और राहुल नीचे बैठकर अजीब सी उत्तेजना का अनुभव अपने बदन में कर रहा था।
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10-09-2018, 03:59 PM,
RE: Desi Sex Kahani होता है जो वो हो जाने दो
अलका आज के दिन भला कैसे इंकार कर सकती थी इसलिए उसे जाना ही पड़ा। वह अपने कमरे में उस डिब्बे को लेकर के जा चुके थी। और राहुल नीचे बैठकर अजीब सी उत्तेजना का अनुभव अपने बदन में कर रहा था।
अलका राहुल के द्वारा दिए गए गिफ्ट के पैकेट को ले करके अपने कमरे में चली गई।,, राहुल रसोई घर के सामने ही कुर्सी पर बैठ कर इंतजार कर रहा था कमरे में जाने का वह अपनी मां को थोड़ा समय देना चाहता था ताकि वह सहज होकर उसके दिए गए कपड़ों को पहन सके., क्योंकि वह भी अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां ने आज तक ऐसे कपड़ों को शायद फिल्मों में या टीवी पर ही देखी हैं उस कपड़ो को खरीदने के बारे में तो वह कभी सोच भी नहीं सकती थी तो पहनने की तो बात ही दूर रही और ऐसे सेक्सी कपड़ों को अपने हाथों में देखकर और यह जानते हुए कि यह उसके ही है
तो उसकी मां को कैसा लग रहा होगा यह सब सोच सोचकर राहुल उत्तेजित हुआ जा रहा था। उसने तो अपने मन में उन कपड़ों को कि उसकी मां के बदन पर कैसा लगेगा उन कपड़ो को पहनकर उसकी मां कैसी दिखेगी इस बारे में ढेर सारी कल्पनाएं भी कर चुका था। और कल्पना करते-करते ही उसका लंड टाइट हो चुका था। वह कुर्सी पर बैठकर अब तक के सारे सफर के बारे में सोचता रहा उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसकी मां के साथ उसका यह पवित्र रिश्ता कुछ ऐसा बदल जाएगा कि दोनों में मां बेटे जैसा रिश्ता खत्म हो जाएगा। 
मां बेटे के बीच की यह सारी मर्यादाएं कभी नहीं टूटती अगर राहुल सुबह सुबह बाथरुम में अपनी मां के नंगे बदन को उसके भरावदार नंगी गांड को ना देखा होता तो कभी भी इतनी हद तक ना गुजर पाता। उस दिन के पहले उसके दिमाग में इन सब बातों के लिए कोई जगह नहीं थी उसकी मां की खूबसूरती के बावजूद भी उसने अपनी मां को कभी भी ऊस तरह की नजर से नहीं देखा था। लेकिन बाथरुम के दृश्य के बाद उसे उसे अपनी मां को देखने का नजरिया बदलने लगा। अपनी ही मां के भराव दार नितंबों का आकर्षण बढ़ते-बढ़ते राहुल की नजर में इस कदर बढ़ गया कि वह आकर्षण संभोग में तब्दील हो गया। अलका के मन में भी दबी बरसों से काम की चिंगारी राहुल की वजह से ही भड़क गई और वह भी अपनी मर्यादा को लांघ कर अपने ही बेटे से संभोग सुख का आनंद लेने लगी। और आज दोनों के बीच में मां बेटे का रिश्ता से समाज के लिए ही है। 

अलका अपने कमरे में पहुंचकर अपने बेटे के द्वारा गिफ्ट को खोलने लगी पेकेट में क्या होगा यह सोच-सोचकर उसके दिल की धड़कन बढ़ती ही जा रही थी।
राहुल ने उसे क्या गिफ्ट किया है इस बारे में अलका पूरी तरह से अनजान थे लेकिन पहनने की बात उसे इतना जरूर साफ हो चुका था कि वह कपड़ा ही था। 
जैसे-जैसे गिफ्ट का रेपर खुल रहा था वैसे वैसे अलका के दिल की धड़कने और उसकी उत्सुकता बढ़ती जा रही थी। जैसे ही पैकेट खुला और अंदर से उसने उन कपड़ों को बाहर निकाली तो उन कपड़ो का रूप देखकर, उत्तेजना के मारे उसकी बुर फूलने पिचकने लगी। वह उन कपड़ो को अपने हाथ में लेकर उलट पलट कर देखने लगी उन कपड़ो को देखते हुए उसकी दिल की धड़कनै और ज्यादा तीव्र गति से चलने लगी।
अलका को तो कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था कि आखिरकार यह सब है क्या लेकिन जल्दी उसे सारा माजरा समझ में आ गया। अपने बेटे के मन की इच्छा को जानकर वह मंद-मंद मुस्कुराने लगी लेकिन वह उन कपड़ो को लेकर बहुत ही असहज हो रही थी। 
वह मन में यह सोचने लगी कि वह इन कपड़ों को कैसे पहन सकती है उसने तो आज तक ऐसे कपड़ों की कभी कल्पना भी नहीं की थी और कभी सपने मे भी नहीं सोची थी कि इस तरह के कपड़े वह कभी पहन पाएगी। उसे उन कपड़ों को लेकर के बड़ी ही शर्म महसूस हो रही थी वह एक बार तो मन में यह ठान ली की वह इन कपड़ों को नहीं पहनेगी लेकिन तभी उसे याद आ गया कि आज उसके बेटे का जन्मदिन है और उसने अपने बेटे से वादा की थी कि वह उसकी हर इच्छा को पूरी करेगी। लेकिन फिर भी उसके मन में शर्म की भावना बनी हुई थी क्योंकि हाथ में कपड़े पकड़ने के बाद उसे इस बात का आभास हो गया कि वह कपड़े कुछ ज्यादा ही छोटे हैं वह कैसे उन कपड़ो को पहनकर राहुल के सामने आएगी और वह भी गाउन एकदम ट्रांसपेरेंट,,,,,,,, 
ऊफ्फ ये राहुल भी ना,,,,,, ( अलका अपने आपसे ही बातें करते हुए बोली। लेकिन फिर मन में सोचने लगी कि राहुल उसका कितना ख्याल रखता है और तो और उसे इतनी बड़ी मुसीबत से भी बचाया और जन्मदिन के दिन उसे और सोनू को कितना घुमाया खिलाया पिलाया उनके लिए कपड़े तक खरीदें अगर ऐसे में वह अपने बेटे की ईस ईक्षा को पूरी नहीं कर पाएगी तो स्वार्थी कहलाएगी। बहुत कुछ सोचने के बाद उसने मन में ठान की वह इन कपड़ों को जरूर पहनेगी। 
पैंटी को हाथ में लेते ही उसकी बुर में गुदगुदी होने लगी क्योंकि पैंटी के ऊपर वाला हिस्सा एकदम मखमली रोंएदार और जालीदार था। जिसे पहनने के बाद भी जिस चीज को छुपना चाहिए वह बड़ी ही सफाई के साथ बाहर ही उजागर हुई रहती थी। पेंटी को देखकर और उसके पहनने के बाद वह कैसी दिखेगी इस बारे में सोच कर ही उसकी बुर गीली होने लगी थी। 

नीचे राहुल कुर्सी पर बैठकर ऊपर जाने का इंतजार कर रहा था उसे मालूम था कि इतनी जल्दी उसकी मां उन कपड़ो को पहनने वाली नहीं है इसलिए थोड़ा वक्त दे रहा था। 

अलका उन कपड़ों को पहनने के लिए अपनी साड़ी को उतारना शुरू कर दि। धीरे-धीरे करके उसने अपनी साड़ी को अपने बदन से उतार कर के बिस्तर पर फेंक दी। साड़ी को अपने बदन से उतार फेंकने के बाद वह अपने ब्लाउज के बटन को खोलना शुरू कर दी एक-एक करके वह अपनी ब्लाउज के सारे बटन को खोल दी। बटन के खुलते ही उसने तुरंत ब्लाउज उतार कर फेंक दी। ब्लाउज के उतरते हैं उसका ध्यान पुरानी ब्रा पर गई जो कि वाकई में पुरानी हो चुकी थी जगह जगह से ब्रा के रेसे बाहर की तरफ निकले हुए थे। लेकिन ब्रा के अंदर का समान अभी भी खऱा सोना ही था। जिस तरह के आकार मे बड़े बड़े चूचियां अलका की थी उस तरह की चुचीया पाने के लिए बहुत सी औरते तरसती थी। अलका एक नजर अपनी ब्रा के साथ-साथ अपनी बड़ी बड़ी छातियों पर भी डाली और तुरंत दोनों हाथ अपने पीछे की तरफ ले जा कर के ब्रा के हुक को खोल दी और ब्रा को भी उतार कर फेंक दी।
उसने जल्दी-जल्दी बाकी के भी कपड़े उतार फेंके और इस समय एकदम नंगी अपने कमरे में खड़ी थी। सबसे पहले उसने ब्रा को उठाई और उसे ऊलट पलट कर देखते हुए पहनने लगी । पहनते हुए ऊसे ऊसके बदन मे अजीब सी हलचल ओर ऊन्माद फैल रहा था। बांह से ऊपर की तरफ गुजरती हुई ब्रा की स्ट्रेप ऊसके बदन मे गुदगुदी पैदा कर रहा थी। ऊसके मन मे ऊत्सुकता बढ़ती जा रही थी। आखिरकार होले होले उसने ऊस बब्रा को पहन ही ली। ऊफ्फ गजब का एहसास उसके बदन में हो रहा था। ब्रा का कपड़ा इतना ज्यादा मुलायम था कि ऐसा लग रहा था कि रही हो एकदम मखमली एहसास उसे मदहोश किए जा रहा था। ब्रा का कपड़ा भी ऐसा था कि उसकी तनी हुई निप्पल साफ साफ नजर आ रही थी जिस पर नजर पड़ते ही उसकी बुर में गुदगुदी होने लगी। अलका की दोनो चुचियों परं ब्रा एकदम फिट बैठ गई थी। अलका को यह समझते देर नहीं लगी की, उसके चुचियों को माप उसका बेटा अच्छी तरह से जानता था । हाथों में ले लेकर मुंह में भरकर वह चूंचियों के आकार से अच्छी तरह से वाकिफ हो चुका था। अपने बेटे की सही माप का अंदाजा लगाने की वजह से अलका मुस्कुराने लगी। आज इस तरह के कपड़े पहनते हुए अलका को अजीब से सुख का एहसास हो रहा था। धीरे-धीरे करके उसने उस मखमली पैंटी को भी पहन ली जिसके आगे वाला भाग जालीदार था और जिसे पहनने के बाद भी उसकी बुर साफ-साफ झलक रही थी। अलका ब्रा और पेंटी को पहन चुकी थी वह घूम घूम कर अपने कजन को आगे पीछे नहीं आ रही थी और जाकर के आईने के सामने खड़ी होकर सामने की तरफ देखने लगे आईने में अपना अक्स देख कर ' अनायास ही उसके मुंह से वाह निकल गया। 
उसे यकीन नहीं हो रहा था कि इस तरह के कपड़े में वो इतनी ज्यादा सेक्सी लगेगी, आईने में अपना ही रूप देखकर उसका अंग अंग उन्माद में भरने लगा। उसकी बुर से मदन रस की एक बूंद टपक पड़ी। ऊसके बदन में उत्तेजना का संचार बड़ी तेजी से हो रहा था। वह बिस्तर पर पड़ा गांउन को भी उठा लाई, और उसे भी झट से पहन ली। उस ट्रांसपेरेंट गाउन को पहनने के बाद वह आईने में अपने रूप को देखी तो देखती ही रह गई। उसे यकीन नहीं हो रहा था कि इन कपड़ों में वह इतनी ज्यादा सेक्सी लगेगी। आज पहली बार उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि इस तरह के भी कपड़े होते हैं कि जिसे पहनने के बाद भी बदन का हर एक अंग साफ साफ नजर आता है। इन कपड़ों को पहनकर वह अजीब से सुख की अनुभूति कर रही थी उसे बहुत ही आनंद दायक लग रहा था। उसे अपना वजन बेहद हल्का महसूस हो रहा था और इस तरह की ब्राह्मणों उसकी चूचियां कुछ और भी ज्यादा बड़ी बड़ी लग रही थी। उसे अपना यह रूप बेहद अच्छा लग रहा था उसे खुद पर यकीन नहीं हो रहा था कि इन कपड़ो में वह इतनी ज्यादा सेक्सी लगती है बार-बार वह घूम घूम कर अपने बदन को देख ले रही थी और आईने में भी नजर मार ले रही थी। 
लेकिन उसे इस बात पर बड़ी शर्म महसूस हो रही थी कि ऐसे कपड़ों में वह अपने बेटे के सामने कैसे जाएगी जबकि वह संपूर्ण नग्नावस्था में अपने बेटे से चुदवा कर चुदाई का हर तरह से मज़ा ले चुकी थी । लेकिन फिर भी इस समय इन छोटे छोटे कपड़ों में अपने बेटे के सामने आने में उसे शर्म महसूस हो रही थी। 
अलका आज के दिन अपने बेटे को पूरी तरह से खुश कर देना चाहती थी इसलिए कोई भी ऐसा काम नहीं करना चाहती थी जिससे राहुल को बुरा लगे, इसलिए वह ना चाहते हुए भी इन कपड़ो में अपने बेटे के सामने आने के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुकी थी। आईने में देखते हुए उसने अपने बाल के जुड़े को भी खोल दि, जिससे वह और भी ज्यादा कामुक और सेक्सी लगने लगी। इन कपड़ों में और खुले बालों में अलका का रूप और भी ज्यादा निखरकर सामने आ रहा था। 
उसे बड़ी ही बेसब्री से अपने बेटे का आने का इंतजार था क्योंकि वह जानती थी कि उसका बेटा भी उसे इस रुप में देखने के लिए तड़प रहा होगा। अलका अपने बेटे का इंतजार करते हुए आईने में अपने रुप को देख देख कर खुश हो रही थी।

अलका के सोचने के मुताबिक ही राहुल नीचे बैठकर अपनी मां का इंतजार करते हुए तड़प रहा था। उसे अपनी मां के कमरे में जाना था लेकिन वह नीचे इसलिए बैठा हुआ था कि ताकि उसकी मां को पूरा समय मिल सके उन कपड़ों को ट्राई करने का, समय काफी हो चुका था उसका लंड भी बेहद टाईट हो करके तड़प रहा था।
उसके लिए अब यहां पर बैठकर कुर्सी पर इंतजार करते रहना बड़ा मुश्किल हो जा रहा था उसके सब्र का बांध टूट रहा था वह भी बेहद उत्सुकता अपनी मां को इन सेक्सी कपड़ो में देखने के लिए। इसलिए ऊसने सोचा कि अब चलना चाहिए इसलिए वह कुर्सी पर से उठा और अपनी मां के कमरे की तरफ चल दिया। जैसे जैसे वह अपनी मां के कमरे की तरफ बढ़ रहा था उसके दिल की धड़कन तेज होती जा रही थी। कल्पनाओं की सड़क पर वह सरपट भागे जा रहा था। अपनी मां के कमरे की तरफ जाते हुए भी ऊसकी कल्पनाओं का घोड़ा बड़ी ही तेजी से भाग रहा था। उसके मन में अपनी मां को ले करके और उन सेक्सी कपड़ों को लेकर के ढेर सारी कल्पनाए जन्म ले रही थी। वह मन में सोचते हुए जा रहा था कि ऊन कपड़ो मे ऊसकी मां केसी लग रही होगी, ऊस सेक्सी ब्रा मे ऊसकी बड़ी बड़ी चुचीया केसी लग रही होगी। छोटी-छोटी जालीदार पैंटी में ऊसका मक्खन सा बदन कैसा दिख रहा होगा।
उसकी बुर की गुलाबी पत्तियां क्या जालीदार पेंटी मै से झलक रही होगी या नहीं। उसके बदन पर ट्रांसपेरेंट गाउन कैसा लग रहा होगा। यही सब सोचकर उसके राहुल की हालत खराब हो जा रही थी। यही सब सोचते हुए राहुल अपनी मां के कमरे पर पहुंच गया कमरे का दरवाजा हल्का सा खुला हुआ था। उसने हल्के से दरवाजे को धक्का दिया और जैसे ही उसकी नजर कमरे के अंदर गई तो अंदर का नजारा देखकर ऊसकी आंखे चौंधिया गई।
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10-09-2018, 04:00 PM,
RE: Desi Sex Kahani होता है जो वो हो जाने दो
राहुल धीरे-धीरे अपनी मां के कमरे तक पहुंच गया था और जैसे ही उसने दरवाजे को खोलकर कमरे के अंदर नजर डाला तो वह अंदर का नजारा देखकर एकदम से दंग रह गया। अंदर का नजारा देख कर उसकी आंखें फटी की फटी रह गई मन में उसने ढ़ेर सारी कल्पनाएं की थी लेकिन यहां तो कल्पनाओं के विपरीत ही सबकुछ था। कहते हैं कि कल्पना से ज्यादा सुंदर कुछ नहीं होता लेकिन कल्पना से भी बेहद खूबसूरत और कामुक नजारा उसे कमरे में देखने को मिल रहा था। अलका आईने में अपने अक्स को निहार रही थी और दरवाजे पर खड़ा राहुल अपनी मां को आईने के सामने खड़ा देख रहा था उसकी नजर सीधे उसकी मां के भरावदार नितंबों पर ही गई थी। राहुल ने कभी सोचा भी नहीं था कि उसके दिए गए कपड़ों में ऊसकी मां और भी ज्यादा कामुक और सेक्सी हो जाएगी। राहुल की नजर तो अलका के बदन पर से हट ही नहीं रही थी। वह तो बस देखे जा रहा था खास करके उसकी नजर उसकी मां की बड़ी बड़ी गांड पर ही टिकी हुई थी जिसके ऊपर ट्रांसपेरेंट गाऊन क्या खूब फब रही थी।


गाउन छोटा होने की वजह से वह सिर्फ अलका की आधी गांड को ही ढंक पा रहा था , ढाक क्या पा रहा था ट्रांसपेरेंट गाउन होने की वजह से सब कुछ नजर आ रहा था। अलका अपनी खूबसूरती को आईने में निहारने में ही मस्त थी उसे इस बात का बिल्कुल भी आभास नहीं था कि उसका बेटा दरवाजे पर खड़ा उसे कामुक नजरो से देख रहा है। राहुल के लिए खड़े-खड़े यह कामुक नजारा देखना उसके सब्र के बाहर था इसलिए वह अपनी मां की तरफ आगे बढ़ा, राहुल जैसे ही आगे बढ़ा और जैसे ही दो चार कदम आगे बढ़ा ही था कि आईने में वह नजर आने लगा। राहुल को कमरे में मौजूद देखकर और अपने हालात को देखकर इस समय अलका शर्माने लगी। राहुल कभी अपनी मां के भजन को पीछे से देख ले रहा था तो कभी आईने में उसका चेहरा देख ले रहा था लेकिन अलका अपने परिवेश के कारण शर्म के मारे उससे आईने में भी आंख नहीं मिला पा रही थी। राहुल की हालत तो जेसे जेसे आगे बढ़ रहा था वैसे वैसे खराब होती जा रही थी। उसके पजामे में पूरी तरह से तंबू बना हुआ था। राहुल को अपने करीब आता देख अलका शर्माते हुए उसकी तरफ घूम गई और अपनी छोटी सी ट्रांसपेरेंट गाउन को हाथों से खींच खींच कर नीचे अपनी चिकनी जांघो को ढकने की नाकाम कोशिश करने लगी। राहुल को यह बिल्कुल भी समझ मे नही रहा था की आखिरकार उसकी मम्मी इस तरह से शरमा क्यों रही है। जबकि वह दोनों तो शर्मो हया और मर्यादा के सारे बंधन को तोड़कर ईतने आगे आ चुके थे कि जहां से पीछे वापस लौट कर जाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन था। फिर उसके मन में ख्याल आया कि शायद कपड़ों की वजह से उसकी मां शर्मा रही थी। शायद उसे इन खुले कपड़ों में कुछ ज्यादा ही खुलापन लग रहा था। वैसे ही राहुल भी अच्छी तरह से जानता था कि वह जिसे छुपाने की नाकाम कोशिश कर रही थी वह ऐसे भी दिखाई दे रहा था। राहुल तो बस मंत्रमुग्ध सा अपनी मां के बदन को देखे जा रहा था। और अलका थी की बस शर्माए जा रहीे थीे लेकिन इस बात का उसे गर्व भी थाकि इन कपड़ो में उसका वजन कुछ ज्यादा ही सेक्सी और कुछ ज्यादा ही उभर कर सामने आ रहा था जिसे देखकर उसका बेटा भी मंत्रमुग्ध हो गया था। अलका फिर भी अपने बदन को छोटे से कपड़े से ढकने की पूरी कोशिश किए जा रही थी। अपनी मां की यह हरकत राहुल को बड़ी ही कामुक और ऊत्तेजक लग रही थी। अलका की यह हरकत उसके बदन में झनझनाहट पैदा कर रही थी। राहुल अपने अंदर एक अजीब से सुख का एहसास कर रहा था। उसकी मां ऐसा बर्ताव कर रही थी कि जेसे वह खुद किसी गैर मर्द के सामने इन कपड़ो में आ गई हो। राहुल को भी ठीक ऐसा ही अनुभव हो रहा था उसे भी अपनी मां का बरखा देखते हुए लग रहा था कि जैसे वह किसी गैर औरत के सामने पहली बार ईस अवस्था में आ गया हो। अलका के चेहरे पर शर्मो हया के भाव उसके चेहरे को और भी ज्यादा खूबसूरत बना रहे थे। राहुल की तो हालत ऊपर से नीचे तक देख देख कर खराब हुए जा रही थी उसके पजामे में उसका लंड गदर मचाए हुए था जिस पर रह रहकर अलका नजर फेर ले रही थी। पजामे में तना हुआ लंड देखकर अलका की बुर में भी सुरसुराहट होना शुरू हो गई थी। लेकिन इस समय वह पहने हुए अपने छोटे छोटे कपड़ों में शर्मसार हुए जा रही थी। राहुल तो अपनी मां के खुबसुरत नंगे बदन को देखते हुए पजामे के ऊपर से ही अपने टनटनाए हुए लंड को मसलने लगा। 


अपने बेटे को ईस तरह से पजामे के ऊपर से ही लंड को मसलते हुए देखकर अलका की बुर पानी छोड़ने लगी।वह समझ गई की ऊसका बेटा चुदवासा हो चुका है । लेकीन ईन कपड़ो मे अलका की हया खत्म नही हो रही थी। राहुल अपनी मां की खुबसुरती को देखकर ऊत्तेजना के परमशिखर पर पहुंच गया था। अलका के दुधिया बदन को देखकर ऊसकी आंखे चौंधिया गई थी।
राहुल पजामे के ऊपर से ही लंड को मसलते हुए बोला।

ओहहहह मम्मी इन कपड़ों में तुम तो आसमान से उतरी हुई कोई अप्सरा लग रही हो। मुझे यकीन नही हो रहा है की सच मे तुम मेरी मम्मी हो । 

तो क्या लग रही हुं? ( अलका शर्म के मारे नजरे नीचे झुकाकर बोली।) 

ऐसी लग रही हो जेसे फिल्म की कोई हीरोईन 
( अपनी मां के चारो ओर चक्कर काटते हुए बोला।) 
अपने बेटे की बात सुनकर वह शर्मा गई। राहुल अभी भी उसके चारों तरफ घूम घूम कर उसके खूबसूरत बदन को ऊपर से नीचे की तरफ पूरी तरह से देख रहा था। देखते-देखते उससे रहा नहीं गया और जो ही वह अपनी मां के पीछे पीठ की तरफ पहुंचा तो उसकी नजर अलका के भरावदार नितंब पर चली गई और उस पर नजर जाते ही राहुल के अंदर उत्तेजना का संचार बड़ी ही तीव्र गति से होने लगा और उससे रहा नहीं गया उसने तुरंत अपनी हथेली अपनी मां के भरावदार गांड पर रखकर उसे हथेली में ही दबोच लिया, राहुल की इस हरकत पर अलंकाआगे की तरफ उचक गई और उसके मुंह से आउच निकल गया। 

क्या कर रहा है राहुल? 

क्या करूं मम्मी मुझ से रहा नहीं जा रहा है मैंने कहा ना कि आज आप स्वर्ग से उतरी हुई कोई अप्सरा लग रही है। आपका यह खूबसूरत बदन बड़ी बड़ी चूचियां और यह बड़े बड़े गांड ईन छोटे छोटे कपड़ों में बड़ा ही मोहक और कामुक लग रहा है। क्या कहूं मम्मी मुझसे आज अपने आप पर काबू कर पाना बड़ा ही मुश्किल हुए जा रहा है। 
( अपने बेटे की बात सुनकर अलका शर्म से गड़ी जा रही थी लेकिन अंदर ही अंदर अपनी तारीफ सुनकर उसे बड़ी ही प्रसन्नता हो रही थी। वह शरमाते हुए अपने दोनों हथेलियों को आपस में जोड़कर जांघों के बीच टिका कर पैंटी से झलक रही है अपनी गुलाबी बुक को ढकने की कोशिश कर रही थी। अपनी मां को इस तरह की हरकत करते हुए देखकर वह बोला।) 

ओह मम्मी अपनी खूबसूरती को इस तरह से छुपाओगी तो कैसे चलेगा। और किससे छुपा रही हो,,,,, मुझसे,,,,,
अब हमारेे बीच छुपाने जैसा कुछ रहा ही क्या है मेरे और तुम्हारे बीच में मर्यादा की सारी हदें टूट चुकी है। हम दोनों के बीच कुछ भी छिपने छिपाने जैसा नहीं रहा है मम्मी। बस आज खुलकर प्यार करो सारी हदें तोड़ दो आपकी खूबसूरत और सेक्सी बदन का में दीवाना हो चुका हूं। तुम्हारे जैसी औरत मैंने आज तक नहीं देखा तुम्हारे जैसी खुबसूरती शायद ही किसी औरत में हो। 
( राहुल अपनी मां की खूबसूरती की तारीफ में चार चांद लगाते हुए शब्दों के ऐसे ऐसे पुल बांध रहा था कि उसकी मां भी अपने बेटे के इन बातों को सुनकर आश्चर्यचकित होते हुए मन-ही-मन प्रसन्नता के साथ साथ उत्तेजित भी हुए जा रही थी। वह कुछ भी बोल नहीं रही थी बल्कि अपनी दोनों हथेलियों से अपनी जांघ़ों के बीच पहरेदारी करते हुए उस बेशकीमती खजाने को छुपाने की कोशिश कर रही थी, जो कि उसकी यह कोशिश नाकाम थी । क्योंकि वहां क्या-क्या छिपाती उसका अंग-अंग बेशकीमती था जांगो के बीच की जगह को छुपाने की कोशिश करती तो, छातियों की खूबसूरती बढ़ाते हुए दो बड़े बड़े टिल़े के सामान चुचिया उजागर हो जाती थी। और तो और उसकी बड़ी-बड़ी भरावदार नितंब इतनी ज्यादा उभरी हुई थी कि उन्हें छुपाने के बारे में तो वह सोच भी नहीं सकती थी। अलका का खूबसूरत बदन इस तरह से तराशा हुआ था कि उस के भदन के किसी भी हिस्से पर नजर जाती तो उत्तेजना की एक लहर पूरे बदन में दौड़ जाती थी। राहुल पूरी तरह से उत्तेजना में सराबोर हो चुका था वह अपनी मां की तारीफ करते बिल्कुल भी नहीं थक रहा था।) 

मम्मी आज मुझसे दिल खोलकर प्यार करो और मुझे भी प्यार करने दो आज आप अपने बदन का वह जलवा दिखाओ की जो मैंने आज तक नहीं देखा। तुम्हारे बदन के अंग अंग से मदन रस टपक रहा है या मदन रस पी कर मुझे त्रप्त होने दो। ( यह सब बोलते हुए राहुल की आंखों में मदहोशी जा रही थी उसके बदन में अलका के नशा का असर पूरी तरह से हो रहा था। और अलका थी की आज ना जाने कौनसी शर्मो हया ने उसे घेर रखा था।

जो कि खुद नंगी होकर भी अपने बेटे को पूरी तरह से अपने काबू में कर चुकी थी उसे अपनी बुर साौंप कर चुदाई का असीम आनंद ले चुकी थी। दोनों ने ना जाने कितनी बार चुदाई का पूरी तरह से आनंद ले चुके थे।
संभोग सुख प्राप्त करने की सारी कलाबाजियां दोनों ने बिस्तर पर खेल चुके थे, जिस के हिसाब से हल्का की भी सारी शर्म की हदें तोड़ चुकी थी लेकिन इस वक्त इस तरह के सेक्सी कपड़ों में वह अपनी शर्म की हद से निकल नहीं पा रही थी। लेकिन उसके अंग अंग में उत्तेजना का संचार पूरी तरह से हो चुका था। उत्तेजना के कारण उसकी सांसे बड़ी तीव्र गति से चल रही थी। और तेजी से सांस चलने की वजह से उसकी बड़ी बड़ी चूचियां सांस कि लय में लय मिलाते हुए बड़े ही कामुक अंदाज में ऊपर नीचे हो रही थी, जिसे देखकर राहुल चुदवासा हुए जा रहा था। वह अपनी मम्मी की बड़ी बड़ी चुचियों को ऊफान मारता हुआ देखकर बोला।)

ओह मम्मी अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है । आप बस ऐसे किसी पुतले की तरह खड़ी रहेंगेी तो काम कैसे चलेगा, इन कपड़ों में पूरी मस्ती दिखाओ, मुझे चलकर दिखाओ मम्मी, चलते समय तुम्हारी गांड किस तरह से मटकती है मैं तुम्हारी गांड की थिरकन को देखना चाहता हूं।

मैं इन कपड़ो में तुम्हें चलते हुए देखना चाहता हूं चलते समय किस तरह से तुम्हारा अंग अंग ऊफान मारता है यह देखना चाहता हूं।। आज यह तुम्हारा नया रुप देख कर मुझसे रहा नहीं जा रहा है देखो तो सही तुम्हारे इस रुप ने मेरी क्या हालत कर दी है।( इतना कहते हुए उसने अपने पजामे को थोड़ा सा नीचे सरका कर अपने टनटनाए हुए लंड को बाहर निकाल कर अपनी मां को दिखाते हुए एक बार मुठीयाकर वापस उसे पजामे मे ठुंस ़ दिया। अलका की नजर जैसे ही अपने बेटे के टंनटनाए हुए लंड पर पड़ी तो अलका की बुरमें उत्तेजना के मारे सुरसुराहट होने लगी। ) 
मम्मी मुझसे रहा नहीं जा रहा है तो आज जो मैं कहता हूं वैसा ही आप करिए। 

लेकिन बेटा मुझे इन कपड़ों में शर्म आ रही है मुझसे ठीक से खड़ा नहीं रहा जा रहा है तो मैं कैसे तुझे चलकर दिखाऊंगी। ( अलका को इन कपड़ो में चलने में दिक्कत आ रही थी उसे शर्म सी महसूस हो रही थी इसलिए वह राहुल से बोली। लेकिन राहुल अपनी मां की बात नां मानते हुए बोला।) 

मम्मी यह मत भुलो कि आज मेरा जन्मदिन है और तुमने ही मुझसे वादा की हो की मेरे जन्मदिन पर तूम मेरी हर ख्वाहिश पूरी करोगी।
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Reply
10-09-2018, 04:00 PM,
RE: Desi Sex Kahani होता है जो वो हो जाने दो
इन कपड़ों में चल कर दिखाने वाली बात पर अलका थोड़ी सी झिझक रही थी। एक तो पहली बार इस तरह के कपड़े पहनने का अनुभव ले रही थी और उस पर से इन कपड़ों में ठीक से अरे रहने में भी शर्म सी महसूस हो रही थी और राहुल उसे चलने को कह रहा था इसलिए उसे और भी ज्यादा झिझक महसूस हो रही थी। 
लेकिन उसे भी अपना वादा अच्छी तरह से याद था उसने ही राहुल से कहा था कि जन्मदिन के दिन वह उसकी सारी बात मानेगी और उसे खुश कर देगी। वह राहुल की तरफ देखी तो उसकी कामुक नजरे उसके ही बदन पर ऊपर से नीचे की तरफ घूम रही थी, जिसकी वजह से वह शर्म सी महसूस हो रही थी और यही बात उसे भी समझ में नहीं आ रही थी कि वह अपने बेटे के साथ इतना खुल जाने के बावजूद भी आज उसे इन कपड़ो में अपने बेटे के सामने शर्म क्यों महसुस रही है। लेकिन फिर वह इस बात को छोड़ कर अपने आप को सहज करने के लिए अपनी बेटे के साथ बिताए उस रंगीन पलों को याद करने लगी, जब मस्त होकर के उसका बेटा उसे नंगी करके चोदता था और वह खुद चुदवासी हो करके अपने बेटे के लंड पर सवार हो कर के चुदाई का मजा लेती थी। जल्द ही अलका को इसका असर देखने को मिला वह धीरे-धीरे सहज होने लगी अपने बेटे के साथ बिताए उन रंगीन पलों को याद कर करके अलका का मिजाज इस समय भी रंगीन होने लगा। राहुल बड़ी मस्ती के साथ पजामे के ऊपर से अपने लंड को मसलता हुआ अपनीे मां की गुदाज बदन को घूर रहा था। अलका अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर ली थी, अपने बेटे की हसरत को पूरी करने के लिए इसलिए वह अपने चेहरे पर मुस्कुराहट लाते हुए और बदन की कामुकता को दर्शाते हुए अपने गुलाबी होठ को अपने ही दांतों से कुचलते हुए राहुल की तरफ बढ़ी, मादक अदा से चलते हुए जैसे ही वह राहुल के करीब पहुंची वह उसे उसके सीने पर अपनी हथेली रखकर धक्का देते हुए बिस्तर पर गिरा दी। राहुल को अपनी मां की यह अदा कामुकता के परम शिखर तक पहुंचाने की कोई सीढ़ी के समान लग रही थी। राहुल पीठ के बल चित बिस्तर पर लेटा हुआ था और अलका एक बार उसके ऊपर झुकते हुए उसके सीने पर अपनी हथेली फीरा़ते हुए नीचे की तरफ लाई और जैसे ही उसकी हथेली जांगो के बीच उभरे हुए तंबू पर पड़ी तो उसे अपनी हथेली में कस के दबोच ली,,,,, इतना कसके उसने राहुल के तंबू को हथेली में दबोची की राहुल के मुंह से दर्द भरी कराहने की आवाज निकल गई।

आाााहहहहहहह,,,,,,, मम्मी,,,,,,,,,,, 

राहुल के कराहने की आवाज को सुनकर अलका मुस्कुराने लगी। अलका कभी आंखो में खुमार है छाने लगी थी मदहोशी उसके बदन को अपने कब्जे में ले चुकी थी। उसे अब क्या करना था यह उसे अच्छी तरह से पता था क्योंकि कुछ फिल्मों में उसमें हीरो को इस तरह से रीझााते हुए देख चुकी थी। वह सीधे खड़ी हुई और अपनी पीठ राहुल की तरफ करके अपनी नजरें पीछे घुमा कर राहुल की तरफ देखने लगी। ट्रांसपेरेंट गाउन में से राहुल को अपनी मां का बदन साफ साफ नजर आ रहा था। राहुल तो अपनी मां का खूबसूरत बदन देख कर तड़प रहा था। अपना पिछवाड़ा राहुल की तरफ करके खड़े होने पर उसने सबसे पहले अपने सांवरे हुए बाल को उसका बक्कल निकालकर खोल दी। जिससे उसके खूबसूरत काले घने रेशमी बाल उस की नंगी पीठ पर बिखर गए। जो कि यह रेशमी बाल अलका की खूबसूरती में चार चांद लगा रहे थे राहुल तो बस देखता ही रह जा रहा था। अलका ने हल्के हल्के अपनी कमर को दाएं बाएं घुमाकर के सिर्फ अपने भारी भरकम नितंबों को ही थिऱकन देते हुए अपने दोनों हाथ को अपनी कमर पर रख दी। अलका की ईस हरकत पर जिस तरह से उसकी भराव दार गांड हल्के-हल्के कंपन लेते हुए थिरकन ले रही थी उसे देखकर किसी का भी लंड पानी छोड़ दे। 
अलका धीरे-धीरे अपनी कमर को आगे पीछे हिलाते हुए
किसी के साथ संभोग कर रही हो इस तरह की प्रतीति करा रही थी। जिसे देखकर राहुल से रहा नहीं गया और उसने अपने पजामे को नीचे जाघों तक सरका कर अपने टनटनाए हुए लंडं को अपनी मुट्ठी में भरकर हीलाने लगा। अलका को अपने बेटे की हालत देख कर बड़ा मजा आ रहा था। वह अपने होठों पर कामुक मुस्कान बिखेरते हुए अपनी गांड मटकाकर आगे की तरफ बढ़ने लगी, जैसे-जैसे वह अपने कदम को आगे बढ़ा रही थी उसकी गांड वैसे वैसे थिरकती हुई राहुल के लंड पर छोरियां चला रही थी। राहुल अपनी मां की भारी-भरकम गांड को देखते हुए अपने लंड को मुठिया रहा था। धीरे-धीरे अपने हुस्न का जलवा बिखेरते हुए अलका सामने की दीवार के छोर तक पहुंच गई। राहुल ने आज तक ऐसा नजारा नहीं देखा था इसलिए उसकी हालत बेहद खराब हो जा रही थी कामोत्तेजना उसके पूरे बदन में लहू की तरह बह रही थी। अलका का भी यही हाल था जिंदगी में पहली बार उसने इस तरह का कोई काम की थी जिसको करने में उसकी पैंटी धीरे धीरे गीली होने लगी थी। उसे भी जिस तरह का कामोत्तेजना का एहसास हो रहा था ऐसा- एहसास उसने जिंदगी में कभी भी महसूस नहीं की थी। उस छोर पर पहुंचकर वह फिर से बिस्तर की तरफ आते हुए अपने पैर को
पटककर फिर से अपनी गांड को मटकाते हुए चलने लगी लेकिन इस बार सामने की तरफ से उसकी बड़ी बड़ी चूचियां, ब्रा मे कैद होने के बावजूद भी आधे से ज्यादा नजर आ रही थी, जोकि रबर की गेंद की भांति उछल रही थी। और अपनी मां की चुचियों को ऊछलता हुआ देखकर राहुल की धड़कने जोर-जोर से उछाल मारते हुए चल रही थी। अलका को भी अपने खूबसूरत बदन पर गर्व हो रहा था । आगे राहुल की तरफ बढ़ते हुए अलका रह रहकर अपने दोनों हथेलियों से अपनी चुचियों को दबा दे रही थी जिससे राहुल की हालत और भी ज्यादा खराब हो रही थी। राहुल तो अपनी मां की मस्त चाल को देखते हुए अपने लंड को जोर-जोर से मुठिया रहा था। उत्तेजना के मारे उसका चेहरा भी लाल लाल हो गया था ट्यूबलाइट के दूधिया रोशनी में अलका का खूबसूरत गोरा बदन और भी ज्यादा चमक रहा था।
अलका ने दिया आज तक कर ली थी कि जन्मदिन के दिन वह अपने बेटे को किसी भी तरह से नाराज नहीं करेगी और उसे हर तरह का सुख देने की पूरी कोशिश करेंगी। इसलिए वह धीरे-धीरे और भी ज्यादा खोलना शुरू कर दी थी क्योंकि जैसे ही वह अपने बेटे के करीब बिस्तर तक पहुंची उसने अपनी हथेली को बड़े ही उन्मादक अंदाज में अपने पेट से होते हुए नीचे की तरफ जांघों के बीच में ले जाकर पैंटी के ऊपर से ही अपनी रसीली पनीयाई बुर को मसलनें लगी। यह देखकर राहुल ठंडी आह भरते हुए जोर जोर से अपने लंड को मुठीयाने लगा। 
अलका को अपने बेटे को इस तरह से तड़पाने में अब मजा आने लगा था। अभी भी वह पैंटी के ऊपर से ही अपने बुर कों सहलाए जा रही थी और राहुल को तड़पता देख अपने होठों पर कामुक मुस्कान बिखेरे जा रही थी। इससे पहले अलका ने इतनी कामुक हरकत कभी भी नहीं की। ट्रांसपेरेंट गाउन और नई स्टाइलिश ब्रा और पैंटी में अलका कयामत लग रही थी और उस पर सितम ढाने का काम उसकी कामुक हरकतें कर रही थी। राहुल की मूठ्टी में उसका खड़ा लंड और भी ज्यादा भयानक लगने लगा था जिसे देखकर अलका की बुर पानी पानी हुए जा रही थी। दोनों के बीच किसी भी प्रकार की वार्तालाप नहीं हो पा रही थी बस दोनों एक दूसरे के कामोंत्तेजना को देखकर कामोतेजना के परम शिखर पर विराज रहे थे। राहुल की धड़कनें बढ़ाते हुए अलका ने अपनी हथेली को अपनी पैंटी में ही डाल कर बुर के गुलाबी पत्तियों को मसलने लगी, जोकि जालीदार पैंटी में से साफ साफ राहुल को सब कुछ नजर आ रहा था। अलका ने पूरे कमरे में चक्कर लगा कर यह साबित कर दी की वह भी रेम्प वॉक पर बहुत ह़ी आसानी से जलवा बिखेरते हुए सबके दिलों पर राज कर सकती है। पूरे कमरे में इन कपड़ो में चल करके उसने राहुल को किया हुआ वादा निभा दी थी । राहुल की यही ख्वाहिश थी उसे इस तरह से चलते हुए देखने की जो कि उसकी यही ख्वाहिश उसकी कामोत्तेजना को और ज्यादा भड़का चुकी थी। अलका अपनी ही कामुक हरकतों से खुद ही काम ज्वर में तड़पने लगी थी इसलिए वह अभी भी जोर जोर से अपनी बुर की गुलाबी पत्तियों को अपनी उंगलियों में फंसाकर रगड़ रही थी। ऊसके मुंह से गरम सिसकारी फुटने लगी थी। 

सससससससहहहहहहह,,,,,,,, राहुल,,,,,,, आहहहहहहहह,,,,,,, ( बुर को जोर जोर से मसलते हुए) मेरी बुर में आग लगी हुई है मुझसे अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है कुछ कर,,, सससससहहहहहहह,,,,,,, आहहहहहहहह,,,,,,,,, 


मम्मी मेरा भी तो यही हाल है मेरा लंड देखो ( लंड को मुठीयाते हुए ऊसकी तरफ आंखो से ईसारा करते हुए) किस तरह से तड़प के टनटनाकर खड़ा है। सससससससहहहहहह,,,,, मम्मी ने नहीं आज तक तुम्हारी जैसी खूबसूरत औरत नहीं देखा तुम्हारे सामने तो फिल्मों की हीरोइनें भी पानी भरेंगी। ( राहुल गरम आहे लेते हुए बोला। )

अपने बेटे के खड़े लंड को देख कर अलका की भी हालत खराब हुए जा रही थी। उसकी बुर पानी छोड़ते हुए पेंटी को पूरी तरह से गीली कर चुकी थी। राहुल की भी नजर अपनी मां की जांघों के बीच ही टिकी हुई थी।
वह अपनी मां की पैंटी को गीली होता हुआ देख रहा था। उसकी मां लगातार अपनी बुर को मसल रही थी जिससे वह और भी ज्यादा चुदवासी हुई जा रही थी।
उसे शायद अपने जिस्म की प्यास बर्दाश्त नहीं हो रही थी वह जल्द से जल्द अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में अंदर जाता हुआ देखना चाहती थी लेकिन अभी राहुल अपनी मां को और भी ज्यादा चुदवासी करना चाहता था इसलिए जल्दबाजी नहीं दिखा रहा था जबकि उसका भी मन अपनी मां को चोदने का खूब कर रहा था। 
अलका से अपनी बुर की गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही थी इसलिए वह लगातार अपनी बुर को मसलते हुए सिसकारी लेते हुए अपने बेटे से बोली।

सससहहहहहहह,,,,,,, राहुल कुछ कर अब बर्दास्त कर पाना बड़ा मुशकिल हुए जा रहा है।

( अपनी मां की हालत को देखकर राहुल भी समझ गया था कि उसकी मां पूरी तरह से गर्म हो चुकी है इसलिए वह बिस्तर पर से उठा और घुटनों के बल बैठ गया घुटनों के बल बैठते ही सबसे पहले उसने अपनी हथेली को अपनी मां की पेंटी पर रखते हुए उसे हल्के हल्के सहलाने लगा।

राहुल का इस तरह से अपनी मां की ब** को पेंटी के ऊपर से ही सहलाना आग में घी का काम कर रहा था अपने बेटे की इस हरकत पर अलका के कामोत्तेजना और ज्यादा बढ़ गई और उसने खुद ही अपनी दोनों बड़ी बड़ी चुचियों को अपने हथेली में भरकर दबाने लगी। 

ससससससहहहहहहह,,,,,,,,,, आाहहहहहहहहहह बेटा तू तो और ज्यादा मेरी हालत खराब कर रहा है अब तो उंगली से नहीं बस तेरे लंड से ही मेरी बुर की प्यास बुझेगी। 

मम्मी तुम तो बहुत गीली हो गई हो। तुम्हारी बुर बहुत ज्यादा ही पानी छोड़ रही है।( इतना कहते हुए उसने अपनी हथेली को पेंटी के अंदर डाल कर अपनी मां की बुर टटोलने लगा जो की बहुत गीली हो चुकी थी।)

सससहहहहहहह,,,,,,,,, तभी तो कह रही हूं रे कुछ कर मुझसे मेरी बुर की तड़प बर्दाश्त नहीं हो रही है।
( अपनी मां की पनियाई बुर को देखकर राहुल की भी हालत खराब होने लगी उसके लंड ने भी ठुनकी मारना शुरु कर दिया था।,,,, ईसलिए वह अपनी मां की पैंटी के दोनों छोर को पकड़कर धीरे-धीरे नीचे की तरफ सिर पानी लगा आज उसे भी गजब की कामोत्तेजना का अनुभव हो रहा था। क्योंकि पहली बार वह भी इस तरह की स्टाइलिस पेंटी को अपने हाथों से अपनी मां के बदन पर से उतार रहा था। अगले ही पल उसने अपनी मां की पैंटी को सरका कर उसकी जांघो तक कर दिया। पानी से लबालब अपनी मां की दूरी देख कर उसका भी दिल बाग-बाग हो गया। अलका प्यासी नजरों से अपने बेटे की हरकत को देख रही थी उसे लग रहा था कि उसका बेटा उसकी प्यास बुझाएगा, वह सोच ही रही थी कि तभी राहुल ने अपने दोनों हाथों से उसकी कमर पकड़ कर घुमा दिया, जिससे उसकी भरावदार गांड ठीक उसकी आंखों के सामने आ गई अलका को समझ में नहीं आ रहा था कि यह राहुल कौन सी हरकत करना चाहता है। राहुल ने धीरे से अपनी एक हथेली को अपनी मां की पीठ पर रखकर उसे दबाव देते हुए उसे झुकने का इशारा किया। उसकी मां को समझते देर नहीं लगेगी राहुल क्या कहना चाहता है और वह तुरंत नीचे की तरफ झुक गई। इस तरह से नीचे झुकने से उसकी बड़ी बड़ी गांड ऊचक के राहुल की आंखों के सामने नाच रही थी। इस तरह से अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को देखकर राहुल का गला उत्तेजना के मारे सूखने लगा
राहुल की सांसे बड़ी ही तीव्र गति से चलने लगी थी उसकी आंखों के सामने अलका की नंगी गांड किसी थाली में सजाए हुए पकवान की तरह लग रही थी जिसे देखकर राहुल के मुंह में पानी आ रहा था। पैंटी में लगी पतली सी डोरी अलका की भरावदार गांड की गहरी लकीर में कहीं खो गई थी जोकि दिखाई नहीं दे रही थी पीछे से देखने पर ऐसा ही लग रहा था की वह पीछे से पूरी तरह से नंगी है लेकिन राहुल ने गांड की फांको को दोनों हाथों से पकड़कर फैलाते हुए उसमें से पेंटिं की पतली डोरी को खींचकर फूली हुई बुर की दूसरी मुहाने पर कर दिया जिससे उसकी नंगी बुर एकदम मुंह के सामने ही नजर आने लगी। अपनी मां की फूली हुई बुर देखकर राहुल से रहा नहीं गया और उसने ऊंगलियो से
हल्के से फुली हुई बुर की गुलाबी पत्तियों को धीरे धीरे रगड़ना शुरु कर दिया। राहुल की हरकत की वजह से अलका की उत्तेजना पल पल बढ़ती जा रही थी वह गहरी गहरी सांस लेते हुए पीछे नज़र घुमा कर अपने बेटे की हरकत को देखते हुए और भी ज्यादा चुदवासी हुई जा रही थी। राहुल कुछ देर तक हल्के हल्के यूं ही अपनी अंगुलियों से बुर की गुलाबी पति को रगड़ता रहा जिससे कि उन दोनों की उत्तेजना परम शिखर पर पहुंच गई दोनों गरम गरम सिसकारी लेते हुए मजे ले रहे थे। लेकिन प्यास दोनों की बुझने की वजाय और भी ज्यादा बढ़ती जा रही थी। दोनों इस तरह की कामक्रीडा से पूरी तरह से आनंद ले रहे थे लेकिन तड़प भी ज्यादा रहे थे। राहुल से ज्यादा तो अलका तड़प रही थी इसलिए राहुल अपनी मां की तड़प को थोड़ा कम करने के लिए। अपनी मां की जांघों के बीच अपना मुंह लाया और अपने तपते हुए होठ को अपनी मां की गरम बुर के मुहाने पर रख कर जिभ से चाटना शुरु कर दिया। जैसे ही अलका ने अपने बेटे की जीभ को अपनी बुर पर महसूस की उसके मुंह से गर्म सिसकारी छूट गई।

सससससहहहहहहह,,,,,,, आाहहहहहहहहहह,,,,,,, राहुल,,,,, 

अपनी मां की गरम सिसकारी को सुनकर राहुल और भी ज्यादा बेताब हो करके जल्दी-जल्दी जीभ से बूर की गुलाबी पत्तियों को चाटने लगा। अलका की बुर से और भी ज्यादा पानी टपकने लगा। राहुल अपनी मां की बुर चाटकर मस्त हुए जा रहा था और अलका सिसकारी लेते हुए अपनी तड़प को और ज्यादा बढ़ा रही थी।
ससससहहहहहह,,,, आाहहहहहहहहहह,,,,,,,, ऊफ्फ्फ्फ,,,,,,,,,,, ओहहहहहह राहुल,,,,,,,, 


अलका का इस तरह सिसकारी लेते हुए सिसकना राहुल की बेचैनी और उत्तेजना दोनों को बढ़ा रहा था। अलका की बुर पर राहुल की जीभ एैसे चल रही थी जैसे किसी आइस क्रीम के कप पर चल रही हो। दोनों को बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी राहुल रह-रहकर बुर को चाटते हुए एक हाथ से अपने लंड को भी मुठीया ले रहा था। राहुल की ईच्छा हो रही थी कि उसकी मां उसके लंड को मुंह मे लेकर चुसे। इसलिए उसने ऐसी हरकत कर डाला के उसके बारे में अलका कभी अंदाजा भी नहीं लगा सकती थी। राहुल अपनी मां की बुर को चाटते चाटते धीरे से अपने दोनों हाथों से अपनी ृ मां की चिकनी जाँघो को पकड़कर धीरे से फैलाया और अलका कुछ समझ पाती उससे पहले ही वह अपने आधी से भी ज्यादा शरीर को जांघोे के बीच से निकाल कर आगे कर दिया। ऐसा करते ही राहुल का टनटनाया हुआ लंड ठीक अलका के मुंह के सामने आ गया। अलका की नजर जैसे ही राहुल के टनटनाए हुए लंड 
पर गई, अपनो बेटे की ईस हरकत पर ऊसे प्रसन्नता के साथ नाज होने लगा। ईतने पर ऊसे समझने की ओर राहुल को समझाने की जरुरत नही थी। अलका समध गई थी की ऊसे अब क्या करना है ईसलिए वह बिना एकपल गंवाए बिना राहुल के टनटनाए हुए लंड को पकड़ के सीधे अपने मुंह मे भरकर चुसना शुरु कर दी।
दोनों को मजा तो आ ही रहा था लेकिन राहुल की हरकत की वजह से दोनों का मजा अब दुगना हो गया था। राहुल को तो ईतना मजा आ रहा था की उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि उसका पूरा शरीर हवा में झूल रहा हो। अलका को तो ऊसकी मनपसंद खिलौना मिल गया था, जिससे वह जी भरके खेल रही थी। 
दोनो एक दुसरे के अंगो से खेलते हुए ऊसे चुम चाट रहे थै। अलका मदमस्त होते हुए एकदम उन्मादित होकर अपनी भरावदार गांड को अपने बेटे के मुंह पर गोल-गोल घुमाते हुए रगड़ भी रही थी। राहुल भी रहरहकर 
अपनी कमर को हिलाते हुए अपनी मां के मुंह को ही चोद रहा था। कुछ देर तक दोनों अपने अपने अंगो को एक-दूसरे को चुसाते रहे, थोड़ी ही देर बाद दोनो का बदन ऊत्तेजना के परमशिखर को छुते हुए अकड़ने लगा और दोनो ही एकदुसरे के मुंह मे ही झड़ गए।

अलका और राहुल दोनों एक दूसरे के मुंह में झड़ चुके थे दोनों बिना किसी भी देश के एक दूसरे का मदन रस जीभ से चाटते हुए गले के अंदर गटक रहे थे। राहुल का यह तरीका अलका को बेहद पसंद आया था उसने कभी सोची भी नहीं था कि इस तरह से आनंद लेते हुए वह अपने बेटे के मुंह में झडे़गी भी और अपने बेटे को झाड़ भी देगी। 
जन्मदिन के तोहफे के रुप में अलका के द्वारा लंड चुसाई का दिया हुआ तोहफा राहुल को बेहद पसंद आया था। जन्मदिन के रात की शुरुआत बेहद ही उम्दा तरीके से हुई थी दोनों संतुष्टि की प्राप्ति करते हुए संखलित हुए थे। अपनी बुर के मदन रस का फुवारा छोड़ने के बाद अलका सीधी खड़ी हुई उसकी सांसे अभी भी तेज चल रही थी और सांसों के तेज चलने की वजह से उसकी बड़ी बड़ी चूचियां ऊपर नीचे हो रही थी। जिसे देखकर राहुल का मन मचलने लगा। राहुल भी झड़ चुका था लेकिन झड़ने के बावजूद भी उसका लंड पूरी तरह से टाइट ही नजर आ रहा था। उसमें से जरा भी तनाव नहीं गया था। अलका अपने बेटे के खड़े लंड को देखते हुए बिस्तर पर धम्म से बैठ गई, उसकी पैंटी अभी भी उसकी जांगों में अटकी हुई थी। बुर पूरी तरह से पानी पानी हो चुकी थी उसमें से रीस रहा मदन रस उसकी जांघो को भी भीगा रहा था। अलका की गहरी चल रही सांसे राहुल के कानों में साफ़ साफ सुनाई दे रही थी जो कि इस बात का सबूत थी कि अपनी बुर चटवाते चटवाते इसे बेहद आनंद की प्राप्ति हुई थी।
अलका कभी अपने बेटे की तरफ तो कभी उसके खड़े लंड की तरफ देखते हुए मुस्कुरा रही थी और मुस्कुराते हुए बोली।

बेटा एक साथ मजा लेने का जो तेरा यह तरीका था यह मुझे बेहद पसंद आया मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि हम दोनों कुछ इस तरह का करेंगे,जिस तरह से तुने मुझे इस अवस्था में लाकर मेरी बुर को चाटते हुए मेरा पानी निकाला है मैं तो तेरे इस तरीके की कायल हो गई हूं। लेकिन एक बात समझ लेना कि अभी मेरी प्यास बुझी नहीं है भले तू ने मेरी बुर से पानी निकाल दिया है लेकिन जब तक मैं तेरा लंड अपनी बुर में डलवा कर चुदवाऊंगी नहीं तब तक मेरी प्यास नहीं बुझेगी।
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10-09-2018, 04:00 PM,
RE: Desi Sex Kahani होता है जो वो हो जाने दो
( अपनी मां के मुंह से ईस तरह की खुली बातें सुनकर राहुल का पूरा बदन उत्तेजना के मारे झनझना गया। अलका आप पूरी तरह से खुल चुकी थी लेकिन इस समय उसकी ऐसी नंगी बातें सुनकर तो ऐसा ही लगने लगा था कि वह पहले जैसा व्यवहार करती थी उससे भी ज्यादा खुल चुकी थी। शायद जन्मदिन के इस रात को वह राहुल को पूरी तरह से खुश कर देना चाहती थी।
राहुल भी अपनी मां कोई तरह से खुला हुआ देखकर उसका व्यवहार देखकर और भी ज्यादा कामोत्तेजित हो रहा था वह अपनी मां की बात सुनकर अपनी बाहों को उसके गले में डाल कर अपनी तरफ खींचते हुए प्यार से बोला।)

मेरी भी तो अभी कहां पुरी प्यास बुझी है अलका मेरी जान। 
( अपने बेटे के मुंह से अपना नाम सुनकर अलका आश्चर्यचकित हो गई लेकिन उसके मुंह से अपने लिए यह शब्द सुनकर उसे प्रसन्नता भी हो रही थी इसलिए वह मुस्कुराते हुए बोली।)

क्या बात है आज तेरे मुंह से मेरा नाम सुनकर मुझे अजीब तो लग रहा है लेकिन बड़ी खुशी भी हो रही है।
तेरी यह बात सुनकर मुझे आज तेरे पापा की याद आ गई वह भी मुझसे प्यार करते समय मेरा नाम लेकर ही मुझे बुलाते थे तो मुझे बेहद मजा आता था। 


पता नहीं मम्मी ऐसा क्यों हुआ लेकिन आज उत्तेजना के मारे और तुम्हारा खूबसूरत बदन देख कर मुझे मेरे मन पर काबू नहीं रहा और मेरे दिल की बात मेरे मुंह पर आ गई। ( राहुल सफाई देते हुए बोला।)

कोई बात नहीं बेटा मुझे भी अच्छा लगा,( अपने बेटे के खड़े लंड को देखते हुए) लेकिन बेटा तेरा एक बार झड़ने के बावजूद भी जरा सा भी ढीला नहीं हुआ है देख तो सही कैसे मुंह उठाएं खड़ा है। 

यह सब तुम्हारे रूप का ही जादू है तुम्हारा यह खूबसूरत गठीला बदन मेरे लंड को जरा सा भी ढीला नही पड़ने देता।( राहुल अपने लंड को अपनी मुट्ठी में भरकर मुठीयाते हुए बोला।) 

अलका अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर गदगद हुए जा रही थी। अपने बेटे को लंट मुठीयाते हुए देख कर उससे भी रहा नहीं गया और उसने भी अपनी हथेली को अपनी जांघों के बीच ले जाकर अपनी पानी से तरबतर बुर को मैं मसलने लगी। राहुल यह देख कर एकदम से उत्तेजित होने लगा और अपना हाथ आगे बढ़ा कर ब्रा के ऊपर से ही अपनी मां की बड़ी बड़ी चुचियों को मसलने लगा।

सससससहहहहहहह,,,,,,,,, क्या कर रहा है रे तुने तो मुझे फिर से गर्म करना शुरु कर दिया,,,,,,,आाहहहहहहहहहह,,,,,,,, राहुल,,,,,,,,, ऊम्म्म्म्म्म्,,,,,,,,,, और जोर से दबा,,,,,,,, ( अलका अपनी बुर को मसलते हुए बोली। राहुल अपनी मां की गरम सिसकारी को सुनकर और ज्यादा गर्म होने लगा और अपनी मां की चुचियों को जोर-जोर से दबाते हुए बोला।) 

ओहहहह मम्मी तुम्हारी इन्हें दोषी होना तो मुझे तुम्हारा दीवाना बना रखा है कसम से मैंने आज तक तुम्हारी जैसी बड़ी बड़ी गोल गोल चूचियां किसी औरत के पास नहीं देखा। 
( अपने बेटे की यह बात सुनते ही अलका चुटकी लेते हुए बोली।)

तूने किसी और औरत को भी नंगीं देखा है क्या? 

नहीं मम्मी मैंने तुम्हारे सिवा किसी और औरत को नंगी नहीं देखा।( चूचियों को मसलते हुए बोला)

फिर तुझे कैसे मालूम कि मेरी चूचियां दूसरी औरतों से ज्यादा बड़ी और गोल है। ( अलका मुस्कुराते हुए अपने बेटे की चुटकी लेने के लिए यह बोल रही थी क्योंकि उसे विश्वास था कि उसका बेटा उसके सिवा आज तक किसी गैर औरत को ना तो कभी नंगी देखा है और ना ही उनके साथ सेक्स किया है। राहुल अपनी मां के सवाल का जवाब देते हुए बोला।) 

अरे मम्मी मैंने कभी किसी गैर औरत को नंगी तो नहीं देखा लेकिन उनकी तरफ देखकर, उनकी छातियों को देखकर अंदाजा लगा लेता हुं। 

तब तो तू मुझे भी पहले जब भी देखता होगा तो मेरी छातियों की तरफ देखकर यही अंदाजा लगाता होगा कि मेरी चूचियां कितनी बड़ी-बड़ी है, हैं ना। ( अलका अभी भी अपनी हथेली से अपनी बुर को मसल रही थी।)

नहीं मम्मी ऐसा बिल्कुल भी नहीं है हां यह सच है कि अब तुम्हारे और मेरे बीच एक पति पत्नी के बीच जो रिश्ता होता है वही रिश्ता है लेकिन यह रिश्ता बनने से पहले मैंने कभी भी आपको इस नजरिए से नहीं देखा।

अपने बेटे की बात को सुनकर अलका मुस्कुराने लगी उसे अपने बेटे पर पूरा विश्वास था इस तरह के रिश्ते की शुरुआत उसके साथ ही हुई थी। उसे अपने बेटे पर पक्का विश्वास था कि वह किसी और से शारीरिक संबंध नहीं बनाया था। वह अपने बेटे से इस तरह की बातें सिर्फ मजाक के तौर पर कर रही थी लेकिन जब की हकीकत कुछ और थी । अलका को तो यही लगता था कि उसका बेटा सिर्फ उसके प्रति आकर्षित है उसके ही बदन का दीवाना है, जबकि राहुल के संबंध अलका के साथ-साथ तो और भी औरतों के साथ थे जिनके साथ वह संभोग सुख का आनंद ले चुका था लेकिन इस बात को राहुल ने कभी भी अपनी मां के सामने जाहिर नहीं होने दिया। अलका लेकिन अपने बेटे के मर्दाना ताकत से पूरी तरह से वाकिफ थी उसे पक्का यकीन था कि अगर वह किसी भी औरत या लड़की के साथ शारीरिक संबंध बनाएगा तो वह उसकी दीवानी हो जाएगी, जैसे कि वह खुद अपने बेटे के लंड की दीवानी हो चुकी थी।
अलका को अपने बेटे की मासूमियत पर प्यार आ रहा था और वह अपने बुर को अपनी हथेली से लते हुए धीरे-धीरे गरम हो रही थी। साथ ही राहुल खुद अपनी मां की चुचियों को दबा दबा कर उसे और ज्यादा चुदवासी कर रहा था। 
दोनों पलंग पर बैठे हुए थे दोनों के पेर फर्श पर टिके हुए थे। अलका की पैंटी उसकी जांघों में अटकी हुई थी और राहुल भी अपने पजामे को घुटनों तक सरका दिया था दोनों अपने अपने अंगो के साथ साथ एक दूसरे के अंगों को देखकर ओर सहलाकर आनंद ले रहे थे। 
एक बार झड़ने के बाद दोनों धीरे धीरेे एक बार फिर से उत्तेजित होते हुए चुदवासे हुए जा रहे थे अलका अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में डलवाने के लिए तड़प रही थी और राहुल खुद अपनी मां को चोदने के लिए तड़प रहा था। अलका की बुर में खुजली होने लगी थी वह अपनी बुर को मसलते हुए सिसकारी भी ले रही थी।
अपनी मां की गरम सिसकारी की आवाज सुनकर राहुल का लंड और भी ज्यादा मोटा तगड़ा होने लगा था। 
अपने बेटे के लंड को देखकर अलका से रहा नहीं गया और उसने हाथ आगे बढ़ा कर अपने बेटे के लंड को अपनी हथेली में भर ली और ऊसे मुठीयाते हुए बोली।

राहुल तेरा लंड तो और भी ज्यादा मोटा तगड़ा लग रहा है ऐसा लग रहा है कि जैसे गधे का लंड हो। ( अपनी मां की बात सुनकर राहुल को हंसी आ गई और वह हंसते हुए बोला।)

तुम देखी हो क्या मम्मी गधे के लंड को! 
( अपनी बेटे के इस सवाल पर वह जवाब देने के बजाय मंद-मंद मुस्कुराने लगी। अपनी मां को इस तरह से मुस्कुराते हुए देखकर राहुल समझ गया कि ऊसकी मां जवाब देना नहीं चाहती। लेकिन राहुल कोतूहल वश अपनी मां से ईस सवाल का जवाब सुनना चाहता था। इसलिए फिर से जोर देता हुआ अपनी मां से यही सवाल दोहराया ओर ईस बार उसकी मां इंकार न कर सकी और जवाब देते हुए बोली। 

हां देखी हूं( शरमाते हुए) 

कहां मम्मी और कैसे? ( चुचीयों को जोर से मसलते हुए बोला।)

मार्केट से आते समय वही बीच रास्ते में देखी थी। 

क्या देखी थी मम्मी? ( राहुल जानबुझकर पुछे जा रहा था। वह अपनी मां के मुंह से सबकुछ सुनना चाहता था।) 

वही जो तु पुछ रहा है। 

अपने मुंह से बोलो ना मम्मी। 
( ईस बार अलका, राहुल को तिरछी नजर से कनखियो मे देखते हुए बोली।) 


मैं तेरी चलाकी खूब समझती हुं सब कुछ मेरे मुंह से ऊगलवाना चाहता है।

जब सब कुछ जानती हो तो बोलो ना मम्मी मुझे तुम्हारे मुंह से सुनना है।( वह जोर जोर से चूची को मसलते हुए बोला।) 

गधे का लंड लटकते हुए देखी थी। ( उत्तेजना में जोर से अपनी बुरको मसलते हुए बोली।) 

कैसा लगा था मम्मी आपको जब आप पहली बार गधे के लंड को देख लेती तो।

मैं उस समय पहली बार तेरे पापा से शादी करके यहां आई थी और अकेले ही मार्केट में सब्जी खरीदने के लिए गई। जब सब्जी लेकर वापस लौट रही थी तो रास्ते में गधे के झुंड को देखी जिनमें से एक गधे ने अपना लंड बाहर निकाल कर नीचे तक लटका रखा था। उसके लंबे तगड़े मोटे लंड को देखकर मेरी बुर में सुरसुराहट होने लगी। ( इतना कहते हुए वह खूब ज्यादा कामोत्तेजित हो रही थी और साथ ही राहुल भी और भी ज्यादा चुदवासा हुए जा रहा था।) क्योंकि नई-नई शादी हुई थी इसलिए तेरे पापा रोज मेरी चुदाई करते थे। इसलिए मेरा ध्यान उस गधे के लंड पर कुछ ज्यादा ही जा रहा था। बस इससे ज्यादा मैंने कभी भी ऊस बारे में नहीं सोची और ऊससे ज्यादा और मुझसे कुछ पूछना भी मत।


राहुल अपनी मां के मुंह से गधे के लंड के बारे में सुनकर और ज्यादा चुदवासा हो गया था उससे अब बर्दाश्त कर पाना मुश्किल हुए जा रहा था। अलका भी पुरानी बातों को छेंड़कर अपनी बुर की गर्मी और खुजली दोनों को बढ़ा ली थी उसे अब वाकई मे लंबे मोटे लंड की जरूरत हो रही थी। इसलिए वह अपनी बुर को मसलते हुए राहुल की तरफ बड़ी ही खुमारी नजरों से देखने लगी। अलका का इस तरह से उन्माद भरी नजरों से देखना राहुल से बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने झट से अपने होठों को अपनी मां की गुलाबी होठों से भिड़ा दिया। जैसे ही होंठ से होंठ टकराए दोनों के सब्र का बांध टूट गया। दोनों कामोत्तेजित होते हुए एक दूसरे के होठो को चूसना शुरू कर दिए। अलका ही पहल करते हुए अपने बेटे के होठो को अपने मुंह में भरकर चूसती हुई उसने धीरे धीरे पलंग पर लेटने लगी और साथ ही अपने बेटे को अपने ऊपर लिटाने लगी ।
अलका से अब रहा नहीं जा रहा था वह जल्द से जल्द अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में डलवा लेना चाहती थी इसलिए खुद ही अपने हाथों से अपनी पैंटी को नीचे सरकाते हुए घुटनों से नीचे कर दी, और पैरों का सहारा लेते हुए उसे अपने पैर से निकाल फेंकी। उसने अपने बेटे को अपने ऊपर लिटा ली थी । वह धीरे से अपनी जांघो को फैला दी जिससे राहुल उसकी मांसल जांघों के बीच आ गया, इस बार अलका ने बड़ी फुर्ती दिखाई थी राहुल कुछ समझ पाता इससे पहले ही उसने एक हाथ नीचे लै जा कर के अपने बेटे के लंड को पकड़ ली
और लंड के गरम सुपाड़े को अपनी फुली हुई तपति बुर के मुहाने पर रख दी, राहुल को जैसे ही यह महसूस हुआ कि उसका टनटनाया हुआ लंड इसकी मां की गुलाबी बुर के छेद पर टिकी हुई है तो उसने तुरंत अपनी कमर को हरकत मे लाया और कमर को नीचे की तरफ दबाते हुए लंड के सुपाड़े को अपनी मां की बुर में उतार दिया।और जेसे ही लंड का मोटा सुपाड़ा अलका की बुर मे घुसा वैसै ही अलका के मुंह से कराहने की आवाज निकल गई।

आाहहहहहहहहहह,,,,,,,,, ऊईईईईईईईई,,, म्मां,,,,,,, आज सच में तेरा लंड और भी ज्यादा मोटा लग रहा है।( तभी राहुल ने हल्के से एक और धक्का लगाया।)
आाहहहहहहहहहह,,,,,, दर्द हो रहा है रे,,,,,,,,,सससससहहहहहहह,,,,,,,, राहुल,,,,, ओहहहहहहह,,,,,,, म्मांआआआ,,,,,,,,,, ( अलका दर्द से कराह रही थी, अलका की कराहने की आवाज सुनकर राहुल एक ओर जोरदार धक्का लगाया और अपने पूरे समुचे लंड को अपनी मां की बुर में पेलते हुए बोला।)

मम्मी दर्द मे हीं तो मजा है ।दर्द करेगा तभी तो मजा भी ज्यादा आएगा।,,,,, अब देखना में तुम्हारी कैसे चुदाई करता हूं। तुम भी याद रखोगी।

देख तो रही हूं कुछ ज्यादा ही दर्द कर रहा है आज क्या खाकर आया है कहीं ऐसा तो नहीं अपने लंड पर तेल की मालिश करके आया है। 

मुझे मालिश की जरूरत नहीं पड़ती ऐसे ही मेरा लंड बहुत ज्यादा तगड़ा है। ( इतना कहने के साथ ही राहुल अपने लंड को अंदर बाहर करते हुए अपनी मां को चोदना शुरू कर दिया। )

सससससहहहहहहह,,,,,,, ऊहहहहहहह,,,,,,, ससससससहहहहहहहहह,,,,,,, राहुल,,,,,,,,, आाहहहहहहहहहह,,,,,,,,,, तू सच कह रहा है दर्द तो कर रहा है लेकिन बचा भी उतना ही मिल रहा है बस ऐसे ही मुझे चोदता रह,,,,,, आाहहहहहहहहहह,,,,,,,, बड़ा गर्म लंड है तेरा,,,,,,,,, 

अलंका सिसकारी लेते हुए अपने बेटे को ऊकसाते हुए बोल रही थी। राहुल भी अपने मां की बात सुनकर बड़े जोश के साथ अपने लंड को बुर के अंदर बाहर कर रहा था। दोनों चुदाई का मजा लेते हुए एक दूसरे के बदन को सहला रहे थे । अलका अपनी दोनों हथेलियों को अपने बेटे की पीठ पर रखकर ऊपर से नीचे तक सहला रही थी। रह-रहकर अलका के बदन मैं काम उत्तेजना का प्रसार कुछ ज्यादा ही हो जा रहा था जिसके कारण वह अपनी दोनों हथेलियों को अपने बेटे के नितंबों पर रखकर उसे ज़ोर से दबोच ले रहीे थी, और अपनी मां की इस हरकत पर राहुल की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ जाती थी ।और वह लगातार दो चार जबरदस्त धक्के अपनी मां की बुर में लगा देता जिससे अलका की चीख सी निकल जाती थी। अलका को बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी आज जन्मदिन के अवसर पर वह अपने बेटे को पूरी तरह से खुश करने के चक्कर में खुद भी बहुत ही ज्यादा आनंद की प्राप्ति करते हुए अपने बेटे से चुदाई का भरपूर आनंद ले रही थी। 
फच्च फच्च की मधुर आवाज लंड और बुर के संगम से आ रही थी जो कि पूरे कमरे में किसी संगीत की तरह बज रही थी। जब भी राहुल जोरदार प्रहार करते हुए अपने मां की बुर में अपना पूरा लंड पेलता तो उसकी जांघे अपनी मां की मांसल जांघों से टकराकर एक अजीब सी ठाप पैदा कर रही थी, वह ठाप एैसी लग रही थी जैसे कोई कुशल तबला वादक तबले पर अपनी उंगलियों की करामत दिखा रहा हो। पूरा कमरा अलका की उन्मादक सांसो की आवाज से गुंज रहा था। राहुल से यह पल बिना पाना बड़ा मुश्किल हो रहा था क्योंकि पहले की अपेक्षा आज इस अवसर पर उसकी उत्तेजना इतनी ज्यादा प्रबल हो चुकी थी कि उसकी सांसे बड़ी तीव्र गति से चल रही थी वह अपनी सुध-बुध खो चुका था मदहोशी उसके पूरे बदन पर छा चुकी थी। यही हाल अलका का भी हो रहा था, दोनों के ऊपर कामवासना पूरी तरह से छा चुका था, दोनों के बदन और दिमाग पर काम वासना पूरी तरह से अपना कब्जा जमा चुका था। सही क्या है गलत क्या है यह सब सोचने का समय और वक्त दोनों ने ना जाने कबसे गंवा चुके थे। 
राहुल प्रहार पर प्रहार किए जा रहा था और अलका अपने बेटे के प्रहार का जवाब देते हुए खुद अपनी भारी भरकम गांड को ऊपर की तरफ उचका कर दे रही थी।
अलका अपनी हथेलियों को जोर-जोर से राहुल की पीठ पर रगड़ते हुए उसकी नितंबों को दबोच ले रही थी।
चुदाई का नशा अलका की आंखों में पूरी तरह से जा चुका था वह मदहोश हो चुकी थी। आनंद की अनुभूति करते हुए वह आंखों को मुंद कर चुदाई का मजा ले रही थी। राहुल अपनी मां के ऊपर पूरी तरह से झुका हुआ था वह पागलों की तरह अपनी मां की गर्दन पर चुंबनों की बौछार करते हुए ब्रा के ऊपर से ही चुचियों को दबाए जा रहा था। और अलका थी कि राहुल की इस हरकत से और ज्यादा कामोत्तेजित होते हुए सिसकारी लिए जा रही थी।

ससससहहहहहह,,,,,,, सससससहहहहहहह,,,,,,, ओहहहहह,,,,,,, राहुल,,,,,,,,,,, तु तो मुझे पूरी तरह से पागल किए जा रहा है ना जाने मेरे बदन मे में कैसी हलचल मची हुई है मुझ से बर्दाश्त नहीं हो रहा है ऐसे ही मुझे चोदता रहै और जोर जोर से धक्के लगा। आाहहहहहहहह,,,,,,,, राहुल,,,,,,, (इतना कहते हुए अलका ने अपनी टांगो को अपने बेटे की कब्र में फंसा ली)
राहुल तो अपनी मां की बात सुनकर पागल सा हो गया था और लगातार जोर जोर से धक्के लगाते हुए उसके चुचियों को दबाए जा रहा था और गर्दन गालों और होठों पर चुंबन की बारिश किए जा रहा था।

सससससहहहहहहह,,,,,,, ओहहहहह मेरी जान,,,,, अलका,,,,, तेरी बुर मे देख मेरा लंड कैसे घुस रहा है।,,,,,,,, ( राहुल के मुंह से अनायस ही ऊत्तेजना के चलते ऐसे शब्द निकल गए। राहुल को खुद समझ मे नही आ रहा था की ये कैसे हो गया । अलका खुद आश्चर्यचकित थी की उसका बेटा यह क्या बोल गया ऐसे शब्दों का प्रयोग उसने पहले कभी नहीं किया था।
लेकिन जो भी शब्द अल्का के कानो ने सुने वह शब्द उसके पूरे बदन को एक अजीब से सुख की अनुभूति कराते हुए तरबतर कर गया। ऐसे शब्दों का प्रयोग अपनी मां के लिए करते हुए राहुल का बदन खुद झनझनाहट का अनुभव कर रहा था। उसे भी कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि यह कैसे हो गया लेकिन जो भी हुआ था वह बड़ा ही आनंद दायक लगा। अलका भी इस बात से जानबूझकर अनजान बनते हुए अपने बेटे को अपनी बाहों में कस के भरते हुए उसे चुमने चाटने लगी।,,,,,,, राहुल का जोश और ज्यादा बढ़ चुका था। वह और जोर से धक्के लगाते हुए अपनी मां के बुर मे लंड पेलने लगा। 
कुछ ही देर बाद दोनो की सांसे तेज गति से चलने लगी, एक साथ दोनो का बदन अकड़ने लगा और एकसाथ दोनो भलभलाकर झड़ने लगे।
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10-09-2018, 04:00 PM,
RE: Desi Sex Kahani होता है जो वो हो जाने दो
दोनों एक बार फिर से एक दूसरे की बाहों में दूबके हुए अपने अपने अंगो से मदन रस की बौछार कर रहे थे।
दोनों ने जन्मदिन की रात की शुरुआत में ही दूसरी बार सफलतापूर्वक उन्माद से भरा हुआ चरमोत्कर्ष की प्राप्ति कर चुके थे। अभी भी राहुल का लंड ऊसकी मां की बुर में समाया हुआ था जो कि तनिक भी ढिला नहीं पड़ा था। और रह-रहकर क्योंकि लगाता हुआ मदन रस की बूंदे बुर की गहराई में छोड़ रहा था। अलका अभी भी अपने बेटे को कसके अपनी बाहों में भींची हुई थी, और उसकी दोनों हथेलियां राहुल के नितंबों पर हरकत करते हुए दबोचे हुई थी। राहुल को भी अपनी मां की यह हरकत कुछ ज्यादा ही उन्मादक लग रही थी। कुछ देर तक राहुल यूं ही अपने मां के बदन पर लेटा रहा और गर्म गर्म सांसे अपने नथूनों से छोड़ता हुआ अपनी मां की गर्दन को गर्म करता रहा। अलका भी अपना नमकीन पानी छोड़ते हुए गरम आहे भर रही थी। 
जब दोनों की सांसे कुछ सामान्य हुई तो राहुल अपनी मां के बदन पर से उठने लगा वह कमर के ऊपर वाला ही भाग अपनी मां के बदन पर से उठाया था, कमर के नीचे वाला भाग अभी भी उसकी मां की मांसल जांगो के बीच में था और लंड अभी भी बुर की गहराई मे धंसा हुआ था, जिसे राहुल ने आहीस्ते से बुर के बाहर खींचकर निकाला तो अलका की बुर के नमकीन रस में डूबा हुआ लंड धीरे धीरे सरकता हुआ बाहर आ गया, जो कि अभी भी पूरी तरह से तनाव मे था। अलका तो अपने बेटे के लंड को अपनी बुर मे से अाहीस्ते आहीस्ते निकलता हुआ देखकर दंग रह गई । झड़ी हुई और पानी से तरबतर बुर में एक बार फिर से सुरसुराहट होने लगी। वह कभी अपने बेटे के लंड की तरफ तो कभी उसकी तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी। अलका के चेहरे पर संतुष्टि दायक उन्माद से भरा हुआ सुखद एहसास साफ साफ नजर आ रहा था। 
अलका बिस्तर पर पीठ के बल निश्चेत हो कर लेटी हुई थी और राहुल ठीक उसके सामने खड़ा होकर मंद मंद मुस्कुराते हुए उसकी जांघों के बीच बुर मे से निकल रहे मदन रस को देख रहा था। और देखते हुए बोला।

कैसी लगी मम्मी तुम्हें यह जबरदस्त चुदाई? ( राहुल अपनी कमर पर हाथ रखते हुए बोला अलका अपने बेटे के इस सवाल पर मुस्कुराई और अपने बेटे के लंड की तरफ देखते हुए बोली।)

बहुत ही जबरदस्त चुदाई किया है तूने मेरी, मुझे यकीन नहीं हो पा रहा है कि तू सच में बड़ा हो गया है। तुने इतनी जोर जोर से जो धक्के लगाए हैं मेरी बुर में, मेरी बुर बाग-बाग हो गई। तूने मेरी बुर की सारी नसे ढिली कर दिया। तूने जो मुझे जन्नत की सैर कराते हुए दो बार झाड़ा है, मुझे यकीन नहीं हो पा रहा है की जन्मदिन के अवसर पर मैं तुझे खुश करता हुआ तोहफा दे रही हुं या तो खुद मुझे तोहफा दे रहा है। 


राहुल अपनी मां के मुंह से अपनी ही तारीफ सुनकर खुशी के मारे गदगद हुए जा रहा था। वह समझ नहीं पा रहा था कि अपनी मां के द्वारा उसकी तारीफ करने के उपलक्ष्य में वह किन शब्दों में अपनी मां को शुक्रिया अदा करें, वह जवाब में सिर्फ मुस्कुराए जा रहा था।

तभी अलका का वह पल याद आ गया जब राहुल उसका नाम लेते हुए और उसे जान कहते हुए उसकी जम के चुदाई कर रहा था। वह पल अलका के लिए अविस्मरणीय था, क्योंकि उसका नाम लेते हुए सिर्फ उसके पति ने दी उसकी जुदाई किया था जिनकी याद राहुल में ताजा करा दिया था। अपनी बेटी के मुझे अपना नाम लेते हुए चुदाई करता हुआ वह एहसास उसे बहुत ही ज्यादा सुंखद लग रहा था। वह पल कुछ ज्यादा ही उत्तेजनात्मक महसूस करा गया था अलका को। वह उसका ज़िक्र छेड़ने ही वाली थी कि वह खामोश रह गई। वह जैसा चल रहा था,वैसै ही चलने देना चाह रही थी । वह नही चाहती थी की राहुल को इस बात का एहसास दिलाए की अनजाने में वह क्या किया है। ऊसे ईस बात का डर था की उसे उस बात का एहसास दिलाने पर कहीं वह हीचकीचा ना जाए और दोबारा उसी अंदाज में उसका नाम लेते हुए उसकी चुदाई ना कर पाए। इसलिए वह जैसा चल रहा था वैसा ही चलने देना चाह रही थी।
राहुल भी बिस्तर के पास खड़ा होकर उसी बारे में सोच रहा था क्योंकि उसके मुंह से भी अनजाने में ही वह शब्द निकले थे। लेकिन उसे भी बेहद आनंद की प्राप्ति हुई थी, और वह मन में यही बात सोच रहा था कि उस बारे में उसकी मां ने एक बार भी उसे नहीं टोकी। वह मन में यही सोच रहा था कि शायद उसकी मां को भी यह सब अच्छा लगा था लेकिन वह भी इस बात का जिक्र नहीं करना चाहता था। क्योंकि उसे भी बेहद आनंद की प्राप्ति हुई थी जब वह अपनी मां का नाम लेते हुए उसकी बुर में लंड पेल रहा था । वह भी वैसा ही चलने देना चाह रहा था जैसा चल रहा था। कुछ देर तक यूं ही दोनों एक दूसरे के बदन पर ऊपर से नीचे तक अपनी नजरें फेरते रहे। तभी अचानक अलका बिस्तर पर से उठते हुए बोली।


मुझे जोरो की पेशाब लगी है। 

( इतना सुनते ही राहुल के लंड में ऐठन सी होने लगी, और अलका बिस्तर पर से उठते हुए जाने लगी दो कदम ही आगे बढ़ी थी वह खुद राहुल से बोली ) 

तू भी चलेगा ( इतना कहते ही वह मुस्कुराने लगी क्योंकि वह भी जानती थी कि अगर वह पेसाब करने जाएगी तो राहुल भी उसके पीछे पीछे जरुर जाएगा, क्योंकि राहुल तो ऐसे ही मौके की तलाश में रहता था भला राहुल कब मना करने वाला था। राहुल भी अच्छी तरह से जानता था कि अलका को पेशाब करते हुए देखना यह भी एक अतुल्य घड़ी होती थी। ऐसा मौका बार बार नहीं मिलता था इसलिए वह भी साथ में जाने के लिए सिर हिलाकर हामी भर दिया । अलका दरवाजे की तरफ बढ़ने लगी लेकिन इस बार उसने अपने बदन को ढकने की जरा सी भी दरकार नहीं ली। क्योंकि उसे भी पता था कि घर में उन दोनों के अलावा सोनू ही है जो कि वह अपने कमरे में सो रहा होगा। ईसलिए वह बे झिझक दरवाजे की तरफ जाने लगी । कमर के नीचे से वह पूरी तरह से नंगी थी क्योंकि चुदवातेैं समय उसने अपनी पैंटी को भी अपने हाथों से निकाल फेंकी थी। 
उसके बदन पर सितम ट्रांसपेरेंट गाउन और एक छोटी सी ब्रा र्थी जौकी उसकी चूचीयो को बड़ी मुश्किल से अपने कब्जे में ली हुई थी। अलका बड़ी ही मादक तरीके से चलते हुए दरवाजे तक पहुंची राहुल उसके पीछे से खड़ा खड़ा देख रहा था, उसे बड़ा ही कामुक लग रहा था यह सब । अलका जानबूझ कर इतराते हुए अपनी गांड मटका कर चल रही थी। दरवाजे का हैंडल पकड़कर उसे खोलने से पहले वह पीछे मुड़कर राहुल की तरफ नजर डाली तो उसकी नजर सबसे पहले राहुल की जांघों के बीच लटक रहे उसके हथियार पर पड़ी और उसे लटकते हुए हथियार को देखकर वह मुस्कुरा दी। वह दरवाजा खोल कर कमरे से बाहर निकल गई और राहुल भी उसके पीछे पीछे बाहर आ गया। अलका कमरे से बाहर निकल कर अपनी आलस को मरोड़ते हुए बड़े ही उत्तेजक अंदाज में अंगड़ाई ली। जिसे देखते ही राहुल की आह निकल गई। दो-दो बार झड़ चुके लंड ने जब अलका के गुदाज बदन को अंगड़ाई लेता और मटकती गांड को देखा तो सिथील पड़ रहा लंड धीरे-धीरे तनाव में आने लगा। 
अलका कुछ देर वहीं खड़े रहने के बाद वापस बाथरुम की तरफ जाने लगे इस वक्त अलका का बदन कुछ ज्यादा ही उत्तेजक और सेक्सी लग रहा था, उसकी बड़ी बड़ी गांड बहुत मोटी मोटी जांघे वातावरण को और ज्यादा उन्मादक बना रहा था। अलका अपने हुस्न के जलवे को बिखेरते हुए बाथरूम के दरवाजे तक पहुंच गई। यू रात को कमरे के बाहर निकलकर बिंदास तरीके से बाथरुम की तरफ जाती हुई अपनी मां को पीछे से देखकर राहुल का लंड धीरे धीरे खड़ा होने लगा। कल का बाथरूम का दरवाजा खोलने से पहले एक बार फिर से राहुल की तरफ नजर घुमाकर देखी और इस बार भी उसकी नजर उसके लंड पर पड़ी जो कि अब पूरी तरह से अपनी औकात में आ चुका था। टनटनाए हुए लंड को देखकर अलका की बुर एक बार फिर से फूलने पीचकने लगी, अलका भी दो बार पानी पानी हो चुकी थी लेकिन जिस तरह से अपने बेटे को तुरंत तैयार हो जाने की मर्दानगी को देखी, अपने बेटे की ईसी मर्दानगी की वजह से उसकी बुर भी लगातार पानी छोड़ते हुए उत्तेजित होकर के गरम रोटी की तरह फूल जा रही थी। वह अपने होठों पर कामुक मुस्कान बिखेरते हुए बाथरुम में घुस गई। राहुल भी अपना लंड हीलाते हुए पीछे पीछे बाथरुम में घुंस गया। बाथरूम का नजारा बेहद उत्तेजनात्मक होता जा रहा था, अलका बाथरुम के दूसरे छोर पर चुदवासी हो करके अपने होंठ को खुद ही दांत से चबाते हुए राहुल की तरफ देख रही थी जो कि बाथरुम का दरवाजा बंद करते हुए अलका को ही देखे जा रहा था। और अलका थी कि अपनी बुर को अपनी हथेली से रगड़ते हुए राहुल से बोली। 

तुझे भी पेशाब लगी है क्या? ( इतना कहकर वह मुस्कुराने लगी लेकिन राहुल ने बिना जवाब दिए बस आंख फाड़े अपनी मां को ही देखे जा रहा था, अलका फिर बोली।) लगी हो तो तू भी कर ले,( लंड पर नजर घुमाते हुए।) तेरे लंड को देख कर तो ऐसा लग रहा है कि तुझे पेशाब नहीं बल्कि चुदास लगी है। ( इतना कहकर वह जोर से हंसते हुए नीचे पेशाब करने के लिए बैठने लगी, अोर राहुल प्यासी आंखों से अपनी मां को पेशाब करने के लिए नीचे बैठते हुए देखकर कामोत्तेजित हुआ जा रहा था। राहुल को देखते ही देखते अलका नीचे बैठ गई और थोड़ी सी अपनी गांड को उचकाकर पेशाब करने लगी। थोड़ी ही देर बाद उसकी बुर में से मधुर बांसुरी की आवाज के समान सीटी की आवाज आने लगी जोंकि राहुल के कानों में पड़ते ही उसका तन बदन झनझना गया। राहुल तो मंत्रमुग्ध सा बस देखता ही रह गया कुछ पल तो उसे किसी भी बात की सुध बुध ही नहीं रही। वह बस अपनी मां को पेशाब करता हुआ देखता ही रहा और अलका उसकी कामोतेजना को और ज्यादा बढ़ाते हुए नजरें घुमा कर उसकी तरफ देखती हुई अपने लाल-लाल होठों पर जीभ फिरा रही थी। राहुल से यह नजारा देखकर बिल्कुल भी रहा नहीं गया वह अपने घर में को अपने हाथ में लेकर हिलाने लगा और लंड को हिलाते हुए अपनी मां के करीब जाने लगा। अलका अपने बेटी को अपने करीब इस तरह से आते हुए देखकर उत्तेजित होने लगी उसकी बुर में सुरसुराहट बढ़ने लगी और वह और जोर से पेशाब करने लगी।बुर से आ रही सीटी की आवाज को सुनकर राहुल बेचैन होने लगा।

राहुल अलका के बिल्कुल करीब थी उसके पीछे ही खड़ा था जिसे वह नजरें उठाकर देख रही थी। अलका सोच रही थी कि वह भी उसकी आंखों के सामने पेशाब करेगा और वह यही देखने के लिए तड़प रहीं थी लेकिन उसके सोचने के विरुद्ध उसने कुछ ऐसा कर दिया जिससे अलका के बदन में हलचल मच गई और उत्तेजना के मारे उसकी बुर फूलने पिचकने लगी। 
राहुल ठीक उसके पीछे ही जिस तरह से वह बैठी थी उसी तरह से बैठ गया और अपने लंड को हाथ में पकड़ कर अपनी कमर को आगे की तरफ थोड़ा सा बढ़ा कर लंड के सुपाड़े को बुर के गुलाबी छेद पर टिकाने की कोशिश करने लगा, अलका कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि राहुल इस तरह की हरकत करेगा लेकिन उसकी इस हरकत की वजह से उसका पूरा बदन उत्तेजना के मारे गंनगना गया था। वह अपने बेटे के लंड के सुपाड़े को अपनी बुरके इर्द-गिर्द महसूस कर रही थी। और सुपाड़े का गर्म स्पर्श उसके पूरे बदन में कंपकंपी सी मचा दे रहा था। अलका लंड के सुपाड़े की रगड़ को अच्छी तरह से पहचानती थी कि राहुल इस तरह से क्या ढूंढ रहा था। राहुल की हरकत में उसे पूरी तरह से गर्म कर दिया था इसलिए वह हल्का सा और अपनी गांड को थोड़ा सा उचकाकर अपने हाथ से अपने बेटे का लंड पकड़ कर उसके सुपाड़े को अपने गुलाबी बुर की गुलाबी पत्तियों के बीच टिकादी, राहुल को जैसे उसकी मनचाही मुराद मिल गई हो। अलका ने उसे रास्ता दिखा दी थी अब मंजिल तक पहुंचने का काम राहुल का था।
राहुल कामज्वर के सागर मे डुब रहा था। मंजिल की चाह में तड़प रहे राहुल के लिए यह डूबते को तिनके का सहारा था। उसने भी एक पल की भी देरी किए बिना ही हल्के से अपनी कमर को बैठे-बैठे ही आगे की तरफ बढ़ाया तो लंड का सुपाड़ा गप्प से पनियाई बुर में धंस गया जिसमें से अभी भी पेशाब की तेज धार फूट रही थी। राहुल के लिए अब रुक पाना बड़ा ही मुश्किल था वह बैठे बैठे ही अपनी मां कोे पीछे से पकड़कर अपनी कमर को एक बार फिर से जोर से आगे की तरफ बढ़ाया तो इस बार लंड सब कुछचीरता हुआ बुर की गहराई मे धंस गया। जैसे ही पूरा लंड बुर के अंदर घुसा वैसे ही अलका के मुंह से आह निकल गई।

आहहहह,,,,,,,, राहुल,,,,,, यह क्या किया रे तूने मैं कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि तू कुछ इस तरह से करेगा,,,,,

ओहहहहह,,,,,, अलका मेरी जान जब इस तरह से बड़ी बड़ी गांड दिखाते हुए मुतोगी तो मेरा मन तो डोलेगा ही
,,,,,( राहुल अपनी कमर को हिलाते हुए अपनी मां को चोदते हुए बोला।)

आाहहहहहहहहहह,,,,,, सससससससहहहहहहहहहह,,,,,,,,,,,,औहहहहहह,,,,,म्माआआआआ,,,,,,,,ऊहहहहहह,,,,,,,,,, राहुल बेटा,,,,, ( अपने बेटे के मुंह से अपना नाम फिर से सुनकर अलका पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी और उसके मुंह से गरम गरम सिसकारी फुटना शुरू हो गई थी। उसे इंन शब्दो के साथ चुदवाने में कुछ ज्यादा ही मजा आ रहा था, और राहुल को भी। अल्का पुरी तरह से मस्त हो जा रही थी उसकी बुर में उसके बेटे का लंड बड़ी ही तेजी से अंदर बाहर होता हुआ चुदाई का सुख दे रहा था। 

देख मेरी जान देख तेरी बुर केसे लपालप मेरा लंड ले रही है। आाहहहहहहहहहह,,,,,,औहहहहह,,,,, मेरी जान मेरी अलका तुझे चोद चोदकर मैं मस्त हुएें जा रहा हूं।सससहहहहह,,,,,,आाहहहहहहहहहह,,,,, अलका रानी,,,,,, कितनी मस्त है रे तु,,,,, तू तो मुझे पागल कर दी है मेरी जान,,,,,,,,,, आहहहहहहह,,,,,, ( राहुल बैठे-बैठे ही जोर जोर से धक्के लगाता हुआ अपनी मां को चोद रहा था और मस्त हो कर के गंदी गंदी बातें कर रहा था जो कि अलका को भी एकदम मस्त किए जा रही थी। अलका को यकीन नहीं हो पा रहा था कि उसका बेटा उसे इन शब्दों में बोलते हुए इतनी मस्त चुदाई कर रहा है। फच्च,फच्च की आवाज से पूरा बाथरूम गुंज रहा था। अलका पानी पानी हुई जा रही थी उसकी बुर से लगातार उत्तेजना के मारे नमकीन पानी रिस रहा था। राहुल का लंड ईस अवस्था मे भी बड़ी तेजी से बुर के अंदर बाहर हो रहा था।राहुल दोनो हाथ आगे बढाकर अलका की दोनो चुचियों को हथेली में दबोच कर पीछे से अपना लंड अंदर बाहर करते हुए उसे चोद रहा था ।
राहुल को इस तरह से अपनी मां को चोदने में बहुत आनंद की प्राप्ति हो रही थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि वह कभी इस तरह से अपनी मां की चुदाई करेगा। अलका तो अपने बेटे का लंड ले लेकर पानी पानी हुए जा रही थी मदहोशी उसकी आंखों में साफ नजर आ रही थीे वह अपनी आंखों को बंद करके संभोग सुख की असीम आनंद की अनुभूति कर रहीे थी।
सससससहहहहहहह,,,,,,, औहहहहहह,,,,,,, मेरे राज्जा,,,,, सससहहहहह,,,,, और तेज धक्के लगा,,,,, मेरे राजा,,,,,,, ( अलका भी अब राहुल की ही तरह की बातें करने लगी थी दोनों को बेहद मजा आ रहा था राहुल तो अपनी मां के मुंह से ऐसी बातें सुनकर जोर-जोर से चूचियों को दबाता हुआ दो चार धक्के और जोर से जड़ दिया )
आहहहहह आहहहहहहह आाहहहहहहहहहह,,,,,, ओहहहहह राहुल एेसे ही,,,,,,, हां,,,,, बस ऐसे ही चोदता रहे। 
पूरे बाथरूम में दोनों की गरम सांसो की सिसकारियां और चप्प,,,,,,,, चप्प,,,,,की आवाज गूंज रही थी। 
तकरीबन 30 मिनट तक राहुल अपनी मां को ईसी अवस्था में चोदता रहा और उसकी मां भी इस अवस्था में चुदाई का भरपूर आनंद उठाते हुए गर्म सिसकारियां भर्ती रही। 
लगातार दोनों चरमसुख की प्राप्ति के लिए आगे बढ़ रहे थे दो चार धक्कों के बाद ही अलका के बदन में अकड़न सी आने लगी,,,,,, उसकी सिसकारियां कुछ ज्यादा तेज हो गई राहुल को भी लगने लगा था कि वह भी अब बिल्कुल करीब पहुंच चुका है । इसलिए वह भी अपने धक्कों की गति को तेज कर दिया और कुछ ही धक्कों के बाद दोनों झड़ने लगे। राहुल ने गजब का संभोगासन े दिखाते हुए अपनी मां को संभोग की संपूर्ण रुप से संतुष्ट जनक प्राप्ति करवाया था। दोनों तीसरी बार झड़ चुके थे। राहुल ने अपना लंड अपनी मां की बुर से बाहर निकाल कर खड़ा हो गया अलका भी हांफते हुए खड़ी हुई। राहुल का लंड अलका की नमकीन पानी में तरबतर होकर चु रहा था। अलका हांफते हुए मुस्कुरा रही थी, उसे इस बात का अंदाजा बिल्कुल नहीं था कि बाथरुम में भी एक राउंड पूरा हो जाएगा। अलका राहुल से बिना कुछ कहे मुस्कुराते हुए बाथरुम से बाहर निकल गई और राहुल ने वही खड़े-खड़े पेशाब किया और वह भी बाथरुम से बाहर आ गया। आधी रात से ज्यादा समय बीत चुका था लेकिन दोनों की आंखों से नींद कोसों दूर थी। राहुल कमरे के अंदर प्रवेश किया तो अलका बिस्तर पर पेट के बल लेटी हुई थी लेकिन उसके बदन पर एक भी कपड़ा नहीं था उसने अपनी ब्रा और गांऊन को भी उतार फेंकी थी। पेट के बल लेटे होने की वजह से उसकी भरावदार गांड ऊपर की तरफ कुछ ज्यादा ही निकली हुई नजर आ रही थी। राहुल जाकर बिस्तर पर बैठ गया और एक हाथ से अपनी मां की नरम नरम गांड को सहलाने लगा, अलका नजर घुमाकर राहुल की तरफ देखते हुए मुस्कुरा दी और बोली।

बेटा गजब की ताकत है तेरे मे बिना थके तूने तीन बार मुझे जन्नत की सैर करवा चुका है। मुझे तो तूने थका डाला है। ( अपनी मां के मुंह से अपनी तारीफ सुनकर राहुल खुश हो कर मुस्कुराया जा रहा था और अपनी मां की नरम नरम गांड को सहलाए जा रहा था। अलका अपने बेटे की मर्दानगी की तारीफ करते हुए बिल्कुल भी नहीं थक रही थी। थकती भी कैसे, जिस तरह से राहुल उसकी जमकर चुदाई करता था शायद ही ऐसी चुदाई कोई कर पाए। आखिरकार वह राहुल ही था जिसने उसकी नीरस जिंदगी में रंग भर दिए थे। उसने उसे इक नई जिंदगी दिया था वरना वह तो बस जिए जा रही थी जिंदगी का बोझ लेकर। अलका यही सब सोचे जा रहे थे और राहुल की तरफ देखकर मुस्कुराए जा रहीे थी।
राहुल अलका की गांड को सहलाते हुए बोला।

मम्मी तेरी ये ( गांड की तरफ ईसारा करते हुए) मतवाली गांड देख कर मेरा जोश बढ़ जाता है ना जाने मुझ में कितनी ताकत आ जाती है। सच मेरी जान 
( दोनों हथेलियों में भरकर जोर से गांड को दबाते हुए) तेरी यह बड़ी बड़ी गांधी है जो मेरे लंड को हमेशा खड़ा रखती है हमेशा तैयार रहती है तेरी बुर में डालने के लिए। ( राहुल फिर से दूसरी भाषा में अलका से बातें करने लगा और अलका इन शब्दों को सुनकर मस्त होने लगी। इस तरह की भाषा का प्रयोग अपने लिए सुनकर उसके बदन में भी मस्ती छाने लगी और मस्तीयते हुए वह बोली।) 

औहहहहह,,,,,, राहुल,,,,, मेरे राज्जा,,,,,,, ,, अगर सच मे तुझे मेरी गांड ईतनी ज्यादा अच्छी लगती है तो,,,, मेरे राज्जा,,,,,, तु आज मेरी ( ऊंगली से गांड ं की तरफ इशारा करते हुए) गांड से खूब प्यार कर जमकर प्यार कर इतना प्यार कर की तु इसे लाल लाल कर दे।
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Reply
10-09-2018, 04:00 PM,
RE: Desi Sex Kahani होता है जो वो हो जाने दो
राहुल अपनी मां की गंदी बातें सुनकर और उसकी भाषा का प्रयोग देख कर मस्त होने लगा वह जोर जोर से अपनी मां की गांड को हथेलियों में भर भर कर दबाने लगा। वह इतनी जोर से दबा रहा था कि अलका के मुंह से सिसकारी छुट जा रही थी। राहुल अपनी मां की गांड को दबाते हुए बीच की फांकों की गहराई में अपनी उंगली डाल के ऊपर से नीचे तक सहला रहा था। अलका को भी अपने बेटे की यह हरकत पर ज्यादा आनंद आ रहा था। राहुल का लंड फिर से टनटनाकर खड़ा होने लगा। अलका मस्त होने लगी थी।
अलका की गांड़ इतनी ज्यादा बड़ी और भरावदार र्थी की उसकी गांड के बीच की फांक की गहराई के अंदर का गुलाबी छेद नजर नहीं आ रहा था। राहुल जिसे उंगलियों से टटोलकर महसूस कर रहा था जिसकी वजह से अलका कसमसा जा रही थी। इस तरह से अंगुलियों से गांड के साथ मस्ती करने पर अलका के आनंद में लगातार वृद्धि होती जा रही थी। अलका सिसकारी लेते हुए अपनी कमर को अगल बगल हीलाते हुए कसमसा रही थी। और करना चाहते हुए वह उत्तेजना के मारे अपनी कार को रह-रहकर हवा में उचका भी दे रही थी। राहुल को अपनी मां की मस्त गांड को देख कर मस्त हुए जा रहा था। 
राहुल गांड की फांको के बीच की लकीर में ऊपर से नीचे तक अपनी बीच वाली उंगली को रगड़ते हुए उस छोटे से छेद को महसुस करना चाह रहा था, जिसको देखने के लिए जिस को महसूस करने के लिए उस का तन बदन तड़प रहा था। अलका तो बेसुध होकर के मदहोशी के आलम में मस्ती के सागर में गोते लगा रहे थे वह अपने बेटे की उंगलियों की रगड़ को अपनी गांड की फांकों के बीच महसूस कर के मस्त हुए जा रही थी। उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी और साथ ही गर्म आहें भरते हुए गरम सिसकारियां भी ले रही थी।

ओहहहहह,,,,,, अलका मेरी जान मेरी रानी तेरी यह बड़ी बड़ी गांड देख कर तो मैं पागल हुए जा रहा हूं।,,,,,,,,सससससहहहहहहह,,,,,,,, मेरी जान,,,, मेरी गरम गरम बुर की रानी,,,,,, मन कर रहा है कि पूरा लंड तेरी गांड मै डाल कर चोद डालु,,,,,,, सच में मेरी रानी मेरी छम्मक छल्लो,,,,,,, तेरी यह गांड मुझे मदहोश किए जा रही है,,,,,,, समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करूं,,,,,,,, मन तो कर रहा है कि तेरी गांड को जीभ से चाट डालु। 
( अलका तू अपने बेटे की इतनी गंदी बात सुनकर एकदम मदहोश होने लगी उसकी उत्तेजना परम शिखर पर पहुंच गई उसकी सांसे तीव्र गति से चलने लगी उसे यकीन नहीं हो पा रहा था कि इतनी गंदी बातें उसका बेटा ही उससे कर रहा है। लेकिन अलका को इतनी बेहद आनंद की अनुभूति कभी भी वार्तालाप में नहीं हुई थी। उसकी बुर में तो सुरसुराहट होने लगी थी। उसका चेहरा अपने बेटे की बात सुनकर उत्तेजना के मारे एकदम लाल लाल हो गया था। उसके बदन में उत्तेजना इतनी ज्यादा बढ़ गई कि वह खुद अपने दोनों हाथों से अपनी दोनों चुचीयां पकड़कर दबा रही थी। और अपनी चुचियों को दबाते हुए सिसकारी लेते हुए बोली।


सससससहहहहहहह,,,,,,, मेरे,,,,,, राहुल,,,,,, मेरे राजा,,,,, तो देर किस बात की है,,, मेरी जान चाट डाल मेरी गांड को अपनी जीभ से चोद डाल मुझे,,,,,,,आहहहहहहह,,,,,, राहुल मेरे राज्जा,,,,,, 
( अलका भी रंग मे रंग चुकी थी,, वह भी अपने बेटे की ही तरह खुलकर राहुल से बोले जा रहीे थी। राहुल तो अपने मां के मुंह से ऐसी गंदी बातें सुनकर एकदम से जोश में आ गया वह अपनी मां की बात सुनते ही जोर जोर से उसकी गांड को दबाने लगा, अपनी मां की गांड को दबाते हुए राहुल एकदम से मदहोश हो चुका था वह सुध बुध खो चुका था। गांड को दबाते दबाते वह अपनी नाक अपने होंठ फटने काल को भी अपनी मां की नरम नरम गांड पर रगड़ रहा था। जिससे अलका और ज्यादा उत्तेजित होते हुए गरम सिसकारी ले रही थी।)

ससहहहहहहह,,,,,,आआाआआआआ,,,,,,,,, ऊहहहहहह,,,,,,,, मेरे राजा,,,,,,,,, ऊहहहहहहहह,,,,,,, 
( अलका अपने बेटे की हरकत से मस्त हुए जा रही थी। इसकी खुशी उसके बदन में समा नहीं पा रही थी। वह रह रहकर अपने दांतों को भींच दे रही थी तो कभी अपने होंठो को दांतो से कुचल दे रही थी। राहुल तो दीवानों की तरह अपनी मां के नितंबों पर टूट पड़ा था।
वह अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड की फंकों को दोनों हाथों से फैलाते हुए बीच में अपनी नाक डालकर उस लकीर में रगड़ रहा था। इससे राहुल को तो बेहद आनंद की प्राप्ति हो ही रही थी साथ ही अलका इस हरकत से और भी ज्यादा मदहोश होते हुए जोर जोर से सिसकारी ले रही थी। राहुल एक बार फिर से अपने ऊंगलियों का सहारा लेकर गांड की लकीर के बीच रगड़ते हुए अच्छे को तो बोल रहा था तभी उसकी उंगली गांड के बीचो-बीच उसी छेद पर आ कर रुक गई। राहुल एकदम उत्तेजित होने लगा उसे समझ में आ गया था कि उसकी ऊंगली उसकी मां की गांड के छेद पर ही हरकत कर रही है। राहुल ने जैसे ही उस छेंद को अपनी उंगली से महसूस किया उसके मुंह से गर्म सिसकारी छूट पड़ी।

सससससहहहहहहह,,,,,,,, मम्मी मेरी जान मैं तो पागल हुए जा रहा हूं,,,,,,,,,, तुझे अंदाजा भी नही होगा अलका मेरी जान कि,,,,,, मेरी ये उंगली तेरे कौन से अंग पर हरकत कर रही है।,,,,,, बता मेरी जान बता,,,, मेरी यह उंगली तेरे कौन से अंग पर हरकत कर रही है,,,,,,

( अलका तो अपने बेटे की उंगली को अपने नाजुक अंग पर महसुस करके उत्तेजना के परम शिखर पर पहुंच चुकी थी,,, उससे अपनी यह उत्तेजन दबाए नही दब रही थी ।अलका को तो कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था कि वह अपने बेटे के ईस सवाल का क्या जवाब दे । वह बस गरम आंहे भरते हुए खामोश रही अपनी मां को खामोश देखकर राहुल फिर बोला ।)

बोलना मेरी जान चुप क्यों है ? मैं तेरे मुंह से सुनना चाहता हूं ।

( अलका अपने बेटे के मुंह से ऐसी बातें सुनकर पहले से ही गर्म हो चुकी थी और ऊपर से उसकी उंगली जिस जगह पर हरकत कर रही थी उस जगह के बारे में सोचते ही उस का तन बदन झनझना रहा था। लेकिन अलका भी पूरी तरह मस्त हो चुकी थी इसलिए अपने बेटे का जवाब देते हुए बोली।

ससससससस,,,,,,,, आहहहहहहह,,,,, राहुल मेरे राजा तू खुद जानता है कि तेरी उंगली मेरे कौन से अंग पर है लेकिन मैं जानती हूं कि तू मेरे मुंह से सुनना चाहता है। तूने मेरे पूरे तन-बदन में आग ही लगा दिया है,,,,,,
तू अगर मेरे मुंह से सुनना चाहता है तो सुन,,,,,, तू अपनी ऊंगली को मेरे जिस अंग पर रगड़ रहा है उसे मेरी गांड का छेद कहते हैं ओर तेरी ये हरकत मेरी गांड में आग लगाए हुए हैं। सससससहहहहहहह,,,,,,, अब मुझसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रहा है मेरे राजा,,, अब तू कुछ कर,,,,,,,,,, कुछ कर नहीं तो मैं पानी पानी हो जाऊंगी। 
( अलका तो एक दम से पागल हुए जा रही थी वह अपनी उत्तेजना को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे और रह-रहकर एकदम कसमसाते हुए अपने पूरे गांड को इधर-उधर नचा दे रही थी। राहुल अपनी मां की तड़प को देखकर तुरंत अपनी हथेलियों से गांड को दबोच के ऊपर की तरफ उठाते हुए बोला।

बस मेरी जान अभी मैं तेरी प्यास हो बुझाता हूं बस थोड़ी सी अपनी गांड को ऊपर की तरफ उठा दे।

( अपने बेटे की बात सुनते ही वह जल्दी से अपनी गांड को कमर से नीचे वाले भाग को ऊपर की तरफ उठा कर हवा में लहरा दी। ऐसा करने के बाद राहुल तो अपनी मां की गोल गोल गांड को देख कर एक दम से पागल हो गया और अपना मुंह गांड में ही भिड़ा दिया।
वह पागलों की तरह पूरी गांड पर अपनी जीभ फिराने लगा।वह रहरहकर अपने दोनों हाथों से गांड की फांकों को फैला दे रहा था और ऐसा करने पर राहुल को अलका की मस्त गांड का वह भूरे रंग का छेंद नजर आ गया। अपनी मां की गांड के उस भूरे रंग के छेद को देखते ही राहुल की कामोत्तेजना सर चढ़कर बोलने लगी। बिना एक पल भी गांवाएं सीधा अपने होठों को उस भूरे रंग के छेद पर टिका दिया। और जेसे ही ऊसने अपनी जीभ को उस भूरे रंग के छेद पर स्पर्श कराया वैसे ही अपनी बेटे की जीभ को अपनी गांड के छेद पर महसूस करके अलका की तो सांस ही हालक में अटक गई। उत्तेजना के मारे अलका का गला सूखने लगा था। उसका पूरा बदन सूखे हुए पत्ते की तरह थरथर करके कांपने लगा। राहुल को अपनी मां की कंपकंपी और उसकी कसमसाहट साफ महसूस हो रही थी वह भी अच्छी तरह से समझ गया था कि उसकी मां को भी बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही है। राहुल अपनी मां की उत्तेजना को देखकर अपनी चीभ से उस भूरे रंग के छेद को चाटना शुरु कर दिया। अलका तो अपने बेटे की इस हरकत से एक दम मस्त होने लगी उसका पूरा बदन उत्तेजना के मारे गंनगान सा गया। वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी की कभी कोई उसकी गांड के भूरे रंग केछेंद कोे जीभ लगाकर चाटेगा। वह मन में यही सोच रही थी कि इतनी गंदी जगह को कोई कैसी अपनी जीभ लगाकर चाटता है, ऊसे तो यह सब एक सपना ही लग रहा था ऊसे तो इस बात पर बिल्कुल भी यकीन नहीं हो पा रहा था कि उसका ही बेटा उसकी इस गंदी जगहको अपने जीभ से चाट रहा है। रराहुल तो दीवानों की तरह अपनी मां के इस भूरे रंग के छेद को पाकर मदहोश हो गया था वह पूरी मस्ती के साथ अपनी जिद से ऊस भूरे रंग के छेद को चारो तरफ से चाट डाल रहा था। अलका को अपने बेटे की उस दिन की बात याद आ गई जब चुदाई के समय वहं उसके इसी क्षेंद के बारे में जिक्र कर रहा था और अलका घबराकर उसे इंकार कर दी थी। ऊसे अगर पता होता कि गांड चटवाने में इतना ज्यादा आनंद की प्राप्ति होती है तो वह उसी दिन अपने बेटे से अपनी गांड चटवाली होती। 
लेकिन देर आए दुरुस्त आए इस समय भी वह अपनेी गांड चटवाने का पूरा आनंद उठा रही थी। वह अपनी गांड को गोल-गोल घुमाते हुए अपने बेटे के मुंह पर रगड़ रही थी और राहुल भी मस्ती के साथ अपनी मां की गांड को दोनों हाथों से दबोच कर जीभ से चाट रहा था। 
कुछ देर तक यूं ही राहुल अपनी मां की गांड को जीभ से चाटता रहा। उसके बाद वह अपने मकसद की तरफ आगे बढ़ते हुए अपनी एक उंगली को गांड के रसीले छेंद पर रखकर हल्के से दबाया तो उसकी आधी उंगली गांड में प्रवेश कर गई.।

और जैसे ही राहुल की आधी उंगली गांड में प्रवेश हुई । अलका के मुंह से दर्द भरी कराह छूट गई। ऊसे यकीन नहीं आ रहा था कि राहुल ऐसी हरकत करेगा। अभी तो आधी ही ऊंगली गांड में घुशी थी की वह दर्द के मारे छटपटाने लगी।
आााााहहहहहहह,,,,,,,,, ओहहहहहहहह,,,,,,,,, राहुल से जल्दी से बाहर निकाल,,,,,,,,, मुझे बहुत दर्द कर रहा है।


लेकिन अभी तो मेरी जान तुम मस्ती भरी सिसकारी लेते हुए मजा ले रही थी,,,,,,( राहुल गांड में उंगली घु्साए हुए ही बोला।)

अरे हरामजादे मुझे क्या मालूम था कि तू गांड को जीभ से चाटते चाटते अपनी उंगली भी घुसा देगा।।


अरे मेरी रानी अभी तो मैंने सिर्फ आधी ऊंगली ही घुसाया हूं अभी तो मेरा पूरा लंड इसमें जाना बाकी है तब तेरा क्या हाल होगा।

( राहुल कीजिए बातें सुनकर अलका का तू दिल दहल गया उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि राहुल ऐसा कुछ करने की सोचेगा। वह डर के मारे बोली।


नहीं नहीं राहुल ऐसा मत कर तू पागल हो गया है क्या ऐसा भी कोई करता है तुझे पता है कि उसमें ठीक से उंगली भी नहीं जा रही है तो तेरा लंड ऊस छोटे से छेंद मे कैसे जाएगा। आाहहहहहहहहहह,,,,,,, राहुल,,,,,,,, ऐसा बिल्कुल भी मत करना मुझसे बर्दाश्त नहीं होगा।
( अलका अंदर ही अंदर राहुल की कही बात सुनकर सहम जा रही थीे । उसे डर लग रहा था कि अगर वास्तव में राहुल जैसा कह रहा है,,,, अगर वैसा ही किया तो क्या होगा। अलका के मन में दहशत भी बनी हुई थी लेकिन जिस तरह से राहुल अपनी जीभ से उसकी गांड कि उस बेशकीमती भूरे रंग के छेद को चाट रहा था, उसकी चटाई देखकर अलका को बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी जिस वजह से अपनी गांड को लगातार गोल-गोल घुमाते हुए अपने बेटे के मुंह पर रगड़े जा रही थी। राहुल था कि अपनी मां की बात पर जरा भी ध्यान देने बिना ही अपने काम को अंजाम की तरफ ले जा रहा था वह धीरे धीरे अपनी आधी उंगली को गांड के छेद में अंदर बाहर करते ही रहा, और उसपर अपनी जीभ फीरा फिराकर अपनी मां की कामाग्नि को भड़काए जा रहा था। राहुल अपनी मां के डर को कम करने के लिए बोला। 

कुछ नहीं होगा मेरी जान,,,,,,, बल्की तुम्हें इतना मजा आएगा कि तुम हर रोज मुझसे अपनी गांड मरवाओगी।


नहीं रे मुझे तो बहुत डर लग रहा है तू बस मेरी बुर में अपना लंड डालकर काम चला ले उस छेंद में बिल्कुल भी मत डालना।,,,,,,,, ( अलका को लगातार इसी बात का डर लगा हुआ था कि राहुल उसकी गांड के छेद में इतना मोटा लंड ना डालें वर्ना वह सह नही पाएगी। लेकिन राहुल ने तो जैसे मन में ही ठान लिया था कि आज वह अपनी मां की गांड मे अपना मोटा लंड डाल कर ही रहेगा,, इसलिए वह अपनी दूसरी ऊंगली भी उसकी भूरे रंग के छेद में डालते हुए बोला।

कुछ नहीं होगा अलका डार्लिंग मेरा विश्वास करो एक बार जब पूरा लंड तुम्हारी गांड के भुरे रंग के छेंद में घुस जाएगा तो तूझे इतना मजा आएगा कि पूछो मत तु खुद
अपनी गांड को पीछे ठेल ठेल कर मेरा लंड लेगी सच बस एक बार मुझे तेरी गांड में मेरा लंड डालने दे फिर देखना तू और मैं दोनों कितना मजा लूटते हैं। ( राहुल अपनी मां से इस तरह से बात कर रहा था कि जैसे वह अपनी मां को नहीं किसी दूसरी औरत को चोद रहा हो और उसकी गांड मारने की बात कर रहा हो। अपनी मां की गदराई गांड से खेलते हुए राहुल की भी हालत खराब हो जा रही थी जिस तरह से राहुल उसकी गांड से अठखेलियां कर रहा था उसकी वजह से अलका की भी हालत खराब हो रही थी। दोनों तरफ आग बराबर लगी हुई थी लेकिन अलका आगे बढ़ने से डर रही थी।
राहुल धीरे धीरे अपनी दोनो उंगलियों को पूरी जड, तक घुसेड कर गोल-गोल घुमाते हुए अपनेे लंड के लिए जगह बना रहा था। राहुल अपनी मां को गांड मरवाने के लिए मनाता रहा, लेकिन उसकी मां डर की वजह से ना नुकुर करती रही । रात के करीब 3:30 बज चुके थे।
इतनी रात बीत जाने की वजह से ही दोनों की आंखों से नींद कोसों दूर थी। दोनों अपनी अपनी बदन की प्यास बुझाने के लिए जग रहे थे।
राहुल को जब लगने लगा कि उसकी मां गांड मरवाने के लिए राजी नहीं होगी तो ऊसने ऊसका वादा याद दीलाते हुए बोला।

मम्मी तुम अपने वादे से मुकर रही हो याद है तुम्हीं ने कही थी कि तेरे जन्मदिन के दिन में तुझे पूरी तरह से खुश कर दूंगी तु जो मांगेगा में वह तुझे दूंगी। तेरी हर ख्वाइश पूरी करोगी लेकिन आप क्या हुआ तुम अपने वादे से मुकर रही हो तुम मेरे जन्मदिन पर मेरी ख्वाहिश ना पूरी करने के लिए जिद पर अड़ी हो।


राहुल की बात सुनते ही अलका जैसे कुछ याद कर रही हो इस तरह से सोचने लगी, उसे अपना किया गया वादा पूरी तरह से याद था लेकिन वह नहीं जानती थी कि उसका बेटा उसकी गांड मारने की ही ख्वाइश करेगा। उसके मन में गांड मरवाने का डर बराबर बैठा हुआ था वह सोच-सोच कर ही दहल जा रही थी कि इतने से छोटे से छेद में उसके बेटे का मोटा लंड आखिर जाएगा कैसे जो उसका बेटा जिद पर अड़ा हुआ है। वह जानती थी कि उसका बेटा मांनने वाला नहीं है फिर भी वह अपने बेटे को समझाते हुए बोली।( वह नजरे घुमाकर राहुल की ही तरफ देख रही थी)

बेटा तू क्यों जिद कर रहा है तुझे भी अच्छी तरह से दिखाई दे रहा है कि मेरी गांड का छेद कितना छोटा है और तेरा लंड कितना मोटा है तू ही सोच ईसमे जाएगा कैसे? ( राहुल पूरी तरह से तैयार हो चुका था और वह अपनी मां की एक ही बात मानने के लिए तैयार नहीं था उसका लंड तड़प तड़प कर एकदम कड़क हो चुका था। वह भूरे रंग के छेद पर ढेर सारा थुत लगाते हुए तैयार हो चुका था। वह अपनी मां की गांड को थोड़ा सा और ऊपर उठा कर खुद खड़ा हो गया और अपने लिए जगह बनाने लगा। वह ठीक है अपनी मां की गांड के पीछे खड़ा हो गया और अपने लंड के गरम सुपाड़े को अपनी मां की गांड पर सटाते हुए बोला।


तू बिल्कुल भी चिंता मत कर मैं सब कुछ संभाल लूंगा बस थोड़ा सा मेरा साथ दे दे।
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