Chodan Kahani शौहरत का काला सच
11-05-2017, 01:26 PM,
#1
Chodan Kahani शौहरत का काला सच
दोस्तो आज की दुनियाँ मे हर इंसान शौहरत और दौलत के पीछे पड़ा है मगर वो ये नही जानता की शौहरत के लिए कभी कभी कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है शौहरत और चमक दमक हर किसी को अच्छी लगती है। मगर उस चमक के पीछे की सच्चाई उतनी ही काली होती है। यही है आज के युग का एक सुन्दर सत्य… तो फ्रेंड यह कहानी है एक भारत सुन्दरी की, ग्लैमर क्वीन की, जो मॉडलिंग से होते हुए एक सफ़ल फिल्म हीरोइन बनी। जब शीबा ने हिन्दूस्तान की सबसे खूबसूरत लड़की का खिताब हासिल किया तो कई फिल्म डायरेक्टरों ने उसके हुस्न के जलवे से फ़ायदा कमाने की सोची।
शीबा बला की खूबसूरत थी, जिस्म जैसे संगमरमर से तराशा हुआ कोई बेपनाह हसीन मुज़स्स्मा !
होंठ जैसे गुलाब की कली… चाल ऐसी जैसे मदमस्त अल्हड़ जंगली हिरणी।
जो भी उसे देखे उस पर फ़िदा हो जाये, उसे पाने की लालसा जाग उठे!
शीबा ने भी धड़ाधड़ कई फ़िल्में साइन कर ली।
आखिर उस जमाने के एक बड़े प्रोड्यूसर वसीम ने उसके साथ एक फिल्म बनाने की सोची और वो जा पहुँचा उसके घर।
शीबा खान के सामने फिल्म का प्रस्ताव रखा।
शीबा खान अपनी सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ती जा रही थी, इतने नामी गिरामी प्रोड्यूसर को अपने दरवाजे पर खड़ पाकर वो खुशी से झूम उठी और उसने इस प्रस्ताव को पाकर मना नहीं कर पाई, उसने ख़ुशी ख़ुशी स्वीकार कर लिया।
यह शीबा खान की पहली फिल्म नहीं थी, और इस तरह फिल्म जोर शोर से शुरू हो गई।
इस फिल्म में तब तक के जमाने तक बनी सभी फ़िल्मों से ज्यादा नग्नता थी, बहुत ज्यादा बोल्ड सीन थे पर आखिर यह फिल्म तैयार होकर सेंसर बोर्ड में गई।
सेंसर बोर्ड में फिल्म को देखा गया और सब के सब सदस्य इस फ़िल्म के उन बोल्ड नजारों को देख कर हैरान हो गये।
तब से पहले उन्होंने किसी मशहूर अदाकारा को इस हद तक नग्न नहीं देखा था, सभी को वे सीन उत्तेजित कर रहे थे, लेकिन इस फ़िल्म को पास करने की तो वे लोग सोच भी नहीं सकते थे।
और फिल्म पास नहीं हुई।
प्रोड्यूसर वसीम ने बात की सेंसर बोर्ड में।
सेंसर बोर्ड के सदस्यों ने बताया कि वे किसी हालत में इस फ़िल्म को पास नहीं कर सकते।
फिर वसीम ने सेन्सर बोर्ड के माई बाप यानि मिनिस्ट्री लेवल पर बात करने की सोची।
मन्त्री साहब को फ़िल्म दिखाई गई, मन्त्री महोदय भी जवान थे, उसकी कामलोलुप नजर शीबा के मखमली बदन पर अटक कर रह गई।
लेकिन मन्त्री ने कहा- यह भारत है साब, यहाँ इस फ़िल्म को पास कैसे कर सकते हैं?
प्रोड्यूसर ने खूब मिन्नतें की तो मन्त्री महोदय ने वसीम को कुछ दिन बाद आने का कह कर टाल दिया।
लेकिन फ़िल्म का प्रिन्ट अपने पास रखवा लिया।
वे अभी शीबा के नंगे बदन का और लुत्फ़ लेना चाह रहे थे।
प्रोड्यूसर के बाद मन्त्री जी ने फिर से फिल्म देखना शुरू किया, उनकी नजरें शीबा के संगमरमरी बदन और बला के हुस्न से हट नहीं रही थी, उसी पल उन्होंने फैसला किया कि चाहे जो भी हो, इसके हुस्न की तपिश को अपने सीने में उतार कर ही रहूँगा।
वो अब सोच रहे थे कि कैसे करूँ? उनके बस में सब कुछ तो नहीं था, उन्हें यह एहसास था कि अगर फिल्म रिलीज हो गई तो हंगामा तो होना ही है, लेकिन शीबा के मखमली बदन की शीबा से वो रूबरू होने का ख्वाब टूटते नहीं देख सकते थे।
उनका दिमाग तेजी से चल रहा था, शीबा के हुस्न का नशा कुछ था ही ऐसा !
उन्होंने फैसला कर लिया अब किसी भी कीमत पर शीबा के बदन की खुशबू अपने सीने में उतारनी है।
मन्त्री साहब ने प्रोडयूसर को फ़ोन किया और बोले- मैंने आपकी फिल्म दोबारा देखी, अब भी मुझे यही लग रहा है कि मेरे लिये संभव नहीं है इसे पास करना।
प्रोडयूसर वसीम गिड़गिड़ाने लगा, बोला- कुछ कीजिये नहीं तो मैं बर्बाद हो जाऊँगा।
मन्त्री जी बोले- मुश्किल है… हंगामा हो जायेगा।
गिड़गिड़ाता रहा और फिर मन्त्रीजी बोले- चलो मैं देखता हूँ कि क्या हो सकता है?
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11-05-2017, 01:26 PM,
#2
RE: Chodan Kahani शौहरत का काला सच
प्रोड्यूसर वापस मुंबई चला गया और वहाँ उसने अपनी परेशानी एक दूसरे प्रोडयूसर को बताई, उसने सारी कहानी मन्त्री से मिलने तक की उसे सुना दी।
वो प्रोड्यूसर मन्त्री के बारे में अच्छी तरह से जानता था, वो बोला- मन्त्री साला ठरकी है, उसकी ठरक का इन्तजाम करो! मैं मन्त्री के एक चमचे को जानता हूँ, उससे बात करके देखता हूँ।
‘तो अभी बात करो ना उस चमचे से!’ वसीम ने कहा।
दूसरे प्रोड्यूसर ने फ़ोन घुमाया, फ़ोन लग गया, उन दिनों बम्बई से दिल्ली फ़ोन लग जाना भी बड़ी बात थी।
चमचे ने मन्त्री से बात करने का आश्वासन दे कर फ़ोन बन्द कर दिया।
दो दिन बाद फ़िर वसीम उन प्रोड्यूसर से मिले और फ़िल्म के पास होने की बात कहाँ तक बढ़ी इस बारे में पूछा।
दूसरे प्रोड्यूसर ने बताया- मामला मन्त्री के नहीं सरकार के बॉस के हाथ का है।
वसीम के पसीने छूटने लगे, वो बोला- बॉस मतलब?
‘अरे यार… तुम्हें इतना भी नहीं पता कि आजकल किसकी सबसे ज्यादा चलती है? वह एक ही तो हो सकता है…’
‘क्या?’
‘हाँ, बॉस को शीबा पसन्द आ गई है। अब शीबा अगर बॉस को खुश कर दे तो बात बन सकती है…’
वसीम सब मामला समझ गया पर अब वो सोच रहा था कि शीबा को कैसे मनौउँग?
हिम्मत नहीं हो रही थी लेकिन फ़िर भी वो उसी दिन शीबा के घर जा पहुँचा, शीबा को बताया कि फिल्म पास नहीं हो रही है, मामला मन्त्री और उसके भी ऊपर का है।
‘उसके ऊपर कौन?” शीबा ने पूछ।
ने उसका नाम सीधे सीशे ना लेकर शीबा को समझा दिया कि वो किसकी बात कर रहा है।
शीबा की आँखों में एक चमक सी आई, वो समझ गई कि किसकी बात कर रहा है, उसे मालूम था कि बॉस की नज़र हमेशा ग्लैमर की दुनिया की मलाई पर रहती है, और उसने शादी भी एक ग्लैमर गर्ल से ही की है।
शीबा बोली- तो हमें एक बार बॉस से मिलना चाहिए।
लेकिन ने बताया कि बॉस से मिलना इतना आसान नहीं है।
शीबा ने पूछा- कोई तो रास्ता होगा?
तो प्रोड्यूसर बोला- मन्त्री साब ही मुलाकात करवा सकते हैं और वो बहुत घटिया आदमी है उसकी नजर तुम्हारे ऊपर है। अगर तुम मन्त्री और बॉस को किसी तरह मना लो तो…?
यह सुनकर शीबा गुस्से से लाल हो गई, बोली- मना लो तो? क्या मतलब?
‘मतलब अगर… तुम मन्त्री को खुश कर दो एक बार तो…!’
‘मुझे उन दोनों के नीचे आना पड़ेगा? आपकी हिम्मत कैसे हुई ऐसा बोलने की?’
बोला- देख शीबा सच्चाई तू भी जानती है और मैं भी, तू कोई दूध की धुली तो है नहीं, भारत की सुन्दरी का खिताब कईंयों के नीचे बिछे तो मिलता नहीं ! एक बार तू उन दोनों को खुश कर दे तो तेरे साथ साथ मेरे भी वारे न्यारे हो जायेंगे ! फिल्म इंडस्ट्री में रहना है तो ये सब करना ही पड़ेगा, अगर नहीं करेगी तो तेरी आगे आने वाली फ़िल्में भी पास नहीं पायेंगी, सेंसर बोर्ड मन्त्री के हाथ में है। उसके एक इशारे पर तुझे फ़िल्में मिलनी ही बन्द हो जायेंगी।
शीबा बॉस के नीचे तो खुद ही लेट जाना चाह रही थी लेकिन वो मन्त्री, उसकी क्या औकात की भारत की सबसे सुन्दर लड़की पर बुरी नजर डाले !
शीबा मना करती रही और गिड़गिड़ाता रहा, वो बार बार मिन्नतें कर रहा था, बोला- अगर यह फिल्म रिलीज नहीं हुई तो मैं बर्बाद हो जाऊँगा, साथ में तू भी कहीं की नहीं रहेगी।
की बात सुनकर शीबा ने भी सोचा कि जहाँ इतने चढ़वा लिये, वहाँ दो और सही !
और आखिर वो दिल्ली आने को राजी हो गई।
ने दूसरे प्रोडयूसर से फ़ोन करवा के चमचे को बता दिया कि साहब और शीबा मन्त्री जी से एक बार मिलना चाहते हैं।
मन्त्रीजी तो इसी इन्तजार में बैठे थे, तुरन्त मन्त्री ने अगले ही दिन उन दोनों को मिलने का वक्त दे दिया।
अगले दिन साहब तबीयत खराब होने का बहाना बना कर दिल्ली नहीं गए और शीबा अकेली दिल्ली पहुँच गई।
मन्त्री जी ने उसके लिए एक बड़े पंचतारा होटल में व्यस्था कर रखी थी।
एक खूबसूरत सुइट बुक था उसके लिए।
मन्त्री जी बेक़रार थे, जैसे ही शाम हुई, वो पहुँच गए होटल! उनका एक कमरा तो हमेशा ही बुक रखते थे होटल वाले, मन्त्री जी सीधे अपने महाराजा स्युइट में पहुँचे।
रिसेप्शन से चमचे ने शीबा को फ़ोन करवाया कि आपसे मिलने मन्त्री जी अपने महाराजा स्युइट में पहुँच चुके हैं।
मन्त्री की एक खूबसूरत निजी सचिव शीबा को लिवाने उसके स्युइट के बाहर खड़ी थी।
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11-05-2017, 01:26 PM,
#3
RE: Chodan Kahani शौहरत का काला सच
उधर मन्त्री का चमचा ऊपर आ गया था और मन्त्री की सचिव ज़ेबा को इशारे से उसने अपने पीछे आने को कहा।
दोनों का खूब याराना था तो जब भी मौका मिले अपने नंगे बदन भिड़ा बैठते थे।
ज़ेबा भी बिना कुछ बोले उसके पीछे आ गई, दोनों शीबा के कमरे में चले गये।
ज़ेबा- क्या हुआ? यहाँ क्यों बुलाया है मुझे? मिस शीबा आ के पास जा तू…
चमचा- अरे मेरी छम्मक छल्लो… इतनी जल्दी मन्त्री जी थोड़े ही उसे आज़ाद कर देंगे… आज तो बड़ी प्यारी बुलबुल पकड़ में आई है… मन्त्री जी पूरा मज़ा लेने के बाद की उसको जाने देंगे… तब तक इस कमरे में थोड़ा गुटर-गूँ हम भी कर लेते हैं।
ज़ेबा- आजकल कुछ ज़्यादा ही बदमाश हो गये हो, जब देखो गंदी बातें करने लगते हो? जाओ मुझे नहीं करना कुछ भी…
चमचा- ओये बहन की लौड़ी… नखरे मत दिखा। तुझे मन्त्री जी की पी ए मैंने ही बनाया है और साली, मन्त्री जी को तो कभी ना नहीं कहती… जब देखो उनकी गोद में बैठी रहती हो?
ज़ेबा- वो तो मेरे अन्नदाता है, उनको कैसे ना कह सकती हूँ मैं…
चमचा- अन्नदाता नहीं लण्डदाता बोल… मेरी ज़ेबा चल अब टाईम मत खराब कर…
इतना बोलकर चमचा ज़ेबा के बदन से चिपक गया उसके चूतड़ दबाने लगा।
उधर अब जरा मन्त्री जी और शीबा खान का हाल चाल भी देख लें-
अब वो धीरे धीरे आगे बढ़े और अपना होंठ शीबा के होठों के पास ले जाने लगे।
शीबा की तेज होती गरम सांसें उनको अपने चेहरे पर महसूस हो रही थी।
बस इतना कहते ही उसने शीबा के उत्तर की प्रतीक्षा किये बिना उन्होंने अपना हाथ उसके सर के पीछे करके शीबा के सर को पकड़ लिया और उसके होठों को चूमने लगे, उसके होठों के मीठे रस को पीने लगे।
अब धीरे धीरे शीबा भी उत्तेजित हो रही थी, आखिर वो भी तो इंसान थी, इस हालत में कब तक अपने जज्ब्बात काबू में रख पाती।
अब शीबा भी साथ देने लगी थी।
मन्त्रीजी अब भी उसके होंठ चूस रहे थे, लेकिन अब उनके हाथ भी गहराइयों को टटोलने लगे थे।
उनके हाथ अब उसके उरेजों पर था और वो प्यार से धीरे धीरे उसे दबा रहे थे।
मन्त्री जी बोले- ऐ बेपनाह हुस्न की मलिका, अब तो अपने हुस्न का दीदार करा दो, ऐसे अपना मुखड़ा ना छुपाओ… देखने दो मुझे इस चमकते हुए चेहरे को… निहारने दो मुझे इन रस से भरे चूचों को… मेरी आँखों कैद कर लेने दो इस सुलगते जिस्म को… आज मेरा रोम रोम तेरे क़ातिल हुस्न में रम जाने दो… दीवाना बना हूँ, कब से बेक़रार हूँ इस हुस्न को पाने को।
बस मन्त्री के हाथ उसकी पीठ के नीचे गये और पीछे से उसके ब्लाऊज़ के हुक खोलने लगा, सत्तर के दशक में साड़ी के साथ ब्लाऊज़ में पीछे के हुक लगाने का फ़ैशन था।
शीबा ने भी करवट ली और अब उसकी पीठ मन्त्री के सामने थी।
अब मन्त्री जी के हाथ उसके ब्लाउज के हुक पर तेजी से घूम रहे थे और हर पल एक हुक खुलता जा रहा था।
कुछ देर में उसकी ब्लाउज खुल चुकी थी तो शीबा सीधी हो गई, अब अंदर की काली ब्रा नजर आ रही थी, जो उरोजों को छुपा तो नहीं पा रही थी बल्कि आमंत्रण दे रही थी।
मन्त्री जी ने अब अपना हाथ पीछे करके उसकी ब्रा का हुक खोला और उसे उतार दिया।
क्या खूबसूरत दूधिया दो कबूतर थे। मन्त्री तो बस उस लाजवाब हुस्न को देखता रह गया।
मन्त्री जी ने शीबा के सुडौल वक्षों को हाथों में दबोच लिया और आराम से धीरे धीरे सहलाने लगे।
कुछ देर तक वैसे ही सहलाते रहे फिर एक को अपने मुंह में लेकर धीरे धीरे प्यार से चूसने लगे।
शीबा की आँखें बंद थी और वो रह रह कर सिहर रही थी।
मन्त्री जी उसके निप्प्ल्स को चुटकी में दबा कर गोल गोल घुमा रहे थे।
शीबा का बदन अकड़ रहा था, वो उत्तेजित हो रही थी, अब उसके मुंह से मादक सीत्कार निकल रही थी।
अब तो मन्त्री जी के हाथ पूरी हरकत में आ गए, वो शीबा के बूब्स को बुरी तरह से मसलने लगे।
शीबा मन ही मन सोच रही थी- कमीना ऐसे कर रहा है जैसे कभी कोई लड़की नहीं चोदी।
चूमाचाटी का यह सिलसिला जब रुका तो मन्त्री के साथ साथ शीबा भी गर्म हो चुकी थी, दोनों की साँसें तेज हो गई थी।
धीरे धीरे उनके हाथ शीबा के बदन पर फिसल रहे थे, तेजी से निचे आ रहे थे, जैसे जैसे हाथ नीचे आ रहे थे, शीबा की सांसे तेज हो रही थी।
अब हाथ पेट पर पहुँच चुका था, और उन्होंने अपनी ऊँगली शीबा की नाभि में डाल दिया।
शीबा का बदन अकड़ रहा था।
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11-05-2017, 01:26 PM,
#4
RE: Chodan Kahani शौहरत का काला सच
इधर चमचा ज़ेबा को चोदने के लिये मरा जा रहा था-
जब चमचे ने ज़ेबा के चूतड़ मसलने शुरु किये तो ज़ेबा बोली- ऐसे नहीं… कपड़े खराब हो जायेंगे… अगर मन्त्री जी को जरा भी शक हो गया कि तू मुझे चोदता है तो हम दोनों की छुट्टी हो जाएगी… मुझे नंगी कर ले… इन कपड़ों पहले निकाल तो लेने दे…
चमचा- हा हा… जल्दी कर आज तुझे नया मज़ा दूँगा मैं… साली उस शीबा को जब से देखा है, लौड़ा बैठने का नाम ही नहीं ले रहा… अब वो तो नसीब में है नहीं, तुझे ही शीबा समझ के चोद लूँगा!
कुछ ही देर में दोनो नंगे हो गये।
ज़ेबा का जिस्म भी काबीले तारीफ था, बड़े बड़े रस से भरे चूचे, पतली कमर पीछे बाहर को निकले हुए चूतड़, जिन्हें देख कर साफ पता चलता था कि इसकी खूब ठुकाई हो चुकी है।
चमचे का लण्ड भी करीब 6″ का ठीकठाक मोटाई वाला था।
उसने ज़ेबा की स्कर्ट का हुक खोला तो वो नीचे गिर गई, अन्दर देखा तो ज़ेबा ने कच्छी ही नहीं पहनी थी।
चमचा बोला- साली रण्डी, कच्छी भी नहीं पहनी आज?
ज़ेबा बोली- वो शीबा ने आना था तो मन्त्री जी ने एक बार मुझे चोद कर माल निकाल दिया था तो मैंने कच्छी अपनी फ़ुद्दी साफ़ करके वहीं फ़ेंक दी थी।
चमचा ज़ेबा को झट से अपनी बाहों में लेकर बेड पे लेट गया और इस बीच ज़ेबा ने अपना टॉप उतार दिया।
अब इनका कार्यक्रम चालू हो गया।
उधर देखें क्या हो रहा है शीबा के साथ-
अब मन्त्री जी का हाथ धीरे धीरे नीचे और नीचे जाने लगा, और उनका हाथ उसके पैर के तलवे तक पहुँच गए थे।
अब उन्होंने उसकी साड़ी के नीचे अपना हाथ डाल कर उसकी टाँगों को सहलाना शुरू किया।
जैसे जैसे हाथ अंदर जाता, वो हर पल उत्तेजित होती जा रही थी।
अब उनका हाथ उसकी जांघों पर था और साड़ी भी ऊपर सरकती जा रही थी।
जब मन्त्री जी ने उसके जांघों को सहलाना शुरू किया। शीबा दोनों हाथों से बेडशीट पकड़ रखी थी, और वो अपनी एड़ियाँ बिस्तर पर रगड़ रही थी।
अब उसकी पैंटी नजर आने लगी, काली जालीदार, जिसके नीचे से उसकी खूबसूरत दूधिया चूत नजर आ रही थी।
मन्त्री जी अब उसकी साड़ी को उतार चुके थे और वो अब पैंटी में थी।
ब्लाऊज उतर गया, ब्रा उतर गई, साड़ी जाघों तक उठ गई तो पेटिकोट उतरने में कौन सी देर लगनी थी, मन्त्री ने जल्दबाज़ी दिखाते हुए उसे भी नाड़ा खींच कर नीचे सरका दिया।
उसकी छुई मुई सी प्यारी चूत पैंटी में अपना रस छोड़कर अपनी हालत का अहसास करवा रही थी।
जैसे ही मन्त्री जी ने अपना हाथ पैन्टी से ढकी उसकी चूत पर रखा, शीबा ने अपने होठों को दांतों से भींच लिया।
अब उसके बस में नहीं था खुद पर काबू करना !
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11-05-2017, 01:26 PM,
#5
RE: Chodan Kahani शौहरत का काला सच
मन्त्री जी भी कैसे सब्र कर सकते थे, बेपनाह हुस्न की मल्लिका आँखों के सामने, लगभग निरावृत लेटी थी।
तो उन्होंने शीबा की पैंटी उतार दी।
शीबा शर्म से पेट के बल लेट गई।
पास में फूलों के गुलदस्ते में गुलाब था, मन्त्री जी ने उसे उठाया और उसके पैरों से गुलाब को धीरे धीरे ऊपर ले जाने लगे, गुलाब शीबा की खूबसूरत जिस्म को चूम रहा था और गुलाब के ठीक पीछे मन्त्री जी का हाथ।
अब गुलाब उसके हिप्स से होता हुआ शीबा के कन्धों पर था, शीबा अभी भी वैसे ही लेटी थी।
मन्त्रीजी ने उसके कन्धों को पकड़ कर उसे सीधा लिटा दिया, शीबा ने अपनी आँखों को दोनों हाथों से ढक लिया।
मन्त्री जी उसके हाथों को हटाते हुए बोले- मेरी तरफ देखो, और मुझे अपनी आँखों से इस खूबसूरती को देखने दो।
अब दोनों एक दूसरे की आँखों देख रहे थे, मन्त्री जी के हाथ उसके प्यारी सी मखमली चूत पर थे और वो धीरे धीरे सहला रहे थे।
शीबा की साँसें तेज चल रही थी।
मन्त्री जी ने आनन-फानन में अपने कपड़े निकाले तो उसका 7″ का लौड़ा आज़ाद हो गया जिसकी मोटाई भी अच्छी खासी थी।
मन्त्री जी भी अब नंगे हो चुके थे, और वो शीबा के बगल में लेट गए, उन्होंने अपने पैर शीबा के चेहरे की तरफ किये तो उनका मुंह शीबा के हसीं मखमली प्यारी सी चूत के करीब था।
उन्होंने शीबा को करवट करके उसकी चूत अपनी तरफ किया और शीबा के कूल्हों को अपने हाथों से पकड़ कर उसकी चूत को अपने मुंह के करीब लाए।
मन्त्री जी का तगड़ा मोटा लंड शीबा के चेहरे के करीब था, लेकिन वो बस उसे देख रही थी पर मन्त्री जी ने उसकी चूत को चूमना शुरू कर दिया था।
उनके लौड़े से पानी की बूंदें आने लगी।
अचानक से मन्त्री जी ने अपने हाथ से शीबा का हाथ पकड़ा और उसके हाथ में अपना लंड दे दिया और बोले- शरमाओ नहीं, आओ एक दूसरे में खो जाएँ, आज की रात मुझे शीबा नसीब होने दो, पूरी तरह।
मन्त्री जी के इतना बोलने से शीबा, जो उत्तेजित तो पहले ही थी, अब साथ देने लगी, वो लंड हाथ में लेकर उसे धीरे धीरे ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर सहलाने लगी।
शीबा पर अब वासना हावी हो चुकी थी, उसने झट से लौड़ा अपने मुख में ले लिया और मज़े से चूसने लगी।
मन्त्री जी भी पूरी तरह मदहोश हो चुके थे, उन्हें तो वो मिल गया था, जिसके लिए वो तब से तड़प रहे थे, जब से उसे रुपहले परदे पर, गीली साड़ी में देखा था।
यकीं नहीं हो रहा था कि आज वही बिना किसी आवरण के पूरी तरह निरावृत लेटी थी, ये सोच कर उन्हें और जोश आ गया।
अब दोनों पूरी तरह तैयार थे, मन्त्री जी शीबा की चूत चाट कर शीबा का नशा महसूस कर रहे थे, वो अपनी जीभ की नोक से चूत को चोदने लगे, उनको बड़ा मज़ा आ रहा था, शीबा की चूत पानी पानी हो गई थी।
ज़ेबा और चमचे का हाल भी जान लें एक बार-
ये दोनों एक दूसरे को चूसने में लग गये थे, थोड़ी देर बाद दोनों 69 के पोज़ में हो गये और रस का मज़ा लेने लगे।
दोनों काफ़ी उत्तेज़ित हो गये थे, अब बर्दाश्त कर पाना मुश्किल था तो चमचे ने उसकी दोनों टाँगें फ़ैला दी और फच की आवाज़ के साथ पूरा लौड़ा एक धक्के में ज़ेबा की फ़ुद्दी में घुसा दिया।
ज़ेबा- आह… मार डाला रे… जालिम… उई!
चमचा- अभी कहाँ जानेमन… ले अब और मज़ा ले!
वो दे दनादन लौड़ा ज़ेबा की खुली चूत में पेलने लगा। ज़ेबा भी कूल्हे उछाल उछाल कर चुदने लगी थी। दोनों ने कमरे का माहौल काफ़ी सेक्सी बना दिया था क्योंकि उनके मुँह से ‘आ… आईई… उफ़फ्फ़…’ की सी आवाज़ें चारों और गूंजने लगी थी।
10 मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद दोनों शांत हो गये, उनका वीर्य निकल कर मिक्स हो गया और वो अब बेड पे एक दूसरे की ओर देख कर बस मुस्कुरा रहे थे।
इधर तो खेल खत्म, मन्त्री जी का देखें क्या हाल है-
अब उन्माद चरम पर था, मन्त्री जी के जीभ जो शीबा की चूत पर घूम रही थी, वो शीबा के शरीर में बिजली जैसी हलचल मचा रही थी, और एक रोमांच पैदा कर रही थी, अब मन्त्री जी और शीबा दोनों एक दूसरे में समां जाने को तैयार थे।
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11-05-2017, 01:27 PM,
#6
RE: Chodan Kahani शौहरत का काला सच
मन्त्री का लौड़ा भी बेकाबू हो गया तो मन्त्री जी ने शीबा को सीधा लिटाया और उसके ऊपर जाकर बैठ गए, और दोनों हाथों से उसकी चूचियों को पकड़ लिया और उसके बीच लंड रख कर चूचियों की चुदाई करने लगे।
ऐसा करने से शीबा और उत्तेजित हो रही थी, उसकी आँखें ऐसे बंद हो रही थी, जैसे उसे नशा छाया हो, अब मन्त्री जी ने सोच कि अब देर नहीं करना चाहिए।
अब मन्त्री जी अपने लक्ष्य के पास थे, उन्होंने अपना लंड शीबा की चूत पर रखा और उसकी चूत वाकई प्यारी थी, उसे दो उँगलियों से फैलाया और उसके बीच में लंड रखा और धीरे धीरे गहराइयों में उतरने लगे, गहराइयों में उतरने का सफर काफी हसीं, मदमस्त था, जैसे जैसे गहराइयों में उतरते गए, नशा बढ़ता गया।
अब शीबा कोई कच्ची कुँवारी तो थी नहीं जो उसकी सील टूटती… शोहरत की इस ऊंचाई तक पहुँचने के लिए ना जाने कितने लौड़ों पर चूत टिका टिका कर आगे आई है, अब वो भी मन्त्री जी के लौड़े की चोट के मज़े लेने लगी।
शीबा के हाथ तकिये पर थे, जैसे ही मन्त्री का धक्का पड़ता, वो तकिये जो जोर से भींच लेती थी।
धीरे धीरे रफ़्तार बढ़ती जा रही थी और हर झटके के साथ वक्ष एक लय में हिलते, जैसे झटका लगता चूचियाँ ऊपर की तरफ जाती, और फिर जैसे ही वापस खीचते फिर वापस अपने जगह पर आ जाती।
जैसे जैसे तेजी बढ़ती गयी रोमांच बढ़ता गया, दोनों एक दूसरे में खोते गए, श्रम के निशान उनके शरीर पर पसीने की बून्द बनकर दिख रही थी।
दोनों की सांसें तेज चल रही थी, अचानक तबसुम की साँसे धीमी होने लगी और वो शिथिल पड़ने लगी।
मन्त्री जी की सांसें और गति दोनों अभी तेज थी, वो और तेज और तेज गहराइयों उतरते जा रहे थे, हर झटका उन्माद की चरम की ओर ले जा रहा था, शीबा की आँखें बंद थी और हाथ मन्त्रीजी के कमर पर थी।
आखिर वो लम्हा भी आया जब मन्त्रीजी की साँसे उखड़ने लगी और फिर गहराइयाँ कम होती गयी और उसमे प्यार की निशानी गरम गरम सा लावा भरता चला गया।
शीबा की चूत ने भी एक वी आई पी लौड़े के सम्मान में अपना रज त्याग दिया, दोनों के पानी का मिलन हो गया एक फिल्म हिरोइन और दूसरा राजनेता, दोनों के पानी का मिलन एक अलग ही दास्तान ब्यान कर रहा था।
अब दोनों शिथिल पड़ गए।
मन्त्रीजी शीबा को महसूस कर चुके थे और उसके ऊपर लेटे थे, कुछ देर के बाद नीचे उतरकर शीबा के बगल में लेट गए, और अपना पैर शीबा के पैरों पर रख दिया और हाथों से उसके वक्ष सहलाने लगे।
आखिर उनकी सपनों की राजकुमारी जो उनके पास लेटी थी और उसे वो पूरी तरह पा चुके थे।
दोनों अब अलग अलग होकर बेड पे लंबी साँसें ले रहे थे।
शीबा को चोदने के बाद मन्त्री ने उसको बताया था कि सब कुछ उनके हाथ में नहीं है, इसके लिए उन्हें अपने बॉस से बात करनी होगी, आखिर यह फिल्म कुछ है ही ऐसी, वो रिस्क नहीं ले सकते।
मन्त्री ने शीबा को बताया कि उसका बॉस बहुत ही ताकतवर आदमी है, सब कुछ उसके हाथ में है।
अभी शीबा की किस्मत किसी और के शरीक-ए-बिस्तर होना था यह बात शीबा पहले से जानती थी पर फ़िर भी मन्त्री जी के सामने शीबा बोली- आप उन्हें मना ही लेंगे ना?
मन्त्री- मैं अपनी तरफ़ से पूरी कोशिश करूँगा पर ये सब इतना आसान तो नहीं है ना। मैं तुम्हें उनके पास ले चलूँगा, आमने सामने बैठ कर बात कर लेंगे।
शीबा बोली- तो क्या उनके साथ भी?
मन्त्री बोला- देखो शीबा, इसके बिना तो संभव नहीं है… यह एक बार की तो बात है, मिल तो लो।
शीबा के पास कोई और चारा भी नहीं था, वो राजी हो गई।
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11-05-2017, 01:27 PM,
#7
RE: Chodan Kahani शौहरत का काला सच
मन्त्री अभी भी शीबा की बगल में लेटकर उसके नंगे मखमली जिस्म पर हाथ ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर फ़िरा रहा था, कभी वो शीबा के वक्ष सहला रहा था, तो कभी उसके नितम्ब पर हाथ घुमा देता।
उसकी नजरें उसके खूबसूरत जिस्म पर फिसलती जाती, वो अपने किस्मत पर रश्क करने लगता कि एक अजीमोशान हुस्न की मल्लिका के हुस्न को पूरी तरह पा चुका था।
वो एक बार फिर से उसके अधरों को चूस रहा था, उसके हाथ शीबा के गुदाज वक्ष को टटोल रहे थे।
इस तरह काफी देर तक शीबा के खूबसूरत जिस्म का आनन्द लेने के बाद मन्त्री वहाँ से निकल गया और जाते जाते बोला- अब मैं सीधा बॉस से मिलने जा रहा हूँ, आज शाम को ही मुलाकात हो सकती है तुम्हारी उनसे, तुम तैयार रहना। बस उनको खुश कर दो तो समझो फिल्म पास हो गई।
शीबा को छोड़ अब मन्त्री के पास आया और अब बॉस के सामने बैठा था, बोला- सर मुझे आपको एक फिल्म दिखानी है।
बॉस बोला- भी क्या बात है, आज फिल्म देखने की बात क्यों कर रहे हो?
मन्त्री के आग्रह करने पर बॉस फिल्म देखने लगा, जैसे जैसे फिल्म आगे बढ़ रही थी, उसकी आँखों में चमक आती जा रही थी।
अब शीबा का वो सीन चल रहा था, जिसमें शीबा सफ़ेद गीली साड़ी में झरने के नीचे नहा रही थी।
सफ़ेद गीली साड़ी के नीचे उसकी चूचियों के काले निप्पल उभर कर स्पष्ट छवि बना रहे थे।
बॉस के चेहरे पर चमक बढ़ती जा रही थी और आँखों में वासना नजर आने लगी।
उसकी आँखें शीबा के मखमली बदन और बेइंतहा हुस्न का जायजा ले रही थी, उसकी साँसें तेज हो रही थी।
वो अचानक मन्त्री से बोला- इस शीबा की सैर मुझे करनी है।
मन्त्री बोला- जी हज़ूर, यह शीबा इस फ़िल्म को सेंसर से पास करवाने आपकी सिफ़ारिश लगवाने आई हुई है, आप बोलिए तो आज आपकी शाम शीबा के नाम कर दूँ।
बॉस तो बेकरार था, वो बोला- शाम को उसे मेरे फ़ार्म हाऊस लेकर आ जाओ।
उधर दूसरी तरफ़:
शीबा तो खुद बॉस के आगे बिछने को तैयार थी, वो खुश हो गई और मंत्री के जाने के बाद वो वापिस अपने कमरे में आकर बाथरूम में जाकर पूरी नंगी हो गई।
उसका जिस्म संगमरमर की तरह चमक रहा था, वो अपने आप से बातें करनी लगी।
शीबा- मेरे सरताज, एक बार बस आप मेरे हुस्न के जलवे देख लो, फिर तो सारी फिल्म इंडस्ट्री मेरे कदमों में होगी… आज आपको ऐसा मज़ा दूँगी कि जिन्दगी भर कभी भूल नहीं पाओगे।
शीबा ने अपने आपको देखा, अपनी चूत पे गौर किया।
दो दिन पहले ही उसने अपनी चूत को क्लीन किया था, मगर आज उसकी मुलाकात बॉस से होने वाली थी तो वो किसी तरह की कमी नहीं रखना चाहती थी, वो लग गई अपने काम में !
उसने अपनी बाजू, टांग़ें, बगलों और योनि के आसपास सब जगहों पर एन फ़्रेन्च क्रीम लगा कर साफ़ और चिकना कर लिया।
एक तो वो बेहद खूबसूरत थी, ऊपर से उसका ऐसा चिकना मक्खन जैसा बदन आज, तो बॉस के वारे न्यारे होने वाले थे।
करीब एक घण्टा वो बाथरूम में रही, खूब अच्छे से नहाई, उसके बाद नंगी ही बाहर आ गई और अपने आप को आईने में निहारने लगी।
उसको अपने बेपनाह खूबसूरत जिस्म पे बड़ा गुमान हो रहा था।
वो बस अपने आप को तैयार करने में लग गई, अब एक फिल्म की हिरोइन को तैयार होने में वक्त तो लगता ही है…
ना जाने कितने घंटे वो बस खुद को तैयार करती रही।
आख़िर वो घड़ी आ ही गई जब मन्त्री जी ने उसे बुलवाया।
शीबा एकदम तैयार हो गई थी, उसने अब दूसरी काली साड़ी पहनी थी, जो बस नाम की साड़ी थी, और ब्लाउज भी एकदम झीने कपड़े का, जिसे आप पारदर्शी भी कह सकते हैं, उसकी गुलाबी ब्रा भी उसमें से साफ दिखाई दे रही थी।
और ऊपर से उसने साड़ी को नाभि के काफ़ी नीचे बँधा हुआ था जिसके कारण उसका चमकता पेट दिखाई दे रहा था।
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11-05-2017, 01:27 PM,
#8
RE: Chodan Kahani शौहरत का काला सच
मंत्री तो बस उसे देखता ही रह गया पर ड्राइवर के कारण कुछ बोल ना पाया।
गाड़ी एक बड़े से फार्म हाऊस पर जाकर रुकी, दरबान ने बड़ी शालीनता के साथ उनका स्वागत किया और बॉस को खबर दी कि मंत्री जी शीबा के साथ आए हैं।
बॉस खुद उनको लेने बाहर तक आए और जैसे ही उनकी निगाह शीबा पर पड़ी, वो किसी पत्थर की मूरत की तरह हो गये, एकटक बस शीबा को देखने लगे।
उनका ध्यान भंग मंत्री जी ने किया- हेलो सर…
बॉस- ऑश… हेलो हेलो… हय मिस शीबा, कैसी हो आप? यहाँ तक आने में कोई तकलीफ़ तो नहीं हुई?
शीबा भी एक अदाकारा थी और ऐसे मौके पे किस तरह पेश आना है उसे अच्छी तरह आता था।
उसने बड़े ही सेक्सी अंदाज में कहा- नहीं सर नहीं… मुझे कोई तकलीफ़ नहीं हुई और आप से मिलने के लिए तो कोई भी तकलीफ़ उठाने को मैं तैयार थी, थैंक गॉड कि आज आपसे मिलना हो गया।
शीबा ने आगे बढ़ कर बॉस से हाथ मिलाया और यही वो पल था कि जवान गठीले बदन वाला बॉस उसके स्पर्श से पिघलता चला गया, वो बस शीबा के मुलायम हाथ को मसलने लगा, उसके चेहरे पे एक क़ातिल मुस्कान आ गई थी।
मंत्री जी- अच्छा सर, अब मैं चलता हूँ, मिस शीबा आप अपनी फिल्म के बारे में सर से बात कीजिए।
मंत्री वहाँ से चला गया और जाते जाते दरबान को हिदायत दे गये कि साहब एक जरूरी मीटिंग में बिज़ी रहेंगे, तो ख्याल रहे कोई डिस्टर्ब नहीं करें…
बॉस शीबा का हाथ पकड़े हुए अंदर चले गये।
अंदर का नजारा काफ़ी अच्छा था, साजो सजावट खूब थी वहाँ…
और जब वो एक कमरे में पहुँचे तो शीबा बस देखती रह गई… एक आलीशान कमरा जिसके बीचों बीच एक गोल बड़ा सा बेड लगा हुआ था, जिस पर गुलाब की पत्तियाँ से सजावट थी और एक बेहद रूमानी महक से पूरा कमरा महक रहा था।
शीबा- श वाउ सर… आपका रूम तो काफ़ी आलीशान और खूबसूरत है।
बॉस- अरे नहीं नहीं मिस शीबा, आपसे ज़्यादा खूबसूरत नहीं है। इसकी चमक आपके हुस्न के सामने फीकी है एकदम… सच कहूँ, जबसे तुमको उस फिल्म में देखा है मेरी रातों की नींद उड़ गई है, बस सोच रहा था एक बार तुम सामने आ जाओ तो मज़ा आ जाए।
शीबा उसके एकदम करीब आ गई उनकी साँसें घुलने लगी थी।
शीबा- मैं आपके सामने हूँ सर… प्लीज़ मेरी फिल्म पास करवा दीजिए, बड़ी मेहनत की है मैंने उसमें… अगर वो पास ना हुई तो मैं कहीं की नहीं रहूँगी।
बॉस ने शीबा के चेहरे को अपने दोनों हाथों में थाम लिया और उसकी आँखों में झाँक कर बोलने लगा- अरे आप डरती क्यों हो, मैं हूँ ना, सब ठीक कर दूँगा, बस तुम मुझे सर मत कहो, मुझे जानू कहो, तुम मेरी जान, मैं तुम्हारा जानू!
वह दोनों हाथों से शीबा का चेहरा पकड़ कर दीवानों की तरह चूमने लगा, वो उसके चेहरे को चूमते जा रहा था और शीबा भी धीरे धीरे इस मदहोश आलम में बहती जा रही थी।
अब बॉस ने शीबा की खूबसूरत गोलाइयों पर अपने हाथ रख दिया, और हलके हलके दबाने लगा और अपने आप से बोल रहा था- कितना हसीं हुस्न है, लाजवाब, आज तो इसमें डूब जाने को मन चाहता है।
और बॉस ने शीबा को अपनी बाँहों में भर कर सीने से लगा लिया।
शीबा के वक्ष उसके सीने से चिपके थे, और उसके हाथ शीबा के कूल्हों पर थे।
वो अपना हाथ धीरे धीरे गोल गोल घुमा रहा था।
अब वो धीरे उसकी पीठ को सहला रहा था।
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11-05-2017, 01:27 PM,
#9
RE: Chodan Kahani शौहरत का काला सच
शीबा की पीठ पर ब्लाउज की सिर्फ एक डोरी थी, बॉस ने वो डोरी खींच दी और अब वो शीबा के पीछे आ गया और उसके पीछे चिपक सा गया।
शीबा चिंहुक उठी, वो अपने नीचे गिरते ब्लाऊज को पकड़ने की कोशिश कर रही थी, लेकिन वो तो अब तब नीचे गिर चुका था और बॉस के हाथ उसके नंगे बदन पर रेंगने लगे, धीरे धीरे, उधर उधर, ऊपर से नीचे, और नीचे से ऊपर, उसके हाथ शीबा के यौवन को छू रहे थे।
बॉस उसके कन्धों को चूमने लगा, कभी वो उसके कानों को अपने दांतों के बीच दबा लेता, कभी उसके गालों को चूम लेता।
अब बॉस के होंठ शीबा के सुलगते होंटों को चूस रहे थे।
उन दोनों की रासलीला शुरू हो गई थी, शीबा भी खुलकर उनका साथ दे रही थी।
कब बॉस ने शीबा की साड़ी खींच, पेटिकोट का नाड़ा खोल उसको बेपर्दा कर दिया, अब शीबा के बदन पे सिर्फ़ एक कच्छी थी,
पता ही नहीं चला कि कब बॉस ने खुद भी अपने कपड़े उतार दिए।
अब दोनों एक दूसरे की बाहों में बेड पर ऐसे लिपटे पड़े थे जैसे चंदन के पेड़ से साँप लिपटा हुआ हो।
बॉस शीबा को बेतहाशा चूम रहा था और शीबा सिसकारियाँ ले रही थी, नागिन की तरह कमर को लहरा रही थी।
बॉस होंटों का रस निचोड़ कर अब उसके मद मस्त चूचों को दबा रहा था, उनको चूस रहा था।
शीबा- आ अई जानू… उफ… सर… आप सच में बहुत ज़्यादा सेक्सी हैं! आअम्फ़…आह… इतनी सी देर में आपने मुझे कितनी गर्म कर दिया, आह… मेरा जिस्म जलने लगा है…
अब वो धीरे धीरे अपने होठों को उसके बदन पर ऊपर से नीचे की तरफ ला रहा था, और हाथ शीबा की पैंटी में थे, और वो उसकी चिकनी चूत को अपने हाथों से महसूस कर रहा था और उत्तेजित हो गया था।
शीबा की आँखें बंद थी, वो अब धीरे धीरे कभी खोल कर देखती और फिर बंद कर लेती। अब बॉस शीबा के पैरों के बीच में बैठ गया और उसकी पैंटी उतारने लगा, उसके कूल्हों के नीचे दोनों हाथ लेजा कर उसकी पैंटी को उतार दिया।
अब शीबा की शीबा सी फ़ूली चिकनी चूत बॉस के सामने थी, उसमें से गुलाब की खुशबू आ रही थी क्योंकि शीबा नहाने के बाद अपनी चूत गुलाबजल से धोकर आई थी।
ऐसी मखमली गद्देदार चूत देखकर बॉस पागल सा हो गया, वो दीवानों की तरह चूत चाटने लगा, वो अपने हाथ से चूत के ऊपरी मोटे लबों को मसल देता और चाटते जाता।
शीबा की चूत अब कामरस छोड़ने लगी थी और उस पर पानी चमक रहा था।
बॉस जैसा मर्द तो उस देख कर और उग्र हो गया, उसकी ज़ुबान अपने आप उस चिकनी चूत के अन्दरूनी लबों को चाटने लग गई।
अब तो शीबा हवा में उड़ने लगी थी, उसका रोम रोम सुलगने लगा था।
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11-05-2017, 01:27 PM,
#10
RE: Chodan Kahani शौहरत का काला सच
बॉस ने चूत को चाट चाट के इतना मजबूर कर दिया कि वो बस बहने लगी, उसकी धारा बॉस पीने लगा जैसे समुद्र मंथन से अमृत निकल रहा हो।
शीबा कमर को उठा उठा कर मज़े लेने लगी।
जब यह रस पूरा चाट कर बॉस ने साफ कर दिया तब कहीं जाकर शीबा शिथिल हुई।
अब बॉस का 7″ का नाग फ़ुंफ़कार रहा था, उसको ऐसी रसीली चूत दिखाई दे रही थी तो उससे कहाँ बर्दाश्त होना था।
मगर बॉस अभी कुछ और भी चाह रहा था, उसने ज़न्न्त की चूत चोदने की उतावली नहीं दिखाई, वो खुद बेड पर बैठ गया और शीबा को कहा- अब जरा मेरे इस शेर को तो अपने मखमली होंटों का रस पिला दो ज़न्न्त… अपने लबों का इसे स्पर्श करवा दो तो इसे चैन मिले…
बॉस के बस कहने की देर थी कि शीबा ने बॉस के लण्द पर अपने रसीले अधर रख दिये, उसे चूम लिया।
शीबा खुद कोई मौका गंवाना नहीं चाह रही थी बॉस को खुश करने का…
वो सख्त लौड़े के सुपारे को अपनी जीभ से चाटने लगी…
बॉस तो जैसे हवा में उड़ने लगा।
शीबा ने धीरे-धीरे लौड़े को चूसना सुरू कर दिया, अब वो पूरा लौड़ा अपने मुँह में लेकर चूस रही थी।
बॉस ने अपनी आँखें बन्द कर ली थी, वो बस मज़ा ले रहा था…
जब उसके बर्दाश्त से बाहर हो गया तो उसने अपनी पिचकारी शीबा के मुंह में छोड़ दी- अहा… हाह… अहम्म… उम्माह… 
बॉस ने शीबा कए सिर के पीछे से उसे पकड़ लिया और तब तक लौड़ा बाहर नहीं निकालने दिया जब तक उसके वीर्य की एक एक बूंद शीबा के हलक से नीचे नहीं उतर गई…
शीबा को तो सांस लेना भी मुश्किल हो गया था… बड़ी मुश्किल से उसने खुद को बॉस के पंजे से छुड़ाया और झट से बाथरूम में भाग गई।
कुछ देर बाद शीबा अपने नंगे बदन को नुमाया करती बल खाती बाथरूम से बाहर आई तो उसके नंगे गोरे बदन को देख बॉस के लौड़े ने देर नहीं लगाई, वो फ़िर से खड़ा हो गया।
बॉस- अब मेरी जान, बस इसे अपनी चिकनी चूत में ले ले… देख यह पूरा तैयार है तुझे मज़ा देने के लिए… आ जा, लेट जा, आज तुझे चोद कर मैं तेरे नाजुक बदन पर अपनी मुहर लगा दूँ।
शीबा सीधी लेट गई बॉस ने उसकी टाँगें फेला दी, अब वो इतना उत्तेजित हो चुका था, उसकी साँसें तेज हो गई थी, वो अब और देर नहीं कर सकता था, वो उसके ऊपर आ गया और उसके पैरों को अपने पैरों से फैलाया और अपना खड़ा लंड उसकी चूत पर रख दिया।
शीबा- आओ मेरे जानू, अब मुझसे भी रहा नहीं जा रहा…
बॉस ने लौड़े पर दबाव बनाया और सर्र से सरकता हुआ लौड़ा शीबा की गीली चूत में जा समाया।
और धीरे धीरे लंड की गहराई का सफर कर रहा था।
अब झटकों का सिलसिला शुरू हो गया… शीबा बॉस का पूरा साथ दे रही थी, वो अपने चूतड़ उचका कर हिला हिला कर चुदने लगी।
बॉस भी रेलगाड़ी की तरह ‘फक फक फक’ लौड़ा शीबा की चूत में पेलने लगा।
शीबा- आह… आई… और ज़ोर से चोदो मेरे जानू… आह… आपकी जान आह… पूरा मज़ा लेना चाहती है… आज की आह… इस चुदाई को यादगार बना दो…
जैसे जैसे समय बीतता गया, रोमांच बढ़ता गया, रफ़्तार बढ़ती गई, कमरे में साँसों का तूफान सा आ गया।
बॉस का लौड़ा भी पूरे उफान पर था, शीबा की मक्खन जैसी चिकनी चूत की गर्मी उसे पिघलने पे मजबूर कर रही थी।
वो कब तक लड़ पाता ऐसी सुलगती चूत से…
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