Antarvasna sex stories मेरी मस्त दीदी
07-03-2017, 12:42 PM,
#1
Antarvasna sex stories मेरी मस्त दीदी
मेरी मस्त दीदी

चुदासी बहनों व चुदक्कड भाइयो ! मै यहाँ सिर्फ और सिर्फ असली वाकया ही आप लोगों से शेयर करता हूँ। अब ये आप लोगों पर डिपेंड करता है कि आप यकीन करे या ना करे। जिस तरह एक लंड हर समय किसी चूत की चाहत में तड़पता है उसी तरह हर चूत भी किसी न किसी लंड को पिलवाने को बेताब रहती है। आपको सिर्फ अपने आँख और कान खुले रखने है। आपको हर गली , हर मोहल्ले यहाँ तक कि हर घर में चुदासी चूत या चुदक्कड लंड आपके अनुसार मिल जायेगा। इस ग्रुप में यही सब बातें आप लोगों से मै यहाँ शेयर करूँगा।
आज मै आपको अपने मामू की मंझली बेटी की चुदाई की दास्तान सुनाता हूँ। मेरे मामू के तीन बेटियां है। वैसे तो तीनो एक से बढ कर एक खूबसूरत है परन्तु मंझली वाली का ज़बाब नहीं है। बड़ी वाली की शादी जम्मू में एक डॉक्टर के साथ हुई है। अब मामू के दो बेटियां शादी के लिए बचीं है। मंझली वाली मुझसे ११ महीने उमर में बड़ी है और इतनी खूबसूरत है कि आपको बता नहीं सकता। ३६ २४ ३६ वाली बिल्कुल परफेक्ट फिगर है उसकी। उसकी बड़े बड़े संतरे जैसी चुचियों को देख कर मेरा लंड अक्सर टायट होने लगता था और मै हमेशा उसकी मस्त चूत की कल्पना करता था। छोटी वाली भी बला की खूबसूरत है और मुझसे उमर में डेढ साल छोटी है। दोनों ही भरपूर जवान है।
बात पिछले साल गर्मियों की छुट्टियों की है। मेरी अम्मी ने अब्बू से कहा कि वह मामू के यहाँ जाना चाहती है , अब्बू बोले," यार मुझे तो छुट्टी नहीं मिल सकती , तुम मुन्ना ( मै ) के साथ जावेद के यहाँ चली जाओ। मै तुम दोनों का ट्रेन रिसर्वेशन करवा देता हूँ।" अगले हफ्ते मै अपनी अम्मी को लेकर मामू के यहाँ लुधियाना पहुँच गया। पूरे रास्ते मै दीदी की चूचियों और मस्त चूत के बारे में ही सोचता रहा। अबकी बार मैंने पक्का मन बना लिया था कि मै दीदी को ज़रूर चोदूंगा। जब हम लुधियाना पहुंचे तो मामू स्टेशन पर हम लोगों को लेने आ गए थे। आखिर मै ३ बजे शाम को अपनी प्यारी मस्त दीदी के दीदार को उनके घर पहुँच गया। मेरी मामी छत पर कपडे उठाने गयी थी , उन्हें जैसे ही हमारे आने की खबर मिली वह तुरंत सारे कपडे लेकर नीचे आने लगी। ज्यादा कपडे होने के कारण उन्हें आगे का कुछ नज़र नहीं आ रहा था अतः वह सारे कपड़ों के साथ सीडियों से नीचे फिसल कर आ गिरी जिससे उनका सर फट गया। तुरंत ही सब लोग मामी को लेकर अस्पताल पहुंचे जहाँ डाक्टर ने इलाज करने के बाद कहा, " अब पेशेंट को कोई खतरा तो नहीं है परन्तु इन्हें कम से कम दो दिन तक अस्पताल में ही रखना पड़ेगा क्योंकि सर में बहुत गहरी चोट लगी है " मामू ने कहा कि वह रात को अस्पताल में ही रुक जाते है बाकी सभी लोग अब घर जाये लेकिन अम्मी ने वही रुकने की जिद की तो आखिर में यह तय हुआ कि मै और दीदी अब घर जाये और अम्मी व मामू ही अस्पताल में रुक जाते है क्योंकि अब मामी भी पूरे होश में आ चुकी थी। दीदी मुझसे बोली," मुन्ना ! बाइक बहुत धीरे धीरे चलाना , मुझे बहुत डर लगता है" यह सुनकर सब हँसने लगे। मामू बोले, " मुन्ना ! ये जबसे मेरे साथ बाइक से गिरी है तबसे बहुत डरने लगी है , तुम धीरे धीरे ही ले जाना" मैंने हामी भर दी। मै दीदी को मामू की बाइक से लेकर घर चल दिया।
रास्ते में मैंने बाइक की स्पीड थोड़ी तेज़ कर दी जिससे दीदी डर कर मुझ से चिपक कर बोली," मुन्ना s s s s s , अगर तुमने बाइक धीमी नहीं की तो मै कूद जाऊँगी"
मुझे अपनी पीठ पर दीदी की रसीली चूचियां गड़ती सी महसूस हो रही थी जिससे मुझे बहुत मज़ा आ रहा था लेकिन फिर भी मैंने बाइक धीमी करते हुए बोला " सॉरी दीदी ! मुझे ध्यान नहीं रहा"
" ठीक है ठीक है लेकिन प्लीज अब बाइक तेज़ मत चलाना" दीदी बोली
मैंने कहा " ओ के दीदी ! लेकिन प्लीज अगर तुम किसी को बताओ नहीं तो मै थोड़ी सी व्हिस्की लेता चलू , वो क्या है कि एक तो रास्ते की थकान ऊपर से यहाँ आते ही यह हादसा हो गया"
दीदी बोली " ठीक है मुन्ना लेकिन ज्यादा मत पीना यह नुकसान करती है , मै अब्बू को भी मना करती हूँ और शायद उनकी शराब घर पर रक्खी भी होगी"
मैंने कहा " नहीं दीदी , मामू की शराब अगर पीयूँगा तो उन्हें पता चल जायेगा , मै रास्ते से ही लेता चलता हूँ और कोई सब्जी भी होटल से पैक करा लेते है , घर पर तुम और रज़िया ( छोटी बहन ) सिर्फ रोटी बना लेना"
" जैसा तुम ठीक समझो " दीदी बोली।
मेरी आँखों के सामने तो दीदी की मस्त मस्त चूत घूम रही थी सो मै फटाफट एक बोतल सिग्नेचर की व तीन अंडा करी पैक करा कर दीदी को लेकर घर चल दिया। मैंने घर जाकर रज़िया को बोला कि अब मामी बिलकुल ठीक है तुम निश्चिन्त हो कर अपने एंट्रेंस की तैय्यारी करो। मै और दीदी खाना तैयार करते है। मै किसी न किसी बहाने से दीदी के शरीर को टच कर रहा था जिसमे मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।
रज़िया बोली " ठीक है भैय्या ! लेकिन आप और दीदी ही खाना खा लेना , मेरी खाना खाने की अभी बिलकुल भी तबियत नहीं है , मै ऊपर वाले कमरे में अपनी पदाई करती हूँ अगर रात में भूख लगी तो मै आकर खा लूंगी , मेरे लिए चार रोटियां केसरोल में छोड़ देना " यह कहकर रज़िया घूम कर ऊपर जाने वाली सीडियों की तरफ बढ़ गयी।
तब मैंने पहली बार रज़िया को गौर से देखा कि वो भी बहुत हसीन और सेक्सी थी , पिंक कलर के स्लीवलेस टॉप और ब्लैक कैपरी में उसकी गदराई हुई मस्त गांड जो उसकी कमर से कम से कम छह इंच उठी हुई थी और तनी हुई चूचियां जैसे चुदाई का खुला निमंत्रण सा दे रही थी जब वह गांड हिलाती सीढियां चढ़ रही थी तो ऐसा लग रहा था कि रज़िया की गांड में कोई छोटी वाली बेरिंग फिट है जिस पर उसकी गांड टिक टाक टिक नाचती है। वो दीदी जितनी अगर सेक्सी नहीं थी तो कुछ कम भी नहीं थी , उसका शरीर किसी भी लंड को टायट करने के लिए पर्याप्त था। उस वक़्त मै अपने आप को किसी ज़न्नत में दो दो परियों के बीच किसी महाराजा के मानिंद महसूस कर रहा था। मै अपने लिए एक पैग बना कर दीदी के पास किचिन में ही आ गया। मेरी आँखे उनके रोटियों के लिए आटा बनाते समय ऊपर नीचे होती हुई चूचियो पर ही टिकीं थीं। जब दोनों हाथो पर जोर देती हुई दीदी नीचे को झुकती थी तो उनकी नारंगी जैसी दूधिया चूचिया कुर्ते के गले से आधे से भी ज्यादा नुमाया हो जाती थी , यहाँ तक कि उनकी ब्लैक ब्रा के कप्स मुझे साफ़ साफ़ नज़र आ रहे थे। मै किचिन के दरवाज़े में खड़ा एक हाथ से अपने लंड को सहलाते हुए व्हिस्की को धीरे धीरे सिप कर रहा था साथ ही साथ दीदी की चूचियों के पूरे मज़े ले रहा था।
-
Reply
07-03-2017, 01:04 PM,
#2
RE: Antarvasna sex stories मेरी मस्त दीदी
तभी दीदी रोटियों के लिए आटा तैयार करके बोली " मुन्ना ! मेरे सर में बहुत दर्द होने लगा है जिससे कुछ भी करने की हिम्मत नहीं पड़ रही है , वैसे भूख भी बहुत लग रही है"
" दीदी तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो , मै तुम्हारे साथ अभी फटाफट रोटियां बनवा लेता हूँ , तुम बेलती जाना और मै गैस पर सेंक लूँगा और अगर तुम कहो तो रज़िया को नीचे बुला लेता हूँ लेकिन अगर तुम बुरा न मानो तो एक बात कहूँ" मैंने अपने लिए दूसरा पैग बनाते हुए कहा
" बोल मुन्ना , मै बुरा क्यों मानूँगी , तू तो मेरा अपना भाई है सगा नहीं है तो क्या हुआ" दीदी ने प्यार से मेरे बाल सहलाते हुए कहा।
" दीदी आपके सर में दर्द सिर्फ आज की भाग दौड़ और मामी को लेकर टेंशन की वजह से हो रहा है , मै यह जो व्हिस्की लाया हूँ यह सारी मर्जों की एक दवा है , सिर्फ दो घूँट आज लेकर देखो , तुम बिलकुल ठीक हो जाओगी" मै दीदी के मक्खन लगाते हुए उनके चहरे को अपने दोनों हाथों में लेकर बोला।मेरा लंड आज पूरी तरह से चूत के लिए दीवाना था , मै आज सोच चुका था कि आज मै किसी ना किसी चूत में अपना लंड डाल के रहूँगा।
" तेरा तो दिमाग खराब हो गया है , शराब से भी कोई ठीक होता है और फिर ये कितनी कडवी होती है पता नहीं लोग कैसे इस नामुराद चीज़ को मज़े ले ले कर पीते है , एक बार अब्बू ने मुझे ब्रांडी दी थी जब मुझे सर्दी लग गयी थी तो मुझसे बिल्कुल भी नहीं पी गयी थी मैंने तुरंत ही सारी की सारी थूक दी थी और फिर उसके बाद भी बहुत देर तक जी ख़राब रहा था।और मुन्ना इसे पीने के बाद नशा भी तो हो जाता है , मैंने सड़क पर कई लोगों को नशे में झूमते हुए देखा है। सो अगर मैं तेरी बात मान के किसी तरह पी भी लूं तो मुझे नशा नहीं होगा क्या और अगर अब्बू को पता चल गया तो वो मुझे तो जान से ही मार डालेंगे" दीदी ने प्यार से मुझसे रोटियाँ बेलते हुए कहा।
" दीदी , मामू ने तुम्हे नीट ब्रांडी पीने को दे दी होगी इसीलिये वह तुम पी न सकीं , मै तुम्हे कोल्ड ड्रिंक में डाल के थोड़ी सी देता हूँ जिसके ऊपर तुम बिना साँस लिए थोड़ी सी सलाद तुरंत खा लेना , फिर तुम्हे उसका टेस्ट पता भी नहीं चलेगा उसके बाद न तुम्हारे सिर में दर्द रहेगा और ना ही बिल्कुल भी थकान महसूस होगी , और तो और भूख भी खुल कर लगेगी। आप क्या सोचती है , मै क्या फालतू में ही इस कडवी चीज़ को इतनी देर से गटक रहा हूँ " मैंने गैस पर रोटी सेंकते हुए दीदी के साथ उनकी मस्त मस्त चूचियों का मज़ा लेते हुए कहा।
" लेकिन ??????? " दीदी ने कहा
" अरे दीदी , जो सड़क पर तुमने लोगों को झुमते हुए देखा है वो एक एक बोतल घटिया वाली शराब पीने से होता है , मै तो बढ़िया वाली व्हिस्की की बात कर रहा हूँ वो भी सिर्फ दो घूँट , दो घूँट में तो किसी को पता भी नहीं चलेगा कि तुमने मूड फ्रेश किया है , मेरी तरफ देखो तीन पैग पीने के बाद भी क्या मै झूम रहा हूँ , मेरी बात मान लो और आज मेरे कहने से सिर्फ दो घूँट मार लो तो सब ठीक हो जाएगा" मैंने दीदी के कंधे पर हाथ रख के उनके कुर्ते में झांकते हुए बड़े प्यार से मनाते हुए कहा
" हाँ हाँ मुझे सब दिखाई दे रहा है तेरी आँखे कितनी लाल हो रही है , देखना , देखना तू भी थोड़ी देर में झूमने लगेगा " दीदी बोली। वो किसी भी तरह से पटाने में ही नहीं आ रहीं थीं सो मैंने आख़िरी दांव चला ," मै तो सिर्फ एक सुझाव दे रहा था आगे तुम्हारी मर्जी और कौन सा मै तुम्हारा सगा भाई हूँ जो तुम मेरी बात मानोगी" मै बुरा मानने का नाटक करते हुये बोला।
" ऐसी बात नहीं है पगले तू जो कहे तो मै ज़हर भी पी लूंगी तूने ये बात कैसे कह दी पर यह बहुत ही कड़वी होती है। और अगर वह मुझे कडवी लगी तो मै तुरंत थूक दूंगी" दीदी ने बेमन से हामी भर दी।
उस वकत मेरा दिल बल्लियों उछल रहा था।हम दोनों ने मिल कर रोटियाँ बना लीं थीं सो मैंने वहीं किचन में अपने और दीदी के लिए दो पैग कोल्ड ड्रिंक डाल कर तैयार कर लिए। मैंने दीदी को बोला " जैसा मैंने समझाया वैसे ही करना "
दीदी ने हामी भरते हुए एक साँस में ही पैग ख़तम करके फ़टाफ़ट ढेर सारी सलाद खा कर गहरी सी साँस ली।
" ले अब तो खुश है तू" दीदी ने मुझसे प्यार से कहा
" हाँ दीदी और तुम भी देखना कि कैसे तुम्हारा सिरदर्द और थकान छूमन्तर होती है" मैंने खुश होते हुए उनके गालों को चूमते हुए कहा । मुझे आज अपना सपना अब सच होता दीख रहा था। एक पैग लगाने के बाद दीदी ने खाना लगाना शुरू कर दिया।
अचानक दीदी ने अजीब सी आवाज़ में कहा " अरे मुन्ना , ये मुझे क्या हो रहा है , अजीब सी फीलिंग हो रही है , हाथ पैर झनझना से रहे है"
"अरे दीदी , यही तो इस दवाई का कमाल है , अन्दर जाते ही सारी प्रोब्लम सोल्व , चलो मै फटाफट खाना लगवाता हूँ , क्या तुम एक घूँट और लोगी मेरी प्यारी दीदी " मैंने उनकी ठोस चूचियों को ललचाते हुए देख कर कहा।
"नहीं मुन्ना नहीं मुझे नशा हो जायेगा मुन्ना , मैंने कभी भी शराब नहीं पी और रज़िया भी घर में ही है" दीदी ने डरते हुए कहा।
" अरे दीदी , दो घूँट में भी कहीं नशा होता है और वैसे भी रज़िया ऊपर पढाई कर रही है , नीचे मेरे और तुम्हारे अलावा है ही कौन ? मै आपका भी एक छोटा सा पैग अपने साथ ही बना लेता हूँ , आखिर अपने भाई का साथ नहीं दोगी मेरी प्यारी दीदी" मै दीदी की कमर में पीछे से हाथ डाल कर चिपकाते हुए बोला।अब मेरा लंड उनकी सलवार के ऊपर से ही उनकी जांघो के जोड़ को टच करने लगा और उनकी चूचियों को मै अपने सीने पर साफ़ साफ़ महसूस कर रहा था। उस वक़्त मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था , जी कर रहा था मै दीदी को ऐसे ही चिपका कर उनकी जांघो के जोड़ पर अपना लंड रगड़ता रहूँ।
"देख मुन्ना , मैंने तेरे कहने पर एक बार शराब पी ली पर अब तू प्लीज जिद मत कर , मुझे तो अभी से ही पता नहीं कैसा महसूस हो रहा है " दीदी ने धीरे से अपने को मेरी बांहों से छुडाते हुए कहा।
" अरे दीदी ये क्या तुमने शराब शराब लगा रक्खी है , ये शराब नहीं अच्छी वाली व्हिस्की है व्हिस्की और जो तुम अजीब सा महसूस कर रही हो ना वो सारी थकान और टेंशन दूर होने की फीलिंग है " मैंने फिर से उन्हें अपने सीने से लगा कर अपना लंड रगड़ते हुए कहा
" तू बहुत शैतान और जिद्दी हो गया है मुन्ना अपनी बात दूसरों से जिद्द करके मनवाना तो तेरी पुरानी आदत है , चल तेरी बात रखते हुए मै सिर्फ दो घूँट ही और ले लेती हूँ परन्तु उसके बाद किसी भी कीमत पर नहीं लूंगी" दीदी मेरी बांहों से निकल कर खाना लगाते हुए बोली
मैंने अबकी बार दीदी का और अपना पटियाला पैग बना कर दीदी को देते हुए अपनी आँखों में आती शैतानी चमक छुपाते हुए कहा " दीदी इसे भी वैसे ही पी जाओ जैसे पहला पिया था"
"ठीक है शैतान " दीदी ने कह कर वह पैग भी पीकर बुरा सा मुंह बनाते हुए फटाफट ढेर सारी सलाद खा ली। मैंने भी अपना पैग ख़तम करके एक पैग और लिया फिर हम दोनों खाना खाने बैठ गए। खाना खाते हुए मेरी निगाह उनकी चुचियों पर ही टिकी थी। वह जब भी खाने के लिए थोड़ा सा झुकती थी तो कुर्ते के वी शेप गले से उनकी आधी मस्त दूधिया चूचियां नुमाया हो जाती थी। यह सीन देख कर मेरा लंड टायट हो रहा था।
" तेरा ध्यान कहाँ है मुन्ना ?" दीदी ने हल्की सी लडखडाती आवाज़ में पूंछा।
"कुछ नहीं दीदी , बस आपके बारे में ही सोच रहा था" मैंने सकपकाते हुए ज़बाब दिया।
"मेरे बारे में ? क्या यह सोच रहा है कि मै नशे में तो नहीं हो गयी ? तो तू बिल्कुल सही सोच रहा है ... मुझे अजीब सी फीलिंग हो रही है , दिल में गुदगुदी हो रही है व हाथ पैरों से कंट्रोल ख़तम हो रहा है" दीदी ने खाना ख़तम करते हुए कहा।
दीदी की यह बात सुनकर मेरा दिल बल्लियों उछलने लगा , मै समझ गया कि दीदी अब नशे में पूरी तरह टुन्न हो चुकी है। अब मुझे सिर्फ उसे चुदने के लिए तैयार करना था सो उसी प्रयास में दीदी को मक्खन लगाते हुए बोला ,"अरे कोई नहीं दीदी , यही तो इस दवा का असर है कि इन्सान सारी थकान व सारी टेंशन भूल कर मस्त हो जाता है , चलो मै आपको बेड तक ले चलता हूँ " मै मन ही मन बहुत खुश हो रहा था। आज मुझे दीदी की चूत में अपना लंड क्लीअरली पिलते हुए दिख रहा था।मैंने दीदी को बांह पकड़ कर सहारा देते हुये उठाया। दीदी चलते हुए लडखडा रही थी , उन्होंने कस कर मेरी बांह पकड़ रखी थी। मैं उनकी बांह कम पकड़ रहा था अपनी उँगलियों से उनकी चूचियों को टच ज्यादा कर रहा था , अचानक मैंने सहारा देने के बहाने उनके चूतड पर हाथ रख कर हल्के से दबा दिया जिसको दीदी ने कोई नोटिस नहीं लिया। शायद अब उन्हें अच्छी तरह नशा हो चुका था। अब तो मेरा मन बल्लियों उछल रहा था व लंड भी दीदी की मस्त चूत के दीदार के लिए दीवाना हो रहा था। मैंने दीदी को बेडरूम में ले जाकर कहा ," दीदी , आप तब तक कपडे चेंज करके नाईट ड्रेस पहनो मै टॉयलेट होकर आता हूँ"
"ठीक है मुन्ना , लेकिन मेरी नाइटी वार्डरोब से निकाल कर देता जा" दीदी ने बुरी तरह से लडखडाती आवाज़ में कहा।
मै दीदी को नाइटी देकर अटैच्ड बाथरूम में घुस गया , मैंने जानबूझ कर दरवाजा खुला छोड़ दिया और दरवाजे के पीछे से छुप कर दीदी को कपडे बदलते हुए देखने लगा। दीदी ने बड़ी मुश्किल से सलवार का नाडा खोल कर सलवार उतार पाई फिर कुरता उतारने लगी। मैंने नीचे देखा कि दीदी ने चड्डी नहीं पहन रक्खी थी। यह देख कर अब मेरा लंड कंट्रोल से बाहर होने लगा सो मैंने पेंट की चैन खोल कर अंडरवीयर से लंड को बाहर निकाल कर सहलाने लगा , मानों उसे तसल्ली दे रहा था कि चिंता मत करो आज तुम्हे दीदी की चूत में ज़रूर पेलूँगा। अचानक दीदी कुरता उतारते हुए लडखडा गयी , मैंने मुनासिब मौक़ा जान कर पीछे से कमर में बांहे फंसा कर दीदी को थाम लिया। दीदी पूरी तरह से नंगी खाली ब्रा में मेरी बांहों में थी। मैंने भी दीदी की गांड से अपना लंड जो में सहला रहा था पीछे से चिपका दिया था।
" हाय अल्ला , मुझे जल्दी से नाइटी दे" दीदी ने बुरी तरह से शरमाते हुए कहा।
" कोई बात नहीं दीदी , अगर आपकी तबियत सही नहीं है तो इसमें शर्माना कैसा ? आखिर बीमारी में डाक्टर के सामने भी तो कभी कभी हमें नंगा होना पड़ता है और फिर मै कोई गैर तो हूँ नहीं आखिर आपका प्यारा सा भाई ही तो हूँ।" यह कह कर मै अपना लंड दीदी की गांड से रगड़ने लगा और अपने हाथों से उनका चिकना पेट सहलाता जा रहा था।
" नहीं पगले , मुझे बहुत शरम आ रही है , मुझे जल्दी से नाइटी दे " दीदी ने लडखडाती आवाज़ में कहा। मैंने बेमन से दीदी को छोड़ कर नाइटी उठा कर दी। मेरा लंड अभी भी पेंट की चेन के बाहर निकला फनफना रहा था। उस वक़्त मेरा मन कर रहा था कि दीदी को उठा कर बेड पर पटक दूँ और एक झटके में ही पूरा लंड उनकी मस्त चूत में ठांस दूँ लेकिन मै पूरे सब्र से काम ले रहा था क्योंकि ज़रा सी ज़ल्दबाजी सारे बने बनाये खेल को चौपट कर सकती थी। दीदी ने नाइटी पहन ली थी। मैंने उन्हें सहारा देकर बेड पर लिटा दिया और किसी तरह ठूंस ठांस कर अपने लंड को पेंट के अन्दर कर बेमन से के चेन लगा ली। मै दीदी से बोला " दीदी क्या मै थोड़ी देर आप के कमरे में ही रुक जाऊ ? अभी मुझे नींद नहीं आ रही है"
" अरे इसमे पूछने की क्या बात है , तू तो मेरा छोटा सा प्यारा शैतान भाई है। अब देख ना , तूने मुझे ही आज शराब पिला दी पर कुछ भी कहो , ये चीज़ बड़ी शानदार है , मेरा पूरा शरीर जैसे फूल सा नाज़ुक हो गया है व शरीर में एक अजीब सी गुदगुदी हो रही है" दीदी ने लडखडाती आवाज़ में पूरा प्यार ज़ताते हुए कहा।
-
Reply
07-03-2017, 01:04 PM,
#3
RE: Antarvasna sex stories मेरी मस्त दीदी
मेरी मस्त दीदी--3
मैं भी अपने कपडे चेंज करके लुंगी बनियान में उनके बेड पर बगल में ही लेट गया। मेरी निगाह दीदी की नाइटी के ऊपर से उनकी मस्त चूत को महसूस कर रही थी। दीदी की पलकें बोझिल सी हो रही थी। अब मुझे डर लगने लगा कि दीदी कहीं नशे में सो ना जाएँ अतः मै उन्हें जगाये रखने को बोला," क्या दीदी , कितने दिन बाद तो हम मिले है और तुम्हें नींद आ रही है। लगता है आप मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं करती , कुछ बातचीत करो ना मेरी प्यारी दीदी" यह कह कर मै उनके बगल में लेट गया और मैंने प्यार जताने के से अंदाज़ में अपना एक हाथ उनकी चूची को टच करते हुए पेट पर व अपनी एक टांग उनकी टांग पर रख कर छोटे बच्चे की तरह जिद करते हुए कहा।
" धत पगले ! तू तो मुझे बहुत पसंद है , चल बता क्या बात करू" दीदी बोली
मै समझ चुका था कि दीदी अब पूरे नशे में है और अब यह सही वक़्त है उनकी छुपी वासना को जगाने का अतः मै बोला ," अच्छा अगर मै आप को बहुत पसंद हूँ तो बताइए ना कि मेरी क्या क्या चीज़ आपको पसंद है"
" तेरा सब कुछ मुझे पसंद है पगले " दीदी ने हँसते हुए कहा
" ये मेरा शरीर ? ये भी आपको पसंद है ? देखिये ना कितनी मेहनत से जिम जा जा कर यह शरीर बनाया है" मैंने शोख अंदाज़ में धीरे से अपना हाथ उनकी चूची पर रख कर टांग से टांग रगड़ते हुए कहा। क्योंकि अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था लेकिन दीदी का भी चुदने के लिए तैयार होना ज़रूरी था।
" हाँ , मैंने देखा है , बहुत गठीला शरीर निकल आया है , अब तो सारी लडकियाँ मेरे भैय्या पर मरतीं होंगी। " दीदी मेरे हाथ व टांग की गुस्ताखियों से बेखबर बोलीं
" आपने कहाँ से मेरा शरीर देख लिया ? मैंने तो आपके सामने कपडे भी नहीं उतारे" मैंने धीरे धीरे उनकी चूचियों को सहलाते हुए कहा।
" वो मैंने कपड़ो के ऊपर से ही अंदाज़ा लगा कर कहा" दीदी फुल नशे में टुन्न बोली
" अंदाजा क्यों लगाया ? मै गैर हूँ क्या , मुझसे कह नहीं सकतीं थीं कि मुन्ना ज़रा कपडे उतार मुझे तेरा शरीर देखना है" मैंने दिखावटी नाराज़गी से कहा
" अरे मुन्ना , नाराज़ हो गया क्या ? चल अब दिखा दे " दीदी मुझे खुश करतीं हुई बोली
मैंने बनियान उतार कर जानबूझ कर अपनी लुंगी भी उतार दी क्योंकि मेरा लंड फुल टायट हो कर अंडरवीअर में तम्बू बनाये खड़ा था।
मै बेड के बगल में खड़े होकर बोला " लो अच्छी तरह से देख लो मेरा शरीर , ये किसी गैर का नहीं तुम्हारे अपने प्यारे भाई का ही तो है"
" हाँ सही कहता है तू , वाह बहुत सुन्दर , क्या सीना निकल के आया है" दीदी बोली
" ओफ्फो , फिर वही बात , छूकर देख लो ना , फिर कहोगी कि मैंने तो सिर्फ देखा था छुआ कहाँ था" मैंने दाना फेंकते हुए कहा
दीदी लडखडाती हुई उठी और मेरी तरफ बढी , मैंने लपक कर उन्हें बांहों में संभाल कर सीने से चिपका कर कहा ." संभल कर दीदी , चोट लग जायेगी " यह कह कर मैंने थोड़ा सा झुक कर उन्हें बांहों में कस कर भर लिया और अपना लंड उनकी दोनो जांघो के बीच में फंसा दिया।
" हुम् म , वाकई बहुत ही शानदार शरीर है मुन्ना तेरा "
"अरे मेरी प्यारी दीदी , ये किसी गैर का नहीं तुम्हारे अपने भाई का शरीर है इत्मीनान से पूरे के पूरे शरीर को छूकर , सहलाकर देखो ना "
" हाँ वो तो मै देख रही हूँ " दीदी गहरी गहरी सांसों के साथ बोली। मै समझ गया कि अब लोहा धीरे धीरे गरम हो रहा है सो मैंने उनकी नाइटी के ऊपर से ही अपना लंड उनकी चूत से रगड़ना शुरू कर दिया। मै उन्हें कस कर चिपका के उनकी पीठ भी सहलाता जा रहा था।अब दीदी मेरे सीने से चिपकी गहरी गहरी सांसे ले रही थी , मै समझ गया कि लोहा अब काफी गरम है सो मैंने धीरे से उन्हें बेड पर लिटा दिया और उनके बगल में लेटता हुआ बोला "दीदी हुस्न तो तुम्हारा भी लाज़बाब है , अभी जब मैंने तुम्हे नंगा देखा तब समझ में आया , हालाँकि मै ढंग से देख नहीं पाया था , मेरी प्यारी दीदी , मुझे भी अपना शरीर दिखाओ ना"
" धत बेशरम , बहनों से ऐसे थोड़े ही कहते है " दीदी लजाते हुए बोली
" इसमें बेशर्मी की क्या बात है , मै अपनी बहन का ही तो शरीर देखने को कह रहा हूँ किसी गैर से तो कह नहीं रहा और फिर अभी आपने भी तो मेरा शरीर छू छू कर देखा और भी कुछ देखना बाकी रह गया हो तो वह भी देख लो लेकिन मुझे भी आपका शरीर देखना है , मेरी प्यारी दीदी , अगर तुम मुझे वाकई गैर नहीं समझती हो व अपना ही समझती हो तो मुझे अपना शरीर ज़रूर देखने दोगी" मै बिल्कुल छोटे बच्चे की तरह जिद करते हुए उनकी नाइटी उतारने लगा।
" तू बड़ा ही जिद्दी है रे मुन्ना , चल तू भी अपने मन की कर ले वरना तू सोचेगा कि दीदी ने ज़रा सी बात के लिए मना कर दिया" दीदी ने गरम सांसों के साथ लडखडाती आवाज़ में कहा।
मै समझ गया कि दीदी अब नशे के साथ साथ गरम भी हो रही थी। मैंने फटाफट उनकी नाइटी उतार कर फ़ेंक दी। दीदी शायद नशे में भूल गयीं थीं कि उन्होंने चड्डी नहीं पहनी है।
" दीदी ये ब्रा भी उतार देता हूँ प्लीज , मुझे भी आपका सीना देखना है " मैंने ब्रा के हुक खोलते हुए कहा।
" आज तू अपने मन की कर ले मुन्ना , देख ले तुझे जो कुछ भी देखना है" दीदी ने कहा
मैंने जल्दी से दीदी की ब्रा भी उतार के फ़ेंक दी। अब दीदी पूरी तौर से मादरजात नंगी मेरी बगल में लेती थी। मै अब अपने पर कंट्रोल न कर सका और छोटे बच्चे की तरह उनकी गुलाबी चूचियों को मुंह में लेकर चूसने लगा। अब दीदी के मुंह से हल्की हल्की सिसकारियां निकालनी शुरू हो गयीं थीं। मैंने दीदी से कहा " ओ मेरी प्यारी दीदी , आज तुमने जो मेरे साथ किया है वो शायद मेरी सगी बहन भी नहीं करती , क्या शानदार चूचियां है तुम्हारी बिल्कुल बड़े बड़े नागपुरी संतरे की तरह , और चूत .. वो तो लाज़बाब है , क्या मस्त हल्के हल्के रोंयेदार चूत है आपकी " मै दीदी की चूत को सहलाते हुए बोला
" ये बहुत गलत बात है मुन्ना कि तूने मुझे तो बिल्कुल नंगा कर दिया और तू अभी तक अंडरविअर पहने है" दीदी ने शोख आवाज़ में गहरी सांसों के साथ जैसे मेरे मन की बात कह दी
" सॉरी दीदी , मै आपकी मस्त मस्त चूत और शानदार चूचियों में अपना लंड आपको दिखाना भूल गया " यह कह कर मैंने फटाक से अंडरवियर उतार कर फ़ेंक दिया। जैसे ही लंड आज़ाद हुआ वह भी फनफना के खडा हो गया।
" हाय अल्ला , कित्ता मोटा और बड़ा लंड है तेरा मुन्ना " दीदी मेरे लंड को देखकर आश्चर्य से बोली।
" अरे दीदी , हाथ में लेके इत्मीनान से देखो ना , वैसे और किस किस के लंड आपने देखे है" मैंने दीदी के हाथ में अपना लंड थमाते हुए शरारत से पूछा .......................
" धत बेशरम , वो तो कभी कभी किसी किसी का सड़क के किनारे पेशाब करते चुपचाप लंड देखा है या फिर एक बार अब्बू का देखा था , छूकर तो आज पहली बार देख रही हूँ " दीदी ने शरमाते हुए बताया
" जी भर के देखो मेरी प्यारी दीदी , आखिर तुम भी तो मुझे अपनी चूत और चूचियों से मज़ा लेने दे रही हो तो भाई होने के नाते मेरा भी तो कोई फ़र्ज़ बनता है " मैंने उनकी मलाईदार चूत को सहलाते हुए कहा। मै समझ चुका था कि दीदी अब पूरी तरह से गरम हो चुकी है और अब मुझे सिर्फ उनकी चूत को चुदने के लिए तैयार करना था। सो मैने दीदी के होंठो को चूसते हुए उन्हें अपने सीने से कस कर चिपका लिया और लंड को उनकी चूत के ऊपर रगड़ने लगा।
" मेरी प्यारी दीदी , तुम मेरा लंड चूसना पसंद करोगी क्या ?" मैंने दीदी से पूछा
" आज मै सब पसंद करुंगी मुन्ना , आज तो तूने मेरी सारी मन की मुरादे पूरी कर दी मेरे राजा " दीदी कामुक अंदाज़ में बोली
" ज़रा मुझे भी तो बताओ मेरी प्यारी दीदी , तुम्हारी क्या क्या मन की मुरादे है " मैंने दीदी को चुदने के लिए तैयार करते हुए कहा
" हर लडकी एक उमर के बाद यह सब करना चाहती है जो तू मेरे साथ कर रहा है " दीदी बोली।
दीदी शायद अभी भी थोडा शरम की वजह से यह नहीं कह पा रहीं थीं कि वो चुदासी है व चाहती है कि मै अपना लंड उनकी चूत में पेल कर उन्हें खूब चोदूं लेकिन मै उनके बिना कहे ही सारी बात समझ गया। मै उठ कर दीदी की चूत के ऊपर मुंह करके उल्टा लेट गया अब मेरा लंड दीदी के होंठो को छू रहा था।
" लो दीदी , अब मै आपकी चूत चूसूंगा और आप मेरा लंड चूसो" यह कह कर मैंने दीदी की चूत में उंगली करते हुए उनकी फुद्दी को चूसना शुरू कर दिया। दीदी ने भी मेरे लंड को मुठ्ठी में लेकर सटासट चूसना शुरू कर दिया। दीदी अब फुल मस्ती में आ चुकी थी वह उचक उचक कर अपनी फुद्दी चुसवा रही थी। मै भी दीदी की चूत में गपागप उंगली करते हुए उनकी फुद्दी चूस रहा था। यह करते करते हम दोनों ने ही पानी छोड़ दिया जिसे हमलोगों ने तुरंत ही चाट लिया।
-
Reply
07-03-2017, 01:05 PM,
#4
RE: Antarvasna sex stories मेरी मस्त दीदी
थोड़ी देर बाद मैंने दीदी के बगल में लेट कर उनकी चूचियां मसलते हुए कहा ," वाह दीदी , कसम से ऐसा मज़ा ज़िंदगी में कभी नहीं मिला, तुम्हारा हुस्न लाज़बाब है मेरी दीदी"
" तू भी तो कुछ कम नहीं मेरे शैतान भाई और तेरा लंड तो वाकई बहुत ही शानदार है , ऐसा लंड तो अब्बू का भी नहीं है , मैंने एक बार चुपके से उनको अम्मी को चोदते देखा था"
दीदी अब पूरी तरह से मेरे साथ खुल के बात कर रही थी सो मैंने भी उनको चुदने के लिए तैयार करने की गरज से उनकी चूचियों को मसलते हुए कहा ," और क्या देखा तुमने दीदी ?" ..........
" कुछ नहीं मै रात को पेशाब करने के लिए उठी तो देखा कि अम्मी के कमरे की लाइट जल रही है व दरवाजा थोड़ा सा खुला है , मैंने जब झाँका तो देखा कि अब्बू अम्मी की सलवार का नाडा खोल रहे थे। मै चुपचाप देखती रही , उन्होंने फिर अम्मी का कुरता भी उतार कर उन्हें बिल्कुल नंगा कर दिया , अम्मी ने भी अब्बू की लुंगी और बाकी के कपडे उतार कर उन्हें नंगा कर दिया उस वक़्त मैंने अब्बू का लंड देखा था , इस उमर में भी बिल्कुल काले नाग की तरह फुँफकार रहा था उस वक़्त मुझे वो सबसे मस्त लंड लगा था क्योंकि मूतते हुए लोगों के लंड ढीले ढाले होते थे , ये सतर लंड मैंने पहली बार ही देखा था , उस वक़्त मुझे लगा कि अब्बू का ये छह इंची लंड ही सबसे मस्त है लेकिन तेरा लंड तो उनके भी लंड से कहीं ज्यादा मोटा और लम्बा है" नशे में टुन्न दीदी ने मेरे लंड को सहलाते हुए बताया
" और क्या देखा दीदी , पूरी बात बताओ ना" मैंने उनकी चूचियों को मसलते हुए पूछा
" अब्बू ने अम्मी को बेड पर घोड़ी की तरह खड़ा करके उनके पीछे से चूत पर अपना लंड टिका कर एक झटके में पेल दिया और अम्मी की कमर थाम के सटासट अपना लंड अम्मी की चूत में अन्दर बाहर करते हुए चोदने लगे। " दीदी फुल बेशर्मी के साथ अपनी अम्मी की चुदाई की दास्तान बताती बोली।
मैंने देखा कि मेरा लंड फिर से फनफनाने लगा था सो मैंने दीदी की चूत को सहला कर देखा कि वो भी पनीली हो रही है। अतः मैंने दीदी को चोदने की गरज से कहा ," इसका मतलब मामी को चुदने में बहुत मज़ा आ रहा होगा"
" और नहीं तो क्या , चूत को तो वैसे भी एक अदद लंड की हमेशा चाहत रहती है" दीदी मेरे चूत रगड़ने से मस्त होते हुए कमर हिलती हुयी बोली
" तो दीदी , इसका मतलब तुम्हारी चूत भी लंड की चाहत रखती होगी , अगर हाँ तो मेरा लंड क्या तुम्हे पसंद नहीं आया , कसम से दीदी एक बार आज़मा के तो देखो , मामू से भी ज्यादा ढंग से मस्त बना दूंगा" मैंने अपने लंड को दीदी की चूत पर कसके रगड़ते हुए कहा
" तूने तो मेरे मन की बात ही छीन ली पगले , जबसे तेरे लंड के मेरी चूत ने दीदार किये है वो चुदने के लिए बेकरार हुई जा रही है" दीदी मस्त होते हुए बोली " आज तू इसे ज़रा जम के चोद दे मेरे भैय्या , ये मेरी चूत पता नहीं कब से तेरे ही जैसे लंड के लिए तड़प रही है "
" क्यों नहीं दीदी , एक भाई का लंड अगर अपनी बहन की चूत की प्यास भी नहीं बुझा सकता तो लानत है ऐसे भाई और उसके लंड पर" मैंने दीदी की चूचियों को मसलते हुए कहा " पर एक बात सच सच बताओ दीदी , क्या पूरे लुधियाने में तुम्हे आजतक कोई ऐसा लंड नहीं मिला जो तुम्हारी चूत की खुजली मिटा सके "
" अब्बू के डर से आज तक सिर्फ उंगली से ही काम चलाया है मुन्ना , वो खुद तो रोज़ रोज़ अम्मी की चूत में अपना लंड पेल के पूरा मज़ा लेते है और मेरे बारे में बिलकुल भी नहीं सोचते कि आखिर ये भी एक चूतवाली है और इसका भी किसी लंड से चुदवाने का मन होता होगा " दीदी भुनभुनाते हुए बोली
" कोई बात नहीं दीदी , आज मै सारी कसर पूरी कर दूंगा , वो जम के तुम्हारी चूत को अपने इस लंड से चोदूंगा कि तुम ताउम्र याद रक्खोगी" मैंने दीदी के रसीले होंठो को चूमते हुए कहा। मैंने दीदी को टाँगे पेट की तरफ मोड़ कर पूरी तरह से फ़ैलाने को कहा , दीदी ने तुरंत आज्ञा का पालन करते हुए अपनी टाँगे फैला दी। अब जैसे दीदी की चूत मेरे लंड को चोदने का खुला निमंत्रण दे रही थी। मैंने दीदी की चूत पर अपने लंड का सुपाडा टिका कर कस के उनके कंधे पकड़ लिए और एक ही धक्के में अपना आधा लंड दीदी की चूत में ठांस दिया।
" हाय अल्ला , बहुत दर्द हो रहा है भैय्या , प्लीज अपना लंड बाहर निकल लो ना " दीदी ने गिडगिडाते हुए कहा " पता नहीं अम्मी कैसे अब्बू से मज़े ले ले के चुदवाती हैं "
" यह सिर्फ पहली बार होता है दीदी , उसके बाद तुम्हे भी मामी की तरह भरपूर मज़ा आयेगा , बस सिर्फ कुछ धक्के बर्दाश्त करलो मेरी प्यारी दीदी , फिर तुम देखना कितना मज़ा आता है " मै दीदी को सांत्वना देता हुआ बोला
" ठीक है भैय्या पर ज़रा आहिस्ते से चोदना , कहीं तुम्हारी इस बहन की चूत फट न जाये " दीदी कराहते हुए बोली
" तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो , ऐसा कभी हो सकता है
कि मै अपनी दीदी की चूत को फाड़ दूं , कभी नहीं , आखिर तुम्हारी चूत जीजा को भी तो चोदनी है ,तुम निश्चिन्त हो कर सिर्फ ये दो चार धक्के बर्दाश्त कर लो प्लीज " मै दीदी के निप्पलों को मसलते हुए बोला
मैंने अपने लंड को थोडा सा बाहर खींच कर एक झटके में ही पूरा का पूरा दीदी की चूत में ठांस दिया , मेरा पूरा लंड दीदी की चूत में चरचराता हुआ जड़ तक पहुँच गया। दीदी के मुंह से चीख निकल गयी मैंने कस कर दीदी का मुंह बंद करते हुए सटासट चार पांच धक्के उनकी चूत में ठोंक दिए फिर दीदी का मुंह धीरे से खोलते हुए पुछा " अब कैसा लग रहा है दीदी " मेरा लंड बराबर उनकी चूत को चोदे जा रहा था।
" अब तो कुछ ठीक है पर उस वक़्त तो ऐसा लगा कि जान ही निकल गयी , आ s s s s ह मेरे भैय्या और चोदो सही में अब तो बड़ा मज़ा आ रहा है" दीदी सिसकारियां लेते हुए बोली
" चिंता मत करो दीदी , आज मै तुम्हारी चूत की सारी की सारी खुजली मिटा दूंगा " ये कहते हुए मैंने चोदने की स्पीड और बढा दी। अब मै अपने लंड को दीदी की चूत में फुल स्पीड से अन्दर बाहर कर रहा था। दीदी भी पूरी मस्ती के साथ अपनी चूत उठा उठा के मेरे लंड से चुदाई का भरपूर मज़ा ले रही थी। अचानक दीदी का शरीर थोडा तन के ढीला पड़ गया और मुझे अपने लंड पर गरम गरम महसूस होने लगा , मै समझ गया कि दीदी झड गयी मैं भी उन्हें अब पूरी ताक़त से चोदने लगा और फिर मेरे लंड ने भी दीदी की चूत में अपना गाढ़ा गाढ़ा वीर्य छोड़ दिया। हम दोनों ही एक दूसरे की बांहों में हांफते हुए लाइट जलती हुई छोड़ कर नंगे ही कब सो गए हमें पता ही नहीं चला शायद यह व्हिस्की का भी असर था। अचानक .........
अचानक कमरे के दरवाजे पर खटका सा हुआ , चूँकि मै निश्चिंत होकर सो रहा था क्योंकि घर में कोई था ही नहीं सिर्फ रज़िया को छोड़ कर , वह भी ऊपर पढाई कर रही थी सो मैंने आँखों में हल्की सी झिर्री बना कर दरवाजे की तरफ देखा तो मेरी तो गांड ही फट गयी क्योंकि दरवाजे में रज़िया खड़ी हम लोगों को इस अवस्था में देख रही थी। हम दोनों ही पूरी तरह नंगे एक दूसरे से चिपके लेटे थे , दीदी ने एक हाथ से मेरा लंड थामा हुआ था और मेरे एक बाजू पर सर रख कर आराम से सो रही थीं और मेरा एक हाथ उनकी मस्त दूधिया चूचियों पर था। ऐसी हालत में रज़िया हम लोगों को दरवाजे में खडी देख रही थी। मै सोच रहा था कि अब यह सबको बता देगी कि रात में जब यह ऊपर पढाई कर रही थी तो नीचे मैंने दीदी को किस तरह से चोदा। मेरी अम्मी और अब्बू को ज़ब यह पता चलेगा तो वह बिना थूक लगाये ही मेरी गांड मार लेंगे।इन सारी बातों से बचने का सिर्फ एक ही रास्ता था कि मै रज़िया की कुंवारी चूत में भी अपना लंड पेल के उसको भी दीदी की तरह चोद देता लेकिन रज़िया को पटाना बहुत ही मुश्किल लग रहा था हालाँकि उसकी चूत पूरी तरह से चुदने के लायक हो चुकी थी परन्तु उसकी किसी भी हरकत से ऐसा नहीं लग रहा था कि वह अपनी चूत को चुदवाने की इच्छा रखती है।
तभी रज़िया दरवाजे से हटकर किचिन में चली गयी और थोड़ी देर बाद उसके सीढियों से ऊपर जाने की आवाज़ आयी। मेरी आँखों से नींद कोसों दूर जा चुकी थी व कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या किया जाय। आखिर में मैंने सब कुछ ऊपर वाले पर छोड़ दिया कि दीदी को तो मै चोद ही चुका हूँ अब जो कुछ भी होगा देखा जाएगा।
तभी दीदी ने सोते में मेरे लंड को अपनी मुठ्ठी में दो तीन बार ऊपर नीचे करके बडबडाया ," ओ मुन्ना ! ज़रा कस के चोदो ना , फाड़ के रख दो अपनी दीदी की चूत को , पता नहीं कब से ये तुम्हारे जैसे लंड के लिए तरस रही थी" यह कह कर दीदी ने अपनी एक टांग उठा कर मेरी टांग पर रख ली और दो तीन बार मेरी जांघ से अपनी चूत को रगड़ दिया। दीदी शायद सोते में भी अपनी चुदाई का सपना देख रहीं थीं। यह सब देख कर सारी टेंशन भूल कर मेरा लंड फिर से अंगड़ाई लेने लगा। मैंने धीरे से थोड़ी सी करवट लेकर अपने हाथ से दीदी की मक्खन मलाई जैसी गांड को मसलना शुरू कर दिया। अब मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था , मैंने दीदी का हाथ अपने लंड से हटा कर अपने गले में डाल लिया और पूरी तरह से करवट लेकर अपना लंड उनके दोनों जांघों के जोड़ पर टिका कर रगड़ना शुरू कर दिया। दीदी को भी हौले हौले मज़ा आने लगा था सो उन्होंने एक टांग उठा कर मेरी कमर पर चढ़ा ली। अब मेरे लंड को चूत के पूरी तरह से नज़ारे हो गए। मैंने अपने लंड को दीदी की चूत पर टिका कर सुपाडे को चूत में अन्दर बाहर करने लगा। मैंने दीदी के रसीले होंठो को चूसते हुए अपनी जीभ दीदी के मुंह में डाल दी , अब दीदी की चूत भी पनीली हो चुकी थी उन्होंने धीरे से आँखे खोलते हुए मेरी जीभ को लोलीपॉप की तरह चूसना शुरू कर दिया। मेरा लंड अब दीदी की चूत को फिर से चोदने के लिए पूरी तरह से तैयार था। दीदी भी अपनी चूत को चुदवाने के लिए बेताब नज़र आ रही थी। मैंने भी देर न करते हुए दीदी को अबकी बार घोड़ी बना कर खडा कर दिया और उनके पीछे की तरफ जाकर पनीली चूत पर लंड को टिका कर एक झटके में ठांस दिया।
" अरे बहनचोद ! आज तो मज़ा आ गया , चोद मेरे भैय्या और जम के चोद अपनी दीदी की चूत को, फाड़ के रख दे आज तू , अगर मुझे पता होता कि तू मेरी चूत में अपने इस शानदार लंड को ठांसना चाहता है तो मै पहले ही तुझसे चुदवा लेती , पता नहीं कबसे मेरी चूत लंड की प्यासी थी मेरे राजा ...... आआआह चोद खूब चोद आज तू" दीदी मस्ती में बडबडाई।
मेरा लंड दीदी की चूत को धकाधक चोद रहा था। फिर मैंने दीदी की चूत से लंड को बाहर खींच लिया
" क्या हुआ मादरचोद ! लंड क्यूं बहार निकाल लिया।" दीदी थोडा गुस्से से बोली
" अरे कुछ नहीं दीदी , ज़रा तुम्हारे दूसरे छेद को ट्राई करने का दिल कर रहा है , तुम बस चुपचाप मज़े लेती रहो। " मैंने दीदी की गांड को थूक से गीला करते हुए कहा
" क्या बोला भोसड़ी के ! तू मेरी गांड मारेगा , नहीं नहीं तेरा ये हलब्बी लंड मेरी गांड बर्दाश्त नहीं कर पायेगी , तू चूत में पेल ना , अब तुझे क्या मेरी चूत में मज़ा नहीं आ रहा है।" दीदी ने अपनी गांड को थोड़ा सा उंचा करके मेरे लंड को दोबारा अपनी चूत में लेने की कोशिश करते हुए कहा
" तुम बस चुपचाप घोड़ी बनी पिलवाती रहो दीदी और देखती जाओ मै तुम्हे कैसे कैसे मज़े दिलवाता हूँ " मैंने दीदी की गांड पर अपने लंड का सुपाडा टिकाते हुए कहा। मै जानता था कि चूत और गांड बिलकुल डिफरेंट होतीं है सो मैंने दीदी की कमर को कसके पकड़ के अपने तकरीबन एक चौथाई लंड को गांड में ठांस दिया।
" हाय हाय मार डाला इस मादरचोद ने " यह कह कर दीदी बेड पर उल्टी ही लेट गयी। मैंने भी झट से दीदी की कमर को छोड़ कर उनकी बगल में हाथ डाल कर कंधे जकड लिए और अपने पैरों से उनकी टांगों को चौड़ा कर फैला दिया लेकिन इस उठापटक में मेरा लंड दीदी की गांड से बाहर निकल गया।
-
Reply
07-03-2017, 01:05 PM,
#5
RE: Antarvasna sex stories मेरी मस्त दीदी
" मुन्ना प्लीज ! मेरी गांड मत मार , बहुत दर्द हो रहा है .... तू मेरी चूत क्यों नहीं मारता है बहनचोद " दीदी गिडगिडाते हुए बोली लेकिन मेरा लंड दीदी की फुल टायट गांड में जाकर दुबारा घुसने के लिए बुरी तरह फनफना रहा था और दीदी बुरी तरह से जकड़ी मेरे नीचे बेबस भी थी सो मैंने उनकी चीखों पर ध्यान न देते हुए अपने लंड पर थूक लगाकर फिर से उनकी गांड पर टिका कर अबकी बार एक झटके में तकरीबन आधा ठांस दिया।
" हाय हाय कोई मुझे इस बहन के लौड़े से बचाओ , कमीने मेरी गांड फट गयी है मादरचोद , अब तो छोड़ दे " दीदी मेरे नीचे फडफड़ाने की कोशिश करते हुए चिल्लाई। मै तो जैसे बहरा हो गया था। ये मौक़ा मुद्दत बाद मेरे हाथ आया था जिसे मै किसी भी कीमत पर गवां नहीं सकता था सो मैंने उसी पोजीशन में थोड़ी सी कमर उचका कर एक कस के धक्का मार कर पूरा का पूरा लंड दीदी की गांड में ठांस दिया।
" हाय अल्ला , मर गयी ........ अरे मादरचोद छोड़ दे , मेरी गांड बुरी तरह से फट गयी है .......... ऐसा लग रहा है कि गांड में किसी ने पूरा का पूरा भाला घुसा दिया है ........ छोड़ दे बहनचोद ...... छोड़ दे " दीदी अब बुरी तरह से चिल्ला रही थी लेकिन मै जानता था कि उनकी चीखें सुनने वाला वहां कोई नहीं था सो मै निश्चिन्त होकर उनकी चीखें अनसुनी करता हुआ गांड मार रहा था। अब दीदी की गांड पूरी तरह से रवां हो चुकी थी सो वह अब शांत होकर गांड मरवा रही थी। फिर मैंने दीदी की गांड से लंड को बाहर निकाल लिया और उन्हें चित्त लिटा कर उनकी चूत में फिर से पेल दिया। दीदी की चूत गांड मरने से भकाभक पानी फ़ेंक रही थी सो मैंने अपने लंड को निकाल कर अपना लंड और उनकी चूत को ढंग से पास पडी नाइटी से पोंछ लिया। अब मैंने दुबारा अपने फनफनाते लंड का सुपाडा दीदी की चूत पर टिका कर एक झटके में पूरा का पूरा लंड जड़ तक ठांस दिया।
" हाय हाय कुत्ते !! आज क्या तू मेरे सारे छेद फाड़ कर ही दम लेगा कमीने ....... मादरचोद ....... भोसड़ी के ...... मुझसे क्या दुश्मनी है जो इतनी बेरहमी से ठोंक रहा है , ये तो देख लेता कि चूत सूखी है या गीली" दीदी फिर से चिल्लाई
" चिंता मत कर मेरी रानी दीदी ......... आज तेरे सारे छेद रवां हो जायेंगे ...... तेरी सारी की सारी खुजली मिटा दूंगा " मैंने दीदी की रसीली मस्त मस्त चूचियों को कस कस के मसलते हुए उनकी चूत की पटरी पर अपने लंड की रेलगाड़ी दौडाते हुए कहा।
" आआआआआह बहनचोद ! आज तो तूने वाकई सारे नट बोल्ट ढीले कर दिए कमीने ..... ऒऒऒओह ............ आआआआआह ............. हा s s य ......... हाआआआय" कहते हुए दीदी का शरीर अचानक तन कर ढीला पड़ गया , मेरे लंड पर दीदी की चूत ने गरमागरम पानी छोड़ दिया। मेरा लंड भी अब फुल स्पीड से दीदी की चूत में अन्दर बाहर हो रहा था , उनकी चूत से पानी रिस रिस कर उनकी गांड के चौड़े छेद में जा रहा था। मुझे भी अब अपना स्टेशन नज़र आ गया था सो मेरे लंड ने दीदी की चूत में गाढ़ा गाढ़ा वीर्य छोड़ दिया। अब हम दोनों ही बुरी तरह से थक कर चूर हो चुके थे। हम दोनों एक दूसरे की बांहों में पड़े हांफ रहे थे फिर कब हम दोनों उसी पोजीशन में सो गए ये पता ही नहीं चला। 
हमेशा की तरह सुबह तकरीबन साढ़े छः बजे मेरी आँख खुली तो मैंने देखा दीदी बेड पर हाथ ऊपर को किये टाँगे फैलाये सो रही थी। उनकी बड़ी बड़ी गुलाबी मस्त चूचियां उन्नत पर्वत शिखरों सी मुझे ललकारती लग रहीं थीं। मैंने उठ कर उनकी चूत को इस वक़्त ध्यान से देखा तब पता चला कि रात में जो मैंने बुरी तरह से चोदा था इस वज़ह से वह सूज गयी थी व चारों तरफ खून निकल कर सूख कर चिपका था, थोडा नीचे झुक के देखने पर पता चला कि गांड का छेद अभी तक चौड़ा था।
फिर मैंने अपने लंड पर एक निगाह डाली जो रात की कुश्ती के बाद अब मस्त होकर शांत पड़ा था। मैंने चारों तरफ देखा , हर तरफ सन्नाटा था जिसका मतलब था कि रज़िया अभी तक नीचे नहीं आयी थी। मैंने सोच लिया था कि इस रज़िया नाम की मुसीबत का कोई ना कोई हल तो ढूँढना ही पड़ेगा। मैं धीरे से दीदी के बालों को सहलाते हुए उनके होठों को चूसने लगा। दीदी ने कराहते हुए धीरे से आँखे खोल दीं। " अब उठ जाओ दीदी , सुबह हो चुकी है। कभी भी कोई आ सकता है "
दीदी भी सारी बात समझते हुए बिना देर लगाए एक झटके में उठ कर बेड से उतर गयीं। जैसे ही उन्होंने बेड से ज़मीन पर पैर रक्खे उनके मुंह से एक चीख सी निकल गयी ,
" हाय अल्ला s s s s s s मर गयी " कहते हुए दीदी फिर से बेड पर धम्म से बैठ गई।
" क्या हुआ दीदी ! सब ठीक तो है " मैंने दीदी के नंगे बदन को सहलाते हुए पूछा
" क्या खाक़ ठीक है , कमीने पूरी रात चोद चोद के सारे दरवाजे खिड़कियाँ सब तोड़ डाले , कोई भी छेद नहीं छोड़ा तूने हरामी जिसमे अपना लंड न पेला हो और अब पूछता है क्या हुआ दीदी " दीदी गुस्से और दर्द से भिन्नाते हुए बोली।
" अरे दीदी ! रात गयी बात गयी और फिर मज़ा तो तुमने भी पूरा लिया था , कुछ पाने के लिए कुछ तो खोना ही पड़ता है पर तुम चिंता मत करो मै अभी तुम्हे नाश्ते के बाद दवा लाकर दे दूंगा जिससे दो खुराकों में ही तुम रात तक बिल्कुल ठीक हो जाओगी। अब फ़टाफ़ट नहा धोकर तैयार हो जाओ कहीं रज़िया नीचे ना आ जाये और फिर हमें अस्पताल भी तो जाना है" मैंने दीदी को समझाया
" रज़िया तो आठ बजे से पहले नीचे नहीं आयेगी लेकिन हाँ हमें जल्दी से अस्पताल के लिए तैयार हो जाना चाहिए" दीदी ने कहा
किसी तरह से दर्द को बर्दाश्त करते हुए दीदी उठ कर खड़ी हुई और नंगी ही बाथरूम की तरफ चल दी। पूरी रात चुदने के बाद अब उसमें किसी भी तरह की शर्म या हया बाकी नहीं बची थी। उसकी टाँगे v शेप में ज़मीन पर पड़ रहीं थीं , उसने अपने निचले होंठ को दाँतों से कस कर दबा रक्खा था। हाय हाय करते हुए किसी तरह वह बाथरूम में घुस गयी लेकिन उसने दरवाजा खुला ही छोड़ दिया था। अन्दर से छु र्र र्र र्र र र र र र की आवाज़ मुझे सुनायी दी , मै समझ गया कि अब वह पेशाब कर रही थी। मैं भी फ़टाफ़ट बेड से नीचे उतरा और अपनी बनियान व अंडरविअर ढूंढ कर पहने व ऊपर से लुंगी लपेट ली। तभी मेरी निगाह बेडशीट पर चली गयी जिस पर खून के ढेर सारे निशान थे। मैंने अलमारी से दूसरी बेडशीट निकाल कर तुरंत बदली और उस बेडशीट को वाशिंग मशीन में डाल कर ब्लीच और सर्फ़ मिला के मशीन ऑन कर दी। तभी दीदी ने बाथरूम से आवाज़ लगाई , " अरे मुन्ना ! ज़रा तौलिया तो देना " मै तौलिया लेकर बाथरूम में पहुँचा , मैंने देखा दीदी नहा धोकर नंगी खडी थी। पूरी रात ढंग से चुदने के बाद सुबह नहा कर उनका हुस्न और निखर आया था लेकिन मैंने अपने अन्दर के ज़ज्बातों को दबाते हुए उन्हें तौलिया देकर कहा , " दीदी ! रात में एक गड़बड़ हो गयी है , जब हम तुम चुदाई करके सो रहे थे तो रज़िया नीचे शायद खाना लेने आयी थी और उसने तुम्हे मेरे बगल में नंगे लेटे देख लिया। वह समझ गयी होगी कि मैं तुम्हे चोद चुका हूँ "
" सत्यानाश ! ये तो बहुत बड़ी गड़बड़ हो गयी मुन्ना , अगर उसने अब्बू को बता दिया तो वो मुझे जान से मार डालेंगे" दीदी घबराते हुए बोली
" दीदी घबराने से काम नहीं चलेगा , हमें ठन्डे दिमाग से इस समस्या का हल ढूँढना होगा " मैंने दीदी को समझाते हुए कहा
" लेकिन इस समस्या का आखिर क्या हल हो सकता है " दीदी ने कपडे पहनते हुए कहा
" एक हल मेरे दिमाग में आ रहा है , अगर किसी तरह से रज़िया चुदवाने को तैयार हो जाय तो सारी प्रॉब्लम ही सोल्व हो जायेगी" मैंने दीदी को आइडिया देते हुए कहा
" तुम्हारा दिमाग खराब हो चुका है , पहले तो शायद वह चुदने को तैयार ही नहीं होगी और अगर मान लो वो तैयार हो भी गयी तो तुम्हारे इस मूसल जैसे लंड से उसकी छोटी सी चूत का क्या हाल होगा ये सोचा है क्या ? " दीदी ने थोडा गुस्से से कहा
" अरे दीदी ! कल रात तुम्हारी चूत भी तो छोटी सी थी लेकिन मेरा पूरा का पूरा लंड पिलवा पिलवा के खूब चुदी , गलत कह रहा हूँ मै ? मैंने दीदी को समझाते हुए कहा
" हाँ हाँ , रात की चुदाई अभी तक भुगत रही हूँ , कमीने दो कदम भी चलना मुश्किल होरहा है , टाँगे फैला फैला के चल रही हूँ .... चूत अभी तक सूज़ के कुप्पा रक्खी है और गांड वो तो इतना दर्द कर रही है कि लेट्रिन भी बड़ी मुश्किल से कर पाई हूँ नाशपीटे , तू बहुत ही बुरी तरह से चोदता है। रज़िया तो मर ही जायेगी तेरी इस चुदाई से, पूरे साढ़े चार साल मुझसे छोटी है " दीदी ने रात की भड़ास निकालते हुए कहा
लेकिन मै जानता था कि बिना रज़िया को चोदे इस समस्या का हल नहीं निकलेगा सो मैंने भी किसी ना किसी तरह दीदी को पटाने की ठान ली और हम दोनों सोती हुयी रजिया को घर में ही लॉक करके अस्पताल को निकल गए। अस्पताल में मामू और अम्मी हम दोनों का ही वेट कर रहे थे। जब हम दोनों वहाँ पहुँच गए तो अम्मी और मामू बारी बारी फ्रेश हो आये और हम सब ने मिल कर नाश्ता कर लिया।
" क्यों रे मुन्ना ! तू यह सोच कर आया होगा कि मामू के यहाँ चल कर मौज मस्ती करेंगे लेकिन तू इस लफड़े में पड़ गया" मामू मुझसे बोले
" अरे नहीं मामू ! ये तो बाई चांस की बात है कि मामी गिर गयीं और फिर सिर्फ आज की ही तो और बात है , कल तो मामी घर पहुँच ही जायेगी। मौज मस्ती दो दिन बाद सही , कौन सी आफत आ जायेगी" मैंने ज़बाब दिया
" अच्छा अब तुम लोग घर जाओ , रजिया भी जाग गयी होगी " मामू ने कहा
" ठीक है मामू ! अगर कोई बात हो तो फोन कर देना " यह कह कर मै दीदी को बाइक पर बिठा कर घर की तरफ चल दिया। रस्ते में मैंने दीदी के लिए दो खुराक दवा कीं लीं और घर पहुँच गया। घर पहुँच के हमने देखा कि रजिया अभी तक नीचे नहीं उतरी है सो मैंने दीदी को दवा खाने की हिदायत दी और खुद रज़िया को देखने ऊपर की तरफ चल दिया।
-
Reply
07-03-2017, 01:05 PM,
#6
RE: Antarvasna sex stories मेरी मस्त दीदी
मेरी मस्त दीदी--6
ऊपर जाकर मैंने रज़िया के कमरे के दरवाजे पर नॉक करने को हाथ रक्खा लेकिन वह हल्के से धक्के से ही अपने आप खुल गया।मैंने अन्दर जा कर देखा तो ऊपर की सांस ऊपर और नीचे की सांस नीचे रह गयी।रज़िया बेड पर करवट से एक टांग पेट की तरफ मोड़े हुए लेटी सो रही थी , इस पोजीशन में उसकी स्कर्ट पलट के कमर से जा लगी थी।रज़िया की चड्डी उसकी चूत से कसके चिपकी हुयी थी। स्कर्ट के नीचे से जांघ तो जांघ , उसकी गहरे नीले रंग की चड्डी के साथ साथ उसकी चूत की मस्त संतरे जैसी फांके क्लियर नज़र आ रहीं थीं। उसके दूधिया तरबूज जैसे चूतड़ देख कर मेरा लंड टाइट होने लगा और मेरा दिल उसकी उस वक़्त इन संतरे की फांकों जैसी चूत को चूमने को मचल उठा। किसी तरह अपने दिल को काबू में करके मैंने उसे धीरे से आवाज़ दी लेकिन वह उसी तरह पडी सोती रही तो मै आगे बढ़ कर उसके पास बेड पर जाकर बैठ गया और धीरे से उसके कंधे पर हाथ रखकर उसको हिलाते हुए कहा , " रज़िया ! उठ जा , देख बहुत समय हो गया है "
" ऊँ ऊँ ऊँ ......... अभी मुझे और सोना है , पूरी रात तो पढाई करी है " वह सोते में ही कुनमुनाई और अपने हाथ ऊपर की तरफ फैलाते हुए उसी पोजीशन में सीधी लेट गयी , उसका एक पैर का तलवा उसकी दूसरी जांघ से लगा हुआ बेड पर था कुल मिला कर उसके पैरों की पोजीशन कुछ ।> इस प्रकार थी। ये सब देख कर मेरे ऊपर तो बिजली ही गिर पडी। इस पोजीशन में उसकी अब हर चीज़ कपड़ों के ऊपर से भी क्लियर नज़र आ रही थी। उसके केले के पेड़ के तने जैसी चिकनी और दूधिया जांघे देख कर मेरा लंड गनगना उठा। अब मुझे कंट्रोल करना असंभव लग रहा था। मैंने धीरे से उसकी स्कर्ट बिलकुल बिल्कुल उठा कर उसके पेट पर रख दी। अब उसकी पाव रोटी की तरह फूली हुयी चूत पूरी तौर से मेरी नज़रों के सामने थी। मै उसकी चूत को चूमने के लिए नीचे झुका तो मेरी निगाह दोनों फांकों के बीच के बड़े से धब्बे पर टिक गयी जो शायद उसके चूतरस से बना था। मैंने उसी धब्बे के ऊपर दोनों फांकों के बीच अपनी नाक घुसा गहरी सी सांस लेकर देखा तो चूतरस की मस्त खुशबू से मेरा लंड उसकी चूत में जाने को बेताब होकर फनफनाने लगा। मेरी इच्छा उसकी चड्डी को एक साइड करके उसकी चूत में लंड पेलने की हो रही थी। मैंने धीरे से उठ कर उसकी मस्त सीधी खडी पर्वत चोटियों पर हाथ रख कर उसे फिर से हिलाकर कहा ," रज़िया ! मेरी प्यारी बहन , अब उठ जा ... देख तो कितना सवेरा चढ़ आया है " जबकि मै मन ही मन ऊपर वाले से दुआ कर रहा था कि वह और गहरी नींद में सो जाये और मै उसकी चूत में अपना लंड ठांस कर अपना गरमागरम पानी निकाल सकूं। वो थोडा सा कुनमुना कर फिर सो गयी। अब मै धीरे से उसके पास ही बगल में लेट गया और अपना लंड पेण्ट की चेन खोल कर आज़ाद कर दिया। अब मैंने धीरे से अपना एक हाथ उसके पेट पर रख कर अपने को उससे चिपका लिया।अब मेरा लंड उसकी चिकनी जांघ से रगड़ रहा था और मै ये पूरी तरह से समझ चुका था कि रज़िया बहुत ही गहरी नींद सोती है। अब मैंने धीरे से उसका टॉप उठा कर उसकी गर्दन तक खींच दिया। उसकी बड़ी बड़ी नागपुरी संतरे जैसी दूधिया चूचियां काले रंग की ब्रा को फाड़ कर जैसे बाहर आने को उतावली थीं। मैंने ब्रा के ऊपर से ही उसकी चूचियों को सहलाना शुरू कर दिया। मेरा लंड रज़िया की चूत में घुसने को बुरी तरह से टन्ना रहा था। मुझ पर भी भयंकर रूप से वासना का भूत सवार हो चुका था। मैं धीरे से उसकी चूत को चड्डी के ऊपर से सहलाते हुए मज़े ले रहा था तभी मुझे दरवाजे पर दीदी दिखाई दी। उन्होंने गुस्से से हाथ से इशारा करके मुझे बुलाया। मरता क्या न करता , मै रज़िया के टॉप को नीचे करके बेड से उठ खड़ा हुआ। मेरी हालत ठीक वैसी ही हो रही थी जैसे बरसों से भूखे इन्सान के आगे से कोई भोजन की थाली उठा ले। मैंने भुनभुनाते हुए दीदी से आकर पूछा ," क्या है ? क्यूं बुलाया मुझे , थोड़ी देर बाद ही बुला लेती।
" पहले ये अपना लंड अन्दर कर और नीचे चल , इस अपने लंड को देखा है बिल्कुल मूसल के माफिक खड़ा है और उसकी चूत देख ...... झेल पायेगी ? जब मेरी यह हालत है कि चूत अभी तक सूज के पकोड़ा रक्खी है , ठीक से चला भी नहीं जा रहा तो रज़िया तो मर ही जायेगी " दीदी मुझे नीचे खींचते हुए बोली
लेकिन मेरा लंड कुछ भी सुनने को तैयार नहीं था। मैं सीढ़ियों पर ही दीदी को कस के चिपकाते हुए उनके होठों को चूसते लगा व मेरा एक हाथ उनकी गांड को तो दूसरा उनकी चूचियों को मसल रहा था। थोड़ा सा ऊँ ऊँ करने के बाद दीदी भी मेरी जीभ को लोलीपोप की तरह चूसती हुई लंड को पकड़ कर उसकी खाल को आगे पीछे करने लगीं।
" देख देख ! तेरा लंड कैसे फनफना रहा है , जबकि रात में ही चोद चोद कर मेरी चूत का कबाड़ा किया है और अभी नौ बजे ही फिर से चोदने को फड़फड़ाने लगा। मेरी चूत तो अभी तक सूजी हुई दर्द कर रही है " दीदी मेरे लंड की खाल को कस कस के आगे पीछे करती हुई बोली। हालांकि मैंने सुबह ही उनको तीन टेबलेट जिनमे दो दर्द व सूज़न दोनों के लिये व एक एंटीबायोटिक दे दीं थीं परन्तु दवा को भी तो असर होने के लिए वक़्त चाहिए था शायद यही कारण था कि दीदी की चूत अभी भी कसक रही थी।

" देखो दीदी ! चूंकि रज़िया ने हम दोनों को चुदाई करते हुए देख लिया है इसलिए अब उसका चुदना बहुत ज़रूरी है वरना अगर कल उसने मामू या मामी को सारी बातें बता दीं तो आप अंदाज़ा लगा सकतीं है कि हम लोगों का क्या हाल होगा , इसीलिए मैं उसकी चूत को चोदने की सुबह से ही ज़ुगत लगा रहा था और शायद मैं कामयाब भी हो जाता लेकिन आपने सब गड़बड़ कर दी। दीदी ! चूत कितनी भी देखने में छोटी लगे , वह बड़े से बड़े लंड को अपने में समाने की ताक़त रखती है। हाँ जब पहली बार चुदती है तो थोड़ा सील टूटने पर दर्द ज़रूर होता है लेकिन वह दर्द चुदाई के मज़े के आगे कुछ नहीं होता , अभी बारह घंटे भी तो नहीं हुये है तुम्हारी चुदाई किये हुये और तुम इतना जल्दी सब भूल गयीं ? " मैंने दीदी को समझाने की कोशिश करते हुए कहा
" ठीक है मुन्ना ! लेकिन उसे ज़रा आहिस्ते से चोदना , मेरी तरह उसकी चूत को भी फाड़ के मत रख देना " दीदी ने डरते हुए कहा
" तुम बस बाहर का ध्यान रखना अन्दर कमरे में मैं अकेला ही रजिया को संभाल लूँगा "
फिर हम दोनों उसी पोजीशन में एक दूसरे के नाज़ुक अंगों को छेड़ते हुए नीचे की तरफ बढ़ने लगे। नीचे पहुंचते पहुंचते हम लोग सिर्फ अंडर गारमेंट्स में थे। तभी दीदी ने उचक कर मेरे होठों को अपनी जीभ से चाटने लगी। मैंने उनकी पीठ पर अपने हाथों को लेजा कर ब्रा के हुक खोल दिए जिससे उनके दोनों दूधिया कबूतर अपने पंख फडफडा कर आज़ाद हो गये। फिर थोड़ा सा झुक कर मैंने उनके तने हुए गुलाबी निप्पलों को बारी बारी चूसते हुए चुभलाना शुरू कर दिया , मैंने दोनों हाथों से कस कर उनकी मांसल गांड को पकड़ कर अपने से चिपका लिया जिससे मेरा झटके लेता हुआ लंड भी दीदी की चड्डी के ऊपर से ही उनकी चूत को चूमने लगा। मैं अपने होठों को दीदी से चुसवाता हुआ उनकी चड्डी में अन्दर हाथ डाल कर उनकी गांड को मसले जा रहा था। दीदी की चड्डी भी नीचे की तरफ उनके चूतरस से पूरी तरह भींग चुकी थी।
मुझसे अब बिलकुल भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था लेकिन मुझको पता था कि उनकी चूत भले ही पनीली हो रही हो परन्तु वह अभी चुदने की कन्डीशन में नहीं थी और अगर गलती से भी मेरा लंड उनकी चूत में घुस गया तो उसको भोसड़ा बनने में वक़्त नहीं लगेगा सो मैंने दीदी को उठा कर पीठ के बल बेड पर पटक कर एक झटके में उनकी चड्डी उतार कर फ़ेंक दी। दीदी की क्लीन शेव्ड चिकनी चूत रात की ज़बरदस्त चुदाई की वजह से अभी भी अच्छी खासी सूजी रखी थी फिर भी दीदी की चूत में सुबह की अपेक्षा बहुत आराम था। मैंने बड़ी ही फुर्ती से अपने कपड़े उतार कर फेंकते हुए दीदी को अपने नीचे दबोचे लिया। मैं उनके होंठो के रस को चूसते हुए दोनों हाथों से चूचियों को इस तरह मसल रहा था जैसे रोटी बनाने के लिए लेडीज़ आटे को मसलतीं है। मेरे लंड को भी उनकी चूत की खुशबू शायद लग गयी थी सो वह भी थोड़ा इधर उधर मुंह मार कर अब ठिकाने पर पहुँच कर बुरी तरह झटके खाने लगा था लेकिन मैं चूत की हालत की वजह से अपने ऊपर कंट्रोल रखे था। मैंने बेड पर घुटनों के बल बैठ कर दीदी के होठों पर लंड का सुपाड़ा टिका के एक झटके में आधे से ज्यादा लंड उनके मुंह में ठांस दिया।
ऑक . क . क .... की आवाज़ के साथ दीदी ने फुर्ती से लंड बाहर खींचने के बाद सटासट चूसना शुरू कर दिया। मैं एक हाथ से उनके सिर को पकडे हुये दूसरे हाथ से उनकी चूचियों को बारी बारी मसल रहा था। दीदी एक हाथ से मेरा लंड थामे चूस रहीं था और दूसरे हाथ से भकाभक अपनी चूत में उँगली कर रहीं थीं। मज़े की मस्ती में मेरी व दीदी दोनों की ही आँखे बंद हो चुकीं थीं। इसी पोजीशन में थोड़ी देर के बाद मेरे लंड ने गाढे गाढे वीर्य की पिचकारी दीदी के मुंह में चला दी। दीदी भी शायद झड चुकीं थीं क्योंकि अब वह दोनों हाथो से पकड़ कर मेरे लंड को चाट चाट कर साफ़ कर रहीं थी।अब हम दोनों नंगे बेड पर पड़े अपनी साँसे दुरुस्त कर रहे थे लेकिन मेरा लंड झड़ने के बाद भी सीधा खडा रह रह कर झटके ले रहा था , उसका सुपाड़ा एक छोटे टमाटर की तरह सुर्ख लाल हो रहा था जैसे चोद ना पाने के गुस्से से अपना चेहरा लाल करके मुझे घूर रहा था। दीदी अभी तक आँखे बंद किये पडीं गहरी गहरी साँसे ले रहीं थी। हाँलांकि पूरी रात सो न पाने और ऊपर से इतनी मेहनत की थकान के कारण मेरी भी आँखे बंद हो रहीं थीं लेकिन मेरे पास रजिया को चोदने का सिर्फ आज का ही वक़्त था , कल तो सबको अस्पताल से आ ही जाना था। और फिर पता नहीं चुदने के बाद रजिया की क्या हालत होती , मुझे यह भी तो देखना था सो मैंने फटाफट उठ कर अपने कपडे पहने और दीदी को उसी हालत में नीचे छोड़ कर मैं फिर ऊपर रज़िया के कमरे की तरफ चल दिया। लेकिन मेरा लंड झड़ने के बाद भी सीधा खडा रह रह कर झटके ले रहा था , उसका सुपाड़ा एक छोटे टमाटर की तरह सुर्ख लाल हो रहा था जैसे चोद ना पाने के गुस्से से अपना चेहरा लाल करके मुझे घूर रहा था। दीदी अभी तक आँखे बंद किये पडीं गहरी गहरी साँसे ले रहीं थी। हाँलांकि पूरी रात सो न पाने और ऊपर से इतनी मेहनत की थकान के कारण मेरी भी आँखे बंद हो रहीं थीं लेकिन मेरे पास रजिया को चोदने का सिर्फ आज का ही वक़्त था , कल तो सबको अस्पताल से आ ही जाना था। और फिर पता नहीं चुदने के बाद रजिया की क्या हालत होती , मुझे यह भी तो देखना था सो मैंने फटाफट उठ कर अपने कपडे पहने और दीदी को उसी हालत में नीचे छोड़ कर मैं फिर ऊपर रज़िया के कमरे की तरफ चल दिया।
-
Reply
07-03-2017, 01:05 PM,
#7
RE: Antarvasna sex stories मेरी मस्त दीदी
मेरी मस्त दीदी--7

ऊपर रज़िया अभी भी सो रही थी लेकिन उसकी पोजीशन थोड़ी बदल गयी थी। अब वह दरवाजे की तरफ पीठ किये अपनी एक टांग मोड़े करवट से लेटी थी। इस पोजीशन में भी उसकी चिकनी दूधिया जांघे पूरी तौर से नुमाया हो रहीं थी। मैं उसके चहरे की तरफ जा के बेड पर बिलकुल चिपक कर लेट गया और धीरे से कंधा पकड़ कर हिलाते हुए पूछा, " रज़िया , मेरी अच्छी सी बहन , आज सोती ही रहेगी क्या ?"

रज़िया थोडा सा ऊ ऊ करके सीधी होकर उसी पोजीशन में ।> लेट गयी। मेरा लंड थोड़ी देर पहले की याद करके भक्क से टनटनाने लगा। मैंने धीरे से उठ कर सबसे पहले अपना पेंट व अंडरवियर उतार दिए। अब मैं बिलकुल नंगा केवल बनियान पहने रजिया के बगल में लेट गया , मेरा लंड बुरी तरह से झटके ले रहा था। मैंने हाथ बढ़ा कर जैसे ही उसकी स्कर्ट को पेट पर पलटा , मैं धक्क से रह गया , थोड़ी देर पहले जो उसने गहरे नीले रंग की चड्डी पहन रखी थी अब उसकी जगह महरून कलर की नेट की चड्डी उसकी चूत से चिपकी थी जिसमे से उसकी चूत की एक एक चीज़ नुमाया हो रही थी। ऐसा लग रहा था की झांटों को रात में ही साफ़ किया गया था क्योंकि चूत पूरी तौर पर चिकनी और साफ़ नज़र आ रही थी। दूसरी बात बदली हुई चड्डी से साबित होता था कि रज़िया सोने का नाटक कर रही है , उसने मेरे नीचे जाने के बाद अपनी चूत पानी से धोकर साफ़ करके चड्डी बदली है क्योंकि सुबह वाली चड्डी इसके चूतरस में बहुत भीग चुकी थी जो इतनी जल्दी किसी कीमत पर सूख ही नहीं सकती थी। दूसरी और सबसे अहम् बात ये थी कि रज़िया का यूँ चुपचाप सोने के नाटक से यह क्लियर भी हो गया कि उसे इन सब बातों में मज़ा आ रहा है लेकिन मैं भी कच्चा खिलाडी नहीं था , इस जैसी पता नहीं कितनी चूतवालियों की चूत को मेरा लंड चोद चुका था सो मैंने ऐसा शो किया जैसे मुझे उसके जागने का पता नहीं है। मैंने उसकी कमर पकड़ कर उसे अपने से इस तरह चिपका लिया कि मेरा लंड उसकी दोनों टांगो के जोड़ो में टिक गया जिसे मैंने एक झटके में अन्दर कर दिया , लंड भी उसकी चूत से रगड़ता हुआ पीछे गांड की तरफ निकल गया। रज़िया ने भी फुल मस्ती में अपनी एक टांग उठा कर मेरी कमर पर रख ली , अब मेरा लंड पूरी तरह से उसकी चूत पे रगड़ता हुआ चूतरस में भीगा मस्त हो चुका था। लेकिन वह अभी तक सोने का नाटक जारी रक्खे थी परन्तु मुझे इससे कोई फ़रक नहीं पड़ रहा था क्योंकि वह बीच बीच में ऊ ऊ s s s करके अपने शरीर को हिला डुला कर धीरे धीरे पूरा मज़ा ले रही थी। मैंने फिर से उसको अपने से चिपकाते हुए उसके चूतडों को मसलते हुए धीरे से उसके कान में पूछा , " अरे रज़िया , आज क्या उठेगी नहीं , तू तो सो के ही रह गयी है आज , बड़ी गहरी नींद सोती है "

रज़िया अपनी कमर हिला कर अपनी चूत मेरे लंड से कस के चार पांच बार रगड़ी जैसे सोते में कर रही हो,फिर ऊ ऊ ऊ कर के मेरे गले में बांह फंसा के अपने होंठ मेरे गालों पे रख कर चुपचाप लेट गयी।

अब मुझ से भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था सो मैंने उसकी टॉप उतारते हुए अपने ऊपर लिटा लिया , अब मैं सीधा बेड पर लेटा था व रजिया मेरे ऊपर पट अपनी चूत से मेरे लंड को दबाये हुई लेटी थी। मेरा लंड उसकी कुँवारी चूत की मस्त खुशबू से दीवाना हुआ झटके ले रहा था। मेरी झांटे और लंड पूरी तौर से रज़िया के चूतरस में भीग चुके थे। मैं तो पहले से ही नीचे से नंगा था , सो मैंने रज़िया की पीठ पर हाथ लेजा कर उसकी ब्रा के हुक खोल कर उतार दी।

रज़िया पूरी तरह से चुदासी होकर मुझसे चिपकी थी लेकिन शायद शरम या संकोच के कारण वो सोने का ड्रामा कर रही थी वरना उसकी चूत मेरे लंड को गपकने को मुंह बाये खड़ी थी।चूँकि मुझे भी पता था कि ये सोने का सिर्फ नाटक कर रही है वरना इसकी चूत की हालत चीख चीख कर कह रही है कि मुझे चोदो व पेल पेल कर फाड़ दो।सो मैंने सबसे पहले रज़िया को धीरे से अपने बगल में लिटा करके उसकी इकलौती चड्डी भी उतार कर उसे नंगा कर दिया व अपनी बनियान उतार कर मैं भी पूरा नंगा होकर उसके बगल में आ कर एक हाथ से उसकी संतरे जैसी चूची को मसलते हुए दूसरी चूची के निप्पल को चुकर चुकर करके चूसने लग गया। रज़िया की आँखे ज़रूर इस वक़्त बंद थीं परन्तु उसके हाथ मेरे बालों में धीरे धीरे चल रहे थे जो ये साबित कर रहे थे कि वह भी पूरी मस्ती में है। उसकी चूत व मेरा लंड दोनों एक दूसरे के मिलन को धडाधड पानी छोड़ रहे थे।मैंने भी अब देर करना ठीक नहीं समझा क्योंकि दो बार पहले ही K L P D हो चुकी थी। मैंने उसे बेड पर चित्त लिटा कर उसकी टांगों को फैला कर अपने फनफनाते लंड का सुपाडा उसकी बुर पे टिका कर घिसना शुरू कर दिया। मेरे ऐसा करते ही रज़िया के मुंह से सिसकारियां निकालनी शुरू हो गयीं वह दोनों हाथों से सिर के नीचे रक्खे तकिये को कस कर पकडे धीरे धीरे छटपटा सी रही थी , उसकी चूत की हालत मेरे लंड से भी बद्तर हो रही थी लेकिन शायद अभी कहीं न कहीं थोड़ी बहुत शरम बाकी थी जिससे वह अपनी आँखे व मुंह दोनों बंद किये थी परन्तु उसकी रह रह कर झटके लेती कमर मानों चिल्ला चिल्ला के मेरे लंड से बिसमिल्लाह की गुज़ारिश कर रही थी। चूंकि मेरी हालत भी बहुत ज्यादा ख़राब हो चुकी थी सो मैं उसकी चूत पर अपने लंड का सुपाडा टिका कर उसके ऊपर लेट गया और उसकी बगलों में हाथ डाल के उसके कन्धों को कस कर पकड़ लिया। नीचे से वह अपनी चूत उचकाने की कोशिश करके मेरे लंड को अन्दर लेना चाह रही थी चूँकि मैंने उसे कस के दबा रक्खा था सो वह कामयाब नहीं हो पा रही थी। मैंने अपनी टांगों से ही उसकी टांगों को पूरी तरह से चौड़ा कर एक ज़ोरदार धक्के के साथ अपना आधे से ज्यादा लंड उसकी चूत में ठांस दिया। एक पल के लिए रुक कर मैंने रज़िया के चहरे की तरफ़ देखा तो दंग रह गया , उसने न तो आँखे खोली और ना मुंह से आवाज़ निकलने दी। हाँ उसकी आँखों से भल भल आँसू निकल के तकिये में ज़ज्ब हो रहे थे और वह अपने दांतों से अपने निचले होंठ को कुचले जा रही थी। मैंने अपने लंड को सुपाडे तक पीछे खींचकर फिर से एक ज़ोरदार धक्का से अबकी बार जड़ तक ठांस दिया। आखिर बहुत बर्दाश्त करने के बाद भी उसके गले से एक भारी सी आह s s s निकल गयी।

" बहुत दर्द हो रहा है भैय्या " वह नीचे से छटपटाते हुए रोते रोते बोली "बस छुटकी बस , हो गया ...... अब दर्द नहीं होगा " मैंने उसके कंधे छोड़ कर अपने दोनों हाथों की उँगलियों की कैंची बनाकर उसमे उसका सिर जकड़ लिया। वह मेरे नीचे पूरी तरह से बेबस दबी थी और सिर्फ़ उसके हाथ आज़ाद थे , जिनसे वह मेरी पीठ अपने बड़े बड़े नाखूनों की मदद से खुरच रही थी। मैं अपनी जीभ से उसके होठों को चाटते हुए भकाभक अपने लंड को उसकी मांसल व मखमली टाइट चूत में अन्दर बाहर कर रहा था।

शायद रज़िया का दर्द अब कुछ कम हो गया था क्योंकि उसने अपनी टांगों को पूरी तरह से चौड़ा कर मेरी कमर के इर्द गिर्द लपेट लिया था व मेरे लंड की हर ठोकर पर नीचे से अपनी चूत उचका कर पूरा का पूरा ठंसवाने की कोशिश कर रही थी। अब मैं उसके सिर को छोड़ कर दोनों हाथो से चूचियों को कस कर मसलते हुए पूरी ताक़त से रज़िया को चोद रहा था। मज़े की अधिकता के कारण रज़िया की आँखे फिर बंद हो चुकीं थी , अब वह टांगों से मेरी कमर को व हाथों से मेरी पीठ को बुरी तरह से जकड़े नीचे से गांड उचका उचका कर चुदवा रही थी।

थोड़ी देर बाद मुझे अपने लंड पर गरमागरम लावा सा महसूस हुआ और रज़िया हाथ पैर ढीले छोड़ कर हांफती हुई टाँगे फैलाये चुदवाती रही लेकिन मुझे अब मज़ा नहीं आ रहा था सो मैंने अपना लंड बाहर निकाल कर पास पड़े टॉप से उसकी चूत व अपने लंड को ढंग से साफ़ करके फिर चोदना शुरू कर दिया। दीदी की तरह रज़िया बिना नाज़ नखरे दिखाए ज़म के चुद रही थी और सबसे बड़ी बात उसने अपने होठों पर तो जैसे फेवीकोल लगा रक्खा था।

लेकिन दोस्तों मेरी आदत है कि मुझे चुपचाप चोदने में बिलकुल मज़ा नहीं आता सो मैं रज़िया को छेड़ते बोला ," कैसा लग रहा है चुदने में , मज़ा आ रहा है या नहीं "

" हूँ . . . ." कहकर उसने फिर आँखे बंद कर लीं। मेरा लंड उसे पूरी ताक़त से चोद रहा था।

" अरे कुछ तो बोलो , जिससे लगे कि मैं किसी ज़िंदा लौंडिया की चूत में अपना लंड पेल रहा हूँ " मैंने उसे फिर छेड़ा

" क्या बोलूँ , अब बोलने को बचा ही क्या है , कल रात में दीदी आज मुझे ...... दोनों को तो आप निपटा चुके है " रज़िया ने उसी तरह आँखे बंद किये ज़बाब दिया , अब वह मुझसे फिर कस कर चिपक गयी थी।

मैंने उसी स्पीड से चोदते हुए कहा ," क्या रज़िया ! ऊपर वाले ने तुम लोगों को चूत इसीलिए दी है कि इसे लंड से चुदवाओ , अरे अगर मैं नहीं चोदता तो कोई और चोदता , चूत बनी ही लंड पिलवाने को है ...... कोई ऐसी चूत बता दो जो चुदी ना हो " रज़िया ने इस बार कोई ज़बाब नहीं दिया बस मुझसे थोडा और कस कर लिपट गयी। मुझे अपना अब स्टेशन नज़र आने लगा था सो पूरे शरीर की ताक़त लंड में इकठ्ठी करके दोनों हाथों से चूचियां मसलते हुए मैं उसे चोदने लगा। अचानक हम दोनों के शरीर ने झटका लेते हुए एक साथ ही पानी निकाल दिया और बेड पर पड़े हांफने लगे। रज़िया इस वक़्त बड़ी नशीली आँखों से मुझे देख रही थी , वह धीरे से करवट लेकर मेरे सीने पर अपना सिर रख मुझसे नंगी ही चिपक कर लेट गयी। यूं तो रज़िया बहुत खूबसूरत नहीं थी लेकिन उसके शरीर की बनावट दीदी से इक्कीस ही थी यह मुझे उसको नंगा देखने पर ही पता लगा। लाइट कलर की बेडशीट पर तकरीबन एक by एक फुट के एरिया में गहरा लाल निशान पड़ा था जो उसकी कुंवारी चूत की सील टूटने की गवाही दे रहा था। पता नहीं क्यों इस वक़्त मुझे रज़िया पर बहुत ही प्यार आ रहा था जो बिना होठों और जीभ का इस्तेमाल किये सिर्फ नज़रों से ही अपनी दिल की बात मुझसे किये जा रही थी। उसकी आँखों में असीम तृप्ति के भाव थे जैसे किसी बहुत दिन के भूखे शख्श को रोटी की जगह कोई रसगुल्ला खिला दे। वह धीरे धीरे मेरे सीने को सहलाती हुई मुझसे चिपकी लेटी थी। मैंने भी उसके होठों को अपने होठों में लेकर चूसते हुए उसे अपने ऊपर लिटा लिया। यह जानते हुए भी कि वह मेरी छोटी बहन है मुझे वाकई इस वक़्त उस पर बहुत प्यार आ रहा था रज़िया की चुदाई के बाद मुझे एक असीम तृप्ति का अनुभव हो रहा था। इतना मज़ा मुझे बहुत दिनों बाद किसी चूत को चोदने में मिला था , वाकई रज़िया की एक एक चीज़ ऊपर वाले ने बड़ी फुर्सत में बनाई थी। चूंकि मैं पूरी रात का जगा हुआ था सो मैं रज़िया को अपने से चिपकाये हुए वैसे ही सो गया। शाम तकरीबन चार बजे भूख के कारण मेरी आँख खुली तो देखा मैं ऊपर वाले कमरे में अकेला ही सो रहा था , रज़िया पता नहीं कब उठ कर नीचे चली गयी थी। मैं भी फटाफट उठ कर नीचे आया तो देखा दीदी नहा धोकर किचिन में कुछ कर रहीं थीं और रज़िया नहा कर अपने गीले बाल ड्रायर से सुखा रही थी। उसने पिंक कलर का टॉप और पर्पल कलर की लॉन्ग स्कर्ट पहन रखी थी। जैसे ही हमारी नज़रें मिलीं वो धीरे से शरमा कर मुस्करा दी , उसके चेहरे पर एक अजीब से सुकून का भाव था व उसका रूप और निखर आया था।

दोस्तों एक बात आप ज़रूर नोट करना कि जो स्त्रियाँ अपने जीवन में भरपूर सम्पूर्ण सेक्स का आनंद लेतीं है अर्थात अपनी चूत को पूरी तरह संतुष्ट होने तक चुदवातीं है उनके चहरे पर एक अलग तरह का नूर होता है व जो इस सुख को नहीं भोग पातीं है या जिनकी चूत प्यासी रह जाती है उनके चहरे की चमक धीरे धीरे चली जाती है। कुल मिला कर उनका चेहरा ही उनकी सेक्स लाइफ का आईना होता है।

कुछ इसी तरह की चमक मुझे रज़िया के चेहरे पर नज़र आ रही थी। मैंने पीछे से जाकर उसकी चूचियों को धीरे से मसलते हुए नाज़ुक गालों को चूम लिया।

" क्यूं अभी भी दिल नहीं भरा क्या ? मौका देख के रात में ऊपर आ जाना , सारे बाकी के अरमान भी पूरे कर लेना लेकिन प्लीज़ अभी नहीं , अभी दीदी है यहां ... वो मुझे कच्चा ही चबा जाएँगी "रज़िया ने बड़े प्यार से मेरे हाथों को अपनी चूचियो से हटाते हुए कहा और एक गाढा सा मीठा चुम्बन मेरे होठों पर जड़ दिया।

चूंकि मैंने इस चुदाई के चक्कर में सुबह से कुछ खाया भी नहीं था सो इस वक़्त मेरे पेट में बड़े बड़े चूहे उछ्ल कूद कर रहे थे।मैंने रज़िया से पुछा ," कुछ खाने को है क्या , बहुत तेज़ भूख लगी है "

" हाँ दीदी ने नमकीन सेवइयां बनाई है क्योंकि अब खाने का वक़्त तो रहा नहीं , पूरा खाना शाम को बना लेंगे। वो आपको जगाने जाने ही वालीं थीं , अभी हम लोगों ने भी नहीं खाया है " रज़िया ने हमेशा की तरह बड़ी शालीनता से ज़बाब दिया

" तो चल जल्दी से सबका खाना लगवा ले , अब भूख बर्दाश्त नहीं हो रही है " मैंने बड़ी बेसब्री से कहा

तभी दीदी हाथ में सेवइयों की प्लेट लिए किचिन से आ गयीं और मुस्कराते हुए बोलीं ," मुझे मालूम था की तू उठते ही भूख भूख चिल्लाएगा "

उन्होंने व्हाइट कलर का वी गले का टॉप और नीले रंग का पेटीकोट पहन रखा था। पेटीकोट का नाडा कमर पर साइड में करके बांधा था जिससे उसके कट से उनकी नंगी कमर का गोरा गोरा थोडा सा हिस्सा नुमाया हो रहा था क्योंकि अन्दर उन्होंने पेन्टी नहीं पहनी थी। यही अगर नार्मल तरीके से बंधा होता तो शायद कमर की जगह उनकी छोटी छोटी झांटे दिखाई दे रहीं होती। कुल मिला कर इस अजीब पहनावे में भी वह गज़ब की सेक्सी लग रहीं थीं , उनकी चाल और बातचीत के अंदाज़ से लग रहा था कि उनकी चूत व गांड में दवा से ज़बरदस्त आराम हुआ है और सबसे बड़ी बात दो में से कोई भी चुदने के बाद भी मुझसे नाराज़ नहीं थीं। सो मैंने अब पूरी तरह से निश्चिन्त होकर उनके हाथ से प्लेट लेकर सेवइयां खानी शुरू कर दीं। तभी अचानक मेरा मोबाइल बजने लगा। मैंने पॉकेट से मोबाइल निकाल कर देखा तो वह अस्पताल से मामू का था। मैंफोन पिक करके बात करने लगा।

" हाँ ....... हाँ ....... ठीक है ........ ठीक है ....... मैं आता हूँ "

बात करने के बाद फोन काट दिया। फिर सारी बात दीदी और रज़िया को बताते हुए बोला ," दीदी ! मामू का फोन था , कह रहे थे कि अम्बाला से मामी की छोटी बहन और उनकी बेटी रात की ट्रेन से लुधियाना पहुँच रहे हैं , दूसरी बात यह कि मामी की हालत में बहुत आराम है जिससे डॉक्टर का कहना है कि अगर हम चाहें तो मामी को आज ही घर ले जा सकते है। अब आप अपनी राय दीजिये कि मामी को आज ही ले आयें या कल ही लाया जाए , वैसे मेरी राय में अगर हम कल लेकर आयें तो वही ज्यादा उचित रहेगा , कहीं कुछ उल्टा सीधा न हो जाये "
-
Reply
07-03-2017, 01:05 PM,
#8
RE: Antarvasna sex stories मेरी मस्त दीदी
चूंकि मैं आज रात दोनों बहनों को खुल कर ढंग से चोदने का मज़ा लेना चाह रहा था जो शायद अम्मी और मामू के आने से संभव न हो पाता और फिर कबाब में हड्डी बनने वैसे भी मामू की साली और उनकी बेटी जो दोनों ही बड़ी चिपकू थीं , आ ही रहीं थीं सो मुझे अपनी रात का मज़ा खटाई में पड़ता दीख रहा था। यही कारण था कि मैं आज मामी को घर नहीं लाना चाह रहा था।

" तू ठीक कह रहा है मुन्ना , अम्मी अगर आज रात वहीँ अस्पताल में ही रहें तो ज्यादा सही रहेगा क्योंकि उनका घाव बहुत ही गहरा था " दीदी ने चिंतित होते हुए कहा

" अगर आप ही मामू को चल कर समझायें तो ज्यादा सही रहेगा " मैंने दीदी को कहा

" ठीक है , अभी पौने छह बजे है , मैं पंद्रह मिनट में तैयार हो जाती हूँ पर ये बता सायरा की ट्रेन कितने बजे की है "

" सात बजे की "

" ओ हो फिर तो वक़्त नहीं बचा है तू मुझे अस्पताल छोड़ कर स्टेशन चले जाना और सायरा व खाला को लेकर वहीं अस्पताल आ जाना। तब तक मैं अम्मी की कंडीशन देख कर डॉक्टर से भी बात कर लेती हूँ "

" ये ठीक रहेगा दीदी " मैंने दीदी से कहा

दीदी अपने पेटीकोट का नाडा खोलते हुए अन्दर वाले कमरे की तरफ कपडे बदलने चलीं गयीं। मैंने घूम कर रज़िया की तरफ देखा , वो मेरी तरफ देख के धीमे धीमे मुस्करा रही थी। मैंने आगे बढ़ कर उसे अपने से कस कर चिपका लिया , उसने भी मेरे गले में अपनी बांहे डाल के बंद आँखों के साथ अपने होंठ मेरी तरफ बढ़ा दिये। मैंने भी उसकी भावनाओ को समझते हुए उसके होठों को अपने होठों में लेकर चूसते हुए उसके चूतडों को मसलना शुरू कर दिया। मेरा लंड मेरी जींस में खडा होकर उसकी नाभि से रगड़ता हुआ मुझे दिक्कत दे रहा था। " आज तो दोबारा शायद संभव नहीं होगा भैय्या , आपने उस बेचारी की बहुत बुरी हालत कर दी है। ज़रा सा जोर लगते ही M C की तरह ब्लीडिंग होने लगती है। सुज़ के कुप्पा हो गयी है बेचारी , इतना दर्द हो रहा है कि पेंटी भी नहीं पहनी जा रही है।" रज़िया मेरे सीने से चिपक कर बोली।

मैंने अब तक की ज़िन्दगी में कई लौंडियों को चोदा था लेकिन पता नहीं क्यों मुझे रज़िया को चोदने के बाद उससे बड़ा लगाव हो गया था। मैंने मन ही मन कुछ निश्चय कर लिया और उसके टॉप में अन्दर हाथ डाल कर ब्रा के ऊपर से ही चूचियों को मसलते हुए उसके मुंह में अपनी जीभ घुसा दी। तभी पीछे से दीदी के खांसने की आवाज़ आयी तो वह मुझ से छिटक कर अलग हो गयी। दोस्तों दोनों को ही यह अच्छी तरह पता था कि मैं उनकोढंग से चोद चुका हूँ परन्तु शायद शर्म या रिश्तों की उस दीवार के कारण वो एक दूसरे के सामने अनजान शो कर रहीं थीं लेकिन मैंने भी इस दीवार को गिराने की ठान ली थी।

" दीदी , वो जो दवा मैं सुबह ले कर आया था वो अभी दो खुराक बची होगी , उसमे से ज़रा एक खुराक दे दो " मैंने दीदी से खुल कर पूछा

" वो वहीं ड्रेसिंग टेबल पर रखी है " दीदी ने नज़रें चुराते ज़बाब दिया

" लो , ये खा लो , दो तीन घंटे में आराम मिल जायेगा " मैंने दवा की एक खुराक ला कर रज़िया को देते हुए कहा " दीदी , जल्दी चलो लेट हो रहे है "

" चल ना , मैं तो कब से तैयार हो चुकी हूँ " दीदी ने कहा। दीदी ने इस समय डार्क ब्लू जींस और स्काई ब्लू कलर का मैचिंग टॉप पहन रखा था। इस ड्रेस में वो बड़ी धांसू आइटम लग रहीं थीं। मैंने आगे बढ़ कर उनके दोनों होठ चूमते हुये कहा ," हाय हाय , कहीं नज़र न लग जाये "

" चल हट " दीदी का चेहरा लाल हो गया जबकि रज़िया की हँसी निकल गयी। उसको हंसते देख मुझे अन्दर ही अन्दर बहुत अच्छा महसूस हुआ। मैं दीदी को लेकर अस्पताल की तरफ लेकर चल दिया और उन्हें गेट पर ही छोड़ कर स्टेशन की तरफ निकल लिया। स्टेशन पहुँच कर मैंने इन्क्वायरी पर देखा तो पता चला कि ट्रेन राइट टाइम है यानी के पंद्रह मिनट बाद ट्रेन आ रही थी। मैं वहीं स्टेशन पर पंजाबिन लड़कियों की फूली फूली गांड और मस्त बड़ी बड़ी चूचियों को देख कर टाइम पास करने लगा। थोड़ी देर में प्लेटफार्म पर गाडी आ गयी। मैं जल्दी से S 5 की तरफ बढ़ा जिसमे मामी और सायरा का रिजर्वेशन था। डिब्बे के सामने पहुँच कर मैं उन लोगों को ढूँढने लगा , तभी किसी ने पीछे से मेरे कंधे पे हाथ रख कर कहा ,"मुन्ना भैय्या ! कहाँ देख रहे हो ? हम लोग उतर कर इधर खड़े हैं"

मैंने देखा कि एक बड़ी मस्त तकरीबन 5 फुट 7 इंच हाईट वाली लड़की मेरे पीछे खड़ी थी व उसके साथ एक औरत बुर्के में एक एयर बैग व एक स्काई बैग लिए खड़ी थी। मेरे चेहरे पे असमंजस के भाव देख कर वह फिर बोली ,"क्या भैय्या ! पहचाना नहीं ? अरे मैं सायरा ....... और ये मम्मी"

"ओहो ! कैसे पहचानूं ? मामी बुरके में है और तू इत्ती बड़ी हो गयी है,पिछली बार जब मिली थी तो फ्राक पहना करती थी" मैंने उसकी शर्ट से झांकतीं बड़ी बड़ी चूचियों को घूरते हुए कहा

"आय हाय आय ! जैसे पिछली बार ज़नाब ऐसे ही छः फुटा थे,सिर्फ तीन साल ही मुझसे बड़े हो" सायरा मेरे सीने पे मुक्का मारती बोली

"अरे तुम दोनों यहीं लड़ते ही रहोगे या अब चलोगे भी" मामी ने कहा हाँ हाँ चलो " कह कर मैंने कुली को बुला कर उसे सामान थमा दिया और हम लोग स्टेशन के बाहर की तरफ चल दिए। मेरी निगाह सायरा की फूली हुई गांड और उसकी खरबूजे जैसी चूचियों से हट नहीं रही थी। मुझे ऐसे देखते सायरा बोली ,"किधर ध्यान है ज़नाब का"

"कहीं नहीं,तुझी से तो बात कर रहा हूँ"

"हाँ , ज़नाब बात तो मुझ से कर रहे है लेकिन नज़रें कहीं और भटक रहीं है"

"अरे नज़र तो नज़र है,जहां अच्छी चीज़ दिखाई देगी वहीं तो टिकेगी"

मैं उसकी बोल्डनेस से भली भांति परिचित था और उसकी यही आदत मुझे बचपन से पसंद भी थी।

"ओहो , परन्तु इसका मतलब ?"

"मतलब क्या ये तुम्हारी बात का ज़बाब था"

"आपकी गोल मोल बात करने की आदत गयी नहीं,अरे यार क्यू लड़कियों जैसा शरमाते हो। खुल के कहो ना कि सायरा तू मुझे अच्छी लग रही है"

"वाह वाह अपने मुंह ही अपनी तारीफ़,कभी आईना देखा है,बिलकुल बंदरिया लगती है"

"अच्छा जी ! मैं बंदरिया लगती हूँ। शायद तभी मेरे शरीर को इतनी देर से घूर रहे हो जैसे नज़रों से ही घोल के पी जाओगे"

इसी तरह नोक झोंक करते हम स्टेशन के बाहर आ गए। मामी थोडा धीरे चल रहीं थी सो बाहर आकर मैंने कुली को पैसे दिए और मामी का इंतजार करने लगे। मामी के आते ही मैंने उनसे कहा ,"आप दोनों के लिए मैं ऑटो किये दे रहा हूँ क्योंकि मेरे पास बाइक है"

" नहीं मैं तो आपके साथ ही बाइक से चलूंगी " सायरा बच्चों सी जिद करती बोली

" ऐसा करते है मुन्ना ! इसे तू बाइक पर ही बिठा ले और हम लोग पहले हॉस्पिटल ही चलते है , दीदी को देखे बिना मुझे सुकून नहीं मिलेगा "

" ठीक है , ऐसा ही करते है " मैंने ज़बाब दिया मामी को ऑटो में बिठा कर मैंने स्टैंड से बाइक निकाल कर स्टार्ट की और सायरा को साथ लेकर हम अस्पताल के लिए चल दिए। सायरा ने पीछे से मुझे पकड़ कर अपनी ठुड्डी मेरे कंधे पर और अपने दोनों हाथ मेरी जाँघों पर रख लिए। इस पोजीशन में उसकी चूचियां मेरी पीठ में धंसी जा रहीं थीं।

" कैसे बैठी हो , सब देख रहे है ..... हम घर के अन्दर नहीं है सायरा , सड़क पर है। ऐसा लग रहा है कि तुम मेरी बहन नहीं कोई गर्ल फ्रेंड हो " मैंने सायरा से फुल मज़ा लेते हुए कहा

" ओ हो तो ज़नाब अगर घर के अन्दर हो तो मुझे ऐसे चिपका कर रक्खेंगे " सायरा मेरी पीठ से और लिपटते बोली

" घर में अगर तुम यूं लिपटना चाहो तो कम से कम दूसरे मज़ा लेने वाले तो नहीं होंगे , यहां सड़क पर सब मज़ा ले रहे है "

" वाह सिर्फ चिपक के बैठने से ही दूसरों को मज़ा आ जाता है ? और फिर जब मज़ा आने वाला काम करेंगे तो फिर उनका क्या हाल होगा " सायरा हंसती हुई बेबाकी से बोली

तभी अस्पताल आ गया और मैंने सायरा को उतार कर बाइक स्टैंड पर लगा दी। हम सब अन्दर जा कर मामी के रूम में पहुँच गए। वहां मामी को डॉक्टर ने ड्रेसिंग करके तैयार कर दिया था लेकिन दीदी ने घाव को देख कर आज रात और यहीं हॉस्पिटल में रुकने की कह दी थी। हालांकि मामी घर जाने की बहुत जिद कर रहीं थीं लेकिन हम लोगों के समझाने पर एक रात और रुकने को मान गयीं थीं। छोटी मामी ने साफ़ साफ़ कह दिया कि वह तो हॉस्पिटल में ही रुकेंगी और कल सबके साथ ही घर जाएँगी। अंत में यह तय हुआ कि मैं दीदी और सायरा को लेकर घर चला जाऊं बाकी वो तीनो लोग वहीं मामी के साथ हॉस्पिटल में रुकेंगे। चूंकि सायरा का सामान भी था और लोग भी तीन थे अतः मैंने ऑटो करना ही मुनासिब समझा। बाइक वहीं हॉस्पिटल में मामू के पास छोड़ कर हम तीनों ऑटो से घर चल दिए।

ऑटो में सायरा बीच में बैठी थी और मेरी बाजू से उसकी लेफ्ट चूची दब रही थी , उसने भी अपना एक हाथ मेरी जांघ पर बेफिक्री से रक्खा हुआ था। जब भी कोई हल्का सा झटका लगता तो मैं जानबूझ कर अपनी बाजू से उसकी चूची मसल देता था लेकिन वह इन सब बातों से अनजान मस्त बैठी थी।

घर पहुँच कर मैंने ऑटो का पेमेंट करके सामान अन्दर रखवा दिया। सायरा रज़िया के गले लग के खूब मस्ती से बतिया रही थी। अन्दर आ कर मैंने घडी देखी तो टाइम साढ़े नौ से ऊपर ही हो रहा था।

" दीदी , साढे नौ बज चुके है , बड़ी भूख लगी है। आप लोग फ़टाफ़ट खाना लगाओ तब तक मैं चेंज करके आता हूँ " कह कर मैं अन्दर कमरे में चला गया। अन्दर जाकर मैंने अपने लिए एक लार्ज व्हिस्की का पैग बनाया और ख़तम करके अपने कपडे उतार दिए। मैं सिर्फ अंडरवियर व बनियान में था कि तभी सायरा और रज़िया अन्दर आ गयीं। उन्हें देख कर मैं झेंप कर अपनी लुंगी तलाशने लगा क्योंकि जैसा कि आप सभी जानते ही है की इन रेडीमेड अंडरवियर में लंड गांड सब क्लियर पता चलती है।

" वाह भाई वाह , अकेले अकेले ही शौक फ़रमाया जा रहा है।" सायरा ने मेरा व्हिस्की का गिलास और बोतल देख कर कहा

" अरे मुझे क्या पता था कि तू पीती है , तेरे लिए भी बनाऊ क्या ?" मैंने लुंगी उठा के लपेटते हुए कहा

" नहीं नहीं , मैं तो मज़ाक कर रही थी , मैं ये सब नहीं लेती हूँ "

" आहा , तो मैडम फिर क्या लेती है " मैंने सायरा के गालों पर चिकोटी काटते शरारत से पूछा

" अरे लेने वाली चीज़ मैं सब ले लेती हूँ , ये सब फ़िज़ूल की चीज़ें थोड़े ही लेती हूँ "

तब तक मैं अपना एक दूसरा लार्ज पैग बना कर पीने लगा।

" चल चल सायरा , तू भी फ़टाफ़ट फ्रेश होकर चेंज कर ले फिर हम सब खाना खाते हैं , मुझे बहुत तेज़ भूख लगी है " मैंने सायरा को बोला।

वो लोग कमरे से बाहर चले गए और मैं भी एक पैग और लेकर बाहर किचिन के पास लाबी में पड़ी डाइनिंग टेबल पर बैठ गया जिस पर दीदी खाना लगा रहीं थीं। दीदी ने अपनी वही ड्रेस यानी पेटीकोट और टॉप पहन रखा था। तभी रज़िया और सायरा भी चेंज करके डाइनिंग टेबल पर आ गये। सायरा ने एक ढीला ढाला गाउन पहन रखा था जिसमे उसकी चुचियों की तनी हुई घुन्डियाँ साफ़ साफ़ उठी हुई नज़र आ रहीं थी।

" ये क्या पहन रखा है , इस ड्रेस में तेरा सब कुछ दिखाई दे रहा है " दीदी ने धीरे से सायरा को टोका

" अरे दीदी, सारा दिन बॉडी कसी रहती है इसलिए रात में इसे बिलकुल फ्री करके हमें सोना चाहिए " सायरा बेझिझक बोली

मेरा लंड तो वैसे भी उसकी चुचियों की घुंडियों को देख देख कर अंगड़ाईयां ले रहा था लेकिन ये सुन कर कि उसने चड्डी भी नहीं पहनी है , वह बुरी तरह फनफना उठा। मैंने टांग पर टांग चढ़ा कर अपने लंड को उसमे कस कर दबा लिया। हालांकि मेरी उसको चोदने की तबियत हो रही थी लेकिन मैं यह अभी शो नहीं करना चाह रहा था। मैं उसी की तरफ से किसी पहल का इंतज़ार कर रहा था फिर तो उसकी चूत में अपना लंड पेल के उसे चोद ही देना था। वैसे उसकी एक्टिविटी से लग रहा था कि सायरा उस टाइप की लड़की है जो ये सोचतीं है की जब चुदाई करने से लड़कों के लंड का कुछ नहीं बिगड़ता तो लड़कियों की चूत का क्यों बिगड़ेगा। चूंकि खाना लग चुका था सो हम सब खाना खाने लगे लेकिन मेरी निगाह बार बार सायरा की चूचियों की तरफ ही उठ जा रही थी जिसे सभी बखूबी समझ रहे थे क्योंकि में बीच बीच में अपने फनफनाते लंड को भी एडजस्ट कर रहा था। खाना खाकर रज़िया ऊपर वाले कमरे में चली गयी। हालांकि वह इतनी बुरी तरह चुदने के बाद भी चुप थी , दीदी की तरह हाय हाय नहीं कर रही थी फिर भी मैं उसकी चूत की हालत समझते हुए आज उसे छेड़ना नहीं चाहता था। एक रात के रेस्ट के बाद उसकी चूत की हालत भी सुधर ही जानी थी और फिर मेरे लंड के लिए कौन सी चूतों की कमी थी , यहाँ लुधियाना आने के बाद तो मेरे लंड को वैसे भी बिलकुल रेस्ट नहीं मिला था , हर वक़्त चूत में ही घुसा रहता था। दो दो कुंवारी चूतों की सील तो खोल ही चुका था ऊपर से खुदा ने सायरा को और भेज दिया , वैसे मैं उसकी चूत के बारे में डाउट में था क्योंकि इतनी बोल्ड लड़की अपनी चूत में बिना लंड पिलवाये नहीं मान सकती। ज़रूर उसने लंड का मज़ा ले लिया होगा। खैर , दीदी व सायरा भी खाने से फ्री होकर लेटने चल दीं तो मैंने फोर्मली पूछा , " आज कैसे लेट बैठ होगी "

" हम दोनों तो अन्दर वाले कमरे में लेट जाते है , बैठने का काम आप पूरी रात शौक से फरमा सकते हैं " सायरा ने मेरी बात पर चुटकी ली

" वाह भई वाह , रज़िया ऊपर और तुम दोनों अन्दर वाले कमरे में .......... मैं अकेले यहाँ क्या करूंगा।" मैंने टोका

" आप ज़नाब , कांग्रेस आई के सहयोग से रात काटिए ( कांग्रेस आई का निशान हाथ का पंजा है ) " सायरा शोखी से आँखे नाचते बोली

" अजी अगर हम कांग्रेस का सपोर्ट लेंगे तो आपको भी तो रात काटने को उसी का सपोर्ट लेना पड़ेगा " मैंने भी उसी के टोन में ज़बाब दिया

" हाँ यार , इससे बढ़िया तो ये रहेगा कि हम दोनों ही मिलजुल के सरकार बना ले " सायरा मेरी बनियान की स्ट्रिप्स में अपनी उंगली फंसाकर धीरे से बोली

" मुझे कब ऐतराज है "

" हाँ जी , वो तो तुम अपना डंडा लिए झंडा फहराने को बिलकुल तैयार दिखाई दे ही रहे हो " सायरा मेरी लुंगी में काफी उभरे हुए लंड को देख कर बोली

वैसे तो दोस्तों मैंने अपनी इस छोटी सी लाइफ में कई चुदासी चूतों को चोदा और कई चूतों को थोडा ज़बरदस्ती करके भी चोदा था लेकिन ऐसी बोल्ड चूत खुल के चुदवाने को उतावली आज पहली बार देख रहा था। हम लोगों को खुसुर पुसुर करते देख दीदी ने मामू के कमरे में सोने का ऐलान कर दिया। वह भी समझ चुकीं थी कि हम दोनों ही चुदाई प्रोग्राम किये बिना नहीं मानेंगे सो उन्होंने हम लोगों को अकेला छोड़ देने का सोचा लेकिन सायरा ने दीदी की बात काटते हुए कहा ," क्या दीदी , कितने दिन बाद तो मिले है , आप भी हमारे साथ ही लेटिये ना ...... ढेर सारी बातें करेंगे " फिर मेरी तरफ देखकर मुस्करा दी। हालांकि मेरे और दीदी के बीच अब कोई पर्दा नहीं था फिर भी मेरी समझ में उसका प्लान नहीं आ रहा था क्योंकि वह तो हमारे इस चुदाई रिलेशन से बिलकुल ही अनजान थी।
-
Reply
07-03-2017, 01:05 PM,
#9
RE: Antarvasna sex stories मेरी मस्त दीदी
मेरी मस्त दीदी--8

अन्दर जाकर वह दोनों बेड पर लेट गयीं और सायरा थोडा एक तरफ खिसक कर बीच में जगह बनाती बोली ," अरे अब खड़े ही रहोगे या लेटोगे भी "मैंतो सिर्फ इशारे का इंतज़ार कर रहा था सो उसके कहते ही मैं कूद कर बेड परचढ़गया और उन दोनों के बीच लेट गया।दीदी ने उठ कर लाइट बंद करके नाईटलैंपजला दिया।वह सिर्फ कहने भर का नाईट लैंप था वर्ना कमरे में इतनीरोशनी होरही थी कि मैं आराम से नॉवेल पढ़ सकता था।दीदीचूँकि हम दोनों से उम्र में बहुत बड़ीं थीं सो वह सायरा के सामने पूरी तरहखुल नहीं पा रहीं थीं। उन्होंने हमारी तरफ करवट लेते हुए कहा , " मुझे तोबहुत नींद आ रही है , तुम लोग भी जल्दी सो जाओ सुबह अम्मी को हॉस्पिटल सेभी लाना है "

" आप टेंशन मत लो दीदी , मैं सब मैनेज कर लूँगा " मैंने दीदी के पीछे से उनके पेट पर हाथ फिराते हुए कहा।" ठीक है " कह कर दीदी ने धीरे से मेराहाथदबा कर पेट से हटा दिया। मैं भी उनका इशारा समझ कर सायरा की तरफ घूम गया।सायरा आँखे बंद किये चुपचाप पीठ के बल सीधी लेटी थी। उसकी बिना ब्राकेगाउनमें तनीं हुई चूचियां किसी उन्नत पर्वत शिखर जैसी हर सांस के साथ ऊपर नीचेहो रहीं थी। हौज़री के पतले से गाउन में उसका एक एक कटाव साफ़ साफ़ नज़र आरहाथा। मेरा लंड ये नज़ारे देख कर तो फुंफकार मार कर चड्डी से बाहर आने कोबेताब होने लगा लेकिन मैं अपनी तरफ से पहल नहीं करना चाहता था। मैं अपनेलंड को दोनों जाँघों में दबा कर उसकी तरफ से किसी शुरुआत का इंतज़ार करनेलगा।थोड़ी देर की चुप्पी के बाद सायरा ने मेरी तरफ करवट लेकर पूछा ," सो गए क्या ?"



" नहीं यार , नींद ही नहीं आ रही " मैंने कहा। मन में तो आया कि कह दू किबिना चुदाई किये मुझे नींद नहीं आती लेकिन मैं चुप रहा। उसने अपना एक हाथमेरे सीने पर रख लिया जिससे उसकी बम्बइया आम जैसी मस्त चूचियां मेरी बाजूमें गढ़ने लगीं।" तो फिर कुछ बाते ही करो यार "" क्या बाते करूं , तुम ही थोडा सजेस्ट करो "" कुछ भी बात करो ना , मुझे भी नींद कहाँ आ रही है "" कांग्रेस की जगह एक दूसरे को सपोर्ट करके सरकार बना लेते है , नींद आ जायेगी "मेरी ये बात सुन कर उसने मुझे जीभ निकाल कर दिखा दी और धीरे से दीदी की तरफ इशारा करके कहा ," अभी शायद जग रहीं है "

" नहीं वो बहुत जल्दी और गहरी नींद में सोतीं है " मैंने कहा क्योंकि दीदी की तरफ से मुझेबिलकुलभी डर नहीं था , उनकी तो वो मस्त चुदाई की थी कि उनके चूत और गांड दोनोंदवा देने के बाद भी शायद अभी तक कसक रहे होंगे। उसने अपनी जांघ मेरीजांघोंपर चढ़ा ली। मेरा लंड जिसे मैं बड़ी मुश्किल से जांघो में दबाये थाझटके सेबाहर निकल कर उसकी जांघो से रगड़ खाने लगा।



" ओहो ये ज़नाब तो सरकार बनाने को कुछ ज्यादा ही उतावले हो रहे है "
" तुम्हीं ने हामी भर कर इसकी यह हालत की है "
तभी सायरा ने मेरे गले में बांहे डाल कर मेरे होंठो पर अपने तपते होंठ रख दिए। मैं तो वैसे भी इसी पहल का इंतज़ार कर रहा था। मैं उसके होंठो को चूसते हुए अपनी जीभ उसके मुंह में घुमाने लगा। वह भी बराबर का सहयोग देती हुई लेमनचूस की तरह मेरी जीभ को चूसने लगी। मेरी हालत तो जो थी सो थी लेकिन उसकी भी साँसे भारी होने लगीं थी। मैंने उसके गाउन में हाथ डाल कर उसकी नारियल जैसी सख्त हो रखीं चूचियों को मसलना शुरू करदिया।

" स्सी S S S S S हाय धीरे धीरे भैय्या ...... क्या आज उखाड़ने के ही रख दोगे ......... प्लीज़ लाइट बंद कर लो , दीदी बगल में ही लेटीं हैं "

" तुम उनकी चिंता मत करो , वह बहुत गहरी नींद में सोतीं है ....... इस वक़्त अगर कोई उनका पेटीकोट उठा कर चूत में लंड भी पेल दे तो शायद उन्हें पता नहीं चलेगा " मैंने हंसते हुए कहा और उसकी एक पूरी तनी निप्पल को पकड़ करऐंठ दिया।
" आ S S S ह ........ तो क्या तुम पेल चुके हो "
" अरे यार ........ मैं एक मिसाल दे रहा हूँ " कहकर मैंने दूसरे हाथ से उसकी गांड मसलते हुए अपने से कस कर चिपका लिया। अब मेरे लंड के उभार को वह अपनी टांगो के बीच महसूस कर रही थी। मज़े की अधिकता से उसकी आँखे पूरी तौर पर बंद थीं।

मैंअभीभी सिर्फ उतना ही आगे बढ़ रहा था जितना वह मेरे साथ करती जा रही थी।मैंनेबड़ी मुश्किल से अपने पर काबू किया हुआ था। जैसे दीदी और रजिया कोमैंनेचुदने के लिये तैयार किया था उसी तरह मैं चाहता था कि सायरा भी मुझेचोदनेको तैयार करे हालांकि मेरा लंड बमुश्किल चड्डी में कंट्रोल हो रहाथा वरनावो तो पता नहीं कब से उसकी चूत का तिया पांचा करने को तैयार बैठाथा।
उसकागाउन खिसक कर कमर तक आ चुका था जिसे मैंने उठा कर गर्दन तक खींचदिया। अबउसकी नंगी संगमरमरी चूचियां मेरी आँखों के सामने थीं। गुलाबी रंगकी बड़ीबड़ी बम्बइया आम जैसी मांसल चूचियां उस पर लगभग ढेड इंच व्यास काकत्थई कलरका गोल घेरा जिसमे Wi - Fi एंटीना के माफिक सीधीं तनीं हुईंनिप्पलस।

दोस्तोंऊपर वाले ने हम लंड वालों को तो सिर्फ बचा मटेरियल आगे टांगो के जोड़ परचिपका कर छुट्टी पा ली लेकिन उसने इन चूत वालियों को पूरी कायनात में सबसेखूबसूरत बनाने में अपनी सारी काबिलियत लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।

मेरा लंड अभी भी मेरी चड्डी मेंबिलकुल पिटारे में बंद नागके माफ़िक फनफना रहा था। मैंने उसकी एक चूची को मसलते हुये दूसरी के निप्पलको मुंह में लेकर चुभलाते हुए चूसना शुरू कर दिया।

" सी S S S S S आह ....... हां .... हां ... और मसलो भैय्या ........ ज़रा और कस कस के मसलो "
सायरा अब पूरी तरह गरम हो चुकी थी , उसके नथुनों से सांस की जगह जैसे फुंफकार निकल रही थी।


" आओ ना भैय्या "
" मैं तो तेरे बगल में ही लेटा हूँ , मैं गया कब था "
मेरीबात सुनकर वह एक झटके से उठी और अपना गाउन गले से निकाल कर पूरी नंगी हो गयी। मैंने भी अपनी टाँगे फैला कर चड्डी में तम्बू बनाये लंड को थोड़ा और उभार दिया। उसने आगे बढ़ कर मेरी लुंगी एक तरफ फैंक कर चड्डी उतार दी। मेरा लंड भी मेरी तरह ही पता नहीं कब से इसी पल इंतज़ार कर रहा था , वो एक दम से फुंफकार मारता हुआ तन के खड़ा हो गया। हम दोनों इस वक़्त पूरी तौर से नंगे हो चुके थे।

" आ ..ह कितना मोटा और लंबा है भैय्या तुम्हारा और कितना टाइट हो रहा है " सायरा ने मेरे लंड को मुट्ठी में लेके दबाते हुए कहा।
मेरे लंड का सुपाड़ा उसके हाथों की नरमी पा कर सुर्ख टमाटर जैसा फूल कर कुप्पा हो चुका था। वह उचक कर मेरे मुंह को अपनी दोनों टांगो के बीच लेकर मेरे ऊपर 69 की पोजीशन में लेट गयी जिससे उसकी चूत ठीक मेरे मुंह पर आ गयी और मेरा लंड उसके हाथों में बिलकुल होठों के नज़दीक था। उसकी चूत बिलकुल चिकनी थी ऐसा लग रहा था कि उसने आज ही हेयर रिमूवर का इस्तेमाल किया था। मैंने दोनों हाथो से उसकी रस छोड़ती चूत की दोनों फांकों को अलग किया और गप्प से अपनी जीभ उसकी गुलाबी गुफा में घुसा दी। उसका बदन उत्तेज़ना में बुरी तरह काँप रहा था। हम दोनों की हालत तकरीबन एक जैसी ही हो रही थी। उसने मेरे लंड की खाल को ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया फिर अपनी जीभ निकाल कर सुपाड़े पर फिराने लगी। मेरी हालत बहुत पतली हो रही थी , उसके मुंह में जाते ही मेरे लंड की सारी नसें तन गयीं थीं। मैं नीचे से कमर उचका उचका कर उसका मुंह चोद रहा था तो वह अपनी चूत में मेरी जीभ को ज्यादा से ज्यादा अन्दर लेकर चुदवा रही थी।

मैं उसकी चूत की मोटी मोटी संतरे जैसी फांको को चूसते हुए उसकी गांड में गपागप उंगली कर रहा था। वह उ... म्म हूं हूं की आवाजे निकालती हुई मेरे लंड को चूस रही थी। उसने मारी उत्तेज़ना के अपनी टांग को मेरी गर्दन पर लपेट कर अपनी चूत बिलकुल मेरे मुंह में घुसा दी।
वो अपने एक हाथ से मेरी बाल्स को भी मसल रही थी, मैं जल्दी ही झड़ने के कगार पर पहुँच गया और जोर -२ से साँसे लेने लगा, वो समझ गयी और जोर से चूसने लगी, तभी मेरे लंड ने पिचकारी मार दी जो सीधे उसके गले के अन्दर टकराई, वो रुकी नहीं और हर पिचकारी को अपने पेट में समाती चली गयी, इधर उसकी चूत से भी फिर से फव्वारे छूटने लगे थे। हम दोनों ही मुस्कराते हुए विजयी मुस्कान के साथ बेड पर पड़े हांफ रहे थे।
-
Reply
07-03-2017, 01:06 PM,
#10
RE: Antarvasna sex stories मेरी मस्त दीदी
उधर दीदी बिना हिले डुले हमारी तरफ पीठ किये लेटीं थीं। मैं जानता था कि वह जग रहीं है लेकिन उनकी सूजी और घायल चूत को कम से कम चौबीस घंटे का रेस्ट मिलना बहुत ज़रूरी था। और फिर मेरे लिए रात काटने के लिए सायरा की चूत तो चुदने के लिए तैयार थी ही सो मैंने दीदी को डिस्टर्ब न करना ही मुनासिब समझा।



सायरा अब सीधी होकर किसी नागिन के मानिंद मेरे से चिपकी लेटी थी। जाहिर था कि उसकी चूत की खुजली मेरी जीभ से शाँत नहीं हुई थी और वह अब बिना लंड पिलवाये मानने वाली नहीं थी।

मेरा लंड भी बिना चूतरस पिए कहां शांत होने वाला था सो मैंने बिना ज़्यादा वक़्त गंवाये उसे फ़टाफ़ट चोदने के लिए अपने नीचे दबोच लिया।

"आराम से भैय्या ! मेरी चूत कहीं भागी नहीं जा रही है " सायरा अपनी टाँगे चौड़ी करके मेरी कमर पर लपेटती हुई बोली।

" अब तो बिना चुदे अगर भागना चाहेगी तब भी नहीं भाग पायेगी ……… आज तो तेरी चूत और गांड दोनों में अपना लंड पेलूँगा " मैंने दोनों हाथों से उसकी चूचियों को कस के मसलते हुए कहा।

" हा…… य , अभी तक यही सुना था कि गांड मरवाने में थोडा दर्द ज़रूर होता है लेकिन मज़ा चूत मरवाने से कम नहीं आता , आज ये भी ट्राई करके देखती हूँ "

" मेरे लंड को तो हर टाइट छेद में अन्दर बाहर होने में मज़ा आता है "

" तो फिर करो ना , टाइम क्यों वेस्ट कर रहे हो … अब बस पेल दो भैय्या……… बहुत दिन से मेरी चूत ऐसे ही किसी लंड की चाहत में तड़प रही थी , आज कहीं वो मौका हाथ लगा है "

" चिंता मत कर , मैं केवल चूतों की प्यास बुझाने के लिए ही लुधियाने आया हूँ "

" क्या मतलब ? किसी और की चूत पर भी निगाह है क्या ?"

" अरे ! लुधियाने आकर तो आँख बंद करके भी कमर हिलाओ तो लंड सीधा चूत से टकराता है , मज़ा आ गया लुधियाने में तो "

" फिलहाल तो इस चूत पर ध्यान लगाओ भैय्या , बहुत कुलबुला रही है "

" तो फिर देर किस बात की , चल बन जा घोड़ी .…… मेरा लंड कब मना कर रहा है "

" हाय हाय कैसा काले नाग सा फुंफकार रहा है.…. म्म म्म uuuu आह "

कह कर सायरा ने मेरे लंड के सुपाडे पर एक पप्पी जड़ दी।
-
Reply


Possibly Related Threads...
Thread Author Replies Views Last Post
Star Incest Kahani दीदी और बीबी की टक्कर sexstories 48 100,654 10-20-2019, 06:13 PM
Last Post: Game888
Thumbs Up Desi Sex Kahani रंगीला लाला और ठरकी सेवक sexstories 179 131,683 10-16-2019, 07:27 PM
Last Post: sexstories
Star Antarvasna Sex kahani मायाजाल sexstories 19 12,677 10-16-2019, 01:37 PM
Last Post: sexstories
Star Desi Sex Story रिश्तो पर कालिख sexstories 142 184,968 10-12-2019, 01:13 PM
Last Post: sexstories
  Kamvasna दोहरी ज़िंदगी sexstories 28 30,951 10-11-2019, 01:18 PM
Last Post: sexstories
Star Antarvasna kahani नजर का खोट sexstories 120 334,984 10-10-2019, 10:27 PM
Last Post: lovelylover
  Sex Hindi Kahani बलात्कार sexstories 16 186,906 10-09-2019, 11:01 AM
Last Post: Sulekha
Thumbs Up Desi Porn Kahani ज़िंदगी भी अजीब होती है sexstories 437 218,262 10-07-2019, 01:28 PM
Last Post: sexstories
  XXX Kahani एक भाई ऐसा भी sexstories 64 435,055 10-06-2019, 05:11 PM
Last Post: Yogeshsisfucker
Exclamation Randi ki Kahani एक वेश्या की कहानी sexstories 35 36,253 10-04-2019, 01:01 PM
Last Post: sexstories

Forum Jump:


Users browsing this thread: 1 Guest(s)
This forum uses MyBB addons.

Online porn video at mobile phone


मैंने अपने परिवार की खातिर चुदवायाXX video Hindi bole wala MC lugai Mera Saath saal keAntarvasna havas ki piyasi do kaliyanMut marne ka nantr hindhi vedeoserial actorni rubina dilaik fuck pic sex babaSonakshi ki chudai story sexbabamharitxxxanterwasna saas bhabhi aur nanand ek sath storiesहंड्रेड परसेंट मस्तराम सेक्स नेट कॉमSoya ledij ke Chupke Se Dekhne Wala sexgad tatti aagaya xnxx.comबुब्ज चुसने इमेज्सtv actress shraddha arya nude sex.babamalkin se jarurat hai Jaise ghoda leta hai abhi leta hai janwar ladki ko chalta hai choda chodi video 10 sal se bara Saal wala sex video downloading video downloadingUrdu sexy story Mai Mera gaon family Trisha ki chudai kisax desi chadi utarri fuk vidobollywood porn beauty pooja hagede sexvideis.comWww sote baca or ma ka xxxvideo.com shalini pandey hdsexMom ki boobs dabeye jorsay storybhai bahan xnxx desi 2019maiyमाँ और बहिण का चुत चुदाई का हंगामा कथाBacche ne sex ki goli khakar muut mare 4 sahl ki Daughterssex video bhabhi ke nayi kahaniyanwww.coNsex ke liye lalchati auntymother batayexxxहोंठो को कैसे चोदते हे विडियो दिखाऐtarak meheta madhu bhabi sexbaba.netsex baba story page15KAMKUTTA KAMVSNA antervsna gande gande gallie wala group sexy hindi new khani aur photo imag.भाभियों की बोल बता की chudai कहने का मतलब वॉल्यूम को चोदोsali ka chuchi misai videosFuljhadi mausi sex 16 sal Salउंच आंटी सेक्स स्टोरीland ko jyada kyu chodvas lagta haiमेरी धार्मिक माँ new desibees sex storyboltikahani.com mut mstanpaas m soi orat sex krna cahthi h kese pta kresaumya tandon shubhangi atre lesbian picshot chumma lete pela pelibahu ki zaher nikalne ke bhane se chudai sex story koi. aisi. rundy. dikhai. jo. mard. ko. paise. dekar. sex. karna.please koro ami ar parchinaImandari ki saja sexkahanifati salwar dikhakr bahane se chudayi ki sexy kahani hindi meBABAAWWWXXXsahar ki saxy vidwa akeli badi Bhabi sax kahaniकुवारि बाळ होते समय का फोटोladke gadiya keise gaand marwateಹೇಮಾಳ ತುಲ್ಲುdesi chooti bachchi iporn net tvsexybur jhaat massagenidhi agerwal xxxadult forums indianSexbaba. Com comicsचाची की चुतचुदाई बच्चेदानी तक भतीजे का लंड हिंदी सेक्स स्टोरीज सौ कहानीयाँAaaahhhh mar daloge kya dard indian bhai sex vedioramu kaka ne maa ke bad didi ki chut humach ke fadi सुकसि काहानि ममि बुटुTelugu tv actres sex baba fake storisghar pe khelni ae ladki ki chut mai ugli karke chata hindi story5 saal ki behan ki gand say tatti dekhimom करत होती fuck मुलाने पाहीलेxxx मेहदी सेकसी विडीयो पेजsimran kaur desi52.com fuckLadaki ko mote land se rulaya tait chudaiCondomdakhaCatherine Tresa hot nude 25sex picturesricha.chadda.bara.dudh.bur.naked.sexy BF full HD video movie Chunni daalne walaJyoti ki chut Mar Mar kar Khoon nikal Diye seal todi sexy video xx comGIRL KE CHUCHI KA PHCxxx पानी मे बबीता जी नहाती नगी xaxxDasei 49sexbabi k dood pioraashi khanna nude pto sex hdmom choot ka sawad chataya sex storyBhabhi nahate samay saree uthakar chudbaichodachodi Shari walexxx video HDSaloni ki goli khilakar chudai story